SIP

जुलाई 2026 में इक्विटी म्यूचुअल फंड निवेश प्रवाह में गिरावट
इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश प्रवाह 42% घटा, जुलाई में ₹24,697 करोड़ रहा

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेशकों की नई निवेश राशि में जुलाई 2026 के दौरान बड़ी कमी दर्ज की गई। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के अनुसार, इक्विटी म्यूचुअल फंड में शुद्ध निवेश प्रवाह सालाना आधार पर करीब 42% घटकर ₹24,697 करोड़ रह गया। निवेशकों की ओर से ऊंचे वैल्यूएशन और शेयर बाजार से अपेक्षाकृत कमजोर रिटर्न को लेकर सावधानी बरतने को इसकी प्रमुख वजह माना जा रहा है।   जून के मुकाबले भी कम हुआ निवेश     जुलाई में इक्विटी फंडों का निवेश प्रवाह जून के ₹28,973 करोड़ से करीब 15% कम रहा। इसके बावजूद इक्विटी म्यूचुअल फंड में लगातार 65वें महीने शुद्ध निवेश दर्ज हुआ, जो बताता है कि निवेशकों ने पूरी तरह बाजार से दूरी नहीं बनाई है।     लार्जकैप फंड में पहली बार निकासी     जुलाई में लार्जकैप फंडों से ₹1,322 करोड़ की निकासी हुई। यह दिसंबर 2023 के बाद पहली बार है जब इस श्रेणी में मासिक आधार पर शुद्ध आउटफ्लो दर्ज हुआ। इसके उलट स्मॉलकैप फंडों में निवेश 39% बढ़कर ₹7,768 करोड़ और मिडकैप फंडों में करीब 1.7% बढ़कर ₹6,192 करोड़ पहुंच गया।     SIP निवेश ने संभाला मोर्चा     इक्विटी फंडों में नए निवेश की रफ्तार धीमी होने के बावजूद SIP के जरिए निवेश मजबूत बना हुआ है। जुलाई में SIP योगदान बढ़कर करीब ₹31,961 करोड़ हो गया, जो जून के ₹31,781 करोड़ से अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि बाजार की अनिश्चितता के बीच भी नियमित और लंबी अवधि के निवेश को लेकर निवेशकों का भरोसा कायम है।     निवेशकों का रुख हुआ ज्यादा सतर्क     बाजार में ऊंचे वैल्यूएशन और अपेक्षाकृत सीमित इक्विटी रिटर्न के कारण निवेशक अब ज्यादा चयनात्मक नजर आ रहे हैं। हालांकि स्मॉलकैप और मिडकैप फंडों में बढ़ता निवेश बताता है कि जोखिम लेने की क्षमता पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड के अंतरराष्ट्रीय फंड्स में SIP और STP पर अस्थायी रोक
PGIM इंडिया ने 3 इंटरनेशनल फंड्स में SIP और STP रजिस्ट्रेशन पर अस्थायी रोक लगाई

