Trade

भारत के निर्यात में अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान तेज वृद्धि
भारत के निर्यात में तेज उछाल, अप्रैल-जुलाई में करीब 15% बढ़ोतरी; ₹1 ट्रिलियन लक्ष्य पर सरकार की नजर

नई दिल्ली, एजेंसियां। वैश्विक स्तर पर व्यापारिक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत के निर्यात में अच्छी तेजी देखने को मिली है। वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत के निर्यात में करीब 15 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार ने चालू वित्त वर्ष में वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।   अप्रैल-जुलाई में निर्यात की रफ्तार तेज     वाणिज्य मंत्री के अनुसार, अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान निर्यात में लगभग 15% की वृद्धि हुई है। यह बढ़ोतरी ऐसे समय हुई है जब वैश्विक व्यापार में भू-राजनीतिक तनाव, ऊंची परिवहन लागत और बाजारों में अनिश्चितता जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं।   वहीं, आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जुलाई में वस्तुओं और सेवाओं का कुल निर्यात करीब 316.42 अरब डॉलर रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 279.63 अरब डॉलर से लगभग 13.16% अधिक है।   जुलाई में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा माल निर्यात     जुलाई में भारत के माल निर्यात ने भी मजबूत प्रदर्शन किया। माल निर्यात 19.63% बढ़कर 44.24 अरब डॉलर पहुंच गया, जो जुलाई महीने के लिए अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। इंजीनियरिंग उत्पादों और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं ने इस वृद्धि में अहम भूमिका निभाई।   अमेरिका को जुलाई में भारत का निर्यात 12.85% बढ़कर 9.02 अरब डॉलर और चीन को निर्यात 64.57% बढ़कर 2.2 अरब डॉलर हो गया।   1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य     भारत ने वित्त वर्ष 2026-27 में वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा करीब 863 अरब डॉलर रहा था। पीयूष गोयल ने शुरुआती महीनों की वृद्धि को देखते हुए लक्ष्य हासिल करने को लेकर भरोसा जताया है।     बढ़ता व्यापार घाटा बनी चुनौती     निर्यात में तेजी के बावजूद भारत के सामने व्यापार घाटे की चुनौती बनी हुई है। जुलाई में माल आयात 17.52% बढ़कर 76.22 अरब डॉलर हो गया, जिसके कारण माल व्यापार घाटा बढ़कर 31.98 अरब डॉलर पहुंच गया। यानी निर्यात मजबूत होने के बावजूद आयात की रफ्तार भी तेज रही।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 14, 2026 0
President Droupadi Murmu meets Moldova President Maia Sandu in Chisinau
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का पहला मोल्दोवा दौरा, यात्रा-व्यापार और निवेश बढ़ाने पर बनी सहमति

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मोल्दोवा की राजधानी चिसिनाउ की ऐतिहासिक राजकीय यात्रा के दौरान दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा देने पर जोर दिया। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा है, जिसे भारत-मोल्दोवा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। राष्ट्रपति माइया सांडू ने किया भव्य स्वागत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का मोल्दोवा की राष्ट्रपति माइया सांडू ने राष्ट्रपति भवन में औपचारिक स्वागत किया। इस अवसर पर उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। एएनआई के मुताबिक, दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों की मौजूदगी में कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा हुई। द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने पर जोर राष्ट्रपति मुर्मू और राष्ट्रपति माइया सांडू के बीच हुई वार्ता में दोनों देशों के सहयोग के विभिन्न क्षेत्रों पर विस्तार से चर्चा की गई। दोनों नेताओं ने आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने, व्यापारिक संबंधों का विस्तार करने और भविष्य में सहयोग के नए अवसर तलाशने पर सहमति जताई। राष्ट्रपति भवन के अनुसार, यह यात्रा भारत और मोल्दोवा के बीच बढ़ते विश्वास, मित्रता और दीर्घकालिक साझेदारी का प्रतीक है। व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी पर बनी सहमति संयुक्त प्रेस बयान में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि मोल्दोवा में उन्हें और भारतीय प्रतिनिधिमंडल को मिला गर्मजोशी भरा स्वागत दोनों देशों की मजबूत मित्रता को दर्शाता है। उन्होंने बताया कि दोनों देशों ने: द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहन देने, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने, बेहतर कनेक्टिविटी विकसित करने, और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार करने पर सहमति बनाई है। यूरोप में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रपति मुर्मू की यह यात्रा यूरोप में भारत की बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का अहम संकेत है। हाल के वर्षों में भारत और यूरोपीय देशों के बीच आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। जुलाई 2026 में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ व्यापार एवं प्रौद्योगिकी परिषद (TTC) की बैठक के बाद भारत और यूरोप के बीच सहयोग को नई गति मिली है। ऐसे में मोल्दोवा के साथ यह नई साझेदारी व्यापार, निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और क्षेत्रीय सहयोग के नए अवसर खोल सकती है। भविष्य में सहयोग बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोनों देशों ने नियमित उच्चस्तरीय संवाद जारी रखने और आर्थिक, तकनीकी तथा रणनीतिक क्षेत्रों में साझेदारी को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई। माना जा रहा है कि यह यात्रा भारत-मोल्दोवा संबंधों को नई मजबूती देने के साथ-साथ यूरोप में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को भी और मजबूत करेगी।  

