दुमका। झारखंड के दुमका जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए हंसडीहा थाना क्षेत्र से तीन युवकों को ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से करीब 11 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने इस अवैध कारोबार से जुड़े कई अन्य लोगों के नाम भी बताए हैं, जिसके आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई में जुट गई है। गुप्त सूचना पर स्टेडियम में हुई छापेमारी पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि हंसडीहा के प्लस-2 हाई स्कूल स्टेडियम परिसर में कुछ युवक ब्राउन शुगर की खरीद-बिक्री और सेवन कर रहे हैं। सूचना मिलते ही जरमुंडी के एसडीपीओ नवल किशोर सिंह के नेतृत्व में विशेष छापेमारी दल का गठन किया गया। पुलिस टीम जब मौके पर पहुंची तो तीन युवक एक कमरे में मौजूद थे। पुलिस वाहन देखकर वे भागने लगे, लेकिन जवानों ने पीछा कर तीनों को पकड़ लिया। तलाशी में मिली ब्राउन शुगर गिरफ्तार युवकों की पहचान शहादत शेख, मोहम्मद बसीर और आर्यन शेख के रूप में हुई है। तीनों दुमका नगर थाना क्षेत्र के दुधानी इलाके के निवासी बताए गए हैं। तलाशी के दौरान उनके पास से छोटे-छोटे पैकेटों में ब्राउन शुगर बरामद हुई। मौके पर इलेक्ट्रॉनिक मशीन से वजन करने पर इसकी मात्रा लगभग 11 ग्राम पाई गई। आरोपियों ने पूछताछ में नशे का सेवन करने की बात भी स्वीकार की। सरगना तक पहुंचने में जुटी पुलिस एसडीपीओ नवल किशोर सिंह ने बताया कि प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार युवकों ने ब्राउन शुगर के नेटवर्क से जुड़े कुछ अन्य लोगों और कथित सरगना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी है। पुलिस अब इन सुरागों के आधार पर पूरे गिरोह तक पहुंचने का प्रयास कर रही है। आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि जिले में नशे के कारोबार के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में सोना और चांदी की कीमतों में लगातार तेजी का दौर जारी है। सोमवार, 20 अप्रैल को भी दोनों कीमती धातुओं के दामों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 24 कैरेट सोने की कीमत 10 ग्राम पर ₹347 बढ़कर ₹1,52,002 पहुंच गई, जबकि चांदी ₹1,214 महंगी होकर ₹2,51,000 प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर गई। लगातार बढ़ती कीमतों ने निवेशकों के साथ-साथ आभूषण खरीदने वाले ग्राहकों की भी चिंता बढ़ा दी है। इस साल रिकॉर्ड तेजी, हजारों रुपये महंगे हुए सोना-चांदी आईबीजेए के आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक सोने की कीमत में करीब ₹19,000 प्रति 10 ग्राम की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, चांदी लगभग ₹21,000 प्रति किलो महंगी हो चुकी है। इस दौरान दोनों धातुओं ने रिकॉर्ड स्तर भी छुआ। 29 जनवरी को चांदी की कीमत ₹3.86 लाख प्रति किलो तक पहुंच गई थी, जो अब तक का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, डॉलर में उतार-चढ़ाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग को इस तेजी की प्रमुख वजह माना जा रहा है। बड़े शहरों में भी ऊंचे दाम, खरीदारी से पहले बरतें सावधानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, जयपुर, भोपाल और लखनऊ सहित देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट सोने की कीमत ₹1.55 लाख से ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के बीच बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने के बढ़ते दामों के बीच ग्राहकों को खरीदारी करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। केवल BIS हॉलमार्क वाला प्रमाणित सोना ही खरीदें और खरीदारी से पहले विश्वसनीय स्रोतों से ताजा कीमत की पुष्टि अवश्य करें। इससे नकली आभूषण या गलत मूल्य वसूले जाने जैसी समस्याओं से बचा जा सकता है।
हैदराबाद: तेलंगाना में फीस रीइंबर्समेंट (शुल्क प्रतिपूर्ति) और लंबित छात्रवृत्ति जारी करने की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के बाद राज्य की राजनीति गरमा गई है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान लाठीचार्ज किया और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। TGCHE कार्यालय के बाहर हुआ प्रदर्शन एएनआई के अनुसार, एबीवीपी के नेतृत्व में बड़ी संख्या में छात्र तेलंगाना राज्य उच्च शिक्षा परिषद (TGCHE) के कार्यालय के बाहर एकत्र हुए। प्रदर्शनकारी वर्ष 2022-23 से 2025-26 के बीच लंबित फीस रीइंबर्समेंट और छात्रवृत्ति की राशि जारी करने की मांग कर रहे थे। छात्रों का कहना है कि आर्थिक सहायता समय पर नहीं मिलने से हजारों विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है और कई छात्र पढ़ाई बीच में छोड़ने की स्थिति में पहुंच गए हैं। पुलिस पर लाठीचार्ज का आरोप एबीवीपी नेताओं का आरोप है कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने बल प्रयोग करते हुए कार्यकर्ताओं पर लाठीचार्ज किया। संगठन का दावा है कि कई छात्रों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर अलग-अलग पुलिस थानों में भेजा गया। पुलिस की ओर से इस संबंध में विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। सरकार पर लगाए गंभीर आरोप प्रदर्शनकारी छात्रों और एबीवीपी ने कांग्रेस सरकार पर फीस रीइंबर्समेंट योजना को कमजोर करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकार छात्रों के भविष्य की अनदेखी कर रही है और लंबित भुगतान जारी करने में लगातार देरी हो रही है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो पूरे तेलंगाना में व्यापक छात्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। 