Rajat Patidar

Phil Salt expected to rejoin Royal Challengers Bengaluru ahead of IPL playoffs after recovering from finger injury
आरसीबी के लिए खुशखबरी, फिल सॉल्ट की IPL में वापसी तय

Phil Salt जल्द ही आईपीएल में वापसी करने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक Royal Challengers Bengaluru के स्टार ओपनर इस हफ्ते के आखिर तक भारत लौट सकते हैं। हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि वह शुक्रवार को Sunrisers Hyderabad के खिलाफ मुकाबले में खेलेंगे या नहीं। उंगली की चोट के कारण थे बाहर फिल सॉल्ट 18 अप्रैल को Delhi Capitals के खिलाफ मैच के दौरान चोटिल हो गए थे। बाउंड्री बचाने की कोशिश में डाइव लगाते समय उनके बाएं हाथ की उंगली में चोट लगी थी। इसके बाद से वह लगातार टीम से बाहर चल रहे थे। चोट के बाद सॉल्ट इंग्लैंड लौट गए थे, जहां उन्होंने परिवार के साथ समय बिताते हुए रिकवरी पर ध्यान दिया। प्लेऑफ में पहुंच चुकी है RCB फिल सॉल्ट की गैरमौजूदगी के बावजूद आरसीबी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए प्लेऑफ के लिए क्वालिफाई कर लिया है। टीम के क्वालिफायर-1 में पहुंचने की संभावना भी काफी मजबूत मानी जा रही है। ऐसे में टीम मैनेजमेंट प्लेऑफ से ठीक पहले कोई जोखिम नहीं लेना चाहेगा। यही वजह है कि अगर सॉल्ट पूरी तरह फिट नहीं होते हैं तो उन्हें सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ आराम दिया जा सकता है। जैकब बेथेल नहीं छोड़ पाए खास असर सॉल्ट की जगह इंग्लैंड के ही Jacob Bethell को मौका मिला था, लेकिन वह उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर सके। उन्होंने पिछले सात मैचों में सिर्फ 96 रन बनाए और उनका सर्वोच्च स्कोर 27 रन रहा। अब उनकी जगह पर खतरा मंडराता दिख रहा है, खासकर तब जब Venkatesh Iyer ने पंजाब किंग्स के खिलाफ शानदार नाबाद 73 रन की पारी खेलकर अपनी दावेदारी मजबूत कर दी है। कप्तान रजत पाटीदार की भी वापसी संभव आरसीबी के कप्तान Rajat Patidar भी जल्द वापसी कर सकते हैं। पिछले मैच में Kartik Tyagi की तेज बाउंसर हेलमेट पर लगने के बाद वह धर्मशाला नहीं गए थे। स्टैंड-इन कप्तान Jitesh Sharma ने मैच के बाद बताया कि पाटीदार की हालत अब बेहतर है और वह शुक्रवार के मैच तक टीम से जुड़ सकते हैं। अगर फिल सॉल्ट और रजत पाटीदार दोनों वापसी करते हैं, तो प्लेऑफ से पहले आरसीबी के सामने प्लेइंग इलेवन को लेकर दिलचस्प चयन चुनौती खड़ी हो सकती है।  

surbhi मई 20, 2026 0
RCB players look disappointed after defeat to LSG during crucial IPL 2026 playoff race clash
IPL 2026: LSG से हार के बाद मुश्किल में RCB, जानें अब कैसे पहुंचेगी टॉप-2 में