मुंबई, एजेंसियां। PGIM इंडिया म्यूचुअल फंड ने अपने तीन अंतरराष्ट्रीय फंड ऑफ फंड्स में सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) और सिस्टमेटिक ट्रांसफर प्लान (STP) के मौजूदा रजिस्ट्रेशन को अस्थायी रूप से निलंबित करने का फैसला किया है। यह बदलाव 7 अगस्त 2026 से लागू होगा।   इन तीन फंड्स पर पड़ेगा असर     PGIM इंडिया की ओर से जिन योजनाओं में SIP और STP रजिस्ट्रेशन को अस्थायी रूप से रोका गया है, उनमें शामिल हैं:   PGIM India Global Equity Opportunities Fund of Fund PGIM India Emerging Markets Equity Fund of Fund PGIM India Global Select Real Estate Securities Fund of Fund इन योजनाओं में पहले से चल रहे SIP और STP रजिस्ट्रेशन पर नए निर्देशों का असर पड़ेगा।   7 अगस्त से लागू होगा फैसला     म्यूचुअल फंड हाउस का यह निर्णय 7 अगस्त 2026 से प्रभावी होगा। यानी निवेशकों को इन तीन अंतरराष्ट्रीय योजनाओं में SIP और STP के जरिए निवेश जारी रखने को लेकर नए नियमों का सामना करना पड़ेगा।   PGIM इंडिया ने इससे पहले भी अपने अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश सीमा और SIP से जुड़े नियमों में बदलाव किए हैं। इन योजनाओं पर विदेशी निवेश से जुड़ी नियामकीय सीमाओं का प्रभाव रहा है।   अंतरराष्ट्रीय निवेश पर बढ़ा नियामकीय दबाव     भारतीय म्यूचुअल फंड कंपनियों के अंतरराष्ट्रीय फंड्स में निवेश पर SEBI और विदेशी निवेश की निर्धारित सीमाओं से जुड़े नियमों का असर पड़ता है। इसी वजह से कई फंड हाउस समय-समय पर लंपसम निवेश, SIP और STP की सीमा या उपलब्धता में बदलाव करते रहे हैं।   PGIM इंडिया का ताजा कदम भी उसके अंतरराष्ट्रीय फंड ऑफ फंड्स में निवेश प्रवाह को नियंत्रित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। निवेशकों के लिए जरूरी है कि वे अपने SIP या STP पर लागू नए नियमों की जानकारी फंड हाउस से जरूर जांच लें।   निवेशकों को क्या करना चाहिए     जिन निवेशकों का इन तीन योजनाओं में SIP या STP चल रहा है, उन्हें 7 अगस्त 2026 से लागू होने वाले बदलावों को ध्यान से देखना चाहिए। नई SIP/STP व्यवस्था शुरू करने या मौजूदा निवेश में बदलाव करने से पहले संबंधित योजना के आधिकारिक नोटिस और फंड हाउस की जानकारी देखना बेहतर होगा。   यह फैसला निवेश को खत्म करने या फंड से पैसा निकालने का निर्देश नहीं है, बल्कि SIP और STP रजिस्ट्रेशन से जुड़ा अस्थायी बदलाव है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 6, 2026 0
Investment chart showing long-term stock market growth and why staying invested beats trying to time the market.
Share Market Investment: बाजार को टाइम करने की कोशिश पड़ सकती है महंगी, 21 साल के आंकड़ों ने बताया निवेश का बड़ा मंत्र

