Parimal Nathwani

Parimal Nathwani
कौन हैं कांग्रेस को पटखनी देने वाले परिमल नथवाणी? जानिए मुकेश अंबानी के 'राइट हैंड' की कहानी

रांची। झारखंड में 2 सीटों के लिए हुए राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रहे कयासों का बाजार अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रहे परिमल नथवाणी ने एक बार फिर जीत का सेहरा पहना है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि परिमल नाथवाणी कौन हैं, जिन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हरा दिया? क्या वे सिर्फ एक अच्छे राजनीतिज्ञ हैं या फिर एक बड़े बिजनेसमैन? अगर हम उनके करियर पर नजर डालें, तो वे एक शानदार ऑलराउंडर की तरह नजर आते हैं, जिन्होंने हर क्षेत्र में अपना बड़ा योगदान दिया है। दरअसल, वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड यानी RIL में कॉर्पोरेट अफेयर्स (Corporate Affairs) के डायरेक्टर हैं। रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी के वे बेहद करीबी और उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माने जाते हैं। रिलायंस के कई बड़े प्रोजेक्ट्स, खासकर गुजरात के जामनगर में बनी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के जमीनी काम को संभालने में इनकी मुख्य भूमिका रही है। लगातार तीन बार पहुंचे हैं राज्यसभा परिमल नथवाणी न केवल बिजनेस मैन हैं, बल्कि राजनीति के भी शानदार खिलाड़ी हैं। यही वजह है कि वे लंबे समय तक राज्यसभा से सांसद भी रहे हैं। उनकी खास बात ये है कि वे हर दल के लोगों के साथ में अच्छा तालमेल बनाकर के रखते हैं। यही कारण है कि वे झारखंड से ही लगातार दो बार राज्यसभा पहुंचे थे। साल 2008 में वे पहली बार और फिर 2014 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे, जिसमें उन्हें सभी प्रमुख दलों मसलन जेएमएम, भाजपा और कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। केवल झारखंड से ही नहीं, बल्कि वे आंध्र प्रदेश से भी राज्यसभा जा चुके हैं। साल 2020 में वे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे। क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में भी बनाई है पहचान राजनीति और बिजनेस के अलावा परिमल नथवाणी का खेल प्रशासन में भी बड़ा नाम है। वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के पूर्व उपाध्यक्ष (Vice President) रह चुके हैं। अहमदाबाद के विश्व प्रसिद्ध ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ (मोटेरा स्टेडियम) के पुनर्निर्माण और उसे दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाने के प्रोजेक्ट में उनका बहुत बड़ा योगदान था। वन्यजीव संरक्षण के लिए भी करते हैं काम परिमल नथवाणी अपने करियर में वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ा काम किये हुए हैं। जानकारी के मुताबिक गुजरात के गिर जंगलों में पाए जाने वाले एशियाई शेरों (Asiatic Lions) के संरक्षण के लिए भी वे काफी काम करते हैं। वे गिर राष्ट्रीय उद्यान के विकास और शेरों की सुरक्षा को लेकर अक्सर आवाज उठाते रहते हैं।

anjali kumari जून 19, 2026 0
Rajya Sabha election 2026
Rajya Sabha election 2026: परिमल नाथवानी की धमाकेदार जीत, विधानसभा में गूंजे ‘जय श्रीराम’ के नारे

रांची। झारखंड राज्यसभा चुनाव में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। तमाम राजनीतिक जोड़-घटाव और कयासों को धता बताते हुए निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने शानदार जीत दर्ज की है। नाथवाणी की इस जीत के साथ ही एनडीए खेमे में जश्न का माहौल है, जबकि सत्तारूढ़ गठबंधन को करारा झटका लगा है। ‘जय श्रीराम’ के नारे लगे जैसे ही परिमल नाथवानी की जीत की आधिकारिक घोषणा हुई, विधानसभा परिसर ‘जय जगन्नाथ’ और ‘जय श्रीराम’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा। एनडीए विधायकों ने एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर इस जीत का जश्न मनाया। इस कड़े मुकाबले में जेएमएम उम्मीदवार को जहां 30 वोट मिले, वहीं परिमल नाथवानी ने 28 वोटों के साथ बाजी मार ली। हालांकि उन्हें कुल 30 वोट मिले थे, लेकिन इनमें से दो इनवेलिड करार दिये गये। संख्या बल के इस खेल में नाथवानी को मिले क्रॉस वोटिंग के समर्थन ने नतीजों को पूरी तरह बदल कर रख दिया। ‘विकास’ और ‘अंतरात्मा’ की हुई जीत: नीरा यादव इस चौंकाने वाली जीत पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा नेता और पूर्व मंत्री नीरा यादव ने विपक्ष पर बड़ा तंज कसा। उन्होंने कहा कि जनता और उनके प्रतिनिधि अब सिर्फ और सिर्फ विकास में विश्वास करते हैं। यह किसी पार्टी विशेष की नहीं, बल्कि विकास की सोच की जीत है। यही कारण है कि कई विधायकों ने दलगत राजनीति से ऊपर उठकर अपनी ‘अंतरात्मा की आवाज’ सुनी और नाथवानी के पक्ष में मतदान किया। क्या है इसके सियासी मायने? इस चुनाव के नतीजों ने साफ कर दिया है, कि झारखंड की सियासत में पर्दे के पीछे की पटकथा कुछ और ही लिखी जा रही थी। जेएमएम सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद अपने गठबंधन के कुनबे को पूरी तरह एकजुट रखने में नाकाम रही। वहीं, नाथवानी की जीत ने यह साबित कर दिया कि झारखंड में विकास के एजेंडे और सही रणनीतिक घेराबंदी के आगे सत्ता का रसूख भी फीका पड़ सकता है।

anjali kumari जून 18, 2026 0
Rajya Sabha election results
Big Breaking: राज्यसभा चुनाव :बैद्यनाथ राम और परिमल नथवाणी जीते

रांची। झारखंड में हुए राज्यसभा चुनाव के नतीजे घोषित हो गए हैं, जिसमें भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी ने ऐतिहासिक जीत हासिल की है। इस चुनाव में कुल दो सीटों के लिए मतदान हुआ था, जहां एक सीट पर बैजनाथ राम की जीत पहले ही तय मानी जा रही थी, जबकि दूसरी सीट पर कड़ा मुकाबला देखने को मिला।   परिमल नाथवाणी और प्रणव झा के बीच सीधी टक्कर थी दूसरी सीट पर परिमल नाथवाणी और प्रणव झा के बीच सीधी टक्कर थी, जिसमें नाथवाणी ने बढ़त बनाते हुए जीत दर्ज की। चुनाव में सभी 81 विधायकों ने मतदान किया। अंतिम चरण में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने वोट डाला, जबकि इससे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मतदान किया। मतगणना के अनुसार परिमल नाथवाणी को 30 वोट मिले, जिनमें 2 वोट अवैध घोषित हुए। परिमल नथवाणी  की जीत को देखकर लग रहा कि अगर क्रॉस  वोटिंग नहीं होती तो उनका जीतना  मुश्किल था। इधर प्रणव झा को 20 वोट प्राप्त हुए, जबकि बैजनाथ राम को 29 वोट मिले। चुनाव परिणाम के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। बता दे  नामांकन से ही यह चुनाव चर्चा में था और नाथवाणी लगातार अपनी जीत का दावा कर रहे थे। उन्होंने कहा था कि झारखंड से उनका पुराना जुड़ाव है और राज्य के विकास में उनका योगदान रहा है। इस जीत के साथ राज्यसभा की एक सीट पर एनडीए समर्थित उम्मीदवार का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखा है।

anjali kumari जून 18, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Election
राज्यसभा चुनावः वोटिंग संपन्न, दोनों पक्ष कर रहे जीत का दावा

