SEBI

SEBI की स्टडी में एंकर निवेशकों और FPI की IPO बिक्री का विश्लेषण
एंकर निवेशकों पर SEBI का बड़ा खुलासा, विदेशी निवेशक IPO शेयर जल्दी बेचने में सबसे आगे

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) की नई स्टडी में एंकर निवेशकों के शेयर बेचने के व्यवहार को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। SEBI ने 13 अगस्त 2026 को मेनबोर्ड IPO में एंकर निवेशकों के बाहर निकलने के पैटर्न पर अध्ययन जारी किया। रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) एंकर निवेशकों में सबसे तेजी से अपनी हिस्सेदारी बेचने वालों में रहे।   30 दिन की लॉक-इन अवधि के बाद बढ़ती है बिकवाली     SEBI की स्टडी में अप्रैल 2022 से अक्टूबर 2025 के बीच सूचीबद्ध 242 मेनबोर्ड IPO का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि एंकर निवेशकों की 30 दिन की लॉक-इन अवधि खत्म होने के आसपास शेयरों की बिक्री बढ़ जाती है। इस दौरान भारी बिकवाली का असर कई IPO शेयरों की कीमतों पर भी देखा गया।     FPI सबसे ज्यादा शेयर बेचने वाले एंकर निवेशक     अध्ययन के मुताबिक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने म्यूचुअल फंड की तुलना में एंकर निवेश के शेयर अधिक तेजी से बेचे। रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि छोटे आकार के IPO में एंकर निवेशकों की निकासी और बिक्री की तीव्रता ज्यादा रही।     निवेशकों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है SEBI की स्टडी?     एंकर निवेशक आमतौर पर IPO खुलने से पहले बड़े संस्थागत निवेश के जरिए कंपनी में भरोसे का संकेत देते हैं। लेकिन लॉक-इन अवधि समाप्त होने के बाद यदि बड़ी मात्रा में शेयर बाजार में बिकने लगते हैं, तो इससे शेयर की कीमत पर दबाव बन सकता है। SEBI की स्टडी इसी जोखिम को समझने में निवेशकों के लिए उपयोगी है।     SEBI ने एंकर आवंटन व्यवस्था में किए हैं बदलाव     SEBI की 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, एंकर निवेशक आवंटन व्यवस्था में बदलाव का उद्देश्य IPO में दीर्घकालिक संस्थागत निवेशकों की भागीदारी बढ़ाना रहा है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
SEBI की नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था और चेयरमैन तुहिन कांता पांडेय
SEBI की नई क्लोजिंग ऑक्शन व्यवस्था पर उठे सवाल, चेयरमैन बोले- अब तक हेरफेर के सबूत नहीं

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में SEBI की नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) व्यवस्था को लेकर शुरुआती दिनों में उठे सवालों के बीच बाजार नियामक ने स्पष्ट किया है कि उसे अब तक इस व्यवस्था में किसी तरह की हेरफेर के सबूत नहीं मिले हैं। SEBI चेयरमैन तुहिन कांता पांडेय ने कहा कि नियामक नई व्यवस्था की लगातार निगरानी कर रहा है।   3 अगस्त से लागू हुई नई व्यवस्था   SEBI ने 3 अगस्त 2026 से F&O में शामिल शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन लागू किया है। इससे पहले शेयरों का क्लोजिंग प्राइस नियमित कारोबार के आखिरी 30 मिनट के VWAP यानी वॉल्यूम-वेटेड औसत मूल्य के आधार पर तय होता था। नई व्यवस्था में खरीद और बिक्री के ऑर्डर को एक साथ मिलाकर अधिकतम कारोबार संभव कराने वाली कीमत को क्लोजिंग प्राइस बनाया जाता है।   20 मिनट की ऑक्शन प्रक्रिया से तय होगा क्लोजिंग प्राइस   नई व्यवस्था में F&O वाले शेयरों का नियमित कारोबार दोपहर 3:15 बजे समाप्त होता है। इसके बाद क्लोजिंग ऑक्शन प्रक्रिया शुरू होती है और ऑर्डर के आधार पर संतुलन कीमत तय की जाती है। इसका उद्देश्य शेयर के अंतिम भाव की बेहतर और अधिक पारदर्शी कीमत खोज करना है।   शुरुआती दिनों में निफ्टी की चाल से बढ़ी चिंता   नई व्यवस्था लागू होने के शुरुआती दिनों में क्लोजिंग ऑक्शन के दौरान कुछ शेयरों और इंडेक्स में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। इससे बाजार में संभावित हेरफेर को लेकर सवाल उठे। SEBI चेयरमैन ने कहा कि शुरुआती दिनों में कम भागीदारी और सावधानी से ट्रेडिंग के कारण कुछ असामान्य अंतर दिखाई दे सकते हैं, लेकिन अब तक नियामक को हेरफेर का कोई प्रमाण नहीं मिला है।   म्यूचुअल फंड की भागीदारी बढ़ी   SEBI के अनुसार, नई व्यवस्था के पहले दिन क्लोजिंग ऑक्शन में म्यूचुअल फंड की भागीदारी करीब 5-6% थी, जो बाद में बढ़कर लगभग 20-25% हो गई। SEBI का मानना है कि जैसे-जैसे बाजार के प्रतिभागी नई प्रणाली के अभ्यस्त होंगे, इसमें भागीदारी और बढ़ सकती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
SEBI
SEBI ने कहा- भारतीय बाजार की घरेलू बुनियाद मजबूत, वैश्विक जोखिमों से चुनौती बरकरार

