Pakistan economy

Pakistan Finance Minister Muhammad Aurangzeb meeting US Treasury Secretary Scott Bessent in Washington
अमेरिका से पाकिस्तान की 10 अरब डॉलर की बड़ी मांग, ट्रंप सरकार से मांगी 5 साल की आर्थिक मदद

Pakistan-US Relations: आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान ने अमेरिका से 10 अरब डॉलर (करीब 96 हजार करोड़ रुपये) की वित्तीय सहायता मांगी है। यह राशि द्विपक्षीय एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी के तहत मांगी गई है, जिसका उद्देश्य पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना और पाकिस्तानी रुपये को स्थिर रखना है। यह मांग ऐसे समय में सामने आई है जब अमेरिका और ईरान के बीच बढ़े तनाव में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाने की कोशिश की थी। 5 साल के लिए मांगी वित्तीय सहायता रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट को भेजे अनुरोध में 10 अरब डॉलर की सहायता सुविधा पांच वर्षों के लिए उपलब्ध कराने की मांग की है। यदि अमेरिका इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है, तो इससे पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था को बड़ी राहत मिल सकती है। पाकिस्तान को क्या होगा फायदा? अगर यह फंड मिलता है, तो पाकिस्तान को कई आर्थिक लाभ मिल सकते हैं: विदेशी मुद्रा भंडार में बढ़ोतरी होगी। पाकिस्तानी रुपये पर दबाव कम होगा। आयात और बाहरी भुगतान की क्षमता मजबूत होगी। अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थाओं से कर्ज पर निर्भरता घट सकती है। आर्थिक स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी। हालांकि, पाकिस्तान ने यह भी कहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कार्यक्रम के तहत लागू वित्तीय और मौद्रिक सुधारों को जारी रखेगा। स्कॉट बेसेंट से हुई मुलाकात पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब ने वॉशिंगटन में अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट से मुलाकात की। पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय के अनुसार, बैठक में क्षेत्रीय भू-राजनीतिक हालात और उनके पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव पर चर्चा हुई। हालांकि, मंत्रालय के आधिकारिक बयान में 10 अरब डॉलर की सहायता मांग का उल्लेख नहीं किया गया। क्यों अहम है यह मांग? विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से विदेशी मुद्रा संकट, बढ़ते कर्ज और कमजोर आर्थिक वृद्धि जैसी चुनौतियों से जूझ रहा है। ऐसे में अमेरिका से इस स्तर की वित्तीय सहायता मिलने पर उसकी अर्थव्यवस्था को अस्थायी राहत मिल सकती है। हालांकि, अभी तक ट्रंप प्रशासन की ओर से इस मांग पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Fuel station in Pakistan displaying revised petrol and diesel prices from July 22
पाकिस्तान में फिर महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, 22 जुलाई से नई कीमतें लागू; आम लोगों पर बढ़ेगा महंगाई का बोझ

Pakistan Fuel Price Hike: पाकिस्तान सरकार ने एक बार फिर पेट्रोल और हाई-स्पीड डीजल (HSD) की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 22 जुलाई से लागू हो गई हैं। इस फैसले के बाद पेट्रोल 4.93 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और हाई-स्पीड डीजल 7.15 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। बढ़ती ईंधन कीमतों का असर परिवहन, माल ढुलाई और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ने की आशंका है। क्या हैं नई कीमतें? नई कीमतों के लागू होने के बाद पाकिस्तान में: पेट्रोल: 320.73 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर हाई-स्पीड डीजल (HSD): 367.21 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर भारतीय मुद्रा के हिसाब से यह कीमतें लगभग इस प्रकार हैं: ईंधन भारत पाकिस्तान (भारतीय रुपये में लगभग) पेट्रोल ₹102.12/लीटर ₹111.21/लीटर डीजल ₹95.20/लीटर ₹127.33/लीटर अप्रैल के रिकॉर्ड स्तर से अभी भी कम कीमतें हालांकि मौजूदा कीमतें बढ़ी हैं, लेकिन ये इस साल अप्रैल में दर्ज रिकॉर्ड स्तर से अभी भी काफी नीचे हैं। डीजल 3 अप्रैल को बढ़कर 520.35 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गया था। पेट्रोल भी 3 अप्रैल को 458.41 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आने से ईंधन दरों में कमी दर्ज की गई थी। अब रोजाना तय होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव को देखते हुए पाकिस्तान सरकार ने ईंधन मूल्य निर्धारण की नीति में बड़ा बदलाव किया है। पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने घोषणा की है कि अब पेट्रोल और डीजल की कीमतें साप्ताहिक के बजाय रोजाना तय की जाएंगी। सरकार का कहना है कि इससे वैश्विक बाजार के अनुरूप कीमतों में तेजी से बदलाव किया जा सकेगा। डीलर्स एसोसिएशन ने किया विरोध सरकार के इस फैसले का ऑल पाकिस्तान पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने विरोध किया है। एसोसिएशन का कहना है कि रोजाना कीमतें बदलने से कारोबार प्रभावित होगा और उपभोक्ताओं में भ्रम की स्थिति पैदा होगी। संगठन ने इस फैसले के खिलाफ प्रदर्शन की चेतावनी भी दी है। महंगाई पर पड़ेगा सीधा असर विशेषज्ञों का मानना है कि ईंधन महंगा होने से सबसे अधिक असर मध्यम और निम्न आय वर्ग पर पड़ेगा। पेट्रोल महंगा होने से निजी वाहन, मोटरसाइकिल और ऑटो रिक्शा चलाने वालों का खर्च बढ़ेगा। डीजल की कीमत बढ़ने से ट्रक, बस, माल ढुलाई और बिजली उत्पादन की लागत बढ़ेगी। इसका असर खाद्य पदार्थों समेत रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। पाकिस्तान में हर महीने करीब 7 से 8 लाख टन पेट्रोल और डीजल की खपत होती है, इसलिए ईंधन की कीमतों में मामूली बदलाव भी देश की अर्थव्यवस्था और महंगाई पर बड़ा प्रभाव डालता है।  

