तमिलनाडु में नई सरकार के गठन के बीच मंगलवार को विधानसभा अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पद का चुनाव संपन्न हुआ। टीवीके विधायक जेसीडी प्रभाकर को सर्वसम्मति से तमिलनाडु विधानसभा का नया अध्यक्ष चुना गया, जबकि एम रविशंकर को उपाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी मिली। 13 मई को मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay को विधानसभा में बहुमत साबित करना है। उससे पहले सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने के लिए अध्यक्ष का चुनाव कराया गया। मुख्यमंत्री विजय ने रखा प्रभाकर के नाम का प्रस्ताव विधानसभा की बैठक के दौरान कार्यवाहक अध्यक्ष एमवी करुपैया ने बताया कि मुख्यमंत्री विजय की ओर से जेसीडी प्रभाकर के नाम का प्रस्ताव रखा गया था। अध्यक्ष पद के लिए केवल एक ही नामांकन दाखिल हुआ, जिसके चलते प्रभाकर को निर्विरोध और सर्वसम्मति से चुना गया। उदयनिधि स्टालिन और सेंगोत्तैयान ने दी बधाई सदन की परंपरा के अनुसार नेता सदन केए सेंगोत्तैयान और विपक्ष के नेता Udhayanidhi Stalin नव निर्वाचित अध्यक्ष प्रभाकर को उनकी कुर्सी तक लेकर गए। सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने मेज थपथपाकर उनका स्वागत किया। एम रविशंकर बने विधानसभा उपाध्यक्ष अध्यक्ष पद संभालने के बाद प्रभाकर ने उपाध्यक्ष पद के चुनाव की प्रक्रिया पूरी कराई। थुरैयूर से टीवीके विधायक एम रविशंकर उपाध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल करने वाले एकमात्र उम्मीदवार थे। उनका नामांकन सेंगोत्तैयान ने प्रस्तावित किया था। कोई अन्य उम्मीदवार नहीं होने के कारण रविशंकर भी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। नई सरकार के गठन के बाद अब सबकी नजर 13 मई को होने वाले विश्वास मत पर टिकी हुई है, जहां मुख्यमंत्री विजय अपनी सरकार का बहुमत साबित करेंगे।
तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अभिनेता से राजनेता बने C. Joseph Vijay ने अपनी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) के साथ विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है। उनकी जीत की चर्चा अब भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है। इसी बीच Anwar Ibrahim ने विजय को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने पर खास अंदाज में बधाई दी है। मलेशियाई प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में विजय को अपना “मित्र” बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की और तमिलनाडु-मलेशिया के ऐतिहासिक रिश्तों का जिक्र किया। “फिल्मों से बड़ी जिम्मेदारी अब जनता ने दी” अनवर इब्राहिम ने अपने संदेश में लिखा कि वर्षों तक लोगों ने विजय को फिल्मों में भ्रष्ट नेताओं और खलनायकों को हराते देखा, लेकिन अब तमिलनाडु की जनता ने उन्हें असल राजनीति में उससे भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। उन्होंने विजय के लोकप्रिय चुनावी नारे “ओरु विरल पुराची” यानी “एक उंगली क्रांति” का भी उल्लेख किया। इब्राहिम ने कहा कि यह आंदोलन अब इतिहास रचने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। तमिलनाडु और मलेशिया के रिश्तों का किया जिक्र मलेशियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु और मलेशिया के बीच पीढ़ियों पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के बीच सहयोग और मजबूत होगा। उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वह मुख्यमंत्री विजय के साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हैं। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मलेशिया में बड़ी संख्या में तमिल मूल के लोग रहते हैं और तमिल संस्कृति का वहां गहरा प्रभाव है। दुनिया भर से मिल रहीं बधाइयां विजय की जीत के बाद केवल मलेशिया ही नहीं बल्कि Sri Lanka और Pakistan समेत कई देशों के नेताओं और कलाकारों ने भी उन्हें बधाई दी है। श्रीलंका के कई नेताओं ने इसे दक्षिण भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव बताया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है। TVK ने तोड़ा दशकों पुराना राजनीतिक दबदबा तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया। सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत थी और कांग्रेस व वाम दलों ने विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। इस जीत को इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि TVK ने राज्य में वर्षों से मजबूत पकड़ रखने वाली Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) के प्रभाव को चुनौती दी है। चेन्नई में ली मुख्यमंत्री पद की शपथ विजय ने चेन्नई के Jawaharlal Nehru Indoor Stadium में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस मौके पर बड़ी संख्या में समर्थक और कई राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में नई पीढ़ी और नए नेतृत्व के उभार का संकेत है।
Tamil Nadu Govt Formation : तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. एएमएमके (AMMK) ने विजय की पार्टी टीवीके (TVK) के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है. आरोप है कि टीवीके ने फर्जी समर्थन पत्र का इस्तेमाल कर यह दिखाने की कोशिश की कि एएमएमके उनकी सरकार को समर्थन दे रही है. इस विवाद ने राज्य की राजनीति को और गर्मा दिया है. पूरा मामला एएमएमके के इकलौते विधायक कामराज एस के समर्थन को लेकर खड़ा हुआ है. एएमएमके प्रमुख टीटीवी दिनाकरन ने आरोप लगाया कि टीवीके ने विधायक कामराज के समर्थन पत्र की “फर्जी कॉपी” राज्यपाल को सौंपी है. उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई और पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की चेतावनी दी थी. अब इस मामले में औपचारिक शिकायत भी दर्ज करा दी गई है. TVK ने वीडियो जारी कर दिया जवाब विवाद बढ़ने के बाद टीवीके ने 8 मई की शाम एक वीडियो जारी किया. इस वीडियो में कथित तौर पर विधायक कामराज खुद टीवीके के समर्थन में चिट्ठी लिखते दिखाई दे रहे हैं. वीडियो में वह यह कहते भी नजर आते हैं कि उन्होंने एएमएमके नेतृत्व की जानकारी और मंजूरी के साथ टीवीके को समर्थन दिया है. टीवीके नेताओं ने इस वीडियो को सोशल मीडिया पर तेजी से शेयर करते हुए दावा किया कि दिनाकरन के आरोप पूरी तरह निराधार हैं. पार्टी का कहना है कि समर्थन पत्र पूरी तरह वैध है और इसे लेकर फैलाए जा रहे आरोप राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं. सरकार बनाने के लिए राज्यपाल से मिले विजय तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी टीवीके के अध्यक्ष चंद्रशेखर जोसफ विजय ने वामपंथी दलों के समर्थन के बाद राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की. विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करते हुए राज्यपाल से सरकार गठन का न्योता देने की मांग की. बताया जा रहा है कि यह राज्यपाल के साथ विजय की तीसरी मुलाकात थी. हालांकि बहुमत के आंकड़े को लेकर अब भी सस्पेंस बना हुआ है और हर विधायक का समर्थन बेहद अहम माना जा रहा है. समर्थन पत्र विवाद से बढ़ा राजनीतिक संकट समर्थन पत्र को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब कानूनी और संवैधानिक मुद्दा बनता जा रहा है. एक ओर एएमएमके टीवीके पर फर्जीवाड़े का आरोप लगा रही है, वहीं टीवीके वीडियो जारी कर खुद को सही साबित करने में जुटी है. अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि पुलिस जांच में क्या सच सामने आता है और राज्यपाल किस दल को सरकार बनाने का मौका देते हैं. आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति में यह मामला और बड़ा रूप ले सकता है.
तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी सस्पेंस के बीच राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. सूत्रों के मुताबिक, एआईएडीएमके (AIADMK) भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले एनडीए (NDA) गठबंधन से अलग होने पर विचार कर रही है. चर्चा है कि पार्टी प्रमुख एडप्पाडी के. पलानीस्वामी (EPS) अभिनेता-विजय की पार्टी टीवीके (TVK) को समर्थन देकर नई सरकार बनाने का रास्ता खोल सकते हैं. पुडुचेरी रिसॉर्ट में हुई अहम बैठक AIADMK महासचिव एडप्पाडी के. पलानीस्वामी ने 7 मई को पुडुचेरी के बाहरी इलाके अरियानकुप्पम स्थित एक निजी रिसॉर्ट में पार्टी के नवनिर्वाचित विधायकों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की. इस बैठक में करीब 40 विधायक शामिल हुए. बैठक लगभग एक घंटे तक चली, जिसमें मौजूदा राजनीतिक हालात और सरकार गठन के विकल्पों पर चर्चा हुई. सूत्रों के अनुसार, पलानीस्वामी ने विधायकों से एकजुट रहने और धैर्य बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि आने वाले कुछ दिनों में “अच्छी खबर” मिल सकती है, इसलिए सभी विधायक साथ बने रहें. TVK को सत्ता से दूर रखना मुश्किल? तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) विधानसभा चुनाव में 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. हालांकि बहुमत के लिए जरूरी 118 सीटों के आंकड़े से पार्टी अभी पीछे है. कांग्रेस के 5 विधायकों का समर्थन मिलने के बाद भी TVK की संख्या 112 तक ही पहुंचती है. ऐसे में AIADMK का समर्थन विजय के लिए सत्ता का रास्ता आसान बना सकता है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि अगर AIADMK समर्थन देती है, तो तमिलनाडु में नई राजनीतिक धुरी बन सकती है. किस पार्टी को कितनी सीटें? 234 सदस्यीय तमिलनाडु विधानसभा में सीटों का गणित इस प्रकार है: TVK – 108 सीट DMK – 59 सीट AIADMK – 47 सीट कांग्रेस – 5 सीट PMK – 4 सीट IUML – 2 सीट CPI – 2 सीट CPM – 2 सीट VCK – 2 सीट BJP, DMDK और AMMK – 1-1 सीट विजय को अपनी जीती हुई दो सीटों में से एक सीट छोड़नी होगी, जिससे TVK की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी. माकपा भी करेगी फैसला इधर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) ने भी शुक्रवार को बैठक बुलाई है. पार्टी यह तय करेगी कि वह TVK को समर्थन देगी या नहीं. TVK ने सभी धर्मनिरपेक्ष दलों से नई सरकार के समर्थन की अपील की है. तमिलनाडु में बढ़ा सियासी रोमांच तमिलनाडु में अब राजनीतिक समीकरण तेजी से बदलते नजर आ रहे हैं. अगर AIADMK NDA से अलग होकर TVK का साथ देती है, तो राज्य की राजनीति में यह सबसे बड़ा राजनीतिक उलटफेर माना जाएगा. वहीं DMK भी लगातार बैकचैनल बातचीत में जुटी हुई है, ताकि सत्ता समीकरण अपने पक्ष में बनाए जा सकें.
Tamil Nadu में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक गतिरोध के बीच Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) को लेकर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) या All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ती है, तो TVK अपने सभी 107 विधायकों से सामूहिक इस्तीफा दिलाने पर विचार कर सकती है. TVK के भीतर बढ़ रही नाराजगी सूत्रों के अनुसार, यह संकेत पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी और राजनीतिक बेचैनी को दर्शाता है. TVK नेताओं का मानना है कि चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनने के बावजूद उन्हें सत्ता से दूर रखने की कोशिश की जा रही है. हालांकि अभी तक पार्टी प्रमुख Vijay की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा चल रही है. सरकार गठन पर क्यों फंसा मामला? 23 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव में: TVK को 108 सीटें मिलीं DMK ने 59 सीटें जीतीं AIADMK के खाते में 47 सीटें आईं चूंकि विजय दो सीटों से जीते हैं, इसलिए नियम के तहत उन्हें एक सीट छोड़नी होगी. इसके बाद TVK की प्रभावी संख्या 107 रह जाएगी. Indian National Congress के 5 विधायकों के समर्थन के बाद भी TVK का आंकड़ा 112 तक ही पहुंचता है, जबकि 234 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत है. DMK-AIADMK बैकचैनल बातचीत की चर्चा राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी तेज है कि DMK और AIADMK के बीच बैकचैनल बातचीत चल रही है, ताकि TVK को सत्ता से दूर रखा जा सके. हालांकि दोनों दलों ने किसी औपचारिक गठबंधन की घोषणा नहीं की है. TVK नेताओं का दावा है कि जनता ने बदलाव के पक्ष में वोट दिया है और सबसे बड़ी पार्टी को नजरअंदाज करना जनादेश का अपमान होगा. इस्तीफे की रणनीति से क्या होगा? अगर TVK के विधायक सामूहिक इस्तीफा देते हैं, तो: राज्य में संवैधानिक संकट पैदा हो सकता है कई सीटों पर उपचुनाव की नौबत आ सकती है सरकार गठन की प्रक्रिया और जटिल हो जाएगी राजनीतिक अस्थिरता बढ़ सकती है विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दबाव की राजनीति का हिस्सा भी हो सकता है, ताकि अन्य दल TVK के साथ बातचीत के लिए मजबूर हों. तमिलनाडु में अब सबकी नजर राज्यपाल की अगली चाल और राजनीतिक दलों के बीच जारी बातचीत पर टिकी हुई है.