रांची। झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए हो रही वोटिंग खत्म हो गई। अंतिम वोट झामुमो नेता और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने डाला। वहीं, उनसे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मतदान किया। सभी 81 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया और अब नतीजों का इंतजार है। मतगणना शाम 5 बजे से होगी, जबकि 7 बजे तक नतीजे घोषित किए जाने की संभावना है। एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी और झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। हम 100 फीसदी जीतेंगे पूर्व मंत्री बैजनाथ राम ने विधानसभा परिसर में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि मुझे पूरा भरोसा है और हम 100 फीसदी जीतेंगे। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन के दोनों उम्मीदवार जीत रहे हैं। बैजनाथ राम ने कहा कि मुझे 30 वोट मिलेंगे और हमारी जीत पक्की है। बैजनाथ राम ने कहा कि एनडीए चाहे जो भी दावा करे, लेकिन उनके पास जरूरी संख्या नहीं है।  बीजेपी कर रही जीत का दावा इस बीच वोटिंग के बाद बीजेपी के वरीय विधायक सीपी सिंह ने कहा कि जीत का आत्मविश्वास इतना ज्यादा है कि आप कल्पना नहीं कर सकते। उम्मीद पर ही तो दुनिया कायम है। सीपी सिंह ने कहा कि उम्मीद के बिना तो कोई जिंदा भी नहीं रह सकता है। वोटिंग के बाद पूर्व मंत्री भानुप्रताप शाही ने कहा कि झारखंड के विकास के लिए हमने परिमल नाथवानी की जीत पक्की करने का फैसला किया है। भानुप्रताप शाही ने दावा किया कि परिमल नाथवानी को कम से कम 36 वोट तो मिल ही रहे हैं।  परिमल नाथवानी ने भी किया जीत का दावा इस बीच परिमल नाथवानी ने भी अपनी जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि मैं जीतूंगा। मुझे सभी विधायकों पर विश्वास है। यदि मौका मिला तो मैं निश्चित रूप से झारखंड की सेवा करूंगा। क्या उन्हें कांग्रेस विधायकों का समर्थन प्राप्त है, मीडियाकर्मियों के इस सवाल पर परिमल नाथवानी ने कहा कि मुझे सभी का समर्थन प्राप्त है।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Parimal Nathwani 's Son
राज्यसभा चुनाव : परिमल नाथवानी के बेटे पहुंचे मतदान केंद्र

रांची।  राज्यसभा चुनाव सुबह नौ बजे से जारी है। जहां एनडीए और इंडी गठबंधन ने मतदान पूर्ण कर लिया है। वहीं, परिमल नाथवानी के बेटे धनराज नाथवानी विधानसभा पहुंचे। राज्यसभा चुनाव तीन उम्मीदवारों के बीच हो रहा है। जिसमें निर्दलीय भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी, कांग्रेस के पीके झा और झामुमो के बैजनाथ राम शामिल है। मतगणना शाम पांच बजे से होगी।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Candidate
बस से विधानसभा पहुंचे एनडीए विधायक, कहा-जीत पक्की

रांची। राज्यसभा की दो सीटों के लिये झारखंड विधानसभा में मतदान हो रहा है। जहां इंडी गठबंधन दल के विधायक सुबह नौ बजे ही विधानसभा पहुंचे। वहीं, एनडीए विधायक भी एक साथ बस में सवार होकर विधानसभा पहुंचे। एनडीए विधायक निर्दलीय परिमल नाथवानी को समर्थन दे रहे है। परिमल नाथवानी पहले ही विधानसभा पहुंच गये है। बता दें भाजपा के सभी विधायक रेडिसन ब्लू होटल में रूके थे। जहां से सभी बस से एक साथ विधानसभा पहुंचे। जीत का किया दावा इस दौरान मीडिया से बात करते हुए विधायक रागिनी सिंह ने कहा कि एनडीए परिमल नाथवानी के जीत के लिये आश्वास्त है। पूर्वी जमशेदपुर की विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि हमारे आंकड़े सुरक्षित है। वहीं, धनबाद विधायक राज सिन्हा ने कहा कि हमलोग अभी से बधाई दे रहे हैं कि जीत हमारी होगी। जदयू विधायक सरयू राय ने कहा कि मेरा वोट सुरक्षित है और मैंने कहीं पर ध्यान नहीं दिया है।  सुबह 9 बजे से मतदान जारी राज्यसभा चुनाव के लिये मतदान सुबह नौ बजे से शुरू हो गया है, जो शाम चार बजे तक चलेगा। इसके बाद शाम 5 बजे से  मतगणना होगी।  3 उम्मीदवार मैदान में राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार है। जिनमें कांग्रेस के पीके झा, झामुमो से वैद्यनाथ राम और निर्दलीय भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी है। चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी और इंडिया गठबंधन के उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर है।    पोलिंग एजेंट के नाम चुनाव में कांग्रेस के पोलिंग एजेंट के राजू, झामुमो के विनोद पांडे और सुदिव्य सोनू है। वहीं, भाजपा के पोलिंग एजेंट नवीन जायसवाल और अमर बाउरी है। राजद के भोला यादव है। सभी विधायकों को अपने अपने पोलिंग एजेंट को दिखाकर ही वोट देंगे। 

abhishek singh जून 18, 2026 0
MDA MLAs
राज्यसभा चुनावः एनडीए के सभी विधायकों ने डाल दिया वोट

रांची। राज्यसभा चुनाव में सभी एनडीए विधायकों ने मतदान कर लिया है। विधानसभा के कमरा नंबर 42 में मतदान हो रहा है। सबसे पहले विधायक प्रदीप प्रसाद और विधायक सीपी सिंह ने भी मतदान किया। बता दें कि दो सीटों के लिये राज्यसभा चुनाव हो रहा है। मतदान सुबह नौ बजे से जारी है, जो शाम चार बजे तक चलेगा। वहीं, पांच बजे के बाद मतगणना होगा। राज्यसभा चुनाव में तीन उम्मीदवार है, जिनमें कांग्रेस के पीके झा, झामुमो से वैजनाथ राम और भाजपा समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी है। चुनाव में भाजपा समर्थित उम्मीदवार परिमल नाथवानी और इंडी गठबंधन के कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के बीच सीधी टक्कर है।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Candidate
राज्यसभा की 2 सीटों पर सुबह 9 बजे से वोटिंग, देर शाम आएंगे नतीजे

