Shiromani Akali Dal

नायब सिंह सैनी का BJP और अकाली दल गठबंधन पर बयान
अकाली दल संग गठबंधन से इनकार, नायब सिंह सैनी बोले- BJP का गठबंधन पंजाब की जनता से

चंडीगढ़, एजेंसियां। पंजाब की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और शिरोमणि अकाली दल (SAD) के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलों पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने विराम लगा दिया है। सैनी ने स्पष्ट कहा कि आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव में BJP और अकाली दल के बीच गठबंधन की कोई संभावना नहीं है। उन्होंने कहा कि BJP का गठबंधन किसी राजनीतिक पार्टी के साथ नहीं, बल्कि पंजाब की जनता के साथ है।   मोदी-सुखबीर बादल की मुलाकात के बाद बढ़ी थी चर्चा   BJP और अकाली दल के बीच गठबंधन की चर्चा उस समय तेज हुई जब हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और SAD अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात हुई। इस मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में दोनों पुराने सहयोगियों के फिर साथ आने की अटकलें लगने लगी थीं। दोनों दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे हैं, लेकिन कृषि कानूनों के मुद्दे पर 2020 में उनका गठबंधन टूट गया था। इसके बाद दोनों पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़े।   नायब सैनी ने साफ किया BJP का रुख   गठबंधन की संभावनाओं पर पूछे गए सवाल के जवाब में नायब सिंह सैनी ने कहा कि BJP का गठबंधन पंजाब की जनता के साथ है। उनके बयान से संकेत मिलता है कि पार्टी फिलहाल पंजाब में अपने दम पर राजनीतिक आधार मजबूत करने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है। सैनी ने पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा और राज्य में BJP को मजबूत विकल्प के तौर पर पेश किया।   2027 विधानसभा चुनाव से पहले गरमाई पंजाब की सियासत   पंजाब में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो चुकी हैं। BJP और SAD के संभावित गठबंधन को लेकर पिछले कुछ दिनों से लगातार चर्चा चल रही थी। वहीं कांग्रेस और आम आदमी पार्टी भी इस संभावित राजनीतिक समीकरण पर नजर बनाए हुए हैं। कांग्रेस सांसद अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने भी BJP-SAD गठबंधन की अटकलों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि दोनों दल साथ आएं या किसी अन्य राजनीतिक ताकत के साथ जाएं, इससे उन्हें पंजाब की जनता का समर्थन हासिल नहीं होगा।   क्या फिर साथ आएंगे BJP और अकाली दल?   फिलहाल BJP की ओर से नायब सैनी का बयान दोबारा गठबंधन की संभावनाओं को कमजोर करता दिखाई दे रहा है। हालांकि, पंजाब की राजनीति में चुनाव से पहले राजनीतिक समीकरण बदलते रहे हैं। इसलिए अभी यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले महीनों में BJP और SAD के शीर्ष नेतृत्व की ओर से गठबंधन को लेकर कोई औपचारिक बातचीत या नया फैसला सामने आता है या नहीं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 11, 2026 0
Satluj Film Controversy
फिल्म ‘सतलुज’ पर पंजाब में सियासत गरमाई, अकाली दल हर गांव में करेगा विशेष प्रदर्शन

मुंबई, एजेंसियां। मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित फिल्म ‘सतलुज’ को लेकर पंजाब की राजनीति गरमा गई है। शिरोमणि अकाली दल (SAD) के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने घोषणा की है कि उनकी पार्टी इस फिल्म का प्रदर्शन पंजाब के हर गांव और कोने में करेगी। यह फिल्म पहले ‘पंजाब ’95’ नाम से बनाई गई थी और 3 जुलाई को ओटीटी प्लेटफॉर्म ZEE5 पर बिना किसी कट के रिलीज हुई थी। हालांकि, दो दिन बाद ही इसे प्लेटफॉर्म से हटा लिया गया, जिसके बाद विवाद और गहरा गया।   खालरा के संघर्ष को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की बात सुखबीर सिंह बादल ने सोशल मीडिया पर कहा कि यह फिल्म कांग्रेस शासन के दौरान सिख समुदाय पर हुए कथित अत्याचारों और जसवंत सिंह खालरा के संघर्ष को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ियों को उस दौर के इतिहास से परिचित कराने के लिए अकाली दल राज्यभर में फिल्म का प्रदर्शन करेगा। बादल ने आरोप लगाया कि उस समय हुए घटनाक्रम को दबाने की कोशिश की जा रही है और उनकी पार्टी ऐसा नहीं होने देगी।   फिल्म हटाने पर राजनीतिक बयानबाजी फिल्म के ओटीटी से हटाए जाने को लेकर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने विपक्ष के उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें केंद्र सरकार या भाजपा पर फिल्म हटवाने का आरोप लगाया गया था। उन्होंने कहा कि यह मामला राजनीतिक रंग देने की कोशिश है और फिल्म में दिखाया गया दौर कांग्रेस शासन का था।   इस बीच पंजाब भाजपा ने बताया कि सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने फिल्म को ओटीटी से हटाने के मामले की समीक्षा के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है।   हनी त्रेहान के निर्देशन में बनी ‘सतलुज’ मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालरा के जीवन पर आधारित है। खालरा ने 1984 से 1994 के दौरान पंजाब में हजारों अज्ञात शवों के अंतिम संस्कार के मामलों की जांच की थी। वर्ष 1995 में उनके लापता होने के बाद 2005 में पंजाब पुलिस के चार कर्मियों को उनके अपहरण और हत्या का दोषी ठहराया गया था।

anjali kumari जुलाई 9, 2026 0
AAP supporters celebrating Punjab municipal election victory as party secures majority of wards
पंजाब निकाय चुनाव में AAP की बड़ी जीत, बीजेपी पांचवें स्थान पर; कांग्रेस रही दूसरे नंबर पर

