तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अभिनेता से राजनेता बने C. Joseph Vijay ने अपनी पार्टी Tamilaga Vettri Kazhagam (TVK) के साथ विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करते हुए राज्य की राजनीति में नया अध्याय लिख दिया है। उनकी जीत की चर्चा अब भारत ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हो रही है।
इसी बीच Anwar Ibrahim ने विजय को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री बनने पर खास अंदाज में बधाई दी है। मलेशियाई प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट में विजय को अपना “मित्र” बताते हुए उनके नेतृत्व की सराहना की और तमिलनाडु-मलेशिया के ऐतिहासिक रिश्तों का जिक्र किया।
अनवर इब्राहिम ने अपने संदेश में लिखा कि वर्षों तक लोगों ने विजय को फिल्मों में भ्रष्ट नेताओं और खलनायकों को हराते देखा, लेकिन अब तमिलनाडु की जनता ने उन्हें असल राजनीति में उससे भी बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।
उन्होंने विजय के लोकप्रिय चुनावी नारे “ओरु विरल पुराची” यानी “एक उंगली क्रांति” का भी उल्लेख किया। इब्राहिम ने कहा कि यह आंदोलन अब इतिहास रचने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मलेशियाई प्रधानमंत्री ने कहा कि तमिलनाडु और मलेशिया के बीच पीढ़ियों पुराने सांस्कृतिक और सामाजिक संबंध रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में दोनों पक्षों के बीच सहयोग और मजबूत होगा।
उन्होंने अपने संदेश में कहा कि वह मुख्यमंत्री विजय के साथ मिलकर काम करने को लेकर उत्साहित हैं। यह बयान इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि मलेशिया में बड़ी संख्या में तमिल मूल के लोग रहते हैं और तमिल संस्कृति का वहां गहरा प्रभाव है।
विजय की जीत के बाद केवल मलेशिया ही नहीं बल्कि Sri Lanka और Pakistan समेत कई देशों के नेताओं और कलाकारों ने भी उन्हें बधाई दी है। श्रीलंका के कई नेताओं ने इसे दक्षिण भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव बताया है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता ने पारंपरिक राजनीतिक समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।
तमिलनाडु की 234 सदस्यीय विधानसभा में TVK ने 108 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरकर सबको चौंका दिया। सरकार बनाने के लिए 118 सीटों की जरूरत थी और कांग्रेस व वाम दलों ने विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया।
इस जीत को इसलिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि TVK ने राज्य में वर्षों से मजबूत पकड़ रखने वाली Dravida Munnetra Kazhagam (DMK) और All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam (AIADMK) के प्रभाव को चुनौती दी है।
विजय ने चेन्नई के Jawaharlal Nehru Indoor Stadium में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। इस मौके पर बड़ी संख्या में समर्थक और कई राजनीतिक हस्तियां मौजूद रहीं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह जीत केवल सत्ता परिवर्तन नहीं बल्कि तमिलनाडु की राजनीति में नई पीढ़ी और नए नेतृत्व के उभार का संकेत है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। महिला पहलवानों के कथित यौन उत्पीड़न मामले में दिल्ली की Rouse Avenue Court में सुनवाई जारी है। भारतीय कुश्ती महासंघ के पूर्व अध्यक्ष Brij Bhushan Sharan Singh के खिलाफ चल रही जांच के तहत अदालत ने विशेष जांच दल (SIT) के एक सदस्य का बयान दर्ज किया है। मामले में आगे की सुनवाई के लिए अदालत ने 15 और 19 मई की तारीख तय की है, जब जांच अधिकारी का बयान दर्ज किया जाएगा। विनेश फोगाट के आरोपों पर बृजभूषण का जवाब कांग्रेस नेता और पहलवान Vinesh Phogat द्वारा लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि वह “उस गंदगी को साफ कर रहे हैं, जिसे विनेश फोगाट पीछे छोड़ गई हैं।” बृजभूषण ने यह भी स्पष्ट किया कि कुश्ती प्रतियोगिताओं के आयोजन और खिलाड़ियों की भागीदारी तय करना अब उनका विषय नहीं है। उनके अनुसार, यह जिम्मेदारी अब Wrestling Federation of India की है, जो तय करती है कि मुकाबले कहां होंगे और कौन खिलाड़ी हिस्सा लेगा। महासंघ पर लगाया खिलाड़ियों के हित में काम करने का दावा पूर्व WFI अध्यक्ष ने कहा कि उनके अनुभव में महासंघ कभी भी खिलाड़ियों को बिना कारण प्रतियोगिता से नहीं रोकता। उन्होंने दावा किया कि यदि किसी खिलाड़ी को रोका गया होगा तो उसके पीछे कोई उचित कारण जरूर रहा होगा। यह मामला लंबे समय से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। अदालत द्वारा एसआईटी और जांच अधिकारियों के बयान दर्ज किए जाने को जांच प्रक्रिया का अहम हिस्सा माना जा रहा है। आने वाले दिनों में इस मामले में और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर बड़े बदलावों की शुरुआत हो गई है। राज्य की पहली कैबिनेट बैठक में कई अहम फैसलों पर मुहर लगी, जिनमें सबसे प्रमुख Ayushman Bharat योजना को राज्य में लागू करना रहा। इस फैसले पर प्रधानमंत्री Narendra Modi ने खुशी जताई और कहा कि पश्चिम बंगाल के लोगों का कल्याण उनकी सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अब राज्य के लोगों को दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना का लाभ मिलेगा, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। पीएम मोदी ने ‘डबल इंजन सरकार’ पर दिया जोर पीएम मोदी ने अपने संदेश में “डबल इंजन सरकार” का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय से विकास योजनाओं की डिलीवरी तेज और निर्बाध होगी। उन्होंने लिखा कि पश्चिम बंगाल के लोगों तक केंद्र सरकार की प्रमुख योजनाओं का लाभ बिना किसी रुकावट के पहुंचाया जाएगा। राजनीतिक विश्लेषक इसे केंद्र और राज्य सरकार के बीच नए तालमेल का संकेत मान रहे हैं। शुभेंदु अधिकारी सरकार के बड़े फैसले पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री Suvendu Adhikari की अध्यक्षता में हुई पहली कैबिनेट बैठक में कई अहम निर्णय लिए गए। इनमें आयुष्मान भारत योजना लागू करने के अलावा सीमा सुरक्षा बल को बॉर्डर फेंसिंग के लिए जमीन उपलब्ध कराने का फैसला भी शामिल है। सरकार ने सरकारी नौकरियों के लिए आयु सीमा में पांच साल की छूट देने की घोषणा की है। इसके साथ ही राज्य में Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) लागू करने को भी मंजूरी दी गई। केंद्र की योजनाओं का रास्ता साफ नई सरकार ने कई केंद्रीय योजनाओं के कार्यान्वयन में आ रही बाधाओं को हटाने का भी फैसला किया है। इनमें PM Vishwakarma Yojana, Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana और Pradhan Mantri Ujjwala Yojana जैसी योजनाएं शामिल हैं। सरकार का दावा है कि इन योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से किसानों, श्रमिकों, कारीगरों और गरीब परिवारों को सीधा लाभ मिलेगा। आयुष्मान भारत लागू होना क्यों अहम माना जा रहा? विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में आयुष्मान भारत योजना लागू होना बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक बदलाव है। पिछले कई वर्षों से राज्य में यह योजना पूरी तरह लागू नहीं हो पाई थी। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान इसे प्रमुख मुद्दा बनाया था और प्रधानमंत्री मोदी ने प्रचार के दौरान वादा किया था कि राज्य में भाजपा सरकार बनने के बाद पहली कैबिनेट बैठक में ही आयुष्मान भारत को मंजूरी दी जाएगी। अब सरकार इसे अपनी बड़ी उपलब्धि और “डबल इंजन मॉडल” की शुरुआत के रूप में पेश कर रही है।
