पाकिस्तान को बड़ी आर्थिक राहत मिलने जा रही है। सऊदी अरब और कतर मिलकर उसे 5 अरब डॉलर (करीब ₹46,500 करोड़) की वित्तीय मदद देंगे। यह सहायता ऐसे समय पर मिल रही है, जब पाकिस्तान पर UAE का 3.5 अरब डॉलर (करीब ₹29,000 करोड़) का कर्ज चुकाने का दबाव है।
रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को 23 अप्रैल तक UAE का पूरा कर्ज चुकाना है। तय शेड्यूल के अनुसार 11, 17 और 23 अप्रैल को किस्तों में भुगतान किया जाएगा। यानी देश के पास कर्ज चुकाने के लिए बहुत कम समय बचा है।
पाकिस्तान की कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति को देखते हुए यह मदद बेहद अहम मानी जा रही है। देश को अप्रैल में कुल करीब 4.8 अरब डॉलर का भुगतान करना है, जिसमें एक बड़ा इंटरनेशनल बॉन्ड भी शामिल है।
International Monetary Fund (IMF) ने पाकिस्तान के लिए 7 अरब डॉलर का 3 साल का राहत पैकेज शुरू किया है। इसके तहत शर्त रखी गई है कि बड़े कर्जदाता–जैसे चीन, सऊदी अरब और UAE–अपना पैसा कम से कम 3 साल तक पाकिस्तान में ही बनाए रखें।
हाल ही में UAE ने कर्ज रोलओवर पॉलिसी में बदलाव कर शॉर्ट-टर्म एक्सटेंशन लागू किया है, जिससे पाकिस्तान पर जल्दी भुगतान का दबाव बढ़ गया। इसके बाद पाकिस्तान ने तय समय में कर्ज चुकाने का फैसला लिया।
सऊदी अरब पहले भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहा है और 5 अरब डॉलर तक के डिपॉजिट को आगे बढ़ा चुका है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है।
पाकिस्तान के वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb 13–18 अप्रैल तक Washington, D.C. में होने वाली IMF और वर्ल्ड बैंक की स्प्रिंग मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान वे कई देशों और निवेशकों के साथ अहम बैठकों में शामिल होंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
ढाका, एजेंसियां। बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने भारत के सामने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की भारत की धरती से राजनीतिक गतिविधियों को लेकर अपनी चिंता जताई है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि भारत से इस तरह की राजनीतिक गतिविधियां जारी रहने से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो सकते हैं। भारत के सामने बांग्लादेश ने रखी आपत्ति बांग्लादेश की ओर से भारत को यह संदेश ऐसे समय दिया गया है, जब शेख हसीना भारत में रह रही हैं और उनके बयानों तथा राजनीतिक गतिविधियों को लेकर ढाका में लगातार आपत्ति जताई जा रही है. बांग्लादेश सरकार का मानना है कि भारत से दिए जाने वाले राजनीतिक बयान उसके घरेलू राजनीतिक माहौल को प्रभावित कर सकते हैं। शेख हसीना के भारत में रहने का मुद्दा शेख हसीना अगस्त 2024 में बांग्लादेश में बड़े राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद भारत आ गई थीं। इसके बाद से उनके भारत में रहने को लेकर दोनों देशों के बीच राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा जारी है। ढाका की ओर से पहले भी भारत से शेख हसीना को वापस भेजने की मांग की जा चुकी है। द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है असर बांग्लादेश सरकार ने संकेत दिया है कि भारत की जमीन से होने वाली राजनीतिक गतिविधियां दोनों देशों के बीच संबंधों के लिए संवेदनशील मुद्दा बन सकती हैं। भारत और बांग्लादेश के बीच व्यापार, सीमा प्रबंधन, सुरक्षा, जल बंटवारे और क्षेत्रीय संपर्क जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे में शेख हसीना का मुद्दा दोनों देशों के संबंधों में अतिरिक्त तनाव पैदा कर सकता है। ढाका की नजर भारत के रुख पर अब बांग्लादेश की नजर भारत की प्रतिक्रिया पर है। शेख हसीना को लेकर दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद मतभेदों के बीच ढाका का यह ताजा संदेश भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मुजफ्फराबाद, एजेंसियां। पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) ने पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर (AJK) विधानसभा चुनाव में साधारण बहुमत हासिल कर लिया है। इसके साथ ही नवाज शरीफ की पार्टी के लिए AJK में अगली सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने PML-N अध्यक्ष नवाज शरीफ और पार्टी के विजयी उम्मीदवारों को जीत की बधाई दी है। 