लगातार दूसरी हार से बिगड़ा समीकरण Royal Challengers Bengaluru को Lucknow Super Giants के खिलाफ मिली हार ने आईपीएल 2026 प्लेऑफ की रेस को और रोमांचक बना दिया है। रजत पाटीदार की कप्तानी वाली RCB अब अंक तालिका में तीसरे स्थान पर खिसक गई है। सीजन की शुरुआत में टीम ने पहले पांच मैचों में चार जीत दर्ज कर टॉप-2 की मजबूत दावेदार मानी जा रही थी, लेकिन लगातार दो हार के बाद अब स्थिति पहले जैसी आसान नहीं रही। SRH और PBKS बने बड़ी चुनौती इस समय Sunrisers Hyderabad और Punjab Kings अंक तालिका में RCB से ऊपर मौजूद हैं। खास बात यह है कि बेंगलुरु को अभी अपने बचे हुए मुकाबलों में पंजाब और हैदराबाद दोनों से भिड़ना है। ऐसे में टीम की टॉप-2 की उम्मीद अब इन मैचों पर काफी हद तक निर्भर करेगी। RCB को अभी मुंबई इंडियंस, कोलकाता नाइट राइडर्स, पंजाब किंग्स और सनराइजर्स हैदराबाद के खिलाफ मुकाबले खेलने हैं। क्या कहते हैं RCB के प्लेऑफ समीकरण? सभी 4 मैच जीते तो पक्का टॉप-2 अगर RCB अपने बाकी चारों मुकाबले जीत लेती है, तो टीम के 20 अंक हो जाएंगे। आईपीएल के 10 टीमों वाले फॉर्मेट में 20 अंक आमतौर पर टॉप-2 में जगह पक्की करने के लिए काफी माने जाते हैं। 3 मैच जीतने पर भी मजबूत दावेदारी अगर बेंगलुरु 4 में से 3 मुकाबले जीतती है, तो टीम 18 अंकों तक पहुंच जाएगी। RCB का नेट रन रेट (+1.234) फिलहाल काफी मजबूत है, जो उसे बड़ा फायदा दे सकता है। ऐसे में अगर दूसरी टीमें भी 18 अंकों पर खत्म करती हैं, तो बेहतर NRR के कारण RCB आगे निकल सकती है। हालांकि इसके लिए पंजाब और हैदराबाद जैसी टीमों को सीधे मुकाबलों में हराना बेहद जरूरी होगा। सिर्फ 2 जीत मिली तो बढ़ जाएगी टेंशन अगर RCB अपने आखिरी चार मैचों में सिर्फ दो जीत दर्ज करती है, तो टीम 16 अंकों तक ही पहुंच पाएगी। ऐसी स्थिति में टॉप-2 में पहुंचने के लिए उसे दूसरी टीमों के परिणामों पर निर्भर रहना पड़ेगा। साथ ही Rajasthan Royals और Gujarat Titans जैसी टीमों की हार भी जरूरी हो जाएगी। अब हर मैच बन गया ‘करो या मरो’ RCB के लिए आने वाले मुकाबले बेहद अहम माने जा रहे हैं। अगर टीम एक और मैच हारती है, तो वह टॉप-2 की रेस से बाहर होकर तीसरे या चौथे स्थान के लिए संघर्ष करती नजर आ सकती है। वहीं लगातार जीत टीम को सीधे क्वालिफायर-1 तक पहुंचा सकती है।  

surbhi मई 8, 2026 0
Jason Holder takes controversial catch against RCB during IPL 2026 clash in Ahmedabad
IPL 2026 में विवादित कैच पर बवाल: होल्डर का कैच ‘आउट या नॉट आउट’? एक्सपर्ट्स ने उठाए सवाल