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के ताजा आकलन के मुताबिक 2026-27 में भारतीय अर्थव्यवस्था की घरेलू बुनियाद मजबूत बनी हुई है, जिससे वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय बाजार को सहारा मिल रहा है। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और विदेशी निवेशकों के लगातार निकासी जैसे जोखिम बाजार की स्थिरता के लिए चुनौती बने हुए हैं।   घरेलू अर्थव्यवस्था बनी मजबूत सुरक्षा-कवच   SEBI के अनुसार भारत की मजबूत घरेलू आर्थिक स्थिति वैश्विक जोखिमों के बीच बाजार को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा-कवच प्रदान कर रही है। घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों की मजबूती से भारत बाहरी झटकों का सामना करने की बेहतर स्थिति में है।   FPI निकासी से बाजार पर दबाव   विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की लगातार और रिकॉर्ड स्तर की निकासी बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। वैश्विक निवेशकों में जोखिम से बचने की प्रवृत्ति बढ़ने पर भारत से पूंजी निकासी का दबाव और बढ़ सकता है।   कच्चे तेल और भू-राजनीतिक तनाव बड़ा जोखिम   SEBI ने मध्य-पूर्व में भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को प्रमुख बाहरी जोखिमों में शामिल किया है। तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी भारत की आयात लागत, महंगाई और बाजार धारणा पर असर डाल सकती है।   बाजार की मजबूती पर SEBI का भरोसा   SEBI की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2025-26 के दौरान वैश्विक अनिश्चितताओं, FPI निकासी और बदलते वैश्विक व्यापार माहौल के बावजूद भारतीय प्रतिभूति बाजार ने लचीलापन दिखाया। ऐसे में घरेलू आर्थिक मजबूती भारत के बाजार के लिए आगे भी महत्वपूर्ण सहारा बनी रह सकती है।

abhishek singh अगस्त 9, 2026 0
IPO
SEBI ने 9 कंपनियों के IPO को दी मंजूरी, प्राइमरी मार्केट में बढ़ी हलचल

