Iran-US Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अहम ठिकानों पर बड़े हवाई हमले (Air Strike) के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक इस सैन्य अभियान को अंतिम मंजूरी नहीं दी गई है। एयर स्ट्राइक की तैयारी का दावा Axios की रिपोर्ट के अनुसार, व्हाइट हाउस और अमेरिकी रक्षा अधिकारियों के बीच ईरान के ऊर्जा और रणनीतिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने की योजना पर लगातार चर्चा चल रही है। प्रस्तावित कार्रवाई का उद्देश्य तेहरान पर सैन्य दबाव बढ़ाकर उसे अमेरिका की ओर से प्रस्तावित युद्धविराम शर्तों को स्वीकार करने के लिए मजबूर करना बताया गया है। वहीं, एएनआई ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अभी अंतिम फैसला नहीं लिया है, लेकिन सेना को संभावित कार्रवाई के लिए तैयार रहने के संकेत दिए गए हैं। इजरायल भी हो सकता है शामिल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि संभावित सैन्य अभियान में इजरायल भी अमेरिका के साथ शामिल हो सकता है। यदि ऐसा होता है, तो हालिया तनाव के दौरान यह पहला मौका होगा जब दोनों देश ईरान के खिलाफ संयुक्त सैन्य कार्रवाई कर सकते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसी स्थिति में ईरान इजरायल पर मिसाइल हमले तेज कर सकता है, जिससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका है। किन ठिकानों को बनाया जा सकता है निशाना? CBS News की रिपोर्ट के मुताबिक, संभावित अमेरिकी कार्रवाई में ईरान के ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े अहम प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया जा सकता है। इनमें शामिल हैं— पेट्रोलियम रिफाइनरी पावर प्लांट ऊर्जा उत्पादन और वितरण से जुड़े प्रमुख प्रतिष्ठान हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार व्हाइट हाउस के भीतर इस कार्रवाई को लेकर मतभेद भी हैं और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों ने सैन्य विकल्प पर आपत्ति जताई है। वॉल स्ट्रीट जर्नल का भी दावा The Wall Street Journal ने भी अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन ने ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान की तैयारी के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यदि अंतिम मंजूरी मिलती है तो कार्रवाई की शुरुआत जल्द हो सकती है। ट्रंप का कड़ा बयान कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा, "हम उन पर बहुत जोरदार हमला करेंगे और एक समय ऐसा आएगा जब वे कहेंगे कि अब हम इसे और बर्दाश्त नहीं कर सकते।" इससे पहले भी ट्रंप ने कहा था कि यदि हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हमले जारी रहे, तो अमेरिका ईरान के पुलों, बिजली संयंत्रों और अन्य महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने से पीछे नहीं हटेगा। पांच महीनों से जारी है तनाव ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच पिछले कई महीनों से सैन्य और कूटनीतिक तनाव बना हुआ है। एक ओर क्षेत्र में जवाबी सैन्य कार्रवाइयों का दौर जारी है, वहीं दूसरी ओर युद्धविराम और बातचीत के प्रयास भी चल रहे हैं। फिलहाल किसी भी पक्ष की ओर से तनाव कम होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं।
US-Iran Conflict: मध्य पूर्व में तनाव खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका ने गुरुवार तड़के ईरान के 10 से अधिक शहरों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कार्रवाई में कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन ठिकानों, तटीय रक्षा केंद्रों और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया गया। वहीं ईरानी मीडिया के मुताबिक, केश्म द्वीप पर एक रिहायशी इमारत पर हुए हमले में एक दंपती और उनके दो साल के बच्चे की मौत हो गई, जबकि दो अन्य बच्चे घायल हुए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमलों से पहले कहा था कि जॉर्डन स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डे पर मिसाइल हमला करने की कोशिश की गई थी। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, "उन्होंने हमला करने की कोशिश की, अब हमारी बारी है।" इसके बाद अमेरिका ने ईरान के कई रणनीतिक ठिकानों पर एयरस्ट्राइक शुरू कर दी। CENTCOM ने पूरी की सैन्य कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया कि हमलों का उद्देश्य अमेरिकी सैनिकों, व्यापारिक जहाजों और खाड़ी क्षेत्र के सहयोगी देशों पर मंडरा रहे खतरे को कम करना था। CENTCOM के मुताबिक, कार्रवाई पूरी हो चुकी है और इसमें IRGC के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। केश्म द्वीप पर नागरिकों की मौत ईरानी मीडिया के अनुसार, केश्म द्वीप पर एक रिहायशी इमारत अमेरिकी हमले की चपेट में आ गई। इस हमले में एक दंपती और उनके दो वर्षीय बच्चे की मौत हो गई, जबकि सात और नौ साल के दो बच्चे घायल हुए हैं। राहत एवं बचाव दल मलबे में दबे लोगों की तलाश में जुटे हैं। ईरान की जवाबी चेतावनी, होर्मुज पर तनाव ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड (IRGC) ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में एक तेल टैंकर में आग लगने के बाद दो अन्य जहाजों को वापस लौटना पड़ा। IRGC ने अमेरिका पर समुद्री गतिविधियों में हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा कि जब तक अमेरिकी दखल जारी रहेगा, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहेगा और हर कार्रवाई का जवाब दिया जाएगा। जॉर्डन ने पांच मिसाइलें मार गिराईं जॉर्डन की सेना ने बताया कि ईरान से दागी गई पांच बैलिस्टिक मिसाइलों को उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने हवा में ही नष्ट कर दिया। वहीं कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर संभावित जवाबी हमले की आशंका के चलते सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। कच्चे तेल में उतार-चढ़ाव तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला। ब्रेंट क्रूड और WTI दोनों में शुरुआती उछाल के बाद गिरावट दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संघर्ष और बढ़ता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर पड़ सकता है। मिडिल ईस्ट में युद्ध का खतरा गहराया लगातार मिसाइल हमलों, हवाई कार्रवाई और दोनों देशों की आक्रामक बयानबाजी के बाद पूरे मध्य पूर्व में व्यापक युद्ध की आशंका बढ़ गई है। अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि यदि ईरान या उसके समर्थित समूहों की ओर से हमले जारी रहे तो और बड़े सैन्य अभियान चलाए जा सकते हैं। वहीं ईरान ने भी पीछे हटने से इनकार करते हुए जवाबी कार्रवाई जारी रखने की चेतावनी दी है।