kalpana जुलाई 22, 2026 0
Foreign Exchange Reserves
पाकिस्तान ने ट्रंप प्रशासन से 10 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता सुविधा मांगी, विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने की कोशिश

इस्लामाबाद, एजेंसियां। आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे पाकिस्तान ने अमेरिका के ट्रंप प्रशासन से 10 अरब डॉलर की एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सपोर्ट फैसिलिटी (Exchange Stabilisation Support Facility) का अनुरोध किया है। यह प्रस्ताव पाकिस्तान के वित्त मंत्री मुहम्मद औरंगज़ेब ने अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट के साथ बातचीत के दौरान रखा। यदि इसे मंजूरी मिलती है तो इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी और रुपये पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती है.   विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने पर जोर   पाकिस्तान सरकार का उद्देश्य इस सुविधा के जरिए अपने विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करना और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में निवेशकों का भरोसा बढ़ाना है। सरकार का मानना है कि इससे अर्थव्यवस्था को स्थिर रखने और आईएमएफ कार्यक्रम के साथ सुधारों को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी।   अमेरिका की ओर से अभी कोई आधिकारिक मंजूरी नहीं   अमेरिकी ट्रेजरी विभाग और पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने इस प्रस्ताव पर सार्वजनिक रूप से कोई टिप्पणी नहीं की है। फिलहाल यह अनुरोध विचाराधीन है और इस पर अंतिम निर्णय अमेरिकी प्रशासन द्वारा लिया जाएगा।   आईएमएफ पर निर्भरता घटाने की कोशिश   विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस व्यवस्था के जरिए आईएमएफ और अन्य बहुपक्षीय संस्थानों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। यदि यह सुविधा मिलती है तो इसे पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय सुरक्षा कवच माना जाएगा।

anjali kumari जुलाई 22, 2026 0
Public buses, trucks and fuel stations in Pakistan as rising petrol and diesel prices push up transport fares and freight costs across the country.
पाकिस्तान में फिर महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, बढ़े बस किराए और माल ढुलाई के खर्च; आम जनता पर बढ़ी महंगाई की मार

