इंग्लिश चैनल में जलती प्रवासी नाव से 157 लोगों का रेस्क्यू, फ्रांस-ब्रिटेन की संयुक्त कार्रवाई पेरिस, एजेंसियां। इंग्लिश चैनल में एक प्रवासी नाव का इंजन आग की चपेट में आने के बाद बड़ा बचाव अभियान चलाया गया। फ्रांस और ब्रिटेन के बचाव दलों ने संयुक्त कार्रवाई करते हुए 157 प्रवासियों को सुरक्षित निकाल लिया। घटना फ्रांस के सर्च एंड रेस्क्यू क्षेत्र में ब्रिटिश जलक्षेत्र के करीब हुई। सभी बचाए गए लोगों को फ्रांस के बोलोन-सुर-मेर ले जाया गया, जहां उनकी चिकित्सकीय जांच की गई। इंजन में आग लगने के बाद बिगड़े हालात रिपोर्टों के अनुसार नाव फ्रांस के नॉरमैंडी तट से ब्रिटेन की ओर जा रही थी। इसी दौरान उसके इंजन में आग लग गई और नाव पर सवार लोगों के सामने गंभीर खतरा पैदा हो गया। नाव पर कुल 173 प्रवासी सवार थे। घटना के दौरान नाव के क्षतिग्रस्त होने और पलटने का खतरा भी बढ़ गया। फ्रांस और ब्रिटेन ने चलाया संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन फ्रांस ने बचाव अभियान के लिए अपने रेस्क्यू जहाज और हेलीकॉप्टर तैनात किए, जबकि ब्रिटेन की ओर से भी बचाव दल और लाइफबोट अभियान में शामिल हुए। 157 लोगों को बचाया गया, जिनमें 103 को फ्रांसीसी और 54 को ब्रिटिश बचाव दलों ने सुरक्षित निकाला। इससे पहले पांच अन्य लोगों को भी नाव से निकालकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया था। सभी बचे लोगों को फ्रांस लाया गया बचाव के बाद सभी लोगों को बोलोन-सुर-मेर पहुंचाया गया, जहां उनकी मेडिकल जांच की गई। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक घटना में किसी की मौत नहीं हुई, हालांकि कुछ लोगों को मामूली चोटें आईं और कुछ को अस्पताल ले जाया गया। इंग्लिश चैनल के रास्ते ब्रिटेन पहुंचने की कोशिश करने वाली प्रवासी नौकाओं में अत्यधिक भीड़ और खराब परिस्थितियों के कारण हादसों का खतरा लगातार बना हुआ है। ताजा घटना ने एक बार फिर इस समुद्री मार्ग पर प्रवासियों की सुरक्षा और मानव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
ब्रिटेन में नई सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने आम लोगों और कारोबारियों को राहत देने वाले कई बड़े फैसलों का ऐलान किया है. सरकार ने देश की नाइट लाइफ, हाई स्ट्रीट इकोनॉमी और सार्वजनिक सेवाओं को मजबूत करने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं. इन फैसलों का मकसद आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना, रोजगार बढ़ाना और लोगों को राहत देना है. पब, क्लब और लाइव म्यूजिक वेन्यू को बड़ी राहत प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने घोषणा की है कि पब्स, क्लब्स और लाइव म्यूजिक वेन्यू के लिए बिजनेस रेट्स (प्रॉपर्टी टैक्स) में 20 प्रतिशत की कटौती की जाएगी. सरकार का मानना है कि इससे लंदन समेत पूरे इंग्लैंड की नाइट इकोनॉमी को नई रफ्तार मिलेगी. लंबे समय से बढ़ती लागत और आर्थिक दबाव झेल रहे इन कारोबारों को इससे बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. बिजली बिल और बस किराए पर भी राहत सरकार ने आम जनता को राहत देने के लिए बिजली बिल पर वैट (VAT) शून्य प्रतिशत करने का फैसला लिया है. इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन को सस्ता बनाने के लिए बस किराए की सीमा 2 पाउंड तय की गई है. जनवरी 2027 से इंग्लैंड में सिंगल बस टिकट भी इसी सीमा के भीतर रहेगा. पहले यह किराया 3 पाउंड तक था. सरकार का कहना है कि इस फैसले से छात्रों, कम आय वाले परिवारों और रोजाना सफर करने वाले लाखों लोगों को फायदा होगा. बेघरों के लिए बनेगा नया आवास कार्यक्रम नई सरकार ने बेघर लोगों के लिए भी बड़ा ऐलान किया है. अगले तीन वर्षों में 340 मिलियन पाउंड के निवेश से 1,200 नए घर बनाए जाएंगे