US-Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर तेज होता नजर आ रहा है। ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में चेतावनी की अनदेखी करने वाले तीन तेल टैंकरों को रोक दिया है। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद दोनों देशों के बीच टकराव और गहरा गया है। होर्मुज में तीन तेल टैंकर रोकने का दावा ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा कि जिन तीन तेल टैंकरों ने ईरान की चेतावनी को नजरअंदाज किया, उन्हें कुछ घंटे पहले रोक दिया गया। हालांकि, टैंकरों की पहचान और घटना की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हो सकी है। ईरान ने स्पष्ट किया है कि उसकी जब्त की गई संपत्तियों का इस्तेमाल करने वाले किसी भी देश या कंपनी के जहाजों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने की अनुमति नहीं दी जाएगी। कार्रवाई से पहले दी थी सख्त चेतावनी टैंकरों को रोकने के दावे से कुछ घंटे पहले ही ईरान ने दुनिया भर के देशों और शिपिंग कंपनियों को चेतावनी जारी की थी। ईरान का कहना था कि यदि किसी देश या कंपनी ने अमेरिका द्वारा जब्त की गई ईरानी संपत्तियों का उपयोग किया, तो उसके जहाजों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। ट्रंप के फैसले से बढ़ा विवाद यह विवाद उस समय और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए जहाजों को ईरान की जब्त संपत्तियों से मुआवजा दिया जाएगा। ट्रंप के इस बयान के बाद ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध दर्ज कराया। ईरानी विदेश मंत्री ने जताई आपत्ति ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि किसी देश की जब्त संपत्तियों का इस्तेमाल ऐसे दावों के भुगतान के लिए करना, जिनका उन संपत्तियों से कोई सीधा संबंध नहीं है, अंतरराष्ट्रीय नियमों को कमजोर करेगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकारें इस तरह दूसरे देशों की संपत्तियों को जब्त कर उनका उपयोग करना शुरू कर देंगी, तो भविष्य में किसी भी देश या संस्था की संपत्ति सुरक्षित नहीं रहेगी और इससे वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में अस्थिरता बढ़ेगी। अमेरिकी प्रस्ताव पर ईरान का कड़ा रुख ईरानी सैन्य कमान 'खातम अल-अंबिया' के प्रवक्ता इब्राहिम जुल्फिकारी ने भी अमेरिकी प्रस्ताव को खारिज करते हुए कहा कि यदि किसी देश या कंपनी ने ईरान की जब्त संपत्तियों का इस्तेमाल किया, तो ईरान के सशस्त्र बल ऐसे जहाजों को होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने नहीं देंगे। उन्होंने कहा कि अमेरिका के इस कदम के गंभीर परिणाम हो सकते हैं और ईरान अपने आर्थिक हितों की रक्षा के लिए हर आवश्यक कदम उठाएगा। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बढ़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है। फिलहाल दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है।
मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार गहराता जा रहा है। ईरान ने दावा किया है कि उसने बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। साथ ही ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दो तेल टैंकरों को रोकने का भी दावा किया है। हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा है कि उसने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर नए हवाई हमले किए हैं और इस कार्रवाई में ईरान की सैन्य क्षमताओं को भारी नुकसान पहुंचाया गया है। अमेरिका का दावा- होर्मुज की सुरक्षा सबसे बड़ी प्राथमिकता CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी हमलों का निशाना ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, एयर डिफेंस सिस्टम और नौसैनिक ठिकाने रहे। अमेरिकी सेना का कहना है कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। अमेरिका ने यह भी दावा किया कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद फिलहाल इस अहम समुद्री मार्ग पर जहाजों की आवाजाही सामान्य बनी हुई है। पुरानी दुश्मनी ने फिर बढ़ाया संकट अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई वर्षों से जारी है। वर्ष 2020 में ईरानी जनरल कासिम सुलेमानी की अमेरिकी हमले में मौत के बाद दोनों देशों के रिश्ते लगातार बिगड़ते गए। इसके बाद खाड़ी क्षेत्र में तेल टैंकरों पर हमले, ड्रोन हमले और सैन्य टकराव की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हाल के दिनों में दोनों देशों के बीच बढ़ी सैन्य गतिविधियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में अस्थिरता और बढ़ा दी है। दुनिया की नजर होर्मुज जलडमरूमध्य पर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक कच्चे तेल की बड़ी मात्रा इसी समुद्री रास्ते से गुजरती है। ऐसे में यदि यहां तनाव और बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही प्रभावित होती है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सीधा असर भारत सहित तेल आयात करने वाले देशों की अर्थव्यवस्था, ईंधन की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ सकता है। बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता ईरान और अमेरिका के बीच लगातार हो रही जवाबी सैन्य कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र में नए संघर्ष की आशंका बढ़ा दी है। फिलहाल दुनिया की नजर दोनों देशों के अगले कदम पर टिकी हुई है, क्योंकि इस तनाव का असर केवल मिडिल ईस्ट ही नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है।
