दुबई, एजेंसियां। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और अमेरिका-ईरान के बीच जारी तनाव कम करने के प्रयास तेज हो गए हैं। मध्यस्थ देशों की कोशिशों से बातचीत में प्रगति के संकेत मिले हैं, लेकिन अभी तक किसी अंतिम समझौते पर सहमति नहीं बनी है। अमेरिका और ईरान के बीच सीधे बातचीत होने की भी पुष्टि नहीं हुई है। होर्मुज में सीमित संख्या में जहाजों की आवाजाही ताजा शिप-ट्रैकिंग आंकड़ों के मुताबिक मंगलवार को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आठ जहाज गुजरे, जिनमें पांच टैंकर और तीन बल्क कैरियर शामिल थे। संघर्ष से पहले इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से सामान्य तौर पर रोजाना करीब 130 से 140 जहाज गुजरते थे। ऐसे में मौजूदा आवाजाही अभी सामान्य स्तर से काफी कम है। मध्यस्थता के जरिए समाधान की कोशिश कतर सहित क्षेत्र के मध्यस्थ देश अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम कराने तथा होर्मुज में सुरक्षित नौवहन बहाल करने की कोशिश कर रहे हैं। कतर ने बातचीत में प्रगति के संकेत दिए हैं। हालांकि, ईरान की ओर से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे को खारिज किया गया है कि अमेरिका और ईरान के बीच सीधे बातचीत चल रही है। अमेरिकी अधिकारियों की ओर से होर्मुज को दोबारा खोलने को लेकर समझौते के करीब पहुंचने की बात कही गई है, लेकिन कुछ अहम मुद्दों पर अभी मतभेद बने हुए हैं। तेल और वैश्विक व्यापार पर नजर होर्मुज दुनिया के महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में शामिल है। यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों की आपूर्ति पर असर पड़ने की आशंका रहती है। ताजा मध्यस्थता प्रयासों में प्रगति की खबर के बाद तेल बाजार में भी नरमी देखने को मिली है。 फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि मध्यस्थता प्रयासों के जरिए सुरक्षित और नियमित समुद्री आवाजाही कब तक बहाल हो पाती है। जब तक अंतिम समझौता नहीं होता, तब तक होर्मुज की स्थिति पर वैश्विक बाजार और शिपिंग कंपनियों की नजर बनी रहेगी।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसी महीने तुर्किये में आयोजित NATO शिखर सम्मेलन से लौटते समय अपना विमान बदल दिया था। अब सामने आई मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि यह फैसला ईरान और उसके समर्थित प्रॉक्सी समूहों से मिले विश्वसनीय सुरक्षा खतरे के बाद लिया गया। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को राष्ट्रपति के विमान को निशाना बनाए जाने की आशंका की जानकारी मिली थी, जिसके बाद सीक्रेट सर्विस ने तत्काल सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करते हुए ट्रंप को नए विमान की जगह पुराने Air Force One से रवाना होने की सलाह दी। मिसाइल हमले की आशंका के बाद बदली गई रणनीति रिपोर्टों के अनुसार, ट्रंप तुर्किये के अंकारा में NATO सम्मेलन में कतर की ओर से उपहार में मिले नए बोइंग 747-8 विमान से पहुंचे थे। हालांकि वापसी से पहले अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों को सूचना मिली कि ईरान समर्थित समूह राष्ट्रपति के विमान पर मिसाइल हमला करने की योजना बना सकते हैं। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जोखिम को देखते हुए ट्रंप को पुराने Air Force One से रवाना कराया। बाद में ब्रिटेन के आरएएफ मिल्डेनहॉल एयरबेस पर उन्होंने फिर नए विमान में सवार होकर अमेरिका की यात्रा पूरी की। व्हाइट हाउस ने सुरक्षा अपग्रेड की पुष्टि की व्हाइट हाउस ने बाद में बताया कि कतर से मिले नए Air Force One में अतिरिक्त सुरक्षा उन्नयन (अपग्रेड) किए जाएंगे और कुछ समय के लिए ट्रंप पुराने Air Force One का उपयोग करेंगे। हालांकि ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा कि विमान बदलने का फैसला सुरक्षा कारणों से नहीं था, लेकिन उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ईरान से खतरे की आशंका बनी हुई है। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था और नए विमान की सुरक्षा क्षमताओं को लेकर अमेरिका में नई बहस शुरू हो गई है।
