रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर लोगों से सिर्फ पौधे लगाने तक सीमित नहीं रहने, बल्कि प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनने की अपील की है. उन्होंने कहा कि केवल पौधारोपण के ठेके देने से पर्यावरण की स्थिति नहीं बदलेगी. इसके लिए हर व्यक्ति को अपनी जिम्मेदारी समझनी होगी. तेजी से बढ़ती आबादी और प्रकृति के साथ लगातार हो रही छेड़छाड़ का असर अब झारखंड में भी दिखाई दे रहा है. मुख्यमंत्री शुक्रवार को खेलगांव परिसर में आयोजित 77वें वन महोत्सव के कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने पौधारोपण कर अभियान की शुरुआत की और वन विभाग के साथ मिलकर पर्यावरण एवं वन संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया. कार्यक्रम में करीब दो हजार लोग मौजूद थे. हर व्यक्ति अपने घर के आसपास लगाए एक पौधा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों से अपने-अपने घर के आसपास कम से कम एक पौधा लगाने का आह्वान किया. उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण किसी एक विभाग या सरकार की जिम्मेदारी नहीं है. जब तक आम लोग इसमें अपनी भागीदारी नहीं निभायेंगे, तब तक बड़े स्तर पर बदलाव संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि पर्यावरण में हो रहा बदलाव केवल झारखंड की समस्या नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की चुनौती बन चुका है. जलवायु और पर्यावरण में बदलाव का असर हर जगह देखने को मिल रहा है. ऐसे में स्थानीय स्तर पर छोटे-छोटे प्रयासों के जरिये प्रकृति को बचाने की दिशा में काम करना जरूरी है. प्रकृति से छेड़छाड़ का असर झारखंड में भी मुख्यमंत्री ने कहा कि इंसानों ने विकास के नाम पर जंगलों और प्राकृतिक क्षेत्रों में लगातार हस्तक्षेप किया है. इसका असर अब मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष के रूप में भी देखने को मिल रहा है. उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि इंसान हाथियों के प्राकृतिक आवास तक पहुंच गया है. जंगल और पेड़ काटकर नये शहर और बस्तियां बसायी जा रही हैं. ऐसे में हाथियों का इंसानी इलाकों में आना और मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं बढ़ना स्वाभाविक है. सीएम ने यह भी कहा कि केवल सुंदर दिखने वाले पौधे लगाना पर्याप्त नहीं है. कुछ ऐसे पौधे भी लगाये जा रहे हैं, जो स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए उपयोगी नहीं हैं. इसलिए झारखंड में अब ऐसे पौधों को प्राथमिकता दी जायेगी, जो स्थानीय पर्यावरण और जैव विविधता के लिए उपयोगी हों. एक पौधा लगाने पर शहरों में मिलेगी पांच यूनिट मुफ्त बिजली मुख्यमंत्री ने बताया कि शहरों में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए पौधारोपण को प्रोत्साहित किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि शहरों में एक पौधा लगाने पर पांच यूनिट बिजली मुफ्त देने की व्यवस्था की जा रही है. इसका उद्देश्य लोगों को पौधारोपण के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में हरियाली बढ़ाना है. उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है. केवल पौधे लगा देने से पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य पूरा नहीं होगा. वन, पर्यावरण और वन्यजीवन जीवन का अभिन्न हिस्सा वन विभाग के सचिव अबु बक्कर सिद्दीख ने कहा कि वन, पर्यावरण और वन्यजीवन मानव जीवन का अभिन्न हिस्सा हैं. इनके बिना स्वस्थ समाज की कल्पना नहीं की जा सकती. उन्होंने कहा कि पर्यावरण और वन्यजीवों का संरक्षण केवल नैतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि संवैधानिक दायित्व भी है. पीसीसीएफ हॉफ संजीव कुमार ने कहा कि पर्यावरण में हो रहे बदलाव से पूरी दुनिया प्रभावित है. अगर इस वैश्विक चुनौती से निपटना है, तो स्थानीय स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठाने होंगे. छोटे स्तर पर किये गये प्रयास ही आगे चलकर बड़े बदलाव का आधार बन सकते हैं. ओपन सफारी को दिखाई हरी झंडी वन महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी सह गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने ओपन सफारी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया. कार्यक्रम में वन विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे. पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने वालों का सम्मान कार्यक्रम के दौरान वन एवं पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को सम्मानित किया गया. सम्मानित होने वालों में पी बर्नादित कुजूर, टिकैत चंद्र प्रधान, बुद्धदेव चालक, पौथी राम हांसदा, रमेश नायक, तारकेश्वर मुंडा, निरोज टेटे, लक्ष्मण मुरमू, कृष्णा सिंह, मिथिलेश कुमार, खुर्शीद आलम, गुड्डल सिंह, मनोज राणा, सुरेंद्र पासवान, सोनी देवी, राजीव रंजन प्रसाद, मुनेश्वर मेहता, मो जुनैल अंसारी, राजू कोरबा और नासिर खान समेत अन्य लोग शामिल रहे. कार्यक्रम में पीसीसीएफ विश्वनाथ साह, एटी मिश्रा, एपीसीसीएफ वेंकटेश्वरलू, डीएफओ श्रीकांत वर्मा समेत वन विभाग के कई अधिकारी उपस्थित थे.