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 9 कंपनियों के प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) को मंजूरी दे दी है। अलग-अलग क्षेत्रों में कारोबार करने वाली इन कंपनियों के IPO को मंजूरी मिलने से भारतीय प्राइमरी मार्केट में गतिविधियां तेज होने की उम्मीद है। मंजूरी पाने वाली कंपनियों में इंजीनियरिंग, ट्रैवल टेक्नोलॉजी, गेमिंग, ड्रोन, पेपर, रिन्यूएबल एनर्जी और डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ी कंपनियां शामिल हैं।   इन 9 कंपनियों को मिली मंजूरी   SEBI से IPO की मंजूरी पाने वाली कंपनियों में PlaySimple Games, Garuda Aerospace, Rediff.com India, Jakson Green, Laxyo, Expression 360 Services India, SNVA Traveltech, Adroit Industries India और Naini Papers शामिल हैं।   इन कंपनियों के सार्वजनिक निर्गम से निवेशकों को अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियों में निवेश का विकल्प मिल सकता है। हालांकि IPO की अंतिम तारीख, इश्यू प्राइस और लॉट साइज जैसी जानकारी संबंधित कंपनियों के आगे के दस्तावेजों और घोषणाओं में स्पष्ट होगी।   प्राइमरी मार्केट में बढ़ी गतिविधि   एक साथ नौ कंपनियों को IPO की मंजूरी मिलना भारतीय प्राइमरी मार्केट के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। बाजार में IPO गतिविधियों में तेजी आने के बीच SEBI की मंजूरी से कंपनियों के लिए पूंजी जुटाने का रास्ता साफ हुआ है।   इन कंपनियों का लक्ष्य IPO के जरिए जुटाई गई पूंजी का इस्तेमाल कारोबार विस्तार, नई परियोजनाओं, कर्ज कम करने और अन्य कॉरपोरेट जरूरतों के लिए किया जा सकता है। वास्तविक उपयोग कंपनी-दर-कंपनी अलग होगा।   निवेशकों की बढ़ेगी नजर   IPO की मंजूरी मिलने के बाद अब निवेशकों की नजर इन कंपनियों के DRHP/RHP, इश्यू साइज, वैल्यूएशन, वित्तीय प्रदर्शन और IPO की कीमत पर रहेगी। SEBI की मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि IPO में निवेश करना निश्चित रूप से लाभदायक होगा। निवेशकों के लिए कंपनी की वित्तीय स्थिति, कारोबार से जुड़े जोखिम और IPO का मूल्यांकन समझना जरूरी होगा।   कब आएंगे IPO?   SEBI की मंजूरी के बाद कंपनियां बाजार की परिस्थितियों और अपनी तैयारी के अनुसार IPO की लॉन्चिंग की तारीख तय कर सकती हैं। इसलिए अभी सभी नौ IPO की सदस्यता तारीख घोषित होना जरूरी नहीं है। आने वाले दिनों में कंपनियों की ओर से IPO का आकार, प्राइस बैंड, लॉट साइज और सब्सक्रिप्शन की तारीखों से जुड़ी जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

abhishek singh अगस्त 8, 2026 0
PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड के अंतरराष्ट्रीय फंड्स में SIP और STP पर अस्थायी रोक
PGIM इंडिया ने 3 इंटरनेशनल फंड्स में SIP और STP रजिस्ट्रेशन पर अस्थायी रोक लगाई

मुंबई, एजेंसियां। PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड ने अपने तीन अंतरराष्ट्रीय फंड ऑफ फंड्स में सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के मौजूदा रजिस्ट्रेशन को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला किया है। यह बदलाव 7 अगस्त 2026 से लागू होगा।   इन तीन फंड्स पर पड़ेगा असर     PGIM इंडिया की ओर से जिन योजनाओं में SIP और STP रजिस्ट्रेशन को अस्थायी रूप से रोका गया है, उनमें शामिल हैं:   PGIM India Global Equity Opportunities Fund of Fund PGIM India Emerging Markets Equity Fund of Fund PGIM India Global Select Real Estate Securities Fund of Fund इन योजनाओं में पहले से चल रहे SIP और STP रजिस्ट्रेशन पर नए निर्देशों का असर पड़ेगा।   7 अगस्त से लागू होगा फैसला     म्यूचुअल फंड हाउस का यह निर्णय 7 अगस्त 2026 से प्रभावी होगा। यानी निवेशकों को इन तीन अंतरराष्ट्रीय योजनाओं में SIP और STP के जरिए निवेश जारी रखने को लेकर नए नियमों का सामना करना पड़ेगा।   PGIM इंडिया ने इससे पहले भी अपने अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश सीमा और SIP से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। इन योजनाओं पर विदेशी निवेश से जुड़ी नियामकीय सीमाओं का प्रभाव रहा है।   अंतरराष्ट्रीय निवेश पर बढ़ा नियामकीय दबाव     भारतीय म्यूचुअल फंड कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश पर SEBI और विदेशी निवेश की निर्धारित सीमाओं से जुड़े नियमों का असर पड़ता है। इसी वजह से कई फंड हाउस समय-समय पर लंपसम निवेश, SIP और STP की सीमा या उपलब्धता में बदलाव करते रहे हैं।   PGIM इंडिया का ताजा कदम भी उसके अंतरराष्ट्रीय फंड ऑफ फंड्स में निवेश प्रवाह को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे अपने SIP या STP पर लागू नए नियमों की जानकारी फंड हाउस से जरूर जांच लें।   निवेशकों को क्या करना चाहिए     जिन निवेशकों का इन तीन योजनाओं में SIP या STP चल रहा है, उन्हें 7 अगस्त 2026 से लागू होने वाले बदलावों को ध्यान से देखना चाहिए। नई SIP/STP व्यवस्था शुरू करने या मौजूदा निवेश में बदलाव करने से पहले संबंधित योजना के आधिकारिक नोटिस और फंड हाउस की जानकारी देखना बेहतर होगा。   यह फैसला निवेश को खत्म करने या फंड से पैसा निकालने का निर्देश नहीं है, बल्कि SIP और STP रजिस्ट्रेशन से जुड़ा अस्थायी बदलाव है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 6, 2026 0
NSE क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम
NSE ट्रेडिंग टाइमिंग्स में नया सिस्टम, क्लोजिंग प्राइस तय करने के तरीके में बड़ा बदलाव

