Spirituality

Devotees worship Lord Jagannath at home with lamps, flowers, tulsi leaves, and sacred mantras during Rath Yatra.
Jagannath Ji Ke Mantra: घर पर करें भगवान जगन्नाथ की पूजा, जानें सरल पूजा विधि, गायत्री मंत्र, मूल मंत्र और स्तोत्र

आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि से भगवान जगन्नाथ की विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा का शुभारंभ होता है। इस दौरान भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई भगवान बलभद्र और बहन देवी सुभद्रा के साथ भव्य रथ पर विराजमान होकर श्रीमंदिर से गुंडीचा मंदिर की यात्रा करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि रथ यात्रा में शामिल होकर भगवान के रथ को खींचने से सौ यज्ञों के समान पुण्य फल प्राप्त होता है। यदि आप किसी कारणवश रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पा रहे हैं, तो श्रद्धा और भक्ति के साथ घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा, मंत्र जाप और स्तोत्र का पाठ भी कर सकते हैं। मान्यता है कि सच्चे मन से की गई आराधना भगवान की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बनती है। घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा कैसे करें? घर पर भगवान जगन्नाथ की पूजा करने के लिए इन सरल चरणों का पालन करें— सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें। भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। घी का दीपक और धूप जलाकर पूजा का प्रारंभ करें। भगवान को चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प और तुलसी दल अर्पित करें। इसके बाद भगवान जगन्नाथ के मंत्रों और स्तोत्रों का श्रद्धापूर्वक जाप करें। मालपुआ, मौसमी फल तथा सात्विक (बिना प्याज-लहसुन) भोजन का भोग अर्पित करें। अंत में भगवान जगन्नाथ की आरती करें और परिवार के साथ प्रसाद ग्रहण करें। भगवान जगन्नाथ गायत्री मंत्र ॐ जगन्नाथाय विद्महे। महाबलाय धीमहि। तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्॥ भगवान जगन्नाथ का मूल मंत्र ॐ श्री जगन्नाथाय नमः॥ श्री जगन्नाथ अष्टकम का महत्व धार्मिक मान्यता के अनुसार श्री जगन्नाथ अष्टकम का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से भगवान जगन्नाथ की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह स्तोत्र भगवान के दिव्य स्वरूप, करुणा और भक्तों के प्रति उनके स्नेह का वर्णन करता है। परंपरागत विश्वास है कि नियमित रूप से इसका पाठ करने से मानसिक शांति, आध्यात्मिक उन्नति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होता है। जगन्नाथ स्तोत्र का महत्व जगन्नाथ स्तोत्र में भगवान श्रीकृष्ण के जगन्नाथ स्वरूप की स्तुति की गई है। इसमें भक्त भगवान से जीवन के कष्टों, भय, दुख और बाधाओं को दूर करने की प्रार्थना करता है। धार्मिक परंपरा के अनुसार, श्रद्धा और विश्वास के साथ इसका पाठ करने से मन में भक्ति, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक संतुलन बढ़ता है। रथ यात्रा का धार्मिक महत्व मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के मिलन का प्रतीक है। इस दौरान भगवान स्वयं अपने भक्तों के बीच आते हैं और सभी को अपने दर्शन का अवसर प्रदान करते हैं। जो श्रद्धालु रथ यात्रा में शामिल नहीं हो पाते, वे घर पर भगवान का स्मरण, मंत्र जाप, स्तोत्र पाठ और आरती करके भी अपनी भक्ति व्यक्त कर सकते हैं।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
Oil lamp flame during Hindu worship showing symbolic shapes believed to represent traditional spiritual signs and religious meanings.
Deepak Ki Lau Ke Sanket: पूजा के दीपक की लौ में बनने वाली आकृतियां क्या बताती हैं? जानें शुभ और अशुभ संकेतों का धार्मिक महत्व

हिंदू धर्म में पूजा के दौरान दीपक जलाना शुभ और मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि दीपक की लौ केवल प्रकाश ही नहीं देती, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक होती है। कई धार्मिक मान्यताओं और लोकविश्वासों के अनुसार, पूजा के समय दीपक की लौ में बनने वाली कुछ आकृतियां जीवन से जुड़े शुभ-अशुभ संकेत भी दे सकती हैं। ज्योतिष एवं वास्तु से जुड़े पारंपरिक मतों के अनुसार, दीपक की लौ में बनने वाली आकृतियों को दैवीय संकेत माना जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें धार्मिक आस्था एवं परंपरागत विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आइए जानते हैं कि दीपक की लौ में दिखाई देने वाली अलग-अलग आकृतियों का पारंपरिक अर्थ क्या माना जाता है। दीपक की लौ में दिखने वाले शुभ संकेत त्रिशूल, ॐ या स्वास्तिक जैसी आकृति धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि दीपक की लौ में त्रिशूल, ॐ या स्वास्तिक जैसी आकृति दिखाई दे, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह ईश्वर की विशेष कृपा और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत हो सकता है। साथ ही जीवन में चल रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने की संभावना मानी जाती है। फूल जैसी आकृति यदि लौ में कमल या गुलाब जैसे फूल की आकृति प्रतीत हो, तो पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह इस बात का संकेत माना जाता है कि आपकी पूजा-आराधना स्वीकार हो रही है। इसे आने वाले शुभ समाचार और मनोकामनाओं की पूर्ति से भी जोड़ा जाता है। हंस या मोर की आकृति हंस और मोर दोनों को भारतीय संस्कृति में शुभता, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यदि दीपक की लौ में ऐसी आकृति दिखाई दे, तो इसे परिवार में सुख-शांति, प्रेम और मानसिक संतुलन का संकेत माना जाता है। भगवान गणेश जैसी आकृति यदि लौ में भगवान गणेश का स्वरूप प्रतीत हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कार्यों में आ रही बाधाओं के दूर होने और नए शुभ कार्यों के सफल होने का संकेत माना जाता है। दीपक की लौ में दिखाई देने वाले सतर्क करने वाले संकेत दो भागों में बंटी हुई लौ यदि दीपक की लौ बीच से दो हिस्सों में विभाजित दिखाई दे, तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इसे शुभ नहीं माना जाता। इसे परिवार में मतभेद, आर्थिक चुनौतियों या किसी प्रकार की अस्थिरता का संकेत माना जाता है। बिना हवा के काला धुआं निकलना यदि वातावरण शांत होने के बावजूद दीपक से लगातार काला धुआं निकल रहा हो, तो लोकमान्यताओं के अनुसार इसे नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में घर की साफ-सफाई, सकारात्मक वातावरण और पूजा-पाठ पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। लगातार फड़फड़ाती हुई लौ यदि दीपक की लौ बिना स्पष्ट कारण के लगातार तेज़ी से कांपती या फड़फड़ाती रहे, तो इसे आने वाली चुनौतियों, अनावश्यक खर्चों या स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतने का संकेत माना जाता है। ध्यान रखने योग्य बात धार्मिक मान्यताएं व्यक्ति की आस्था और परंपराओं पर आधारित होती हैं। दीपक की लौ में दिखाई देने वाली आकृतियों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हें भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। सकारात्मक सोच, सत्कर्म और नियमित पूजा ही जीवन में मानसिक शांति और आत्मविश्वास का आधार बनते हैं।  

surbhi जुलाई 16, 2026 0
ICC T20 World Cup 2028
ICC ने T20 वर्ल्ड कप के फॉर्मेट में किया बड़ा बदलाव, 'सुपर 10' और एलिमिनेटर राउंड की होगी एंट्री

दुबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 2028 पुरुष T20 वर्ल्ड कप के फॉर्मेट में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। नए प्रारूप के तहत टूर्नामेंट में 20 टीमें हिस्सा लेंगी, लेकिन अब प्रतियोगिता ग्रुप स्टेज, एलिमिनेटर, सुपर 10 और नॉकआउट चरणों में खेली जाएगी। ICC का कहना है कि नए फॉर्मेट का उद्देश्य अधिक प्रतिस्पर्धी मुकाबले और उभरती टीमों को बेहतर अवसर देना है।   एलिमिनेटर राउंड से बढ़ेगा रोमांच   नए फॉर्मेट में ग्रुप चरण के बाद कुछ टीमें सीधे अगले दौर में पहुंचेंगी, जबकि अन्य क्वालीफाई करने वाली टीमें एलिमिनेटर मुकाबले खेलेंगी। इन मुकाबलों के विजेता आगे बढ़ेंगे, जबकि हारने वाली टीमों का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा।   'सुपर 10' में होगा खिताब का असली मुकाबला   एलिमिनेटर के बाद 10 टीमें 'सुपर 10' चरण में पहुंचेंगी। यहां सभी टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा और प्रत्येक टीम अपने समूह की अन्य टीमों से मुकाबला करेगी। इसके बाद शीर्ष टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी।   उभरती टीमों को मिलेगा बड़ा मौका   ICC के अनुसार, नए फॉर्मेट से एसोसिएट और उभरती क्रिकेट टीमों को अधिक प्रतिस्पर्धी मैच खेलने का अवसर मिलेगा। साथ ही बड़े देशों के बीच अधिक हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिल सकते हैं।   2028 से लागू होगा नया प्रारूप   ICC ने स्पष्ट किया है कि नया फॉर्मेट 2028 पुरुष T20 वर्ल्ड कप से लागू होगा। इस टूर्नामेंट की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड संयुक्त रूप से करेंगे। नए प्रारूप को लेकर क्रिकेट जगत में उत्सुकता बढ़ गई है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Numerology chart with numbers 1 to 9 representing daily predictions for July 15, 2026 and lucky colors.
आज का अंक ज्योतिष 15 जुलाई 2026: मूलांक 5 आर्थिक मामलों में रहें सतर्क, मूलांक 6 के जीवन में आएंगी खुशियां, जानें 1 से 9 तक का भविष्यफल