Share Market Investment Tips: शेयर बाजार में अक्सर निवेशक यह सोचते हैं कि गिरावट में खरीदें और तेजी आने पर बेच दें। लेकिन क्या वास्तव में मार्केट टाइमिंग से ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है? एक नए अध्ययन के मुताबिक इसका जवाब 'नहीं' है। आंकड़े बताते हैं कि बाजार के कुछ बेहतरीन दिनों से चूकना आपके लंबे समय के रिटर्न को काफी कम कर सकता है। 21 साल के अध्ययन में क्या सामने आया? Abakkus Mutual Fund द्वारा अप्रैल 2005 से मई 2026 तक के 21 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें Nifty 50 TRI, Nifty Midcap 150 TRI और Nifty Smallcap 250 TRI के प्रदर्शन का अध्ययन किया गया। रिपोर्ट में पाया गया कि जिन निवेशकों ने पूरे समय बाजार में निवेश बनाए रखा, उन्हें सबसे अधिक फायदा मिला। पूरे समय निवेशित रहने पर औसत रिटर्न इंडेक्स औसत रिटर्न Nifty 50 TRI 13.6% Nifty Midcap 150 TRI 17.18% Nifty Smallcap 250 TRI 15.8% सिर्फ 10 अच्छे दिन मिस किए तो कितना असर? यदि कोई निवेशक बाजार के केवल 10 सबसे अच्छे कारोबारी दिनों में निवेशित नहीं रहा, तो उसके रिटर्न में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडेक्स रिटर्न Nifty 50 TRI 9.67% Nifty Midcap 150 TRI 13.58% Nifty Smallcap 250 TRI 12.44% 50 अच्छे दिन छूटे तो रिटर्न लगभग खत्म यदि निवेशक बाजार के 50 सबसे अच्छे दिन मिस कर देता है, तो रिटर्न और भी तेजी से घट जाता है। इंडेक्स रिटर्न Nifty 50 TRI 0.89% Nifty Midcap 150 TRI 5.65% Nifty Smallcap 250 TRI 4.87% मार्केट टाइमिंग क्यों मुश्किल है? विशेषज्ञों का मानना है कि मार्केट टाइमिंग आसान नहीं है, क्योंकि इसमें दो फैसले बिल्कुल सही होने चाहिए— कब बाजार में निवेश करना है। कब निवेश निकालना है। यदि इनमें से कोई एक फैसला भी गलत हो जाए, तो लंबे समय का रिटर्न काफी प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञों की राय Money Honey Financial Services के एमडी और सीईओ अनूप भैया के अनुसार, मार्केट टाइमिंग करने वाले निवेशकों को एंट्री और एग्जिट दोनों सही समय पर करने होते हैं। इनमें से एक भी निर्णय गलत होने पर कंपाउंडिंग का बड़ा फायदा छूट सकता है। वहीं SIFT Capital के फाउंडर विनीत नंदा का कहना है कि निवेशक अक्सर यह मान लेते हैं कि वे बाजार की चाल को समझ सकते हैं, लेकिन हकीकत यह है कि बाजार हमेशा तर्क या अनुमान के मुताबिक नहीं चलता। यही कारण है कि लॉन्ग टर्म निवेश की रणनीति अधिक प्रभावी मानी जाती है। लॉन्ग टर्म निवेश क्यों बेहतर माना जाता है? कंपाउंडिंग का पूरा फायदा मिलता है। बाजार की अस्थायी गिरावट का असर कम होता है। बार-बार खरीद-बिक्री की जरूरत नहीं पड़ती। भावनात्मक फैसलों से बचाव होता है। लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ती है।  

surbhi जुलाई 22, 2026 0
Small Cap
स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड में लिक्विडिटी का दबाव मार्च 2024 के बाद सबसे निचले स्तर पर, बाजार में सुधार के संकेत

मुंबई, एजेंसियां। भारतीय शेयर बाजार में सुधार के बीच स्मॉलकैप म्यूचुअल फंडों पर लिक्विडिटी का दबाव मार्च 2024 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। हालिया बाजार तेजी और निवेशकों की बढ़ती भागीदारी के चलते फंड हाउसों के लिए नकदी प्रबंधन की स्थिति पहले की तुलना में बेहतर हुई है।    बाजार में तेजी से सुधरी स्थिति   विश्लेषकों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में स्मॉलकैप शेयरों में आई रिकवरी और निवेशकों के सकारात्मक रुख से फंडों को राहत मिली है। इससे पोर्टफोलियो में मौजूद शेयरों की खरीद-बिक्री पहले की तुलना में आसान हुई है और नकदी का दबाव कम हुआ है।    निवेशकों का भरोसा लौटा   म्यूचुअल फंड उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, स्मॉलकैप योजनाओं में निवेशकों की दिलचस्पी दोबारा बढ़ रही है। नियमित निवेश (SIP) और नए निवेश प्रवाह ने फंड मैनेजरों को बेहतर लिक्विडिटी बनाए रखने में मदद की है।    SEBI की निगरानी का भी दिखा असर   विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार नियामक SEBI द्वारा जोखिम प्रबंधन और पोर्टफोलियो पारदर्शिता को लेकर जारी दिशा-निर्देशों का भी सकारात्मक प्रभाव देखने को मिला है। फंड हाउस अब लिक्विडिटी जोखिम का पहले से अधिक व्यवस्थित तरीके से आकलन कर रहे हैं।    विशेषज्ञों ने निवेशकों को दी सलाह   बाजार विशेषज्ञों ने कहा कि लिक्विडिटी में सुधार सकारात्मक संकेत है, लेकिन स्मॉलकैप फंड अभी भी अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाले निवेश विकल्प हैं। उन्होंने निवेशकों को लंबी अवधि के नजरिए और संतुलित पोर्टफोलियो रणनीति के साथ निवेश करने की सलाह दी है।