Pakistan Fuel Price Hike: पाकिस्तान में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी के बाद महंगाई का दबाव और बढ़ गया है। ईंधन महंगा होने के साथ ही देशभर में सार्वजनिक परिवहन, माल ढुलाई और अन्य परिवहन सेवाओं के किराए भी बढ़ा दिए गए हैं। इसका सीधा असर आम लोगों और कारोबारियों की जेब पर पड़ रहा है। ईंधन महंगा होने से बढ़े ट्रांसपोर्ट के किराए ईरान-अमेरिका तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर पाकिस्तान पर भी पड़ा है। सरकार द्वारा पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ाए जाने के बाद ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने भी किराए में इजाफा कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, अब एक स्टॉप से दूसरे स्टॉप तक का न्यूनतम किराया 50 पाकिस्तानी रुपये (PKR) कर दिया गया है। वहीं माल ढुलाई का खर्च भी काफी बढ़ गया है। कराची से पेशावर तक माल भेजना हुआ महंगा पाकिस्तानी अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, कराची से पेशावर तक सामान ले जाने वाले ट्रेलरों का किराया बढ़कर 7 लाख पाकिस्तानी रुपये तक पहुंच गया है। इससे व्यापारियों की लागत बढ़ने और बाजार में महंगाई और तेज होने की आशंका जताई जा रही है। रावलपिंडी में भी बढ़ा यात्रियों का किराया रावलपिंडी में लोकल ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों ने प्रति यात्री किराए में 20 पाकिस्तानी रुपये की बढ़ोतरी की है। वहीं आसपास के इलाकों में चलने वाली परिवहन सेवाओं ने प्रति यात्री 30 पाकिस्तानी रुपये अतिरिक्त वसूलना शुरू कर दिया है। इसके अलावा कई ट्रांसपोर्ट ऑपरेटर अब यात्रियों के सामान के लिए अलग से शुल्क भी ले रहे हैं। बच्चों से भी लिया जा रहा पूरा किराया नई व्यवस्था के तहत कई बस ऑपरेटरों ने 8 वर्ष या उससे अधिक उम्र के बच्चों से भी पूरा किराया लेना शुरू कर दिया है। वहीं लंबी दूरी की बस सेवाओं में टिकट की कीमत 100 से 250 पाकिस्तानी रुपये प्रति यात्री तक बढ़ा दी गई है। रावलपिंडी से मरी के बीच चलने वाली एसी कोच सेवा का किराया भी बढ़ाकर 700 पाकिस्तानी रुपये कर दिया गया है। रिक्शा और बाइक टैक्सी के किराए भी बढ़े ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का असर स्थानीय परिवहन पर भी दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार— चिंगची रिक्शा चालकों ने किराया बढ़ा दिया है। बाइक टैक्सी और मोटरसाइकिल सेवाओं के किराए में भी वृद्धि हुई है। लोडर रिक्शा संचालकों ने सामान ढुलाई का शुल्क 500 पाकिस्तानी रुपये तक बढ़ा दिया है। महंगाई से बढ़ी आम लोगों की परेशानी पाकिस्तान पहले से ही ऊंची महंगाई, बढ़ती जीवन-यापन लागत और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में पेट्रोल-डीजल की नई कीमतों के बाद परिवहन और माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की वस्तुओं के दाम भी बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में पाकिस्तान में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।  

Deepshikha जुलाई 13, 2026 0
Rising tensions over the Indus Waters Treaty spark concerns for Pakistan's economy and regional stability.
सिंधु जल समझौते पर बढ़ा तनाव, पाकिस्तान ने दी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी; अर्थव्यवस्था पर गहराया संकट

नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि यदि उनके देश की जल सुरक्षा को खतरा महसूस हुआ, तो पाकिस्तान सैन्य कार्रवाई जैसे विकल्पों पर विचार कर सकता है। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब पाकिस्तान पहले से ही गंभीर जल संकट और आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। भारत द्वारा पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल समझौते को स्थगित किए जाने के फैसले का असर पाकिस्तान के कृषि और औद्योगिक क्षेत्रों पर दिखाई देने लगा है। क्या है विवाद की वजह? अप्रैल 2025 में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत ने 1960 के सिंधु जल समझौते को निलंबित कर दिया था। भारत ने स्पष्ट किया था कि जब तक सीमा पार आतंकवाद पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह फैसला लागू रहेगा। हाल ही में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल के उस बयान के बाद पाकिस्तान की चिंता और बढ़ गई, जिसमें संकेत दिया गया था कि आने वाले वर्षों में पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी के उपयोग को लेकर भारत अपनी रणनीति मजबूत कर सकता है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर क्यों है असर? सिंधु नदी प्रणाली पाकिस्तान के लिए जीवनरेखा मानी जाती है। देश की लगभग 80 प्रतिशत खेती इसी जल स्रोत पर निर्भर है। कृषि क्षेत्र— पाकिस्तान की GDP में लगभग 23 प्रतिशत योगदान देता है। कुल कार्यबल के 40 प्रतिशत से अधिक लोगों को रोजगार देता है। ग्रामीण आबादी के बड़े हिस्से की आजीविका का आधार है। कपास और टेक्सटाइल उद्योग पर बढ़ी चिंता पाकिस्तान का टेक्सटाइल उद्योग उसकी अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है। देश के कुल निर्यात का लगभग आधा हिस्सा इसी सेक्टर से आता है और इससे अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा अर्जित होती है। कपास की खेती के लिए सिंधु नदी का पानी बेहद महत्वपूर्ण है। यदि पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो इसका असर कपास उत्पादन और उससे जुड़े पूरे टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ सकता है। बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव विशेषज्ञों का मानना है कि जल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे दक्षिण एशिया में संवेदनशील विषय हैं और दोनों देशों के बीच किसी भी प्रकार का तनाव क्षेत्रीय स्थिरता को प्रभावित कर सकता है। ऐसे मामलों में कूटनीतिक संवाद और अंतरराष्ट्रीय समझौतों की भूमिका अहम मानी जाती है।  

surbhi जून 22, 2026 0
US President Donald Trump speaks as tensions rise over Iran and the strategic Strait of Hormuz during talks in Switzerland.
'होर्मुज बंद हुआ तो अपने देश नहीं लौट पाओगे', ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव

  वॉशिंगटन/बर्गेनस्टॉक: स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण वार्ता के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी सैन्य चेतावनी दी है। ट्रंप ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) को बंद करने की कोशिश की, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे। ट्रंप के इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है। ईरान को ट्रंप की सीधी चेतावनी फॉक्स न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरानी प्रतिनिधिमंडल को चेतावनी देते हुए कहा, "अगर तुम होर्मुज बंद करने की कोशिश करोगे, तो अपने देश तक भी वापस नहीं पहुंच पाओगे।" उनके इस बयान को ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे सख्त चेतावनियों में से एक माना जा रहा है। ट्रंप ने संकेत दिया कि अमेरिका किसी भी कीमत पर वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार को बाधित नहीं होने देगा। होर्मुज जलडमरूमध्य पर अमेरिका का सख्त रुख ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता विफल हो जाती है, तो वाशिंगटन होर्मुज जलडमरूमध्य पर सीधे नियंत्रण स्थापित करने जैसे विकल्पों पर भी विचार कर सकता है। उन्होंने कहा, "जरूरत पड़ी तो हम होर्मुज का नियंत्रण अपने हाथ में ले सकते हैं।" ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ऐसी स्थिति में अमेरिका वहां से गुजरने वाले जहाजों पर टैक्स या टोल लगाने का कदम उठा सकता है। जहाजों पर 20 प्रतिशत तक टोल लगाने की चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि यदि ईरान समझौते के रास्ते पर नहीं आता है, तो होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर उनके तेल कार्गो के मूल्य का लगभग 20 प्रतिशत तक टोल लगाया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसा कदम वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर व्यापक प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के कुल समुद्री तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। लेबनान और हिज्बुल्लाह का भी किया जिक्र ट्रंप ने ईरान से लेबनान में सक्रिय संगठन हिज्बुल्लाह पर नियंत्रण रखने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय संघर्षों को बढ़ाने वाली गतिविधियों पर रोक लगनी चाहिए और ईरान को अपने सहयोगी समूहों की गतिविधियों को नियंत्रित करना होगा। स्विट्जरलैंड में जारी है अहम वार्ता अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत, क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों पर महत्वपूर्ण बातचीत चल रही है। हालांकि, ट्रंप के ताजा बयान के बाद इन वार्ताओं के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। विश्लेषकों का मानना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ट्रंप की चेतावनी केवल ईरान पर दबाव बनाने का प्रयास नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा मार्गों पर अमेरिकी रणनीतिक पकड़ को मजबूत करने का भी संकेत है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Oil drilling rig at Bobi Deep-1 site in Sindh where Pakistan discovered new oil and gas reserves.
पाकिस्तान को सिंध में मिला नया तेल-गैस भंडार, लेकिन क्या इससे ऊर्जा संकट दूर होगा?