रांची। झारखंड में आज 18 जून को राज्यसभा की दो सीटों पर मतदान होगा। विधानसभा में सुबह 9 बजे से वोटिंग शुरू होगी, जो शाम 4 बजे तक चलेगी। शाम करीब 5 बजे से मतगणना शुरू होगी और रात 8 बजे तक नतीजे आ सकते हैं। 3 उम्मीदवार मैदान मे झारखंड में 2 सीटों पर 3 कैंडिडेट चुनाव लड़ रहे हैं। इनमें सबसे अहम मुकाबला NDA समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी और कांग्रेस के प्रणव झा के बीच है। जबकि, JMM के बैजनाथ राम की जीत तय मानी जा रही है। महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक संख्या बल की बात करें तो महागठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं, जो दोनों उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्याप्त माने जा रहे हैं। वहीं NDA के पास 24 वोट ही हैं। ऐसे में 4 अतिरिक्त वोटों की जुगाड़ को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं, जिसने पूरे चुनाव को रोचक बना दिया है। मतदान से पहले राजधानी रांची में राजनीतिक सरगर्मी चरम पर है। सभी दल सतर्क किसी भी तरह की टूट-फूट या क्रॉस वोटिंग से बचने के लिए सभी दल सतर्क हैं। कांग्रेस के विधायकों को होटल में रखा गया, जबकि NDA के विधायक भी मंगलवार से ही होटल में ठहरे हुए हैं। सभी विधायकों को मतदान प्रक्रिया और रणनीति को लेकर लगातार दिशा-निर्देश दिए गए। मॉक पोलिंग भी कराई गई। बस से विधानसभा पहुंचेंगे एनडीए व कांग्रेस के विधायक मतदान के लिए होटलों में ठहरे एनडीए व कांग्रेस के विधायक बसों से विधानसभा पहुंचेंगे। NDA के विधायक बस से होटल से निकलेंगे। इसके लिए सुबह 9 बजे का समय तय किया गया है। भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल ने कहा कि सभी विधायक पूरी तरह एकजुट हैं। सभी की तैयारी पूरी है। उन्होंने बताया कि सुबह 9 बजे सभी विधायक एक साथ बस से विधानसभा के लिए रवाना होंगे। सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा पहुंचने के बाद सभी विधायक एक जगह एकत्र होंगे और अंतिम रणनीति पर चर्चा करेंगे। इसके बाद सभी विधायक बारी-बारी से मतदान प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।  वहीं होटल बीएनआर चाणक्य में कांग्रेस के अधिकांश विधायक और शीर्ष नेतृत्वकर्ता ठहरे हुए हैं। वैसे विधायक जो होटल में नहीं है। उन्हें भी होटल पहुंचने को कहा गया है। इसके बाद सभी विधायक सुबह 8 से 9 बजे के बीच बस से विधानसभा के लिए निकलेंगे।   दिन भर चला बैठकों और मॉक पोल का दौर एनडीए के बाद कांग्रेस विधायक भी बुधवार को होटल में शिफ्ट हो गए। बुधवार को होटल में दो-तीन बार बैठक कर रणनीति तय की गई। राजनीतिक समीकरणों पर मंथन का दौर चला। राजद के केंद्रीय महासचिव भोला यादव भी अपने चारों विधायकों संजय प्रसाद यादव, संजय सिंह यादव, सुरेश पासवान और नरेश प्रसाद सिंह के साथ पहुंचे। बैठक में हिस्सा लेकर वापस लौट गए। वहीं माले के विधायक अरूप चटर्जी और चंद्रदेव महतो भी बैठक में शामिल हुए और अपना समर्थन देने की घोषणा की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि होटल में रुकने की बाध्यता नहीं है। जो रुकना चाहते थे, उनके लिए व्यवस्था की गई है। दो बार मॉल पोल कराया गया एनडीए विधायकों को इसके साथ ही होटल रेडिशन में रूके एनडीए के विधायकों को दो बार मॉक पोल कराया गया। पहली बार दोपहर 12:30 बजे और दूसरे बार दोपहर तीन बजे। दोनों बार सभी 24 विधायकों के बैलेट पेपर सही पाए गए। वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई होटल में विधायकों की बैठक भी हुई। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी की मौजूदगी में विधायकों को राज्यसभा चुनाव की वोटिंग प्रक्रिया की जानकारी दी गई। तय हुआ कि सभी विधायक होटल से सुबह नौ बजे बस से विधानसभा जाएंगे। जयराम बोले- ऑन दि स्पॉट लेंगे फैसला एनडीए के एक विधायक ने जेएलकेएम विधायक जयराम महतो का समर्थन मिलने का दावा किया है। लेकिन, जयराम ने इससे साफ इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा कि मेरे बारे में सारे पक्ष सिर्फ कयास लगा रहे हैं। राज्यसभा चुनाव पर मेरी न एनडीए से कोई बात हुई है और न महागठबंधन से। मैं किसी के संपर्क में नहीं हूँ। वोटिंग पर गुरुवार की सुबह निर्णय लूंगा।

abhishek singh जून 18, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Election
झारखंड में राज्यसभा चुनाव और विवादों का पुराना नाता

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव में विवाद का लंबा इतिहास रहा है। आइए इन विवादों पर नजर डालते हैं।  साल 2012 का नोट कांड : इस साल झारखंड राज्यसभा चुनाव में बड़े पैमाने पर हॉर्स ट्रेडिंग की शिकायत के बाद चुनाव आयोग ने इतिहास में पहली बार पूरी चुनाव प्रक्रिया को ही रद्द कर दिया था। बाद में नए सिरे से मतदान कराया गया था। साल 2016 की क्रॉस वोटिंग : इस चुनाव में भी भारी सियासी उलटफेर देखने को मिला था। जब कांग्रेस और विपक्षी खेमे के कुछ विधायकों ने पार्टी लाइन से अलग जाकर भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में क्रॉस वोटिंग कर दी थी। जिससे विपक्ष का गणित बिगड़ गया था। साल 2018 और 2020 की घेराबंदी : इन चुनावों में भी अंतिम समय तक रिजॉर्ट पॉलिटिक्स और विधायकों की बाड़ेबंदी देखने को मिली थी। छोटी पार्टियों और निर्दलीय विधायकों की भूमिका हमेशा से यहां निर्णायक और रहस्यमयी रही है। सीटों का समीकरण : एनडीए को दरकार, गठबंधन तैयार इस चुनावी रण में सत्ताधारी जेएमएम-कांग्रेस गठबंधन के पास 56 विधायकों का मजबूत समर्थन है। जो दोनों सीटों पर जीत के लिए संख्या बल के हिसाब से पूरी तरह पर्याप्त है। गठबंधन की ओर से झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस से प्रवण झा मैदान में हैं। दूसरी तरफ, एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के पास फिलहाल 24 विधायकों का ही समर्थन है। उन्हें अपनी नैया पार लगाने के लिए 4 और अतिरिक्त वोटों की सख्त जरूरत है। यही 4 वोटों का फासला इस चुनाव को सस्पेंस थ्रिलर बना रहा है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Jairam Mahato
जयराम महतो परिमल नथवानी को देंगे समर्थन

