Religious Tourism

Somnath Special Train
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 1100 श्रद्धालुओं को लेकर सोमनाथ जाने वाली विशेष ट्रेन को दिखाई हरी झंडी

पटना, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोमवार को पटना के पाटलिपुत्र जंक्शन से सोमनाथ दर्शन स्पेशल ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस विशेष ट्रेन से बिहार के करीब 1100 श्रद्धालु गुजरात स्थित भगवान सोमनाथ ज्योतिर्लिंग के दर्शन के लिए रवाना हुए।   पाटलिपुत्र स्टेशन से शुरू हुई धार्मिक यात्रा   सोमनाथ यात्रा के शुभारंभ के दौरान पाटलिपुत्र जंक्शन पर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह देखने को मिला। स्टेशन परिसर में 'हर-हर महादेव' और 'जय सोमनाथ' के जयघोष के बीच मुख्यमंत्री ने ट्रेन को रवाना किया।   श्रद्धालुओं के लिए की गई विशेष व्यवस्था   बिहार सरकार की ओर से इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं के लिए भोजन, यात्रा सुविधा और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। गुजरात पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं के ठहरने और स्थानीय व्यवस्थाओं के लिए भी प्रबंध किए गए हैं।   धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने पर जोर   मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि धार्मिक यात्राएं लोगों को देश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ने का माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि सरकार धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देने और श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम कर रही है।   सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के तहत आयोजित यात्रा   यह विशेष यात्रा 'सोमनाथ स्वाभिमान पर्व' के तहत आयोजित की गई है। यात्रा में बिहार के विभिन्न जिलों से आए श्रद्धालु शामिल हुए हैं। विशेष ट्रेन के माध्यम से श्रद्धालु सोमनाथ धाम पहुंचकर भगवान शिव के दर्शन करेंगे।

anjali kumari जुलाई 21, 2026 0
Ancient Maa Bargabhima Temple in Tamluk honored with a special India Post cover celebrating its spiritual heritage.
पोस्टल कवर से दुनिया तक पहुंचेगी मां बर्गभीमा की महिमा, 51 शक्तिपीठों में शामिल है तमलूक का प्राचीन मंदिर

  पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के ऐतिहासिक शहर तमलूक स्थित प्राचीन शक्तिपीठ मां बर्गभीमा मंदिर की ख्याति अब देश की सीमाओं से निकलकर दुनिया तक पहुंचेगी। भारतीय डाक विभाग ने मंदिर के सम्मान में विशेष डाक आवरण (स्पेशल पोस्टल कवर) जारी किया है। इसे भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। मां बर्गभीमा मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और सदियों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। डाक विभाग की इस पहल से मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है। 60 फुट ऊंचा है प्राचीन मंदिर, ओड़िशा शैली की झलक इतिहास में ताम्रलिप्त के नाम से प्रसिद्ध तमलूक सदियों से धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां स्थित मां बर्गभीमा मंदिर अपनी भव्य स्थापत्य कला के लिए भी प्रसिद्ध है। करीब 60 फुट ऊंचा यह मंदिर ओड़िशा शैली की वास्तुकला में निर्मित है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर बनी टेराकोटा नक्काशी इसकी ऐतिहासिक समृद्धि और प्राचीन शिल्पकला की अद्भुत मिसाल पेश करती है। दीवारों पर उकेरी गई आकृतियां बीते युग की सांस्कृतिक विरासत और कला परंपरा की कहानी बयां करती हैं। काले पत्थर से निर्मित है मां उग्रतारा की प्रतिमा मंदिर के गर्भगृह में मां बर्गभीमा की काले पत्थर से निर्मित प्रतिमा स्थापित है, जिनकी पूजा उग्रतारा स्वरूप में की जाती है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, पुराण और लोकविश्वास का जीवंत संगम है। सालभर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रहती है। पश्चिम बंगाल के अलावा देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है। पोस्टल कवर के जरिए दुनिया तक पहुंचेगी आध्यात्मिक विरासत भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष पोस्टल कवर को मां बर्गभीमा की आध्यात्मिक विरासत को सम्मान देने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। किसी ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक पहचान या विरासत स्थल के नाम पर जारी डाक आवरण राष्ट्रीय मान्यता का प्रतीक माना जाता है। एक बार जारी होने के बाद ये पोस्टल कवर संग्रहकर्ताओं, शोधकर्ताओं और डाक प्रणाली के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचते हैं। इससे तमलूक और मां बर्गभीमा मंदिर की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी। मां के चरणों में अर्पित करने के बाद हुआ आधिकारिक विमोचन विशेष पोस्टल कवर जारी करने से पहले इन्हें मां बर्गभीमा के चरणों में अर्पित किया गया। मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के बाद डाक आवरण का आधिकारिक विमोचन किया गया। यह अवसर श्रद्धा, परंपरा और आधुनिक पहचान का अद्भुत संगम बन गया, जहां धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव एक साथ दिखाई दिए। कार्यक्रम में शामिल हुए कई गणमान्य लोग इस अवसर पर तमलूक के उपमंडल अधिकारी सौभिक मुखर्जी, पूर्व विधायक ब्रह्मामय नंदा, मंदिर के सेवादार, सामाजिक कार्यकर्ता और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने इसे तमलूक और पूर्व मेदिनीपुर के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक डाक आवरण नहीं, बल्कि तमलूक की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का दस्तावेज है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेगा। पोस्टल कवर जारी होने से क्या होंगे फायदे? धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा। स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती। रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। तमलूक की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी। नई पीढ़ी अपने इतिहास और परंपराओं से जुड़ सकेगी। देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा। मां बर्गभीमा मंदिर के नाम पर जारी यह विशेष पोस्टल कवर केवल एक डाक सामग्री नहीं, बल्कि तमलूक की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने वाला एक स्थायी दस्तावेज बन गया है।  