  पाकिस्तान की सरकारी ऊर्जा कंपनी ओजीडीसीएल (OGDCL) ने सिंध प्रांत के संघर जिले में तेल और प्राकृतिक गैस के नए भंडार की खोज का दावा किया है। कंपनी के अनुसार, बॉबी डीप-1 (Bobi Deep-1) नामक खोजी कुएं से प्रतिदिन लगभग 2,000 बैरल कच्चे तेल और 1.1 मिलियन स्टैंडर्ड क्यूबिक फीट (MMSCFD) गैस उत्पादन की क्षमता सामने आई है। इस खोज को पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र के लिए सकारात्मक माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि देश की कुल जरूरतों के मुकाबले यह उत्पादन अभी सीमित है। सिंध के संघर जिले में हुई खोज ओजीडीसीएल ने बताया कि यह खोज सिंध के संघर जिले स्थित बॉबी और धमराकी माइनिंग लीज क्षेत्र में की गई है। कंपनी ने लोअर गोरू फॉर्मेशन के मैसिव सैंड गैप में परीक्षण के दौरान हाइड्रोकार्बन की मौजूदगी की पुष्टि की। 3 जून को पाकिस्तान स्टॉक एक्सचेंज और लंदन स्टॉक एक्सचेंज को भेजी गई जानकारी में कंपनी ने कहा कि केस्ड-होल ड्रिल स्टेम टेस्ट (DST) के जरिए व्यावसायिक स्तर पर तेल और गैस भंडार की पुष्टि हुई है। कुएं से कितना उत्पादन मिला? ओजीडीसीएल के मुताबिक: प्रतिदिन लगभग 2,000 बैरल कच्चे तेल का उत्पादन संभव है। करीब 1.1 MMSCFD प्राकृतिक गैस मिलने का अनुमान है। कुएं की ड्रिलिंग 3,305 मीटर की गहराई तक की गई। परीक्षण के दौरान 1,050 PSI वेलहेड फ्लोइंग प्रेशर दर्ज किया गया। कंपनी का कहना है कि पूरी परियोजना उसकी तकनीकी और परिचालन क्षमता के बल पर सफल हुई है। इलाके में पहली बड़ी हाइड्रोकार्बन खोज कंपनी के अनुसार, बॉबी और धमराकी माइनिंग लीज क्षेत्र में मैसिव सैंड प्ले से यह पहली महत्वपूर्ण हाइड्रोकार्बन खोज है। इससे आसपास की समान भूगर्भीय संरचनाओं में भी तेल और गैस मिलने की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। ओजीडीसीएल को उम्मीद है कि इस खोज के बाद क्षेत्र में नए अन्वेषण कार्यों को गति मिलेगी और भविष्य में अतिरिक्त भंडार मिलने की संभावना बढ़ेगी। तकनीकी चुनौतियों के बावजूद मिली सफलता परियोजना के दौरान कई भूगर्भीय और तकनीकी चुनौतियां सामने आई थीं, जिसके कारण कुछ समय के लिए ड्रिलिंग कार्य प्रभावित भी हुआ। बाद में ओजीडीसीएल के विशेषज्ञों ने सिंध विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर प्योर एंड एप्लाइड जियोलॉजी के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर विस्तृत अध्ययन किया और तकनीकी समस्याओं का समाधान निकाला। इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाया गया। क्या पाकिस्तान के ऊर्जा संकट में आएगी बड़ी राहत? इस खोज को पाकिस्तान के लिए सकारात्मक खबर जरूर माना जा रहा है, लेकिन इसका वास्तविक प्रभाव सीमित हो सकता है। पाकिस्तान की दैनिक तेल खपत 4 लाख बैरल से अधिक है। देश अपनी तेल जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत आयात करता है। ऐसे में प्रतिदिन 2,000 बैरल अतिरिक्त उत्पादन कुल खपत का लगभग 0.5 प्रतिशत ही है। यानी यह खोज पाकिस्तान के ऊर्जा आयात बिल में कुछ राहत दे सकती है, लेकिन अकेले इसके दम पर देश का ऊर्जा संकट खत्म होना संभव नहीं है। ड्रिल स्टेम टेस्ट क्या होता है? ड्रिल स्टेम टेस्ट (DST) तेल और गैस उद्योग में इस्तेमाल होने वाली एक महत्वपूर्ण परीक्षण प्रक्रिया है। इसके जरिए किसी भूगर्भीय संरचना के दबाव, पारगम्यता और उत्पादन क्षमता का मूल्यांकन किया जाता है। इस परीक्षण से यह पता चलता है कि किसी कुएं में व्यावसायिक स्तर पर तेल या गैस उत्पादन की संभावना है या नहीं। इससे कंपनियों को बड़े निवेश से पहले संसाधनों की वास्तविक क्षमता का आकलन करने में मदद मिलती है। आगे क्या? ओजीडीसीएल का मानना है कि यह खोज केवल एक शुरुआत हो सकती है। यदि आसपास के क्षेत्रों में भी समान भूगर्भीय संरचनाओं से तेल और गैस मिलती है, तो पाकिस्तान की घरेलू ऊर्जा क्षमता में धीरे-धीरे सुधार हो सकता है। फिलहाल यह खोज पाकिस्तान के लिए एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन देश की विशाल ऊर्जा जरूरतों को देखते हुए इसे बड़े समाधान के बजाय एक सीमित लेकिन उपयोगी उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।  

Deepshikha जून 6, 2026 0
Fuel price boards and long queues at petrol stations amid South Asia’s growing oil crisis.
ऑयल संकट से पड़ोसी देशों में हाहाकार, भारत में सीमित बढ़ोतरी से राहत