अहमदाबाद में खेले गए Indian Premier League 2026 के मुकाबले में Gujarat Titans और Royal Challengers Bangalore के बीच एक बड़ा विवाद देखने को मिला। मैच के दौरान Jason Holder द्वारा लिया गया कैच चर्चा का केंद्र बन गया, जिस पर अब क्रिकेट एक्सपर्ट्स भी सवाल उठा रहे हैं। क्या सच में क्लीन कैच था? यह घटना उस समय हुई जब Rajat Patidar बल्लेबाजी कर रहे थे। Jason Holder ने दौड़ते हुए शानदार डाइव लगाकर कैच पकड़ा, लेकिन रिप्ले में ऐसा लगा कि स्लाइड करते वक्त गेंद जमीन को छू गई थी। RCB खेमे ने इस फैसले पर कड़ा विरोध जताया, जिसमें Virat Kohli सबसे आगे नजर आए। खिलाड़ियों ने अंपायर से दोबारा जांच की मांग भी की। टीवी अंपायर ने दिया ‘आउट’ का फैसला टीवी अंपायर Abhijit Bhattacharya ने रिप्ले देखने के बाद फैसला सुनाया कि Jason Holder ने गेंद पर पर्याप्त नियंत्रण बना लिया था, इसलिए Rajat Patidar को आउट दिया गया। इस फैसले के बाद RCB का स्कोर 79/3 हो गया। एक्सपर्ट्स की राय: ‘नॉट आउट’ होना चाहिए था मैच के बाद विश्लेषण के दौरान Ian Bishop और Abhinav Mukund ने इस फैसले पर असहमति जताई। इयान बिशप का कहना था कि कैच लेते वक्त सिर्फ गेंद पर नियंत्रण ही नहीं, बल्कि शरीर पर नियंत्रण भी जरूरी होता है। उनके अनुसार, जब होल्डर स्लाइड कर रहे थे, तब पूरी तरह नियंत्रण में नहीं थे और इस दौरान गेंद के जमीन से छूने की आशंका थी। वहीं अभिनव मुकुंद ने साफ कहा, “अगर गेंद जमीन को छूती है, तो वह कैच नहीं माना जाना चाहिए। जो रिप्ले हमने देखा, उसमें साफ लग रहा था कि गेंद जमीन से टकराई।” क्या कहते हैं क्रिकेट के नियम? Marylebone Cricket Club के नियमों के अनुसार, कैच तभी वैध माना जाता है जब फील्डर गेंद और अपने शरीर दोनों पर पूरा नियंत्रण बनाए रखे और गेंद जमीन को छूने से पहले पूरी तरह नियंत्रित हो। इसी नियम की व्याख्या को लेकर यह विवाद खड़ा हुआ है–क्या होल्डर ने गेंद पर पूरा नियंत्रण बना लिया था या नहीं? मैच पर असर इस विवादित फैसले के बाद मैच का रुख पूरी तरह बदल गया। Royal Challengers Bangalore 155 रन पर सिमट गई, जिसे Gujarat Titans ने आसानी से हासिल कर लिया।  

surbhi मई 1, 2026 0
Virat Kohli celebrating after scoring runs for RCB against Lucknow Super Giants in IPL 2026
IPL 2026: विराट कोहली बने ऑरेंज कैप होल्डर, रन मशीन ने फिर दिखाई क्लास