kalpana जुलाई 21, 2026 0
Devotee offering fresh fruits as bhog during Hindu worship with traditional Pooja items and flowers.
भोग में बीज वाले फल चढ़ाना सही या गलत? जानिए क्या कहते हैं धार्मिक नियम और किन बातों का रखें विशेष ध्यान

पूजा-पाठ में भगवान को फल अर्पित करना सनातन परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। हालांकि, कई श्रद्धालुओं के मन में यह सवाल रहता है कि क्या बीज वाले फल भगवान को चढ़ाए जा सकते हैं या नहीं। खासकर आम, तरबूज, लीची या अन्य बड़े बीज वाले फलों को लेकर लोगों में अलग-अलग धारणाएं देखने को मिलती हैं। आइए जानते हैं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस विषय में क्या माना जाता है और भोग लगाते समय किन नियमों का पालन करना चाहिए। क्या भगवान को बीज वाले फल चढ़ा सकते हैं? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान को बीज वाले फल अर्पित करना पूरी तरह स्वीकार्य माना जाता है। फल को सात्विक और पवित्र भोग माना गया है तथा मौसमी फलों का भोग विशेष शुभ माना जाता है। हालांकि, यदि फल में बड़ा बीज हो, जैसे आम, तरबूज या अन्य ऐसे फल, तो भोग लगाने से पहले उसका बीज निकाल देना उचित माना जाता है। मान्यता है कि भगवान को वही स्वरूप में भोग अर्पित करना चाहिए, जैसा भोजन सामान्य रूप से ग्रहण किया जाता है। भोग लगाने से पहले इन नियमों का रखें ध्यान भगवान को फल अर्पित करते समय केवल फल का चयन ही नहीं, बल्कि उसकी शुद्धता और प्रस्तुत करने का तरीका भी महत्वपूर्ण माना गया है। भोग में शामिल किए जाने वाले फलों को पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें। पूजा से काफी पहले फल काटकर न रखें। भोग से ठीक पहले ही फल धोकर या काटकर अर्पित करें। यदि फल बड़ा है तो उसे स्वच्छ चाकू से काटकर भगवान के सामने रखें। भोग में संभव हो तो तुलसी दल भी शामिल करें, जिसे विशेष रूप से शुभ माना जाता है। भोग लगाते समय मन शांत रखें और पूरी श्रद्धा एवं भक्ति के साथ भगवान का स्मरण करें। श्रद्धा को सबसे अधिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान के लिए सबसे महत्वपूर्ण भक्त की सच्ची भावना और श्रद्धा होती है। भोग कितना बड़ा या महंगा है, इससे अधिक महत्व उसे अर्पित करने के भाव का माना गया है। इसलिए पूजा के दौरान अहंकार छोड़कर पूर्ण विश्वास और भक्ति के साथ भगवान को भोग अर्पित करना चाहिए। बड़े बीज वाले फलों के लिए क्या करें? यदि किसी फल में बड़ा और कठोर बीज हो, तो उसे निकालकर फल भगवान को अर्पित करना बेहतर माना जाता है। वहीं छोटे बीज वाले फलों को सामान्य रूप से भी चढ़ाया जा सकता है। उद्देश्य यह माना जाता है कि भगवान को वही भोजन प्रेमपूर्वक अर्पित किया जाए, जिसे आसानी से ग्रहण किया जा सके। ध्यान रखें धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं में विभिन्न क्षेत्रों और संप्रदायों के अनुसार कुछ अंतर हो सकता है। ऐसे में यदि आपके परिवार या गुरु द्वारा बताए गए विशेष पूजा-विधान हैं, तो उनका पालन करना अधिक उचित माना जाता है। पूजा में सबसे महत्वपूर्ण तत्व श्रद्धा, पवित्रता और सच्ची आस्था ही मानी जाती है।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
Indian and Polish officials during a bilateral meeting in New Delhi, discussing stronger cooperation in defence, trade, technology and strategic partnership.
पोलैंड ने भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत करने का किया ऐलान, रक्षा और व्यापार में बढ़ेगा सहयोग