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में 3 अगस्त 2026 से नया क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (Closing Auction Session-CAS) लागू हो गया है। NSE और BSE पर यह बदलाव खास तौर पर उन शेयरों के क्लोजिंग प्राइस को निर्धारित करने के तरीके से जुड़ा है, जिनमें फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) कॉन्ट्रैक्ट उपलब्ध हैं। नए सिस्टम का उद्देश्य बाजार में बेहतर मूल्य खोज और पारदर्शिता बढ़ाना है।   3:15 बजे से शुरू होता है क्लोजिंग ऑक्शन     नए CAS के तहत नियमित कारोबार के अंतिम चरण के बाद 3:15 बजे से क्लोजिंग ऑक्शन प्रक्रिया शुरू होती है। इसमें खरीद और बिक्री के ऑर्डर को मिलाकर एक ऐसा मूल्य निर्धारित किया जाता है, जिस पर अधिकतम कारोबार हो सके।   पहले क्लोजिंग प्राइस निर्धारित करने में अंतिम 30 मिनट के कारोबार के वॉल्यूम-वेटेड औसत मूल्य (VWAP) की महत्वपूर्ण भूमिका होती थी। अब F&O शेयरों के लिए क्लोजिंग ऑक्शन के जरिए अंतिम मूल्य तय किया जाएगा।   F&O कारोबार का समय भी बढ़ा     SEBI के बदलाव के तहत इक्विटी डेरिवेटिव्स यानी F&O सेगमेंट का कारोबार 10 मिनट बढ़ाकर शाम 3:40 बजे तक कर दिया गया है। सामान्य इक्विटी बाजार का नियमित कारोबार समय 9:15 बजे से 3:30 बजे तक ही रहता है।     पहले ही दिन Nifty में दिखी बड़ी हलचल     नए सिस्टम के लागू होने के पहले दिन बाजार बंद होने से कुछ मिनट पहले Nifty में करीब 200 अंकों की तेज उछाल देखने को मिली। इससे कारोबारियों के बीच नए क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम को लेकर चर्चा और भ्रम की स्थिति बनी। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार NSE ने स्पष्ट किया कि Nifty का आधिकारिक क्लोजिंग स्तर सही था और कोई तकनीकी गड़बड़ी नहीं हुई।     निवेशकों के लिए क्या बदलेगा?     नए सिस्टम का उद्देश्य क्लोजिंग प्राइस को अधिक पारदर्शी और बाजार की वास्तविक मांग-आपूर्ति के अनुरूप बनाना है। इससे अंतिम समय में किसी शेयर के भाव को प्रभावित करने की कोशिशों पर अंकुश लगाने और बेहतर मूल्य खोज में मदद मिलने की उम्मीद है।   निवेशकों और ट्रेडरों को अब खासकर F&O शेयरों में कारोबार करते समय 3:15 बजे के बाद की क्लोजिंग ऑक्शन प्रक्रिया को ध्यान में रखना होगा।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की वापसी
भारतीय बाजार में FIIs की मजबूत वापसी, जुलाई में विदेशी निवेशकों ने जमकर खरीदे शेयर