Tamil Nadu Government Formation: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर जारी राजनीतिक सस्पेंस के बीच अब राज्य की राजनीति में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स की एंट्री हो गयी है. बहुमत के आंकड़े और संभावित टूट-फूट की आशंका के बीच AIADMK ने अपने 15 से अधिक विधायकों को पुदुचेरी के एक रिजॉर्ट में शिफ्ट कर दिया है. राज्य में TVK, DMK और AIADMK के बीच राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर तेज हो गया है. पुदुचेरी के रिजॉर्ट में AIADMK विधायकों की शिफ्टिंग सूत्रों के मुताबिक, AIADMK ने अपने विधायकों को सुरक्षित रखने के लिए पुदुचेरी के मशहूर ‘द शोर त्रिश्वम’ रिजॉर्ट में ठहराने का फैसला किया है. बताया जा रहा है कि पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सीवी शन्मुगम ने यहां 20 से ज्यादा कमरे बुक कराए हैं. कई विधायक रिजॉर्ट पहुंच चुके हैं, जबकि अन्य के भी पहुंचने की खबर है. पार्टी को आशंका है कि सरकार गठन की प्रक्रिया के दौरान विपक्षी दल उनके विधायकों को तोड़ने की कोशिश कर सकते हैं. इसी वजह से AIADMK फिलहाल अपने विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति पर काम कर रही है. AIADMK के कुछ विधायक TVK के समर्थन में राजनीतिक सूत्रों के अनुसार, AIADMK के भीतर भी मतभेद की स्थिति बनी हुई है. पार्टी के कुछ विधायक अभिनेता विजय की पार्टी TVK को समर्थन देने के पक्ष में बताए जा रहे हैं. तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में TVK 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन सरकार बनाने के लिए जरूरी 118 सीटों के बहुमत से अभी भी पीछे है. DMK और AIADMK के बीच बैकचैनल बातचीत तमिलनाडु की राजनीति में एक और बड़ा मोड़ तब आया जब DMK और AIADMK के बीच बैकचैनल बातचीत की खबरें सामने आयीं. दोनों दल लंबे समय से एक-दूसरे के कट्टर राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में सत्ता समीकरण बदलते नजर आ रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक, AIADMK नेताओं ने बातचीत की पुष्टि की है, हालांकि किसी औपचारिक गठबंधन पर अभी फैसला नहीं हुआ है. विधानसभा में DMK के पास 59 सीटें हैं, जबकि AIADMK के खाते में 47 सीटें हैं. ऐसे में दोनों दलों का साथ आना तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है. विजय ने राज्यपाल से की मुलाकात इससे पहले TVK प्रमुख विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश करने के लिए राज्यपाल राजेंद्र अर्लेकर से मुलाकात की थी. हालांकि राज्यपाल ने उनसे 118 विधायकों के समर्थन का प्रमाण पेश करने को कहा है. सूत्रों के अनुसार, फिलहाल विजय को 112 विधायकों का समर्थन हासिल है, जिसमें कांग्रेस के 5 विधायक भी शामिल हैं. इसके बावजूद बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने के लिए उन्हें अभी और समर्थन की जरूरत है. बताया जा रहा है कि कांग्रेस के साथ समझौता होने के बाद TVK ने फिलहाल AIADMK के साथ बातचीत रोक दी है, लेकिन अन्य छोटे दलों और निर्दलीय विधायकों से संपर्क जारी है. तमिलनाडु में बढ़ी राजनीतिक हलचल सरकार गठन को लेकर तमिलनाडु में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती जा रही हैं. बहुमत के आंकड़े, संभावित गठबंधन और विधायकों की नाराजगी के बीच राज्य की राजनीति बेहद दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गयी है. आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि तमिलनाडु में अगली सरकार किस दल या गठबंधन की बनेगी.
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।