Numerology Prediction 15 July 2026: 15 जुलाई 2026 का दिन अंक ज्योतिष के अनुसार प्रेम, संतुलन और नई संभावनाओं का संदेश लेकर आया है। आज की तिथि का मूल अंक 6 है, जबकि वर्ष 2026 की यूनिवर्सल एनर्जी 5 मानी जाती है। अंक 6 रिश्तों, प्रेम और जिम्मेदारियों का प्रतीक है, वहीं अंक 5 बदलाव, नए अवसर और स्वतंत्र सोच का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में आज का दिन रिश्तों को मजबूत बनाने, जिम्मेदारियों को निभाने और नए अवसरों को अपनाने के लिए अनुकूल माना जा रहा है। यदि आप काम और निजी जीवन के बीच संतुलन बनाकर आगे बढ़ते हैं, तो आने वाले समय में इसके सकारात्मक परिणाम देखने को मिल सकते हैं। आइए जानते हैं जन्मतिथि के आधार पर सभी मूलांकों का आज का भविष्यफल। मूलांक 1: आत्मविश्वास बनाए रखें आज टीमवर्क से आपको अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। नए अवसर मिलने के संकेत हैं, इसलिए आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें। किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें। कार्य के बीच पर्याप्त आराम करें और परिवार के साथ अपने विचार साझा करें। लकी नंबर: 1, 6 लकी रंग: गोल्ड, ऑरेंज मूलांक 2: सूझबूझ से मिलेगा लाभ आज सहयोग और संवाद आपकी सबसे बड़ी ताकत साबित होंगे। रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना है। शांत मन से लिए गए फैसले आपको सफलता दिलाएंगे। परिवार के साथ खुलकर बातचीत करें और दूसरों की बातों को ध्यान से सुनें। लकी नंबर: 2, 5 लकी रंग: व्हाइट, लाइट ब्लू मूलांक 3: रचनात्मकता दिलाएगी सफलता नई योजनाओं और रचनात्मक कार्यों के लिए दिन अनुकूल है। पढ़ाई, लेखन और नए प्रोजेक्ट में सफलता मिल सकती है। परिवार और मित्रों का पूरा सहयोग मिलेगा। अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर हाथ से न जाने दें। लकी नंबर: 3, 6 लकी रंग: येलो, ग्रीन मूलांक 4: योजना बनाकर करें काम आज लंबी अवधि की योजनाओं पर ध्यान देना लाभदायक रहेगा। जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचें। नियमित दिनचर्या बनाए रखें और काम के साथ आराम को भी महत्व दें। आपकी मेहनत का सकारात्मक परिणाम मिलेगा। लकी नंबर: 4, 5 लकी रंग: ब्राउन, ग्रे मूलांक 5: आर्थिक फैसलों में बरतें सावधानी आज नए लोगों से मुलाकात और व्यावसायिक चर्चाओं के लिए दिन अच्छा है। हालांकि निवेश या बड़े आर्थिक फैसले सोच-समझकर लें। एक समय में एक ही काम पर ध्यान केंद्रित करें। नए संपर्क भविष्य में लाभदायक साबित हो सकते हैं। लकी नंबर: 5, 6 लकी रंग: ग्रीन, एक्वा मूलांक 6: प्रेम और खुशियों से भरा रहेगा दिन आज परिवार और रिश्तों से आपको सबसे अधिक खुशी मिलेगी। कार्यक्षेत्र में भी मेहनत का अच्छा परिणाम मिलेगा। निजी और पेशेवर जीवन में संतुलन बनाए रखें तथा अपनी सेहत का भी ध्यान रखें। लकी नंबर: 6, 3 लकी रंग: पिंक, क्रीम मूलांक 7: आत्मचिंतन से मिलेगी स्पष्टता शोध, अध्ययन और योजना बनाने के लिए दिन अनुकूल है। किसी भी बड़े फैसले से पहले अपने मन की आवाज सुनें। कुछ समय अकेले बिताने से मानसिक शांति मिलेगी और निर्णय लेने में आसानी होगी। लकी नंबर: 7, 5 लकी रंग: इंडिगो, वायलेट मूलांक 8: धैर्य से मिलेगी सफलता आज मेहनत और अनुशासन आपको सफलता की ओर ले जाएंगे। आर्थिक मामलों में सतर्क रहें और जल्दबाजी से बचें। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक तनाव कम होगा। भविष्य की योजनाओं पर गंभीरता से काम करें। लकी नंबर: 8, 6 लकी रंग: नेवी ब्लू, चारकोल मूलांक 9: पुरानी बातों को भूलकर बढ़ें आगे आज आपका सकारात्मक दृष्टिकोण लोगों को प्रेरित करेगा। पुराने विवाद खत्म करने और रिश्तों में नई शुरुआत करने का समय है। अपनी ऊर्जा का सही दिशा में उपयोग करें और गुस्से से बचें। क्षमा और सहयोग की भावना आपको सफलता दिलाएगी। लकी नंबर: 9 लकी रंग: रेड, मैरून आज का शुभ संदेश 15 जुलाई 2026 का दिन यह संदेश देता है कि जीवन में सफलता केवल मेहनत से नहीं, बल्कि रिश्तों, संतुलन और सकारात्मक सोच से भी मिलती है। जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करें, नए अवसरों का स्वागत करें और अपनों के साथ समय बिताना न भूलें।  

surbhi जुलाई 15, 2026 0
Devotee performing Pitru Tarpan ritual on Ashadh Amavasya
आषाढ़ अमावस्या 2026: सपने में दिखें पितर तो क्या करें? जानिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शुभ संकेत और उपाय

आषाढ़ अमावस्या को सनातन धर्म में पितरों के स्मरण, तर्पण और श्राद्ध कर्म के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से किए गए कर्म पूर्वजों की आत्मा की शांति और उनके आशीर्वाद की प्राप्ति में सहायक होते हैं। वहीं, स्वप्न शास्त्र में भी अमावस्या के दिन सपने में पितरों के दर्शन को विशेष संकेत माना गया है। यदि इस दिन आपको सपने में अपने पूर्वज दिखाई दें, तो कुछ धार्मिक उपाय करने की परंपरा बताई गई है। आइए जानते हैं इन मान्यताओं के बारे में। आषाढ़ अमावस्या पर सपने में पितर दिखने का क्या माना जाता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन सपने में पूर्वजों का दिखाई देना उनके आशीर्वाद, स्मरण या किसी संदेश का संकेत माना जाता है। स्वप्न शास्त्र में कहा गया है कि ऐसे सपनों के बाद श्रद्धापूर्वक पितरों का तर्पण और दान-पुण्य करना शुभ माना जाता है। सपने में पितरों के दर्शन हों तो करें ये उपाय धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि अमावस्या के दिन सपने में पूर्वज दिखाई दें तो ये कार्य किए जा सकते हैं- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। भगवान सूर्य को जल अर्पित करें। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल और कुश मिलाकर पितरों का तर्पण करें। जरूरतमंदों या ब्राह्मण को भोजन कराएं। अपनी श्रद्धा अनुसार अन्न, वस्त्र या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें। शाम के समय दक्षिण दिशा में या पीपल के वृक्ष के समीप सरसों के तेल का दीपक जलाएं और श्रद्धापूर्वक प्रार्थना करें। सपने में मुस्कुराते हुए पितर दिखें तो क्या संकेत मिलता है? स्वप्न शास्त्र में माना गया है कि यदि सपने में पूर्वज प्रसन्न या मुस्कुराते हुए दिखाई दें, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यह उनके संतोष और आशीर्वाद का प्रतीक हो सकता है तथा परिवार में सुख-समृद्धि का संकेत देता है। अगर सपने में पितर भोजन मांगें तो क्या करें? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि सपने में पूर्वज भोजन मांगते हुए दिखाई दें, तो तर्पण, पिंडदान या ब्राह्मण भोजन कराने जैसी धार्मिक परंपराओं का पालन करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और परिवार पर उनका आशीर्वाद बना रहता है। आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व आषाढ़ अमावस्या को पितरों के निमित्त किए जाने वाले तर्पण, दान और पूजा-पाठ का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए धार्मिक कार्यों को पुण्यदायी माना जाता है। साथ ही, जरूरतमंदों की सहायता और दान-पुण्य को भी इस दिन विशेष फलदायी माना जाता है। अस्वीकरण: यह लेख धार्मिक मान्यताओं, स्वप्न शास्त्र और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित है। IDTV Indradhanush इन मान्यताओं की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं करता। किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या उपाय को अपनाने से पहले अपने विवेक का उपयोग करें।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Ranchi Sadar Hospital
10 करोड़ पहुंची लागत, फिर भी शुरू नहीं हो सका सदर अस्पताल में बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट

रांची। रांची के सदर अस्पताल में बनने वाली झारखंड की पहली सरकारी बोन मैरो ट्रांसप्लांट (बीएमटी) यूनिट का निर्माण फिलहाल अंतिम प्रशासनिक मंजूरी का इंतजार कर रहा है। परियोजना की लागत 6.45 करोड़ रुपये से बढ़कर करीब 10 करोड़ रुपये हो गई है। एल-1 कंपनी ने संशोधित डिजाइन और नई लागत के आधार पर सबसे कम बोली लगाई है। लागत बढ़ने के साथ यूनिट के प्लान और डिजाइन में भी कई तकनीकी बदलाव किए गए हैं, जिसके कारण निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है।   स्वास्थ्य विभाग की मंजूरी के बाद तीन माह में होगा निर्माण सिविल सर्जन डॉ. प्रभात कुमार ने बताया कि यूनिट का संशोधित डिजाइन पूरी तरह तैयार कर लिया गया है और इसे स्वास्थ्य विभाग को भेजा जा रहा है। विभाग से संशोधित डीपीआर और बढ़ी हुई लागत को मंजूरी मिलते ही चयनित एजेंसी को कार्यादेश जारी कर दिया जाएगा। निर्माण शुरू होने के बाद एजेंसी को तीन महीने के भीतर यूनिट तैयार कर पूरी तरह संचालन योग्य बनाना होगा।   सातवीं मंजिल पर बनेगी अत्याधुनिक यूनिट संक्रमण के खतरे को देखते हुए बोन मैरो ट्रांसप्लांट यूनिट सदर अस्पताल की सातवीं मंजिल पर विकसित की जाएगी। यहां नियंत्रित वातावरण, क्लीन रूम, आइसोलेशन जोन, सीमित प्रवेश व्यवस्था, आईसीयू स्तर की सुविधाएं और हाई-एफिशिएंसी एयर फिल्ट्रेशन सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। साथ ही सेंसर आधारित हैंड-फ्री स्टेशन जैसी आधुनिक संक्रमण नियंत्रण व्यवस्थाएं भी उपलब्ध होंगी।   झारखंड के मरीजों को मिलेगा बड़ा लाभ यूनिट शुरू होने के बाद राज्य के हजारों मरीजों को बोन मैरो ट्रांसप्लांट के लिए दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई जैसे महानगरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। सदर अस्पताल के हेमेटोलॉजिस्ट डॉ. अभिषेक रंजन और विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम रांची में ही यह जटिल उपचार उपलब्ध कराएगी। वर्तमान में निजी अस्पतालों में इस उपचार पर 15 से 30 लाख रुपये या उससे अधिक खर्च आता है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा शुरू होने से मरीजों को कम लागत में इलाज मिलेगा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी।

abhishek singh जुलाई 14, 2026 0
Devotee offering fresh fruits as bhog during Hindu worship with traditional Pooja items and flowers.
भोग में बीज वाले फल चढ़ाना सही या गलत? जानिए क्या कहते हैं धार्मिक नियम और किन बातों का रखें विशेष ध्यान

पूजा-पाठ में भगवान को फल अर्पित करना सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि, कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या बीज वाले फल भगवान को चढ़ाए जा सकते हैं या नहीं। खासकर आम, तरबूज, लीची या अन्य बड़े बीज वाले फलों को लेकर लोगों में अलग-अलग धारणाएं देखने को मिलती हैं। आइए जानते हैं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विषय में क्या माना जाता है और भोग लगाते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए। क्या भगवान को बीज वाले फल चढ़ा सकते हैं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान को बीज वाले फल अर्पित करना पूरी तरह स्वीकार्य माना जाता है। फल को सात्विक और पवित्र भोग माना गया है तथा मौसमी फलों का भोग विशेष शुभ माना जाता है। हालांकि, यदि फल में बड़ा बीज हो, जैसे आम, तरबूज या अन्य ऐसे फल, तो भोग लगाने से पहले उसका बीज निकाल देना उचित माना जाता है। मान्यता है कि भगवान को वही स्वरूप में भोग अर्पित करना चाहिए, जैसा भोजन सामान्य रूप से ग्रहण किया जाता है। भोग लगाने से पहले इन नियमों का रखें ध्यान भगवान को फल अर्पित करते समय केवल फल का चयन ही नहीं, बल्कि उसकी शुद्धता और प्रस्तुत करने का तरीका भी महत्वपूर्ण माना गया है। भोग में शामिल किए जाने वाले फलों को पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। पूजा से काफी पहले फल काटकर न रखें। भोग से ठीक पहले ही फल धोकर या काटकर अर्पित करें। यदि फल बड़ा है तो उसे स्वच्छ चाकू से काटकर भगवान के सामने रखें। भोग में संभव हो तो तुलसी दल भी शामिल करें, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। भोग लगाते समय मन शांत रखें और पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान का स्मरण करें। श्रद्धा को सबसे अधिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान के लिए सबसे महत्वपूर्ण भक्त की सच्ची भावना और श्रद्धा होती है। भोग कितना बड़ा या महंगा है, इससे अधिक महत्व उसे अर्पित करने के भाव का माना गया है। इसलिए पूजा के दौरान अहंकार छोड़कर पूर्ण विश्वास और भक्ति के साथ भगवान को भोग अर्पित करना चाहिए। बड़े बीज वाले फलों के लिए क्या करें? यदि किसी फल में बड़ा और कठोर बीज हो, तो उसे निकालकर फल भगवान को अर्पित करना बेहतर माना जाता है। वहीं छोटे बीज वाले फलों को सामान्य रूप से भी चढ़ाया जा सकता है। उद्देश्य यह माना जाता है कि भगवान को वही भोजन प्रेमपूर्वक अर्पित किया जाए, जिसे आसानी से ग्रहण किया जा सके। ध्यान रखें धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं में विभिन्न क्षेत्रों और संप्रदायों के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। ऐसे में यदि आपके परिवार या गुरु द्वारा बताए गए विशेष पूजा-विधान हैं, तो उनका पालन करना अधिक उचित माना जाता है। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण तत्व श्रद्धा, पवित्रता और सच्ची आस्था ही मानी जाती है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Indian and Polish officials during a bilateral meeting in New Delhi, discussing stronger cooperation in defence, trade, technology and strategic partnership.
पोलैंड ने भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने का किया ऐलान, रक्षा और व्यापार में बढ़ेगा सहयोग

नई दिल्ली: भारत और पोलैंड के रिश्ते नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। भारत दौरे पर आए पोलैंड के विदेश मंत्रालय के सचिव व्लादिस्लाव तेओफिल बार्तोशेव्स्की ने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक प्रगति की भी सराहना की और कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर लगातार मजबूत भूमिका निभा रहा है। अक्टूबर में भारत आएंगे पोलैंड के प्रधानमंत्री पोलैंड के विदेश मंत्रालय के सचिव ने बताया कि पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क अक्टूबर में भारत की यात्रा करेंगे। इस दौरे की तैयारियों को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच लगातार बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग बार्तोशेव्स्की ने कहा कि भारत और पोलैंड रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पोलैंड पहले ही भारत में ड्रोन निर्माण शुरू कर चुका है। अब दोनों देश संयुक्त रक्षा उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पोलैंड भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल का समर्थन करता है और भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए तैयार है। भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते से बढ़ेगा कारोबार पोलैंड के अधिकारी ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत और पोलैंड के बीच करीब 6 अरब यूरो का द्विपक्षीय व्यापार होता है, जिसे आने वाले वर्षों में और बढ़ाने की बड़ी संभावना है। भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना बार्तोशेव्स्की ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने उल्लेखनीय आर्थिक और तकनीकी प्रगति की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का भारत का लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन देश उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत की खाद्यान्न उत्पादन क्षमता, तकनीकी विकास और आर्थिक सुधारों की भी प्रशंसा की। वैश्विक मुद्दों पर भारत के रुख का समर्थन पोलैंड के अधिकारी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम का विरोध किया और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर भारत के संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण की सराहना की। रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का समर्थन करते हुए कहा कि पोलैंड की भी आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है। इन क्षेत्रों में भी बढ़ेगा सहयोग पोलैंड ने भारत के साथ निम्न क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है- रक्षा और संयुक्त सैन्य उत्पादन ऊर्जा और हरित ऊर्जा स्वच्छ जल प्रबंधन अंतरिक्ष और सैटेलाइट तकनीक ड्रोन निर्माण तकनीकी नवाचार व्यापार और निवेश दोनों देशों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में और अधिक मजबूत होगी।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Numerology chart highlighting Life Path Number 1 compatibility with numbers 2, 3, and 9 for relationships.
Numerology: क्या आपका मूलांक 1 है? जानिए किन मूलांकों के साथ बनती है सबसे अच्छी जोड़ी