नई दिल्ली: भारत और पोलैंड के रिश्ते नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहे हैं। भारत दौरे पर आए पोलैंड के विदेश मंत्रालय के सचिव व्लादिस्लाव तेओफिल बार्तोशेव्स्की ने कहा कि दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, तकनीक और ऊर्जा समेत कई क्षेत्रों में सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की आर्थिक प्रगति की भी सराहना की और कहा कि भारत वैश्विक स्तर पर लगातार मजबूत भूमिका निभा रहा है। अक्टूबर में भारत आएंगे पोलैंड के प्रधानमंत्री पोलैंड के विदेश मंत्रालय के सचिव ने बताया कि पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क अक्टूबर में भारत की यात्रा करेंगे। इस दौरे की तैयारियों को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच लगातार बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भारत-पोलैंड रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेगी। रक्षा क्षेत्र में बढ़ेगा सहयोग बार्तोशेव्स्की ने कहा कि भारत और पोलैंड रक्षा क्षेत्र में संयुक्त उत्पादन और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि पोलैंड पहले ही भारत में ड्रोन निर्माण शुरू कर चुका है। अब दोनों देश संयुक्त रक्षा उत्पादन, तकनीक हस्तांतरण और सैन्य उपकरणों की आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पोलैंड भारत की 'मेक इन इंडिया' पहल का समर्थन करता है और भारतीय कंपनियों के साथ संयुक्त उद्यम स्थापित करने के लिए तैयार है। भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते से बढ़ेगा कारोबार पोलैंड के अधिकारी ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलेगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में भारत और पोलैंड के बीच करीब 6 अरब यूरो का द्विपक्षीय व्यापार होता है, जिसे आने वाले वर्षों में और बढ़ाने की बड़ी संभावना है। भारत की आर्थिक प्रगति की सराहना बार्तोशेव्स्की ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने उल्लेखनीय आर्थिक और तकनीकी प्रगति की है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने का भारत का लक्ष्य महत्वाकांक्षी जरूर है, लेकिन देश उस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने भारत की खाद्यान्न उत्पादन क्षमता, तकनीकी विकास और आर्थिक सुधारों की भी प्रशंसा की। वैश्विक मुद्दों पर भारत के रुख का समर्थन पोलैंड के अधिकारी ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खुला रहना चाहिए और किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने ईरान के परमाणु हथियार कार्यक्रम का विरोध किया और पश्चिम एशिया के मुद्दों पर भारत के संतुलित कूटनीतिक दृष्टिकोण की सराहना की। रूस-यूक्रेन युद्ध का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से सुना जाता है। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का समर्थन करते हुए कहा कि पोलैंड की भी आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति है। इन क्षेत्रों में भी बढ़ेगा सहयोग पोलैंड ने भारत के साथ निम्न क्षेत्रों में दीर्घकालिक सहयोग बढ़ाने की इच्छा जताई है- रक्षा और संयुक्त सैन्य उत्पादन ऊर्जा और हरित ऊर्जा स्वच्छ जल प्रबंधन अंतरिक्ष और सैटेलाइट तकनीक ड्रोन निर्माण तकनीकी नवाचार व्यापार और निवेश दोनों देशों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी आर्थिक, रणनीतिक और तकनीकी क्षेत्रों में और अधिक मजबूत होगी।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Indian Prime Minister Narendra Modi and New Zealand Prime Minister Christopher Luxon meet in Auckland during Modi's historic visit after nearly four decades.
PM Modi New Zealand Visit: 40 साल बाद न्यूजीलैंड पहुंचे भारतीय प्रधानमंत्री, 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य

ऑकलैंड: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चार दशक बाद न्यूजीलैंड की यात्रा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बन गए हैं। इससे पहले वर्ष 1986 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने न्यूजीलैंड का दौरा किया था। ऑकलैंड पहुंचने पर न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान दोनों देशों ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, तकनीक और रणनीतिक सहयोग को नई ऊंचाई देने का संकल्प लिया। 40 साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री का ऐतिहासिक दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह यात्रा भारत और न्यूजीलैंड के द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करीब 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री के न्यूजीलैंड पहुंचने से दोनों देशों के रिश्तों में नई ऊर्जा आने की उम्मीद जताई जा रही है। रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा नया विस्तार दौरे के दौरान न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने दोनों देशों के बीच व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने की घोषणा की। दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, शिक्षा, नवाचार, कृषि, तकनीक और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई। 2030 तक व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और न्यूजीलैंड ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य तय किया है। प्रधानमंत्री लक्सन ने बताया कि दोनों देशों के बीच हाल ही में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद आर्थिक संबंधों में सकारात्मक प्रगति हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि न्यूजीलैंड भारत में 20 अरब अमेरिकी डॉलर तक निवेश करने की प्रतिबद्धता रखता है। युवा उद्यमियों के लिए मोदी का विशेष प्रस्ताव ऑकलैंड में अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने दोनों देशों के युवा कारोबारियों के बीच सहयोग बढ़ाने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि 35 वर्ष से कम आयु के युवा उद्यमियों का प्रतिनिधिमंडल नियमित रूप से भारत और न्यूजीलैंड के बीच आदान-प्रदान करे, ताकि उन्हें नए व्यापारिक अवसरों, नवाचार और निवेश के क्षेत्र में सीखने का मौका मिल सके। उद्योग जगत और प्रवासी भारतीयों से करेंगे मुलाकात अपने दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के प्रमुख उद्योगपतियों, निवेशकों और खेल जगत की हस्तियों से भी मुलाकात करेंगे। इसके अलावा वह ऑकलैंड में आयोजित एक बड़े कार्यक्रम में भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे, जिसमें बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीयों के शामिल होने की उम्मीद है। लक्सन ने जताया आभार न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने पिछले वर्ष भारत यात्रा के दौरान मिले स्वागत को याद करते हुए प्रधानमंत्री मोदी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के संबंधों को नई दिशा देने में प्रधानमंत्री मोदी की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। रिश्तों में नए अध्याय की उम्मीद विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल व्यापार और निवेश तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रक्षा, शिक्षा, कृषि, तकनीक और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग को भी नई गति देगा। दोनों देशों के बीच बढ़ती साझेदारी भविष्य में आर्थिक और रणनीतिक संबंधों को और मजबूत कर सकती है।  