abhishek singh जुलाई 21, 2026 0
NPS
NPS निवेशकों के लिए PFRDA का बड़ा कदम, अब SIP रिटर्न और 5,000 दिनों का NAV डेटा देख सकेंगे सब्सक्राइबर

नई दिल्ली, एजेंसियां। नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) के करोड़ों निवेशकों के लिए पेंशन फंड नियामक PFRDA ने एक नया डिजिटल प्लेटफॉर्म 'NPS PRIDE-Disha' (Pension Fund Returns for Informed Decision & Empowerment) लॉन्च किया है। इस टूल का उद्देश्य निवेशकों को अपने पेंशन निवेश का बेहतर विश्लेषण करने और सूचित निवेश निर्णय लेने में मदद करना है।   SIP रिटर्न और 5,000 दिनों का NAV डेटा मिलेगा   नए प्लेटफॉर्म के जरिए NPS सब्सक्राइबर अब अपने निवेश का SIP रिटर्न देख सकेंगे। साथ ही उन्हें 5,000 दिनों तक का ऐतिहासिक NAV (Net Asset Value) डेटा भी उपलब्ध होगा, जिससे वे अलग-अलग समय में फंड के प्रदर्शन का विश्लेषण कर सकेंगे।   पेंशन फंड्स की आसान तुलना   इस डिजिटल टूल में विभिन्न पेंशन फंड मैनेजर्स, निवेश योजनाओं और एसेट क्लास के प्रदर्शन की तुलना करने की सुविधा भी दी गई है। इससे निवेशकों को अपनी निवेश रणनीति का मूल्यांकन करने और बेहतर विकल्प चुनने में आसानी होगी।   आने वाले समय में जुड़ेंगे नए फीचर्स   PFRDA के अनुसार, भविष्य में इस प्लेटफॉर्म पर इंटरैक्टिव डैशबोर्ड, एडवांस एनालिटिक्स और बेहतर विजुअलाइजेशन टूल्स भी जोड़े जाएंगे, ताकि सब्सक्राइबर अपने रिटायरमेंट पोर्टफोलियो को और प्रभावी ढंग से समझ सकें।   पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम   विशेषज्ञों का मानना है कि NPS PRIDE-Disha प्लेटफॉर्म से निवेशकों को अपने पेंशन निवेश की वास्तविक स्थिति समझने में आसानी होगी। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और सब्सक्राइबर्स अपने दीर्घकालिक रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए अधिक सटीक और जानकारीपूर्ण फैसले ले सकेंगे।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Mutual Fund SIP
जून में SIP निवेश 3 महीने के उच्चतम स्तर पर, म्यूचुअल फंड में ₹31,781 करोड़ का रिकॉर्ड निवेश

नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए जून 2026 उत्साहजनक रहा। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए निवेश बढ़कर ₹31,781 करोड़ पर पहुंच गया, जो पिछले तीन महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है। यह मई की तुलना में लगभग 3% अधिक है और निवेशकों के मजबूत भरोसे को दर्शाता है।   इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश में जोरदार उछाल   जून के दौरान इक्विटी म्यूचुअल फंडों में शुद्ध निवेश 26% बढ़कर ₹28,973 करोड़ पहुंच गया। खासकर मिडकैप और स्मॉलकैप फंडों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी, जिससे इक्विटी योजनाओं में मजबूत निवेश देखने को मिला।   रिटेल निवेशकों का भरोसा कायम   बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशकों ने SIP के जरिए नियमित निवेश जारी रखा। विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि में संपत्ति बनाने की रणनीति और वित्तीय जागरूकता बढ़ने से SIP निवेश लगातार मजबूत हो रहा है।   डेट फंडों से निकासी जारी   जहां इक्विटी फंडों में निवेश बढ़ा, वहीं डेट म्यूचुअल फंडों से लगातार दूसरे महीने निकासी दर्ज की गई। इससे साफ है कि निवेशकों का रुझान फिलहाल इक्विटी आधारित योजनाओं की ओर अधिक बना हुआ है।   बाजार के लिए सकारात्मक संकेत   विशेषज्ञों का कहना है कि SIP में लगातार बढ़ता निवेश भारतीय शेयर बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है। घरेलू निवेशकों की मजबूत भागीदारी से बाजार को स्थिरता मिल रही है और विदेशी निवेश में उतार-चढ़ाव का असर कुछ हद तक संतुलित हो रहा है।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
FIFA World Cup 2026
FIFA वर्ल्ड कप 2026: बेल्जियम को 2-1 से हराकर स्पेन सेमीफाइनल में, अब फ्रांस से महामुकाबला

लॉस एंजिल्स, एजेंसियां। फीफा वर्ल्ड कप 2026 के रोमांचक क्वार्टर फाइनल मुकाबले में स्पेन ने बेल्जियम को 2-1 से हराकर सेमीफाइनल में जगह बना ली। 2010 में विश्व चैंपियन बनने के बाद यह पहला मौका है, जब स्पेन की टीम वर्ल्ड कप के अंतिम चार में पहुंची है। अब 15 जुलाई को उसका सामना मजबूत फ्रांस से होगा, जिसे टूर्नामेंट का सबसे बड़ा मुकाबला माना जा रहा है।   मैच की शुरुआत मैच की शुरुआत से ही दोनों टीमों ने आक्रामक खेल दिखाया। स्पेन ने 30वें मिनट में पहला गोल कर बढ़त बनाई, लेकिन बेल्जियम ने 41वें मिनट में चार्ल्स डे केटेलेरे के शानदार हेडर की बदौलत बराबरी कर ली। टिमोथी कास्टाग्ने के सटीक क्रॉस पर आए इस गोल ने स्पेन की लगातार छह क्लीन शीट का सिलसिला भी समाप्त कर दिया। गोलकीपर उनाई सिमोन का कतर वर्ल्ड कप से चला आ रहा 650 मिनट तक बिना गोल खाए रहने का रिकॉर्ड भी इसी मैच में टूट गया।   पहले हाफ के बाद मुकाबला 1-1 से बराबरी पर था और दूसरे हाफ में दोनों टीमों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली। ऐसा लग रहा था कि मैच अतिरिक्त समय में जाएगा, लेकिन 88वें मिनट में स्पेन के कोच का दांव सफल साबित हुआ। मैदान पर आने के महज दो मिनट बाद सब्स्टीट्यूट मिकेल मेरिनो ने बेल्जियम के रिजर्व गोलकीपर सेने लैमेंस की गलती का फायदा उठाते हुए विजयी गोल दाग दिया। पाउ कुबारसी के दूर से लगाए गए शॉट को लैमेंस ठीक से नियंत्रित नहीं कर सके और मेरिनो ने ढीली गेंद को गोल में बदल दिया।   स्पेन और फ्रांस  इस जीत के साथ स्पेन ने रेगुलर टाइम में मार्च 2023 से अपना अजेय अभियान 37 मैचों तक बढ़ा दिया, जबकि बेल्जियम की लगातार 18 मैचों की अजेय लय टूट गई। टूर्नामेंट का तीसरा क्वार्टर फाइनल इंग्लैंड और नॉर्वे के बीच 12 जुलाई को भारतीय समयानुसार रात 2:30 बजे खेला जाएगा। अब सभी की निगाहें स्पेन और फ्रांस के बीच होने वाले हाई-वोल्टेज सेमीफाइनल पर टिकी हैं।

anjali kumari जुलाई 11, 2026 0
ICICI Prudential Multi-Asset Active Fund of Funds offering diversified exposure to equity, debt, gold, and silver investments.
Mutual Fund NFO: ICICI Prudential ने लॉन्च किया Multi-Asset Active FoF, एक ही फंड में मिलेगा इक्विटी, डेट, गोल्ड और सिल्वर का फायदा