रांची। डुमरी विधायक जयराम महतो राज्यसभा चुनाव में निर्दलयीय प्रत्याशी परिमल नथवानी के पक्ष में मतदान करेंगे। इससे पूर्व कयास लगाए जा रहे थे कि जयराम महतो राज्यसभा के चुनाव में किसके पक्ष में वोट करेंगे। यह खुलासा हजारीबाग के बीजेपी विधायक प्रदीप प्रसाद ने किया। 17 जून को रेडिशन ब्लू परिसर में उन्होंने बताया कि जयराम महतो ने एनडीए के निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नथवानी के पक्ष में मतदान करने का निर्णय किया है। एनडीए के पास कुल 25 विधायकों का समर्थन बताते चलें कि एनडीए के समर्थन में कुल 24 विधायकों का समर्थन था पर जयराम के समर्थन देने के बाद एनडीए के पक्ष में कुल समर्थकों की संख्या 25 हो गई है। अतिरिक्त 15 विधायकों के समर्थन का दावा प्रदीप प्रसाद ने यह दावा किया है कल परिमल नाथवानी को जयराम महतो वोट डालेंगे इसके अलावे और भी 15 विधायकों का समर्थन उनके पास है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Resort Politics
झारखंड राज्यसभा चुनाव: 'नंबर गेम' में फंसी BJP, क्रॉस-वोटिंग के डर से NDA विधायकों की होटल में बाड़ेबंदी

नई दिल्ली, एजेंसियां। 18 जून को होने वाले द्विवार्षिक चुनाव से पहले झारखंड की सियासत में 'रिसॉर्ट पॉलिटिक्स' की एंट्री हो गई है। जहां एनडीए अपने विधायकों को गोलबंद कर रहा है, वहीं 'इंडिया' ब्लॉक ने मॉक पोल के जरिए अपनी जीत का दावा पुख्ता किया है।   झारखंड में राज्यसभा की दो खाली सीटों के लिए 18 जून को होने वाले चुनाव ने राज्य के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। मतदान में महज कुछ ही घंटे बचे हैं और जीत-हार के जटिल 'नंबर गेम' को साधने के लिए राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है। इस चुनावी बिसात पर सबसे ज्यादा हलचल विपक्षी खेमे यानी राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में देखने को मिल रही है, जिसने संभावित क्रॉस-वोटिंग के खतरे को भांपते हुए अपने सभी विधायकों को राजधानी के एक होटल में शिफ्ट कर दिया है।   होटल में क्यों जुटे NDA विधायक? आधिकारिक तौर पर भाजपा इसे मतदान प्रक्रिया के लिए 'प्रशिक्षण शिविर' और रणनीतिक बैठक बता रही है। नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट किया है कि होटल में अगले दो दिनों तक विधायकों के साथ अहम बैठकें होंगी। वहीं, भाजपा के मुख्य सचेतक नवीन जायसवाल का कहना है कि पार्टी में कई नए विधायक हैं, जिन्हें वोटिंग की सही प्रक्रिया समझाना जरूरी है। हालांकि, सियासी हलकों में इसे सेंधमारी से बचने की कवायद के रूप में ही देखा जा रहा है।   जीत का गणित और परिमल नथवानी की राह इस बार चुनावी मैदान में तीन चेहरे हैं: झामुमो (JMM) से बैद्यनाथ राम, कांग्रेस से प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी। जीत के लिए हर उम्मीदवार को प्रथम वरीयता के कम से कम 28 वोटों की दरकार है।   यहीं पर एनडीए का गणित उलझता दिख रहा है। झारखंड विधानसभा में 'इंडिया' (INDIA) ब्लॉक के पास 56 विधायकों का मजबूत बहुमत है (झामुमो-34, कांग्रेस-16, राजद-4, भाकपा-माले-2)। दूसरी ओर, एनडीए के पास केवल 24 विधायक हैं (भाजपा-21, आजसू-1, लोजपा-रामविलास-1, जदयू-1)। इसके अलावा जेएलकेएम (JLKM) का एक विधायक है। साफ है कि विधानसभा के मौजूदा संख्याबल के आधार पर, बिना भारी क्रॉस-वोटिंग के भाजपा समर्थित नथवानी की जीत लगभग नामुमकिन है।   'इंडिया' ब्लॉक का मॉक पोल और JMM का तंज एनडीए की इस घेराबंदी पर सत्ता पक्ष ने तीखा तंज कसा है। झामुमो की वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि विधायकों को होटल भेजना यह साबित करता है कि भाजपा को अपने ही लोगों पर भरोसा नहीं है, जबकि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने किसी विधायक पर दबाव नहीं डाला है।   अपनी एकजुटता का प्रदर्शन करते हुए मंगलवार को 'इंडिया' ब्लॉक ने सीएम आवास पर एक मॉक पोल (मॉक वोटिंग) का आयोजन किया। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, इस प्रशिक्षण नुमा मॉक पोल में झामुमो के बैद्यनाथ राम को 29 और कांग्रेस के प्रणव झा को 27 वोट मिले। भाकपा-माले के अरूप चटर्जी अनुपस्थित रहे, लेकिन उन्होंने इसकी पूर्व सूचना दे दी थी। कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने बताया कि चुनाव से पहले बुधवार को भी सीएम आवास पर एक अहम बैठक रखी गई है।   क्यों हो रहे हैं ये चुनाव झारखंड में राज्यसभा की ये दो सीटें हाल ही में खाली हुई हैं। इनमें से एक सीट झामुमो के दिग्गज नेता और सह-संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के कारण रिक्त हुई है। वहीं, दूसरी सीट पर भाजपा के सदस्य दीपक प्रकाश का कार्यकाल आगामी 21 जून को समाप्त हो रहा है। अब 18 जून के नतीजे ही तय करेंगे कि क्रॉस-वोटिंग का दांव सफल होता है या सत्ता पक्ष अपने दोनों उम्मीदवारों को संसद भेजने में कामयाब रहता है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Tejashwi Yadav
RJD किंग मेकर! क्या कांग्रेस से बिहार का बदला लेंगे तेजस्वी

