मॉस्को, एजेंसियां। रूस पर यूक्रेन के बड़े पैमाने पर किए गए ड्रोन हमलों में सात लोगों की मौत हो गई, जबकि 50 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हमलों के दौरान मॉस्को क्षेत्र के नोगिंस्क स्थित एक ऑयल डिपो में भी भीषण आग लग गई। रूसी अधिकारियों ने बताया कि कई ड्रोन हमलों को हवा में ही मार गिराया गया, लेकिन कुछ ने अपने लक्ष्य को निशाना बनाया, जिससे व्यापक नुकसान हुआ। वेयरहाउस पर हमला सबसे घातक साबित हुआ रूसी अधिकारियों के अनुसार, सबसे बड़ा नुकसान ताम्बोव क्षेत्र के कोतोव्स्क में स्थित Wildberries के लॉजिस्टिक्स वेयरहाउस पर हुए ड्रोन हमले में हुआ, जहां सात कर्मचारियों की मौत हो गई और 25 से अधिक लोग घायल हुए। मॉस्को क्षेत्र के इलेक्ट्रोस्टाल स्थित एक अन्य वेयरहाउस में भी ड्रोन हमले से कई लोग घायल हुए। ऑयल डिपो में लगी आग, अस्पताल खाली कराया गया मॉस्को के पास नोगिंस्क में ड्रोन हमले के बाद एक ऑयल डिपो में आग लग गई। आग की लपटें तेजी से फैलने के कारण आसपास के इलाके को खाली कराया गया और एहतियातन पास के एक मातृत्व अस्पताल से मरीजों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया गया। दमकल की कई टीमें घंटों तक आग बुझाने में जुटी रहीं। यूक्रेन ने बताया सैन्य लक्ष्य यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने कहा कि हमलों का लक्ष्य रूस की उन लॉजिस्टिक्स सुविधाओं और गोदामों को बनाना था, जहां ड्रोन निर्माण और नेविगेशन सिस्टम के लिए प्रतिबंधित विदेशी उपकरणों की आपूर्ति की जाती है। यूक्रेन का दावा है कि यह कार्रवाई रूस की सैन्य क्षमता को कमजोर करने के उद्देश्य से की गई। रूस ने बढ़ाई सुरक्षा, तनाव और गहराया हमलों के बाद रूस ने मॉस्को और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। कई हवाई अड्डों पर उड़ानों को अस्थायी रूप से प्रभावित किया गया, जबकि वायु रक्षा प्रणाली को हाई अलर्ट पर रखा गया है। लगातार बढ़ रहे ड्रोन हमलों के बीच रूस-यूक्रेन युद्ध के और तेज होने की आशंका जताई जा रही है।
कीव, एजेंसियां। यूक्रेन के रक्षा मंत्री मिखाइलो फेडोरोव को पद से हटाए जाने के फैसले के विरोध में राजधानी कीव में लगातार दूसरे दिन भी हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के फैसले का विरोध करते हुए फेडोरोव को दोबारा पद पर बहाल करने की मांग की। उनका कहना है कि युद्ध के दौरान रक्षा मंत्रालय में अचानक नेतृत्व परिवर्तन से सेना के मनोबल और युद्ध रणनीति पर असर पड़ सकता है। रक्षा सुधारों के कारण बने थे लोकप्रिय मिखाइलो फेडोरोव को यूक्रेन की सेना में तकनीकी आधुनिकीकरण, ड्रोन युद्ध क्षमता बढ़ाने, सैन्य खरीद प्रणाली में पारदर्शिता लाने और रक्षा क्षेत्र में सुधारों के लिए जाना जाता है। उनकी बर्खास्तगी के बाद बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक, सैनिकों के परिजन और नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं। सरकार के फैसले पर उठ रहे सवाल प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि सरकार ने इतना बड़ा फैसला बिना पर्याप्त कारण बताए लिया है। वहीं राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की का कहना है कि रक्षा मंत्रालय और सेना के शीर्ष नेतृत्व के बीच लंबे समय से मतभेद चल रहे थे, जिसके चलते यह फैसला लेना पड़ा। अंतरिम रक्षा मंत्री की नियुक्ति फेडोरोव की बर्खास्तगी के बाद यूक्रेन सरकार ने येवहेनी खमारा को कार्यवाहक रक्षा मंत्री नियुक्त किया है। हालांकि उनके नाम पर संसद की औपचारिक मंजूरी अभी बाकी है।
कीव, एजेंसियां। यूक्रेन की राजधानी कीव में रक्षा मंत्री को पद से हटाए जाने के फैसले के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे ऐसे समय का गलत कदम बताया, जब देश रूस के साथ जारी युद्ध का सामना कर रहा है। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया। सरकार के फैसले पर उठे सवाल प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि युद्ध के दौरान रक्षा मंत्रालय में बड़े बदलाव सेना के मनोबल और सैन्य रणनीति पर असर डाल सकते हैं। विपक्षी नेताओं ने भी सरकार से इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट करने की मांग की है। उनका आरोप है कि सरकार ने इतना बड़ा फैसला बिना पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी दिए लिया। कीव की सड़कों पर उमड़ी भीड़ राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में लोगों ने रैलियां निकालीं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। पुलिस की भारी तैनाती के बीच प्रदर्शन अधिकांश स्थानों पर शांतिपूर्ण रहा, हालांकि कुछ जगह प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हल्की झड़प की भी खबरें सामने आईं। ज़ेलेंस्की सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव रक्षा मंत्री की बर्खास्तगी को लेकर देश के राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि सरकार को अब इस फैसले को लेकर संसद और जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना होगा। वहीं, विपक्ष इसे सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने का बड़ा मुद्दा बना रहा है। युद्ध के बीच फैसले पर दुनिया की नजर रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हुए इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन का असर यूक्रेन की सैन्य रणनीति और पश्चिमी देशों के साथ रक्षा सहयोग पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की अगली रणनीति और नए रक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।
