राष्ट्रीय

India Post Honors Maa Bargabhima Temple with Special Cover

पोस्टल कवर से दुनिया तक पहुंचेगी मां बर्गभीमा की महिमा, 51 शक्तिपीठों में शामिल है तमलूक का प्राचीन मंदिर

Deepshikha जून 15, 2026 0
Ancient Maa Bargabhima Temple in Tamluk honored with a special India Post cover celebrating its spiritual heritage.
Maa Bargabhima Temple Special Postal Cover Released in Tamluk

 

पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के ऐतिहासिक शहर तमलूक स्थित प्राचीन शक्तिपीठ मां बर्गभीमा मंदिर की ख्याति अब देश की सीमाओं से निकलकर दुनिया तक पहुंचेगी। भारतीय डाक विभाग ने मंदिर के सम्मान में विशेष डाक आवरण (स्पेशल पोस्टल कवर) जारी किया है। इसे भारत की आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

मां बर्गभीमा मंदिर देश के 51 शक्तिपीठों में से एक माना जाता है और सदियों से करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। डाक विभाग की इस पहल से मंदिर की ऐतिहासिक और धार्मिक पहचान को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

60 फुट ऊंचा है प्राचीन मंदिर, ओड़िशा शैली की झलक

इतिहास में ताम्रलिप्त के नाम से प्रसिद्ध तमलूक सदियों से धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। यहां स्थित मां बर्गभीमा मंदिर अपनी भव्य स्थापत्य कला के लिए भी प्रसिद्ध है।

करीब 60 फुट ऊंचा यह मंदिर ओड़िशा शैली की वास्तुकला में निर्मित है। मंदिर की बाहरी दीवारों पर बनी टेराकोटा नक्काशी इसकी ऐतिहासिक समृद्धि और प्राचीन शिल्पकला की अद्भुत मिसाल पेश करती है। दीवारों पर उकेरी गई आकृतियां बीते युग की सांस्कृतिक विरासत और कला परंपरा की कहानी बयां करती हैं।

काले पत्थर से निर्मित है मां उग्रतारा की प्रतिमा

मंदिर के गर्भगृह में मां बर्गभीमा की काले पत्थर से निर्मित प्रतिमा स्थापित है, जिनकी पूजा उग्रतारा स्वरूप में की जाती है। यह मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, पुराण और लोकविश्वास का जीवंत संगम है।

सालभर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ लगी रहती है। पश्चिम बंगाल के अलावा देश के विभिन्न राज्यों और विदेशों से भी बड़ी संख्या में भक्त मां के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। नवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ता है।

पोस्टल कवर के जरिए दुनिया तक पहुंचेगी आध्यात्मिक विरासत

भारतीय डाक विभाग द्वारा जारी विशेष पोस्टल कवर को मां बर्गभीमा की आध्यात्मिक विरासत को सम्मान देने की एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। किसी ऐतिहासिक धरोहर, सांस्कृतिक पहचान या विरासत स्थल के नाम पर जारी डाक आवरण राष्ट्रीय मान्यता का प्रतीक माना जाता है।

एक बार जारी होने के बाद ये पोस्टल कवर संग्रहकर्ताओं, शोधकर्ताओं और डाक प्रणाली के माध्यम से देश-विदेश तक पहुंचते हैं। इससे तमलूक और मां बर्गभीमा मंदिर की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत होगी।

मां के चरणों में अर्पित करने के बाद हुआ आधिकारिक विमोचन

विशेष पोस्टल कवर जारी करने से पहले इन्हें मां बर्गभीमा के चरणों में अर्पित किया गया। मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान के बाद डाक आवरण का आधिकारिक विमोचन किया गया।

यह अवसर श्रद्धा, परंपरा और आधुनिक पहचान का अद्भुत संगम बन गया, जहां धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक गौरव एक साथ दिखाई दिए।

कार्यक्रम में शामिल हुए कई गणमान्य लोग

इस अवसर पर तमलूक के उपमंडल अधिकारी सौभिक मुखर्जी, पूर्व विधायक ब्रह्मामय नंदा, मंदिर के सेवादार, सामाजिक कार्यकर्ता और सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे। सभी ने इसे तमलूक और पूर्व मेदिनीपुर के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह केवल एक डाक आवरण नहीं, बल्कि तमलूक की हजारों वर्ष पुरानी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान का दस्तावेज है, जो नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और विरासत से जोड़ने का माध्यम बनेगा।

पोस्टल कवर जारी होने से क्या होंगे फायदे?