रांची। झारखंड में राज्यसभा की दो सीटों के लिए कल 19 जून को चुनाव होंगे। इसमें दो सीटों के लिए तीन प्रत्याशी मैदान में हैं। इसलिए गुरुवार को वोटिंग होगी। बीजेपी के समर्थन से परिमल नाथवानी के निर्दलीय चुनाव मैदान में उतरने से मुकाबला रोचक बन गया है।  नाथवानी 755 करोड़ रुपए की संपत्ति के मालिक हैं। राजनीतिक गलियारे में माना जा रहा है कि वह ‘हिसाब-किताब’ करके मैदान में डटे हैं। उनके इस गणित को कांग्रेस हॉर्स ट्रेडिंग का नाम दे रही है। तेजस्वी के 4 विधायक सबसे अहम इंडी ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। अगर सब एकजुट रहे तो उनकी दोनों सीटों पर जीत तय है। नाथवानी या कांग्रेस के प्रणव झा जीतेंगे यह तेजस्वी के चार विधायक तय करेंगे। एक सीट जीतने के लिए चाहिए 28 विधायक राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए 28 विधायक चाहिए। इंडी ब्लॉक के पास 56 विधायक हैं। इसके अनुसार सभी ने वोट दिए और कोई क्रॉस वोटिंग नहीं हुई, तो गठबंधन के दोनों उम्मीदवार जीत जाएंगे। लेकिन, भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी की मौजूदगी ने इस खेल को इतना सीधा और आसान नहीं रहने दिया है। क्या है संख्या बल? झारखंड में विधानसभा की कुल 81 सीटें हैं। राज्यसभा की एक सीट जीतने के लिए किसी भी उम्मीदवार को कम से कम 28 विधायकों के प्रथम वरीयता के वोटों की जरूरत है। इंडिया ब्लॉक में शामिल झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक हैं। दूसरी ओर NDA में भाजपा के 21, आजसू के 1, जेडीयू के 1 और LJP (R) के 1 विधायक हैं। कुल संख्या 24 हुई। इस हिसाब से NDA को चार विधायकों की जरूरत है।   झामुमो के बैजनाथ राम की जीत पक्की हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली पार्टी झामुमो के उम्मीदवार बैजनाथ राम की जीत पक्की मानी जा रही है। उन्हें 28 वोट चाहिए और पार्टी के पास 34 विधायक हैं। मतलब जरूरत से 6 अधिक। इंडिया ब्लॉक की ओर से दूसरे उम्मीदवार कांग्रेस के प्रणव झा हैं। इनका मुकाबला परिमल नाथवानी से है।   क्यों तेजस्वी यादव के हाथ आई जीत दिलाने की ताकत? कांग्रेस के प्रणव झा को जीत तभी मिलेगी, जब उन्हें झामुमो के बचे हुए 6, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और भाकपा माले के 2 विधायक वोट दें। दूसरी ओर नाथवानी को NDA के 24 विधायकों का वोट मिलना तय माना जा रहा है। ऐसे में इंडी ब्लॉक की पार्टियों के चार विधायक टूट जाते हैं और नाथवानी के समर्थन में वोट कर देते हैं, तो उनकी जीत हो जाएगी। बिहार में बीजेपी कर चुकी खेला तेजस्वी यादव की पार्टी राजद के चार विधायक हैं। इनके पास ताकत है कि नाथवानी या प्रणव में से किसी एक को जीत दिला दें। बिहार में भाजपा ने मार्च में हुए राज्यसभा चुनाव में महागठबंधन के विधायकों को तोड़कर पहले ही उदाहरण पेश कर दिया है। इधर, कांग्रेस के नेताओं ने पटना में तेजस्वी यादव से मुलाकात की है। उनसे राज्यसभा चुनाव में राजद के चारों विधायकों के वोट कांग्रेस उम्मीदवार को दिलाने की अपील की। क्या बिहार का बदला झारखंड में ले सकते हैं तेजस्वी? मार्च में बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए चुनाव हुए थे। सत्ताधारी गठबंधन NDA के पास 4 प्रत्याशी को जीत दिलाने लायक संख्या बल था। वहीं, विपक्ष की सभी पार्टियों के विधायक वोट देते तो महागठबंधन की ओर से राजद के उम्मीदवार ए़डी सिंह जीत सकते थे। 16 मार्च 2026 को मतदान हुए, नतीजे चौंकाने वाले आए। कांग्रेस के तीन विधायक गायब रहे। राजद के एक विधायक भी वोट डालने नहीं आए। इसके चलते एनडीए के 5वें उम्मीदवार को जीत मिल गई। बिहार में कांग्रेस के 6 विधायक हैं, इनमें से 3 ने राजद उम्मीदवार को वोट नहीं दिया। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में चर्चा हो रही है कि क्या तेजस्वी बिहार में मिली हार का बदला झारखंड में कांग्रेस उम्मीदवार को हराकर ले सकते हैं। राहुल गांधी ने तीन बार हेमंत सोरेन से बात की ऐसा न हो इसके लिए कांग्रेस नेतृत्व भी एक्टिव है। राहुल गांधी ने हेमंत सोरेन से तीन बार बात की है। बिहार में कांग्रेस नेता अखिलेश सिंह के माध्यम से कांग्रेस नेतृत्व की बात तेजस्वी यादव से हुई है। दूसरी ओर एक चर्चा यह भी है कि NDA में भी टूट हो सकती है। विधायक सरयू राय की नाराजगी की खबर आती रहती है। परिमल को जिताने के लिए NDA के पास 2 ऑप्शन 1- RJD के चारों विधायकों को तोड़ लें। ऐसा करने पर NDA के 24 और राजद के 4 विधायक मिलकर 28 हो जाएंगे। वह कांग्रेस या भाकपा माले के विधायकों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। उन्हें किसी तरह चार विधायकों का वोट चाहिए। 2- दूसरा विकल्प है कि 10 विधायकों को वोट नहीं देने या इस तरह मतदान करने के लिए मना लें कि उनके वोट रद्द हो जाएं। ऐसे में कुल वैध वोटों की संख्या 71 हो जाएगी। जीत के लिए जरूरी संख्या बल गिरकर 24 हो जाएगा।

abhishek singh जून 17, 2026 0
Parimal Nathwani Narendra Modi
पीएम आवास पहुंचे परिमल नाथवाणी, नरेंद्र मोदी से की मुलाकात

रांची। झारखंड से भाजपा समर्थित राज्यसभा के निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवाणी दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री आवास पहुंचे। यहां उन्होंने पीएम नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस अवसर परिमल नाथवाणी के पुत्र धनराज नाथवाणी भी मौजूद थे।   राज्यसभा चुनाव के बीच परिमल नाथवाणी की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से हुई मुलाकात बहुत कुछ राजनीतिक संदेश भी देती है। कई राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार परिमल नाथवाणी 16 जून को रांची आएंगे। वह दो दिनों तक रांची में रह कर चुनावी तैयारी को मुकाम तक पहुंचाएंगे। बता दें कि 18 को राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान है।

abhishek singh जून 12, 2026 0
Rajya Sabha Election
राज्यसभा चुनाव में आज होगा तस्वीर साफ, नाम वापसी की अंतिम तारीख पर है सबकी नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। राज्यसभा चुनाव 2026 के तहत नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख आज है। इसके बाद 10 राज्यों की 24 सीटों के लिए मैदान में बचे उम्मीदवारों की अंतिम सूची जारी होगी। कई राज्यों में उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचित होने की संभावना है, जबकि मध्य प्रदेश और झारखंड में मुकाबला बेहद रोचक बना हुआ है। 18 जून को होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है।   10 राज्यों की 24 सीटों पर चुनाव इस बार आंध्र प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड, राजस्थान, कर्नाटक, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और मिजोरम की 24 सीटों पर चुनाव हो रहे हैं। कुल 26 उम्मीदवार मैदान में हैं। इन सीटों पर कई वरिष्ठ नेताओं का कार्यकाल समाप्त हो रहा है, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवगौड़ा, दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू जैसे नाम शामिल हैं।   झारखंड और मध्य प्रदेश पर सबकी नजर झारखंड की दो सीटों के लिए जेएमएम ने बैद्यनाथ राम और कांग्रेस ने प्रणव झा को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी को भाजपा का समर्थन मिलने की चर्चा है। विधानसभा में संख्या बल के बावजूद यहां क्रॉस वोटिंग की संभावना को लेकर राजनीतिक हलचल तेज है। मध्य प्रदेश में तीन सीटों के लिए भाजपा ने तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट को मैदान में उतारा है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन निरस्त होने के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। कांग्रेस इस मामले को लेकर न्यायिक और संवैधानिक लड़ाई लड़ रही है।   गुजरात और आंध्र प्रदेश में NDA मजबूत गुजरात में भाजपा के चारों उम्मीदवारों की जीत लगभग तय मानी जा रही है क्योंकि विपक्ष ने कोई उम्मीदवार नहीं उतारा है। वहीं आंध्र प्रदेश में टीडीपी और जनसेना गठबंधन की मजबूत स्थिति के कारण एनडीए उम्मीदवारों को बढ़त मिलती दिख रही है।   कैसे होता है राज्यसभा चुनाव? राज्यसभा सदस्य का चुनाव संबंधित राज्य की विधानसभा के निर्वाचित विधायक करते हैं। चुनाव एकल हस्तांतरणीय मत प्रणाली (Single Transferable Vote) से होता है, जिसमें विधायक उम्मीदवारों को वरीयता के आधार पर वोट देते हैं। यदि आवश्यक संख्या में प्रथम वरीयता वोट नहीं मिलते, तो दूसरी वरीयता के वोटों की गिनती होती है। इसी वजह से कई राज्यों में क्रॉस वोटिंग और अतिरिक्त समर्थन चुनाव परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।   आज के बाद होगी स्थिति स्पष्ट नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होते ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि किन राज्यों में उम्मीदवार निर्विरोध चुने जाएंगे और किन सीटों पर मतदान की जरूरत पड़ेगी। खासकर मध्य प्रदेश और झारखंड के नतीजों पर राष्ट्रीय राजनीति की नजर बनी हुई है, क्योंकि इनके परिणाम राज्यसभा में दलों के शक्ति संतुलन को प्रभावित कर सकते हैं।