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान पर हमलों के बाद वैश्विक तेल संकट गहराता जा रहा है। होर्मुज खाड़ी में बाधाओं और सप्लाई चेन प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसका असर सबसे ज्यादा दक्षिण एशियाई देशों पर देखने को मिल रहा है, जहां पेट्रोल-डीजल की कीमतों ने आम लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हालांकि, पड़ोसी देशों की तुलना में India में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत सीमित रही है। पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल के दाम रिकॉर्ड स्तर पर Pakistan में हालात सबसे ज्यादा गंभीर बताए जा रहे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में वहां पेट्रोल करीब 64 प्रतिशत और डीजल 61 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। फिलहाल पाकिस्तान में पेट्रोल की कीमत 458.86 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर और डीजल 520.42 पाकिस्तानी रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। बढ़ती कीमतों के कारण वहां आम लोगों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया है। स्थिति को संभालने के लिए पाकिस्तान सरकार ने चार दिन का वर्किंग वीक लागू किया है और कई स्कूलों को भी बंद करना पड़ा है। नेपाल में दक्षिण एशिया का सबसे महंगा पेट्रोल Nepal भी गंभीर ईंधन संकट का सामना कर रहा है। नेपाल अब दक्षिण एशिया में सबसे महंगा पेट्रोल बेचने वाला देश बन गया है। जनवरी 2026 में जहां पेट्रोल 137 नेपाली रुपये प्रति लीटर था, वहीं अब इसकी कीमत बढ़कर 219 नेपाली रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। नेपाल पूरी तरह आयातित तेल पर निर्भर है, जिसके चलते परिवहन और रोजमर्रा के सामान की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी हुई है। श्रीलंका में लागू हुई ईंधन राशनिंग Sri Lanka में भी हालात सामान्य नहीं हैं। वहां ऑटो डीजल की कीमतों में 26 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सरकार को हालात नियंत्रित करने के लिए ईंधन राशनिंग लागू करनी पड़ी है। कई सार्वजनिक कार्यक्रमों और स्कूल गतिविधियों पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं ताकि तेल की खपत कम की जा सके। बांग्लादेश में भी बढ़ा दबाव Bangladesh ने शुरुआत में सब्सिडी के जरिए कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की, लेकिन लगातार बढ़ते बोझ के बाद सरकार को पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाने पड़े। देश में कई जगह पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग रही हैं और कुछ जिलों में ईंधन की कमी की खबरें भी सामने आई हैं। भारत में सीमित बढ़ोतरी से राहत इन हालातों के बीच भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी अपेक्षाकृत कम रही है। 15 मई 2026 तक पेट्रोल में करीब 3.14 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3.11 रुपये प्रति लीटर की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों का मानना है that केंद्र सरकार और सरकारी तेल कंपनियों ने वैश्विक कीमतों के बड़े झटके का असर काफी हद तक खुद संभाला, जिससे आम जनता पर दबाव सीमित रहा। होर्मुज संकट का वैश्विक असर होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में गिना जाता है। दुनिया के करीब 20 प्रतिशत कच्चे तेल की सप्लाई इसी रास्ते से होती है। ऐसे में पश्चिम एशिया में जारी तनाव का असर केवल एशिया ही नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Saudi Arabia and Pakistan officials shaking hands after announcing $3 billion financial support to boost reserves.
सऊदी अरब से पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की मदद, सही समय पर मिला बड़ा सहारा

  इस्लामाबाद: पाकिस्तान को आर्थिक मोर्चे पर बड़ी राहत मिली है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को अतिरिक्त 3 अरब डॉलर के डिपॉजिट देने का ऐलान किया है। यह रकम अगले सप्ताह तक मिलने की उम्मीद है और इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूती मिलेगी। वित्त मंत्री ने की पुष्टि पाकिस्तान के वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगज़ेब ने वॉशिंगटन डीसी में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान इस मदद की पुष्टि की। उन्होंने बताया कि: सऊदी अरब 3 अरब डॉलर का नया डिपॉजिट देगा पहले से मौजूद 5 अरब डॉलर की राशि को भी 2028 तक बढ़ाया जाएगा इससे देश की आर्थिक स्थिति को स्थिर करने में मदद मिलेगी UAE के पैसे लौटाने के बाद आई राहत हाल ही में संयुक्त अरब अमीरात ने अपने डिपॉजिट वापस ले लिए थे। इससे पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ा सरकार ने इसे सामान्य प्रक्रिया बताया लेकिन बाजार में चिंता बढ़ गई थी ऐसे में सऊदी अरब की मदद को “टाइमली सपोर्ट” माना जा रहा है। कूटनीतिक हलचल के बीच फैसला यह आर्थिक सहायता ऐसे समय पर आई है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा है। हाल ही में: शहबाज शरीफ ने सऊदी नेतृत्व से मुलाकात की शांति वार्ता से पहले दोनों देशों में बातचीत हुई इसके तुरंत बाद आर्थिक सहायता का ऐलान हुआ सैन्य सहयोग भी बढ़ा सऊदी अरब और पाकिस्तान के बीच रक्षा सहयोग भी मजबूत होता दिख रहा है। पाकिस्तान का सैन्य दस्ता सऊदी अरब पहुंचा शाह अब्दुलअज़ीज़ एयर बेस पर तैनाती वायुसेना के लड़ाकू और सपोर्ट विमान शामिल पाकिस्तान के लिए क्यों अहम? पाकिस्तान इस समय आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार सीमित आयात पर दबाव कर्ज का बोझ ऐसे में 3 अरब डॉलर की यह मदद: रुपये को स्थिर करने में मदद करेगी बाजार में भरोसा बढ़ाएगी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर क्रेडिबिलिटी मजबूत करेगी आगे क्या? यह कदम सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, बल्कि क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है। फिलहाल, सऊदी अरब की यह मदद पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है, लेकिन लंबे समय तक स्थिरता के लिए उसे आर्थिक सुधारों पर भी जोर देना होगा।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Pakistan and Saudi Arabia flags symbolizing financial ties after UAE loan repayment decision.
पाकिस्तान का यूएई कर्ज़ लौटाने का फैसला: सऊदी अरब से क्या है कनेक्शन?