मुंबई: निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो को विविध (Diversified) बनाने का एक नया विकल्प सामने आया है। ICICI Prudential Mutual Fund ने अपना नया ICICI Prudential Multi-Asset Active Fund of Funds (FoF) लॉन्च किया है। यह एक ओपन-एंडेड फंड ऑफ फंड्स (FoF) स्कीम है, जिसका उद्देश्य निवेशकों को एक ही फंड के माध्यम से इक्विटी, डेट, गोल्ड ETF और सिल्वर ETF जैसे अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश का अवसर देना है। यह न्यू फंड ऑफर (NFO) निवेश के लिए खुल चुका है और इसमें 14 जुलाई 2026 तक निवेश किया जा सकता है। क्या है Multi-Asset Active FoF? यह स्कीम सीधे शेयर या बॉन्ड में निवेश नहीं करती, बल्कि ICICI Prudential की विभिन्न एक्टिव इक्विटी स्कीम, डेट स्कीम और गोल्ड/सिल्वर ETF की यूनिट्स में निवेश करती है। इसका उद्देश्य अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश कर जोखिम को संतुलित करना और लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न की संभावना तैयार करना है। बाजार के अनुसार बदलेगा निवेश का अनुपात ICICI Prudential का कहना है कि यह फंड बाजार की मौजूदा परिस्थितियों, वैल्यूएशन और व्यापक आर्थिक (Macro-economic) संकेतकों के आधार पर अलग-अलग एसेट क्लास में निवेश का अनुपात समय-समय पर बदलता रहेगा। यानी यदि किसी समय इक्विटी आकर्षक लगेगी तो उसका हिस्सा बढ़ाया जा सकता है, जबकि बाजार में जोखिम बढ़ने पर डेट या गोल्ड का आवंटन बढ़ाया जा सकता है। कंपनी ने क्या कहा? ICICI Prudential Asset Management Company के Executive Director और Chief Investment Officer (CIO) एस. नरेन के अनुसार, अलग-अलग आर्थिक और बाजार चक्रों में प्रत्येक एसेट क्लास का प्रदर्शन अलग होता है। ऐसे में अनुशासित एसेट एलोकेशन लंबी अवधि के निवेश का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यह स्कीम निवेशकों को रिसर्च आधारित रणनीति के माध्यम से इक्विटी, डेट और कीमती धातुओं में संतुलित निवेश का अवसर प्रदान करती है, जिससे बदलते बाजार में पोर्टफोलियो अधिक संतुलित रह सकता है। कैसे काम करेगा एसेट एलोकेशन? यह फंड किसी एक एसेट क्लास पर निर्भर रहने के बजाय उनकी आकर्षकता के आधार पर निवेश का अनुपात तय करेगा। संभावित एसेट एलोकेशन इस प्रकार रहेगा— एक्टिव इक्विटी स्कीम: 30% से 80% एक्टिव डेट स्कीम: 10% से 60% गोल्ड ETF और/या सिल्वर ETF: 10% से 30% निवेशकों को क्या मिलेंगे फायदे? इस स्कीम का उद्देश्य तीन प्रमुख निवेश लक्ष्यों को एक साथ पूरा करना है— इक्विटी के जरिए लंबी अवधि में पूंजी वृद्धि (Wealth Creation) डेट स्कीम के माध्यम से अपेक्षाकृत स्थिर आय और कम उतार-चढ़ाव गोल्ड और सिल्वर ETF के जरिए पोर्टफोलियो में विविधता और महंगाई के प्रभाव से संभावित सुरक्षा इस तरह निवेशकों को एक ही फंड में कई एसेट क्लास का एक्सपोजर मिल सकता है। न्यूनतम निवेश कितना? इस NFO में निवेश की शुरुआत ₹1,000 से की जा सकती है। इसके बाद निवेश ₹1,000 के गुणकों में किया जा सकेगा। निवेशकों के लिए इसमें डायरेक्ट प्लान और रेगुलर प्लान दोनों विकल्प उपलब्ध हैं। फंड मैनेजर और बेंचमार्क इस स्कीम का प्रबंधन अनुभवी फंड मैनेजरों की टीम करेगी, जिसमें शामिल हैं— धर्मेश कक्कड़ मनीष बंथिया अखिल कक्कड़ शर्मिला डी'सिल्वा गौरव चिकने इसका बेंचमार्क निम्नलिखित मिश्रित इंडेक्स पर आधारित होगा— 55% निफ्टी 200 TRI 35% निफ्टी कंपोजिट डेट इंडेक्स 7% घरेलू गोल्ड प्राइस 3% घरेलू सिल्वर प्राइस निवेश से पहले रखें इन बातों का ध्यान हालांकि मल्टी-एसेट फंड्स पोर्टफोलियो में विविधता लाने का अवसर देते हैं, लेकिन किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन होता है। निवेश करने से पहले अपनी वित्तीय जरूरतों, जोखिम उठाने की क्षमता और निवेश अवधि का आकलन करना जरूरी है। यदि आवश्यक हो तो किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार से परामर्श लेना बेहतर रहेगा।  