12 हजार करोड़ रुपये बकाया होने का दावा छात्र संगठनों का दावा है कि राज्य सरकार पर निजी कॉलेजों का करीब 12,000 करोड़ रुपये का फीस रीइंबर्समेंट बकाया है। उनका कहना है कि पिछले तीन-चार वर्षों से कई कॉलेजों और छात्रों को नियमित रूप से छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि नहीं मिल रही है। इसके चलते शैक्षणिक संस्थानों और विद्यार्थियों दोनों को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। पहले भी उठ चुका है यह मुद्दा फीस रीइंबर्समेंट और छात्रवृत्ति में देरी का मुद्दा तेलंगाना में नया नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में भी छात्र संगठनों ने कई बार इस मुद्दे पर प्रदर्शन और धरने दिए हैं। सरकारें बदलने के बावजूद यह समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हो सकी है। ताजा प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई के बाद एक बार फिर राज्य में छात्र राजनीति तेज हो गई है। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं, जबकि छात्रों की मांग है कि लंबित राशि जल्द जारी कर उनकी पढ़ाई प्रभावित होने से बचाई जाए।
चतरा। झारखंड के चतरा जिले के सिमरिया थाना क्षेत्र स्थित हडगड़ी जंगल में पुलिस और अपहरणकर्ताओं के बीच हुई मुठभेड़ में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने अपहृत छह ग्रामीणों को सकुशल मुक्त करा लिया, जबकि दो वयस्क आरोपियों समेत कुल पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया। तीन अन्य नाबालिगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। ग्रामीणों का अपहरण कर मांगी थी एक लाख की फिरौती जानकारी के अनुसार, 18 जून की रात करीब 10:30 बजे हथियारबंद अपराधियों ने तेलियाडीह और गोवदा गांव में धावा बोलकर छह ग्रामीणों का अपहरण कर लिया था। इसके बाद सभी को जंगल में ले जाया गया। अपराधियों ने परिजनों को फोन कर खुद को एमसीसी (MCC) का सदस्य बताते हुए एक लाख रुपये की फिरौती मांगी और रकम नहीं देने पर बंधकों की हत्या की धमकी दी। घटना के बाद पूरे इलाके में दहशत फैल गई। सर्च ऑपरेशन के दौरान हुई मुठभेड़ सूचना मिलते ही एसपी अनिमेष नैथानी के निर्देश पर सिमरिया एसडीपीओ के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम गठित की गई। पुलिस ने रात में ही जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। जैसे ही पुलिस टीम अपराधियों के ठिकाने के करीब पहुंची, बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की। कुछ देर चली मुठभेड़ के बाद पुलिस की घेराबंदी से घबराकर अपराधियों ने सभी बंधकों को छोड़ दिया और भागने लगे। पुलिस ने पीछा कर पांच आरोपियों को पकड़ लिया। हथियार और मोबाइल बरामद, फरार आरोपियों की तलाश जारी पुलिस ने जिन छह ग्रामीणों को सुरक्षित मुक्त कराया, उनमें विनोद साव, महेंद्र साव, संतोष साव, प्रदीप साव, बिंदु देवी और सोनी देवी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों में रमेश कुमार गंझू और सतीश कुमार गंझू की पहचान हुई है, जबकि तीन नाबालिगों को भी हिरासत में लिया गया है। मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने देशी हथियार, पिस्टल जैसा दिखने वाला लाइटर, चाकू और लूटे गए मोबाइल फोन समेत कई सामान बरामद किए हैं। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और फरार अपराधियों की तलाश में जंगल में लगातार सर्च अभियान चला रही है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेता जहांगीर खान की गिरफ्तारी के विरोध में हुए हिंसक प्रदर्शन के मामले में पुलिस ने उनकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस का आरोप है कि उन्होंने 16 जून को फाल्टा थाना क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था, जिसके दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई और पुलिस पर पथराव तथा हमले की घटनाएं सामने आईं। पुलिस के अनुसार पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक थाना परिसर के आसपास जमा हो गए थे। हालात बिगड़ने पर पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए लाठीचार्ज करना पड़ा। कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी बचने के लिए पास के तालाब में भी कूद गए। घटना के बाद पुलिस ने कई धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी। भारत-नेपाल सीमा से पकड़ा गया था जहांगीर खान टीएमसी नेता जहांगीर खान को इससे पहले भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ विभिन्न मामलों में कम से कम सात आपराधिक केस दर्ज बताए जाते हैं। वह फाल्टा विधानसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार के रूप में चुनाव भी लड़ चुके हैं और क्षेत्र की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। हिंसा मामले में लगातार हो रही गिरफ्तारियां फाल्टा हिंसा मामले में पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। पुलिस का आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने थाने का घेराव कर हिरासत में बंद जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर हमला भी किया गया। इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए शुवेंदु अधिकारी ने कहा कि पुलिस और सुरक्षा बलों पर हमले के संबंध में तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं और आरोपियों के खिलाफ कड़ी धाराओं में कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि अब तक 25 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें 12 पुलिस हिरासत और 13 न्यायिक हिरासत में हैं।