Deepshikha जुलाई 11, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi meets the Governor-General of Australia in Melbourne during his official visit, discussing India-Australia strategic partnership and bilateral cooperation.
मेलबर्न में गवर्नर-जनरल से मिले पीएम मोदी, भारत-ऑस्ट्रेलिया रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई रफ्तार

मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर-जनरल से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच तेजी से मजबूत हो रहे द्विपक्षीय संबंधों, रणनीतिक साझेदारी और विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा की। माना जा रहा है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच आर्थिक, रक्षा और तकनीकी सहयोग को नई गति मिलेगी। भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों पर हुई विस्तृत चर्चा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुलाकात के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते साझा लोकतांत्रिक मूल्यों, मजबूत जनसंपर्क और आपसी विश्वास पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि व्यापार, शिक्षा, रक्षा, तकनीक और नवाचार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग लगातार बढ़ रहा है और आने वाले समय में यह साझेदारी और मजबूत होगी। रणनीतिक सहयोग बढ़ाने पर जोर बैठक के दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग, निवेश, स्वच्छ ऊर्जा, शिक्षा, तकनीकी विकास और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। साथ ही क्षेत्रीय सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने पर भी सहमति जताई गई। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे के दौरान कई महत्वपूर्ण समझौतों को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो सकता है, जिससे दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को नई दिशा मिलेगी। 'मेलबर्न मीट्स मोदी' बना मुख्य आकर्षण प्रधानमंत्री मोदी के ऑस्ट्रेलिया दौरे का सबसे चर्चित कार्यक्रम 'मेलबर्न मीट्स मोदी' माना जा रहा है। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। कार्यक्रम को लेकर ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले भारतीय समुदाय के बीच खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। प्रवासी भारतीयों को देंगे विशेष संदेश प्रधानमंत्री मोदी अपने संबोधन में विकसित भारत के विजन, भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, प्रवासी भारतीयों के योगदान और भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों के भविष्य पर अपने विचार रखेंगे। माना जा रहा है कि उनका संबोधन दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा विश्लेषकों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा केवल कूटनीतिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि आर्थिक सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। इससे व्यापार, निवेश, ग्रीन एनर्जी, शिक्षा, तकनीक और रक्षा क्षेत्र में दोनों देशों के बीच नए अवसर खुलने की संभावना है। भारत और ऑस्ट्रेलिया की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में स्थिरता और आर्थिक सहयोग को भी नई मजबूती दे सकती है.  

Deepshikha जुलाई 10, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi and Australian Prime Minister Anthony Albanese exchange agreements during the India-Australia leaders' summit in Melbourne.
भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच कई अहम समझौते, परमाणु ऊर्जा से रक्षा तक बढ़ेगा सहयोग; पीएम मोदी-अल्बनीज ने दिए बड़े संकेत

मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज की मौजूदगी में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए। दोनों देशों ने रक्षा, परमाणु ऊर्जा, समुद्री सुरक्षा, साइबर तकनीक, अंतरिक्ष, व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाई देने पर सहमति जताई। दोनों नेताओं ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था को मजबूत करने की प्रतिबद्धता भी दोहराई। रक्षा साझेदारी को मिलेगा नया आयाम शिखर वार्ता के बाद ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने कहा कि दोनों देशों ने रक्षा और सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की है। इसके तहत रक्षा संबंधों को और व्यावहारिक बनाया जाएगा तथा दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाया जाएगा। समझौते के तहत नियमित संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा मामलों पर रणनीतिक परामर्श और दोनों सेनाओं की इंटरऑपरेबिलिटी (साझा संचालन क्षमता) को मजबूत करने पर सहमति बनी है। परमाणु ऊर्जा और स्वच्छ ऊर्जा पर बढ़ेगा सहयोग भारत और ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने का भी फैसला किया है। दोनों देश स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals) और ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन के विकास पर मिलकर काम करेंगे। दोनों नेताओं ने कहा कि ऊर्जा सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन भविष्य की साझेदारी के प्रमुख स्तंभ होंगे। समुद्री सुरक्षा और साइबर क्षेत्र पर भी जोर बैठक में हिंद-प्रशांत (इंडो-पैसिफिक) क्षेत्र की समुद्री सुरक्षा, साइबर सुरक्षा, अंतरिक्ष तकनीक और महत्वपूर्ण आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। दोनों देशों ने इन क्षेत्रों में संयुक्त परियोजनाओं और तकनीकी सहयोग को आगे बढ़ाने पर सहमति जताई। आतंकवाद के खिलाफ साझा रुख प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एंथनी अल्बनीज ने आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त लड़ाई जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। दोनों नेताओं ने कहा कि किसी भी रूप में आतंकवाद स्वीकार्य नहीं है और इसके खिलाफ वैश्विक स्तर पर समन्वित कार्रवाई की आवश्यकता है। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा वार्ता में दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश बढ़ाने पर भी जोर दिया गया। शिक्षा, कृषि, खाद्य प्रसंस्करण, पर्यटन और उच्च तकनीक वाले क्षेत्रों में नई साझेदारियों को बढ़ावा देने पर सहमति बनी। दोनों नेताओं ने कहा कि भारत और ऑस्ट्रेलिया के मजबूत होते आर्थिक और रणनीतिक संबंध आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसर पैदा करेंगे। इंडो-पैसिफिक पर साझा रणनीति बैठक के दौरान दोनों देशों ने स्वतंत्र, खुला और समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई। नेताओं ने कहा कि क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों का समाधान सैन्य टकराव के बजाय संवाद, सहयोग और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए। भारत और ऑस्ट्रेलिया का मानना है कि रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत बनाकर क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक विकास और वैश्विक स्थिरता को नई दिशा दी जा सकती है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Sri Sri Ravi Shankar demonstrates Sudarshan Kriya breathing technique for stress management and healthy ageing.
क्या है सुदर्शन क्रिया? श्री श्री रविशंकर ने बताया सांसों से तनाव कम कर कैसे मिल सकती है बेहतर उम्रदराज़ी की राह

हाल ही में आध्यात्मिक गुरु Sri Sri Ravi Shankar ने सोशल मीडिया पर एक संदेश साझा किया— "Reverse Ageing With Your Breath!"। इसके बाद सुदर्शन क्रिया (Sudarshan Kriya) एक बार फिर चर्चा में आ गई। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि यह तकनीक उम्र को वास्तव में पीछे नहीं ले जाती, लेकिन तनाव कम करके स्वस्थ जीवन और बेहतर उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) में सहायक हो सकती है। क्या है सुदर्शन क्रिया? सुदर्शन क्रिया एक विशेष लयबद्ध श्वास (Rhythmic Breathing) तकनीक है, जिसे श्री श्री रविशंकर ने वर्ष 1981 में विकसित किया था। इस अभ्यास में धीमी, मध्यम और तेज गति से सांस लेने की निश्चित प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस तकनीक को प्रशिक्षित शिक्षकों द्वारा सिखाया जाता है और इसका उद्देश्य शरीर, मन और भावनाओं के बीच संतुलन स्थापित करना माना जाता है। सांस और भावनाओं का क्या है संबंध? श्री श्री रविशंकर के अनुसार, हर भावना का संबंध सांस लेने के तरीके से होता है। तनाव, चिंता और गुस्से की स्थिति में सांस तेज और छोटी हो जाती है, जबकि शांत मन की अवस्था में सांस स्वतः गहरी और धीमी होती है। इसी सिद्धांत के आधार पर माना जाता है कि यदि सांसों की गति को नियंत्रित किया जाए, तो मानसिक स्थिति पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। तनाव का उम्र बढ़ने से क्या संबंध है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक रहने वाला तनाव (Chronic Stress) केवल मानसिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि पूरे शरीर को प्रभावित करता है। लगातार तनाव रहने से— नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है। शरीर में सूजन (Inflammation) बढ़ सकती है। उच्च रक्तचाप का खतरा बढ़ सकता है। हृदय और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है। शरीर की जैविक उम्र (Biological Ageing) पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे में तनाव कम करने वाली तकनीकें शरीर को बेहतर तरीके से रिकवर करने में मदद कर सकती हैं। शोध क्या कहते हैं? अब तक हुए कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि सुदर्शन क्रिया से: तनाव और चिंता कम हो सकती है। मूड बेहतर हो सकता है। नींद की गुणवत्ता में सुधार आ सकता है। भावनात्मक संतुलन मजबूत हो सकता है। समग्र मानसिक स्वास्थ्य को लाभ मिल सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके दीर्घकालिक प्रभावों को पूरी तरह समझने के लिए बड़े स्तर पर और अधिक शोध की आवश्यकता है। क्या सुदर्शन क्रिया वास्तव में उम्र कम कर सकती है? विशेषज्ञ स्पष्ट करते हैं कि अभी तक ऐसा कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है जिससे यह साबित हो कि सुदर्शन क्रिया या कोई भी ब्रीदिंग तकनीक वास्तविक (Chronological) उम्र को कम या उल्टा कर सकती है। लेकिन नियमित श्वास अभ्यास तनाव कम करने, मानसिक शांति बढ़ाने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने में मददगार हो सकता है। यही कारण है कि इसे स्वस्थ उम्रदराज़ी (Healthy Ageing) का एक सहायक अभ्यास माना जा रहा है। बेहतर उम्रदराज़ी के लिए क्या जरूरी है? विशेषज्ञों के अनुसार स्वस्थ जीवन के लिए केवल ब्रीदिंग एक्सरसाइज ही पर्याप्त नहीं है। इसके साथ-साथ इन बातों का पालन भी जरूरी है— संतुलित और पौष्टिक भोजन नियमित व्यायाम पर्याप्त और अच्छी नींद तनाव का प्रभावी प्रबंधन सकारात्मक सामाजिक संबंध नियमित स्वास्थ्य जांच सुदर्शन क्रिया इन आदतों के साथ मिलकर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक भूमिका निभा सकती है।  