45 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत PML-N ने चुनाव के दूसरे चरण में भी मजबूत प्रदर्शन किया। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार और राजनीतिक मामलों के सलाहकार राणा सनाउल्लाह के मुताबिक, पार्टी ने 45 सदस्यीय AJK विधानसभा में साधारण बहुमत हासिल कर लिया है। इस जीत के बाद PML-N अब क्षेत्र में सरकार बनाने की स्थिति में पहुंच गई है। नवाज शरीफ को शहबाज शरीफ ने दी बधाई प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने PML-N के अध्यक्ष नवाज शरीफ और चुनाव में सफल उम्मीदवारों को बधाई दी। पार्टी नेतृत्व ने चुनावी जीत को जनता के समर्थन और अपनी सरकार के कामकाज से जोड़कर पेश किया है। चुनाव के दौरान विवाद और हिंसा भी रही हालांकि, AJK चुनाव पूरी तरह विवादों से मुक्त नहीं रहा। चुनाव से पहले और मतदान के दौरान प्रदर्शन, हिंसा और बहिष्कार की घटनाएं सामने आईं। चुनावी प्रक्रिया को लेकर विपक्ष की ओर से धांधली के आरोप भी लगाए गए हैं, जिन्हें पाकिस्तान सरकार ने खारिज किया है। अब सरकार गठन पर नजर PML-N के साधारण बहुमत हासिल करने के बाद अब AJK में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया पर नजर है। चुनाव परिणामों से क्षेत्र की राजनीति में PML-N की स्थिति मजबूत हुई है और पार्टी जल्द ही सरकार गठन की दिशा में आगे बढ़ सकती है।
एथेंस। यूरोप में जारी भीषण जंगल की आग के बीच ग्रीस की राजधानी एथेंस के पास रविवार को बड़ा हादसा हो गया। पश्चिमी अटिका क्षेत्र में आग बुझाने के अभियान के दौरान दो फायरफाइटिंग हेलीकॉप्टर हवा में ही आपस में टकरा गए। टक्कर के बाद एक हेलीकॉप्टर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें सवार दो कर्मियों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य को सुरक्षित बचा लिया गया। ग्रीस के राष्ट्रीय प्रसारक ईआरटी के अनुसार, हादसा पसाथा तटीय क्षेत्र के पास हुआ, जहां दोनों बेल हेलीकॉप्टर जंगल की आग बुझाने के मिशन पर तैनात थे। मृतकों में एक ग्रीस और एक डेनमार्क का नागरिक शामिल है, जबकि बचाए गए कर्मियों में एक ग्रीस और एक ब्रिटेन का नागरिक है। तेज हवाओं ने बढ़ाई चुनौती अधिकारियों के मुताबिक, तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल रही थी, जिससे राहत और बचाव अभियान प्रभावित हुआ। कई बार हेलीकॉप्टर समुद्र से पानी भरने तक नहीं पहुंच सके। आग पश्चिमी अटिका के जंगलों से होते हुए मेगारा शहर के औद्योगिक क्षेत्र तक फैल गई, जिसके बाद कई गांवों को खाली कराने के आदेश जारी किए गए। प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता पोर्टो जर्मेनो तटीय इलाके को लेकर बनी हुई है। हजारों लोगों को सुरक्षित निकाला गया आग सबसे पहले शुक्रवार को एगियोस वासिलियोस इलाके में लगी थी और देखते ही देखते आसपास के पहाड़ी जंगलों तक फैल गई। शुक्रवार को 254 लोगों और शनिवार को 12 लोगों को समुद्र के रास्ते सुरक्षित निकाला गया। धुएं और आग के कारण कई सड़कें भी बंद करनी पड़ीं। इससे पहले इसी सप्ताह ग्रीस में आग बुझाने के दौरान तीन दमकलकर्मियों की भी मौत हो चुकी है। फ्रांस और स्पेन भी आग की चपेट में यूरोप के अन्य देशों में भी जंगल की आग का संकट बना हुआ है। फ्रांस के गिरोंद क्षेत्र में पिछले 10 दिनों में करीब 420 वर्ग किलोमीटर जंगल जल चुके हैं, जिसके चलते लगभग 2.24 लाख लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। वहीं, वार क्षेत्र में भी आग के कारण 2,500 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। दूसरी ओर, स्पेन में आग की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है, लेकिन दमकलकर्मी अब भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। जलवायु परिवर्तन बना बड़ी वजह विशेषज्ञों का कहना है कि बढ़ते तापमान, लंबे सूखे और तेज हवाओं के कारण यूरोप में जंगल की आग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि मानवजनित जलवायु परिवर्तन ने ऐसी आपदाओं की आवृत्ति और गंभीरता दोनों को बढ़ा दिया है। यूरोपीय पर्यावरण एजेंसी के अनुसार, 2025 यूरोप के इतिहास में जंगल की आग के लिहाज से सबसे विनाशकारी वर्षों में से एक रहा, जिसमें 10 हजार वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र आग की चपेट में आ गया था।