कोडरमा। झारखंड के कोडरमा जिले में अवैध शराब तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। बिहार भेजी जा रही अंग्रेजी शराब की खेप को जब्त करते हुए पुलिस ने टाटा मैजिक वाहन से 48 बोतल शराब बरामद की और दो तस्करों को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और उत्पाद अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। गुप्त सूचना पर हुई कार्रवाई पुलिस अधीक्षक कुमार शिवाशीष के निर्देश पर जिले में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और तस्करी के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में पुलिस को सूचना मिली कि डोमचांच की ओर से सतगावां होते हुए बिहार ले जाने के लिए एक टाटा मैजिक में शराब की खेप लोड की गई है। सूचना के बाद ढाब थाना प्रभारी बमबम कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम का गठन कर ढाब चौक पर वाहन जांच अभियान शुरू किया गया। पुलिस को देख भागने लगे तस्कर जांच के दौरान संदिग्ध टाटा मैजिक को रोकने का प्रयास किया गया, लेकिन चालक ने वाहन की रफ्तार बढ़ाकर भागने की कोशिश की। कुछ दूरी पर वाहन छोड़कर चालक और उपचालक पैदल फरार होने लगे। पुलिस ने पीछा कर दोनों को पकड़ लिया और वाहन की तलाशी ली। 48 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद तलाशी में टाटा मैजिक से कुल 48 बोतल अंग्रेजी शराब बरामद हुई। इनमें 42 बोतल रॉयल स्टैग (750 एमएल) और 6 बोतल आइकोनिक व्हाइट शामिल हैं। पूछताछ के दौरान आरोपी शराब परिवहन से संबंधित कोई वैध दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान बिहार के नालंदा निवासी चंदन कुमार (19) और नवादा निवासी अमन कुमार (24) के रूप में हुई है। जांच जारी, एसपी ने दी सख्त चेतावनी इस मामले में ढाब थाना में कांड संख्या 04/26 दर्ज कर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। एसपी कुमार शिवाशीष ने कहा कि जिले में अवैध शराब कारोबार और तस्करी के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून तोड़ने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी और किसी भी तस्कर को बख्शा नहीं जाएगा।
गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले के मधुबन थाना क्षेत्र स्थित दलान चलकरी गांव में हुए चर्चित दंपती हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। जांच में सामने आया है कि इस दोहरे हत्याकांड के पीछे अंधविश्वास, जादू-टोना की आशंका और पुराना जमीन विवाद मुख्य कारण थे। पुलिस ने मामले में मृतक के ही रिश्तेदारों समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने हत्या में इस्तेमाल किए गए हथियार और खून से सने कपड़े भी बरामद किए हैं। विशेष टीम ने तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों से सुलझाई गुत्थी गिरिडीह के पुलिस अधीक्षक डॉ. बिमल कुमार ने बताया कि 2-3 मार्च की रात दलान चलकरी के तिरिलटांड़ टोला में पतिया हांसदा और उनकी पत्नी परनी देवी की धारदार हथियार से हत्या कर दी गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए डुमरी अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी आबिद खान के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। तकनीकी और मानवीय साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने पूरे मामले का खुलासा किया। गोतिया पक्ष के लोगों ने रची थी साजिश जांच में पता चला कि मृतक परिवार और गोतिया पक्ष के बीच लंबे समय से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इसके साथ ही जादू-टोना को लेकर भी आपसी तनाव था। इसी रंजिश के चलते आरोपियों ने योजनाबद्ध तरीके से दंपती की हत्या की साजिश रची। पुलिस के अनुसार रमेश हांसदा, विजय हांसदा और पांडु हांसदा ने धारदार हथियार से हमला कर हत्या की, जबकि दोधमा हांसदा, बबलू हांसदा, मोती हांसदा और सिकरा हांसदा ने वारदात को अंजाम देने में सहयोग किया। हथियार और खून से सने कपड़े बरामद पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त एक लोहे की तलवार, दो लोहे के छुरे, खून के धब्बों वाले कपड़े और गमछे बरामद किए हैं। बरामद सामान को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जा रहा है। सभी सात आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस का कहना है कि वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे की जांच जारी है, ताकि अदालत में मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके।
