Ranchi Municipal Corporation

रांची में सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाते नगर निगम की टीम
रांची में अतिक्रमण हटाने पर हंगामा, अमीन से धक्का-मुक्की; सरकारी जमीन पर बना दो मंजिला मकान ध्वस्त

रांची। सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए रांची नगर निगम की ओर से चलाए गए अभियान के दौरान गुरुवार को जमकर हंगामा हुआ। पीएचईडी चौक से बूटी मोड़ तक चले अभियान में नगर निगम की टीम सरकारी जमीन पर बने दो मंजिला मकान को हटाने पहुंची थी। कार्रवाई का स्थानीय लोगों ने विरोध किया। विरोध के दौरान बड़गाईं अंचल के अमीन के साथ धक्का-मुक्की की गई। वहीं, पीएचईडी की ओर से नगर निगम को उपलब्ध कराया गया नक्शा भी फाड़ दिया गया। करीब एक घंटे तक मौके पर हंगामा चलता रहा। हालांकि, विरोध के बावजूद नगर निगम की टीम ने कार्रवाई जारी रखी और जेसीबी की मदद से सरकारी जमीन पर बने दो मंजिला मकान को ध्वस्त कर दिया।   नोटिस के बाद भी नहीं हटाया गया था अतिक्रमण     नगर निगम के अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई से पहले संबंधित अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिया गया था। इसके बावजूद अवैध निर्माण नहीं हटाया गया। इसके बाद निगम की इंफोर्समेंट टीम ने कार्रवाई करते हुए मकान को तोड़ दिया। अभियान के दौरान दो अन्य अवैध संरचनाओं के खिलाफ भी कार्रवाई की गई।     पुलिस सहयोग को लेकर निगमकर्मियों ने जताई नाराजगी     कार्रवाई के दौरान निगम के अमीन और इंफोर्समेंट अधिकारियों से लोगों की बहस होती रही। मौके पर पीसीआर वैन और पुलिसकर्मी मौजूद थे। निगमकर्मियों का आरोप है कि पुलिस की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। उन्होंने कहा कि अतिक्रमण हटाने के दौरान पर्याप्त पुलिस सहयोग नहीं मिलने से ऐसे अभियान चलाने में परेशानी हो सकती है।     अलबर्ट एक्का चौक पर भी कार्रवाई     अतिक्रमण हटाओ अभियान के तहत नगर निगम की टीम ने अलबर्ट एक्का चौक पर भी कार्रवाई की। यहां अवैध होर्डिंग और लंबे समय से अनुपयोगी पड़े पुराने ट्रैफिक बूथ को हटाया गया। इसके अलावा मेन रोड चौड़ीकरण और पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए लगी पुरानी लोहे की रेलिंग को भी काटकर हटा दिया गया।   नगर निगम का कहना है कि इन अवैध और अनुपयोगी संरचनाओं को हटाने से सड़क पर यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और पैदल यात्रियों के लिए भी अधिक जगह उपलब्ध होगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 21, 2026 0
Modern public toilet facility planned at a busy junction in Ranchi with a dedicated feeding room for women
रांची के प्रमुख चौक-चौराहों पर बनेंगे अत्याधुनिक सार्वजनिक शौचालय, महिलाओं के लिए फीडिंग रूम की भी होगी सुविधा

रांची: राजधानी रांची में सार्वजनिक सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में नगर निगम ने नई पहल की है। शहर के प्रमुख चौक-चौराहों और महत्वपूर्ण स्थानों पर अत्याधुनिक सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएंगे। इन शौचालयों में सिर्फ शौचालय की सुविधा नहीं होगी, बल्कि लोगों की जरूरत को ध्यान में रखते हुए रेस्ट रूम और महिलाओं व छोटे बच्चों के लिए फीडिंग रूम जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। रांची नगर निगम ने इसके लिए सभी वार्ड पार्षदों और सुपरवाइजरों से अपने-अपने क्षेत्र में सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए उपयुक्त जमीन की जानकारी मांगी है। प्राप्त सूची के आधार पर निगम की टीम संबंधित स्थानों का निरीक्षण करेगी और जरूरत तथा उपलब्ध जमीन के आधार पर उपयुक्त जगहों का चयन किया जाएगा। ज्यादा भीड़ वाले स्थानों को मिलेगी प्राथमिकता नगर निगम की योजना के तहत ऐसे स्थानों पर सार्वजनिक शौचालय बनाए जाएंगे, जहां आम लोगों की आवाजाही अधिक रहती है और सार्वजनिक सुविधा की जरूरत महसूस होती है। प्रमुख चौक-चौराहों और व्यस्त इलाकों को प्राथमिकता दिए जाने की संभावना है। निगम का उद्देश्य पुराने और छोटे मॉड्यूलर शौचालयों की समस्या को दूर कर लोगों को अधिक सुविधाजनक और उपयोगी व्यवस्था उपलब्ध कराना है। रेस्ट रूम और फीडिंग रूम की होगी व्यवस्था प्रस्तावित अत्याधुनिक शौचालयों को केवल शौचालय तक सीमित नहीं रखा जाएगा। इनमें रेस्ट रूम जैसी अतिरिक्त सुविधाएं भी होंगी। महिलाओं और छोटे बच्चों की जरूरत को देखते हुए फीडिंग रूम की व्यवस्था भी की जाएगी। यह सुविधा खास तौर पर बाजारों, व्यस्त सड़कों और ऐसे सार्वजनिक स्थानों पर आने वाली महिलाओं के लिए उपयोगी साबित हो सकती है, जहां निजी और सुरक्षित स्थान आसानी से उपलब्ध नहीं होते। रांची में पहले से 272 सार्वजनिक शौचालय रांची नगर निगम क्षेत्र में वर्तमान में कुल 272 सार्वजनिक शौचालय मौजूद हैं। इनमें 187 मॉड्यूलर टॉयलेट और 85 सुलभ शौचालय शामिल हैं। इन मौजूदा शौचालयों के रखरखाव का काम फिलहाल सुलभ इंटरनेशनल द्वारा किया जा रहा है। हालांकि, निगम के अनुसार कई पुराने मॉड्यूलर टॉयलेट आकार में काफी छोटे हैं, जिसके कारण उनका इस्तेमाल आम लोगों के लिए उतना सुविधाजनक नहीं है। छोटे मॉड्यूलर टॉयलेट की जगह बेहतर व्यवस्था की तैयारी मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि शहर के कई चौक-चौराहों पर पहले से मॉड्यूलर टॉयलेट बनाए गए हैं, लेकिन उनके छोटे आकार के कारण आम लोगों को अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब अधिक सुविधाजनक और अत्याधुनिक सार्वजनिक शौचालय बनाने की योजना तैयार की जा रही है। अब वार्डों से जमीन की जानकारी मिलने के बाद स्थल निरीक्षण और चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। इसके बाद यह स्पष्ट होगा कि शहर के किन-किन इलाकों में नए सार्वजनिक शौचालयों का निर्माण किया जाएगा।  

surbhi अगस्त 21, 2026 0
Ranchi Municipal Corporation plans a land bank for public toilets and urban health centers across city wards
रांची में शौचालय और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए बनेगा लैंड बैंक, 43.25 करोड़ की योजनाओं को मिलेगी रफ्तार