surbhi जुलाई 2, 2026 0
Young Age Investment
कम उम्र में निवेश क्यों जरूरी है? जानिए जल्दी शुरुआत के फायदे और निवेश के विकल्प

रांची। आजकल का युवा आर्थिक आजादी चाहता है। आज के समय में सिर्फ कमाई करना ही नहीं, बल्कि सही समय पर निवेश शुरू करना भी आर्थिक रूप से मजबूत बनने का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि कम उम्र में निवेश शुरू करने से लंबे समय में बेहतर रिटर्न और मजबूत फाइनेंशियल प्लानिंग का फायदा मिल सकता है। क्यों जरूरी है जल्दी निवेश शुरू करना? विशेषज्ञों के मुताबिक, कम उम्र में निवेश शुरू करने का सबसे बड़ा फायदा समय का होता है। लंबे समय तक निवेश बने रहने से पैसा बढ़ने के ज्यादा मौके मिलते हैं और भविष्य के बड़े वित्तीय लक्ष्यों को आसानी से हासिल किया जा सकता है। Compounding Effect देता है बड़ा फायदा निवेश की दुनिया में Compounding Effect को सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर माना जाता है। इसका मतलब है कि निवेश पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे रिटर्न कमाने लगता है। यही वजह है कि जल्दी शुरुआत करने वाले निवेशकों को लंबे समय में बड़ा फायदा मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति 25 साल की उम्र में निवेश शुरू करता है और दूसरा 35 साल की उम्र में, तो पहले व्यक्ति को ज्यादा समय मिलने के कारण बेहतर ग्रोथ का फायदा मिल सकता है। कम रकम से भी हो सकती है शुरुआत विशेषज्ञों का कहना है कि निवेश शुरू करने के लिए बड़ी रकम जरूरी नहीं है। आज कई ऐसे विकल्प मौजूद हैं, जहां छोटी राशि से भी निवेश शुरू किया जा सकता है। निवेश के कौन-कौन से विकल्प मौजूद हैं? 1. SIP (Systematic Investment Plan): हर महीने तय राशि निवेश करने का आसान तरीका, जो लंबी अवधि में फायदेमंद माना जाता है। 2. Mutual Funds: पेशेवर फंड मैनेजमेंट के जरिए निवेश करने का विकल्प, जिसमें अलग-अलग जोखिम स्तर मौजूद होते हैं। 3. Fixed Deposit (FD): कम जोखिम पसंद करने वालों के लिए लोकप्रिय विकल्प, जहां तय ब्याज मिलता है। 4. PPF (Public Provident Fund): लंबी अवधि का निवेश विकल्प, जिसमें टैक्स लाभ भी मिलता है। 5. Stock Market: उच्च जोखिम और संभावित उच्च रिटर्न वाला विकल्प, जिसके लिए जानकारी जरूरी मानी जाती है। 6. Gold Investment: सोना लंबे समय से सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है, जिसमें डिजिटल और फिजिकल दोनों तरीके मौजूद हैं। 7. Recurring Deposit (RD): हर महीने छोटी राशि जमा करने का आसान बैंकिंग विकल्प। जल्दी निवेश करने के फायदे लंबी अवधि में बड़ा फंड बनाने का मौका Compounding का ज्यादा फायदा आर्थिक लक्ष्यों को हासिल करना आसान इमरजेंसी और रिटायरमेंट प्लानिंग में मदद निवेश की आदत जल्दी विकसित होती है जोखिम को समझना भी जरूरी विशेषज्ञों का मानना है कि निवेश करते समय जोखिम, समय अवधि और वित्तीय लक्ष्य को समझना बहुत जरूरी होता है। बिना जानकारी के निवेश करने से आर्थिक नुकसान भी हो सकता है। बदलते आर्थिक दौर में जल्दी निवेश शुरू करना भविष्य की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार बन सकता है। सही विकल्प चुनकर और नियमित निवेश करके लंबे समय में बेहतर आर्थिक स्थिति बनाई जा सकती है।  