कोलकाता: पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध बांग्लादेशी नागरिकों और फर्जी दस्तावेजों के नेटवर्क के खिलाफ राज्यव्यापी अभियान शुरू किया है। गृह विभाग के निर्देश पर पुलिस, खुफिया एजेंसियां और केंद्रीय सुरक्षा बल संयुक्त रूप से संवेदनशील इलाकों में जांच अभियान चला रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, खुफिया इनपुट के आधार पर उन क्षेत्रों की पहचान की जा रही है जहां फर्जी आधार कार्ड, वोटर आईडी और अन्य दस्तावेजों के जरिए संदिग्ध लोगों के रहने की आशंका है। अभियान केवल सीमावर्ती जिलों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कोलकाता समेत प्रमुख शहरी और औद्योगिक क्षेत्रों में भी एक साथ चलाया जाएगा। सीमावर्ती जिलों में विशेष निगरानी मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने वरिष्ठ पुलिस और खुफिया अधिकारियों के साथ बैठक कर अभियान की रूपरेखा तैयार की है। उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद और मालदा जैसे सीमावर्ती जिलों में विशेष जांच दल (SIT) गठित किए गए हैं, जो स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर दस्तावेजों की जांच कर रहे हैं। भारत-बांग्लादेश सीमा पर सुरक्षा बढ़ाई गई सीमा सुरक्षा बल (BSF) और राज्य पुलिस ने संयुक्त गश्त बढ़ा दी है। संवेदनशील सीमा क्षेत्रों में ड्रोन, थर्मल इमेजिंग कैमरों और अन्य आधुनिक तकनीकों की मदद से चौबीसों घंटे निगरानी की जा रही है, ताकि अवैध आवाजाही पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके। शहरी क्षेत्रों में भी पहचान सत्यापन अभियान कोलकाता, हावड़ा और हुगली के औद्योगिक क्षेत्रों, जूट मिलों और बड़े निर्माण स्थलों पर काम करने वाले श्रमिकों के पहचान पत्रों की भी जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि कुछ संदिग्ध व्यक्ति फर्जी पहचान के जरिए इन इलाकों में रह सकते हैं। फर्जी दस्तावेज नेटवर्क पर कार्रवाई पुलिस ने उत्तर 24 परगना के सीमावर्ती क्षेत्र से दो आरोपियों को गिरफ्तार करने का दावा किया है। जांच एजेंसियों के अनुसार, दोनों पर अवैध रूप से सीमा पार कराने और फर्जी भारतीय दस्तावेज उपलब्ध कराने वाले नेटवर्क से जुड़े होने का आरोप है। उनके कब्जे से कथित तौर पर कई फर्जी मुहरें और दस्तावेज बरामद किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभियान आगे भी जारी रहेगा और अवैध दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता के सुरेंद्रनाथ कॉलेज के बाद अब कांचड़ापाड़ा का एक इंग्लिश मीडियम स्कूल भी जांच के दायरे में आ गया है। कारण स्कूल से 1.77 करोड़ रुपये नकद बरामद होने से सनसनी फैल गई है। जांच के दौरान स्कूल परिसर के एक कमरे से बड़ी मात्रा में नकदी के अलावा कंडोम के पैकेट और एक सुसज्जित बेडरूम भी मिला। इस घटना ने पूरे इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया है और स्कूल प्रशासन पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। रातभर चली नोटों की गिनती पुलिस को स्कूल के अकाउंट्स विभाग से नकदी से भरे कई पैकेट मिले। बरामद राशि इतनी अधिक थी कि नोटों की गिनती के लिए मशीनों का इस्तेमाल करना पड़ा। बुधवार रात से गुरुवार सुबह तक चली गिनती के बाद कुल 1.77 करोड़ रुपये मिलने की पुष्टि हुई। मामले में अकाउंट्स विभाग के तीन कर्मचारियों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। बेडरूम और आपत्तिजनक सामान मिलने से बढ़ी जांच तलाशी के दौरान अधिकारियों को कार्यालय के पास एक एयर कंडीशंड और पूरी तरह सुसज्जित कमरा मिला, जिसमें बिस्तर, अलमारी और अन्य सुविधाएं मौजूद थीं। अलमारी की जांच में कंडोम के पैकेट मिलने के बाद मामला और अधिक चर्चा में आ गया। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि स्कूल परिसर में इस तरह की व्यवस्था किस उद्देश्य से की गई थी। राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू स्थानीय विधायक संदीप दास ने मामले को गंभीर बताते हुए आरोप लगाया कि स्कूल में भारी मात्रा में नकदी छिपाकर रखी गई थी। उन्होंने कुछ स्थानीय राजनीतिक नेताओं और स्कूल प्रबंधन से जुड़े लोगों पर भी सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है। स्कूल प्रबंधन ने दी सफाई स्कूल के प्रिंसिपल विकास चंद्र पाल ने कहा कि बरामद नकदी छात्रों की एडमिशन फीस से संबंधित है, जिसे विभिन्न कारणों से बैंक में जमा नहीं कराया जा सका था। वहीं कमरे में मिले बिस्तर को उन्होंने बीमार छात्रों के आराम के लिए बनाए गए कक्ष का हिस्सा बताया। कंडोम पैकेट मिलने पर उन्होंने कहा कि इसकी जांच की जाएगी कि वे वहां कैसे पहुंचे। जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है। नकदी के स्रोत, कमरे के उपयोग और बरामद सामान के संबंध में कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।
साहिबगंज। जिले में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजमहल पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। राजमहल थाना क्षेत्र के फुलवरिया पटाल बगीचा इलाके में छापेमारी कर पुलिस ने 13.7 ग्राम एमडीएमए (MDMA) ड्रग्स बरामद किया है। इस कार्रवाई में दो युवकों को गिरफ्तार किया गया, जिन्हें आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। सोमवार को आयोजित प्रेस वार्ता में एसडीपीओ विमलेश कुमार त्रिपाठी ने बताया कि पुलिस अधीक्षक को क्षेत्र में मादक पदार्थों की खरीद-बिक्री की गुप्त सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए तत्काल एक विशेष टीम गठित की गई और योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी अभियान चलाया गया। पुलिस को देखकर भागा आरोपी, तलाशी में मिला ड्रग्स छापेमारी के दौरान पुलिस टीम जब फुलवरिया पटाल बगीचा पहुंची, तो एक युवक संदिग्ध गतिविधि करते हुए भागने लगा। पुलिसकर्मियों ने उसका पीछा कर उसे पकड़ लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से 13.7 ग्राम एमडीएमए बरामद किया गया। पूछताछ में उसकी पहचान मुर्गीटोला निवासी 29 वर्षीय फकरुद्दीन शेख उर्फ मिंटु के रूप में हुई। पूछताछ के दौरान फकरुद्दीन ने इस कारोबार में फुलवरिया निवासी सलमान शेख की संलिप्तता की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सलमान शेख को भी गिरफ्तार कर लिया। दोनों आरोपियों से ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क और अन्य जुड़े लोगों के बारे में पूछताछ की जा रही है। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 और 27 के तहत मामला दर्ज किया है। एसडीपीओ ने कहा कि जिले में नशे के कारोबार को खत्म करने के लिए अभियान लगातार जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि युवाओं को नशे की ओर धकेलने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद एमडीएमए कहां से लाई गई थी और इसका नेटवर्क किन-किन क्षेत्रों तक फैला हुआ है।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता और फलता विधानसभा सीट से पूर्व उम्मीदवार जहांगीर को भारत-नेपाल सीमा के निकट से गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस के अनुसार, जहांगीर खान पर जबरन वसूली सहित कई गंभीर आरोप हैं और वह लंबे समय से फरार चल रहे थे। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि गिरफ्तारी उत्तरी बंगाल के भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से की गई। हालांकि सुरक्षा कारणों से गिरफ्तारी की सटीक जगह और ऑपरेशन से जुड़ी अन्य जानकारियां सार्वजनिक नहीं की गई हैं। बताया जा रहा है कि दक्षिण 24 परगना जिले के फलता थाने में उनके खिलाफ सात अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज हैं। हाईकोर्ट से राहत खत्म होने के बाद कार्रवाई मामले में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब Calcutta High Court ने 26 मई को जहांगीर खान को मिली अंतरिम सुरक्षा को रद्द कर दिया। इसके बाद पुलिस की कार्रवाई तेज हुई और उनकी तलाश के लिए कई स्थानों पर छापेमारी की गई। अंततः एसटीएफ ने उन्हें सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की। चुनावी हिंसा को लेकर भी रहे चर्चा में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान फलता सीट पर मतदान के समय हिंसा और नियमों के उल्लंघन के आरोपों के कारण जहांगीर खान सुर्खियों में रहे थे। चुनाव के दौरान उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा तैनात अधिकारियों को सार्वजनिक रूप से चुनौती दी थी, जिससे मामला काफी चर्चित हुआ था। विवाद बढ़ने के बाद इस सीट पर दोबारा मतदान भी कराया गया था। पार्टी ने बनाई दूरी चुनाव से पहले जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया था। हालांकि उस समय यह स्पष्ट नहीं हुआ था कि यह निर्णय पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर लिया गया था या व्यक्तिगत स्तर पर। बाद में All India Trinamool Congress ने स्पष्ट किया था कि यह उनका निजी फैसला था और पार्टी का इससे कोई संबंध नहीं है। पुलिस अब जहांगीर खान से पूछताछ कर रही है और उनके खिलाफ दर्ज मामलों की जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि मामले में कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पटना, एजेंसियां। पटना में मंगलवार रात खान सर की कोचिंग ग्लोबल स्टडीज पर हमला हुआ। हमले का वीडियो भी सामने आया है। वीडियो में कुछ लोग गार्ड को पीटते दिख रहे हैं। इस दौरान ईंट-पत्थर भी चलाए गए। पोस्टर भी फाड़ दिए। पुलिस ने ज्ञान बिंदु कोचिंग के डायरेक्टर रोशन आनंद समेत उनके दो सहयोगी अभिषेक और गौरव को गिरफ्तार किया है। तीनों से पुलिस पूछताछ कर रही है। गिरफ्तार आरोपी जायेंगे जेल टाउन DSP के मुताबिक, रौशन आनंद और उसके दोनों सहयोगियों को न्यायिक हिरासत में भेजने की तैयारी चल रही है। खान सर ने हमले का आरोप ज्ञान बिंदु के डायरेक्टर और कोचिंग के कर्मियों पर लगाया है। बिहार में बनेगी कोचिंग नीति इस घटना के बाद बिहार शिक्षा विभाग ने कोचिंग नीति बनाए जाने की घोषणा की है। अगले 3 महीने के भीतर कोचिंग नीति तैयार की जाएगी। इसके तहत सभी कोचिंग संस्थानों के लिए एक ‘मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट’ तैयार किया जाएगा।
रांची। रांची में सुरक्षित और शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन अब पूरी तरह से एक्शन मोड में है। जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त (DC Ranchi) मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर शहर के विभिन्न सार्वजनिक स्थलों पर बेवजह अड्डाबाजी, अनावश्यक जमावड़ा और नशापान करने वालों के खिलाफ अभियान चलाया गया। इस विशेष अभियान का नेतृत्व SDO सदर कुमार रजत ने किया। देर रात चली इस कार्रवाई से असामाजिक तत्वों और सड़क किनारे हुड़दंग करने वालों में हड़कंप मच गया। इन प्रमुख इलाकों में चली सघन जांच प्रशासनिक टीम ने शहर के उन संवेदनशील और प्रमुख चौक-चौराहों को टारगेट किया, जहां अक्सर युवाओं के जमावड़े और नशापान की शिकायतें मिलती हैं। अभियान के तहत मुख्य रूप से कचहरी चौक से लेकर बड़ा तालाब क्षेत्र, हरमू चौक, गाड़ीखाना चौक और उसके आसपास के इलाकों में जांच की गई। जांच के दौरान टीम ने सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर अनावश्यक रूप से खड़े लोगों से पूछताछ की और उन्हें वहां से हटाया। SDO कुमार रजत की युवाओं को सख्त चेतावनी निरीक्षण के दौरान कई जगहों पर युवकों का अनावश्यक