US-Iran Tensions: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अब अमेरिकी हथियारों के भंडार को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। अमेरिकी मीडिया की कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अगर संघर्ष लंबा खिंचता है तो अमेरिका को मिसाइलों और अन्य उन्नत हथियारों की कमी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि व्हाइट हाउस ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि अमेरिकी सेना के पास सभी रणनीतिक अभियानों के लिए पर्याप्त सैन्य संसाधन मौजूद हैं। रिपोर्ट में क्या किया गया दावा? द वॉशिंगटन पोस्ट और द टेलीग्राफ की रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिका ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य अभियान की तैयारी कर रहा है, लेकिन लगातार अभियानों के कारण मिसाइलों और उन्नत हथियारों का स्टॉक तेजी से कम हो सकता है। रिपोर्ट में एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से कहा गया है कि लंबे समय तक युद्ध जारी रहने की स्थिति में मौजूदा हथियारों के साथ अभियान चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। किन हथियारों की कमी की आशंका? रिपोर्टों के अनुसार, यदि संघर्ष और तेज होता है तो अमेरिका को एयर डिफेंस इंटरसेप्टर, लंबी दूरी तक मार करने वाली सटीक मिसाइलों और अन्य आधुनिक हथियारों की उपलब्धता पर दबाव झेलना पड़ सकता है। साथ ही बड़ी संख्या में सैनिकों, लड़ाकू विमानों और सैन्य उपकरणों की तैनाती भी चुनौती बन सकती है। रक्षा विशेषज्ञों ने भी जताई चिंता वॉशिंगटन स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज (CSIS) के रक्षा विशेषज्ञ सेथ जोन्स ने भी चेतावनी दी है कि यदि युद्ध का दायरा बढ़ता है तो अमेरिका की सैन्य तैयारियों पर असर पड़ सकता है। उनका कहना है कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में जमीनी सैनिक भेजना रणनीतिक रूप से जोखिम भरा कदम साबित हो सकता है। पेंटागन में 'चुप्पी की संस्कृति' का दावा द टेलीग्राफ की रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पेंटागन के भीतर कई अधिकारी हथियारों की वास्तविक स्थिति या चुनौतियों की जानकारी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाने से बच रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, वरिष्ठ अधिकारियों में कार्रवाई के डर के कारण वास्तविक तस्वीर सामने नहीं आ पा रही है। हजारों मिसाइलें इस्तेमाल होने का दावा रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) की एक रिपोर्ट के अनुसार, संघर्ष के शुरुआती 16 दिनों में अमेरिका और उसके सहयोगियों ने 11 हजार से अधिक मिसाइलें और हथियार इस्तेमाल किए। विश्लेषकों का कहना है कि THAAD इंटरसेप्टर, Patriot PAC-3 और Tomahawk क्रूज मिसाइलों का बड़े पैमाने पर उपयोग होने से इनके भंडार पर दबाव बढ़ा है। व्हाइट हाउस ने किया साफ इनकार व्हाइट हाउस की प्रवक्ता एना केली ने हथियारों की कमी संबंधी सभी रिपोर्टों को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिकी सेना के पास राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सभी रणनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए पर्याप्त हथियार, गोला-बारूद और सैन्य संसाधन उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका किसी भी संभावित स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सोमवार को एक वाणिज्यिक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ, जिसके बाद उसमें भीषण आग लग गई। हादसे के बाद जहाज पर सवार सभी चालक दल (क्रू) के सदस्यों को सुरक्षित बचा लिया गया। इस घटना ने पहले से जारी अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं। UKMTO ने की हमले की पुष्टि ब्रिटेन की यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि मिसाइल हमले के तुरंत बाद चालक दल ने जहाज खाली कर दिया था। बाद में एक टग बोट की मदद से सभी क्रू मेंबर्स को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। ओमान के कुमजार के पास हुआ हमला UKMTO के अनुसार, हमला ओमान के कुमजार से करीब 15 किलोमीटर (8 समुद्री मील) उत्तर-पश्चिम में हुआ। हमले के बाद जहाज में आग लग गई और अब वह बिना चालक दल के समुद्र में बह रहा है। आग पर अभी तक पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। एजेंसी ने क्षेत्र से गुजरने वाले सभी जहाजों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की तुरंत सूचना देने की सलाह दी है। अमेरिका-ईरान संघर्ष के बीच बढ़ा खतरा यह हमला ऐसे समय हुआ है जब अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव लगातार बढ़ रहा है। अमेरिका ने अपने एक और सैनिक की मौत की पुष्टि के बाद सोमवार को ईरान के उत्तर-पश्चिमी शहर तबरेज पर हवाई हमले किए। इसके जवाब में ईरान ने अमेरिका के सहयोगी देशों बहरीन और कुवैत को निशाना बनाया। बहरीन में अमेरिकी नौसेना का पांचवां बेड़ा (5th Fleet) तैनात है, जिससे इस जवाबी कार्रवाई को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। समुद्री व्यापार पर बढ़ा संकट होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ते हमलों और सैन्य गतिविधियों ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में तनाव और बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाजार, शिपिंग उद्योग और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
अमेरिका ने एक बार फिर ईरान पर बड़े सैन्य हमले किए हैं, जिससे पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में तनाव और गहरा गया है। अमेरिकी सेना की सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर यह सैन्य कार्रवाई शुरू की गई। अमेरिका का दावा है कि इन हमलों का मकसद ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना था, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने में किया जा रहा था। बंदर अब्बास में जोरदार धमाका अमेरिकी हमलों के बाद ईरान के रणनीतिक बंदरगाह शहर बंदर अब्बास में जोरदार विस्फोट की खबर सामने आई। ईरानी सरकारी टीवी के अनुसार, धमाके के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई। वहीं, मेहर न्यूज एजेंसी ने बताया कि बुशेहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के आसपास एयर डिफेंस सिस्टम को सक्रिय कर दिया गया है, जिससे किसी भी संभावित हमले का जवाब दिया जा सके। चाबहार और कोनारक में भी धमाकों की गूंज ईरानी मीडिया के मुताबिक, दक्षिण-पूर्वी शहर चाबहार और कोनारक में भी कई धमाके हुए हैं। दोनों शहर ओमान की खाड़ी के किनारे स्थित हैं और रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। कोनारक में ईरानी नौसेना का प्रमुख बेस मौजूद है, जबकि चाबहार ईरान का अहम व्यावसायिक बंदरगाह है। इसके अलावा, फार्स न्यूज एजेंसी के हवाले से अल जजीरा ने बताया कि केश्म द्वीप पर भी लगातार कई विस्फोटों की आवाजें सुनी गईं। घटनाओं के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और सैन्य गतिविधियां बढ़ा दी गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है। IRIB ने साझा की जलते जहाज की तस्वीर तनाव के बीच ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक जलते हुए जहाज की तस्वीर साझा की। आईआरआईबी ने दावा किया कि यह तस्वीर होर्मुज जलडमरूमध्य की है और इसके साथ लिखा, "अमेरिका पर भरोसा करने का नतीजा... कुछ घंटे पहले होर्मुज का नजारा।" बढ़ सकती है क्षेत्रीय अस्थिरता लगातार हो रहे अमेरिकी हमलों और ईरान की सैन्य तैयारियों ने पूरे मिडिल ईस्ट में हालात को और तनावपूर्ण बना दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका असर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा, वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ सकता है।