रांची नगर निगम अब शहर में सार्वजनिक शौचालय और शहरी स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए जमीन की उपलब्धता सुनिश्चित करने को लेकर लैंड बैंक तैयार करेगा। इसका उद्देश्य जमीन से जुड़े विवाद, दस्तावेजों की कमी और स्थल चयन की अड़चन को पहले ही दूर करना है। इससे करोड़ों रुपये की प्रस्तावित योजनाओं को समय पर धरातल पर उतारने में मदद मिलेगी। 43.25 करोड़ रुपये से बनेंगे सार्वजनिक शौचालय स्वच्छ भारत मिशन 2.0 के तहत राज्य सरकार और नगर विकास एवं आवास विभाग ने रांची नगर निगम को विभिन्न प्रकार के सार्वजनिक शौचालयों के निर्माण के लिए 43.25 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। इसके अलावा निगम क्षेत्र में 47 अर्बन आयुष्मान आरोग्य मंदिर संचालित किए जाने हैं। इन योजनाओं के लिए उपयुक्त जमीन उपलब्ध कराना निगम के सामने बड़ी चुनौती है। इसी को देखते हुए लैंड बैंक तैयार करने का फैसला लिया गया है। हर वार्ड में होगी जमीन की जांच मंगलवार को नगर निगम सभागार में नगर आयुक्त सुशांत गौरव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में स्थल चयन को लेकर विस्तृत रणनीति बनाई गई। हर वार्ड में अधिकारियों और कर्मचारियों की टीम जाकर संभावित जमीन का निरीक्षण करेगी। सहायक नगर आयुक्त, नगर प्रबंधक, सहायक अभियंता, कनीय अभियंता और राजस्व निरीक्षक को इस काम की जिम्मेदारी दी जाएगी। निरीक्षण के दौरान जमीन की उपलब्धता, उपयोगिता, तकनीकी जरूरत, स्थानीय आपत्तियों और अन्य पहलुओं की जांच की जाएगी। खतियान और डीड समेत सुरक्षित होंगे जरूरी दस्तावेज नगर निगम के प्रस्तावित लैंड बैंक में सिर्फ जमीन की जानकारी दर्ज नहीं होगी, बल्कि उससे जुड़े खतियान, डीड और अन्य आवश्यक दस्तावेजों का भी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इससे भविष्य में किसी सार्वजनिक सुविधा के निर्माण के लिए जमीन तलाशने और उसके दस्तावेजों की जांच में कम समय लगेगा। साथ ही निर्माण शुरू होने के बाद जमीन को लेकर विवाद पैदा होने की आशंका भी कम होगी। स्थानीय लोगों और संगठनों से भी लिया जाएगा सहयोग जमीन के चयन को लेकर स्थानीय स्तर पर होने वाली आपत्तियों के समाधान के लिए एरिया लेवल फेडरेशन और सामुदायिक संगठनों को भी प्रक्रिया में शामिल किया जाएगा। निगम का प्रयास है कि किसी स्थल पर निर्माण शुरू करने से पहले ही स्थानीय लोगों की आपत्तियों और जमीन से जुड़े विवादों को दूर कर लिया जाए। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में बाद में रुकावट आने की संभावना कम होगी। स्वास्थ्य और स्वच्छता सुविधाओं के विस्तार पर जोर लैंड बैंक तैयार होने के बाद रांची नगर निगम के पास सार्वजनिक सुविधाओं के लिए चिन्हित जमीन का व्यवस्थित रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा। इससे सार्वजनिक शौचालयों के साथ-साथ शहरी स्वास्थ्य केंद्रों जैसी जरूरी सुविधाओं के विस्तार में भी मदद मिलने की उम्मीद है। नगर निगम की योजना है कि जमीन से जुड़ी औपचारिकताएं पहले पूरी कर ली जाएं, ताकि योजना स्वीकृत होने के बाद निर्माण कार्य शुरू करने में अनावश्यक देरी न हो।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
Sakhua Mahotsav in Ranchi
रांची में 8 अगस्त को होगा 'सखुआ महोत्सव', 10 हजार पौधे लगाए जाएंगे; मेयर ने तैयारियों की समीक्षा की

रांची। रांची नगर निगम राजधानी में पर्यावरण संरक्षण और हरित आवरण बढ़ाने के उद्देश्य से 8 अगस्त को 'सखुआ महोत्सव' का आयोजन करेगा। इस दौरान नगर निगम क्षेत्र में 10 हजार सखुआ के पौधे लगाने का लक्ष्य रखा गया है। महोत्सव की तैयारियों को लेकर शनिवार को नगर निगम सभागार में मेयर रोशनी खलखो ने समीक्षा बैठक की। बैठक में उपमहापौर नीरज कुमार, सभी वार्ड पार्षद और नगर निगम के अधिकारी मौजूद रहे।   10 हजार पौधों के रोपण का लक्ष्य   बैठक में महोत्सव के आयोजन की विस्तृत रूपरेखा पर चर्चा की गई। मेयर रोशनी खलखो ने कहा कि इस बार 'सखुआ महोत्सव' को बड़े स्तर पर आयोजित किया जाएगा। इसके लिए सामाजिक संगठनों, वार्ड पार्षदों और स्थानीय नागरिकों को अभियान से जोड़ा जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक स्थानों पर पौधरोपण किया जा सके।   सखुआ के साथ महुआ, पलाश और कुसुम के पौधे भी लगाए जाएंगे   मेयर ने बताया कि अभियान के दौरान केवल सखुआ ही नहीं, बल्कि झारखंड की प्राकृतिक विरासत से जुड़े महुआ, पलाश, कुसुम और डाहू जैसी प्रजातियों के पौधे भी लगाए जाएंगे। इसका उद्देश्य राज्य की जैव विविधता को बढ़ावा देना और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक करना है।   इक्कीसी महादेव से होगी महोत्सव की शुरुआत   नगर निगम के अनुसार, 'सखुआ महोत्सव' की शुरुआत चुटिया स्थित इक्कीसी महादेव परिसर से होगी। यहां साफ-सफाई और सौंदर्यीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है। नगर निगम इस स्थल को धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।   एक महीने तक चलेगा पौधरोपण अभियान   मेयर ने बताया कि पहले यह कार्यक्रम 1 अगस्त को प्रस्तावित था, लेकिन तैयारियां पूरी नहीं होने के कारण इसकी तिथि बढ़ाकर 8 अगस्त कर दी गई। महोत्सव की शुरुआत के बाद एक महीने तक शहर के सभी वार्डों में चरणबद्ध तरीके से पौधरोपण और जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा। वार्ड पार्षदों से अपने-अपने क्षेत्रों में पौधरोपण के लिए उपयुक्त स्थान चिन्हित करने को भी कहा गया है।

