गढ़वा: भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR-2026) के तहत गढ़वा जिले में प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है. इसके साथ ही जिले में मतदाताओं की सुविधा के लिए 47 नए मतदान केंद्र भी बनाए गए हैं. अब मतदाता 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन या अन्य त्रुटियों को लेकर दावा एवं आपत्ति दर्ज करा सकेंगे. समाहरणालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक एवं प्रेस वार्ता में जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने राजनीतिक दलों और मीडिया प्रतिनिधियों को पूरे पुनरीक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सभी दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. इस पुनरीक्षण की अर्हता तिथि 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है. 47 नए बूथ बनने से बढ़ी मतदान केंद्रों की संख्या जिले में मतदान केंद्रों के युक्तिकरण (रैशनलाइजेशन) का कार्य पूरा कर लिया गया है. पहले गढ़वा विधानसभा क्षेत्र में 455 और भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में 502 मतदान केंद्र थे. अब गढ़वा विधानसभा में 33 नए बूथ जोड़कर उनकी संख्या 488 कर दी गई है, जबकि भवनाथपुर विधानसभा में 14 नए बूथ बढ़ाकर कुल 516 मतदान केंद्र कर दिए गए हैं. इस तरह जिले में कुल 47 नए मतदान केंद्र बनने के बाद अब मतदान केंद्रों की संख्या 1004 हो गई है. प्रशासन का कहना है कि इससे मतदाताओं को मतदान के दौरान अधिक सुविधा मिलेगी और भीड़ भी कम होगी. 17 अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए दोनों विधानसभा क्षेत्रों के लिए 17 अधिकारियों की तैनाती की गई है. इनमें 2 निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO), 6 सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (AERO) और 9 अतिरिक्त सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी शामिल हैं. गढ़वा विधानसभा के 488 बूथों की जिम्मेदारी एसडीओ सह ईआरओ कुमार मयंक भूषण सहित विभिन्न प्रखंडों के बीडीओ और सीओ को सौंपी गई है. वहीं भवनाथपुर विधानसभा के 516 बूथों की जिम्मेदारी एसडीओ श्री बंशीधर नगर प्रभाकर मिर्धा तथा संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारियों को दी गई है. मतदाता सूची में सुधार का मिलेगा अवसर उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं से अपील की है कि वे प्रारूप मतदाता सूची का सावधानीपूर्वक परीक्षण करें. यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल नहीं है, किसी का नाम गलत दर्ज है या किसी प्रकार की त्रुटि है, तो निर्धारित अवधि के भीतर दावा एवं आपत्ति अवश्य दर्ज कराएं. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य शत-प्रतिशत शुद्ध और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके. जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से दावों और आपत्तियों का निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं.
जमशेदपुर: अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, किसी तरह की गलती दर्ज है या परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों पर हैं, तो अब इन्हें ठीक कराने का आसान मौका है. पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR 2026) अभियान के तहत 8 और 9 अगस्त 2026 को जिले के सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे. इन शिविरों में नए मतदाताओं का नाम जोड़ने, मतदाता सूची में सुधार कराने और मतदान केंद्र बदलवाने जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी. निर्वाचन विभाग के अनुसार दोनों दिनों में सभी बूथों पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे. बूथ लेवल अधिकारी (BLO) और संबंधित निर्वाचन कर्मी मौके पर मौजूद रहेंगे, जो नागरिकों के आवेदन स्वीकार करेंगे और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेंगे. नए मतदाताओं के लिए सुनहरा अवसर इस अभियान के तहत ऐसे सभी भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं, जो झारखंड के किसी विधानसभा क्षेत्र के सामान्य निवासी हैं और 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं. इसके अलावा जिन युवाओं की आयु 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष हो जाएगी, वे भी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं. नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 और निर्धारित घोषणा पत्र भरना होगा. आवेदन के साथ आवश्यक पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज जमा करने होंगे. दस्तावेजों के सत्यापन के बाद योग्य आवेदकों का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा. परिवार के सभी सदस्यों का नाम एक ही बूथ पर करा