abhishek singh जून 11, 2026 0
Parimal Nathwani
परिमल नाथवानी के नामांकन को हरी झंडी, राज्यसभा चुनाव के तीसरे प्रत्याशी

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चरम पर है। सत्तापक्ष और विपक्ष की ओर से हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामा देखने को मिल रहा है। भाजपा समर्थित परिमल नाथवानी के नामांकन दाखिल करने के बाद चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर ने उनका नामांकन होल्ड पर रख दिया था। उनके नाम को लेकर भ्रम की स्थिति थी, क्योंकि कहीं उनका नाम परिमल नाथवानी तो कहीं नाथवानी परिमल दर्ज था। इसी को लेकर कांग्रेस की ओर से विधायक नमन विक्सल कोंगाड़ी ने आपत्ति जताई थी। जिसके बाद परिमल नाथवानी का नामांकन होल्ड पर रख दिया गया था, लेकिन दो दिनों तक चले विवाद के बाद आखिरकार परिमल नाथवानी का नामांकन मंजूर कर लिया गया है। रिटर्निंग ऑफिसर ने उनके नामांकन को हरी झंडी दे दी है।  राज्यसभा की दो सीटों के लिए अब 3 प्रत्याशी झारखंड से राज्यसभा की दो सीटें खाली हैं, लेकिन उम्मीदवार तीन हैं। परिमल नाथवानी एक निर्दलीय उम्मीदवार हैं, जिन्हें भाजपा समर्थन दे रही है। वहीं, गठबंधन की ओर से झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा चुनावी मैदान में हैं। नामांकन पर आपत्ति के बाद मचा था घमासान नामांकन होल्ड पर किए जाने की खबर मिलते ही परिमल नाथवानी विधानसभा पहुंचे थे और अपनी ओर से सफाई दी थी। वहीं, निर्वाचन आयोग के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार भी विधानसभा पहुंचे थे और पूरे मामले की जानकारी ली थी।  बुधवार को सुबह से ही कांग्रेस समर्थक नाथवानी का नामांकन रद्द करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। वहीं, बीजेपी कार्यकर्ताओं को गेट के बाहर ही रोक दिया गया था। मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट के एक सीनियर वकील भी पहुंचे थे। इधर, कांग्रेस के वरीय नेता सलमान खुर्शीद भी दिल्ली से रांची पहुंच गये। यहां वह सीधे विधानसभा पहुंचे। विधानसभा के गेट के बाहर भाजपा कार्यकताओं ने उन्हें रोका और जमकर नारेबाजी की। करीब एक बजे मामले में बहस पूरी हुई और रिटर्निंग ऑफिसर ने नाथवानी के नामांकन पत्र को सही घोषित कर दिया।

anjali kumari जून 10, 2026 0
Parimal Nathwani
नाथवानी के नामांकन में पेंच, JMM व कांग्रेस खुश

रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी पारा चढ़ा हुआ है। इस बीच नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी के दौरान एक दिलचस्प मोड़ आ गया है। एक ओर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के प्रत्याशियों ने तकनीकी परीक्षा आसानी से पास कर ली है, वहीं निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी का नामांकन नाम-विवाद के कारण अधर में लटक गया है। नाथवानी के दस्तावेजों में नाम के हेर-फेर को लेकर दर्ज कराई गई आपत्ति के बाद चुनाव अधिकारी ने उनके नामांकन को होल्ड पर रख दिया है, जिस पर अब बुधवार सुबह फैसला होना है। नाम के आगे-पीछे का फेर, थम गई नाथवानी की रेस दस्तावेजों की जांच के दौरान निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी के कागजातों में एक तकनीकी त्रुटि सामने आई। शिकायत के मुताबिक, कुछ दस्तावेजों में उनका नाम परिमल नाथवानी दर्ज है, तो कुछ जगहों पर इसे नाथवानी परिमल लिखा गया है। इस तकनीकी उलटफेर को आधार बनाकर उनके नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई गई। मामला गरमाते ही रिटर्निंग ऑफिसर ने फिलहाल नामांकन को होल्ड पर डाल दिया है। पहुंचे नाथवानी, भाजपा नेता जुटे रास्ता निकालने मे विवाद की भनक लगते ही परिमल नाथवानी तुरंत विधानसभा सचिवालय पहुंचे। उन्होंने विधानसभा के प्रभारी सचिव सह रिटर्निंग ऑफिसर रंजीत कुमार के समक्ष उपस्थित होकर अपनी स्थिति स्पष्ट की। इस दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में कानूनी पहलुओं को लेकर लंबी मैराथन बैठक और विचार-विमर्श का दौर चला। दिलचस्प बात यह रही कि निर्दलीय उम्मीदवार होने के बावजूद भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी इस दौरान सचिवालय पहुंचे और पूरी प्रक्रिया पर पैनी नजर बनाए रखी, जिससे इस चुनाव के सियासी समीकरणों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। बैजनाथ राम और प्रणव झा की राह आसान उधर, जेएमएम उम्मीदवार बैजनाथ राम के नामांकन पत्रों की जांच पूरी हो चुकी है और उसे वैध पाया गया है। इसके साथ ही, कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा का पर्चा भी पूरी तरह सही मिला, जिससे उनकी उम्मीदवारी को हरी झंडी मिल गई है। अब बुधवार सुबह 11 बजे होगी सुनवाई रिटर्निंग ऑफिसर ने निर्देश दिया है कि दर्ज आपत्ति पर अंतिम सुनवाई बुधवार सुबह 11 बजे होगी। इस दौरान परिमल नाथवानी या उनके अधिकृत एजेंट को खुद उपस्थित रहना होगा। अब सबकी नजरें कल की सुनवाई पर टिकी हैं कि क्या चुनाव आयोग इस नाम-विवाद को महज एक लिपिकीय (तार्किक) भूल मानकर नाथवानी का नामांकन वैध करता है, या फिर यह तकनीकी पेंच उनकी उम्मीदवारी के लिए कोई बड़ा रोड़ा बनेगा।