Deepshikha जून 15, 2026 0
Sikh pilgrims preparing for Pakistan pilgrimage to mark Guru Arjan Dev Ji’s martyrdom anniversary.
737 भारतीय श्रद्धालुओं को पाकिस्तान का वीजा, गुरु अर्जन देव शहीदी दिवस समारोह में होंगे शामिल

  नई दिल्ली: पाकिस्तान ने पांचवें सिख गुरु, गुरु अर्जन देव के शहीदी दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले वार्षिक धार्मिक समारोह में भाग लेने के लिए 737 भारतीय तीर्थयात्रियों को वीजा जारी किया है। पाकिस्तान उच्चायोग ने सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में इसकी जानकारी दी। बयान के अनुसार, यह धार्मिक यात्रा 10 जून से 19 जून तक आयोजित की जाएगी। इस दौरान भारतीय श्रद्धालु पाकिस्तान स्थित सिख धर्म के प्रमुख और ऐतिहासिक गुरुद्वारों में मत्था टेक सकेंगे। प्रमुख गुरुद्वारों में करेंगे दर्शन पाकिस्तान उच्चायोग के मुताबिक, तीर्थयात्री अपनी यात्रा के दौरान गुरुद्वारा पंजा साहिब, गुरुद्वारा ननकाना साहिब और गुरुद्वारा करतारपुर साहिब समेत कई पवित्र सिख तीर्थस्थलों के दर्शन करेंगे। पाक उच्चायोग ने दी शुभकामनाएं भारत में पाकिस्तान के कार्यवाहक उच्चायुक्त साद अहमद वाराइच ने सभी श्रद्धालुओं को सफल और सुरक्षित यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि भारतीय तीर्थयात्रियों को वीजा जारी करना वर्ष 1974 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए धार्मिक स्थलों की यात्रा संबंधी द्विपक्षीय प्रोटोकॉल के तहत पाकिस्तान की प्रतिबद्धता का हिस्सा है। एसजीपीसी को मिले 541 श्रद्धालुओं के वीजा इस बीच, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को 541 सिख श्रद्धालुओं के वीजा प्राप्त हुए हैं। ये श्रद्धालु गुरु अर्जन देव की शहादत की वर्षगांठ के अवसर पर पाकिस्तान स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों में माथा टेकेंगे। 10 जून को रवाना होगा जत्था एसजीपीसी की धर्म प्रचार समिति के सचिव गुरिंदर सिंह मथरेवाल ने बताया कि संस्था ने कुल 561 श्रद्धालुओं के पासपोर्ट नई दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में जमा कराए थे। वीजा स्वीकृत होने के बाद श्रद्धालुओं का जत्था 10 जून को एसजीपीसी मुख्यालय से पाकिस्तान के लिए रवाना होगा। उन्होंने कहा कि जिन श्रद्धालुओं के वीजा मंजूर हो गए हैं, वे 9 जून को कार्यालय समय के दौरान एसजीपीसी कार्यालय से अपने पासपोर्ट प्राप्त कर सकते हैं। धार्मिक यात्राओं के जरिए कायम है संवाद भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव के बावजूद धार्मिक तीर्थयात्राओं का सिलसिला जारी है। सिख श्रद्धालुओं की यह यात्रा दोनों देशों के बीच धार्मिक और सांस्कृतिक संपर्क को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Baba Baidyanath Dham
श्रावणी मेले में श्रद्धालुओं को बड़ी राहत, बाबा बैद्यनाथ धाम में शुरू होगी लॉकर सुविधा