वॉशिंगटन/दुबई, एजेंसियां। अमेरिका और ईरान के बीच जारी सैन्य संघर्ष और तेज हो गया है। अमेरिकी सेना ने लगातार 10वीं रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। वहीं, ईरान समर्थित यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करने की घोषणा कर दी है, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है। ईरान के सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, ताजा हवाई हमलों का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना और सामरिक ठिकानों को निशाना बनाना था। इन हमलों के बाद कई इलाकों में विस्फोटों की खबरें सामने आई हैं। हूती विद्रोहियों ने सऊदी जहाजों पर दी कार्रवाई की चेतावनी यमन के हूती विद्रोहियों ने घोषणा की है कि वे सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी लागू करेंगे। उन्होंने कहा कि बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सऊदी जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। इस घोषणा के बाद अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों और तेल बाजारों में चिंता बढ़ गई है। वैश्विक तेल आपूर्ति पर मंडराया संकट विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बाब-अल-मंदेब और होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग प्रभावित होते हैं, तो वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार पर बड़ा असर पड़ सकता है। तनाव बढ़ने के साथ कच्चे तेल की कीमतों में भी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। युद्ध के बीच कूटनीतिक प्रयास भी जारी लगातार सैन्य कार्रवाई के बावजूद कई मध्यस्थ देशों की ओर से युद्धविराम और बातचीत की कोशिशें जारी हैं। हालांकि फिलहाल दोनों पक्षों की ओर से कोई ठोस समझौता सामने नहीं आया है और क्षेत्र में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं।
गढ़वा। भारत निर्वाचन आयोग के निर्देश पर झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के तहत गढ़वा जिला प्रशासन ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। मतदाता सूची को पूरी तरह शुद्ध, अद्यतन, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे इस अभियान में जिले के सभी पंजीकृत मतदाताओं तक गणना प्रपत्र (Enumeration Forms) का शत-प्रतिशत वितरण पूरा कर लिया गया है। जिला निर्वाचन पदाधिकारी जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा स्वयं अभियान की नियमित निगरानी कर रहे हैं। वे लगातार समीक्षा बैठकों के माध्यम से दोनों विधानसभा क्षेत्रों में कार्यों की प्रगति का आकलन कर रहे हैं और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से अभियान पूरा करने के निर्देश दे रहे हैं। जिले में कुल 8 लाख 62 हजार 92 मतदाता पंजीकृत हैं। प्रशासन की ओर से सभी मतदाताओं तक गणना प्रपत्र पहुंचा दिए गए हैं। अब तक 5 लाख 55 हजार 677 प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन, 644 प्रपत्रों का ऑनलाइन सबमिशन तथा 5 लाख 55 हजार 30 प्रपत्रों का बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) द्वारा सफलतापूर्वक सत्यापन किया जा चुका है। गढ़वा विधानसभा क्षेत्र गढ़वा विधानसभा क्षेत्र में कुल 4 लाख 26 हजार 661 मतदाता हैं। यहां 100 प्रतिशत प्रपत्र वितरण के साथ 2 लाख 55 हजार 11 प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन, 392 ऑनलाइन सबमिशन और 2 लाख 54 हजार 616 प्रपत्रों का सत्यापन पूरा हो चुका है। वहीं भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में 4 लाख 35 हजार 431 मतदाता पंजीकृत हैं। यहां भी सभी मतदाताओं तक फॉर्म पहुंचाए जा चुके हैं। अब तक 3 लाख 666 प्रपत्रों का डिजिटाइजेशन, 439 ऑनलाइन आवेदन और 3 लाख 414 प्रपत्रों का सत्यापन पूरा किया जा चुका है। उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने सभी मतदाताओं से क्या अपील की उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने सभी मतदाताओं से अपील की है कि जब भी बीएलओ उनके घर पहुंचें, वे आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराएं, गणना प्रपत्र सही और पूर्ण रूप से भरकर समय पर जमा करें तथा अपने मतदाता विवरण का सत्यापन अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि नागरिकों की सक्रिय भागीदारी से ही एक शुद्ध, विश्वसनीय और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार की जा सकती है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाएगी।
अमेरिका ने शुक्रवार को लगातार छठी रात ईरान पर सैन्य कार्रवाई जारी रखी। ताजा हवाई हमलों के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि सैन्य कार्रवाई के बावजूद कूटनीतिक बातचीत की संभावना अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस अभियान में ईरान की सैन्य क्षमताओं और उससे जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया गया। सेना का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य ताकत को और कमजोर करना है। बंदर अब्बास और आसपास के इलाकों को बनाया निशाना ईरान के सरकारी टीवी के अनुसार, अमेरिकी मिसाइलों ने दक्षिणी बंदरगाह शहर बंदर अब्बास और उसके आसपास के क्षेत्रों को निशाना बनाया। यह रणनीतिक शहर होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के पास स्थित है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हमलों में 4 लोगों की मौत, 17 घायल ईरान के सरकारी प्रसारक आईआरआईबी (IRIB) के मुताबिक, अमेरिकी हमलों में कम से कम चार लोगों की मौत हुई है, जबकि 17 लोग घायल हुए हैं। होर्मोजगान प्रांत में तीन लोगों की मौत और नौ लोग घायल हुए। बंदर अब्बास में एक व्यक्ति की जान गई, जबकि आठ अन्य घायल बताए गए हैं। बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त, कई इलाकों में ब्लैकआउट ईरान के जनसंपर्क विभाग के प्रमुख होसैन मोगिमी ने बताया कि हमलों में कई बिजली लाइनें क्षतिग्रस्त हो गईं, जिससे दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में बिजली आपूर्ति बाधित हो गई। बाद में कुछ क्षेत्रों में बिजली बहाल की गई। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे एसी और अन्य अधिक बिजली खपत वाले उपकरणों का सीमित उपयोग करें, ताकि बिजली व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव न पड़े। हवाई अड्डे पर भी हमला सरकारी मीडिया के अनुसार, दक्षिण-पूर्वी प्रांत स्थित ईरानशहर हवाई अड्डे के परिसर में एक मिसाइल गिरने से आग लग गई। इस घटना में एक व्यक्ति घायल हुआ है। हमले के बाद हवाई अड्डे की बिजली आपूर्ति भी ठप हो गई, जिससे संचालन प्रभावित हुआ। बातचीत के संकेत भी बरकरार लगातार सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यदि ईरान बातचीत के लिए आगे आता है तो कूटनीतिक समाधान का रास्ता अब भी खुला है। वहीं, क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।
नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच मंगलवार को कई गंभीर दावे सामने आए हैं। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और तेज हो गया है। हालांकि, इन घटनाओं के कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर शुल्क को लेकर चर्चा रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजरने वाले जहाजों से सुरक्षा शुल्क वसूले जाने पर विचार किया जा सकता है। इसे लेकर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक नीति सार्वजनिक नहीं की गई है। ईरान की जवाबी कार्रवाई के दावे मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने बहरीन, जॉर्डन और संयुक्त अरब अमीरात से जुड़े कुछ ठिकानों एवं जहाजों को निशाना बनाया। इन दावों के संबंध में संबंधित देशों की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है। जॉर्डन की वायु रक्षा प्रणाली सक्रिय होने की रिपोर्ट कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि जॉर्डन की सुरक्षा एजेंसियों ने अपनी ओर आने वाली कई मिसाइलों को बीच रास्ते में नष्ट कर दिया। हालांकि, इस संबंध में उपलब्ध जानकारी स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हो सकी है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। वैश्विक कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता तनाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक व्यापार पर असर डाल सकता है। आधिकारिक पुष्टि का इंतजार अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य गतिविधियों तथा कथित हमलों को लेकर कई दावे सामने आए हैं, लेकिन सभी घटनाओं की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है। ऐसे में स्थिति पर दोनों देशों और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के आधिकारिक बयानों का इंतजार किया जा रहा है।
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता सैन्य तनाव लगातार गहराता जा रहा है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार (भारतीय समयानुसार) लगातार तीसरी रात ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इन हमलों में ईरान के तटीय निगरानी तंत्र (Coastal Surveillance System), ड्रोन बेस और मिसाइल क्षमताओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी संकेत दिए हैं कि यह सैन्य अभियान अभी थमने वाला नहीं है। तीसरी रात भी जारी रहा अमेरिकी सैन्य अभियान अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर ईरान के खिलाफ लगातार तीसरी रात सैन्य कार्रवाई की गई। अमेरिकी सेना का कहना है कि अभियान का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनसे होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों को खतरा हो सकता है। CENTCOM के अनुसार, अभियान में ईरान के तटीय रक्षा तंत्र, ड्रोन संचालन केंद्र और मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया गया। ट्रंप बोले- ईरान पर दबाव जारी रहेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रेडियो होस्ट ह्यू हेविट को दिए इंटरव्यू में कहा कि अमेरिका ईरान पर अपना दबाव बनाए रखेगा। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी ईरान के खिलाफ कार्रवाई जारी रह सकती है और अमेरिका अपनी सुरक्षा तथा समुद्री व्यापार की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाता रहेगा। दक्षिणी ईरान में कई जगह हुए धमाके ईरानी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मंगलवार को दक्षिणी ईरान के कई इलाकों में जोरदार विस्फोट हुए। धमाकों की खबरें इन क्षेत्रों से सामने आईं: बंदर अब्बास बंदरगाह किश द्वीप बुशेहर प्रांत का जाम शहर केश्म द्वीप स्थानीय एजेंसियों के अनुसार, कई स्थानों पर लगातार धमाकों की आवाजें सुनी गईं। हालांकि नुकसान का आधिकारिक विवरण अभी जारी नहीं किया गया है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र अमेरिका का कहना है कि उसकी कार्रवाई का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दूसरी ओर, ईरान लगातार अमेरिकी सैन्य कार्रवाइयों का विरोध कर रहा है, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। बढ़ सकता है क्षेत्रीय तनाव लगातार तीसरी रात हुए अमेरिकी हमलों के बाद पश्चिम एशिया में सैन्य तनाव और गहरा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच जवाबी कार्रवाई जारी रहती है, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा, समुद्री व्यापार और वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिका ने लगातार तीसरे दिन ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निर्देश पर शुरू किए गए अभियान के तहत ईरान के कई सैन्य ठिकानों, तटीय रक्षा प्रणालियों, मिसाइल अड्डों और ड्रोन क्षमताओं को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि अभियान सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। ईरान के सैन्य ठिकानों पर बड़ी कार्रवाई अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, हमले के दौरान बंदर अब्बास, बुशेहर, चाबहार, जास्क, कोनारक और अबू मूसा समेत कई रणनीतिक क्षेत्रों में मौजूद सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हमले की क्षमता को कमजोर करना है, ताकि अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार सुरक्षित रह सके। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर बढ़ा टकराव हमलों के बीच तनाव का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य बन गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि अमेरिका इस रणनीतिक समुद्री मार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा, जबकि ईरान ने दोहराया है कि जलडमरूमध्य के भविष्य का फैसला वह स्वयं करेगा। इसी बीच दो तेल टैंकरों पर हमले की घटनाओं ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता और बढ़ा दी है। वैश्विक बाजारों में बढ़ी चिंता अमेरिका-ईरान संघर्ष के लगातार तेज होने से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी असर दिख रहा है। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और निवेशकों के बीच मध्य-पूर्व में व्यापक संघर्ष की आशंका बढ़ गई है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील की है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज विराट कोहली करीब छह महीने बाद एक बार फिर वनडे क्रिकेट में वापसी करने जा रहे हैं। 14 जुलाई से इंग्लैंड के खिलाफ शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज उनके लिए सिर्फ वापसी का मंच नहीं, बल्कि कई ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम करने का बड़ा अवसर भी होगी। चोट के कारण वह अफगानिस्तान के खिलाफ वनडे सीरीज से बाहर रहे थे, जबकि उन्होंने अपना आखिरी वनडे जनवरी 2026 में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेला था। 15 हजार वनडे रन का ऐतिहासिक मुकाम करीब विराट कोहली ने अब तक 311 वनडे मैचों की 299 पारियों में 14,797 रन बनाए हैं। 15,000 वनडे रन पूरे करने के लिए उन्हें केवल 203 रन की जरूरत है। यदि वह इंग्लैंड के खिलाफ यह उपलब्धि हासिल कर लेते हैं, तो वनडे क्रिकेट में 15 हजार रन बनाने वाले दुनिया के दूसरे और भारत के दूसरे बल्लेबाज बन जाएंगे। इस सूची में सबसे ऊपर सचिन तेंदुलकर का नाम है। सबसे तेज 15 हजार रन बनाने का भी मौका इंग्लैंड के खिलाफ पहला वनडे कोहली के करियर की 300वीं वनडे पारी होगी। यदि वह इस सीरीज में 203 रन बना लेते हैं, तो वह सचिन तेंदुलकर का रिकॉर्ड भी तोड़ सकते हैं। सचिन ने 15 हजार वनडे रन तक पहुंचने के लिए 359 पारियां खेली थीं, जबकि विराट के पास यह उपलब्धि सिर्फ 300वीं पारी के आसपास हासिल करने का मौका है। ऐसा होने पर वह वनडे इतिहास में सबसे तेज 15 हजार रन बनाने वाले बल्लेबाज बन जाएंगे। वनडे में शानदार रिकॉर्ड साल 2008 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण करने वाले विराट कोहली का वनडे करियर बेहद शानदार रहा है। उनका औसत 58.71 और स्ट्राइक रेट 90 से अधिक है। अब तक वे 54 शतक और 77 अर्धशतक लगा चुके हैं, जबकि उनका सर्वोच्च स्कोर 183 रन है। टेस्ट और टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने के बाद कोहली अब पूरी तरह वनडे क्रिकेट और अगले साल होने वाले विश्व कप पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। ऐसे में इंग्लैंड के खिलाफ यह सीरीज उनके लिए नई शुरुआत के साथ-साथ इतिहास रचने का भी सुनहरा अवसर साबित हो सकती है।
US Iran Conflict: पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. ईरान की ओर से खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और समुद्री गतिविधियों को निशाना बनाए जाने के बाद अमेरिका ने जवाबी सैन्य अभियान का एक अहम चरण पूरा करने का दावा किया है. अमेरिकी सेना के अनुसार, ताजा कार्रवाई में ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों पर हमले किए गए, जिनमें वायु रक्षा प्रणाली, रडार, मिसाइल और ड्रोन लॉन्चिंग साइट्स समेत कई रणनीतिक ठिकाने शामिल हैं. अमेरिका का दावा- 140 सैन्य ठिकानों को बनाया निशाना अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि इस अभियान में पहली बार लड़ाकू विमान, युद्धपोत, हवाई ड्रोन और नौसैनिक ड्रोन का संयुक्त रूप से इस्तेमाल किया गया. सेना के मुताबिक, ऑपरेशन के दौरान ईरान की वायु रक्षा प्रणाली, मिसाइल और ड्रोन लॉन्चिंग साइट, गोला-बारूद के भंडार, संचार केंद्र और छोटे सैन्य जहाजों को निशाना बनाया गया. होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अमेरिका का बयान अमेरिका ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट किसी एक देश के नियंत्रण में नहीं है और यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया कि वह इस जलमार्ग को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों के लिए सुरक्षित और खुला बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. कंटेनर जहाज पर हमले के बाद बढ़ा तनाव रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका ने रविवार को होर्मुज स्ट्रेट में एक कंटेनर जहाज पर हुए हमले के बाद जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए. इसके बाद ईरान ने भी पश्चिम एशिया में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए जवाबी कार्रवाई की. पांच देशों तक पहुंचा हमलों का असर ईरान के जवाबी हमलों का प्रभाव बहरीन, कुवैत, कतर, जॉर्डन और ओमान तक देखा गया. बहरीन में सोमवार तड़के मिसाइल हमले की चेतावनी देने वाले सायरन बजाए गए. हालांकि अब तक किसी बड़े नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है. ईरान के सरकारी मीडिया ने भी देश के कई हिस्सों में हुए ताजा हमलों की पुष्टि की है. रिपोर्टों के मुताबिक, कई स्थानों पर विस्फोट हुए हैं और कम से कम एक व्यक्ति की मौत होने की जानकारी सामने आई है. ट्रंप बोले- बड़े पैमाने पर की गई बमबारी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई की है. वहीं ईरान ने दोहराया कि होर्मुज स्ट्रेट पर उसका अधिकार है और वहां से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूलने का अधिकार भी उसी के पास होना चाहिए. संयुक्त राष्ट्र ने दी चेतावनी बढ़ते सैन्य तनाव के बीच संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस ने चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि यदि संघर्ष बड़े पैमाने पर युद्ध में बदलता है तो इसके गंभीर और विनाशकारी परिणाम पूरी दुनिया को भुगतने पड़ सकते हैं. उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की है. तनाव कम कराने की कोशिशें जारी इस बीच पाकिस्तान, कतर और मिस्र सहित कई देश दोनों पक्षों के बीच तनाव कम कराने और स्थायी समाधान निकालने के लिए कूटनीतिक प्रयासों में जुटे हुए हैं. हालांकि फिलहाल क्षेत्र में हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर इस संघर्ष पर टिकी हुई है.