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs/FPIs) की वापसी के संकेत मजबूत हुए हैं। जुलाई 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय इक्विटी में करीब ₹22,258 करोड़ का निवेश किया, जो लगभग 22 महीनों में सबसे मजबूत मासिक निवेश बताया जा रहा है। इससे बाजार में विदेशी पूंजी के दोबारा लौटने की उम्मीद बढ़ी है।   लंबे समय की बिकवाली के बाद बदला रुख     विदेशी निवेशकों की ओर से भारतीय शेयरों में खरीदारी ऐसे समय बढ़ी है, जब इससे पहले वे लगातार बिकवाली कर रहे थे। जुलाई के दौरान विदेशी पूंजी का रुख बदलना भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।   SEBI के आंकड़ों के मुताबिक 2026 की शुरुआत में भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दबाव काफी मजबूत था। मई में FPIs ने भारतीय प्रतिभूति बाजार से ₹29,484 करोड़ की शुद्ध निकासी की थी।   इक्विटी में बढ़ा विदेशी निवेश     जुलाई में विदेशी निवेशकों ने बॉन्ड की तुलना में भारतीय शेयर बाजार में ज्यादा रुचि दिखाई। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक इक्विटी में करीब ₹22,258 करोड़ का निवेश हुआ, जबकि सरकारी बॉन्ड में निवेश पिछले महीने की तुलना में कम रहा। इससे संकेत मिलता है कि विदेशी निवेशक भारतीय कंपनियों की कमाई और आर्थिक वृद्धि को लेकर फिर से सकारात्मक हो रहे हैं।     बाजार के लिए क्या है इसका मतलब?     FIIs की खरीदारी बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार में तरलता और निवेशकों का भरोसा मजबूत हो सकता है। विदेशी पूंजी का लगातार प्रवाह बना रहा तो इसका असर बड़े शेयरों के साथ-साथ व्यापक बाजार पर भी देखने को मिल सकता है।   हालांकि, वैश्विक बाजारों की दिशा, रुपये की चाल, कच्चे तेल की कीमत और भू-राजनीतिक परिस्थितियां आगे भी विदेशी निवेश के रुख को प्रभावित कर सकती हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
सेबी ने जी एंटरटेनमेंट पर कार्रवाई की
सेबी का बड़ा एक्शन, जी एंटरटेनमेंट के सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका पर एक साल का बाजार प्रतिबंध

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (ZEEL) से जुड़े मामले में बड़ा फैसला लिया है। सेबी ने कंपनी के संस्थापक सुभाष चंद्रा और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) पुनीत गोयनका को प्रतिभूति बाजार में कारोबार करने से एक साल के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। नियामक ने दोनों पर कुल ₹1.18 करोड़ का जुर्माना भी लगाया है, जबकि कंपनी पर ₹30 लाख का जुर्माना लगाया गया है।   ZEEL की जमीन को कर्ज के लिए इस्तेमाल करने का मामला   सेबी की जांच में सामने आया कि जी एंटरटेनमेंट की हैदराबाद स्थित जमीन का इस्तेमाल कुछ प्रमोटर-संबंधित संस्थाओं से जुड़े कर्ज के लिए गारंटी के तौर पर किया गया था। नियामक के अनुसार, इस इस्तेमाल के लिए कंपनी के बोर्ड और शेयरधारकों को आवश्यक जानकारी नहीं दी गई थी। सेबी ने इसे प्रतिभूति कानूनों और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े नियमों का उल्लंघन माना है।   सुभाष चंद्रा और पुनीत गोयनका पर अलग-अलग जुर्माना   सेबी के आदेश के अनुसार सुभाष चंद्रा पर ₹60 लाख और पुनीत गोयनका पर ₹58 लाख का जुर्माना लगाया गया है। इसके अलावा जी एंटरटेनमेंट पर ₹30 लाख का जुर्माना लगाया गया है। इस तरह मामले में कुल आर्थिक दंड ₹1.48 करोड़ बैठता है।   ZEEL पर भी लगा प्रतिबंध   सेबी ने केवल दोनों अधिकारियों पर ही कार्रवाई नहीं की है, बल्कि जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज पर भी दो महीने का बाजार प्रतिबंध लगाया गया है। नियामक की कार्रवाई को सूचीबद्ध कंपनियों में संपत्तियों के इस्तेमाल, पारदर्शिता और निवेशकों के हितों से जुड़े नियमों के पालन को लेकर सख्त संदेश के तौर पर देखा जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
CKYC 2.0
CKYC 2.0: अब बार-बार KYC कराने से मिलेगी राहत, एक डिजिटल पहचान से आसान होंगे बैंकिंग और निवेश के काम