और करीब 3,000 लोगों को सहायता दी जाएगी. सरकार खाली पड़ी सार्वजनिक जमीन का उपयोग कर कम लागत में आवास तैयार करेगी. इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद ब्रिटेन का सबसे बड़ा सार्वजनिक आवास निर्माण कार्यक्रम बताया जा रहा है. आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर जोर सरकार का कहना है कि इन फैसलों से स्थानीय कारोबार को मजबूती मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और शहरों की अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी. खासकर नाइट लाइफ से जुड़े उद्योगों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश की जा रही है. पहले भाषण में क्या बोले एंडी बर्नहम? प्रधानमंत्री पद संभालने के बाद 10 डाउनिंग स्ट्रीट से अपने पहले संबोधन में एंडी बर्नहम ने कहा कि उनकी सरकार राजनीति से ज्यादा समस्याओं के समाधान पर ध्यान देगी. उन्होंने लोगों से राष्ट्रीय एकजुटता बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि उनकी सरकार ऐसे फैसले लेगी, जो देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत करें और आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाएं.
सऊदी अरब के शाही परिवार के 29 वर्षीय सदस्य प्रिंस अब्दुल्ला बिन फहद बिन अब्दुल्ला बिन अब्दुलअज़ीज़ बिन जलावी अल सऊद की लंदन के एक लग्जरी होटल में हुई मौत की जांच पूरी हो गई है. ब्रिटेन की कोरोनर कोर्ट ने मामले में सुनवाई के बाद कहा कि प्रिंस की मौत शराब, पार्टी ड्रग्स और डॉक्टर द्वारा दी जाने वाली दवाओं के घातक मिश्रण से हुई. अदालत ने इस मामले में किसी साजिश या आत्महत्या के सबूत नहीं मिलने पर इसे 'मिसएडवेंचर' (दुर्घटनावश हुई मौत) करार दिया. लंदन के लग्जरी होटल में मिला था शव कोर्ट में पेश जानकारी के अनुसार, प्रिंस अब्दुल्ला ने 19 नवंबर को लंदन के केंसिंग्टन स्थित एक लग्जरी मैरियट होटल में एक सप्ताह के लिए कमरा बुक कराया था. होटल का किराया करीब 600 यूरो प्रति रात बताया गया. सीसीटीवी फुटेज में उन्हें मौत से एक शाम पहले होटल के बाहर सिगरेट पीते हुए देखा गया था. इसके बाद वे दोबारा कमरे से बाहर नहीं निकले. बाथरूम में मिला शव 25 नवंबर को होटल का एक कर्मचारी कमरे की सफाई के लिए पहुंचा तो उसने प्रिंस को बाथरूम के फर्श पर अचेत अवस्था में पड़ा पाया. सूचना मिलने पर पैरामेडिक्स मौके पर पहुंचे और उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें घटनास्थल पर ही मृत घोषित कर दिया. पोस्टमार्टम में हुआ बड़ा खुलासा पोस्टमार्टम और टॉक्सिकोलॉजी रिपोर्ट में सामने आया कि प्रिंस के शरीर में शराब की मात्रा सामान्य कानूनी सीमा से लगभग तीन गुना अधिक थी. इसके अलावा उनके शरीर में गामा-हाइड्रॉक्सीब्यूट्रेट (GHB) नामक पार्टी ड्रग, गांजा, जैनैक्स और चिंता दूर करने वाली अन्य दवाओं के अंश भी पाए गए. मेडिकल विशेषज्ञों ने अदालत को बताया कि इन सभी पदार्थों के संयुक्त प्रभाव से उन्हें कार्डियक अरेस्ट हुआ, जो उनकी मौत का कारण बना. नशे की लत का करा चुके थे इलाज सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि प्रिंस पहले से शराब और दवाओं की लत से जूझ रहे थे. अगस्त 2025 में उन्होंने लंदन के रोहैम्पटन स्थित प्रायरी क्लिनिक में डिटॉक्स उपचार कराया था. वहां शराब, बेंजोडायजेपीन और प्रेगाबालिन की लत छुड़ाने का इलाज चला था. इसके बाद उन्होंने मर्सीसाइड के रेनफोर्ड हॉल क्लिनिक में भी उपचार कराया. डॉक्टरों ने बताया कि इलाज के दौरान उन्होंने सहयोग किया था और उन्हें आत्महत्या की आशंका वाला मरीज नहीं माना गया था. कोर्ट ने खारिज की साजिश और आत्महत्या की आशंका सहायक कोरोनर जीन हार्किन ने कहा कि जांच में ऐसा कोई सबूत नहीं मिला जिससे यह साबित हो कि प्रिंस ने जानबूझकर