US Iran Conflict: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान पर नए सैन्य हमले की पुष्टि की है। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास स्थित केश्म (Qeshm) द्वीप पर हुए हमलों में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। केश्म द्वीप पर कई मिसाइलों से हमला ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक, रविवार दोपहर के बाद केश्म द्वीप पर स्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर करीब एक दर्जन मिसाइलें या अन्य प्रोजेक्टाइल दागे गए। हमले के बाद इलाके में जोरदार धमाके हुए और सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। शुरुआती रिपोर्ट में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं थी, लेकिन बाद में ईरानी अधिकारियों ने पुष्टि की कि हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई है और दो लोग घायल हुए हैं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमले की पुष्टि की अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर बताया कि रविवार (12 जुलाई) शाम 5 बजे (ईस्टर्न टाइम) से ईरान के खिलाफ नए सैन्य अभियान शुरू किए गए। अमेरिका का कहना है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान की उन सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है, जिनका इस्तेमाल होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले करने के लिए किया जा रहा है। अमेरिकी सेना ने दावा किया कि यह कार्रवाई राष्ट्रपति के निर्देश पर की गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है। ऐसे में इस क्षेत्र में बढ़ता सैन्य तनाव अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी चिंता का विषय बन गया है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी हमलों के बाद केश्म द्वीप और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। ईरानी प्रशासन हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है। फिलहाल दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं। क्षेत्रीय तनाव और बढ़ने की आशंका विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है। यदि दोनों देशों के बीच टकराव जारी रहा, तो इसका असर क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।
पटना, एजेंसियां। पटना के चर्चित शिक्षाविद् खान सर (फैजल खान) को कोचिंग विवाद से जुड़े गोलीबारी मामले में बड़ी राहत मिली है। सोमवार को पटना सिविल कोर्ट ने उन्हें अग्रिम जमानत (Anticipatory Bail) प्रदान कर दी। इसी मामले में न्यायिक हिरासत में बंद उनके दोनों बॉडीगार्ड्स समेत कुल छह आरोपियों को भी जमानत मिल गई। कोर्ट के इस फैसले से खान सर और उनके सहयोगियों को बड़ी कानूनी राहत मिली है। आर्म्स एक्ट और हत्या की कोशिश की धाराओं में दर्ज था मामला खान सर की ओर से उनके वकील ने अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी, जिस पर सोमवार को फैसला सुनाया गया। उनके खिलाफ आर्म्स एक्ट और हत्या के प्रयास समेत भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया था। सुनवाई पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। 10 जुलाई को फैसला सुनाया जाना था, लेकिन जिला जज की अनुपस्थिति के कारण सुनवाई टल गई थी। वकील बोले- जांच में सामने आई सच्चाई खान सर के अधिवक्ता अरविंद सिंह महुआर ने कहा कि अदालत ने सभी पक्षों को सुनने के बाद अग्रिम जमानत मंजूर की है। उन्होंने बताया कि हवा में फायरिंग के मामले में गिरफ्तार दोनों बॉडीगार्ड्स को भी राहत मिली है। उनके अनुसार, पुलिस जांच में जो तथ्य सामने आए, उन्हें केस डायरी में दर्ज किया गया और उसी आधार पर अदालत ने निर्णय लिया। क्या है पूरा मामला? यह मामला 4 जून 2026 को सामने आया था, जब खान ग्लोबल स्टडीज संस्थान के पास हुई कथित गोलीबारी का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसके बाद कदमकुआं थाना पुलिस ने कांड संख्या 418/2026 दर्ज कर खान सर, उनके दो सुरक्षा कर्मियों और अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस ने दोनों सुरक्षा कर्मियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अब अदालत से मिली अग्रिम जमानत के बाद खान सर को तत्काल गिरफ्तारी से राहत मिल गई है, जबकि मामले की कानूनी प्रक्रिया आगे भी जारी रहेगी। पुलिस जांच और अदालत में सुनवाई के आधार पर इस मामले में आगे की कार्रवाई तय होगी।
तेहरान, एजेंसियां। मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव लगातार गंभीर होता जा रहा है। अमेरिका द्वारा ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसने इन देशों में अमेरिकी हितों से जुड़े कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं। अमेरिकी ठिकानों पर हमले, जॉर्डन और कुवैत का जवाब ईरान के अनुसार, जॉर्डन के प्रिंस हसन एयरबेस स्थित ईंधन भंडार और मिसाइल डिपो को निशाना बनाया गया, जबकि बहरीन में अमेरिकी ड्रोन कमांड सेंटर पर हमला किया गया। दूसरी ओर, जॉर्डन ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणाली ने ईरान की चार मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया। कुवैत ने भी कहा कि उसकी एयर डिफेंस यूनिट्स ने कई मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया और देश की सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सक्रिय है। 300 से अधिक अमेरिकी हमलों का दावा अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने पिछले तीन दिनों में ईरान के 300 से अधिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है। इनमें केवल एक रात में करीब 140 सैन्य लक्ष्य शामिल थे। इसके जवाब में ईरान ने क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों और सहयोगी देशों पर हमले तेज कर दिए हैं। कुवैत ने बताया कि उत्तरी सीमा पर स्थित तीन चौकियों को नुकसान पहुंचा है, जबकि एक ड्रोन हमले में कुवैत ऑयल कंपनी के ऑफशोर ड्रिलिंग प्लेटफॉर्म पर तैनात एक कर्मचारी घायल हुआ है। ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि यदि उसके हमले नहीं रुके, तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को और बड़े पैमाने पर निशाना बनाया जाएगा। बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा अलर्ट जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देशों के बीच टकराव जल्द नहीं थमा, तो इसका असर वैश्विक सुरक्षा, तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