surbhi जुलाई 9, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi receives a warm welcome on arrival in Melbourne, Australia, during his three-nation tour ahead of the India-Australia Annual Leaders' Summit.
मेलबर्न पहुंचे पीएम मोदी, भव्य स्वागत के साथ भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को मिलेगी नई रफ्तार

मेलबर्न: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे के तहत ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंच गए हैं, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। ऑस्ट्रेलियाई सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों ने एयरपोर्ट पर उनका अभिनंदन किया। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा सहयोग को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगे अहम मुद्दों पर मंथन मेलबर्न में प्रधानमंत्री मोदी भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच व्यापार, रक्षा, निवेश, प्रौद्योगिकी, महत्वपूर्ण खनिज, साइबर सुरक्षा और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग जैसे प्रमुख मुद्दों पर चर्चा होगी। दोनों देशों के बीच कई नए समझौतों और सहयोगी परियोजनाओं पर भी सहमति बनने की संभावना है। 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम रहेगा खास आकर्षण दौरे का सबसे बड़ा आकर्षण भारतीय समुदाय के लिए आयोजित 'मेलबर्न मीट्स मोदी' कार्यक्रम होगा। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भारतीय मूल के लोग शामिल होंगे। प्रधानमंत्री मोदी प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए भारत की वैश्विक भूमिका, भारत-ऑस्ट्रेलिया साझेदारी और दोनों देशों के बीच बढ़ते संबंधों पर अपने विचार साझा करेंगे। चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा विशेष फोकस भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है— शिक्षा और कौशल विकास कृषि एवं खाद्य सुरक्षा पर्यटन ग्रीन एनर्जी और सप्लाई चेन इन क्षेत्रों में संयुक्त निवेश और नई परियोजनाओं के जरिए दोनों देश आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना चाहते हैं। व्यापार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को नई गति मिलेगी। स्वच्छ ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज, डिजिटल तकनीक और स्टार्टअप सहयोग जैसे क्षेत्रों में भी नई पहल की उम्मीद है। रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत भारत और ऑस्ट्रेलिया पिछले कुछ वर्षों में रक्षा और समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में तेजी से करीब आए हैं। हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और आपसी रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने पर भी दोनों देशों के नेताओं के बीच विस्तृत चर्चा होने की संभावना है। दोनों देशों के रिश्तों को मिलेगी नई दिशा विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को नई ऊर्जा देगा। व्यापार, निवेश, शिक्षा, ग्रीन एनर्जी और रक्षा सहयोग में बढ़ती साझेदारी आने वाले वर्षों में दोनों देशों के लिए नए अवसरों के द्वार खोल सकती है।  

Deepshikha जुलाई 9, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi receives a ceremonial welcome from Indonesian President Prabowo Subianto upon arriving in Jakarta for a three-day official visit.
इंडोनेशिया पहुंचे पीएम मोदी, राष्ट्रपति प्रबोवो ने किया भव्य स्वागत; लड़ाकू विमानों ने किया एयर एस्कॉर्ट