Unknown जून 7, 2026 0
SIP Investment Strategy
SIP क्या है? जानिए निवेश कैसे करें, फायदे, नुकसान और Compounding Effect

मुंबई, एजेंसियां। आज के समय में SIP (Systematic Investment Plan) निवेश का एक लोकप्रिय जरिया बन चुका है। कम रकम से शुरुआत और लंबे समय में बड़ा फंड बनाने की क्षमता के कारण बड़ी संख्या में लोग आज SIP की ओर अपना रुख कर रहे हैं। SIP है क्या? SIP यानी Systematic Investment Plan, म्यूचुअल फंड में निवेश करने का एक तरीका है, जिसमें निवेशक हर महीने एक तय राशि निवेश करता है। यह तरीका एकमुश्त निवेश की तुलना में काफी आसान माना जाता है और नियमित निवेश की आदत को भी विकसित करता है। SIP में कैसे निवेश करें? किसी म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म, बैंक या निवेश ऐप पर अपना अकाउंट बनाएं KYC प्रक्रिया पूरी करें अपनी जरूरत और जोखिम के अनुसार फंड चुनें मासिक निवेश राशि तय करें Auto Debit सेट करके नियमित निवेश शुरू करें SIP के फायदे कम रकम से निवेश की शुरुआत Compounding Effect का लाभ बाजार के उतार-चढ़ाव का असर औसत हो जाता है निवेश की अनुशासित आदत बनती है लंबे समय में बेहतर रिटर्न की संभावना क्या है Compounding Effect? SIP में सबसे बड़ा फायदा Compounding Effect को माना जाता है। इसका मतलब है कि आपके निवेश पर मिलने वाला ब्याज भी आगे चलकर रिटर्न देने लगता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति हर महीने ₹5,000 निवेश करता है और लंबे समय तक निवेश जारी रखता है, तो समय के साथ सिर्फ मूल राशि ही नहीं, बल्कि उस पर मिला ब्याज भी बढ़ता रहता है। इसी वजह से Compounding को अक्सर “पैसे से पैसा बनाने की प्रक्रिया” कहा जाता है। लंबी अवधि में निवेश करने वाले लोगों को Compounding का सबसे ज्यादा फायदा मिल सकता है। SIP के नुकसान रिटर्न की कोई गारंटी नहीं बाजार जोखिम हमेशा बना रहता है गलत फंड चुनने पर आर्थिक नुकसान संभव कम समय में ज्यादा रिटर्न की उम्मीद पूरी नहीं हो सकती

Unknown जून 7, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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