  आईपीएल 2026 में एक बार फिर Virat Kohli का बल्ला जमकर बोल रहा है। Royal Challengers Bengaluru (RCB) के स्टार बल्लेबाज कोहली ने लखनऊ के खिलाफ शानदार पारी खेलते हुए ऑरेंज कैप अपने नाम कर ली है। इम्पैक्ट प्लेयर बनकर भी छाए कोहली Lucknow Super Giants के खिलाफ मुकाबले में कोहली ने 34 गेंदों में 49 रन की अहम पारी खेली और टीम को 147 रन का लक्ष्य हासिल करने में मदद की। यह पहली बार था जब RCB ने उन्हें Impact Player के रूप में इस्तेमाल किया। इस पारी के साथ कोहली के इस सीजन में कुल 228 रन हो गए हैं, जिससे वह रन बनाने वालों की सूची में पहले स्थान पर पहुंच गए हैं। खास बात यह है कि कोहली हाल ही में घुटने में दर्द से जूझ रहे थे, फिर भी उन्होंने मैदान पर आकर टीम के लिए अहम योगदान दिया। ऑरेंज कैप की रेस में कड़ी टक्कर कोहली के बाद दूसरे स्थान पर Heinrich Klaasen हैं, जो Sunrisers Hyderabad के लिए खेलते हुए 224 रन बना चुके हैं। तीसरे स्थान पर RCB के कप्तान Rajat Patidar पहुंच गए हैं, जिन्होंने लखनऊ के खिलाफ 13 गेंदों में 27 रन की तेज पारी खेली। इसके अलावा Ishan Kishan और Vaibhav Sooryavanshi भी 200+ रन के आंकड़े को पार कर चुके हैं, जिससे इस सीजन की रन रेस और रोमांचक हो गई है। पर्पल कैप की दौड़ भी दिलचस्प गेंदबाजी में Anshul Kamboj (Chennai Super Kings) और Prasidh Krishna (Gujarat Titans) 10-10 विकेट के साथ टॉप पर बने हुए हैं। उनके पीछे Ravi Bishnoi (Rajasthan Royals) और Prince Yadav (LSG) 9-9 विकेट लेकर दबाव बनाए हुए हैं। वहीं Bhuvneshwar Kumar और Krunal Pandya 7-7 विकेट के साथ रेस में बने हुए हैं। खास बात यह है कि क्रुणाल इस सीजन के टॉप विकेट-टेकर्स में इकलौते फिंगर स्पिनर हैं। सीजन होता जा रहा रोमांचक IPL 2026 में बल्लेबाजों और गेंदबाजों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिल रही है। जहां एक तरफ कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ी फॉर्म में लौटे हैं, वहीं युवा खिलाड़ी भी लगातार चुनौती पेश कर रहे हैं। आने वाले मुकाबलों में ऑरेंज और पर्पल कैप की रेस और भी दिलचस्प होने वाली है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
RCB players celebrate victory over Mumbai Indians during IPL 2026 match at Mumbai stadium.
IPL 2026 Points Table: RCB ने पलटा मुकाबला, MI को घर में हराकर टॉप-3 में बनाई जगह

IPL 2026 के 20वें मुकाबले में Royal Challengers Bengaluru ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मुंबई Indians को 18 रनों से हराकर अंक तालिका में बड़ा उलटफेर कर दिया। इस जीत के साथ आरसीबी ने टॉप-3 में जगह बना ली, जबकि मुंबई इंडियंस आठवें स्थान पर खिसक गई। RCB की धमाकेदार बल्लेबाजी पहले बल्लेबाजी करते हुए आरसीबी ने आक्रामक शुरुआत की। Virat Kohli और फिल सॉल्ट ने पहले विकेट के लिए 120 रनों की साझेदारी कर टीम को मजबूत आधार दिया। कोहली ने 50 रनों की अहम पारी खेली, जबकि सॉल्ट ने 78 रन बनाकर मुंबई के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। इसके बाद Rajat Patidar ने सिर्फ 20 गेंदों में 53 रन ठोककर मैच पूरी तरह आरसीबी की ओर मोड़ दिया। अंत में टिम डेविड ने 16 गेंदों में नाबाद 34 रन बनाकर टीम का स्कोर 240 तक पहुंचा दिया। लक्ष्य का पीछा करते हुए लड़खड़ाई MI 241 रनों के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी मुंबई इंडियंस की शुरुआत अच्छी रही, लेकिन जल्द ही टीम को बड़ा झटका लगा। Rohit Sharma 19 रन बनाकर चोटिल हो गए और मैदान छोड़ना पड़ा, जिससे टीम की लय टूट गई। रयान रिकेल्टन (37) ने कुछ अच्छे शॉट लगाए, जबकि कप्तान Suryakumar Yadav 33 रन बनाकर आउट हो गए। तिलक वर्मा भी प्रभाव छोड़ने में नाकाम रहे। गेंदबाजी में RCB का दबदबा मध्य ओवरों में Suyash Sharma के दो अहम विकेटों ने मैच का रुख बदल दिया। वहीं Krunal Pandya ने किफायती गेंदबाजी करते हुए 4 ओवर में सिर्फ 26 रन देकर दबाव बनाए रखा। हालांकि अंत में शेरफेन रदरफोर्ड ने 71* रनों की विस्फोटक पारी खेलकर मैच को रोमांचक बनाया, लेकिन टीम को जीत नहीं दिला सके। मुंबई इंडियंस 20 ओवर में 222/5 तक ही पहुंच सकी। पॉइंट्स टेबल पर असर इस जीत के साथ आरसीबी ने न केवल मैच जीता, बल्कि अंक तालिका में अपनी स्थिति भी मजबूत कर ली। वहीं मुंबई इंडियंस के लिए प्लेऑफ की राह अब और चुनौतीपूर्ण हो गई है।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
Virat Kohli with RCB teammates as Padikkal and Venkatesh Iyer compete for number 3 spot
IPL 2026: ओपनिंग तय, लेकिन नंबर-3 पर सस्पेंस बरकरार - RCB में इन दो धुरंधरों के बीच कड़ी टक्कर