जमावड़ा पाया गया। SDO सदर कुमार रजत ने खुद युवाओं को हिदायत दी और भविष्य के लिए सख्त चेतावनी भी जारी की। उन्होंने कहा: “सार्वजनिक स्थलों पर अनावश्यक भीड़ लगाना, नशापान करना और असामाजिक गतिविधियां न केवल कानून-व्यवस्था के लिए चुनौती हैं, बल्कि इससे आम नागरिकों की सुरक्षा भी खतरे में पड़ती है। अगर भविष्य में कोई भी कानून-व्यवस्था को प्रभावित करते हुए पाया गया, तो उसके खिलाफ नियमानुसार कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जारी रहेगा जिला प्रशासन का अभियान रांची जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कोई एक दिन की कार्रवाई नहीं है। शहर में अनुशासन और सुरक्षा का माहौल बनाए रखने के लिए अड्डाबाजी और अवांछित गतिविधियों के खिलाफ यह अभियान आगे भी निरंतर जारी रहेगा। प्रमुख हॉटस्पॉट्स पर पुलिस और प्रशासन की पैनी नजर रहेगी। युवाओं से रचनात्मक कार्यों में जुड़ने की अपील प्रशासन ने न केवल कार्रवाई की, बल्कि युवाओं को सही राह दिखाने की कोशिश भी की है। जिला प्रशासन ने रांची के युवाओं से अपील की है कि वे अपनी ऊर्जा को सकारात्मक और रचनात्मक कार्यों में लगाएं। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में सामाजिक उत्तरदायित्व निभाएं और रांची को एक स्वच्छ, सुरक्षित और व्यवस्थित शहर बनाने में अपना सक्रिय योगदान दें।
गुमला। गुमला जिले में करीब 25 वर्षों से फरार चल रहा कुख्यात अपराधी रामदेव उरांव आखिरकार मुख्यधारा में लौट आया है। हत्या, अपहरण, रंगदारी, गोलीबारी और आगजनी जैसे गंभीर मामलों में वांछित रामदेव उरांव ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस इसे एक बड़ी सफलता मान रही है। लंबे समय से उसकी तलाश की जा रही थी और वह सुरक्षा एजेंसियों के लिए चुनौती बना हुआ था। दो दर्जन से अधिक मामलों में था आरोपी जानकारी के अनुसार, रामदेव उरांव के खिलाफ विभिन्न थानों में दो दर्जन से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उस पर हत्या, रंगदारी वसूलने, अपहरण और अन्य संगीन अपराधों में शामिल होने के आरोप हैं। वर्ष 2002 के आसपास से वह आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय था और गुमला सहित आसपास के कई क्षेत्रों में उसका प्रभाव माना जाता था। उसके नाम से लोगों में भय का माहौल बना रहता था। पुलिस के बढ़ते दबाव के बाद लिया फैसला सूत्रों के मुताबिक, लगातार पुलिस कार्रवाई और सुरक्षा एजेंसियों के बढ़ते दबाव के कारण रामदेव उरांव ने सरेंडर करने का निर्णय लिया। पिछले कुछ समय से पुलिस उसके नेटवर्क को कमजोर करने और उसके सहयोगियों पर नजर रखने में जुटी हुई थी। इसी दौरान उसने मुख्यधारा में लौटने की इच्छा जताई और अंततः पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पूछताछ में खुल सकते हैं कई राज पुलिस अधिकारियों का मानना है कि रामदेव उरांव से पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं। उसके नेटवर्क, सहयोगियों और पुराने आपराधिक मामलों से जुड़े कई रहस्यों से पर्दा उठने की संभावना है। जांच एजेंसियां अब उससे जुड़े मामलों की विस्तृत पड़ताल करने की तैयारी में हैं। लोगों ने ली राहत की सांस रामदेव उरांव के सरेंडर के बाद स्थानीय लोगों ने राहत महसूस की है। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि लंबे समय से उसके नाम का खौफ बना हुआ था। अब उम्मीद जताई जा रही है कि उसके आत्मसमर्पण के बाद इलाके में कानून-व्यवस्था और मजबूत होगी तथा शांति और सुरक्षा का माहौल बेहतर बनेगा।
नवादा, एजेंसियां। बिहार के नवादा जिले में अपराध और अवैध कारोबार के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। जिले के विभिन्न थाना क्षेत्रों में बीते 24 घंटे के दौरान छापेमारी और वाहन जांच अभियान चलाकर पुलिस ने हत्या के प्रयास, लूट और शराब तस्करी समेत कई मामलों में कुल 35 आरोपितों को गिरफ्तार किया है। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, हत्या के प्रयास के मामले में सबसे ज्यादा सात अभियुक्तों को पकड़ा गया है। वहीं मद्य निषेध अधिनियम के तहत छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा लूट, एससी-एसटी एक्ट और अन्य आपराधिक मामलों में भी कई आरोपियों को दबोचा गया है। शराब कारोबारियों पर सख्ती जिलेभर में अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान चलाया गया। इस दौरान पुलिस ने 12 लीटर महुआ शराब और 29.034 लीटर विदेशी शराब बरामद की। पुलिस का कहना है कि शराब तस्करी और अवैध कारोबार पर लगातार नजर रखी जा रही है और इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। वाहन जांच में वसूला गया जुर्माना अभियान के तहत पुलिस ने जिले में सघन वाहन जांच भी की। कुल 235 वाहनों की जांच के दौरान यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले चालकों से 50 हजार रुपये का जुर्माना वसूला गया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, वाहन जांच अभियान का उद्देश्य अपराध नियंत्रण के साथ-साथ सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है। बाइक, ऑटो और समरसेबुल बरामद कार्रवाई के दौरान पुलिस ने एक मोटरसाइकिल, एक ऑटो और एक समरसेबुल भी बरामद किया है। हालांकि इस दौरान वारंट और कुर्की निष्पादन की संख्या शून्य रही, लेकिन पुलिस ने गिरफ्तारी और बरामदगी को बड़ी उपलब्धि बताया है। नवादा पुलिस की इस कार्रवाई को जिले में कानून व्यवस्था मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि अपराधियों और अवैध कारोबार में शामिल लोगों के खिलाफ आगे भी लगातार सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