अपनी जान ली या किसी अन्य व्यक्ति की इसमें भूमिका थी. कमरे से कोई सुसाइड नोट भी नहीं मिला और सीसीटीवी फुटेज में भी अंतिम समय तक वे अकेले ही दिखाई दिए. इन सभी तथ्यों के आधार पर अदालत ने उनकी मौत को दुर्घटनावश हुई मौत (Misadventure) माना और आधिकारिक मेडिकल कारण मल्टी-ड्रग इनजेशन दर्ज किया. शाही परिवार ने की मौत की पुष्टि सुनवाई पूरी होने के बाद सऊदी शाही परिवार ने आधिकारिक बयान जारी कर प्रिंस अब्दुल्ला की मौत की पुष्टि की. हालांकि परिवार की ओर से मामले पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की गई है.
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच बहुप्रतीक्षित मुक्त व्यापार समझौता आज 15 जुलाई 2026 से आधिकारिक रूप से लागू हो गया है। करीब तीन वर्षों की बातचीत के बाद लागू हुए इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है। 99% भारतीय निर्यात को मिलेगा शुल्क-मुक्त प्रवेश समझौते के तहत भारत के लगभग 99% निर्यात उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में ड्यूटी-फ्री (शुल्क-मुक्त) प्रवेश मिलेगा। इससे कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग सामान, रत्न एवं आभूषण, कृषि उत्पाद और समुद्री खाद्य पदार्थों के निर्यात को बड़ा बढ़ावा मिलने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा चीन और बांग्लादेश जैसे देशों के मुकाबले और मजबूत होगी। भारतीय उपभोक्ताओं को भी मिलेगा लाभ FTA के लागू होने के साथ भारत में ब्रिटेन से आयात होने वाले कई उत्पादों पर सीमा शुल्क चरणबद्ध तरीके से कम किया जाएगा। इससे ब्रिटिश कारें, स्कॉच व्हिस्की, चॉकलेट, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद और प्रीमियम उपभोक्ता वस्तुएं आने वाले वर्षों में अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती हैं। व्यापार और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा सरकार का कहना है कि यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को नई ऊंचाई पर ले जाएगा। भारतीय सेवा क्षेत्र, आईटी कंपनियों और पेशेवरों को भी ब्रिटेन के बाजार में बेहतर अवसर मिलेंगे। अनुमान है कि आने वाले वर्षों में इस समझौते से दोनों देशों के बीच व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
लंदन: ब्रिटेन के पीटरबरो शहर में लगभग 40 साल पुराने हिंदू मंदिर और सामुदायिक केंद्र की बिक्री को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। लंदन से करीब 120 किलोमीटर दूर स्थित न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स को पीटरबरो सिटी काउंसिल ने नीलामी के बाद यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन को बेचने का फैसला किया है। इस फैसले के खिलाफ भारत हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बिक्री प्रक्रिया को चुनौती दी है। संगठन का आरोप है कि काउंसिल ने मंदिर की चार दशक पुरानी धार्मिक और सामाजिक भूमिका को नजरअंदाज किया और नीलामी प्रक्रिया में कई गंभीर अनियमितताएं हुईं। फिलहाल हाई कोर्ट इस मामले की न्यायिक समीक्षा कर रहा है। मंदिर की बिक्री पर क्यों उठा विवाद? भारत हिंदू समाज का कहना है कि जिस परिसर को बेचा जा रहा है, उसी में वर्षों से हिंदू मंदिर संचालित हो रहा है। यह केवल पूजा का स्थान नहीं, बल्कि पीटरबरो और आसपास रहने वाले हजारों हिंदुओं का प्रमुख सांस्कृतिक और सामुदायिक केंद्र भी है। संगठन का आरोप है कि संपत्ति के मूल्यांकन और बोली प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई। उनका कहना है कि काउंसिल ने मंदिर के सामाजिक और धार्मिक महत्व को उचित महत्व दिए बिना बिक्री का निर्णय ले लिया। हाई कोर्ट में पहुंचा मामला भारत हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में