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में CKYC 2.0 (Central Know Your Customer 2.0) की नई व्यवस्था शुरू होने जा रही है, जिसका उद्देश्य ग्राहकों को बार-बार KYC दस्तावेज जमा करने की परेशानी से राहत देना है। इस नई प्रणाली में ग्राहक की सत्यापित जानकारी एक केंद्रीय रजिस्ट्री में सुरक्षित रहेगी और उनकी सहमति के बाद बैंक, बीमा कंपनियां और अन्य वित्तीय संस्थान इसका उपयोग कर सकेंगे।   एक ही KYC से कई वित्तीय सेवाओं का लाभ   अभी तक अलग-अलग बैंक, बीमा कंपनियों, म्यूचुअल फंड और अन्य वित्तीय संस्थानों में खाता खोलने या सेवा लेने के लिए अलग-अलग KYC प्रक्रिया पूरी करनी पड़ती है। CKYC 2.0 के लागू होने के बाद ग्राहक की जानकारी केंद्रीय रिकॉर्ड से प्राप्त की जा सकेगी। इससे नया बैंक खाता खोलने, बीमा लेने या निवेश शुरू करने की प्रक्रिया तेज और आसान होने की उम्मीद है।   ग्राहक की सहमति से साझा होगी जानकारी   CKYC 2.0 में ग्राहक की गोपनीयता को ध्यान में रखा गया है। वित्तीय संस्थान ग्राहक की जानकारी तभी प्राप्त कर पाएंगे, जब ग्राहक इसकी अनुमति देगा। नई व्यवस्था में डेटा की गुणवत्ता जांचने के लिए रिकॉर्ड की विश्वसनीयता से जुड़ा सिस्टम भी शामिल किया जा रहा है, जिससे गलत जानकारी और धोखाधड़ी की संभावना कम करने में मदद मिलेगी।   बैंक और बीमा कंपनियां पहले जुड़ेंगी   नई CKYC 2.0 व्यवस्था में शुरुआत में बैंक और बीमा कंपनियों को शामिल किया जाएगा। इसके बाद म्यूचुअल फंड, ब्रोकरेज और कैपिटल मार्केट से जुड़े संस्थानों को भी इससे जोड़ा जाएगा। इस पहल को RBI, SEBI और IRDAI जैसी वित्तीय नियामक संस्थाओं के सहयोग से आगे बढ़ाया जा रहा है।   डिजिटल दस्तावेज सत्यापन भी होगा आसान   CKYC 2.0 में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा। DigiLocker जैसी सुविधाओं के साथ दस्तावेजों के सत्यापन को आसान बनाने की योजना है, जिससे कागजी प्रक्रिया कम होगी और KYC अपडेट तेजी से हो सकेगा।   ग्राहकों को क्या फायदा होगा?   बार-बार KYC दस्तावेज जमा करने की जरूरत कम होगी खाता खोलने और वित्तीय सेवाएं लेने की प्रक्रिया तेज होगी फर्जी पहचान और धोखाधड़ी रोकने में मदद मिलेगी डिजिटल वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान होगी   CKYC 2.0 को भारत की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था को मजबूत करने वाला बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह बैंकिंग, बीमा और निवेश सेवाओं को अधिक सरल और तेज बना सकता है।

abhishek singh जुलाई 28, 2026 0
Small Cap
स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड में लिक्विडिटी का दबाव मार्च 2024 के बाद सबसे निचले स्तर पर, बाजार में सुधार के संकेत