अगर आपका जन्म किसी भी महीने की 1, 10, 19 या 28 तारीख को हुआ है, तो अंक ज्योतिष के अनुसार आपका मूलांक 1 माना जाता है। इस मूलांक का स्वामी सूर्य है, जिसे नेतृत्व, आत्मविश्वास, सफलता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 1 के लोग महत्वाकांक्षी, स्वतंत्र विचारों वाले और नेतृत्व क्षमता से भरपूर होते हैं। हालांकि रिश्तों और वैवाहिक जीवन में इनका तालमेल कुछ विशेष मूलांकों के साथ अधिक अच्छा माना जाता है। ध्यान दें: अंक ज्योतिष पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसके दावों का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। मूलांक 2 के साथ अच्छा तालमेल यदि किसी व्यक्ति का जन्म 2, 11, 20 या 29 तारीख को हुआ है, तो उसका मूलांक 2 होता है। अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 2 का स्वामी चंद्रमा है, जो शांति, संवेदनशीलता और भावनात्मक संतुलन का प्रतीक माना जाता है। क्यों मानी जाती है अच्छी जोड़ी? मूलांक 1 का आत्मविश्वासी स्वभाव मूलांक 2 की शांत प्रकृति से संतुलित होता है। दोनों एक-दूसरे की कमियों को पूरा करने की क्षमता रखते हैं। रिश्तों में सहयोग और समझ बेहतर रहने की मान्यता है। मूलांक 3 के साथ बनती है मजबूत साझेदारी 3, 12, 21 या 30 तारीख को जन्म लेने वालों का मूलांक 3 होता है, जिसका स्वामी बृहस्पति (गुरु) माना जाता है। अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 3 के लोग बुद्धिमान और सकारात्मक सोच वाले माने जाते हैं। वे मूलांक 1 की नेतृत्व क्षमता को सही दिशा देने में मदद कर सकते हैं। विवाह के साथ-साथ बिजनेस पार्टनरशिप में भी यह संयोजन शुभ माना जाता है। मूलांक 9 के साथ दमदार रिश्ता यदि जन्म तिथि 9, 18 या 27 है, तो मूलांक 9 होता है। इसका स्वामी मंगल माना जाता है। क्या कहते हैं अंक ज्योतिष के जानकार? मूलांक 1 और 9 दोनों ऊर्जा, साहस और नेतृत्व के प्रतीक माने जाते हैं। इनके बीच आकर्षण और उत्साह अधिक हो सकता है। दोनों का स्वभाव मजबूत होने के कारण कभी-कभी मतभेद हो सकते हैं, लेकिन इन्हें जल्द सुलझाने की क्षमता भी मानी जाती है। मूलांक 1 के लोगों की प्रमुख विशेषताएं अंक ज्योतिष के अनुसार मूलांक 1 वाले लोगों में आमतौर पर ये गुण देखे जाते हैं: नेतृत्व क्षमता आत्मविश्वास स्वतंत्र सोच महत्वाकांक्षा सम्मान पाने की इच्छा नए कार्यों की पहल करने का स्वभाव हालांकि किसी भी रिश्ते की सफलता केवल अंक ज्योतिष पर निर्भर नहीं करती। आपसी विश्वास, संवाद, सम्मान और समझदारी किसी भी संबंध को मजबूत बनाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Close-up of a palm showing the Money Triangle formation explained in palmistry and financial success beliefs.
Palmistry: हथेली में बनता है 'मनी ट्रायंगल' तो क्या सचमुच मिलती है आर्थिक सफलता? जानें क्या कहता है हस्तरेखा शास्त्र

हस्तरेखा शास्त्र में हथेली पर मौजूद रेखाओं और चिन्हों को व्यक्ति के स्वभाव, करियर और आर्थिक स्थिति से जोड़कर देखा जाता है। इन्हीं में एक प्रमुख निशान 'मनी ट्रायंगल' (धन त्रिकोण) भी माना जाता है। मान्यता है कि जिन लोगों की हथेली में यह त्रिकोण स्पष्ट रूप से बनता है, उन्हें जीवन में आर्थिक स्थिरता, धन संचय और वित्तीय प्रबंधन में सफलता मिल सकती है। हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि हस्तरेखा शास्त्र धार्मिक और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। इसके दावों की वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हुई है। क्या होता है मनी ट्रायंगल? हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार मनी ट्रायंगल हथेली के मध्य भाग में बनता है। यह आकृति तब बनती है जब मस्तिष्क रेखा (Head Line), बुध रेखा (Mercury Line) और भाग्य रेखा (Fate Line) एक विशेष स्थिति में मिलकर त्रिकोण का आकार बनाती हैं। यदि यह त्रिकोण स्पष्ट, गहरा और पूरी तरह बंद हो, तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। क्या माना जाता है इसका महत्व? मान्यताओं के अनुसार जिन लोगों की हथेली में मनी ट्रायंगल होता है, उनमें: धन कमाने की अच्छी क्षमता होती है। बचत और निवेश की समझ बेहतर मानी जाती है। आर्थिक फैसले सोच-समझकर लेने की प्रवृत्ति होती है। करियर और व्यवसाय में अच्छे अवसर मिलने की संभावना मानी जाती है। कठिन समय में भी वित्तीय संतुलन बनाए रखने की क्षमता देखी जाती है। अधूरा या टूटा हुआ त्रिकोण क्या दर्शाता है? हस्तरेखा शास्त्र में यह भी कहा गया है कि यदि मनी ट्रायंगल: टूटा हुआ हो, धुंधला दिखाई दे, या पूरी तरह बंद न हो, तो व्यक्ति को धन संचय में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसी मान्यता है कि ऐसे लोगों के पास धन तो आता है, लेकिन उसे लंबे समय तक बचाकर रखना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। केवल रेखाओं से तय नहीं होती सफलता हस्तरेखा विशेषज्ञ भी मानते हैं कि हथेली की रेखाएं केवल संभावनाओं या पारंपरिक संकेतों का प्रतिनिधित्व करती हैं। किसी व्यक्ति की वास्तविक आर्थिक सफलता उसकी मेहनत, सही निर्णय, वित्तीय अनुशासन, निवेश की समझ और निरंतर प्रयास पर अधिक निर्भर करती है। इसलिए यदि आपकी हथेली में मनी ट्रायंगल दिखाई देता है, तो इसे एक सकारात्मक मान्यता के रूप में देखा जा सकता है, लेकिन इसे सफलता की गारंटी नहीं माना जाना चाहिए।  

surbhi जुलाई 13, 2026 0
Lord Krishna with Radha, Sudama, Arjuna, and Govardhan, symbolizing love, friendship, duty, and righteousness.
भगवान श्रीकृष्ण: हर रिश्ते को प्रेम, कर्तव्य और सम्मान से निभाने वाले आदर्श पुरुष

भगवान श्रीकृष्ण को सनातन धर्म में केवल विष्णु के अवतार के रूप में ही नहीं, बल्कि ऐसे आदर्श व्यक्तित्व के रूप में भी देखा जाता है जिन्होंने जीवन के हर रिश्ते को प्रेम, समर्पण और जिम्मेदारी के साथ निभाया। मित्रता, परिवार, प्रेम, गुरु-भक्ति और धर्म पालन—हर क्षेत्र में उनका जीवन आज भी करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। सच्ची मित्रता का सबसे बड़ा उदाहरण भगवान श्रीकृष्ण की मित्रता का सबसे प्रसिद्ध उदाहरण उनके बाल सखा सुदामा हैं। आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद श्रीकृष्ण ने सुदामा का हमेशा सम्मान किया और बिना किसी अपेक्षा के उनकी सहायता की। वहीं अर्जुन के साथ उनका रिश्ता केवल मित्रता तक सीमित नहीं था, बल्कि उन्होंने जीवन के कठिन समय में उनके मार्गदर्शक और सारथी बनकर धर्म का मार्ग दिखाया। श्रीदामा और बड़े भाई बलराम के साथ भी श्रीकृष्ण का संबंध प्रेम, विश्वास और सहयोग का प्रतीक माना जाता है। राधा-कृष्ण का प्रेम भक्ति का प्रतीक श्रीकृष्ण और राधा का संबंध भारतीय संस्कृति में आध्यात्मिक प्रेम और पूर्ण समर्पण का प्रतीक माना जाता है। यह प्रेम सांसारिक इच्छाओं से ऊपर उठकर आत्मा और परमात्मा के मिलन का संदेश देता है। वृंदावन की गोपियों के साथ उनकी रासलीला भी ईश्वर के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण की भावना को दर्शाती है। परिवार के प्रति निभाई हर जिम्मेदारी धार्मिक ग्रंथों के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख रानियां थीं—रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिति, भद्रा और लक्ष्मणा। उन्होंने अपने परिवार की जिम्मेदारियों का सदैव संतुलित ढंग से निर्वहन किया और सभी के प्रति समान सम्मान का भाव रखा। माता-पिता और भाई के प्रति अटूट सम्मान श्रीकृष्ण का जन्म देवकी और वसुदेव के घर हुआ, लेकिन उनका पालन-पोषण नंद बाबा और यशोदा माता ने किया। उन्होंने दोनों परिवारों के प्रति समान प्रेम, सम्मान और कृतज्ञता दिखाई। बड़े भाई बलराम के साथ उनका रिश्ता भी आदर्श भाईचारे का उदाहरण माना जाता है, जिसमें सहयोग, विश्वास और सम्मान की भावना स्पष्ट दिखाई देती है। हर रिश्ते में निभाया कर्तव्य श्रीकृष्ण ने अपने जीवन में बुआ कुंती, बहन सुभद्रा, भांजे अभिमन्यु और पांडवों के साथ हर संबंध को पूरी जिम्मेदारी से निभाया। महाभारत के कठिन समय में उन्होंने अपने प्रियजनों को सही मार्ग दिखाया और धर्म की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। धर्म की रक्षा के लिए अधर्म का किया अंत जहां श्रीकृष्ण ने प्रेम और करुणा का संदेश दिया, वहीं अधर्म और अन्याय के विरुद्ध कठोर रुख भी अपनाया। उन्होंने कंस, शिशुपाल, नरकासुर और कालिय नाग जैसे अत्याचारियों का अंत कर समाज में धर्म और न्याय की स्थापना की। आदर्श शिष्य और जनरक्षक भगवान श्रीकृष्ण ने गुरु सांदीपनि से शिक्षा ग्रहण कर आदर्श शिष्य होने का उदाहरण प्रस्तुत किया। गुरु-दक्षिणा के रूप में उन्होंने उनके पुत्र को वापस लाकर अपनी गुरु भक्ति का परिचय दिया। वहीं, गोवर्धन पर्वत उठाकर उन्होंने वृंदावनवासियों की रक्षा की और यह संदेश दिया कि सच्चा नेतृत्व हमेशा अपने लोगों की सुरक्षा और कल्याण के लिए समर्पित होता है। श्रीकृष्ण का जीवन देता है यह संदेश भगवान श्रीकृष्ण का संपूर्ण जीवन सिखाता है कि किसी भी रिश्ते की नींव प्रेम, विश्वास, सम्मान और कर्तव्य पर टिकी होती है। मित्रता हो, परिवार हो, गुरु का सम्मान हो या समाज के प्रति जिम्मेदारी—हर संबंध को ईमानदारी और निष्ठा से निभाना ही जीवन की सबसे बड़ी सफलता है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Doctors at Indraprastha Apollo Hospital in New Delhi perform a successful liver transplant on twin brothers from the Philippines with liver donations from their mother and uncle.
फिलीपींस के जुड़वां भाइयों को दिल्ली में मिली नई जिंदगी, मां और मामा ने किया लिवर दान