जकार्ता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर सोमवार को इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंच गए। इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने हवाई अड्डे पर स्वयं मौजूद रहकर उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। प्रधानमंत्री के विमान के इंडोनेशियाई हवाई क्षेत्र में प्रवेश करते ही वहां की वायु सेना के लड़ाकू विमानों ने सुरक्षा घेरे में लेकर एयर एस्कॉर्ट भी प्रदान किया। यह यात्रा भारत और इंडोनेशिया के बीच रणनीतिक, आर्थिक और सांस्कृतिक साझेदारी को नई मजबूती देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है। राष्ट्रपति प्रबोवो ने किया व्यक्तिगत स्वागत जकार्ता एयरपोर्ट पर प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक स्वागत गार्ड ऑफ ऑनर के साथ किया गया। इस दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने उनसे मुलाकात की और दोनों नेताओं ने गर्मजोशी के साथ एक-दूसरे का अभिवादन किया। पीएम मोदी ने जताया आभार इंडोनेशिया पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपनी यात्रा की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा कि जकार्ता पहुंचकर उन्हें बेहद खुशी हुई और एयरपोर्ट पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा किए गए आत्मीय स्वागत से वह प्रभावित हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्ष 2018 में दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक पहुंचाया था, जिसका लाभ दोनों देशों के नागरिकों को मिला है। उन्होंने विश्वास जताया कि इस यात्रा के दौरान दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे। कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के बीच द्विपक्षीय वार्ता के दौरान कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। इनमें प्रमुख रूप से— व्यापार एवं निवेश रक्षा सहयोग समुद्री सुरक्षा डिजिटल अर्थव्यवस्था ऊर्जा सहयोग शिक्षा एवं सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुद्दे शामिल हैं। प्रम्बानन मंदिर परिसर का करेंगे दौरा प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रम्बानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे। इस दौरान दोनों नेता भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत बनाने पर भी जोर देंगे। भारतीय समुदाय से भी करेंगे मुलाकात प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया में रह रहे भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे। उन्होंने कहा कि वह प्रवासी भारतीयों से मिलने को लेकर उत्साहित हैं। सांस्कृतिक कार्यक्रम का लिया आनंद हवाई अड्डे पर स्वागत समारोह के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने इंडोनेशिया की पारंपरिक कला और संस्कृति पर आधारित विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आनंद लिया। कार्यक्रम के माध्यम से दोनों देशों के सदियों पुराने सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को प्रदर्शित किया गया। 6 से 8 जुलाई तक रहेगा दौरा प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। प्रधानमंत्री ने कहा कि 2018 में उनकी पहली इंडोनेशिया यात्रा के दौरान दोनों देशों ने संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंचाया था और अब उसी साझेदारी को आगे बढ़ाने का यह महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि यह यात्रा जनवरी 2025 में भारत के गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति प्रबोवो की भारत यात्रा के बाद दोनों नेताओं की पहली द्विपक्षीय मुलाकात है।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Prime Minister Narendra Modi departs for Australia to attend the India-Australia Annual Leaders' Summit and address the Indian community in Melbourne.
पीएम मोदी 8-10 जुलाई को ऑस्ट्रेलिया दौरे पर, रक्षा से ग्रीन एनर्जी तक कई अहम समझौतों की उम्मीद

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 8 से 10 जुलाई 2026 तक ऑस्ट्रेलिया के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वह मेलबर्न में आयोजित भारत-ऑस्ट्रेलिया वार्षिक नेताओं के शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे और भारतीय समुदाय को संबोधित करेंगे। ऑस्ट्रेलिया के भारत स्थित हाई कमिश्नर फिलिप ग्रीन ने कहा कि यह दौरा दोनों देशों के रणनीतिक, आर्थिक और रक्षा संबंधों को नई मजबूती देगा। तीसरी बार ऑस्ट्रेलिया जाएंगे पीएम मोदी एएनआई के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी अपने दौरे के दौरान मेलबर्न में भारतीय समुदाय के विशेष कार्यक्रम 'मेलबर्न मीट्स मोदी' में भी शामिल होंगे। फिलिप ग्रीन ने बताया कि प्रधानमंत्री के रूप में यह उनका तीसरा ऑस्ट्रेलिया दौरा होगा। चार प्रमुख क्षेत्रों पर रहेगा फोकस फिलिप ग्रीन ने बताया कि भारत और ऑस्ट्रेलिया ने सहयोग बढ़ाने के लिए चार प्रमुख क्षेत्रों की पहचान की है— शिक्षा कृषि एवं खाद्य क्षेत्र पर्यटन ग्रीन एनर्जी सप्लाई चेन उन्होंने कहा कि दोनों देश इन क्षेत्रों में निवेश, तकनीकी सहयोग और व्यापार को बढ़ाने के लिए नए रोडमैप पर काम कर रहे हैं। व्यापारिक संबंधों में तेज़ी हाई कमिश्नर के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में भारत के कुल वैश्विक निर्यात में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जबकि इसी अवधि में ऑस्ट्रेलिया को भारत का निर्यात करीब 200 प्रतिशत बढ़ा है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा क्षेत्र में पहले से मजबूत सहयोग है। कोयला, डीजल, एविएशन फ्यूल और एलएनजी जैसे ऊर्जा संसाधनों के व्यापार के अलावा अब स्वच्छ ऊर्जा और ग्रीन सप्लाई चेन पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। रक्षा सहयोग को मिलेगी नई दिशा फिलिप ग्रीन ने कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र भारत और ऑस्ट्रेलिया की रणनीतिक साझेदारी का सबसे महत्वपूर्ण केंद्र है। मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में दोनों देशों के बीच रक्षा और सुरक्षा सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का दौरा समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, क्षेत्रीय स्थिरता और रणनीतिक साझेदारी को नई गति देने का अवसर होगा। व्यापक साझेदारी को मिलेगा बढ़ावा ऑस्ट्रेलियाई हाई कमिश्नर ने विश्वास जताया कि यह दौरा केवल रक्षा और सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यापार, निवेश, शिक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और लोगों के बीच संपर्क को भी नई दिशा देगा। दोनों देशों के बीच व्यापक आर्थिक और रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Varun Beverages Ltd.
केन्या में कारोबार बढ़ाएगी वरुण बेवरेजेज, ₹305 करोड़ में किया बड़ा अधिग्रहण