सकते हैं शिफ्ट अगर किसी परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों पर दर्ज हैं या वर्तमान बूथ घर से काफी दूर है, तो अब उन्हें एक ही मतदान केंद्र पर स्थानांतरित कराया जा सकता है. इसके लिए फॉर्म-8 भरकर आवेदन करना होगा. इससे पूरे परिवार को मतदान के दिन अलग-अलग बूथों पर जाने की परेशानी नहीं होगी. वोटर लिस्ट में गलती भी करा सकते हैं ठीक विशेष शिविर के दौरान मतदाता अपने नाम, पता, आयु, फोटो या अन्य विवरण में किसी भी त्रुटि को भी ठीक करा सकते हैं. यदि किसी मतदाता का पता बदल गया है या किसी अन्य जानकारी में संशोधन की आवश्यकता है, तो संबंधित फॉर्म भरकर आवेदन किया जा सकता है. घर बैठे भी कर सकते हैं आवेदन निर्वाचन विभाग ने ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध कराई है. नागरिक अपने मोबाइल पर ECINet App या Voter Helpline App डाउनलोड कर आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा निर्वाचन आयोग के पोर्टल voters.eci.gov.in के माध्यम से भी ऑनलाइन फॉर्म भरा जा सकता है. यदि किसी नागरिक को आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी होती है, तो वह टोल-फ्री नंबर 1800-331-1950 या वोटर हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क कर आवश्यक जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकता है. मतदान सूची को त्रुटिरहित बनाने पर जोर निर्वाचन विभाग का उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और मौजूदा रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों को दूर करना है. प्रशासन ने जिले के सभी पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे 8 और 9 अगस्त को अपने नजदीकी मतदान केंद्र पर पहुंचकर मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण अवश्य जांचें तथा जरूरत होने पर उसी दिन आवेदन कर प्रक्रिया पूरी करें.
रांची: झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के तहत मतदाता सूची के सत्यापन की प्रक्रिया अब और तेज होने जा रही है. ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद चुनाव आयोग ने राज्यभर में 63.24 लाख से अधिक मतदाताओं के रिकॉर्ड की जांच का फैसला लिया है. इन सभी मतदाताओं को निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO) की ओर से नोटिस भेजे जाएंगे और दस्तावेजों की जांच के बाद सुनवाई की जाएगी. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, ड्राफ्ट मतदाता सूची में फिलहाल 2,21,01,249 मतदाताओं के नाम शामिल हैं. अब जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में किसी तरह की विसंगति, डुप्लीकेट प्रविष्टि या अन्य तकनीकी त्रुटि मिली है, उनके सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होगी. आयोग का कहना है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना सुनवाई और आवश्यक दस्तावेजों की जांच के नहीं हटाया जाएगा. किन मतदाताओं को मिलेगा नोटिस? चुनाव आयोग ने तीन प्रमुख श्रेणियों के मतदाताओं की पहचान की है, जिनके रिकॉर्ड की दोबारा जांच होगी. 45,55,227 मतदाता ऐसे हैं जिनके रिकॉर्ड में तार्किक (Logical) विसंगतियां पाई गई हैं. 14,03,205 मतदाता 'नो-मैपिंग' श्रेणी में हैं, जिनके पते या अन्य विवरण का सत्यापन किया जाएगा. 3,65,684 मतदाता जनांकिकीय सम-प्रविष्टि (Demographic Similar Entry-DSE) श्रेणी में हैं, जहां एक जैसे विवरण वाले रिकॉर्ड की जांच होगी. इन सभी मामलों में संबंधित मतदाताओं को नोटिस जारी कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर दिया जाएगा. इसके बाद निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO) स्तर पर सुनवाई होगी और तथ्यों के आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा. आयोग ने क्या कहा? चुनाव आयोग का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची को पूरी तरह सटीक, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाना है. सत्यापन प्रक्रिया के दौरान सभी मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा. दस्तावेजों की जांच और सुनवाई के बाद ही किसी रिकॉर्ड में संशोधन, सुधार या अन्य कार्रवाई की जाएगी. प्रमुख आंकड़े श्रेणी संख्या ड्राफ्ट मतदाता सूची में कुल मतदाता 2,21,01,249 नोटिस पाने वाले मतदाता 63,24,116 नो-मैपिंग वाले मतदाता 14,03,205 जनांकिकीय सम-प्रविष्टि (DSE) वाले मतदाता 3,65,684 तार्किक विसंगति वाले मतदाता 45,55,227 राज्य निर्वाचन विभाग ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि यदि उन्हें नोटिस प्राप्त होता है तो निर्धारित समय पर आवश्यक दस्तावेजों के साथ उपस्थित होकर सत्यापन प्रक्रिया में सहयोग करें, ताकि अंतिम मतदाता सूची अधिक सटीक और पारदर्शी बनाई जा सके।