तेहरान, एजेंसियां। पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। ईरान द्वारा दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की घोषणा के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए ईरान के 140 सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी कार्रवाई में मिसाइल लॉन्च साइट, ड्रोन बेस, रडार सिस्टम, कमांड सेंटर और नौसैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया। होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से बढ़ी वैश्विक चिंता ईरान ने आरोप लगाया कि अमेरिकी हस्तक्षेप और विदेशी जहाजों की गतिविधियों के कारण उसने सुरक्षा कारणों से होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद किया है। यह समुद्री मार्ग दुनिया के करीब 20% कच्चे तेल और बड़ी मात्रा में LNG की आपूर्ति का प्रमुख रास्ता है। इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर गंभीर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका का जवाबी हमला, 140 ठिकाने बने निशाना अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ तीन दिनों तक चले अभियान में करीब 140 सैन्य लक्ष्यों को निशाना बनाया। हमलों में वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन लॉन्चर, तटीय रडार, कमांड एवं कंट्रोल नेटवर्क और कई सैन्य ठिकानों को नष्ट करने का दावा किया गया है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और ईरान के हमलों का जवाब देने के लिए की गई। ईरान का पलटवार, खाड़ी देशों में बढ़ा तनाव अमेरिकी हमलों के बाद ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइल और ड्रोन दागे। कई जगह धमाकों की खबरें सामने आईं और क्षेत्र में एयर डिफेंस सिस्टम सक्रिय कर दिए गए। इस घटनाक्रम के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में युद्ध का खतरा और गहरा गया है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील कर रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर रविवार से 5 से 15 जुलाई तक छह देशों की महत्वपूर्ण कूटनीतिक यात्रा पर रवाना हो गए हैं। इस दौरे के दौरान वह कतर, बहरीन, कुवैत, ओमान, अमेरिका और बेल्जियम का दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना, पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति पर चर्चा करना और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2028-29 कार्यकाल के लिए भारत के अभियान को गति देना है। खाड़ी देशों के साथ रणनीतिक साझेदारी पर जोर जयशंकर 5 से 10 जुलाई के बीच कतर, बहरीन, कुवैत और ओमान में अपने समकक्षों और शीर्ष नेतृत्व से मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार, निवेश, भारतीय प्रवासी समुदाय और पश्चिम एशिया के ताजा घटनाक्रम प्रमुख एजेंडा रहेंगे। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब क्षेत्र में भू-राजनीतिक हालात तेजी से बदल रहे हैं। UNSC अभियान और भारत-EU सहयोग पर रहेगा फोकस खाड़ी देशों के दौरे के बाद विदेश मंत्री 13 जुलाई को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के 2028-29 के अस्थायी सदस्य पद के लिए भारत के आधिकारिक अभियान की शुरुआत करेंगे। इसके बाद वह ब्रुसेल्स में भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (India-EU Trade and Technology Council) की तीसरी मंत्रिस्तरीय बैठक में हिस्सा लेंगे। भारत की वैश्विक कूटनीति को मिलेगी नई गति विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता को और मजबूत करेगी। पश्चिम एशिया के प्रमुख साझेदार देशों के साथ संबंधों को नई दिशा देने के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ के मंचों पर भारत की भूमिका को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है।