देवघर। आगामी श्रावणी मेले को लेकर देवघर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर के बाहर 1200 से 1300 लॉकर स्थापित किए जा रहे हैं। इन लॉकरों में श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन, पर्स और अन्य मूल्यवान सामान सुरक्षित रख सकेंगे। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था न केवल श्रद्धालुओं को राहत देगी, बल्कि मंदिर परिसर की सुरक्षा को भी मजबूत बनाएगी। श्रावणी मेले के दौरान देशभर से लाखों श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ के दर्शन के लिए देवघर पहुंचते हैं। भारी भीड़ के कारण कई बार श्रद्धालुओं को अपने सामान की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। मोबाइल, पर्स और अन्य जरूरी वस्तुओं के खोने या चोरी होने की आशंका भी रहती है।   ऐसे में नई लॉकर सुविधा श्रद्धालुओं के लिए काफी लाभदायक साबित हो सकती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि भीड़ के बीच सामान लेकर चलना मुश्किल होता है और मंदिर में प्रवेश से पहले सामान रखने के लिए उचित व्यवस्था की कमी महसूस होती है। अब प्रशासनिक स्तर पर सुरक्षित लॉकर उपलब्ध होने से उन्हें बड़ी राहत मिलेगी।   निजी दुकानदारों पर निर्भरता होगी कम श्रद्धालुओं ने बताया कि अब तक सामान रखने के लिए अक्सर निजी दुकानों का सहारा लेना पड़ता था। कई बार दुकानदार अधिक शुल्क भी वसूलते थे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित सुविधा मिलेगी तथा अतिरिक्त खर्च से भी बचाव होगा। लॉकर निर्माण कार्य में जुटे कर्मचारियों के अनुसार, सभी लॉकर निर्धारित समय के भीतर तैयार कर लिए जाएंगे ताकि श्रावणी मेले की शुरुआत से पहले व्यवस्था पूरी तरह संचालित हो सके।   सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की पहल देवघर के एसडीएम एवं बाबा बैद्यनाथ मंदिर के प्रभारी रवि कुमार ने बताया कि प्रशासन का उद्देश्य श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ मंदिर परिसर की सुरक्षा को और मजबूत बनाना है। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में मंदिर की दानपेटी से पाकिस्तानी नोट मिलने और साहिबगंज जिले से एक संदिग्ध आतंकी की गिरफ्तारी जैसी घटनाओं के बाद सुरक्षा एजेंसियां विशेष सतर्कता बरत रही हैं। इसी वजह से मंदिर परिसर में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रवेश को नियंत्रित करने की योजना बनाई गई है।   सुरक्षित दर्शन और बेहतर प्रबंधन पर जोर प्रशासन के अनुसार, श्रद्धालु अपने मोबाइल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लॉकर में सुरक्षित रखकर केवल पूजा सामग्री और कांवर के साथ मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। इससे सुरक्षा जांच आसान होगी और भीड़ प्रबंधन में भी मदद मिलेगी। प्रशासन को उम्मीद है कि यह नई व्यवस्था श्रद्धालुओं के अनुभव को बेहतर बनाने के साथ-साथ बाबा नगरी की सुरक्षा व्यवस्था को भी नई मजबूती प्रदान करेगी।

Unknown जून 2, 2026 0
Ancient Maa Bhadrakali Temple in Itkhori featuring Hindu, Buddhist and Jain heritage structures
इटखोरी का मां भद्रकाली मंदिर: जहां मिलते हैं हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म के अद्भुत प्रमाण