फ्रांसीसी लड़ाकू विमान Dassault Mirage 2000 एक बार फिर वैश्विक सैन्य चर्चाओं के केंद्र में है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि संयुक्त अरब अमीरात ने ईरान के लावन द्वीप स्थित तेल रिफाइनरी पर मिराज-2000-9 फाइटर जेट से हमला किया। हालांकि इस कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है, लेकिन सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि मिराज-2000 की सटीक हमला क्षमता और गहरी घुसपैठ की ताकत ने इसे दुनिया के सबसे भरोसेमंद मल्टीरोल फाइटर जेट्स में शामिल कर दिया है। ईरान हमले की रिपोर्ट से बढ़ी चर्चा रिपोर्ट्स के मुताबिक अप्रैल में हुए संघर्ष के दौरान UAE के मिराज-2000-9 विमानों ने ईरान के लावन द्वीप पर स्थित ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाया। इसके कुछ घंटों बाद ईरान समर्थित जवाबी मिसाइल और ड्रोन हमलों की खबरें भी सामने आईं। विशेषज्ञों का मानना है कि मिराज-2000-9, मूल मिराज-2000 का सबसे उन्नत एक्सपोर्ट संस्करण है, जिसे खास तौर पर United Arab Emirates के लिए विकसित किया गया था। इसमें आधुनिक एवियोनिक्स, सटीक टारगेटिंग सिस्टम, लंबी दूरी की स्ट्राइक क्षमता और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम शामिल हैं। क्यों इतना खतरनाक माना जाता है मिराज-2000 Dassault Aviation द्वारा विकसित यह चौथी पीढ़ी का मल्टीरोल लड़ाकू विमान कई भूमिकाओं में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह हवाई वर्चस्व, गहरे हमले, टोही मिशन और परमाणु हथियार ले जाने जैसी क्षमताओं के लिए जाना जाता है। मिराज-2000 की सबसे बड़ी ताकत उसकी सटीकता और विश्वसनीयता मानी जाती है। यही वजह है कि कई देशों की वायुसेनाओं ने दशकों तक इस पर भरोसा बनाए रखा है। भारत की परमाणु रणनीति में अहम भूमिका भारतीय वायुसेना के लिए Indian Air Force का मिराज-2000 बेड़ा लंबे समय तक रणनीतिक ताकत का अहम हिस्सा रहा है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक भारत ने अपने परमाणु ट्रायड के वायु-आधारित हिस्से में मिराज-2000 विमानों को विशेष भूमिका दी थी। ग्वालियर के महाराजपुर एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात मिराज-2000 विमानों को परमाणु हथियार ले जाने और जवाबी हमले की क्षमता से लैस किया गया था। भारत की “नो फर्स्ट यूज” नीति के तहत यदि देश पर परमाणु हमला होता है, तो यह विमान जवाबी कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सक्षम माने जाते हैं। कारगिल युद्ध में साबित की ताकत 1999 के Kargil War के दौरान मिराज-2000 ने भारतीय सेना को बड़ी रणनीतिक बढ़त दिलाई थी। पहाड़ी इलाकों में सटीक बमबारी और दुश्मन के ठिकानों को तबाह करने में इसकी भूमिका बेहद अहम रही थी। उसी दौर में भारत ने इन विमानों को परमाणु हमले की क्षमता से लैस करने की प्रक्रिया को भी अंतिम रूप दिया था। अब राफेल संभाल रहा बड़ी जिम्मेदारी हालांकि समय के साथ मिराज-2000 बेड़ा पुराना हो रहा है। अब Dassault Rafale जैसे आधुनिक लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना की नई रणनीतिक ताकत बन रहे हैं। माना जाता है कि भविष्य में वायु-आधारित परमाणु हमले की प्राथमिक जिम्मेदारी धीरे-धीरे राफेल बेड़े को सौंपी जा रही है। यूक्रेन भी हुआ मिराज का फैन रूस-यूक्रेन युद्ध में भी मिराज-2000 की क्षमताओं की खूब चर्चा हो रही है। Ukraine को फ्रांस से मिले मिराज-2000-5 विमानों ने रूसी क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को रोकने में अहम भूमिका निभाई है। सैन्य रिपोर्टों के मुताबिक इन विमानों ने Kh-101 क्रूज मिसाइलों और शाहेद ड्रोन जैसे खतरनाक लक्ष्यों को रोकने में बेहद प्रभावी प्रदर्शन किया है। आधुनिक पश्चिमी हथियारों के साथ इसकी अनुकूलता और तेज इंटरसेप्शन क्षमता इसे आज भी बेहद खतरनाक लड़ाकू विमान बनाती है।