नई दिल्ली, एजेंसियां। पेप्सिको की सबसे बड़ी फ्रेंचाइज़ी कंपनियों में शामिल वरुण बेवरेजेज लिमिटेड ने पूर्वी अफ्रीका में अपनी मौजूदगी मजबूत करने के लिए बड़ा कदम उठाया है। कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई VBL Industries (Kenya) Limited ने देवयानी फूड इंडस्ट्रीज़ (केन्या) के वैल्यू-ऐडेड डेयरी बेवरेज, जूस और पैकेज्ड ड्रिंकिंग वाटर कारोबार का 32 मिलियन डॉलर (करीब ₹305 करोड़) में अधिग्रहण करने का ऐलान किया है। यह सौदा 1 अगस्त 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है।   पूर्वी अफ्रीका में बढ़ेगी कंपनी की पकड़   कंपनी के अनुसार, इस अधिग्रहण से केन्या और पूरे पूर्वी अफ्रीकी क्षेत्र में उसकी उत्पादन क्षमता और वितरण नेटवर्क को मजबूती मिलेगी। अधिग्रहित कारोबार में 52 एकड़ में फैली आधुनिक विनिर्माण इकाई भी शामिल है, जहां डेयरी पेय, जूस और पैकेज्ड पानी का उत्पादन होता है।   कार्बोनेटेड ड्रिंक्स का भी होगा विस्तार   वरुण बेवरेजेज ने कहा कि इस अधिग्रहण के बाद कंपनी केन्या में अपने कार्बोनेटेड सॉफ्ट ड्रिंक पोर्टफोलियो का भी विस्तार करेगी। इससे अफ्रीकी बाजार में कंपनी की दीर्घकालिक विकास रणनीति को नई गति मिलने की उम्मीद है।

abhishek singh जुलाई 7, 2026 0
Japanese Prime Minister Sanae Takaichi arrives in New Delhi on a three-day official visit and is welcomed by Union Minister Jitendra Singh at Palam Technical Airport ahead of the India-Japan Annual Summit.
जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची तीन दिवसीय भारत दौरे पर पहुंचीं, पीएम मोदी के साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन में लेंगी हिस्सा

नई दिल्ली: Sanae Takaichi बुधवार को तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर भारत पहुंचीं। नई दिल्ली के पालम टेक्निकल एयरपोर्ट पर केंद्रीय मंत्री Jitendra Singh ने भारत सरकार की ओर से उनका स्वागत किया। केंद्रीय मंत्री ने इस अवसर की तस्वीरें साझा करते हुए कहा कि भारत सरकार की ओर से जापानी प्रधानमंत्री का स्वागत करना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने इस यात्रा को भारत-जापान रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया। 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में होंगी शामिल अपने तीन दिवसीय दौरे के दौरान प्रधानमंत्री तकाइची 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगी। इस दौरान उनकी प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। बैठक में दोनों नेता व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग जैसे प्रमुख विषयों पर चर्चा करेंगे। साथ ही दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए भविष्य की रूपरेखा पर भी विचार किया जाएगा। प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली भारत यात्रा भारत पहुंचने के बाद जापानी प्रधानमंत्री सनाए तकाइची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी खुशी व्यक्त की। उन्होंने लिखा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है और व्यक्तिगत रूप से भी वह पहली बार भारत आई हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ होने वाली बैठक में वैश्विक और द्विपक्षीय महत्व के कई मुद्दों पर व्यापक चर्चा होगी तथा दोनों देशों के सहयोग को नई दिशा देने पर जोर रहेगा। रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति भारत और जापान के बीच हाल के वर्षों में आर्थिक, रक्षा और प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, मुक्त एवं समावेशी समुद्री व्यवस्था और भरोसेमंद आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग के साथ-साथ दोनों देशों के दीर्घकालिक संबंधों को नई गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0