पाकुड़। पाकुड़ जिले के महेशपुर में पुलिस ने एक गैंगरेप मामले का खुलासा किया है। इस मामले में दो नाबालिगों सहित कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह जानकारी एसपी अनुदीप सिंह ने दी। एसपी ने बताया कि महेशपुर थाना क्षेत्र में 16 मई की रात एक 13 वर्षीय बच्ची के साथ सात लोगों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। अनुसंधान के बाद गिरफ्तारी महेशपुर एसडीपीओ विजय कुमार के नेतृत्व में एक छापेमारी टीम का गठन किया गया। टीम ने वैज्ञानिक, मानवीय और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर अनुसंधान शुरू किया। छापेमारी के दौरान अविनाश सोरेन, बबूटा सोरेन, अंसार टुडू, बबनु हेंब्रम और कार्तिक मुर्मू को गिरफ्तार किया गया। इस मामले में दो नाबालिगों को भी निरुद्ध किया गया है। आरोपियों से पूछताछ जारी एसपी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए पीड़ित नाबालिग से आवश्यक जानकारी ली गई। उन्होंने कहा कि यह एक गंभीर मामला था और टीम को इसके त्वरित उद्भेदन के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए थे। फिलहाल, सभी आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।
बोकारो। बोकारो पुलिस ने नशे के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नया मोड़ बस स्टैंड से 47 किलो गांजा बरामद किया है। पुलिस के अनुसार, तस्कर इस अवैध गांजा की खेप को बस के माध्यम से बिहार भेजने की तैयारी कर रहे थे। गुप्त सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में गांजा जब्त कर लिया गया, जबकि तस्कर मौके से फरार हो गए। बरामद गांजा की कीमत लगभग 5 से 7 लाख रुपये आंकी गई है। गुप्त सूचना के बाद बनी विशेष टीम सिटी डीएसपी Alok Ranjan ने बताया कि 9 मई की शाम पुलिस अधीक्षक Nathu Singh Meena को सूचना मिली थी कि बीएस सिटी थाना क्षेत्र स्थित नया मोड़ बस स्टैंड से अवैध गांजा बिहार भेजा जाने वाला है। सूचना मिलते ही एसपी के निर्देश पर डीएसपी आलोक रंजन के नेतृत्व में विशेष छापेमारी टीम गठित की गई। दो प्लास्टिक बोरों से मिला गांजा छापेमारी के दौरान पुलिस टीम ने पवनसुत बस पड़ाव के चबूतरे पर संदिग्ध अवस्था में रखे दो प्लास्टिक के बोरों की तलाशी ली। जांच में दोनों बोरों से 47 पैकेट में बंद करीब 47 किलो गांजा बरामद हुआ। पुलिस के मुताबिक तस्कर इसे बस के जरिए बिहार भेजने की फिराक में थे। एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज इस मामले में बीएस सिटी थाना कांड संख्या 89/26 दर्ज किया गया है। पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान दो संदिग्ध तस्करों के नाम सामने आए हैं। उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। पुलिस पूरे तस्करी नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है और मामले की गहन जांच जारी है।
जम्मू-कश्मीर की राजधानी Srinagar में सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी कामयाबी मिली है। पुलिस ने आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने के आरोप में चार ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) को गिरफ्तार किया है, जिनमें एक महिला भी शामिल है। हजरतबल इलाके से हुई गिरफ्तारी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, यह कार्रवाई बुधवार रात शहर के Hazratbal इलाके में की गई। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान जाहूर अहमद मीर, बशीर अहमद भट, गुलाम मोहम्मद भट और शाजिया मोहम्मद के रूप में हुई है। सभी आरोपी हजरतबल क्षेत्र के निवासी बताए जा रहे हैं। हथियार और नकदी बरामद सुरक्षा बलों ने आरोपियों के कब्जे से एक हैंड ग्रेनेड, AK-47 की 15 गोलियां, चार मोबाइल फोन और नकदी बरामद की है। अधिकारियों का कहना है कि ये लोग आतंकियों को जरूरी सामग्री और जानकारी उपलब्ध कराते थे, जिससे उनकी गतिविधियों को मदद मिलती थी। कड़े कानूनों के तहत मामला दर्ज पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ Unlawful Activities (Prevention) Act (UAPA) और आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। जांच एजेंसियां अब इस नेटवर्क के अन्य संभावित कनेक्शन की भी जांच कर रही हैं। सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता जारी अधिकारियों का कहना है कि घाटी में आतंकवाद के खिलाफ अभियान लगातार जारी है और ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस गिरफ्तारी को सुरक्षा बलों की एक महत्वपूर्ण सफलता माना जा रहा है, जिससे आतंकियों के नेटवर्क को कमजोर करने में मदद मिलेगी।
Noida के फेज-2 इलाके में कर्मचारियों का प्रदर्शन हिंसक हो गया। सैलरी बढ़ाने की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे श्रमिकों ने गाड़ियों और संपत्तियों में तोड़फोड़ की, साथ ही पत्थरबाजी भी की। पुलिस ने संभाला मोर्चा हालात बिगड़ते देख मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, जिसके बाद स्थिति धीरे-धीरे काबू में आई। चार दिन से चल रहा था प्रदर्शन Gautam Buddh Nagar में पिछले चार दिनों से श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन जारी था। प्रशासन पहले से ही अलर्ट मोड पर था और संभावित हिंसा को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। प्रशासन की तैयारी जिलाधिकारी Medha Rupam ने एक दिन पहले उद्योगपतियों और संगठनों के साथ बैठक कर हालात की समीक्षा की थी। अलग-अलग सेक्टरों में अधिकारी तैनात किए गए स्टेटिक मजिस्ट्रेट लगाए गए संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई
धनबाद। कोयलांचल के कुख्यात और लंबे समय से फरार चल रहे अपराधी प्रिंस खान और उसके गुर्गों के खिलाफ धनबाद पुलिस ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को पुलिस की टीम ने वासेपुर क्षेत्र में बड़ी दबिश दी। अदालत से प्राप्त आदेश के आलोक में पुलिस ने प्रिंस खान और उसके करीबी सहयोगी गोपी खान के घर पर सार्वजनिक उद्घोषणा (इश्तेहार) चस्पा की है। यह कदम अपराधियों को आत्मसमर्पण करने का अंतिम अवसर देने और उसके बाद उनकी संपत्तियों की कुर्की-जब्ती करने की कानूनी प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। अदालती आदेश के बाद वासेपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई धनबाद के वासेपुर स्थित कमरमखदूमी रोड पर शनिवार को पुलिस की हलचल काफी तेज रही। बैंक मोड़ थाना की पुलिस टीम ने भारी सुरक्षा के बीच प्रिंस खान और गोपी खान के आवासों को चिन्हित कर वहां नोटिस चिपकाया। बैंक मोड़ थाना के एएसआई सुनील कुमार रवि ने इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि ये दोनों आरोपी कई गंभीर आपराधिक मामलों में वांछित हैं और लगातार पुलिस की पकड़ से बाहर चल रहे हैं। इश्तेहार चस्पा होने के बाद अब पुलिस जल्द ही अदालत से कुर्की-जब्ती का वारंट प्राप्त कर इनकी संपत्तियों को कुर्क करने की दिशा में आगे बढ़ेगी। रंगदारी और आर्म्स एक्ट के दर्जनों मामलों में है तलाश प्रिंस खान पर धनबाद के विभिन्न थानों में रंगदारी, हत्या का प्रयास और आर्म्स एक्ट जैसे संगीन अपराधों के दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। एएसआई सुनील कुमार रवि के अनुसार, विशेष रूप से बैंक मोड़ थाना कांड संख्या 175/2023 और 277/2023 के तहत दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लंबे समय से छापेमारी कर रही है। पुलिस का मानना है कि इस कानूनी प्रक्रिया से फरार चल रहे अपराधियों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनेगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित अवधि के भीतर आरोपी न्यायालय या पुलिस के समक्ष उपस्थित नहीं होते हैं, तो उनके घरों की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी। एसएसपी की दोटूक: अपराधियों की धमकियों से न डरें व्यवसायी इस बड़ी कार्रवाई से एक दिन पहले, शुक्रवार को एसएसपी प्रभात कुमार ने जिले की कानून-व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण मासिक अपराध समीक्षा बैठक की थी। इस बैठक में पुलिस कप्तान ने अधिकारियों को लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन और संगठित अपराध के खात्मे के सख्त निर्देश दिए। मीडिया से बातचीत में एसएसपी ने जिले के व्यवसायियों और आम नागरिकों को आश्वस्त किया कि किसी भी अपराधी द्वारा मोबाइल या इंटरनेट के माध्यम से दी जाने वाली धमकियों से घबराने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि पुलिस हर धमकी को गंभीरता से ले रही है और अपराधियों को उनके अंजाम तक पहुँचाने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है। केंद्रीय एजेंसियों के साथ समन्वय और भविष्य की रणनीति प्रिंस खान के विदेश में छिपे होने की आशंकाओं के बीच, धनबाद पुलिस अब केंद्रीय जांच एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है। एसएसपी प्रभात कुमार ने बताया कि प्रिंस खान से जुड़े नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए उच्चस्तरीय रणनीति तैयार की गई है। पुलिस न केवल जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर रही है, बल्कि तकनीकी सर्विलांस और अंतरराज्यीय समन्वय के माध्यम से भी अपराधियों पर शिकंजा कस रही है। जिले में भय का माहौल पैदा करने वाले संगठित सिंडिकेट के खिलाफ पुलिस पहले से अधिक आक्रामक और त्वरित कार्रवाई करने की योजना पर काम कर रही है, ताकि कोयलांचल में शांति व्यवस्था बनी रहे।
संगारेड्डी (तेलंगाना): तेलंगाना के संगारेड्डी जिले से एक बेहद शर्मनाक और अमानवीय घटना सामने आई है, जहां एक आंगनवाड़ी शिक्षिका को पेड़ से बांधकर बेरहमी से पीटा गया। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या है पूरा मामला? घटना कंगटी मंडल के रासोल गांव की है पीड़िता की पहचान वसंत कुमारी के रूप में हुई है वह गांव में आंगनवाड़ी शिक्षिका के तौर पर कार्यरत हैं आरोप है कि कुछ ग्रामीणों ने उनके पति पर धोखाधड़ी का आरोप लगाया गुस्से में आकर शिक्षिका को ही निशाना बना लिया पेड़ से बांधकर की गई पिटाई आरोपियों ने पहले पीड़िता को पकड़कर पेड़ से बांध दिया फिर बेरहमी से मारपीट की मौके पर मौजूद कुछ लोगों ने विरोध किया, लेकिन आरोपी नहीं माने पुलिस ने दर्ज किया केस पीड़िता की शिकायत के बाद पुलिस ने 5 आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज किया सभी आरोपियों की पहचान कर ली गई है पुलिस का कहना है: जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार किया जाएगा पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए सख्त कार्रवाई होगी समाज में आक्रोश स्थानीय लोगों ने घटना की कड़ी निंदा की महिला संगठनों ने दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।