anjali kumari अगस्त 1, 2026 0
Albert Ekka Chowk
रांची के सबसे महंगे बाजार की 35 दुकानों का 13 साल से नहीं लिया गया किराया, हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

रांची। रांची के सबसे व्यस्त और महंगे व्यावसायिक इलाकों में शामिल अल्बर्ट एक्का चौक के पास स्थित 35 दुकानों के किराया विवाद का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। पिछले 13 वर्षों से इन दुकानों का किराया किसी भी सरकारी एजेंसी ने नहीं लिया है। इस स्थिति से चिंतित दुकानदारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया है। मामले की सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार, रांची नगर निगम, उपायुक्त, सदर अस्पताल प्रबंधन और क्षेत्रीय विकास प्राधिकरण (RRDA) से जवाब तलब किया है।   2012 के बाद बंद हो गई किराया वसूली   याचिकाकर्ता रंजीत कुमार समेत 15 दुकानदारों ने कोर्ट में बताया कि इन 35 दुकानों का निर्माण RRDA ने कराया था, जबकि आवंटन रांची नगर निगम ने किया था। वर्ष 2012 तक नगर निगम नियमित रूप से किराया वसूलता रहा, लेकिन उसके बाद बिना किसी स्पष्ट आदेश के किराया लेना बंद कर दिया गया। तब से न नगर निगम और न ही सदर अस्पताल प्रशासन ने किराया वसूला।   अधिकार क्षेत्र के विवाद में फंसे दुकानदार   दुकानदारों की ओर से पेश अधिवक्ता अनुराग कश्यप ने कहा कि किराया जमा नहीं होने के लिए दुकानदार जिम्मेदार नहीं हैं। विभिन्न सरकारी एजेंसियों के बीच अधिकार क्षेत्र को लेकर विवाद के कारण किराया जमा नहीं हो सका। दुकानदार लगातार संबंधित विभागों से किराया लेने की मांग करते रहे, लेकिन किसी ने स्पष्ट जिम्मेदारी नहीं ली।   बेदखली की आशंका से कोर्ट पहुंचे व्यापारी   दुकानदारों का कहना है कि वर्षों से किराया जमा नहीं होने के कारण उन्हें डर है कि भविष्य में लंबित किराये का हवाला देकर दुकानें खाली कराने की कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि समय-समय पर नगर निगम की टीम नापी करने पहुंचती है, जिससे उनकी चिंता और बढ़ जाती है।   सदर अस्पताल परिसर में बनी हैं दुकानें   दुकानदारों के अनुसार ये दुकानें सदर अस्पताल की बाउंड्री के भीतर स्थित हैं। पूर्व की सुनवाई में सदर अस्पताल प्रबंधन भी यह स्वीकार कर चुका है कि जमीन अस्पताल की है और दुकानों को अतिक्रमण नहीं माना जा सकता। दुकानों का निर्माण नियमानुसार हुआ था, जबकि अधूरा निर्माण दुकानदारों ने अपने खर्च पर पूरा कराया था।   हाईकोर्ट ने मांगा विस्तृत जवाब   हाईकोर्ट ने सभी संबंधित पक्षों को विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत अब यह तय करेगी कि इन दुकानों का वास्तविक प्रबंधन किस एजेंसी के पास है और भविष्य में किराया वसूलने का अधिकार किस विभाग को होगा। इस फैसले से वर्षों से अनिश्चितता झेल रहे दुकानदारों को राहत मिलने की उम्मीद है।

anjali kumari अगस्त 1, 2026 0
Morabadi Vending Zone
48 घंटे में दें जवाब, नहीं तो जाएगी दुकान ....... मोरहाबादी वेंडिंग जोन में निगम ने 80 दुकानदारों को दिया नोटिस

रांची। रांची नगर निगम ने मोरहाबादी वेंडिंग जोन-2 में नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच में अनियमितताएं मिलने के बाद निगम ने 80 वेंडरों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। सभी दुकानदारों को 48 घंटे के भीतर शपथ-पत्र के साथ अपना पक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है। निगम ने स्पष्ट किया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने या आरोप सही पाए जाने पर दुकान का आवंटन रद्द करने के साथ अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।   जांच में सामने आईं कई गंभीर अनियमितताएं नगर निगम के अनुसार, 13 जुलाई को मोरहाबादी वेंडिंग जोन-2 में विशेष जांच अभियान चलाया गया था। जांच के दौरान पाया गया कि कई लाभुकों ने निगम से आवंटित दुकानें दूसरे लोगों को किराये पर दे दी हैं। कुछ वेंडरों ने दुकान मिलने के बावजूद अब तक अपना व्यवसाय शुरू नहीं किया है। इसके अलावा कई दुकानदार निर्धारित नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। अधिकारियों को कुछ दुकानों में नशीले पदार्थों की बिक्री की शिकायत भी सही मिली, जिसे गंभीर उल्लंघन माना गया है।   आवंटित दुकान छोड़ सड़क किनारे कर रहे थे कारोबार जांच में यह भी सामने आया कि कुछ लाभुकों को वेंडिंग जोन में दुकान आवंटित होने के बावजूद वे सड़क किनारे अवैध रूप से व्यवसाय कर रहे थे। इससे न केवल वेंडिंग जोन की व्यवस्था प्रभावित हो रही है, बल्कि शहर में अतिक्रमण और यातायात संबंधी समस्याएं भी बढ़ रही हैं। निगम ने ऐसे मामलों को गंभीरता से लेते हुए सभी संबंधित दुकानदारों से स्पष्टीकरण मांगा है।   नियमों का पालन नहीं करने वालों पर होगी कानूनी कार्रवाई नगर निगम ने कहा है कि निर्धारित 48 घंटे के भीतर शपथ-पत्र के साथ जवाब देना अनिवार्य होगा। यदि जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया या जांच में लगाए गए आरोपों की पुष्टि हुई, तो संबंधित दुकानदारों का आवंटन रद्द कर दिया जाएगा। साथ ही नगर निगम अधिनियम के तहत वैधानिक कार्रवाई भी की जाएगी। निगम का कहना है कि वेंडिंग जोन की व्यवस्था को पारदर्शी, व्यवस्थित और नियमों के अनुरूप संचालित करने के लिए यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
Encroachment Drive Ranchi
रांची में अतिक्रमण पर सख्त हुआ नगर निगम, छोटा तालाब और सरकारी जमीनों पर चला निरीक्षण अभियान

