Royal Challengers Bengaluru ने आईपीएल 2026 के पहले क्वालीफायर में दमदार प्रदर्शन करते हुए Gujarat Titans को 92 रन से हराकर फाइनल में अपनी जगह पक्की कर ली। इस जीत के साथ आरसीबी लगातार दूसरी बार आईपीएल फाइनल में पहुंचने में सफल रही है। वहीं हार के बावजूद गुजरात टाइटंस के पास अब भी फाइनल में पहुंचने का एक और मौका रहेगा।
धर्मशाला में खेले गए इस मुकाबले में गुजरात टाइटंस ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया, लेकिन आरसीबी के बल्लेबाजों ने इस फैसले को पूरी तरह गलत साबित कर दिया।
पहले बल्लेबाजी करने उतरी आरसीबी की शुरुआत अच्छी नहीं रही और Venkatesh Iyer 19 रन बनाकर जल्दी आउट हो गए। इसके बाद Virat Kohli और Devdutt Padikkal ने टीम की पारी को संभाला।
दोनों बल्लेबाजों के बीच 72 रन की अहम साझेदारी हुई। विराट कोहली ने 43 रन की उपयोगी पारी खेली, जबकि देवदत्त पडिक्कल 30 रन बनाकर आउट हुए।
मध्यक्रम में कप्तान Rajat Patidar ने ऐसी बल्लेबाजी की जिसने मैच का पूरा रुख बदल दिया। उन्होंने Krunal Pandya के साथ मिलकर 95 रन की शानदार साझेदारी की।
क्रुणाल पांड्या 43 रन बनाकर आउट हुए, लेकिन पाटीदार एक छोर पर डटे रहे और गुजरात के गेंदबाजों की जमकर धुनाई की। उन्होंने सिर्फ 33 गेंदों में 93 रन की विस्फोटक पारी खेली, जिसमें 9 छक्के और 5 चौके शामिल रहे। उनकी इस पारी की बदौलत आरसीबी ने 20 ओवर में 254 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।
गुजरात की ओर से Kagiso Rabada और Jason Holder ने 2-2 विकेट हासिल किए।
255 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करने उतरी गुजरात टाइटंस की शुरुआत बेहद खराब रही। Sai Sudharsan 14 रन बनाकर आउट हुए, जबकि कप्तान Shubman Gill सिर्फ 2 रन बनाकर पवेलियन लौट गए।
इसके बाद Jos Buttler 29 रन बनाकर आउट हुए। निशांत सिंधु 5 रन और जेसन होल्डर बिना खाता खोले आउट हो गए। पावरप्ले में ही गुजरात ने 5 विकेट गंवा दिए और वहीं से मुकाबला लगभग आरसीबी की पकड़ में चला गया।
लगातार विकेट गिरने के बीच Rahul Tewatia ने जरूर संघर्ष किया और 68 रन की शानदार पारी खेली, लेकिन उन्हें दूसरे छोर से कोई खास समर्थन नहीं मिला।
Gujarat Titans की पूरी टीम 162 रन पर सिमट गई और आरसीबी ने मुकाबला 92 रन से अपने नाम कर लिया।
आरसीबी की ओर से Jacob Duffy ने 3 विकेट लिए। Rasikh Salam, Bhuvneshwar Kumar और Krunal Pandya ने 2-2 विकेट चटकाए, जबकि Josh Hazlewood को 1 सफलता मिली।
लगातार दूसरी बार फाइनल में पहुंचने के बाद आरसीबी का आत्मविश्वास काफी ऊंचा होगा। टीम की बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों ही विभाग शानदार लय में नजर आ रहे हैं। अब फैंस को उम्मीद होगी कि इस बार बेंगलुरु की टीम अपना पहला आईपीएल खिताब जीतने में सफल हो सके।