दायर याचिका में कहा है कि बिक्री प्रक्रिया कानून के अनुरूप नहीं अपनाई गई। संगठन के अनुसार, काउंसिल ने नीलामी से जुड़े मूल्यांकन और स्कोरिंग में गंभीर त्रुटियां कीं और बाद में इन्हीं सिफारिशों को बिना स्वतंत्र समीक्षा के मंजूरी दे दी। फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान अंतरिम राहत देते हुए काउंसिल को संपत्ति की बिक्री पूरी करने या उससे संबंधित कोई अंतिम कदम उठाने से रोक दिया था। अब अदालत यह तय करेगी कि बिक्री का फैसला कानूनी और निष्पक्ष प्रक्रिया के तहत लिया गया था या नहीं। मंदिर प्रबंधन ने क्या कहा? भारत हिंदू समाज ने स्पष्ट किया है कि उसका विरोध किसी धार्मिक समुदाय या मुस्लिम संस्था से नहीं है। संगठन का कहना है कि उसका विरोध केवल काउंसिल की निर्णय प्रक्रिया और नीलामी के तरीके को लेकर है। संगठन का कहना है कि यदि अदालत निष्पक्ष जांच कराएगी तो पूरी प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितताएं सामने आएंगी। मंदिर बंद हुआ तो हिंदुओं पर क्या असर पड़ेगा? भारत हिंदू समाज के मुताबिक, पीटरबरो का यह मंदिर इलाके में रहने वाले करीब 4,000 हिंदुओं के लिए प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र है। यदि यह परिसर बंद हो जाता है, तो श्रद्धालुओं को पूजा और धार्मिक आयोजनों के लिए कैंब्रिज (करीब 56 किलोमीटर) या लेस्टर (करीब 64 किलोमीटर)स्थित मंदिरों तक जाना पड़ेगा। संगठन का कहना है कि इससे स्थानीय हिंदू समुदाय की धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां गंभीर रूप से प्रभावित होंगी। आर्थिक संकट से जूझ रही हैं ब्रिटेन की स्थानीय परिषदें रिपोर्टों के अनुसार, ब्रिटेन की कई स्थानीय परिषदें बढ़ते वित्तीय संकट के कारण सामुदायिक भवन, खेल केंद्र और अन्य सार्वजनिक संपत्तियां बेचने को मजबूर हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2025 के एक सर्वेक्षण में करीब 60 प्रतिशत परिषदों ने बजट घाटा कम करने के लिए संपत्तियों की बिक्री को जरूरी कदम बताया था। इसी वित्तीय दबाव के बीच पीटरबरो सिटी काउंसिल ने भी संबंधित परिसर की बिक्री का फैसला लिया। अदालत के फैसले पर टिकी निगाहें अब हाई कोर्ट यह तय करेगा कि न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स की बिक्री कानून, पारदर्शिता और समानता के सिद्धांतों के अनुरूप हुई या नहीं। अदालत का फैसला न केवल इस संपत्ति के भविष्य, बल्कि ब्रिटेन में धार्मिक और सामुदायिक संस्थानों से जुड़े ऐसे मामलों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पुष्टि की है कि वह इस महीने फ्रांस में आयोजित होने वाले जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। यह सम्मेलन 15 से 17 जून तक फ्रांस के एवियन-ले-बैंस शहर में आयोजित किया जाएगा। ऐसे समय में यह बैठक हो रही है जब ईरान को लेकर अमेरिका और उसके पारंपरिक सहयोगी देशों के बीच मतभेद बढ़ते नजर आ रहे हैं। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से जानकारी देते हुए बताया कि वह 14 जून को व्हाइट हाउस परिसर में आयोजित यूएफसी विश्व चैंपियनशिप मुकाबलों में शामिल होने के बाद सीधे फ्रांस रवाना होंगे। उन्होंने इस आयोजन को अमेरिकी इतिहास की सबसे मनोरंजक रातों में से एक बताया। पश्चिम एशिया को लेकर बढ़े हैं मतभेद हाल के दिनों में ट्रंप ने Germany, France और United Kingdom जैसे प्रमुख सहयोगी देशों की आलोचना की थी। उनका आरोप था कि ये देश पश्चिम एशिया में अमेरिका की सैन्य रणनीति का पर्याप्त समर्थन नहीं कर रहे हैं। इसी कारण शुरुआत में उनके सम्मेलन में शामिल होने को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। यह सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि अमेरिका और Israel द्वारा ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य अभियान शुरू किए जाने के बाद यह पहला अवसर होगा जब ट्रंप कई वैश्विक नेताओं से आमने-सामने मुलाकात करेंगे। वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर होगी चर्चा जी-7 दुनिया की सात प्रमुख विकसित अर्थव्यवस्थाओं का समूह है, जिसमें United States, Canada, France, Germany, Italy, Japan और United Kingdom शामिल हैं। इसके अलावा European Union भी इस समूह का हिस्सा है। सम्मेलन में वैश्विक सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष, आर्थिक चुनौतियों, ऊर्जा संकट और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दों पर व्यापक चर्चा होने की संभावना है। दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि इसके फैसले आने वाले समय में अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
United Kingdom की राजनीति में बड़ा संकट खड़ा होता दिखाई दे रहा है। सत्तारूढ़ Labour Party के 70 से अधिक सांसदों ने प्रधानमंत्री Keir Starmer से इस्तीफा देने की मांग की है। यह दबाव स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में लेबर पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद बढ़ा है, जिससे पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष खुलकर सामने आने लगा है। चुनावी हार के बाद बढ़ा संकट रिपोर्ट्स के मुताबिक, इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स में हुए स्थानीय चुनावों में लेबर पार्टी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा। सबसे बड़ा झटका वेल्स में लगा, जहां पार्टी ने 1999 के बाद पहली बार वेल्श संसद पर अपना नियंत्रण खो दिया। यह सत्ता अब Plaid Cymru के हाथों में चली गई। चुनावी नतीजों के बाद पार्टी के भीतर यह सवाल उठने लगा है कि क्या स्टार्मर 2029 के आम चुनाव तक पार्टी का नेतृत्व जारी रख पाएंगे। चार सहयोगियों के इस्तीफे से बढ़ा दबाव सोमवार को संकट तब और गहरा गया जब स्टार्मर के चार मंत्री सहयोगियों ने इस्तीफा दे दिया। ब्रिटिश मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कई वरिष्ठ नेताओं ने निजी तौर पर नेतृत्व परिवर्तन की जरूरत पर चर्चा शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि: Yvette Cooper Shabana Mahmood जैसे वरिष्ठ मंत्रियों ने भी पार्टी के खराब प्रदर्शन के बाद सत्ता के “सुव्यवस्थित हस्तांतरण” पर विचार करने की सलाह दी है। क्या स्टार्मर की कुर्सी खतरे में है? लेबर पार्टी के नियमों के अनुसार, नेतृत्व के खिलाफ औपचारिक चुनौती शुरू करने के लिए 81 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। फिलहाल 70 से ज्यादा सांसद खुलकर विरोध में आ चुके हैं, इसलिए राजनीतिक हलकों में माना जा रहा है कि अगर असंतोष और बढ़ा तो स्टार्मर के खिलाफ औपचारिक नेतृत्व चुनौती भी शुरू हो सकती है। स्टार्मर ने इस्तीफे से किया इनकार बढ़ते दबाव के बावजूद Keir Starmer ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है। लंदन में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा: “मुझे पता है कि कुछ लोग मुझ पर शक कर रहे हैं, लेकिन मैं उन्हें गलत साबित करूंगा।” स्टार्मर ने यह भी कहा कि वह पार्टी में भरोसा बहाल करने और सरकार की नीतियों को आगे बढ़ाने के लिए संघर्ष जारी रखेंगे। 2024 में मिली थी बड़ी जीत स्टार्मर जुलाई 2024 में बड़ी जीत के साथ सत्ता में आए थे। उन्होंने 14 साल पुराने Conservative Party शासन को खत्म कर लेबर पार्टी को सत्ता में वापसी दिलाई थी। हालांकि सत्ता में आने के बाद उन्हें: आर्थिक सुस्ती महंगाई और जीवन-यापन संकट ऊर्जा कीमतों राजनीतिक विवादों को लेकर लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।