गिरिडीह। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR-2026) अभियान के तहत मंगलवार को गिरिडीह जिले के सभी मतदान केंद्रों पर बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट-2 (BLA-2) की दूसरी बैठक आयोजित की गई। इसके साथ ही चुनाव पाठशाला के दूसरे चरण का भी सफल आयोजन हुआ। इस अभियान का उद्देश्य आगामी चुनावों से पहले मतदाता सूची को पूरी तरह अद्यतन, त्रुटिरहित और पारदर्शी बनाना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम सूची में शामिल हो और अपात्र नामों को हटाया जा सके। जिला निर्वाचन पदाधिकारी जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त रामनिवास यादव के निर्देश पर जिले के सभी वरीय पदाधिकारियों, निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (ERO) और सहायक निर्वाचक निबंधन पदाधिकारियों (AERO) ने अपने-अपने क्षेत्रों के मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बैठकों की गतिविधियों की समीक्षा करते हुए बीएलओ को गणना प्रपत्रों का शत-प्रतिशत सत्यापन, त्रुटिरहित संधारण और निर्धारित समय-सीमा के भीतर कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक के दौरान बैठक के दौरान अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत एवं डुप्लीकेट (ASDD) श्रेणी के मतदाताओं के सत्यापन पर विशेष जोर दिया गया। साथ ही नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ने, अपात्र मतदाताओं के नाम हटाने और मतदाता सूची में आवश्यक संशोधन से जुड़े विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों ने बीएलओ और बीएलए-2 के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर बल देते हुए कहा कि राजनीतिक दलों के सहयोग से मतदाता सूची को अधिक सटीक और विश्वसनीय बनाया जा सकता है। उपायुक्त रामनिवास यादव ने कहा उपायुक्त रामनिवास यादव ने अधिकारियों को नियमित रूप से मतदान केंद्रों का निरीक्षण करने और पूरे अभियान की सतत मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव के लिए शुद्ध मतदाता सूची सबसे महत्वपूर्ण आधार है। जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया कि SIR-2026 के तहत सभी प्रखंडों में अभियान निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पूरी पारदर्शिता, गुणवत्ता और समयबद्धता के साथ संचालित किया जा रहा है, ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
गढ़वा। मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR)-2026 को निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित तरीके से संपन्न कराने के लिए गढ़वा प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में 80-गढ़वा विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक निबंधन पदाधिकारी सह अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) कुमार मयंक भूषण की अध्यक्षता में अनुमंडल कार्यालय में सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के साथ समन्वय बैठक आयोजित की गई। बैठक में विभिन्न दलों के अध्यक्ष, सचिव और बीएलए-1 (Booth Level Agent) शामिल हुए। मतदाता सूची लोकतंत्र की रीढ़ : एसडीओ बैठक को संबोधित करते हुए एसडीओ कुमार मयंक भूषण ने कहा कि मतदाता सूची किसी भी लोकतांत्रिक चुनाव प्रक्रिया की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में शामिल हो, जबकि मृत, स्थानांतरित या अपात्र व्यक्तियों के नाम नियमानुसार हटाए जाएं। उन्होंने सभी राजनीतिक दलों से विशेष पुनरीक्षण अभियान में सक्रिय सहयोग करने और मतदाताओं को जागरूक करने की अपील की। एसडीओ ने दलों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने बूथों पर नियुक्त बीएलए-2 को बीएलओ के साथ नियमित समन्वय बनाए रखने के लिए प्रेरित करें, ताकि सत्यापन कार्य सुचारु रूप से पूरा हो सके। सभी प्रमुख दलों ने लिया हिस्सा बैठक में आम आदमी पार्टी, भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू), बहुजन समाज पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल सहित विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इसके अलावा कार्यपालक दंडाधिकारी और अनुमंडल कार्यालय के अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी भी उपस्थित रहे। जानिए SIR-2026 का पूरा कार्यक्रम बैठक में निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम की समय-सीमा भी साझा की गई। इसके तहत 30 जून से 29 जुलाई 2026 तक घर-घर जाकर सत्यापन होगा। 29 जुलाई को मतदान केंद्रों का युक्तिकरण किया जाएगा, जबकि 5 अगस्त को मतदाता सूची का प्रारूप प्रकाशित होगा। 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावे और आपत्तियां स्वीकार की जाएंगी तथा 5 अगस्त से 3 अक्टूबर तक उनका निपटारा होगा। सभी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।