  • धार्मिक पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई मजबूती।
  • रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
  • तमलूक की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान मिलेगी।
  • नई पीढ़ी अपने इतिहास और परंपराओं से जुड़ सकेगी।
  • देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा।

मां बर्गभीमा मंदिर के नाम पर जारी यह विशेष पोस्टल कवर केवल एक डाक सामग्री नहीं, बल्कि तमलूक की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को दुनिया तक पहुंचाने वाला एक स्थायी दस्तावेज बन गया है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Surbhi

राष्ट्रीय

View more
Supreme Court Judgement
कोयला घोटाला मामलों में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, हाई कोर्ट की सुनवाई व्यवस्था में किया बदलाव

अदालत ने कहा- लंबित मामलों की सुनवाई तय प्रक्रिया के तहत होगी, न्यायिक व्यवस्था में स्पष्टता लाने पर जोर   नई दिल्ली, एजेंसियां। सुप्रीम कोर्ट ने कोयला घोटाला (Coal Scam) से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने हाई कोर्ट में लंबित इन मामलों की सुनवाई और अधिकार क्षेत्र से जुड़ी व्यवस्था में बदलाव किया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले का असर देशभर में चल रहे कई कोयला घोटाला मामलों की आगे की सुनवाई पर पड़ सकता है।   हाई कोर्ट में लंबित मामलों पर नई व्यवस्था   सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि कोयला घोटाले से जुड़े मामलों में सुनवाई तय कानूनी प्रक्रिया और अधिकार क्षेत्र के आधार पर की जाएगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि मामलों को लंबित रखने के बजाय प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में देरी कम हो।   सीबीआई जांच और अदालतों की भूमिका पर चर्चा   कोयला घोटाला मामलों में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की जांच, विशेष अदालतों की भूमिका और हाई कोर्ट की निगरानी को लेकर लंबे समय से कानूनी बहस चल रही थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले से इन मामलों में आगे की न्यायिक प्रक्रिया को दिशा मिलने की उम्मीद है।   कई बड़े मामलों से जुड़ा है कोयला घोटाला   कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़े मामलों में पूर्व अधिकारियों, कंपनियों और कई प्रभावशाली लोगों के खिलाफ जांच और मुकदमे चल चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले भी कोयला आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर सख्त रुख अपना चुका है।   न्यायिक प्रक्रिया तेज करने की कोशिश   विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला लंबित मामलों के निपटारे और अदालतों के बीच अधिकारों की स्पष्टता के लिहाज से महत्वपूर्ण है। अब संबंधित अदालतों में मामलों की सुनवाई इसी नई व्यवस्था के अनुसार आगे बढ़ेगी।

abhishek singh जुलाई 30, 2026 0
Bhopal Farmer's Protest

भोपाल में किसानों का आंदोलन खत्म, सरकार के आश्वासन के बाद वापस लौटे किसान

Ram Mandir Temple Museum

राम मंदिर ट्रस्ट का बड़ा फैसला, अयोध्या में बनेगा भव्य टेंपल म्यूजियम; अक्टूबर से शुरू होगा काम

Supreme Court

EWS कोटे पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, ₹8 लाख सालाना आय सीमा को बताया पहली नजर में उचित

कोयला घोटाला मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत और कानूनी कार्यवाही बंद
कोयला घोटाला केस में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, अदालत ने बंद की कार्यवाही

करीब 11 साल पुराने मामले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के समन आदेश को किया रद्द   नई दिल्ली, एजेंसियां। पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने उनके खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को समाप्त कर दिया है और निचली अदालत द्वारा जारी किए गए समन आदेश को रद्द कर दिया।   हिंदाल्को कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में आया फैसला   यह मामला हिंदाल्को कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था। आरोप था कि कोयला ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुई थीं। सीबीआई ने जांच के बाद क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, जिसे लेकर कानूनी विवाद चल रहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज कर संज्ञान लेने का पर्याप्त आधार नहीं था।   मनमोहन सिंह को मिली क्लीन चिट   सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ इस मामले में कोई आपराधिक कार्यवाही नहीं चलेगी। यह मामला उनके प्रधानमंत्री कार्यकाल (2004-2014) के दौरान हुए कोयला ब्लॉक आवंटन से जुड़ा था और लंबे समय से कानूनी प्रक्रिया में था।   करीब दो साल बाद आया अंतिम फैसला   डॉ. मनमोहन सिंह का निधन दिसंबर 2024 में 92 वर्ष की उम्र में हुआ था। उनके निधन के बाद भी यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित था। अब अदालत के फैसले से इस लंबे कानूनी विवाद का अंत हो गया है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
E20 पेट्रोल विवाद और अरविंद केजरीवाल का ऑटो कंपनियों पर बयान