नई दिल्ली: दिल्ली के इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और जटिल लिवर ट्रांसप्लांट को सफलतापूर्वक अंजाम देकर फिलीपींस के जुड़वां भाइयों को नई जिंदगी दी है। जन्मजात गंभीर बीमारी से जूझ रहे दोनों बच्चों का सफल लिविंग डोनर लिवर ट्रांसप्लांट किया गया, जिसमें उनकी मां और मामा ने अपने लिवर का हिस्सा दान किया। जन्मजात बीमारी से जूझ रहे थे दोनों बच्चे एएनआई के मुताबिक, फिलीपींस के जुड़वां भाई केली और टायलर जन्म से ही 'कोलेडोकल सिस्ट' (Choledochal Cyst) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित थे। यह बीमारी पित्त नलिकाओं (बाइल डक्ट) को प्रभावित करती है और समय के साथ लिवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है। डॉक्टरों के अनुसार, दोनों बच्चों का लिवर इस बीमारी से इतना प्रभावित हो चुका था कि उनके इलाज के लिए लिवर ट्रांसप्लांट ही एकमात्र विकल्प बचा था। एक लाख में एक को होती है यह बीमारी इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के ट्रांसप्लांट एवं सर्जिकल गैस्ट्रोएंटरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ सलाहकार डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि जुड़वां बच्चों में एक साथ इस बीमारी का होना बेहद दुर्लभ है। उन्होंने बताया कि यह बीमारी लगभग एक लाख बच्चों में किसी एक को होती है। इनमें भी केवल करीब 10 प्रतिशत मरीजों में लिवर इतना खराब होता है कि प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है। मां और मामा बने जीवनदाता इलाज के दौरान बच्चों के माता-पिता ने लिवर दान करने की इच्छा जताई। जांच में पिता चिकित्सकीय रूप से दान के लिए उपयुक्त नहीं पाए गए। इसके बाद बच्चों की मां और उनके मामा ने आगे आकर अपने-अपने लिवर का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा दान किया। विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने दोनों बच्चों का सफल ट्रांसप्लांट किया, जिसके बाद उनकी हालत में तेजी से सुधार हुआ। अब सामान्य जीवन जी सकेंगे दोनों भाई डॉ. नीरव गोयल ने बताया कि लिवर मानव शरीर का ऐसा अंग है, जो समय के साथ दोबारा विकसित होने की क्षमता रखता है। यही वजह है कि दानदाता और मरीज, दोनों का लिवर धीरे-धीरे सामान्य आकार में लौट आता है। सफल सर्जरी के बाद केली और टायलर पूरी तरह स्वस्थ हैं और अब सामान्य बच्चों की तरह जीवन जी सकेंगे। भारत की चिकित्सा विशेषज्ञता को मिली नई पहचान अस्पताल का कहना है कि यह दुर्लभ ट्विन लिवर ट्रांसप्लांट भारत की उन्नत चिकित्सा तकनीक, विशेषज्ञ डॉक्टरों और अंग प्रत्यारोपण क्षमता का महत्वपूर्ण उदाहरण है। इस सफलता ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता को एक बार फिर मजबूत किया है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Sourav Ganguli
'दादा' का 54वां जन्मदिन आज: भारतीय क्रिकेट को नई दिशा देने वाले सौरव गांगुली को दुनिया भर से शुभकामनाएं

कोलकाता, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट के सबसे सफल कप्तानों में शामिल सौरव गांगुली आज अपना 54वां जन्मदिन मना रहे हैं। 'दादा' और 'प्रिंस ऑफ कोलकाता' के नाम से मशहूर गांगुली को क्रिकेट जगत, पूर्व खिलाड़ियों और लाखों प्रशंसकों ने सोशल मीडिया पर जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं। अपने बेखौफ नेतृत्व और आक्रामक कप्तानी के दम पर उन्होंने भारतीय क्रिकेट को नई पहचान दिलाई और टीम इंडिया को विदेशी सरज़मीं पर जीतना सिखाया।    ऐसा रहा सौरव गांगुली का क्रिकेट करियर   सौरव गांगुली का जन्म 8 जुलाई 1972 को कोलकाता में हुआ था। उन्होंने 1996 में इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स टेस्ट में शतक लगाकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में यादगार शुरुआत की। गांगुली ने भारत के लिए 113 टेस्ट मैचों में 7,212 रन बनाए, जिसमें 16 शतक शामिल हैं। वहीं 311 वनडे मैचों में उन्होंने 11,363 रन बनाए और 22 शतक जड़े। वह वनडे क्रिकेट में भारत के सबसे सफल बल्लेबाजों में गिने जाते हैं। उन्होंने अपने करियर में कई अहम मौकों पर गेंदबाजी करते हुए वनडे में 100 विकेट भी हासिल किए।    कप्तानी में बदली टीम इंडिया की तस्वीर   वर्ष 2000 से 2005 तक कप्तान रहे गांगुली ने भारतीय टीम को नई आक्रामक पहचान दी। उनकी कप्तानी में भारत ने 2002 आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी जीती और 2003 विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया। उन्होंने एमएस धोनी, युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग, हरभजन सिंह, जहीर खान और इरफान पठान जैसे कई खिलाड़ियों को मौका देकर भारतीय क्रिकेट की मजबूत नींव तैयार की।    परिवार और निजी जीवन   सौरव गांगुली की पत्नी डोना गांगुली प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना हैं। दोनों ने वर्ष 1997 में विवाह किया था। उनकी एक बेटी सना गांगुली हैं, जिन्होंने विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त की है। क्रिकेट से संन्यास के बाद गांगुली ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के अध्यक्ष के रूप में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और भारतीय क्रिकेट के प्रशासनिक सुधारों में योगदान दिया।    बर्थडे पर मिला खास तोहफा   गांगुली के जन्मदिन के अवसर पर उनकी बहुप्रतीक्षित बायोपिक 'दादा: द सौरव गांगुली स्टोरी' का फर्स्ट लुक भी जारी किया गया। फिल्म में राजकुमार राव सौरव गांगुली की भूमिका निभा रहे हैं और यह फिल्म 14 मई 2027 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।

abhishek singh जुलाई 8, 2026 0
Devotee reciting Hanuman Chalisa before Lord Hanuman idol with a lit diya during prayer.
हनुमान चालीसा का पाठ क्यों माना जाता है संकटमोचन का उपाय? जानिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके प्रमुख लाभ

हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा को सबसे लोकप्रिय और पूजनीय स्तोत्रों में से एक माना जाता है। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित यह चालीसा भगवान हनुमान की महिमा का वर्णन करती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्रद्धा और विश्वास के साथ हनुमान चालीसा का नियमित पाठ करने से व्यक्ति को मानसिक शक्ति, सकारात्मक ऊर्जा और कठिन परिस्थितियों का सामना करने का साहस मिलता है। हालांकि, इन लाभों का आधार धार्मिक आस्था और परंपराएं हैं, इनके समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। 1. मानसिक तनाव और भय कम करने की मान्यता धार्मिक मान्यता है कि नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने से मन शांत होता है और भय, चिंता तथा नकारात्मक विचारों से राहत मिलती है। कई श्रद्धालु इसे आत्मविश्वास बढ़ाने और मानसिक संतुलन बनाए रखने का माध्यम मानते हैं। 2. सकारात्मक ऊर्जा का संचार मान्यता है कि हनुमान चालीसा की 40 चौपाइयों का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से घर और मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इससे व्यक्ति का मन आध्यात्मिक रूप से मजबूत होता है और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। 3. ग्रह दोषों से राहत की धार्मिक मान्यता ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जिन लोगों की कुंडली में शनि, मंगल या अन्य ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव बताए जाते हैं, उन्हें नियमित रूप से हनुमान चालीसा का पाठ करने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव कम हो सकते हैं। 4. संकट और बाधाओं से रक्षा भगवान हनुमान को 'संकटमोचन' कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से हनुमान चालीसा का पाठ करने पर जीवन की कठिनाइयों, बाधाओं और भय से मुक्ति मिलने में सहायता मिलती है। यही कारण है कि अनेक श्रद्धालु इसे अपनी दैनिक पूजा का हिस्सा बनाते हैं। हनुमान चालीसा पाठ की पारंपरिक विधि धार्मिक परंपराओं के अनुसार, मंगलवार और शनिवार को हनुमान चालीसा का पाठ विशेष फलदायी माना जाता है। पाठ से पहले स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें, भगवान हनुमान के समक्ष दीपक और धूप जलाएं तथा भगवान श्रीराम का स्मरण करने के बाद श्रद्धापूर्वक चालीसा का पाठ करें। आस्था का विषय हनुमान चालीसा का पाठ करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा हुआ है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह व्यक्ति को आध्यात्मिक शक्ति और मनोबल प्रदान करता है। हालांकि, इसके प्रभाव व्यक्तिगत विश्वास और धार्मिक आस्था पर आधारित माने जाते हैं।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
Devotee worshipping Lord Vishnu with a clean home altar before Yogini Ekadashi and performing traditional Vastu rituals.
योगिनी एकादशी 2026: व्रत से पहले करें ये 5 आसान वास्तु उपाय, घर में आएगी सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा

आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। यह एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है। वास्तु शास्त्र में भी योगिनी एकादशी से पहले घर में कुछ विशेष बदलाव करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इन उपायों से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, ये मान्यताएं धार्मिक और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। 1. मुख्य द्वार की अच्छी तरह करें सफाई वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार को सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। योगिनी एकादशी से पहले इसकी अच्छी तरह सफाई करें। व्रत वाले दिन सुबह मुख्य द्वार पर हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना शुभ माना जाता है। 2. ईशान कोण को रखें साफ और व्यवस्थित घर का उत्तर-पूर्व भाग यानी ईशान कोण पूजा और देव स्थान के लिए शुभ माना जाता है। इस स्थान से कबाड़, टूटी-फूटी वस्तुएं और डस्टबिन हटा दें। यदि संभव हो तो यहां गंगाजल का छिड़काव करें और भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर पूजा करें। 3. सेंधा नमक वाले पानी से करें सफाई एकादशी से एक दिन पहले पूरे घर में सेंधा नमक मिले पानी से पोंछा लगाने की परंपरा कई लोग अपनाते हैं। इसके बाद भीमसेनी कपूर और लौंग का धुआं पूरे घर में करने की भी मान्यता है, जिसे नकारात्मकता दूर करने और वातावरण को शुद्ध रखने से जोड़ा जाता है। 4. तिजोरी या धन रखने का स्थान रखें व्यवस्थित एकादशी से पहले तिजोरी या जहां धन रखा जाता है, उस स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। अनावश्यक कागजात हटा दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत वाले दिन लाल या पीले कपड़े में हल्दी की गांठ और गोमती चक्र रखकर तिजोरी में रखने से आर्थिक उन्नति के योग बनते हैं। 5. पूजा स्थान को करें शुद्ध और सजाएं योगिनी एकादशी से पहले घर के पूजा स्थान की साफ-सफाई करें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए दीपक, फूल और प्रसाद की उचित व्यवस्था करें। साफ और व्यवस्थित पूजा स्थल को शुभ माना जाता है और इससे पूजा का वातावरण भी सकारात्मक बनता है। धार्मिक मान्यता धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, वास्तु उपायों के प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं और इन्हें आस्था एवं परंपरा के आधार पर ही देखा जाता है।  

surbhi जुलाई 8, 2026 0
NCERT Class 8 Textbook
NCERT ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान की संशोधित पाठ्यपुस्तक जारी की

नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (भाग-2) की संशोधित पाठ्यपुस्तक जारी कर दी है। नई पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय में व्यापक बदलाव किए गए हैं और पहले शामिल विवादास्पद संदर्भों को हटाकर पाठ को अधिक संतुलित और पारंपरिक नागरिक शास्त्र के स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है।   न्यायपालिका अध्याय में किए गए बड़े बदलाव   संशोधित अध्याय में अब न्याय, संवैधानिक उपचार, अदालतों की संरचना, न्यायाधिकरण , जनहित याचिका और वैकल्पिक विवाद समाधान जैसे विषयों पर अधिक जोर दिया गया है। पहले शामिल न्यायपालिका पर आलोचनात्मक टिप्पणियों और भ्रष्टाचार संबंधी संदर्भों को हटा दिया गया है।   सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद हुआ संशोधन   इस वर्ष की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े कुछ अंशों पर स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद NCERT ने पुस्तक का वितरण रोक दिया था और संशोधन की प्रक्रिया शुरू की थी। संशोधित संस्करण अब औपचारिक रूप से छात्रों के लिए जारी कर दिया गया है।   नई किताबें स्कूलों तक पहुंचाने की तैयारी   NCERT ने राज्यों और संबद्ध विद्यालयों को संशोधित पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परिषद का कहना है कि नए संस्करण का उद्देश्य छात्रों को न्यायपालिका की भूमिका और भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की बेहतर एवं संतुलित समझ प्रदान करना है।

anjali kumari जुलाई 8, 2026 0
Numerology chart with numbers and zodiac-inspired design representing the numerology predictions for July 3, 2026.
आज का अंक ज्योतिष 3 जुलाई 2026: मूलांक 3 वालों के लिए नई शुरुआत के योग, मूलांक 6 के घर में रहेगा खुशियों का माहौल, जानें सभी मूलांकों का भविष्यफल

नई दिल्ली: 3 जुलाई 2026 का दिन सकारात्मक ऊर्जा, रचनात्मक सोच और बेहतर संवाद का संकेत दे रहा है। अंक ज्योतिष के अनुसार आज का दिन नए विचारों को अमल में लाने, रिश्तों को मजबूत करने और अपने व्यवहार से लोगों का विश्वास जीतने के लिए अनुकूल रहेगा। कई मूलांक वालों को करियर, आर्थिक मामलों और पारिवारिक जीवन में अच्छे अवसर मिल सकते हैं। आइए जानते हैं जन्मतिथि के आधार पर सभी मूलांकों का आज का भविष्यफल। मूलांक 1: टीमवर्क से मिलेगी सफलता आज आपके लिए सहयोग और तालमेल सबसे बड़ी ताकत साबित होंगे। कार्यस्थल पर टीम के साथ मिलकर किए गए प्रयास बेहतर परिणाम देंगे। परिवार में मधुर व्यवहार रिश्तों को मजबूत करेगा। आर्थिक मामलों में कोई बड़ा फैसला लेने से पहले पुरानी योजनाओं की समीक्षा करें। लकी नंबर: 1, 3 लकी रंग: गोल्ड, व्हाइट सुझाव: दूसरों की बात ध्यान से सुनें, सफलता आसान होगी। मूलांक 2: मन की शांति दिलाएगी सफलता आज आपकी संवेदनशीलता और समझदारी आपको नई उपलब्धियां दिला सकती है। परिवार के साथ समय बिताने से मानसिक सुकून मिलेगा। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर लिए गए फैसले भविष्य के लिए लाभदायक रहेंगे। लकी नंबर: 2, 3 लकी रंग: व्हाइट, सिल्वर सुझाव: अपनी अंतरात्मा की आवाज पर भरोसा रखें। मूलांक 3: नए काम शुरू करने के लिए शानदार दिन आज आपकी रचनात्मकता और आत्मविश्वास चरम पर रहेगा। लेखन, शिक्षा, कला या किसी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत के लिए समय बेहद अनुकूल है। आपके नए विचार भविष्य में आर्थिक लाभ का कारण बन सकते हैं। लकी नंबर: 3, 2 लकी रंग: येलो, ऑरेंज सुझाव: अपनी प्रतिभा का पूरा उपयोग करें और अधूरे काम पूरे करें। मूलांक 4: योजनाबद्ध तरीके से मिलेगी सफलता आज अनुशासन और सही योजना आपको कठिन कार्यों में भी सफलता दिलाएगी। परिवार के साथ तालमेल बनाए रखें और आर्थिक मामलों में बजट बनाकर आगे बढ़ें। लकी नंबर: 4, 2 लकी रंग: ब्लू, ग्रे सुझाव: निरंतर प्रयास ही बड़ी सफलता की कुंजी है। मूलांक 5: बातचीत से बनेंगे नए अवसर आज नए लोगों से मुलाकात और प्रभावी संवाद आपके लिए नए अवसर लेकर आ सकता है। सामाजिक गतिविधियों में भाग लेने से लाभ होगा। खर्च करते समय जल्दबाजी से बचें। लकी नंबर: 5, 3 लकी रंग: ग्रीन, एक्वा ब्लू सुझाव: हर बातचीत को सीखने का अवसर समझें। मूलांक 6: परिवार में रहेगा खुशनुमा माहौल आज का दिन परिवार और रिश्तों के लिए बेहद शुभ रहेगा। घर में प्रेम, सहयोग और खुशियों का वातावरण बना रहेगा। कार्यस्थल पर भी टीमवर्क से अच्छे परिणाम मिलेंगे। आर्थिक मामलों में संतुलित खर्च करना लाभदायक रहेगा। लकी नंबर: 6, 2 लकी रंग: पिंक, क्रीम सुझाव: अपनों की छोटी-छोटी खुशियों का सम्मान करें। मूलांक 7: अंतर्मन की आवाज पर करें भरोसा आज रिसर्च, अध्ययन और भविष्य की योजना बनाने के लिए समय अनुकूल है। किसी भी बड़े आर्थिक फैसले से पहले सभी पहलुओं पर विचार करें। परिवार के साथ खुलकर बातचीत करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा। लकी नंबर: 7, 2 लकी रंग: इंडिगो, वायलेट सुझाव: धैर्य और विवेक से निर्णय लें। मूलांक 8: मेहनत का मिलेगा पूरा फल आज कार्यक्षेत्र में जिम्मेदारियां बढ़ सकती हैं, लेकिन आपकी मेहनत और ईमानदारी की सराहना होगी। परिवार और काम के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी रहेगा। आर्थिक मामलों में सोच-समझकर निवेश करें। लकी नंबर: 8, 2 लकी रंग: नेवी ब्लू, ब्लैक सुझाव: धैर्य बनाए रखें, सफलता जरूर मिलेगी। मूलांक 9: सेवा और सहानुभूति से बढ़ेगा सम्मान आज आपका सकारात्मक व्यवहार और मददगार स्वभाव लोगों का दिल जीत सकता है। पुराने मतभेद दूर करने और नए रिश्ते मजबूत करने के लिए दिन अनुकूल है। भविष्य की योजनाओं पर ध्यान केंद्रित करें। लकी नंबर: 9, 3 लकी रंग: रेड, मरून सुझाव: सकारात्मक सोच और दयालु व्यवहार आपको नई पहचान दिलाएगा।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
Devotee offering prayers to a spiritual guru during Guru Purnima, symbolizing the sacred tradition of Guru Mantra and devotion.
Guru Purnima 2026: गुरु मंत्र को क्यों रखा जाता है अत्यंत गोपनीय? जानिए शास्त्रों में बताए गए आध्यात्मिक नियम और इसका महत्व