वॉशिंगटन: अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पाकिस्तान के प्रति नरम रुख और "हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं" वाले बयान ने अमेरिका की घरेलू राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। वेंस के बयान के बाद दो रिपब्लिकन सीनेटरों ने पाकिस्तान और कतर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए दोनों देशों पर आतंकवादियों को पनाह देने और चरमपंथी संगठनों को समर्थन देने के आरोप लगाए हैं। रिक स्कॉट बोले- पाकिस्तान और कतर का आतंकियों को शरण देने का इतिहास Rick Scott ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा कि दुनिया को अब यह समझ जाना चाहिए कि अमेरिका के असली सहयोगी कौन हैं। उन्होंने लिखा, "कतर और पाकिस्तान का आतंकवादियों को पनाह देने का लंबा इतिहास रहा है। दोनों देश सार्थक शांति स्थापित करने के बजाय ईरान के दशकों पुराने आतंकी नेटवर्क को बढ़ावा देने में अधिक रुचि रखते हैं।" स्कॉट ने यह भी कहा कि ईरान के साथ ऐसा समझौता संभव है जो सभी पक्षों के हित में हो, लेकिन किसी भी स्थिति में तेहरान को परमाणु हथियार विकसित करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। जेडी वेंस के बयान से बढ़ा विवाद विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब JD Vance ने स्विट्जरलैंड में अमेरिका, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत के दौरान कहा था कि "हम पाकिस्तान से प्यार करते हैं।" वेंस उस समय ईरान के साथ संभावित शांति समझौते की तकनीकी और कूटनीतिक बारीकियों पर चर्चा कर रहे थे। उनके इस बयान के बाद रिपब्लिकन पार्टी के भीतर ही पाकिस्तान को लेकर मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। टिम शीही ने दिलाई ओसामा बिन लादेन की याद Tim Sheehy ने भी पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि अमेरिका को उसके अतीत को नहीं भूलना चाहिए। फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, "हमें यह याद रखना चाहिए कि पाकिस्तान ने एक दशक तक ओसामा बिन लादेन को अपने यहां छिपाकर रखा था।" शीही ने यह भी आरोप लगाया कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने अतीत में ऐसे तत्वों को समर्थन दिया, जिन्होंने अमेरिकी हितों के खिलाफ काम किया। UAE, इजरायल और सऊदी अरब को बातचीत में शामिल करने की मांग सीनेटर शीही ने कहा कि यदि पाकिस्तान और कतर को मध्यस्थ की भूमिका दी जा रही है, तो अमेरिका को अपने पारंपरिक सहयोगियों को भी वार्ता प्रक्रिया में शामिल करना चाहिए। उन्होंने कहा, "संयुक्त अरब अमीरात, इजरायल और सऊदी अरब मध्य पूर्व में अमेरिका के सबसे विश्वसनीय सहयोगी हैं। किसी भी शांति प्रक्रिया में उनकी भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए।" कतर पर भी लगाए गंभीर आरोप शीही ने कतर पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वह वर्षों से विभिन्न चरमपंथी संगठनों के लिए वित्तीय नेटवर्क और मनी लॉन्ड्रिंग का केंद्र रहा है। उन्होंने कहा, "यह मान लेना कि पाकिस्तान और कतर पूरी तरह निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाएंगे, वास्तविकता से दूर है।" अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर छिड़ी बहस रिपब्लिकन सांसदों के बयानों से साफ है कि अमेरिका में पाकिस्तान की भूमिका को लेकर पुराने सवाल एक बार फिर चर्चा के केंद्र में आ गए हैं। जेडी वेंस के हालिया बयान के बाद वॉशिंगटन में यह बहस तेज हो गई है कि मध्य पूर्व की नई कूटनीतिक पहल में पाकिस्तान और कतर की भूमिका कितनी प्रभावी और निष्पक्ष मानी जा सकती है।
बर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड): मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में स्थायी शांति बहाल करने के उद्देश्य से स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक में अमेरिका और ईरान के बीच अहम शांति वार्ता शुरू हो गई है। इस बातचीत में पाकिस्तान और कतर मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव, परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जा रही है। बैठक के दौरान अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने वार्ता को "ऐतिहासिक अवसर" करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका, ईरान के साथ अपने संबंधों को नई और सकारात्मक दिशा देने के लिए तैयार है। ईरान के सामने अमेरिका की बड़ी शर्त जेडी वेंस ने स्पष्ट किया कि अमेरिका, ईरान के साथ संबंध सामान्य करने और दोस्ती का नया