Unknown जून 9, 2026 0
Jharkhand Rajya Sabha Candidate
झारखंड राज्यसभा चुनाव: परिमल नाथवानी, बैद्यनाथ राम और प्रणव झा ने भरा नामांकन, जीत का जताया भरोसा

रांची। झारखंड में राज्यसभा की रिक्त सीटों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार को राज्यसभा चुनाव के लिए प्रमुख उम्मीदवारों ने अपना नामांकन पत्र दाखिल किया। निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के प्रत्याशी बैद्यनाथ राम और कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा ने दो-दो सेटों में नामांकन दाखिल कर अपनी दावेदारी पेश की। नामांकन प्रक्रिया के दौरान राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों की सक्रियता भी देखने को मिली। परिमल नाथवानी बोले- काम के आधार पर मिलेगा समर्थन निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने नामांकन के बाद अपनी जीत को लेकर पूरा भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि पिछले 12 वर्षों में राज्यसभा सांसद के रूप में उन्होंने झारखंड के विकास और जनहित के मुद्दों पर लगातार काम किया है। खुद को ‘बाहरी’ बताए जाने के आरोपों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि उनके कार्य ही उनकी पहचान हैं और झारखंड की जनता उनके योगदान से परिचित है। नाथवानी को एनडीए के 20 विधायकों का समर्थन प्राप्त है, जिन्होंने उनके प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर किए हैं। झामुमो और कांग्रेस ने भी दिखाई ताकत झामुमो प्रत्याशी बैद्यनाथ राम ने नामांकन के बाद कहा कि यदि उन्हें राज्यसभा भेजा जाता है तो वे झारखंड के हितों और विकास के मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा के नामांकन में महागठबंधन की एकजुटता भी नजर आई। राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तीन विधायकों ने उनके प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर कर गठबंधन की मजबूती का संदेश दिया। राजनीतिक समीकरणों पर टिकी निगाहें नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक समीकरणों और समर्थन जुटाने की गतिविधियां तेज होने की संभावना है। सभी उम्मीदवार अपनी जीत को लेकर आश्वस्त दिखाई दे रहे हैं। आने वाले दिनों में चुनावी रणनीति और दलों की सक्रियता झारखंड की राजनीति को और गर्मा सकती है। राज्यसभा चुनाव के परिणाम पर अब राजनीतिक दलों और आम जनता की नजरें टिकी हुई हैं।

Unknown जून 9, 2026 0
परिमल नाथवानी की इंट्री, एनडीए का मिला समर्थन

रांची। झारखंड में होनेवाले दो सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव को परिमल नाथवाणी की इंट्री ने रोचक बना दिया है। नाथवाणी की इंट्री से सभी राजनीतिक दलों में हड़कंप मचा है। उधर, राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने यू टर्न लेते हुए अपना प्रत्याशी नहीं देने का फैसला किया है। भाजपा ने अब निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी का समर्थन करने का फैसला किया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष प्रो आदित्य साहु ने जदयू, लोजपा, आजसू के अलावा भाजपा के लगभग एक दर्जन विधायकों को परिमल नाथवाणी का प्रस्तावक बनने का निर्देश दिया है।    नाथवाणी भाजपा के समर्थन से आज 8 जून को अपना नामांकन पत्र दाखिल करेंगे। जानकारी के अनुसार रविवार रात 8.30 बजे नाथवाणी दिल्ली से रांची पहुंच गये हैं।  सीएम से मिलने के बाद गये दिल्ली बता दें कि बीते शनिवार को भी नाथवाणी विशेष विमान से रांची आये थे। उन्होंने नामांकन पत्र भी खरीदा था। इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात की थी, फिर दिल्ली लौट गये थे।  चर्चा है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा के साथ बात नहीं बनने के बाद वह रात में ही दिल्ली लौट गये। वह दिल्ली तब रवाना हुए जब उन्हें मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कर दिया कि उनकी पार्टी उनका प्रस्तावक नहीं बनेगी। इसके अगले दिन यानी रविवार की शाम को बीजेपी ने नाथवाणी को समर्थन देने का निर्देश जारी कर दिया।  दिल्ली में दिन भर रह कर नाथवानी ने गोटी सेट किया और भाजपा का समर्थन हासिल करने में सफल रहे। झामुमो नहीं चाहता था कि परिमल नाथवानी का प्रस्तावक बन कर वह कांग्रेस से प्रत्यक्ष रूप से अपना विरोधी छवि प्रदर्शित करे। नाथवाणी को जीत की उम्मीद भाजपा का समर्थन मिलने के बाद अब नाथवानी को जीत सुनिश्चित दिखने लगी है। वहीं नाथवाणी की इंट्री ने कांग्रेस की चिंता बढ़ा दी है। कांग्रेस को अपने प्रत्याशी को विजय दिलाने की चुनौती और बढ़ गयी है। बता दें कि इंडी गठबंधन के नेता और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कांग्रेस से बार बार यही कह रहे थे। वह बता रहे थे कि कांग्रेस अपना प्रत्याशी नहीं दे और झामुमो को दोनों प्रत्याशी खड़ा करने दे। लेकिन, झामुमो और कांग्रेस के बीच इस बात पर सहमति नहीं बनी।   रविवार रात मुख्यमंत्री आवास में इंडी गठबंधन के सभी विधायकों की बैठक हुई। इसमें कांग्रेस के पर्यवेक्षक भूपेश बघेल और अजय शर्मा भी शामिल हुए। इसमें गठबंधन के सारे विधायकों को एकजुट रखने का निर्णय लिया गया।  विधायकों के चेहरे पर मुस्कान इधर, नाथवानी के निर्दलीय प्रत्याशी बनने से कांग्रेस छोड़ अन्य सभी दलों के विधायकों के चेहरे पर मुस्कान देखी जाने लगी है। राजनीति के रणनीतिकारों का भी मानना है कि भाजपा का समर्थन मिलने के बाद नाथवानी को मात्र चार वोटों का ही जुगाड़ करना है, जो उनके लिए बहुत मुश्किल नहीं है।

Unknown जून 8, 2026 0
Parimal Nathwani Vijay Sai Reddy
नथवाणी और विजय साई रेड्डी ने खरीदा नामांकन पत्र