पंजाब नगर निकाय चुनाव में आम आदमी पार्टी (AAP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्पष्ट बढ़त हासिल की है। चुनाव नतीजों में AAP ने 900 से अधिक वार्डों में जीत दर्ज कर राज्य की राजनीति में अपनी मजबूत पकड़ का संदेश दिया है। वहीं कांग्रेस दूसरे स्थान पर रही, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का प्रदर्शन उम्मीदों से काफी कमजोर रहा। इन चुनावों को राज्य में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक परीक्षा माना जा रहा था। नतीजों ने संकेत दिया है कि शहरी क्षेत्रों में भी पार्टी का प्रभाव बरकरार है। AAP ने जीते सबसे ज्यादा वार्ड रात 11 बजे तक उपलब्ध नतीजों के अनुसार, कुल 1,977 वार्डों में हुए चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 957 सीटों पर जीत दर्ज की। कांग्रेस 397 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही। वहीं निर्दलीय उम्मीदवारों ने भी अच्छा प्रदर्शन करते हुए 251 वार्ड जीते। शिरोमणि अकाली दल (SAD) को 191 सीटें मिलीं, जबकि बीजेपी केवल 167 सीटों पर जीत दर्ज कर सकी।   प्रमुख दलों का प्रदर्शन पार्टी जीती सीटें (वार्ड) आम आदमी पार्टी (AAP) 957 कांग्रेस (INC) 397 निर्दलीय (IND) 251 शिरोमणि अकाली दल (SAD) 191 भारतीय जनता पार्टी (BJP) 167 बहुजन समाज पार्टी (BSP) 7 बीजेपी के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं ये नतीजे? नगर निकाय चुनावों में बीजेपी का पांचवें स्थान पर रहना पार्टी के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है। पार्टी न केवल कांग्रेस और AAP से पीछे रही, बल्कि निर्दलीय उम्मीदवारों और शिरोमणि अकाली दल से भी कम सीटें हासिल कर सकी। विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में संगठन विस्तार और जनाधार बढ़ाने के लिए बीजेपी को नई रणनीति पर काम करना पड़ सकता है। खासकर ऐसे समय में जब पार्टी राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत स्थिति में है, लेकिन राज्य में अपेक्षित समर्थन हासिल नहीं कर पा रही है। जीत के बाद AAP में जश्न का माहौल नतीजों के बाद पंजाब भर में आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने जीत का जश्न मनाया। पार्टी कार्यालयों में ढोल-नगाड़ों के साथ खुशी मनाई गई और समर्थकों के बीच मिठाइयां बांटी गईं। पार्टी नेताओं ने इसे राज्य सरकार के कामकाज और विकास नीतियों पर जनता की मुहर बताया। अरविंद केजरीवाल ने बीजेपी पर साधा निशाना जीत के बाद आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने पंजाब की जनता का आभार जताया। उन्होंने बीजेपी पर हमला बोलते हुए कहा कि जनता ने उन ताकतों को जवाब दिया है जो लगातार लोगों और छोटे कारोबारियों को परेशान करने का काम कर रही थीं। केजरीवाल ने बीजेपी को "ईडी पार्टी" बताते हुए कहा कि मतदाताओं ने नकारात्मक राजनीति को खारिज कर दिया है। भगवंत मान बोले- जनता ने विकास की राजनीति को चुना भगवंत मान ने चुनाव परिणामों का स्वागत करते हुए कहा कि जनता ने विकास, काम और जनहित की राजनीति पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजे यह दिखाते हैं कि लोग नफरत और टकराव की राजनीति के बजाय विकास और सुशासन को प्राथमिकता दे रहे हैं। पंजाब की राजनीति के लिए क्या संकेत? नगर निकाय चुनावों के नतीजे यह संकेत देते हैं कि पंजाब में आम आदमी पार्टी अभी भी मजबूत स्थिति में है। कांग्रेस ने दूसरे स्थान पर रहकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है, लेकिन सत्तारूढ़ दल से उसका अंतर काफी बड़ा है। वहीं बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल के सामने आने वाले समय में अपने जनाधार को मजबूत करने की चुनौती बनी रहेगी। इन नतीजों को भविष्य के विधानसभा और लोकसभा चुनावों की दिशा तय करने वाले संकेतों के रूप में भी देखा जा रहा है।  

surbhi मई 30, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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भारत की हवाई ताकत को मिलेगा बड़ा बूस्ट? फ्रांस ने 114 राफेल फाइटर जेट का प्रस्ताव सौंपा, 94 विमान भारत में बनाने की योजना

surbhi अगस्त 7, 2026 0