E20 पेट्रोल विवाद पर राजनीति तेज, अरविंद केजरीवाल ने ऑटो कंपनियों की चुप्पी पर उठाए सवाल

NEET Paper Leak

NEET पेपर लीक केस में CBI की बड़ी चार्जशीट, 13 आरोपियों के खिलाफ दाखिल किए आरोप

ग्रीन क्लीयरेंस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी और सुनवाई

ग्रीन क्लीयरेंस मामले में सुप्रीम कोर्ट सख्त, परियोजनाओं को बाद में पर्यावरण मंजूरी देने की नीति पर रोक

Kanwar Yatra 2026
कांवड़ यात्रा का आगाज़, हरिद्वार से गूंजे ‘बम-बम भोले’ के जयकारे; लाखों शिवभक्तों की उमड़ी भीड़

हरिद्वार, एजेंसियां। सावन महीने के शुभारंभ के साथ ही देश की प्रसिद्ध कांवड़ यात्रा शुरू हो गई है। उत्तराखंड के हरिद्वार, ऋषिकेश और गंगोत्री धाम समेत कई गंगा घाटों पर शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। श्रद्धालु गंगाजल लेकर अपने-अपने शिवालयों की ओर रवाना हो रहे हैं और पूरे मार्ग पर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारे गूंज रहे हैं।   हरिद्वार में लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना   कांवड़ यात्रा के दौरान उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पंजाब और अन्य राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु हरिद्वार पहुंचते हैं। भक्त गंगा जल भरकर पैदल यात्रा करते हुए अपने क्षेत्रों के शिव मंदिरों में जलाभिषेक करते हैं। इस बार भी बड़ी संख्या में कांवड़ियों के आने को देखते हुए प्रशासन ने घाटों और प्रमुख मार्गों पर व्यवस्थाएं बढ़ाई हैं।   सुरक्षा के लिए प्रशासन अलर्ट   कांवड़ यात्रा को देखते हुए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए हैं। प्रमुख रास्तों पर सीसीटीवी निगरानी, ट्रैफिक डायवर्जन, मेडिकल कैंप और सहायता केंद्र बनाए गए हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह विश्राम स्थल और भोजन-पानी की व्यवस्था भी की गई है।   धार्मिक आस्था का बड़ा पर्व   कांवड़ यात्रा भगवान शिव की भक्ति से जुड़ा प्रमुख धार्मिक आयोजन है। मान्यता है कि कांवड़िये गंगा जल से भगवान शिव का अभिषेक कर मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना करते हैं। सावन के अंतिम दिनों में शिवालयों में जल चढ़ाने के साथ इस यात्रा का समापन होता है।   देशभर के शिवालयों में बढ़ेगी भीड़   सावन के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर, महाकालेश्वर मंदिर, देवघर बाबा बैद्यनाथ धाम समेत देश के प्रमुख शिव मंदिरों में भी श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने की संभावना है। प्रशासन ने भक्तों से यात्रा के दौरान नियमों का पालन करने और शांतिपूर्ण तरीके से दर्शन करने की अपील की है।

anjali kumari जुलाई 30, 2026 0
भारत में ऑर्गन ट्रांसप्लांट और अंगदान की स्थिति पर रिपोर्ट

भारत में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की संख्या बढ़ी, लेकिन जरूरत और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर बरकरार

इन्फ्लूएंजा A वायरस की संरचना और मानव कोशिकाओं में प्रवेश पर वैज्ञानिक शोध

इन्फ्लूएंजा A वायरस पर नई वैज्ञानिक खोज, वायरस के फैलाव को रोकने के लिए मिल सकते हैं नए इलाज के रास्ते

तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में दोपहर के भोजन में चिकन बिरयानी देने की तैयारी

तमिलनाडु के सरकारी स्कूलों में भोजन का नया प्रस्ताव, मिड-डे मील में हफ्ते में एक दिन चिकन बिरयानी देने पर विचार

0 Comments

Top week

Mojtaba Khamenei delivering a statement on Iran, Hezbollah, and the Middle East conflict
दुनिया

US-Iran War: मोजतबा खामेनेई का बड़ा बयान, बोले- 'अब जिहाद और प्रतिरोध ही एकमात्र रास्ता'

kalpana जुलाई 27, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?