गुरु पूर्णिमा भारतीय सनातन परंपरा का एक अत्यंत पावन और महत्वपूर्ण पर्व है। यह दिन गुरु के प्रति श्रद्धा, सम्मान और कृतज्ञता व्यक्त करने के लिए समर्पित माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि गुरु ही शिष्य को अज्ञान के अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाते हैं और आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं। शास्त्रों के अनुसार, जिस व्यक्ति पर आपकी पूर्ण श्रद्धा और निष्ठा हो, उसी को अपना गुरु बनाना चाहिए। एक बार गुरु से दीक्षा और गुरु मंत्र प्राप्त होने के बाद शिष्य का कर्तव्य है कि वह गुरु की आज्ञा का पालन करे, उनके बताए मार्ग पर चले और गुरु मंत्र को सदैव गोपनीय रखे। गुरु मंत्र को गोपनीय रखने की परंपरा क्यों है? धर्मग्रंथों में गुरु मंत्र को अत्यंत गोपनीय रखने का विशेष महत्व बताया गया है। मान्यता है कि गुरु द्वारा दिया गया मंत्र केवल शब्दों का समूह नहीं होता, बल्कि वह आध्यात्मिक ऊर्जा और साधना का माध्यम होता है। शास्त्रों के अनुसार, गुरु मंत्र की शक्ति तभी प्रभावी होती है जब साधक उसका नियमित और निष्ठापूर्वक जप करता है तथा उसे अनावश्यक रूप से दूसरों के सामने प्रकट नहीं करता। प्रकृति भी देती है यही संदेश धार्मिक व्याख्याओं में गुरु मंत्र की तुलना प्रकृति के नियमों से की गई है। जैसे— बीज मिट्टी के भीतर छिपकर ही विशाल वृक्ष बनता है। गर्भ में पल रहा जीवन पूर्ण विकसित होने तक सुरक्षित और गोपनीय रहता है। संचित ऊर्जा समय आने पर सबसे अधिक प्रभावशाली रूप में प्रकट होती है। उसी प्रकार गुरु मंत्र भी साधक के अंतर्मन में मौन रूप से विकसित होने वाली आध्यात्मिक शक्ति माना जाता है। इसलिए इसे गोपनीय रखने की परंपरा बनाई गई है। गुरु मंत्र सार्वजनिक करने से क्या माना जाता है? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि साधक बार-बार अपने गुरु मंत्र की चर्चा करता है, तो उसका ध्यान साधना से हटकर दूसरों की प्रतिक्रिया, प्रशंसा, शंका या तुलना की ओर जा सकता है। ऐसी स्थिति में साधना का केंद्र भीतर की बजाय बाहर हो जाता है, जिससे आध्यात्मिक एकाग्रता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण गुरु मंत्र को निजी साधना का विषय माना गया है। शास्त्रों में क्या कहा गया है? धर्मशास्त्रों में कहा गया है कि व्यक्ति के कल्याण के लिए कुछ बातों को सदैव गोपनीय रखना चाहिए और उनमें गुरु मंत्र प्रमुख है। मान्यता के अनुसार— गुरु मंत्र किसी भी व्यक्ति को नहीं बताना चाहिए। परिवार, मित्र या परिचितों के बीच भी इसे साझा नहीं करना चाहिए। गुरु द्वारा दी गई मंत्र-जप की विशेष विधि भी गोपनीय रखनी चाहिए। गुरु के निर्देशों का श्रद्धापूर्वक पालन करना ही शिष्य का धर्म माना गया है। पति-पत्नी को भी गुरु मंत्र साझा न करने की सलाह परंपरागत धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि पति ने गुरु मंत्र प्राप्त किया है तो उसे अपनी पत्नी को भी वह मंत्र नहीं बताना चाहिए। इसी प्रकार यदि पत्नी ने गुरु मंत्र प्राप्त किया है तो उसे भी अपने पति के साथ मंत्र साझा नहीं करना चाहिए। इसी कारण कई परंपराओं में पति-पत्नी एक साथ गुरु से मंत्र दीक्षा ग्रहण करते हैं, ताकि दोनों अपनी-अपनी साधना गुरु के निर्देशानुसार कर सकें। एक गुरु और एक मंत्र पर निष्ठा का महत्व धार्मिक ग्रंथों में यह भी उल्लेख मिलता है कि जिस प्रकार पूर्ण श्रद्धा के साथ किसी एक आराध्य की उपासना करने से साधक को आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होता है, उसी प्रकार एक गुरु से प्राप्त गुरु मंत्र का नियमित जप और गुरु के प्रति अटूट निष्ठा साधना को सफल बनाने का माध्यम माना गया है।  

surbhi जुलाई 1, 2026 0
Numerology chart with date June 29, 2026, highlighting daily predictions for life path numbers 1 to 9.
Ank Jyotish 29 June 2026: मूलांक 2 वाले पैसों के मामले में रहें सतर्क, मूलांक 6 के रिश्तों में बढ़ेगी मिठास; जन्मतिथि से जानें आज का अंक राशिफल

नई दिल्ली: 29 जून 2026 का दिन अंक ज्योतिष के अनुसार भावनाओं, रिश्तों और संतुलन का संदेश लेकर आया है। आज की तारीख का मूलांक 2 है, जो संवेदनशीलता, सहयोग और धैर्य का प्रतीक माना जाता है। वहीं दिन की कुल ऊर्जा अंक 9 से प्रभावित है, जो पुरानी कड़वाहट को छोड़कर नई शुरुआत करने की प्रेरणा देती है। आज का दिन भागदौड़ से ज्यादा रिश्तों को समय देने, मन की बात साझा करने और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ने का है। आइए जानते हैं जन्मतिथि के अनुसार सभी मूलांकों का आज का भविष्यफल। नोट: अंक ज्योतिष में मूलांक जन्म की तारीख (1 से 31) के अंकों को जोड़कर निकाला जाता है। उदाहरण के लिए, 29 तारीख को जन्मे व्यक्ति का मूलांक 2+9 = 11, 1+1 = 2 होगा। मूलांक 1: सहयोग से मिलेगी सफलता आज अकेले सब कुछ करने की बजाय टीमवर्क पर भरोसा करें। किसी जरूरी काम में अनुभवी लोगों की सलाह फायदेमंद साबित होगी। रिश्तों में सामने वाले की बात ध्यान से सुनें। आर्थिक मामलों में जल्दबाजी से बचें। लकी नंबर: 1, 2 लकी रंग: गोल्ड, व्हाइट मूलांक 2: पैसों के मामले में रहें सतर्क आज आपकी संवेदनशीलता आपकी सबसे बड़ी ताकत होगी। रिश्तों में प्रेम और विश्वास बढ़ेगा, लेकिन आर्थिक लेन-देन में पूरी सावधानी बरतें। कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अपनी अंतरात्मा की आवाज जरूर सुनें। लकी नंबर: 2, 11 लकी रंग: सिल्वर, व्हाइट मूलांक 3: संवाद से सुलझेंगे विवाद आज आपकी रचनात्मक सोच और मीठी वाणी लोगों को प्रभावित करेगी। परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी। नए कार्यों की शुरुआत के लिए दिन अनुकूल है। लकी नंबर: 3, 9 लकी रंग: येलो, लैवेंडर मूलांक 4: धैर्य ही बनेगा सफलता की कुंजी आज जल्दबाजी नुकसान पहुंचा सकती है। हर निर्णय सोच-समझकर लें और टीम के साथ तालमेल बनाकर चलें। भविष्य के लिए आर्थिक योजना बनाना लाभदायक रहेगा। लकी नंबर: 4, 2 लकी रंग: ब्लू, ग्रे मूलांक 5: नए अवसरों पर रखें नजर आज नए लोगों से मुलाकात आपके लिए फायदेमंद हो सकती है। किसी की सलाह भविष्य में बड़ा लाभ दिला सकती है। खर्चों पर नियंत्रण रखें और निवेश सोच-समझकर करें। लकी नंबर: 5, 2 लकी रंग: ग्रीन, एक्वा ब्लू मूलांक 6: रिश्तों में आएगी मिठास आज का दिन प्रेम, परिवार और रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए बेहद शुभ है। यदि किसी अपने से नाराजगी चल रही है तो बातचीत कर उसे दूर करने का अच्छा अवसर है। अपनी जरूरतों को भी नजरअंदाज न करें। लकी नंबर: 6, 9 लकी रंग: पिंक, क्रीम मूलांक 7: आत्मचिंतन से मिलेगा समाधान आज ध्यान, योग या एकांत में समय बिताने से मानसिक शांति मिलेगी। कोई भी बड़ा फैसला लेने से पहले अपनी अंतरात्मा की बात सुनें। आर्थिक मामलों की दोबारा समीक्षा करना बेहतर रहेगा। लकी नंबर: 7, 2 लकी रंग: इंडिगो, वायलेट मूलांक 8: संतुलन बनाए रखें काम और परिवार दोनों के बीच संतुलन बनाना आज जरूरी रहेगा। निवेश के मामलों में जोखिम लेने से बचें। परिवार के साथ समय बिताने से मन प्रसन्न रहेगा। लकी नंबर: 8, 9 लकी रंग: नेवी ब्लू, सिल्वर मूलांक 9: पुरानी बातें छोड़कर आगे बढ़ें आज अधूरे कार्य पूरे करने का प्रयास करें। किसी के प्रति मन में नाराजगी है तो उसे छोड़कर आगे बढ़ें। दूसरों की मदद करने से आत्मसंतोष मिलेगा। आर्थिक मामलों में भविष्य की योजना पर ध्यान दें। लकी नंबर: 9, 2 लकी रंग: लाल, मरून  