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड टी20 लीग में पहला मैच रांची टाइटंस ने जीत लिया है। लो स्कोरिंग मैच में रांची ने छोटानागपुर रॉयल्सस को 5 रन से हरा दिया। टीम इंडिया के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धौनी ने भी इस मुकाबले को देखा और मजा लिया। छोटानागपुर ने जीता टॉस, चुनी बॉलिंग छोटानागपुर रॉयल्स ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी का फैसला किया। रांची टाइटंस ने राजदीप के 40, युवराज कुमार के 38, सत्या के 25 और शिखर के महज 12 गेंदों पर खेली गई 23 रनों की पारी की बदौलत निर्धारित 20 ओवर में सभी विकेट खोकर 155 रन बनाए। छोटानागपुर रॉयल्स को 156 रनों का लक्ष्य मिला था। ऋत्विक की शानदार गेंदबाजी छोटानागपुर रॉयल्स के लिए ऋत्विक ने शानदार गेंदबाजी की और 4 ओवर के अपने स्पैल में महज 17 रन देकर 6 बल्लेबाजों को आउट किया। सोनू को 2 विकेट मिले, जबकि चंदन और सुप्रियो ने 1-1 बल्लेबाजों को आउट किया। अपनी गेंदबाजी से सबसे ज्यादा ऋत्विक ने प्रभावित किया। युवराज का ऑलराउंडर प्रदर्शन रांची टाइटंस के दिए 156 रनों के लक्ष्य का पीछा करती हुई छोटानागपुर रॉयल्स की टीम पूरे 20 ओवर खेली, लेकिन 9 विकेट के नुकसान पर 150 रन ही बना सकी। छोटानागपुर के लिए विराट सिंह ने सबसे ज्यादा 44 रन बनाए। इसके बाद टीम का किसी बल्लेबाज सबसे ज्यादा स्कोर महज 21 रन ही रहा। रांची के प्रिंस ने 4 ओवर में 39 रन देकर 3 बैटर्स को आउट किया। हालांकि, राजनदीप सबसे किफायती रहे जिन्होंने 4 ओवर में महज 17 रन दिए और 2 बल्लेबाजों को आउट भी किया। युवराज कुमार ने बल्ले से 38 रन बनाने के अलावा 2 विकेट भी हासिल किया। जतिन को 1 विकेट मिला।
नई दिल्ली: अफगानिस्तान के खिलाफ एकमात्र टेस्ट मैच में शानदार जीत दर्ज करने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम अब तीन मैचों की वनडे सीरीज के लिए तैयार है। 2027 वनडे विश्व कप की तैयारियों के मद्देनजर यह सीरीज टीम इंडिया के लिए नए खिलाड़ियों को परखने और सही संयोजन तलाशने का महत्वपूर्ण अवसर होगी। इस बीच भारतीय टीम से जुड़ी बड़ी खबर यह है कि अनुभवी बल्लेबाज विराट कोहली इस सीरीज का हिस्सा नहीं होंगे, जबकि रोहित शर्मा और हार्दिक पंड्या फिट होकर टीम में वापसी करने के लिए तैयार हैं। विराट कोहली की गैरमौजूदगी में किसे मिलेगा मौका? विराट कोहली की अनुपस्थिति में युवा बल्लेबाज यशस्वी जायसवाल को टीम में शामिल किया गया है। ऐसे में टीम प्रबंधन उन्हें शीर्ष क्रम में मौका दे सकता है। रोहित शर्मा फिटनेस टेस्ट पास कर चुके हैं और उनके शुभमन गिल के साथ पारी की शुरुआत करने की उम्मीद है। मिडिल ऑर्डर पर होगी बड़ी जिम्मेदारी मध्यक्रम में श्रेयस अय्यर अहम भूमिका निभा सकते हैं। उनके साथ विकेटकीपर बल्लेबाज केएल राहुल टीम को मजबूती देंगे। हार्दिक पंड्या ऑलराउंडर की भूमिका में टीम का संतुलन बनाएंगे, जबकि वाशिंगटन सुंदर बल्लेबाजी और स्पिन गेंदबाजी दोनों में योगदान दे सकते हैं। कुलदीप यादव संभालेंगे स्पिन विभाग स्पिन आक्रमण की जिम्मेदारी कुलदीप यादव के कंधों पर रहने की संभावना है। उनके साथ वाशिंगटन सुंदर दूसरे स्पिन विकल्प के तौर पर नजर आ सकते हैं। तेज गेंदबाजी विभाग में अर्शदीप सिंह के साथ प्रसिद्ध कृष्णा को मौका मिल सकता है। वहीं युवा खिलाड़ी गुरनूर ब्रार को भी डेब्यू का अवसर मिलने की चर्चा है। अफगानिस्तान के खिलाफ भारत की संभावित प्लेइंग XI रोहित शर्मा शुभमन गिल यशस्वी जायसवाल श्रेयस अय्यर केएल राहुल (विकेटकीपर) हार्दिक पंड्या वाशिंगटन सुंदर कुलदीप यादव अर्शदीप सिंह गुरनूर ब्रार प्रसिद्ध कृष्णा कप्तानी को लेकर स्थिति रिपोर्ट्स के अनुसार, श्रेयस अय्यर को सीमित ओवरों