इस्लामाबाद/वॉशिंगटन: पाकिस्तान ने United Arab Emirates (यूएई) को करीब 3.5 अरब डॉलर के डिपॉज़िट्स और कर्ज़ लौटाने का फैसला किया है। इस कदम के बाद पाकिस्तान अब वित्तीय स्थिरता बनाए रखने के लिए Saudi Arabia सहित अन्य विकल्पों पर विचार कर रहा है। क्या बोले वित्त मंत्री? पाकिस्तान के वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb ने कहा कि: विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत करने के लिए सभी विकल्प खुले हैं इसमें सऊदी अरब से कर्ज़, यूरो बॉन्ड और अन्य वित्तीय स्रोत शामिल हैं यूएई को कर्ज़ क्यों लौटाया? यूएई ने पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर डिपॉज़िट और करीब 1.5 अरब डॉलर कर्ज़ दिया था यह डिपॉज़िट 2018 से बार-बार “रोल ओवर” होता रहा हाल ही में इसे शॉर्ट-टर्म रोलओवर में बदला गया अब इसकी अवधि पूरी होने पर पाकिस्तान इसे लौटा रहा है विशेषज्ञों के मुताबिक, यह कदम: उच्च ब्याज दरों से बचने के लिए उठाया गया पूरी तरह “सामान्य वित्तीय लेन-देन” का हिस्सा है सऊदी अरब से क्या कनेक्शन? यूएई को रकम लौटाने के बाद पाकिस्तान: Saudi Arabia से नए कर्ज़ की संभावना देख रहा है पहले ही सऊदी वित्त मंत्री और पाक प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif की मुलाकात हो चुकी है साथ ही, सऊदी अरब में पाकिस्तानी सैन्य गतिविधियां भी बढ़ी हैं, जो रणनीतिक रिश्तों को दर्शाती हैं मिडिल ईस्ट तनाव का असर ईरान-अमेरिका-इजरायल तनाव के बीच पाकिस्तान ने: रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाने की जरूरत बताई अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) की ओर बढ़ने का संकेत दिया विदेशी मुद्रा भंडार की स्थिति कुल भंडार: करीब 21 अरब डॉलर स्टेट बैंक के पास: ~16 अरब डॉलर इसमें से 12 अरब डॉलर चीन, सऊदी और यूएई के डिपॉज़िट्स यूएई को रकम लौटाने से दबाव बढ़ेगा, लेकिन: International Monetary Fund (IMF) से 1.2 अरब डॉलर मिलने की उम्मीद अन्य कर्ज़ और बॉन्ड्स से राहत मिल सकती है आगे की रणनीति पाकिस्तान सरकार: इस साल Euro Bonds और Sukuk Bonds जारी करने की योजना में है वाणिज्यिक बैंकों और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से फंड जुटाने पर विचार कर रही है यूएई को कर्ज़ लौटाना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा वित्तीय कदम है, लेकिन इसके साथ ही सऊदी अरब और अन्य स्रोतों से फंड जुटाने की रणनीति भी तैयार है। मिडिल ईस्ट के तनाव के बीच पाकिस्तान अपनी अर्थव्यवस्था को संतुलित रखने के लिए नए रास्ते तलाश रहा है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Pakistan receives financial aid from Saudi Arabia and Qatar amid UAE debt repayment pressure and IMF crisis
पाकिस्तान को सऊदी-कतर से ₹46,500 करोड़ की मदद, UAE का कर्ज चुकाने की तैयारी