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में सुधार के बीच स्मॉलकैप म्यूचुअल फंडों पर लिक्विडिटी का दबाव मार्च 2024 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालिया बाजार तेजी और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के चलते फंड हाउसों के लिए नकदी प्रबंधन की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है।    बाजार में तेजी से सुधरी स्थिति   विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में स्मॉलकैप शेयरों में आई रिकवरी और निवेशकों के सकारात्मक रुख से फंडों को राहत मिली है। इससे पोर्टफोलियो में मौजूद शेयरों की खरीद-बिक्री पहले की तुलना में आसान हुई है और नकदी का दबाव कम हुआ है।    निवेशकों का भरोसा लौटा   म्यूचुअल फंड उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, स्मॉलकैप योजनाओं में निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा बढ़ रही है। नियमित निवेश (SIP) और नए निवेश प्रवाह ने फंड मैनेजरों को बेहतर लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद की है।    SEBI की निगरानी का भी दिखा असर   विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार नियामक SEBI द्वारा जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो पारदर्शिता को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। फंड हाउस अब लिक्विडिटी जोखिम का पहले से अधिक व्यवस्थित तरीके से आकलन कर रहे हैं।    विशेषज्ञों ने निवेशकों को दी सलाह   बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि लिक्विडिटी में सुधार सकारात्मक संकेत है, लेकिन स्मॉलकैप फंड अभी भी अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाले निवेश विकल्प हैं। उन्होंने निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिए और संतुलित पोर्टफोलियो रणनीति के साथ निवेश करने की सलाह दी है।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
SEBI CDSL
SEBI ने CDSL पर साइबर सुरक्षा में चूक को लेकर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) ने सेंट्रल डिपॉजिटरी सर्विसेज (इंडिया) लिमिटेड (CDSL) पर ₹1 करोड़ का जुर्माना लगाया है। यह कार्रवाई नवंबर 2022 में हुए मालवेयर साइबर हमले की जांच के बाद की गई, जिसमें CDSL की साइबर सुरक्षा और परिचालन व्यवस्था में कई गंभीर खामियां सामने आई थीं।   2022 के मालवेयर हमले के बाद हुई कार्रवाई   SEBI की जांच में पाया गया कि CDSL की सुरक्षा प्रणाली में कई महत्वपूर्ण कमियां थीं, जिनके कारण मालवेयर हमला सफल हुआ। इस साइबर हमले की वजह से डिपॉजिटरी की कई अहम सेवाएं बाधित हुईं और शेयर बाजार के सेटलमेंट सिस्टम पर भी असर पड़ा।   46 घंटे से ज्यादा प्रभावित रहीं सेवाएं   नियामक के अनुसार, साइबर हमले के कारण CDSL की कुछ महत्वपूर्ण सेवाएं करीब 46 घंटे तक प्रभावित रहीं, जबकि इंटर-डिपॉजिटरी ट्रांसफर जैसी सुविधाओं में भी लंबा व्यवधान आया। SEBI ने कहा कि इतनी महत्वपूर्ण बाजार अवसंरचना से जुड़ी संस्था के लिए मजबूत साइबर सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना अनिवार्य है।   SEBI ने गिनाईं कई सुरक्षा खामियां   जांच में कमजोर एक्सेस कंट्रोल, सुरक्षा अलर्ट की अपर्याप्त निगरानी, पासवर्ड प्रबंधन में लापरवाही और नियामकीय साइबर सुरक्षा मानकों का पालन नहीं करने जैसी कमियां सामने आईं। SEBI ने कहा कि इन खामियों के कारण हमले का जोखिम बढ़ा और बाजार संचालन प्रभावित हुआ।   वित्तीय संस्थानों को दिया सख्त संदेश   SEBI ने स्पष्ट किया कि पूंजी बाजार से जुड़ी संस्थाओं को साइबर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करना होगा। नियामक ने कहा कि डिजिटल अवसंरचना की सुरक्षा में लापरवाही निवेशकों के हितों और पूरे वित्तीय बाजार की स्थिरता के लिए गंभीर खतरा बन सकती है।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
SEBI
SEBI ने म्यूचुअल फंड निवेशकों को दी बड़ी राहत, ट्रांसमिशन प्रक्रिया हुई आसान

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने म्यूचुअल फंड निवेशकों और उनके नामांकित (नॉमिनी) व्यक्तियों को बड़ी राहत देते हुए म्यूचुअल फंड ट्रांसमिशन प्रक्रिया को सरल बनाने के नए नियम जारी किए हैं। नए नियमों का उद्देश्य निवेशक की मृत्यु के बाद दावों के निपटारे को तेज, पारदर्शी और कम दस्तावेज़ों वाला बनाना है। यह फैसला 17 जुलाई को जारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से सामने आया।   नॉमिनी को मिलेगा आसान दावा निपटान   नए नियमों के तहत म्यूचुअल फंड यूनिटधारक की मृत्यु के बाद नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) को ट्रांसमिशन क्लेम के लिए कम औपचारिकताओं का सामना करना पड़ेगा। एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) को दावों के निपटान की प्रक्रिया अधिक सरल और समयबद्ध बनाने के निर्देश दिए गए हैं।   दस्तावेज़ी प्रक्रिया होगी आसान   SEBI ने कहा है कि अनावश्यक दस्तावेज़ों और प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम किया जाएगा, ताकि निवेशकों के परिवारों को लंबे समय तक इंतजार न करना पड़े। इससे विशेष रूप से छोटे निवेशकों और उनके उत्तराधिकारियों को राहत मिलेगी।   डिमैट निवेशकों के लिए भी नई सुविधा   इसी के साथ SEBI ने डिमैट खाते में रखी गई म्यूचुअल फंड यूनिट्स के लिए Systematic Withdrawal Plan (SWP) और Systematic Transfer Plan (STP) की Standing Instructions की सुविधा भी मंजूर कर दी है। इससे डिमैट निवेशकों को भी वही सुविधा मिलेगी, जो अब तक केवल SOA (Statement of Account) फॉर्मेट वाले निवेशकों को उपलब्ध थी।   निवेशकों का भरोसा बढ़ाने की कोशिश   SEBI का कहना है कि इन बदलावों से म्यूचुअल फंड उद्योग में Ease of Doing Business को बढ़ावा मिलेगा और निवेशकों तथा उनके नामांकित व्यक्तियों के लिए दावों का निपटारा पहले की तुलना में अधिक तेज और सुविधाजनक होगा।