में नेतृत्व की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है, हालांकि अंतिम फैसला टीम प्रबंधन की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। सीरीज पर रहेंगी सभी की नजरें रोहित शर्मा और हार्दिक पंड्या की वापसी, विराट कोहली की गैरमौजूदगी और युवा खिलाड़ियों की मौजूदगी इस सीरीज को और दिलचस्प बना रही है। टीम इंडिया की नजरें न सिर्फ सीरीज जीतने पर होंगी, बल्कि भविष्य के लिए मजबूत संयोजन तैयार करने पर भी रहेंगी।
मुंबई, एजेंसियां। 13 जून से अफगानिस्तान के खिलाफ शुरू हो रही वनडे सीरीज के लिए रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या ने अपनी फिटनेस पास कर ली है। रोहित शर्मा आईपीएल में हैमस्ट्रिंग इंजरी का शिकार हो गए थे, तो वहीं, हार्दिक पांड्या को पीठ में चोट लगी थी। बीसीसीआई सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या ने फिटनेस क्लियरेंस पास कर लिया है और बहुत जल्द टीम के साथ जुड़ जाएंगे। टीम इंडिया अफगानिस्तान के खिलाफ पहला मुकाबला 13 जून को धर्मशाला में खेलेगी। विराट कोहली पूरी सीरीज से बाहर है इससे पहले बताया गया था कि सीनियर खिलाड़ी रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या की अफगानिस्तान के खिलाफ 3 मैचों की वनडे सीरीज में उपलब्धता बीसीसीआई के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से मिले फिटनेस क्लियरेंस पर निर्भर करेगा। रोहित शर्मा और हार्दिक पांड्या आईपीएल में मुंबई इंडियंस की टीम में शामिल थे। रोहित शर्मा को जहां लिंगरिंग हैमस्ट्रिंग इंजरी हुई थी तो वहीं ऑल-राउंडर हार्दिक पांड्या को पीठ में दर्द की शिकायत हुई थी। बता दें कि विराट कोहली, हैमस्ट्रिंग इंजरी की वजह से अफगानिस्तान के खिलाफ पूरी सीरीज से बाहर हो गए हैं। उन्हें खिताबी मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए खेलते हुए खिंचाव हुआ था। वह रन भागते समय लड़खड़ाते नजर आए थे। इंग्लैंड दौरे से वापसी करेंगे विराट कोहली! बीसीसीआई से जुड़े सूत्र ने बताया कि विराट कोहली आईपीएल के खिताबी मुकाबले में चोटिल हो गए थे और वह अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में उपलब्ध नहीं हैं। उनकी चोट को अभी हफ्ता ही बीता है, तो कहा नहीं जा सकता है कि कब तक वापसी कर पाएंगे। हालांकि, हम उम्मीद जताते हैं कि विराट कोहली इंग्लैंड के खिलाफ वनडे सीरीज से वापसी कर लेंगे, लेकिन अभी पक्का नहीं कहा जा सकता। फिजियो ने भी कोई टाइमलाइन तय नहीं किया है। विराट कोहली की जगह युवा यशस्वी जायसवाल को अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज में शामिल किया गया है। अफगानिस्तान के खिलाफ पहला वनडे मुकाबला 13 जून को धर्मशाला में खेला जाएगा। दूसरा मैच, 17 जून को लखनऊ में तो वहीं तीसरा वनडे चेन्नई में 20 जून को होगा है। अफगानिस्तान के खिलाफ टीम इंडिया अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज के लिए टीम इस प्रकार है। शुभमन गिल (कप्तान), रोहित शर्मा, यशस्वी जायसवाल, श्रेयस अय्यर (उप-कप्तान), केएल राहुल (विकेटकीपर), ईशान किशन (विकेटकीपर), हार्दिक पांड्या, नीतीश कुमार रेड्डी, वॉशिंगटन सुंदर, कुलदीप यादव, अर्शदीप सिंह, प्रसिद्ध कृष्णा, प्रिंस यादव, गुरनूर बराड़ और हर्ष दुबे।