रांची। रांची नगर निगम ने शहर में अतिक्रमण हटाने और सरकारी भूमि के बेहतर उपयोग को लेकर कार्रवाई तेज कर दी है। इसी क्रम में अपर नगर आयुक्त संजय कुमार ने शुक्रवार को भू-संपदा शाखा के अधिकारियों के साथ वार्ड-22 और वार्ड-4 के विभिन्न स्थलों का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान छोटा तालाब के आसपास सड़क पर किए गए अतिक्रमण को जल्द हटाने और चिरौंदी स्थित सरकारी भूमि पर जनउपयोगी विकास योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए।   अवैध कब्जे वाली जमीन का होगा इन-सीटू डेवलपमेंट निरीक्षण की शुरुआत वार्ड-22 स्थित अमन कम्युनिटी हॉल के पास निगम की करीब 34 डिसमिल सरकारी भूमि से हुई। जांच में पाया गया कि इस जमीन पर अवैध रूप से झुग्गी-झोपड़ियां बनाकर कब्जा किया गया है। अपर नगर आयुक्त ने अधिकारियों को इस भूमि के लिए इन-सीटू डेवलपमेंट (स्थल पर पुनर्विकास) का प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि जमीन का उपयोग जनहित और शहर के विकास कार्यों के लिए किया जा सके।   छोटा तालाब के आसपास चलेगा अतिक्रमण हटाओ अभियान निरीक्षण के दौरान छोटा तालाब के आसपास सड़क किनारे अतिक्रमण भी पाया गया। इस पर नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम को जल्द विशेष अभियान चलाकर पूरे क्षेत्र को अतिक्रमण मुक्त कराने का निर्देश दिया गया। अधिकारियों का कहना है कि अतिक्रमण हटने से यातायात व्यवस्था बेहतर होगी और क्षेत्र की सुंदरता भी बढ़ेगी।   चिरौंदी में बनेगी जनउपयोगी विकास योजना निरीक्षण के क्रम में वार्ड-4 के चिरौंदी स्थित ओल्ड एज होम के पास लगभग एक एकड़ जीएम-खास सरकारी भूमि का भी जायजा लिया गया। अपर नगर आयुक्त ने अभियंत्रण शाखा को निर्देश दिया कि स्थानीय लोगों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए इस भूमि पर जनउपयोगी विकास योजना तैयार की जाए। इसमें सामुदायिक सुविधाओं और सार्वजनिक उपयोग से जुड़ी परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जाएगी।   निरीक्षण के दौरान संबंधित वार्ड पार्षद, नगर प्रबंधक, भू-संपदा शाखा तथा अभियंत्रण विभाग के अधिकारी भी मौजूद रहे। नगर निगम का कहना है कि शहर में सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कर उसका बेहतर उपयोग सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।

anjali kumari जुलाई 18, 2026 0
Ranchi Municipal Corporation
रांची में अवैध वाटर कनेक्शन पर नगर निगम का शिकंजा, शहरभर में चलेगा जांच अभियान

रांची। शहर की जलापूर्ति व्यवस्था को दुरुस्त करने और अवैध जल कनेक्शनों पर रोक लगाने के लिए रांची नगर निगम ने सख्ती बढ़ा दी है। अपर नगर आयुक्त संजय कुमार की अध्यक्षता में नगर निगम की जलापूर्ति शाखा और लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) के अधिकारियों की समीक्षा बैठक में जलापूर्ति से जुड़ी समस्याओं की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में वाटर लीकेज, दूषित पेयजल, खराब चापाकलों और अवैध जल कनेक्शनों पर प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।   दूषित जलापूर्ति की शिकायतों पर होगी विशेष जांच बैठक में वार्ड संख्या 18 सहित अन्य क्षेत्रों में गंदे पानी की आपूर्ति की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया। अपर नगर आयुक्त ने नगर निगम और पीएचईडी की संयुक्त टीम को पूरे जलापूर्ति नेटवर्क की प्वाइंट-टू-प्वाइंट जांच करने का निर्देश दिया। अधिकारियों से कहा गया कि जलापूर्ति में गड़बड़ी के वास्तविक कारणों की पहचान कर स्थायी समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि नागरिकों को स्वच्छ और नियमित पेयजल उपलब्ध कराया जा सके।   अवैध कनेक्शनों के खिलाफ चलेगा विशेष अभियान नगर निगम ने राइजिंग लाइन से लिए गए अवैध वाटर कनेक्शनों पर भी सख्त रुख अपनाया है। सभी वार्डों में विशेष धावा दल गठित कर ऐसे अवैध कनेक्शनों की पहचान करने और दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। निगम का मानना है कि अवैध कनेक्शनों के कारण जलापूर्ति व्यवस्था प्रभावित होती है और कई इलाकों में पानी का दबाव कम हो जाता है।   जल संबंधी शिकायतों के लिए हेल्पलाइन जारी नगर निगम ने नागरिकों की सुविधा के लिए जलापूर्ति से जुड़ी शिकायतों के त्वरित समाधान हेतु टोल फ्री नंबर 18005701235 जारी किया है। अपर नगर आयुक्त ने लोगों से अपील की है कि यदि उन्हें पानी की आपूर्ति, दूषित जल, लीकेज या अन्य किसी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़े तो वे इस नंबर पर शिकायत दर्ज कराएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। नगर निगम का उद्देश्य शहर में जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, सुचारु और प्रभावी बनाना है, ताकि नागरिकों को बिना किसी बाधा के स्वच्छ पेयजल उपलब्ध हो सके।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Ranchi Nagar Nigam
रांची नगर निगम की नई पहल, अब ऐप से होगी सामुदायिक भवनों की ऑनलाइन बुकिंग