अपरा एकादशी पर बढ़ जाता है इस प्राचीन मंदिर का महत्व झारखंड के Itkhori स्थित प्रसिद्ध Bhadrakali Temple धार्मिक आस्था, तांत्रिक साधना और प्राचीन इतिहास का अनोखा संगम माना जाता है। अपरा एकादशी के अवसर पर इस मंदिर का महत्व और बढ़ जाता है। मान्यता है कि यहां मां भद्रकाली के दर्शन और पूजा करने से भक्तों को सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। रांची से लगभग 150 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर हिंदू, बौद्ध और जैन धर्म की ऐतिहासिक विरासत को अपने भीतर समेटे हुए है। पांचवीं-छठी शताब्दी की मानी जाती है प्रतिमा मां भद्रकाली का यह प्राचीन मंदिर चतरा जिले के भदुली गांव में स्थित है। कहा जाता है कि गांव का नाम भी मंदिर के कारण पड़ा। मंदिर में स्थापित मां भद्रकाली की प्रतिमा एक विशाल शिलाखंड पर उकेरी गई है। यह प्रतिमा करीब साढ़े चार फीट ऊंची, ढाई फीट चौड़ी और लगभग 30 मन वजनी बताई जाती है। इतिहासकारों और विद्वानों के अनुसार यह प्रतिमा पाल काल यानी पांचवीं-छठी शताब्दी की मानी जाती है। 196 एकड़ में फैला है मंदिर परिसर Bhadrakali Temple का विशाल परिसर लगभग 196 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है। यहां बनी यज्ञशाला भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है। इसका निर्माण वर्ष 1980 में कराया गया था। मंदिर परिसर में एक संग्रहालय भी मौजूद है, जहां खुदाई में मिली 418 प्राचीन मूर्तियों और भग्नावशेषों को सुरक्षित रखा गया है। यह संग्रहालय क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को दर्शाता है। तंत्र साधना का प्रमुख केंद्र माना जाता है यह स्थल मां भद्रकाली मंदिर तांत्रिक साधना के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां स्थापित मां तारा की प्रतिमा विशेष ढंग से बनाई गई है, जिससे साधक को मां के पैर का अंगूठा सीधे आज्ञाचक्र के सामने दिखाई देता है। मान्यता है कि मगध के प्रसिद्ध शाक्त साधक भैरवनाथ ने इस स्थान को साधना के लिए चुना था। इसी कारण यह क्षेत्र तंत्र साधना से जुड़े लोगों के बीच विशेष महत्व रखता है। मंदिर परिसर में मौजूद हैं कई दुर्लभ धरोहरें मंदिर परिसर में स्थित कोठेश्वरनाथ स्तूप भी काफी प्रसिद्ध है। इसके चारों ओर भगवान Gautama Buddha की मूर्तियां उकेरी गई हैं। स्तूप के ऊपर बने छोटे गड्ढे में हमेशा पानी भरा रहने की मान्यता भी लोगों को आकर्षित करती है। श्रद्धालुओं का कहना है कि इस जल को पूरी तरह खाली नहीं किया जा सकता। इसके अलावा यहां सहस्रलिंगी शिवलिंग भी स्थापित है, जिसमें 1008 छोटे-छोटे शिवलिंग बने हुए हैं। यह अद्भुत शिवलिंग श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना रहता है। भगवान बुद्ध और जैन धर्म से भी जुड़ी हैं मान्यताएं स्थानीय मान्यताओं के अनुसार ज्ञान की खोज में निकले युवराज सिद्धार्थ ने इसी स्थान पर तपस्या की थी। कहा जाता है कि जब उनकी माता उन्हें वापस ले जाने आईं और उनका ध्यान नहीं टूटा, तब उनके मुख से “इत खोई” शब्द निकला। बाद में यही नाम बदलकर इटखोरी पड़ गया। जैन धर्म के अनुयायी भी इस स्थान को पवित्र मानते हैं। मान्यता है कि जैन धर्म के दसवें तीर्थंकर Sheetalnath की जन्मभूमि यही क्षेत्र है। खुदाई में मिले प्राचीन मठ और मंदिरों के अवशेष भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा वर्ष 2011-12 और 2012-13 में यहां खुदाई कराई गई थी। इस दौरान नौवीं और दसवीं शताब्दी के कई मठों और मंदिरों के अवशेष मिले थे। आज इन ऐतिहासिक धरोहरों को संग्रहालय में संरक्षित किया गया है। मंदिर प्रबंधन समिति भी इस प्राचीन स्थल को उसके पुराने वैभव के साथ सुरक्षित रखने का प्रयास कर रही है।  

surbhi मई 13, 2026 0
Patna–Thawe fast passenger train begins service improving travel time and connectivity for passengers and pilgrims.
पटना-थावे फास्ट पैसेंजर ट्रेन शुरू: अब 7 घंटे में पूरा होगा सफर, जानिए टाइमिंग और स्टॉपेज