जमशेदपुर: झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शनिवार, 8 अगस्त को जमशेदपुर पहुंचेंगे. अपने करीब डेढ़ घंटे के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री उलियान स्थित शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे. इसके बाद वे आमसभा को भी संबोधित करेंगे. मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर जिला प्रशासन और पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को पूरी तरह चाक-चौबंद कर दिया है. मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर जिला प्रशासन की ओर से सभी तैयारियां पूरी कर ली गयी हैं. डीसी और एसएसपी स्वयं सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं की मॉनिटरिंग कर रहे हैं. सोनारी हवाई अड्डे से लेकर उलियान और फिर परिसदन तक मुख्यमंत्री के कारकेड के पूरे रूट पर पुलिस बल और दंडाधिकारियों की तैनाती की गयी है. प्रमुख चौक-चौराहों के अलावा संवेदनशील स्थानों पर भी अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की गयी है. दोपहर 1 बजे सोनारी एयरपोर्ट पहुंचेंगे सीएम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दोपहर करीब 1 बजे हेलीकॉप्टर से सोनारी हवाई अड्डा पहुंचेंगे. एयरपोर्ट पर आवश्यक औपचारिकताओं के बाद वे सड़क मार्ग से सीधे उलियान के लिए रवाना होंगे. करीब 1:10 बजे मुख्यमंत्री उलियान स्थित शहीद निर्मल महतो के समाधि स्थल पहुंचेंगे. उलियान में मुख्यमंत्री शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण करेंगे और समाधि पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि देंगे. इसके बाद आयोजित आमसभा को संबोधित करेंगे. कार्यक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर भी तैयारियां की गयी हैं. शहीद निर्मल महतो को श्रद्धांजलि देंगे हेमंत सोरेन उलियान स्थित शहीद निर्मल महतो का समाधि स्थल झारखंड की राजनीति और आंदोलन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है. मुख्यमंत्री का यहां पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित करना कार्यक्रम का मुख्य हिस्सा होगा. आमसभा में मुख्यमंत्री के संबोधन पर भी लोगों की नजर रहेगी. मुख्यमंत्री के दौरे को देखते हुए प्रशासन ने कार्यक्रम स्थल के आसपास सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है. पुलिस अधिकारियों को भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और मुख्यमंत्री के सुरक्षित आवागमन को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं. सोनारी से उलियान तक सुरक्षा का विशेष इंतजाम मुख्यमंत्री के कारकेड के रूट पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस पूरी तरह अलर्ट है. सोनारी एयरपोर्ट से उलियान और उलियान से परिसदन तक जगह-जगह पुलिसकर्मियों और दंडाधिकारियों की तैनाती की गयी है. प्रमुख चौक-चौराहों पर अतिरिक्त बल लगाया गया है. अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि मुख्यमंत्री के आवागमन के दौरान यातायात व्यवस्था सुचारु रहे और आम लोगों को भी अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े. कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर वरिष्ठ अधिकारी लगातार नजर रखेंगे. परिसदन में भी रुकेंगे मुख्यमंत्री उलियान में कार्यक्रम समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री दोपहर करीब 2 बजे समाधि स्थल से रवाना होंगे. इसके बाद करीब 2:10 बजे वे जमशेदपुर परिसदन (सर्किट हाउस) पहुंचेंगे. यहां कुछ समय रुकने के बाद दोपहर 2:25 बजे सोनारी एयरपोर्ट के लिए रवाना होंगे. करीब 2:30 बजे मुख्यमंत्री सोनारी हवाई अड्डा पहुंचेंगे और इसके कुछ मिनट बाद यानी 2:35 बजे हेलीकॉप्टर से रांची के लिए रवाना हो जायेंगे. इस तरह मुख्यमंत्री का जमशेदपुर दौरा करीब डेढ़ घंटे का रहेगा. मुख्यमंत्री का मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम दोपहर 1:00 बजे: हेलीकॉप्टर से सोनारी हवाई अड्डा, जमशेदपुर आगमन 1:05 बजे: सोनारी एयरपोर्ट से सड़क मार्ग से उलियान के लिए प्रस्थान 1:10 बजे: उलियान स्थित शहीद निर्मल महतो समाधि स्थल पहुंचेंगे इसके बाद: शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा पर माल्यार्पण और श्रद्धांजलि इसके बाद: आमसभा को संबोधित करेंगे 2:00 बजे: उलियान समाधि स्थल से प्रस्थान 2:10 बजे: परिसदन (सर्किट हाउस) पहुंचेंगे 2:25 बजे: परिसदन से सोनारी एयरपोर्ट के लिए रवाना 2:30 बजे: सोनारी हवाई अड्डा पहुंचेंगे 2:35 बजे: हेलीकॉप्टर से रांची के लिए रवाना मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा से लेकर यातायात तक सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं. प्रशासन का पूरा जोर मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को सुरक्षित और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने पर है.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।