abhishek singh जुलाई 20, 2026 0
NSE IPO
NSE के IPO की तैयारी तेज, नियामकीय प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंची

मुंबई, एजेंसियां। देश के सबसे बड़े स्टॉक एक्सचेंज नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) की प्रक्रिया तेज हो गई है। बाजार नियामक SEBI के साथ आवश्यक मंजूरियों का अंतिम चरण चल रहा है और सभी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कंपनी जल्द ही अपना Draft Red Herring Prospectus (DRHP) दाखिल कर सकती है।   निवेशकों को लंबे समय से IPO का इंतजार   NSE का IPO भारतीय पूंजी बाजार के सबसे चर्चित सार्वजनिक निर्गमों में से एक माना जा रहा है। बड़ी संख्या में मौजूदा शेयरधारक और निवेशक लंबे समय से इसके बाजार में आने का इंतजार कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि IPO को निवेशकों से अच्छा प्रतिसाद मिल सकता है।   SEBI की मंजूरी के बाद होगा अगला कदम   सूत्रों के अनुसार, SEBI से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद NSE अपनी लिस्टिंग प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा। कंपनी सभी नियामकीय शर्तों का पालन करते हुए जल्द IPO लॉन्च करने की दिशा में काम कर रही है।    भारतीय शेयर बाजार के लिए होगा बड़ा इवेंट   विशेषज्ञों का कहना है कि NSE का IPO भारतीय शेयर बाजार के इतिहास की सबसे बड़ी लिस्टिंग में से एक हो सकता है। इससे पूंजी बाजार में निवेशकों की भागीदारी बढ़ने और बाजार को नई गति मिलने की उम्मीद है।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Carlsberg IPO
बीयर दिग्गज Carlsberg का बड़ा दांव: भारत में 700 मिलियन डॉलर IPO की तैयारी

नई दिल्ली, एजेंसियां। डेनमार्क की प्रमुख बीयर कंपनी Carlsberg ने भारत में अपने कारोबार को शेयर बाजार में लिस्ट कराने की तैयारी शुरू कर दी है। कंपनी ने भारतीय बाजार नियामक SEBI के पास अपनी यूनिट के लिए गोपनीय रूप से IPO फाइलिंग की है।   IPO का साइज 700 मिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है   सूत्रों के अनुसार, प्रस्तावित IPO का आकार लगभग 700 मिलियन डॉलर (करीब ₹6,000–6,600 करोड़) तक हो सकता है। यह पूरी तरह से Offer for Sale (OFS) आधारित होगा, जिसमें मौजूदा हिस्सेदारी का कुछ हिस्सा बेचा जाएगा।   बड़े इन्वेस्टमेंट बैंक को मिली जिम्मेदारी   इस IPO प्रक्रिया के लिए कंपनी ने प्रमुख ग्लोबल और घरेलू निवेश बैंकों को जिम्मेदारी दी है। इसमें Kotak Mahindra Capital, Citigroup और JP Morgan India शामिल हैं, जो इस इश्यू को मैनेज करेंगे।   भारत के IPO बाजार में बढ़ेगी हलचल   विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का तेजी से बढ़ता शेयर बाजार विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। Carlsberg का यह कदम इसी ट्रेंड को और मजबूत करेगा।   भारतीय बाजार में मजबूत स्थिति   Carlsberg भारत में लंबे समय से सक्रिय है और देश के तेजी से बढ़ते पेय बाजार में इसकी मजबूत हिस्सेदारी मानी जाती है। IPO के बाद कंपनी की ब्रांड वैल्यू और विस्तार योजनाओं को और गति मिलने की उम्मीद है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Jharkhand students protesting over JPSC-JSSC exam issues and demanding Rahul Gandhi’s intervention
झारखंड

Jharkhand Student Protest: छात्रों का ऐलान- राहुल गांधी के झारखंड आने तक जारी रहेगा आंदोलन

kalpana अगस्त 11, 2026 0