रांची। झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नामांकन प्रक्रिया के बीच अब तक छह नेताओं ने नामांकन पत्र खरीदे हैं, जिनमें पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी और आंध्र प्रदेश के वरिष्ठ नेता वी. विजय साईं रेड्डी का नाम सबसे अधिक चर्चा में है। इनके अलावा रवि कुमार यादव, बैजनाथ राम, गौरव वल्लभ और प्रणव झा ने भी नामांकन पत्र लिया है। अधिकृत उम्मीदवारों पर सबकी नजर राजनीतिक दलों ने अपने अधिकृत उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा पर भरोसा जताया है। दोनों उम्मीदवारों को महागठबंधन का समर्थन मिलने की उम्मीद है, जिससे उनकी दावेदारी मजबूत मानी जा रही है। परिमल नाथवाणी की वापसी की चर्चा राज्यसभा चुनाव में सबसे दिलचस्प नाम परिमल नाथवाणी का है। वे वर्ष 2008 और 2014 में झारखंड से राज्यसभा सांसद रह चुके हैं और राज्य की राजनीति से उनका पुराना संबंध रहा है। उनके नामांकन पत्र लेने के बाद राजनीतिक गलियारों में संभावित समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विजय साईं रेड्डी की एंट्री ने बढ़ाए सवाल वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (YSRCP) के पूर्व सांसद वी. विजय साईं रेड्डी का नाम सामने आने से भी राजनीतिक हलकों में उत्सुकता बढ़ी है। चार्टर्ड अकाउंटेंट रहे रेड्डी आंध्र प्रदेश की राजनीति के प्रभावशाली चेहरों में गिने जाते हैं। वे राज्यसभा में वाईएसआरसीपी संसदीय दल के नेता भी रह चुके हैं। हालांकि हाल ही में उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बनाने की घोषणा की थी। समर्थन को लेकर बना सस्पेंस राज्यसभा चुनाव में नामांकन दाखिल करने के लिए उम्मीदवार को कम से कम नौ विधायकों का समर्थन आवश्यक होता है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि विजय साईं रेड्डी और अन्य स्वतंत्र दावेदारों को किस राजनीतिक समूह का समर्थन मिल सकता है। फिलहाल इस पर कोई स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है, लेकिन नामांकन पत्रों की खरीद ने चुनावी मुकाबले को और रोचक बना दिया है।

Unknown जून 6, 2026 0
Parimal Nathwani
परिमल नाथवाणी रांची में!

रांची। पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी के रांची में होने की सूचना है। सूचना के मुताबिक विशेष विमान से परिमल नाथवाणी रांची आये हैं। हालांकि अब तक इसकी किसी ने पुष्टि नहीं की है। राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच उनके आने की सूचना ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। चर्चाओं के मुताबिक नाथवाणी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिल सकते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सचिवालय से भी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। नाथवाणी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाये जाने की चर्चा है। बता दें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, जबकि दूसरे देर शाम तक होने की संभावना है।

Unknown जून 6, 2026 0
Parimal Nathwani
नाथवाणी की चर्चा से गरमाई झारखंड की सियासत

झारखंड में राज्यसभा की सीटें भले ही मात्र दो हैं, लेकिन इन दो सीटों पर होनेवाला चुनाव हमेशा ही सियासी भूचाल मचाता रहा है। आगामी 18 जून को फिर से राज्यसभा की दो सीटों के लिए चुनाव होनेवाले हैं और इसे लेकर अभी से ही यहां की राजनीतिक सियासत गरमा गई है। खास तौर एक नाम यहां जो सियासी गलियारे में तैर रहा है, वह है परिमल नथवाणी का। इस नाम की चर्चा से ही यहां सियासी भूचाल आ गया है। इस नाम से सिर्फ बीजेपी ही नहीं, बल्कि कांग्रेस और अन्य दलों के इच्छुक नेताओं की नींद उड़ी हुई है। जिस भी पार्टी के जो नेता इस चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने के इच्छुक हैं, वे जानते हैं कि झारखंड के राज्यसभा चुनाव में यदि परिमल नथवाणी की एंट्री हुई, तो उन्हें रोकना आसान नहीं होगा। साथ ही उनकी एंट्री से हॉर्स ट्रेडिंग को भी बढ़ावा मिलेगा। संभवतः यही कारण है कि उनका नाम सुनते ही यहां के इच्छुक नेताओं के मुंह का स्वाद बिगड़ जा रहा है। झारखंड से दो बार राज्यसभा सांसद रहे परिमल नथवाणी के फिर से चुनाव लड़ने की चर्चा से सियासी सरगर्मी तेज हो गई है। बता दें कि भारत निर्वाचन आयोग ने झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों पर होने वाले चुनाव के लिए तारीखों का ऐलान कर दिया है। आयोग की ओर से चुनाव कार्यक्रम का ऐलान करने के साथ ही झारखंड में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। सीता सोरेन भी रेस मे सियासी सरगर्मी के बीच पूर्व विधायक सीता सोरेन भी राज्यसभा चुनाव की रेस में हैं। समय-समय पर वह अपनी इच्छा व्यक्त करती रहती हैं। हाल में उनकी ओर से पाकुड़ में आयोजित एक कार्यक्रम में कहा गया कि यदि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा नेतृत्व की इच्छा हुई, तो वो राज्यसभा चुनाव मैदान में उतरने को तैयार हैं।   कांग्रेस की ओर से एक सीट पर दावेदारी दूसरी तरफ कांग्रेस भी एक सीट पर दावा कर रही है। कांग्रेस नेताओं ने गठबंधन में भी अपनी बात रखी है। कांग्रेस के कई सीनियर नेता इस बार राज्यसभा पहुंचने की फिराक में हैं। परंतु परिमल नाथवाणी की संभावित एंट्री से सभी का जायका बिगड़ रहा है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सांसद प्रदीप बलमुचू ने नथवाणी को लेकर खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की है। कांग्रेस से धीरज प्रसाद साहू, पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष राजेश ठाकुर, पूर्व मंत्री बंधु तिर्की और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय के नाम की चर्चा है। और ये सभी नेता नहीं चाहते कि नथवाणी चुनाव मैदान में उतरें।  प्रत्याशी को लेकर अभी कोई घोषणा नही प्रत्याशी को लेकर राजनीतिक दलों ने अभी कोई घोषणा नहीं की है। सत्ताधारी दलों झामुमो, कांग्रेस और राजद के बीच अभी सहमति बनाने का कोई प्रयास नहीं किया गया है। वर्तमान स्थिति के अनुसार एकजुटता दिखाने पर सत्ताधारी गठबंधन दोनों सीटें निकाल सकता है। दूसरी ओर संख्य बल में कम होने के बावजूद बीजेपी एक सीट पर दावा कर रही है। इससे ही सभी को कुछ न कुछ खटक रहा है।  झारखंड की 2 सीटों के लिए 18 जून को चुनाव चुनाव आयोग के अनुसार, झारखंड की 2 सीटों के लिए 18 जून को चुनाव होंगे। झारखंड में एक राज्यसभा सीट पूर्व मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के निधन के बाद से 2025 से ही खाली है। वहीं राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल भी 21 जून को खत्म होने वाला रहा है। चुनाव का पूरा कार्यक्रम तिथि    चुनाव कार्यक्रमः 1 जून 2026    अधिसूचना जारी 8 जून    नामांकन की अंतिम तारीख 9 जून    नामांकन पत्रों की जांच 11 जून    नामांकन वापस लेने की अंतिम तारीख 18 जून 2026    सुबह 9 बजे से शाम 4 बजे तक मतदान 18 जून    शाम 5 बजे वोटों की गिनती 20 जून    चुनावी प्रक्रिया पूरी

Unknown मई 23, 2026 0
Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Prime Minister Narendra Modi announces fast-track courts and strict action against those involved in paper leak cases.
राष्ट्रीय

PM मोदी का बड़ा ऐलान: पेपर लीक के दोषियों पर सख्ती, फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने की घोषणा

kalpana जुलाई 23, 2026 0