अध्याय शुरू करने को तैयार है, लेकिन इसके लिए तेहरान को दो महत्वपूर्ण शर्तों को स्थायी रूप से स्वीकार करना होगा— क्षेत्र में अस्थिरता और संघर्ष फैलाने वाली नीतियों का त्याग। परमाणु हथियार हासिल करने की महत्वाकांक्षा को हमेशा के लिए छोड़ना। वेंस ने कहा कि यदि ईरान इन दोनों मुद्दों पर सकारात्मक और स्थायी कदम उठाता है, तो वाशिंगटन उसके साथ रिश्तों को पूरी तरह बदलने के लिए तैयार है। होर्मुज जलडमरूमध्य और परमाणु मुद्दे पर प्रगति का दावा अमेरिकी उपराष्ट्रपति ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करने जैसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक लक्ष्यों की दिशा में पहले ही महत्वपूर्ण प्रगति हो चुकी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह वार्ता मध्य पूर्व में स्थिरता और वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए नए रास्ते खोलेगी। पाकिस्तान की मध्यस्थता की सराहना जेडी वेंस ने इस शांति वार्ता को संभव बनाने में पाकिस्तान की भूमिका की खुलकर सराहना की। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर की कूटनीतिक कोशिशों ने अमेरिका और ईरान को बातचीत की मेज तक लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। वेंस ने आसिम मुनीर को "एक महान सैन्य नेता और कुशल राजनयिक" बताया। भारतीय पत्नी और पाकिस्तानी जनरल का किया जिक्र हल्के-फुल्के अंदाज में जेडी वेंस ने कहा कि उनकी जिंदगी में दो बेहद महत्वपूर्ण लोग हैं—एक उनकी भारतीय मूल की पत्नी उषा वेंस और दूसरे पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों में उनकी जनरल मुनीर के साथ लगातार बातचीत हुई है और क्षेत्रीय शांति स्थापित करने के प्रयासों में उनका सहयोग महत्वपूर्ण रहा है। मिडिल ईस्ट में शांति और ऊर्जा सुरक्षा पर नजर वेंस ने उम्मीद जताई कि स्विट्जरलैंड में जारी यह वार्ता मध्य पूर्व में तनाव कम करने, तेल और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने और वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगी। विश्लेषकों का मानना है कि यदि अमेरिका और ईरान के बीच यह वार्ता सफल रहती है, तो न केवल क्षेत्रीय संघर्ष कम हो सकते हैं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय कूटनीति पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
बर्गेनस्टॉक (स्विट्जरलैंड): अमेरिका और ईरान के बीच रविवार (21 जून) को स्विट्जरलैंड में शुरू हुई बहुप्रतीक्षित वार्ता की शुरुआत ही तनावपूर्ण माहौल में हुई। बातचीत शुरू होने से पहले ईरानी प्रतिनिधिमंडल ने अमेरिकी अधिकारियों के साथ प्रस्तावित संयुक्त फोटो सेशन और हाथ मिलाने के कार्यक्रम में शामिल होने से इनकार कर दिया। इसके कुछ देर बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई की नई चेतावनी पर नाराजगी जताते हुए ईरानी प्रतिनिधिमंडल बैठक स्थल से बाहर निकल गया। इस घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा तेज हो गई है। बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में हुई पहली बैठक अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का पहला दौर स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में आयोजित किया गया। बैठक में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधिमंडल शामिल हुए। पाकिस्तान और कतर इस पूरी प्रक्रिया में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं। यह वार्ता हाल ही में हुए 'इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन' (MoU) के तहत शुरू हुई है, जिसके अनुसार अगले 60 दिनों तक दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत होगी। इसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों में राहत और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा की जानी है। हाथ मिलाने और फोटो सेशन से ईरान का इनकार ईरानी समाचार एजेंसी के अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और आयोजकों ने बातचीत शुरू होने से पहले दोनों पक्षों के नेताओं के बीच हाथ मिलाने और संयुक्त फोटो सेशन की व्यवस्था की थी। ईरान के मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर गालिबाफ तथा विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इसमें हिस्सा लेने से इनकार कर दिया। दोनों नेता निर्धारित फोटो सेशन से पहले ही बैठक कक्ष से बाहर निकल गए। कैमरे में कैद हुआ पूरा घटनाक्रम सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कमरे से बाहर निकलने से ठीक पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से संक्षिप्त बातचीत की। इसके बाद वह अचानक मुड़े और पूरे ईरानी प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक कक्ष से बाहर चले गए। यह पूरा घटनाक्रम कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जिससे वार्ता की शुरुआत में ही दोनों पक्षों के बीच मौजूद अविश्वास और तनाव उजागर हो गया। ट्रंप की चेतावनी से बढ़ी नाराजगी सूत्रों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से सैन्य कार्रवाई संबंधी हालिया बयान ने ईरानी पक्ष की नाराजगी बढ़ा दी। ईरान का मानना है कि कूटनीतिक बातचीत के दौरान इस तरह की सार्वजनिक चेतावनियां वार्ता के माहौल को प्रभावित करती हैं और आपसी भरोसे को कमजोर करती हैं। आगे की बातचीत पर दुनिया की नजर शुरुआती तनाव के बावजूद दोनों पक्षों के बीच वार्ता प्रक्रिया पूरी तरह बंद नहीं हुई है। मध्यस्थ देशों पाकिस्तान और कतर की कोशिश है कि बातचीत का अगला दौर सकारात्मक माहौल में आगे बढ़े। विशेषज्ञों का मानना है कि स्विट्जरलैंड में शुरू हुई यह वार्ता पश्चिम एशिया की राजनीति, ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा बाजारों के भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकती है।
नई दिल्ली: महिला टी20 वर्ल्ड कप 2026 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली हार ने भारतीय टीम की सेमीफाइनल की राह मुश्किल कर दी है। पाकिस्तान और नीदरलैंड्स को हराकर शानदार शुरुआत करने वाली टीम इंडिया तीसरे मुकाबले में प्रोटियाज टीम के सामने टिक नहीं सकी। अब सिर्फ एक हार ने ग्रुप-1 के समीकरण पूरी तरह बदल दिए हैं। ग्रुप-1 में कैसी है स्थिति? ग्रुप-1 में ऑस्ट्रेलिया लगातार तीन जीत के साथ शीर्ष पर है। भारत ने तीन मैचों में दो जीत हासिल की हैं और फिलहाल दूसरे स्थान पर मौजूद है। दक्षिण अफ्रीका और बांग्लादेश के अंक समान हैं, लेकिन बेहतर नेट रन रेट के कारण अफ्रीकी टीम को बढ़त हासिल है। वहीं पाकिस्तान और नीदरलैंड्स की लगातार तीन हार के बाद उनकी नॉकआउट की उम्मीदें लगभग खत्म हो चुकी हैं। भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता? आईसीसी के नियमों के अनुसार प्रत्येक ग्रुप से सिर्फ दो टीमें ही नॉकआउट चरण में पहुंचेंगी। भारत को अब अपने बचे हुए मुकाबले बांग्लादेश और ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ खेलने हैं। अगर भारतीय टीम बांग्लादेश को हराने में सफल रहती है लेकिन ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार जाती है, तो उसके कुल 6 अंक होंगे। दूसरी ओर दक्षिण अफ्रीका के सामने बांग्लादेश और नीदरलैंड्स जैसी अपेक्षाकृत कमजोर टीमें हैं। यदि प्रोटियाज टीम दोनों मुकाबले जीत लेती है, तो वह 8 अंकों के साथ सेमीफाइनल में जगह बना सकती है और भारत बाहर हो सकता है। हालांकि अगर ऑस्ट्रेलिया अपने आगामी मैचों में हारती है या अन्य परिणाम भारत के पक्ष में जाते हैं, तो टीम इंडिया के लिए उम्मीदें बनी रह सकती हैं। दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मैच का हाल भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 159 रन का लक्ष्य रखा था। जवाब में दक्षिण अफ्रीका ने अनुभवी बल्लेबाज मारिजाम काप की शानदार 81 रन की पारी की बदौलत लक्ष्य को 5 गेंद शेष रहते और 6 विकेट से हासिल कर लिया। मैच के दौरान राधा यादव ने मारिजाम काप के दो अहम कैच छोड़े, जब वह 27 और 66 रन के निजी स्कोर पर थीं। यही चूक अंत में भारतीय टीम पर भारी पड़ गई। अब टीम इंडिया के लिए हर मुकाबला करो या मरो जैसा बन गया है और सेमीफाइनल की उम्मीदों को जिंदा रखने के लिए अगले मैचों में जीत बेहद जरूरी होगी।