रांची। राजधानी रांची में शादी-विवाह, जन्मदिन, सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए सामुदायिक भवन बुक करना अब पहले से कहीं अधिक आसान होने जा रहा है। रांची नगर निगम सामुदायिक भवनों के संचालन को पूरी तरह डिजिटल बनाने की तैयारी में है। इसके तहत एक विशेष मोबाइल ऐप विकसित किया जा रहा है, जिसके जरिए लोग घर बैठे ऑनलाइन बुकिंग कर सकेंगे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद वार्ड पार्षद की अनुशंसा की अनिवार्यता समाप्त हो जाएगी और आम नागरिक सीधे ऐप के माध्यम से भवन आरक्षित कर सकेंगे। नगर निगम का मानना है कि इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भवनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।   68 सामुदायिक भवन होंगे डिजिटल व्यवस्था से जुड़ेंगे नगर निगम क्षेत्र में वर्तमान में 68 सामुदायिक भवन हैं। अब तक इन भवनों का उपयोग मुख्य रूप से वार्ड पार्षद की अनुशंसा पर होता था, लेकिन नई व्यवस्था लागू होने के बाद पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। निगम इस संबंध में संचालन की नियमावली और प्रस्ताव भी तैयार कर रहा है, ताकि बुकिंग और उपयोग की प्रक्रिया सरल एवं पारदर्शी बन सके।   ₹100 से ₹2000 तक होगा बुकिंग शुल्क नगर निगम की प्रस्तावित योजना के अनुसार सामुदायिक भवनों की बुकिंग के लिए ₹100 से ₹2000 तक शुल्क लिया जाएगा। यह शुल्क भवन के आकार और उपयोग की अवधि के आधार पर तय होगा। खास बात यह है कि आवश्यकता पड़ने पर लोग केवल एक घंटे के लिए भी भवन बुक करा सकेंगे। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद बुकिंगकर्ता को भवन उसी स्थिति में लौटाना होगा। यदि फर्नीचर, शीशे, गमले या अन्य सामान को नुकसान पहुंचता है तो उसकी भरपाई संबंधित व्यक्ति को करनी होगी।   विवाद के बाद लिया गया फैसला सामुदायिक भवनों के संचालन को लेकर पिछले कुछ समय से नगर निगम और वार्ड पार्षदों के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई थी। कुछ भवनों को सील करने की कार्रवाई के दौरान विरोध भी देखने को मिला था। इसी विवाद को समाप्त करने और व्यवस्था को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से नगर निगम ने ऐप आधारित ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली लागू करने का निर्णय लिया है, जिससे आम नागरिकों को भी सुविधाजनक और निष्पक्ष सेवा मिल सकेगी।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Vegetable Vendors Protest
मोरहाबादी बाजार बंद होने पर सब्जी विक्रेताओं ने निगम कार्यालय के बाहर खोली दुकान

रांची। रांची के मोरहाबादी मैदान में लगने वाले साप्ताहिक सब्जी बाजार को बंद किए जाने के विरोध में बुधवार को सब्जी विक्रेताओं ने अनोखा प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में विक्रेता अपनी सब्जियां लेकर रांची नगर निगम कार्यालय पहुंचे और परिसर के बाहर ही सब्जी बाजार लगाकर प्रशासन के फैसले के खिलाफ विरोध जताया। प्रदर्शन कर रहे विक्रेताओं का कहना था कि बाजार बंद होने से उनकी आजीविका पर सीधा असर पड़ा है और उनके सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।   विक्रेताओं ने बताया अपना पीड़ा  विक्रेताओं ने बताया कि वे वर्षों से मोरहाबादी मैदान में लगने वाले साप्ताहिक बाजार के जरिए अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। कई किसान और छोटे व्यापारी दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से ताजी सब्जियां लेकर रांची आते हैं, लेकिन बाजार बंद होने के कारण उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उनका कहना है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बाजार बंद करना उचित नहीं है।   निगम से दो प्रमुख मांगें   प्रदर्शन के दौरान सब्जी विक्रेताओं ने नगर निगम प्रशासन के सामने दो मांगें रखीं। पहली, मोरहाबादी मैदान में पहले की तरह बाजार लगाने की अनुमति दी जाए। दूसरी, यदि यह संभव नहीं है तो तत्काल किसी उपयुक्त स्थान पर वैकल्पिक बाजार की व्यवस्था की जाए, ताकि हजारों विक्रेताओं की आजीविका प्रभावित न हो।   गौरतलब है कि मोरहाबादी मैदान में प्रत्येक बुधवार और शनिवार को लगने वाला यह बाजार राजधानी के सबसे बड़े साप्ताहिक बाजारों में गिना जाता है। हाल ही में नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने यहां बाजार लगने पर रोक लगा दी थी, जिसके बाद से विक्रेताओं में लगातार नाराजगी बनी हुई है।   वहीं, नगर निगम का कहना है कि बाजार में करीब 1600 से अधिक दुकानें लगने लगी थीं, जिससे आसपास की सड़कों पर अतिक्रमण और भीषण जाम की समस्या उत्पन्न हो रही थी। निगम ने स्पष्ट किया कि विक्रेताओं की आजीविका को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाशने के लिए बातचीत जारी है और जल्द ही कोई संतुलित निर्णय लेने का प्रयास किया जाएगा।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
Ranchi Municipal Corporation
रांची नगर निगम द्वारा डीएवी गांधीनगर स्कूल में 100 फलदार पौधों का किया गया वितरण