पाकिस्तान को बड़ी आर्थिक राहत मिलने जा रही है। सऊदी अरब और कतर मिलकर उसे 5 अरब डॉलर (करीब ₹46,500 करोड़) की वित्तीय मदद देंगे। यह सहायता ऐसे समय पर मिल रही है, जब पाकिस्तान पर UAE का 3.5 अरब डॉलर (करीब ₹29,000 करोड़) का कर्ज चुकाने का दबाव है। सिर्फ 11 दिन में चुकाना है कर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को 23 अप्रैल तक UAE का पूरा कर्ज चुकाना है। तय शेड्यूल के अनुसार 11, 17 और 23 अप्रैल को किस्तों में भुगतान किया जाएगा। यानी देश के पास कर्ज चुकाने के लिए बहुत कम समय बचा है। विदेशी मुद्रा संकट में राहत पाकिस्तान की कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति को देखते हुए यह मदद बेहद अहम मानी जा रही है। देश को अप्रैल में कुल करीब 4.8 अरब डॉलर का भुगतान करना है, जिसमें एक बड़ा इंटरनेशनल बॉन्ड भी शामिल है। IMF की शर्तें भी अहम International Monetary Fund (IMF) ने पाकिस्तान के लिए 7 अरब डॉलर का 3 साल का राहत पैकेज शुरू किया है। इसके तहत शर्त रखी गई है कि बड़े कर्जदाता–जैसे चीन, सऊदी अरब और UAE–अपना पैसा कम से कम 3 साल तक पाकिस्तान में ही बनाए रखें। UAE की नई नीति से बढ़ा दबाव हाल ही में UAE ने कर्ज रोलओवर पॉलिसी में बदलाव कर शॉर्ट-टर्म एक्सटेंशन लागू किया है, जिससे पाकिस्तान पर जल्दी भुगतान का दबाव बढ़ गया। इसके बाद पाकिस्तान ने तय समय में कर्ज चुकाने का फैसला लिया। सऊदी-पाक रिश्ते और मजबूत सऊदी अरब पहले भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहा है और 5 अरब डॉलर तक के डिपॉजिट को आगे बढ़ा चुका है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। IMF मीटिंग के लिए वॉशिंगटन दौरा पाकिस्तान के वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb 13–18 अप्रैल तक Washington, D.C. में होने वाली IMF और वर्ल्ड बैंक की स्प्रिंग मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान वे कई देशों और निवेशकों के साथ अहम बैठकों में शामिल होंगे।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
UAE and Pakistan flags with financial crisis concept showing loan repayment pressure and economic tension.
UAE ने मांगे कर्ज के पैसे, पाकिस्तान पर बढ़ा आर्थिक दबाव; बयानबाजी से बढ़ा विवाद

पाकिस्तान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच आर्थिक और कूटनीतिक तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। UAE द्वारा कर्ज की अवधि बढ़ाने से इनकार करने के बाद पाकिस्तान को अब 3.5 अरब डॉलर (करीब हजारों करोड़ रुपये) लौटाने पड़ रहे हैं, जिससे उसकी पहले से कमजोर अर्थव्यवस्था पर और दबाव बढ़ गया है। कर्ज लौटाने को मजबूर पाकिस्तान पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि वह UAE से लिया गया 3.5 बिलियन डॉलर का मैच्योर लोन वापस करेगा। यह रकम पाकिस्तान की आर्थिक स्थिरता बनाए रखने के लिए UAE ने जमा कराई थी। हालांकि, पाकिस्तान को उम्मीद थी कि UAE इस लोन को आगे बढ़ा देगा (रोल ओवर), लेकिन ऐसा नहीं हुआ। विदेशी मुद्रा भंडार पर संकट पाकिस्तान के पास 27 मार्च तक 16.4 बिलियन डॉलर का विदेशी मुद्रा भंडार था इसमें से 3.5 बिलियन डॉलर UAE को लौटाने होंगे अप्रैल में 1.3 बिलियन डॉलर का बॉन्ड पेमेंट भी बाकी है ऐसे में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और गंभीर हो सकती है। पाक नेता का विवादित बयान इस मुद्दे पर पाकिस्तान के पूर्व मंत्री मुशाहिद हुसैन का बयान विवादों में आ गया है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा- पाकिस्तान ने पैसे लौटाने का सही फैसला किया क्योंकि UAE को इसकी ज्यादा जरूरत है UAE कई अंतरराष्ट्रीय मामलों में उलझा हुआ है, इसलिए उसे पैसों की जरूरत है ‘अखंड भारत’ वाला बयान भी चर्चा में मुशाहिद हुसैन ने बयान देते हुए UAE को लेकर विवादित टिप्पणी की- उन्होंने कहा कि UAE को ध्यान रखना चाहिए कि कहीं वह “अखंड भारत” का हिस्सा न बन जाए, क्योंकि वहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं। इस बयान को कूटनीतिक मर्यादाओं के खिलाफ माना जा रहा है। क्यों बढ़ा तनाव? UAE का सख्त रुख और कर्ज वापसी की मांग पाकिस्तान की कमजोर आर्थिक स्थिति नेताओं की तीखी बयानबाजी इन सब कारणों से दोनों देशों के संबंधों में तनाव की स्थिति बनती दिख रही है।  

surbhi अप्रैल 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana जुलाई 21, 2026 0