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में अमेरिका और ईरान के बीच दो दिनों तक चली उच्चस्तरीय वार्ता का पहला दौर सकारात्मक माहौल में संपन्न हुआ। पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में हुई इस बैठक में दोनों देशों ने 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए एक रोडमैप तैयार करने पर सहमति जताई। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और परमाणु कार्यक्रम जैसे संवेदनशील मुद्दों के बीच हुई इस बैठक को कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन अहम मुद्दों पर बनी सहमति वार्ता में दोनों पक्षों ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का फैसला लिया, जो पूरे समझौता प्रक्रिया की निगरानी करेगी। साथ ही परमाणु कार्यक्रम, प्रतिबंधों, निगरानी तंत्र और विवाद समाधान जैसे विषयों पर अलग-अलग कार्य समूह बनाए जाएंगे। तकनीकी स्तर की वार्ता तुरंत शुरू करने पर भी सहमति बनी है, जो पूरे सप्ताह स्विट्जरलैंड में जारी रहेगी। होर्मुज और तेल आपूर्ति पर विशेष चर्चा बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों ने समुद्री मार्ग पर किसी भी तरह की गलतफहमी या सैन्य टकराव से बचने के लिए सीधी संचार व्यवस्था स्थापित करने पर सहमति जताई। इसके अलावा वैश्विक तेल आपूर्ति और कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ रहे प्रभाव पर भी विस्तार से चर्चा हुई। लेबनान में संघर्षविराम बनाए रखने पर जोर लेबनान में युद्धविराम को प्रभावी बनाए रखने के लिए ‘डी-कॉन्फ्लिक्शन सेल’ बनाने का निर्णय लिया गया। इस तंत्र में लेबनान के साथ कतर और पाकिस्तान भी समन्वयक की भूमिका निभाएंगे। हालांकि इस्राइल और हिजबुल्ला इस समझौते का हिस्सा नहीं हैं। कूटनीतिक समाधान की दिशा में बढ़े कदम वार्ता में शामिल सभी पक्षों ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और कूटनीतिक संवाद जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अगले 60 दिनों में तय रोडमैप के अनुसार प्रगति होती है, तो परमाणु समझौते, क्षेत्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों जैसे लंबे समय से लंबित मुद्दों के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण सफलता मिल सकती है।
पाकिस्तान को बड़ी आर्थिक राहत मिलने जा रही है। सऊदी अरब और कतर मिलकर उसे 5 अरब डॉलर (करीब ₹46,500 करोड़) की वित्तीय मदद देंगे। यह सहायता ऐसे समय पर मिल रही है, जब पाकिस्तान पर UAE का 3.5 अरब डॉलर (करीब ₹29,000 करोड़) का कर्ज चुकाने का दबाव है। सिर्फ 11 दिन में चुकाना है कर्ज रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान को 23 अप्रैल तक UAE का पूरा कर्ज चुकाना है। तय शेड्यूल के अनुसार 11, 17 और 23 अप्रैल को किस्तों में भुगतान किया जाएगा। यानी देश के पास कर्ज चुकाने के लिए बहुत कम समय बचा है। विदेशी मुद्रा संकट में राहत पाकिस्तान की कमजोर विदेशी मुद्रा स्थिति को देखते हुए यह मदद बेहद अहम मानी जा रही है। देश को अप्रैल में कुल करीब 4.8 अरब डॉलर का भुगतान करना है, जिसमें एक बड़ा इंटरनेशनल बॉन्ड भी शामिल है। IMF की शर्तें भी अहम International Monetary Fund (IMF) ने पाकिस्तान के लिए 7 अरब डॉलर का 3 साल का राहत पैकेज शुरू किया है। इसके तहत शर्त रखी गई है कि बड़े कर्जदाता–जैसे चीन, सऊदी अरब और UAE–अपना पैसा कम से कम 3 साल तक पाकिस्तान में ही बनाए रखें। UAE की नई नीति से बढ़ा दबाव हाल ही में UAE ने कर्ज रोलओवर पॉलिसी में बदलाव कर शॉर्ट-टर्म एक्सटेंशन लागू किया है, जिससे पाकिस्तान पर जल्दी भुगतान का दबाव बढ़ गया। इसके बाद पाकिस्तान ने तय समय में कर्ज चुकाने का फैसला लिया। सऊदी-पाक रिश्ते और मजबूत सऊदी अरब पहले भी पाकिस्तान को आर्थिक मदद देता रहा है और 5 अरब डॉलर तक के डिपॉजिट को आगे बढ़ा चुका है। दोनों देशों के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। IMF मीटिंग के लिए वॉशिंगटन दौरा पाकिस्तान के वित्त मंत्री Muhammad Aurangzeb 13–18 अप्रैल तक Washington, D.C. में होने वाली IMF और वर्ल्ड बैंक की स्प्रिंग मीटिंग में हिस्सा ले रहे हैं। इस दौरान वे कई देशों और निवेशकों के साथ अहम बैठकों में शामिल होंगे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।