​रांची। पर्यावरण संरक्षण और हरियाली को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को कांके रोड स्थित सीसीएल डीएवी गांधीनगर स्कूल में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। रांची नगर निगम और 'प्रिज्मोलॉइन' के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम के तहत स्कूल के सैकड़ों बच्चों के बीच 100 फलदार पौधों का वितरण किया गया। इस दौरान नगर निगम के उप नगर आयुक्त एवं सहायक नगर आयुक्त का विशेष सहयोग रहा। मौके पर मौजूद 100 से अधिक बच्चों को फलदार वृक्ष देकर उन्हें पर्यावरण की रक्षा के लिए प्रेरित किया गया।   इस अवसर पर कार्यक्रम में मौजूद सभी बच्चों को एक सुर में यह खास शपथ दिलाई गई कि वे इन पौधों को अपने-अपने घरों में सुरक्षित तरीके से लगाएंगे, उनकी पूरी देखभाल करेंगे, 'एक पेड़ मां के नाम' पर जरूर लगाएंगे और अपनी रांची को हमेशा स्वच्छ और सुंदर बनाएंगे। ​पौधा वितरण के बाद स्कूल परिसर में पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक विशेष सेमिनार का आयोजन किया गया। सेमिनार के दौरान मंच से वक्ताओं ने बच्चों का हौसला बढ़ाया और रांची को प्रदूषण मुक्त बनाने पर ज़ोर दिया। वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि आज के समय में जिस तेज़ी से वैश्विक तापमान बढ़ रहा है, उसे देखते हुए प्रकृति का संरक्षण करना अब हमारी पसंद नहीं, बल्कि सबसे बड़ी ज़रूरत बन गया है। हमारी सबसे बड़ी ज़िम्मेदारी यह है कि हम अपनी रांची को फिर से वही पुरानी पहचान लौटाएं और इसे हमेशा हरा-भरा व सुंदर बनाए रखें। पेड़ सिर्फ ऑक्सीजन नहीं देते, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए जीवन का आधार हैं। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि जब हर व्यक्ति पर्यावरण के प्रति जागरूक होगा, तभी हम अपनी इस धरा को स्वच्छ और सुंदर रख पाएंगे। ​इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर वार्ड नंबर 1 के पार्षद नकुल तिर्की, डीएवी गांधीनगर स्कूल के प्राचार्य पी. के. झा, प्रिज्मोलॉइन के मैनेजिंग डायरेक्टर ऋषभ सिंघानिया एवं डायरेक्टर (HR & एडमिन) स्नेहा सिंघानिया उपस्थित थे। वहीं विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रिज्मोलॉइन से जसमीत मेहता एवं पारस कुमार सिंह भी शामिल हुए। इस पूरे आयोजन को सफल बनाने में स्कूल के शिक्षक गोविंद झा, कौशल किशोर, गोविंद यादव, रंजीत गुप्ता, प्रदीप लकड़ा सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्तियों और सैकड़ों बच्चों ने अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। सभी ने एक साथ मिलकर रांची को पूरी तरह से हरा-भरा रखने के लिए एक काफी सकारात्मक और मजबूत संकल्प लिया।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
vegetable vendors protest
मोरहाबादी साप्ताहिक बाजार बंद होने पर भड़के सब्जी विक्रेता, नगर निगम कार्यालय पहुंचकर किया प्रदर्शन

रांची। राजधानी रांची के मोरहाबादी मैदान में करीब 40 वर्षों से लगने वाले साप्ताहिक सब्जी बाजार को बंद किए जाने के फैसले का विरोध तेज हो गया है। सोमवार को भारी बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में सब्जी और फल विक्रेता रांची नगर निगम कार्यालय पहुंचे और धरना देकर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के बाजार बंद करने से हजारों परिवारों की आजीविका पर संकट खड़ा हो गया है।   मोरहाबादी मैदान में प्रत्येक बुधवार और शनिवार को लगने वाले इस बाजार में रांची समेत आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 1600 से अधिक विक्रेता अपनी उपज बेचने पहुंचते थे। शनिवार को नगर निगम और पुलिस प्रशासन ने बाजार नहीं लगने दिया, जिसके बाद विक्रेताओं में नाराजगी बढ़ गई।   प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शन के दौरान विक्रेताओं ने मांग की कि या तो बाजार को पहले की तरह संचालित किया जाए या फिर जल्द से जल्द उनके लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि वर्षों से यही बाजार उनकी आय का प्रमुख स्रोत रहा है और अचानक बंद होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। वहीं, नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने निगम के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि बाजार का दायरा लगातार बढ़ने से आसपास की सड़कें अतिक्रमित हो रही थीं और पूरे क्षेत्र में गंभीर ट्रैफिक जाम की स्थिति बन रही थी। इसका असर स्थानीय लोगों, स्कूली बच्चों और आम राहगीरों पर पड़ रहा था।   नगर आयुक्त ने कहा नगर आयुक्त ने कहा कि निगम विक्रेताओं की आजीविका और शहर की यातायात व्यवस्था, दोनों को ध्यान में रखते हुए समाधान तलाश रहा है। प्रशासन इस दिशा में मंथन कर रहा है ताकि विक्रेताओं को वैकल्पिक व्यवस्था मिल सके और शहरवासियों को भी जाम की समस्या से राहत मिले। फिलहाल नगर निगम और सब्जी विक्रेताओं के बीच किसी सहमति पर बात नहीं बन सकी है। अब सभी की निगाहें इस पर टिकी हैं कि प्रशासन इस विवाद का स्थायी और संतुलित समाधान कब तक निकालता है।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
retired employees protest
रांची नगर निगम के 400 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में 20% तक कटौती, निगम कार्यालय में जोरदार प्रदर्शन