  यात्रियों को मिली बड़ी राहत बिहार के रेल यात्रियों के लिए अच्छी खबर है। पटना और थावे के बीच नई फास्ट पैसेंजर ट्रेन का संचालन शुरू कर दिया गया है। इस ट्रेन के शुरू होने से अब दोनों शहरों के बीच यात्रा पहले की तुलना में काफी आसान हो जाएगी। ट्रेन करीब 6 घंटे 50 मिनट में यह दूरी तय करेगी, जिससे यात्रियों का समय भी बचेगा और सफर अधिक सुविधाजनक होगा। नई ट्रेन के संचालन को लेकर जानकारी देते हुए Ravi Shankar Prasad ने कहा कि Thawe Temple धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। लंबे समय से लोगों की मांग थी कि पटना से थावे के लिए तेज ट्रेन सेवा शुरू की जाए, जिसे अब पूरा कर दिया गया है।   24 कोच वाली ट्रेन से बढ़ेगी सुविधा Indian Railways के दानापुर मंडल के अधिकारियों के अनुसार इस फास्ट पैसेंजर ट्रेन में कुल 24 कोच लगाए गए हैं। दानापुर मंडल के सीनियर डीसीएम Abhinav Siddharth ने बताया कि यह ट्रेन पाटलिपुत्र और दीघवारा होते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचेगी। नई ट्रेन सेवा शुरू होने से पटना और थावे के बीच आवागमन आसान होगा। साथ ही थावे मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है, जिससे धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।   पटना-थावे ट्रेन की टाइमिंग और स्टॉपेज गाड़ी संख्या 55515 पटना-थावे फास्ट पैसेंजर रोजाना Patna Junction से दोपहर 12:10 बजे रवाना होगी। इसके प्रमुख स्टॉपेज इस प्रकार हैं: फुलवारीशरीफ – 12:13 बजे पाटलिपुत्र – 12:40 बजे दीघा ब्रिज हाल्ट – 12:52 बजे दीघवारा – 13:50 बजे गोल्डिनगंज – 14:55 बजे इन स्टेशनों पर रुकते हुए यह ट्रेन शाम 7:00 बजे Thawe पहुंचेगी। वहीं 55516 थावे-पटना फास्ट पैसेंजर रोजाना थावे से रात 8:05 बजे रवाना होगी और अगले दिन निम्न स्टेशनों पर रुकते हुए पटना पहुंचेगी: गोल्डिनगंज – 00:40 बजे दीघवारा – 01:00 बजे दीघा ब्रिज हाल्ट – 01:55 बजे पाटलिपुत्र – 02:05 बजे फुलवारीशरीफ – 02:25 बजे यह ट्रेन सुबह 03:20 बजे पटना जंक्शन पहुंचेगी।   पुरी-पटना ट्रेन को भी मिला नियमित संचालन रेलवे यात्रियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए लगातार नई ट्रेन सेवाएं शुरू कर रहा है। इससे पहले भी यात्रियों की मांग को देखते हुए Puri–Patna Express के नियमित संचालन को मंजूरी दी गई थी। इस ट्रेन के अनुसार, यह हर शनिवार को दोपहर 2:55 बजे Puri से रवाना होकर अगले दिन सुबह 10:45 बजे पटना पहुंचती है। वहीं वापसी में हर रविवार को दोपहर 1:30 बजे पटना से प्रस्थान करती है।   धार्मिक और स्थानीय यात्रियों को मिलेगा लाभ पटना-थावे फास्ट पैसेंजर ट्रेन शुरू होने से न सिर्फ रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि थावे मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को भी काफी राहत मिलेगी। माना जा रहा है कि इस नई ट्रेन सेवा से क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा।  

surbhi मार्च 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जुलाई 14, 2026 0