कीव: तुर्की में मंगलवार से शुरू होने वाले NATO शिखर सम्मेलन से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला किया। सोमवार तड़के हुए इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि कई इलाकों में आग लगने और भारी नुकसान की खबर है। यह एक सप्ताह से भी कम समय में कीव पर दूसरा बड़ा हमला है। ऐसे समय में यह हमला हुआ है जब NATO समिट में रूस-यूक्रेन युद्ध सबसे प्रमुख मुद्दा रहने की उम्मीद है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसमें शामिल होने वाले हैं। बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से किया गया हमला यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने राजधानी कीव पर एक साथ बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन दागे। तड़के सुबह शहर में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जबकि हमले से कुछ देर पहले पूरे शहर में एयर रेड सायरन बजने लगे थे। कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शहर के कम से कम दो जिलों में मिसाइलों के मलबे गिरने और आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। जेलेंस्की ने पहले ही दी थी चेतावनी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक दिन पहले ही बड़े रूसी हमले की आशंका जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि रूस एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस NATO शिखर सम्मेलन से पहले अधिक से अधिक तबाही मचाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक यह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीति का हिस्सा है। पिछले सप्ताह भी हुआ था घातक हमला यह हमला पिछले गुरुवार को कीव पर हुए बड़े रूसी हमले के कुछ ही दिनों बाद हुआ है। उस हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई थी और इसे युद्ध शुरू होने के बाद राजधानी पर सबसे घातक हमलों में से एक माना गया था। लगातार हो रहे हमलों ने राजधानी की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। NATO समिट में युद्ध रहेगा मुख्य मुद्दा तुर्की में मंगलवार से शुरू हो रहे NATO शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध प्रमुख एजेंडा रहेगा। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता यूक्रेन को सैन्य सहायता, यूरोप की सुरक्षा और रूस पर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस बीच रूस पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर रहा है। वहीं यूक्रेन भी रूस के भीतर तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले बढ़ा रहा है। ट्रंप-पुतिन की हालिया बातचीत भी चर्चा में NATO समिट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 4 जुलाई को लगभग 90 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी। हालांकि, ताजा रूसी हमले के बाद युद्ध को लेकर तनाव और बढ़ गया है तथा NATO देशों की आगे की रणनीति पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।
मॉस्को/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने एक बार फिर रूस की राजधानी मॉस्को को निशाना बनाते हुए बड़ा ड्रोन हमला किया है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार हुए इस हमले में मॉस्को की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। हमले के बाद राजधानी के कई हिस्सों में आग और धुएं के गुबार देखे गए, जबकि सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। चार वर्षों से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इसे यूक्रेन के सबसे बड़े ड्रोन अभियानों में से एक माना जा रहा है। रूस का दावा- 555 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने रातभर में यूक्रेन की ओर से भेजे गए 555 ड्रोन को नष्ट कर दिया। मंत्रालय के अनुसार: लगभग 200 ड्रोन मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे। अधिकांश ड्रोन को राजधानी तक पहुंचने से पहले ही मार गिराया गया। हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के सैन्य और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ा दी है। मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर गिरे कई ड्रोन मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि शहर के दक्षिण-पूर्वी बाहरी इलाके में स्थित मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर कई ड्रोन गिरे। अधिकारियों ने तत्काल किसी बड़े नुकसान या हताहत की पुष्टि नहीं की है, लेकिन घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। यह रिफाइनरी रूस की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए इसे रणनीतिक दृष्टि से भी बड़ा हमला माना जा रहा है। चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित रूसी परिवहन मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों से उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। हमले के कारण: कई उड़ानें रद्द हुईं। बड़ी संख्या में उड़ानों में देरी हुई। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। हाल के महीनों में रूस में ड्रोन हमलों के बाद हवाई यातायात प्रभावित होने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। जेलेंस्की बोले- रूस के हमलों का यह जायज जवाब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेन के लंबी दूरी के हमलों ने एक बार फिर मॉस्को क्षेत्र और रूस के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। जेलेंस्की ने कहा, “यह हमारे शहरों और समुदायों पर रूस के हमलों का पूरी तरह से जायज जवाब है। यह रूस की युद्ध मशीन को चलाने वाले ठिकानों के खिलाफ हमारी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण परिणाम है।” उन्होंने यह भी बताया कि: मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर इस सप्ताह दूसरी बार हमला किया गया। रोस्तोव ओब्लास्ट और यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले इलाकों में भी ठिकानों को निशाना बनाया गया। ट्रंप और मैक्रों से बातचीत के बाद यूक्रेन का बड़ा कदम यह हमला ऐसे समय हुआ है जब राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें और वार्ता की हैं। जेलेंस्की ने कहा कि: बातचीत यूक्रेन के लिए बेहद अहम रही। युद्ध की दिशा में बड़े बदलाव की उम्मीद है। जी-7 देशों ने यूक्रेन को भविष्य में भी हरसंभव समर्थन देने का भरोसा दिया है। जी-7 देशों ने दोहराया समर्थन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि हाल के दिन यूक्रेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं क्योंकि जी-7 देश एक बार फिर उसके समर्थन में एकजुट दिखाई दिए हैं। उन्होंने कहा कि सहयोगी देश: यूक्रेन को सैन्य सहायता देना जारी रखेंगे। उसकी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेंगे। रूस के खिलाफ प्रभावी जवाबी कार्रवाई के लिए रणनीतिक सहयोग बढ़ाएंगे। आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं पुतिन इसी बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को से लगभग 700 किलोमीटर दूर स्थित कजान में आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं। रूस इस मंच के माध्यम से एशियाई देशों के साथ: व्यापार, निवेश, और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। चार साल से अधिक समय से जारी है युद्ध रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को चार वर्ष से अधिक समय हो चुका है। संघर्ष अब केवल सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं। एक ओर यूक्रेन रूस के भीतर गहराई तक हमले करने की क्षमता बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस अपनी वायु रक्षा और सैन्य प्रतिक्रिया को और मजबूत करने में जुटा हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संघर्ष और तेज होने की आशंका बढ़ती जा रही है।
रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने दावा किया है कि रूस ने राजधानी कीव पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया, जिसमें हाइपरसोनिक “ओरेश्निक” बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन के मुताबिक, इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है, जबकि कई सरकारी इमारतें, रिहायशी इलाके और स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं। तीसरी बार इस्तेमाल हुई ओरेश्निक मिसाइल जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने कीव क्षेत्र के बिला त्सेरक्वा इलाके को निशाना बनाने के लिए ओरेश्निक मिसाइल दागी। यूक्रेन का दावा है कि यह चार साल से जारी युद्ध में तीसरी बार है जब रूस ने इस अत्याधुनिक हथियार का इस्तेमाल किया है। रूस इससे पहले नवंबर 2024 में निप्रो और जनवरी 2026 में लवीव क्षेत्र में भी ओरेश्निक मिसाइल इस्तेमाल कर चुका है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin पहले दावा कर चुके हैं कि ओरेश्निक मिसाइल मैक-10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज रफ्तार से हमला कर सकती है और गहरे भूमिगत बंकरों को भी तबाह करने में सक्षम है। रूस ने 600 ड्रोन और 90 मिसाइल दागने का दावा यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने संयुक्त हमले में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन ने दावा किया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने 549 ड्रोन और 55 मिसाइलों को नष्ट या इंटरसेप्ट कर दिया। कई मिसाइलें राजधानी कीव और आसपास के इलाकों तक पहुंच गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ। स्कूल और रिहायशी इलाके बने निशाना कीव सैन्य प्रशासन प्रमुख Tymur Tkachenko के अनुसार, राजधानी के कम से कम नौ जिलों में हमलों से नुकसान हुआ है। वहीं कीव के मेयर Vitali Klitschko ने कहा कि शेवचेंको जिले में एक स्कूल भी हमले की चपेट में आया, जहां लोग शरण लिए हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूरी रात सायरन बजते रहे और शहर के कई हिस्सों में विस्फोटों के बाद धुआं उठता दिखाई दिया। रूस ने हमले की पुष्टि की रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने यूक्रेन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया। मंत्रालय के मुताबिक, यह कार्रवाई रूस के अंदर यूक्रेनी हमलों के जवाब में की गई। क्या है ओरेश्निक मिसाइल? ओरेश्निक रूस की नई पीढ़ी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है। रूसी भाषा में “ओरेश्निक” का मतलब “हेज़लनट का पेड़” होता है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद तेज गति और गहरे भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता मानी जाती है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी तेज रफ्तार वाली मिसाइलों को मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम से रोकना बेहद मुश्किल होता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।