रांची। रांची नगर निगम एक बार फिर अपने फैसले को लेकर विवादों में है। इस बार मामला करीब 400 सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन में 20 प्रतिशत तक की कटौती का है। तीन महीने के इंतजार के बाद सोमवार को पेंशनभोगियों के खातों में राशि भेजी गई, लेकिन अधिकांश कर्मचारियों की पेंशन में 5 हजार से 12 हजार रुपये तक की कटौती कर दी गई। इससे नाराज पेंशनभोगी निगम कार्यालय पहुंच गए और नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया।   नगर आयुक्त से की मुलाकात अवध बिहारी तिवारी के नेतृत्व में सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने नगर आयुक्त सुशांत गौरव से मुलाकात कर पेंशन में की गई कटौती पर आपत्ति जताई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बिना पूर्व सूचना उनके अधिकारों में कटौती की गई है, जिससे उन्हें आर्थिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नगर आयुक्त ने कर्मचारियों को बताया कि पेंशन में कटौती का निर्णय नगर विकास विभाग के निर्देशों के अनुरूप लिया गया है। उन्होंने पेंशनभोगियों को अपनी आपत्ति और मांग विभाग के समक्ष रखने की सलाह दी।   नौ साल पुराने फैसले पर बदला रुख मामले की पड़ताल में एक दिलचस्प तथ्य भी सामने आया है। वर्ष 2017 में झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद रांची नगर निगम ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राज्यकर्मियों के समान पेंशन देने का निर्णय लागू किया था। उस समय गठित समिति में तत्कालीन उप नगर आयुक्त संजय कुमार ने इस व्यवस्था पर सहमति जताई थी। अब, करीब नौ वर्ष बाद, जब वही संजय कुमार अपर नगर आयुक्त के पद पर हैं, तो पेंशन में कटौती के निर्णय पर भी उनकी सहमति बताई जा रही है। इस बदलाव को लेकर पेंशनभोगियों के बीच नाराजगी और सवाल दोनों बढ़ गए हैं। सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि यदि पेंशन में की गई कटौती वापस नहीं ली गई तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। फिलहाल नगर निगम का कहना है कि वह विभागीय निर्देशों के अनुसार ही कार्रवाई कर रहा है।

anjali kumari जून 30, 2026 0
Ranchi Municipal Corporation
मानसून से पहले रांची नगर निगम की बड़ी तैयारी, जलजमाव रोकने के लिए  एक्शन मोड में प्रशासन

रांची। झारखंड में मानसून के आगमन से पहले रांची नगर निगम पूरी तरह सतर्क हो गया है। हर वर्ष बारिश के दौरान शहर के कई हिस्सों में जलजमाव, नालों के उफान और घरों में पानी घुसने जैसी समस्याओं को देखते हुए इस बार निगम ने पहले से ही व्यापक तैयारी शुरू कर दी है। नगर निगम का लक्ष्य शहर को जलजमाव की समस्या से राहत दिलाना और मानसून के दौरान बेहतर जल निकासी व्यवस्था सुनिश्चित करना है।   नगर निगम के अनुसार शहर के बड़े और छोटे नालों की सफाई युद्धस्तर पर की जा रही है। नालों से गाद निकालकर उनकी जल वहन क्षमता बढ़ाई जा रही है ताकि भारी बारिश के दौरान पानी का प्रवाह बाधित न हो। साथ ही नालों के किनारों पर उगी झाड़ियों और घास की भी नियमित सफाई कराई जा रही है।   संवेदनशील इलाकों पर विशेष निगरानी कोकर चौक, सफायर अस्पताल क्षेत्र, महावीर नगर, खोरहाटोली और बांधगाड़ी जैसे जलजमाव प्रभावित इलाकों को विशेष फोकस में रखा गया है। इन क्षेत्रों में नालियों के चौड़ीकरण, अवरोध हटाने और अतिरिक्त जल निकासी व्यवस्था विकसित करने का काम तेजी से चल रहा है। निगम का मानना है कि समय रहते इन स्थानों पर सुधार कार्य पूरा होने से बारिश के दौरान परेशानी काफी हद तक कम हो सकती है।   अतिक्रमण पर होगी सख्त कार्रवाई नालों पर बढ़ते अतिक्रमण को भी निगम ने जलजमाव की बड़ी वजह माना है। इसके लिए ड्रोन मैपिंग और जमीनी सर्वे के माध्यम से अवैध निर्माणों की पहचान की जा रही है। चिन्हित अतिक्रमणों को हटाने की प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। इसके अलावा नालियों को जाम करने, निर्माण सामग्री फेंकने या सड़क पर पानी बहाने वालों के खिलाफ जुर्माना और कानूनी कार्रवाई की भी तैयारी की गई है।   नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने बताया कि पिछले वर्षों में जलजमाव वाले सभी स्थानों की समीक्षा कर विशेष रणनीति बनाई गई है। निगम का उद्देश्य केवल राहत कार्य करना नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था विकसित करना है जिससे समस्या उत्पन्न ही न हो। अब मानसून की पहली तेज बारिश के साथ इन तैयारियों की असली परीक्षा होगी।

Unknown जून 8, 2026 0
Ranchi Municipal Corporation
जनगणना 2027 की तैयारी में रांची नगर निगम बना राज्य का मॉडल

रांची। रांची नगर निगम को जनगणना 2027 की तैयारियों में उत्कृष्ट कार्य के लिए भारत सरकार के गृह मंत्रालय के अंतर्गत जनगणना संचालन निदेशालय, झारखंड द्वारा प्रशंसा पत्र भेजा गया है। निदेशालय ने निगम की सक्रियता, समयबद्ध कार्यशैली और तकनीकी दक्षता की सराहना की है। झारखंड जनगणना संचालन के निदेशक Prabhat Kumar ने नगर आयुक्त Sushant Gaurav को भेजे पत्र में कहा कि जनगणना 2027 के प्रथम चरण की तैयारियों में रांची नगर निगम ने राज्यभर में बेहतरीन प्रदर्शन किया है। विशेष रूप से HLB Geo-tagging और HLB Demarcation जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को गंभीरता और दक्षता के साथ पूरा किया गया है।   लगभग 100 प्रतिशत कार्य पूर्ण 27 अप्रैल 2026 तक की प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, रांची नगर निगम ने अपने अधिकांश कार्य लगभग 100 प्रतिशत पूरे कर लिए हैं। निदेशालय ने इसे राज्य के अन्य शहरी निकायों के लिए प्रेरणादायक बताया है। अधिकारियों के अनुसार, HLB Geo-tagging और Demarcation जनगणना प्रक्रिया की आधारशिला हैं, इसलिए इनका समय पर और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन बेहद जरूरी था।   आने वाले चरणों में भी अहम भूमिका निदेशालय ने निगम की पूरी टीम की सराहना करते हुए आगामी चरणों में भी इसी तरह सहयोग बनाए रखने की अपेक्षा जताई है। आने वाले दिनों में Self Enumeration, मकान सूचीकरण और मकानों की गणना जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जाएंगे, जिनमें नगर निगम की भूमिका अहम रहेगी। नगर निगम प्रशासन ने इस उपलब्धि का श्रेय अधिकारियों, सुपरवाइजरों, फील्ड कर्मचारियों और तकनीकी टीम को दिया है।    निगम के अनुसार  निगम के अनुसार, डिजिटल तकनीक, बेहतर समन्वय और टीमवर्क के कारण यह सफलता संभव हुई। नगर आयुक्त सुशांत गौरव ने कहा कि यह सम्मान कर्मचारियों की मेहनत और प्रतिबद्धता का परिणाम है तथा भविष्य में भी रांची नगर निगम देश के लिए एक आदर्श शहरी मॉडल के रूप में कार्य करता रहेगा।