वॉशिंगटन/तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने दोबारा बातचीत की इच्छा जताई है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका भी वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन साथ ही स्पष्ट कर दिया कि दोनों देशों के बीच लागू युद्धविराम अब समाप्त हो चुका है। उनके इस बयान से पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ट्रंप बोले- ईरान बातचीत चाहता है डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि ईरान ने अमेरिका से बातचीत जारी रखने का अनुरोध किया है और वॉशिंगटन इसके लिए तैयार है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि युद्धविराम अब खत्म हो चुका है और यदि ईरान की ओर से हमले जारी रहे तो अमेरिका पहले से अधिक कड़ी सैन्य कार्रवाई करेगा। हालिया हमलों के बाद बढ़ा तनाव ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब पिछले दो दिनों में अमेरिका ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इसके जवाब में ईरान ने कतर, बहरीन और कुवैत की दिशा में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए मिसाइलें दागीं। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, कार्रवाई के दौरान ईरान में लगभग 90 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। इनमें मिसाइल लॉन्चर, हवाई अड्डों के रनवे और अन्य सैन्य प्रतिष्ठान शामिल थे। वहीं, ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम 14 लोगों की मौत हुई और 78 अन्य घायल हुए हैं। ट्रंप की नई चेतावनी नाटो शिखर सम्मेलन से लौटने के बाद ट्रंप ने कहा था कि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी कार्रवाई की गई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ईरान ने फिर हमला किया तो अमेरिका दस गुना अधिक ताकत से जवाब देगा। ट्रंप ने ईरान के बिजली संयंत्रों, समुद्री जल शोधन संयंत्रों और खर्ग द्वीप जैसे रणनीतिक ठिकानों को भी संभावित लक्ष्य बताया। तनाव कम कराने की कोशिशें तेज सैन्य टकराव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। इसी सिलसिले में कतर के मध्यस्थ तेहरान पहुंचे हैं। उनका उद्देश्य अमेरिका और ईरान के बीच रुकी हुई वार्ता को दोबारा शुरू कराने और क्षेत्रीय तनाव कम करने का रास्ता तैयार करना है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार फिलहाल वॉशिंगटन सीमित सैन्य कार्रवाई के साथ कूटनीतिक समाधान की रणनीति पर भी काम कर रहा है ताकि व्यापक युद्ध की स्थिति से बचा जा सके। बातचीत और सैन्य तैयारी साथ-साथ अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि जरूरत पड़ने पर सभी सैन्य विकल्प खुले हैं, लेकिन प्राथमिकता अब भी राजनयिक समाधान तलाशने की है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में कतर और अन्य क्षेत्रीय मध्यस्थों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि दोनों पक्ष बातचीत की मेज पर लौटते हैं तो पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को कम करने की संभावना बन सकती है, हालांकि मौजूदा हालात अभी भी बेहद संवेदनशील बने हुए हैं।
वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि यदि उनकी हत्या होती है और इसके पीछे ईरान का हाथ होता है, तो उन्होंने पहले से ऐसे निर्देश जारी कर रखे हैं कि ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा सैन्य हमला किया जाए। ट्रंप ने यह भी कहा कि वह खुद ईरान के "नंबर-1 टारगेट" हैं। ट्रंप बोले- पहले ही दे चुका हूं निर्देश अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि अगर उनके साथ कुछ भी होता है, तो अमेरिका ईरान पर ऐसी कार्रवाई करेगा जैसी दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी होगी। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि फिलहाल उनके पास ऐसी कोई नई खुफिया जानकारी नहीं है, जिससे लगे कि उन पर तत्काल कोई हमला होने वाला है। क्यों आया ट्रंप का यह बयान? ट्रंप का बयान ऐसे समय आया है जब हाल के दिनों में ऐसी रिपोर्टें सामने आई हैं कि इजरायल ने अमेरिका के साथ ऐसी खुफिया जानकारी साझा की है, जिसमें ईरान द्वारा अमेरिकी राष्ट्रपति को निशाना बनाने की कथित साजिश का उल्लेख किया गया है। इन रिपोर्टों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और बढ़ गया है। खुद को बताया ईरान का 'नंबर-1 टारगेट' ट्रंप ने कहा कि ईरान कई वर्षों से उन्हें निशाना बनाना चाहता है। उन्होंने हल्के अंदाज में कहा, "अगर मैं नहीं रहूंगा तो उम्मीद है कि आप मुझे याद करेंगे।" उन्होंने दावा किया कि वह ईरान के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य हैं और कहा कि ईरान के कई शीर्ष नेता पहले ही मारे जा चुके हैं तथा भविष्य में भी उसके नेतृत्व पर दबाव बना रहेगा। परमाणु कार्यक्रम पर दोहराया रुख ट्रंप ने अपने बयान में एक बार फिर कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर ईरान को परमाणु हथियार विकसित नहीं करने देगा। उनका कहना था कि यदि भविष्य में दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ता भी है, तो अमेरिका अपनी रणनीति के तहत उसका जवाब देगा। सुलेमानी की मौत के बाद बढ़ा विवाद न्यूयॉर्क पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2020 में ट्रंप के आदेश पर बगदाद में अमेरिकी ड्रोन हमले में ईरान के शीर्ष सैन्य कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हुई थी। इसके बाद से ट्रंप लगातार यह कहते रहे हैं कि ईरान उनसे बदला लेना चाहता है और वह खुद को ईरान के निशाने पर मानते हैं। बढ़ते तनाव पर दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच हाल के सैन्य घटनाक्रमों और तीखे बयानों के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर दोनों देशों पर बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक प्रयास जारी रहने के बावजूद दोनों पक्षों के बीच बढ़ती बयानबाजी क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा सकती है।
वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच एक बड़ा दावा सामने आया है। रिपोर्टों के मुताबिक, इजरायल ने अमेरिका को ऐसी खुफिया जानकारी दी, जिसमें दावा किया गया कि ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हत्या की साजिश रची है। बताया जा रहा है कि इसी इनपुट के बाद अमेरिका ने ईरान पर दोबारा सैन्य कार्रवाई तेज कर दी। इजरायल ने अमेरिका को क्या जानकारी दी? अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल ने वॉशिंगटन के साथ ऐसी खुफिया जानकारी साझा की, जिसमें कहा गया कि ईरान ट्रंप को निशाना बनाने की योजना पर काम कर रहा है। इसी इनपुट के बाद अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने सैन्य अभियान को फिर से गति दी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस जानकारी का हवाला देते हुए ट्रंप प्रशासन पर ईरान के खिलाफ कड़ा रुख अपनाने का दबाव बनाया। क्या इजरायल के इनपुट पर अमेरिका ने बढ़ाया हमला? हालांकि इस खुफिया जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने आशंका जताई है कि यह इनपुट अमेरिका को अधिक आक्रामक कार्रवाई के लिए प्रेरित करने की रणनीति भी हो सकती है। इसके बावजूद अमेरिकी सेना ने ईरान पर अपने हमले तेज कर दिए हैं, जिससे क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है। ट्रंप ने भी जताया था जान का खतरा हाल ही में नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से कहा था कि उन्हें ईरान से अपनी जान को खतरा है। उन्होंने कहा था, "वे मुझे खत्म करना चाहते हैं। मैं उनकी हर सूची में शामिल हूं। अभी तक मैं भाग्यशाली रहा हूं, लेकिन यह हमेशा नहीं चल सकता।" अमेरिका-ईरान तनाव फिर चरम पर कुछ समय पहले दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम (सीजफायर) लागू हुआ था, लेकिन हालिया घटनाओं के बाद हालात फिर से बिगड़ गए हैं। अमेरिका ने ईरान के कई ठिकानों पर कार्रवाई की है, जबकि ईरान भी जवाबी कदम उठा रहा है। इससे पूरे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका है। खामेनेई के अंतिम संस्कार के बाद बढ़ी संवेदनशीलता इसी बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। एक सप्ताह तक चले श्रद्धांजलि कार्यक्रमों के बाद उन्हें इमाम रजा दरगाह परिसर के पास दफनाया गया। अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के नए राजनीतिक दौर और अमेरिका-ईरान तनाव के बीच आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति और अधिक संवेदनशील हो सकती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।