Royal Challengers Bengaluru के लिए IPL 2026 से पहले टीम कॉम्बिनेशन का सबसे बड़ा सवाल नंबर-3 बल्लेबाजी को लेकर खड़ा हो गया है। जहां ओपनिंग जोड़ी लगभग तय मानी जा रही है, वहीं तीसरे नंबर पर कौन उतरेगा, इस पर फैंस और एक्सपर्ट्स की नजरें टिकी हैं। कोहली-साल्ट करेंगे पारी की शुरुआत इस सीजन में Virat Kohli और Phil Salt ओपनिंग करते नजर आएंगे। पिछले सीजन में इस जोड़ी ने टीम को कई मजबूत शुरुआत दिलाई थी, जिससे इस बार भी उनसे बड़ी उम्मीदें हैं। नंबर-3 के लिए दो बड़े दावेदार तीसरे नंबर के लिए टीम के पास दो विस्फोटक बल्लेबाज मौजूद हैं: Devdutt Padikkal   Venkatesh Iyer   दोनों ही खिलाड़ी मैच का रुख पलटने की क्षमता रखते हैं और पहले भी IPL में शानदार प्रदर्शन कर चुके हैं। पडिक्कल बनाम अय्यर: किसे मिलेगा मौका? पडिक्कल पिछले सीजन में इसी नंबर पर खेल चुके हैं और कुछ अहम पारियां भी खेली थीं। वहीं, अय्यर के पास भी फर्स्ट डाउन आकर आक्रामक बल्लेबाजी करने का अनुभव है, खासकर KKR के लिए उन्होंने कई बार यह भूमिका निभाई है। RCB ने अय्यर को इस सीजन ऑक्शन में करीब 7 करोड़ रुपये में खरीदा,जिससे टीम मैनेजमेंट का उनकी क्षमता पर पूरा भरोसा स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। क्या कहते हैं एक्सपर्ट? पूर्व भारतीय क्रिकेटर Suresh Raina का मानना है कि टीम मैनेजमेंट पडिक्कल को नंबर-3 पर बरकरार रख सकती है। रैना के मुताबिक, लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन और टीम बैलेंस को ध्यान में रखते हुए यह फैसला लिया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बेंगलुरु की पिचें अय्यर के खेल के अनुकूल हैं। टीम कॉम्बिनेशन पर असर अगर अय्यर को नंबर-3 पर मौका मिलता है, तो पडिक्कल की भूमिका पर सवाल खड़े हो सकते हैं। वहीं, कप्तान Rajat Patidar को मिडिल ऑर्डर में अपनी जगह तय करनी होगी। IPL 2026 का आगाज Indian Premier League 2026 का आगाज 28 मार्च से होने जा रहा है, जहां पहले मुकाबले में RCB की भिड़ंत सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) से होगी। डिफेंडिंग चैंपियन RCB के सामने इस बार खिताब बचाने की बड़ी चुनौती होगी।  

surbhi मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi मई 15, 2026 0