surbhi जून 29, 2026 0
Married Hindu women worship a banyan tree during Vat Purnima Vrat for their husband's long life and marital happiness.
Vat Purnima Vrat 2026: आज रखा जा रहा है वट पूर्णिमा व्रत, जानें पूजा विधि, जरूरी नियम और किन बातों का रखें विशेष ध्यान

नई दिल्ली: आज, 29 जून 2026 (सोमवार) को वट पूर्णिमा व्रत रखा जा रहा है। हिंदू धर्म में इस व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुखी दांपत्य जीवन और अखंड सौभाग्य की कामना के साथ यह व्रत करती हैं। इस दिन वट (बरगद) वृक्ष, माता सावित्री और सत्यवान की विधि-विधान से पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और नियमपूर्वक वट पूर्णिमा व्रत करने से वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है और अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद प्राप्त होता है। वट पूर्णिमा व्रत की पूजा विधि वट पूर्णिमा के दिन महिलाओं को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करने के बाद स्वच्छ या लाल एवं पीले रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा के दौरान इन बातों का विशेष ध्यान रखें— सोलह श्रृंगार करके व्रत और पूजा का संकल्प लें। एक बांस की टोकरी में सात प्रकार के अनाज रखें और उसे स्वच्छ कपड़े से ढक दें। पूजा की सामग्री लेकर वट (बरगद) वृक्ष के पास जाएं। वट वृक्ष, माता सावित्री और सत्यवान की विधिवत पूजा करें। वट वृक्ष पर जल अर्पित करें तथा कुमकुम, अक्षत, फूल, फल, रोली और दीप अर्पित करें। कच्चा सूत लपेटते हुए वट वृक्ष की परिक्रमा करें। वट सावित्री व्रत कथा श्रद्धापूर्वक सुनें। पूजा के बाद दान-दक्षिणा करें। चना और गुड़ का प्रसाद अर्पित करें। सुहाग की सामग्री वट वृक्ष पर चढ़ाएं। घर लौटकर पति का आशीर्वाद लें और उन्हें प्रसाद अर्पित करें। वट पूर्णिमा व्रत में क्या करें? सोलह श्रृंगार अवश्य करें। पूजा में सुहाग की सामग्री अर्पित करें। व्रत का पारण परंपरा के अनुसार भीगे हुए चने खाकर करें। पूजा में चढ़ाई गई सुहाग सामग्री किसी सुहागिन महिला, सास या ननद को भेंट करें। वट वृक्ष की 5, 7, 11, 21 या 51 परिक्रमा करें। यदि संभव हो तो 108 परिक्रमा भी की जा सकती है। वट पूर्णिमा व्रत में क्या नहीं करना चाहिए? मन में नकारात्मक विचार न रखें। किसी से विवाद या बहस करने से बचें। जीवनसाथी से क्रोध या कटु व्यवहार न करें। काले, नीले और सफेद रंग के वस्त्र पहनने से बचें। व्रत कथा के दौरान बीच में उठकर न जाएं। पूरी कथा समाप्त होने के बाद ही अपने स्थान से उठें। धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माता सावित्री ने अपने दृढ़ संकल्प, तप और पतिव्रत धर्म के बल पर अपने पति सत्यवान के प्राण यमराज से वापस प्राप्त किए थे। तभी से वट पूर्णिमा और वट सावित्री व्रत को अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुखी वैवाहिक जीवन का प्रतीक माना जाता है।  

surbhi जून 29, 2026 0
Devotees worshipping Lord Vishnu during Nirjala Ekadashi with kalash, tulsi leaves and traditional rituals
निर्जला एकादशी 2026: व्रत पारण का शुभ समय, संपूर्ण विधि और पद्म पुराण में बताए गए नियम

नई दिल्ली: सनातन धर्म में निर्जला एकादशी का व्रत सबसे महत्वपूर्ण और पुण्यदायी एकादशी व्रतों में से एक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत रखने से वर्षभर की सभी एकादशियों के व्रत के बराबर पुण्य फल प्राप्त होता है। यही कारण है कि इसे अत्यंत विशेष स्थान दिया गया है। पद्म पुराण और धर्मशास्त्रों में भी इस व्रत की महिमा का विस्तार से वर्णन मिलता है। निर्जला एकादशी को भीमसेनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि महाभारत काल में भीमसेन ने इसी व्रत का पालन किया था। व्रत का पूर्ण फल प्राप्त करने के लिए द्वादशी तिथि पर विधिपूर्वक पारण करना आवश्यक माना गया है। निर्जला एकादशी व्रत पारण का शुभ समय धार्मिक पंचांग के अनुसार, निर्जला एकादशी का व्रत 25 जून 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। वहीं व्रत का पारण 26 जून 2026, शुक्रवार को द्वादशी तिथि में किया जाएगा। व्रत पारण का शुभ समय: सुबह 5:41 बजे से 8:25 बजे तक धर्मशास्त्रों के अनुसार द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर व्रत खोलना शुभ माना जाता है। समय पर पारण करने से व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। क्यों खास है निर्जला एकादशी? मान्यता है कि जो व्यक्ति सभी एकादशी व्रत नहीं कर पाता, वह श्रद्धा और नियमपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत रखकर वर्षभर की सभी एकादशियों का पुण्य प्राप्त कर सकता है। इस दिन बिना अन्न और जल ग्रहण किए भगवान विष्णु की उपासना की जाती है। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार यह व्रत पापों का नाश करने वाला, सुख-समृद्धि प्रदान करने वाला और मोक्षदायक माना गया है। पद्म पुराण के अनुसार व्रत पारण की संपूर्ण विधि 1. प्रातःकाल स्नान और शुद्धि द्वादशी तिथि के दिन ब्रह्म मुहूर्त या सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। 2. भगवान विष्णु की पूजा स्नान के बाद भगवान विष्णु की विधिवत पूजा करें। पूजा में गंध, धूप, दीप, पुष्प और सुंदर वस्त्र अर्पित करें। 3. जल कलश का संकल्प पद्म पुराण में जल से भरे घड़े के दान का विशेष महत्व बताया गया है। पूजा के समय जल से भरे कलश का संकल्प करें। 4. मंत्र का उच्चारण जल के घड़े का संकल्प करते समय यह मंत्र बोलें— "देवदेव हृषीकेश संसारार्णवतारक। उदकुम्भप्रदानेन नय मां परमां गतिम्॥" अर्थ: हे संसार सागर से पार लगाने वाले भगवान हृषीकेश! इस जलघट के दान से मुझे परम गति प्रदान करें। 5. दान और ब्राह्मण भोजन पूजन के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएं तथा यथाशक्ति दान-दक्षिणा दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार इससे व्रत का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है। 6. व्रत पारण ब्राह्मण भोजन और पूजा के पश्चात स्वयं व्रत का पारण करें। परंपरा के अनुसार व्रत सबसे पहले जल और तुलसी दल ग्रहण करके खोला जाता है। इसके बाद सात्विक भोजन करना शुभ माना जाता है। व्रत करने से क्या मिलता है फल? पद्म पुराण के अनुसार विधिपूर्वक निर्जला एकादशी का व्रत और द्वादशी पर पारण करने वाला व्यक्ति पापों से मुक्ति प्राप्त करता है। साथ ही उसे भगवान विष्णु का आशीर्वाद, सुख-समृद्धि, पारिवारिक खुशहाली और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है।  

surbhi जून 25, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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