Unknown मई 11, 2026 0
Ranchi Municipal Corporation
रांची नगर निगम ने बदली परंपरा, अब सम्मान में मिलेगा सफाई का सामान

रांची। रांची नगर निगम में इन दिनों एक अलग और संदेशात्मक पहल चर्चा में है। नवनिर्वाचित मेयर रोशनी खलखो ने आगंतुकों से अपील की है कि वे मुलाकात के दौरान फूल-मालाओं और गुलदस्तों की जगह झाड़ू, डस्टबिन और सफाई से जुड़ी सामग्री भेंट करें। इस पहल का मकसद सिर्फ औपचारिक परंपरा बदलना नहीं, बल्कि लोगों के बीच स्वच्छता और जिम्मेदारी का संदेश पहुंचाना है। नगर निगम का मानना है कि जो चीज समाज के काम आए, वही असली सम्मान और सार्थक उपहार है।   जमीन पर दिखने लगा असर, लेकिन बदलाव अभी अधूरा इस पहल का शुरुआती असर अब धीरे-धीरे जमीन पर दिखने लगा है। कई आगंतुकों ने मेयर के निर्देश का पालन करते हुए झाड़ू और डस्टबिन भेंट किए हैं, जो यह संकेत देता है कि लोग इस नई सोच को समझ रहे हैं और अपनाने की कोशिश भी कर रहे हैं। हालांकि, दूसरी ओर कुछ लोग अब भी पुरानी परंपरा के तहत फूल और गुलदस्ते लेकर पहुंच रहे हैं। इससे साफ है कि यह बदलाव अभी शुरुआती दौर में है और इसे पूरी तरह व्यवहार में उतरने में थोड़ा समय लगेगा।   सामाजिक संदेश के रूप में देखी जा रही पहल नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक निर्देश नहीं, बल्कि सामाजिक सोच बदलने की कोशिश है। उनका मानना है कि अगर लगातार जागरूकता अभियान चलाया जाए, तो यह पहल निगम कार्यालय तक सीमित न रहकर पूरे शहर में स्वच्छता आंदोलन का रूप ले सकती है। कई सामाजिक संगठनों ने भी इस कदम की सराहना करते हुए इसे एक व्यावहारिक और प्रेरणादायक पहल बताया है।   शहर में नई सोच का संकेत स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह की पहल खासकर युवाओं और छात्रों के बीच सकारात्मक प्रभाव छोड़ सकती है। यदि इसे गंभीरता से अपनाया गया, तो यह न केवल रांची नगर निगम बल्कि पूरे शहर के लिए एक नई और उपयोगी परंपरा बन सकती है। फिलहाल यह पहल बदलाव की शुरुआत के तौर पर देखी जा रही है।

Unknown अप्रैल 7, 2026 0
Ranchi Municipal Corporation
पहली बार रांची नगर निगम ने 100 करोड़ का टैक्स किया कलेक्शन

रांची। रांची नगर निगम ने शहरी वित्तीय प्रबंधन में नया मुकाम हासिल किया है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में निगम का प्रॉपर्टी टैक्स कलेक्शन पहली बार 100 करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। 2013 में यह आंकड़ा केवल 5 करोड़ रुपये था, जबकि अब यह बढ़कर लगभग 101.99 करोड़ रुपये हो गया है। यह निगम की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।नगर आयुक्त सुशांत गौरव के नेतृत्व में पिछले छह महीनों में विशेष अभियान चलाया गया। इसी प्रयास का असर रहा कि अकेले मंगलवार को ही करीब 1.59 करोड़ रुपये जमा किए गए। अभियान में आयुक्त खुद फील्ड में सक्रिय रहे और प्रत्येक वार्ड की मॉनिटरिंग करते रहे। इस बार डिजिटल भुगतान ने भी कलेक्शन बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई। नागरिकों ने करीब 23 करोड़ रुपये ऑनलाइन जमा किए, जिससे पारदर्शिता और सुविधा दोनों बढ़ी। निगम ने शहर भर में डोर-टू-डोर सर्वे और सत्यापन अभियान चलाकर छूटे हुए और अज्ञात होल्डिंग्स की पहचान की। बड़े बकायेदारों पर कड़ी कार्रवाई की गई और डिजिटल सिस्टम के जरिए रियल टाइम ट्रैकिंग की व्यवस्था की गई।   पिछले कुछ सालों में टैक्स कलेक्शन लगातार बढ़ा है  2020-21 में 51.35 करोड़, 2021-22 में 58.03 करोड़, 2022-23 में 67.78 करोड़, 2023-24 में 69.71 करोड़, 2024-25 में 83.57 करोड़ और अब 2025-26 में 101.99 करोड़। इस दौरान संपत्तियों की संख्या भी 1 लाख से बढ़कर 2.5 लाख से ज्यादा हो गई और टैक्स कलेक्शन दक्षता लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंची। नगर निगम का राजस्व बढ़ने से शहर के विकास कार्यों को भी गति मिलेगी। सफाई, सड़क, पानी और स्ट्रीट लाइट जैसी सुविधाओं में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है। भविष्य में जीआईएस मैपिंग और डेटा-बेस्ड सिस्टम को और मजबूत कर कलेक्शन को और पारदर्शी बनाने की योजना है।

Unknown अप्रैल 1, 2026 0
नीरज कुमार रांची नगर निगम के नए डिप्टी मेयर के रूप में
नीरज कुमार बने रांची नगर निगम के नए डिप्टी मेयर

रांची। रांची नगर निगम में डिप्टी मेयर पद के चुनाव में वार्ड 31 के पार्षद नीरज कुमार ने जीत दर्ज की है। उन्हें कुल 39 वोट मिले, जिससे उन्होंने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पीछे छोड़ दिया। इस जीत के साथ नीरज कुमार रांची के निर्वाचित डिप्टी मेयर बन गए हैं। चुनाव प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और परिणाम घोषित होते ही उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। विशेष रूप से यह परिणाम नगर निगम की राजनीति में अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे शहर की आगामी नीतियों और विकास कार्यों पर असर पड़ने की संभावना है।

Unknown मार्च 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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