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UPPSC Medical Professor Recruitment 2026 opens 1,156 vacancies with applications accepted until September 1
UPPSC Recruitment 2026: मेडिकल प्रोफेसर के 1156 पदों पर भर्ती, 1 सितंबर तक कर सकते हैं आवेदन

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मेडिकल क्षेत्र में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों के लिए बड़ी भर्ती सामने आई है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) ने मेडिकल प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के कुल 1156 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के जरिए ऑनलाइन फॉर्म भर सकते हैं। आवेदन करने की अंतिम तारीख 1 सितंबर 2026 निर्धारित की गई है। वहीं, आवेदन में किसी तरह का सुधार करने के लिए उम्मीदवारों को 8 सितंबर 2026 तक का समय मिलेगा। प्रोफेसर और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए अलग-अलग आयु सीमा भर्ती में शामिल पदों के अनुसार उम्मीदवारों की आयु सीमा अलग रखी गई है। मेडिकल प्रोफेसर: 35 से 55 वर्ष असिस्टेंट प्रोफेसर: 26 से 40 वर्ष आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट दी जाएगी। कौन कर सकता है आवेदन? इन पदों के लिए उम्मीदवार के पास मान्यता प्राप्त संस्थान से संबंधित मेडिकल योग्यता होनी चाहिए। भर्ती में MD, MS, DNB सहित निर्धारित शैक्षणिक और पेशेवर योग्यताएं मांगी गई हैं। अलग-अलग पदों के लिए योग्यता की शर्तें अलग हो सकती हैं, इसलिए आवेदन से पहले आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यान से पढ़ना जरूरी है। कितनी देनी होगी आवेदन फीस? आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन फीस और प्रोसेसिंग फीस का भुगतान करना होगा। General/OBC/EWS: ₹105 SC/ST: ₹56 दिव्यांग उम्मीदवार: केवल निर्धारित प्रोसेसिंग फीस फीस का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से किया जा सकता है। ऐसे भरें UPPSC Medical Professor Recruitment का फॉर्म उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान स्टेप्स के जरिए आवेदन कर सकते हैं: सबसे पहले UPPSC की आधिकारिक वेबसाइट uppsc.up.nic.in पर जाएं। वेबसाइट पर अपना OTR (One Time Registration) पूरा करें। संबंधित भर्ती के आवेदन लिंक पर क्लिक करें। मांगी गई सभी जानकारी सावधानी से दर्ज करें। जरूरी दस्तावेजों की स्कैन कॉपी अपलोड करें। निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान करें। फॉर्म सबमिट करने के बाद उसका प्रिंटआउट सुरक्षित रख लें। आवेदन की जरूरी तारीखें ऑनलाइन आवेदन शुरू: 20 अगस्त 2026 आवेदन की अंतिम तारीख: 1 सितंबर 2026 आवेदन में सुधार की अंतिम तारीख: 8 सितंबर 2026 उम्मीदवारों को सलाह है कि अंतिम तारीख का इंतजार किए बिना आवेदन प्रक्रिया पूरी कर लें। आवेदन से पहले पद के अनुसार शैक्षणिक योग्यता, आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों को आधिकारिक नोटिफिकेशन से जरूर जांच लें।  

surbhi अगस्त 20, 2026 0
Ayodhya mega job fair offers over 5,800 vacancies for candidates from 10th pass to graduates
अयोध्या में 6 अगस्त को मेगा रोजगार मेला, 10वीं पास से ग्रेजुएट तक के लिए 5800+ नौकरियां; जानें पूरी डिटेल

अयोध्या: नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए उत्तर प्रदेश के अयोध्या से अच्छी खबर है। उत्तर प्रदेश रोजगार मिशन के तहत अयोध्या में 6 अगस्त 2026 को एक बड़े रोजगार मेले का आयोजन किया जा रहा है। इस भर्ती अभियान में 22 से अधिक कंपनियों के शामिल होने की जानकारी दी गई है और करीब 5,800 से ज्यादा पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। खास बात यह है कि इस रोजगार मेले में फ्रेशर्स के साथ अनुभवी उम्मीदवारों को भी नौकरी पाने का मौका मिलेगा। 10वीं और 12वीं पास युवाओं के अलावा आईटीआई, डिप्लोमा और ग्रेजुएशन कर चुके अभ्यर्थी भी अपनी योग्यता के अनुसार अलग-अलग पदों के लिए हिस्सा ले सकते हैं। 6 अगस्त को कहां लगेगा रोजगार मेला? अयोध्या में आयोजित होने वाला यह रोजगार मेला 6 अगस्त 2026 को परमहंस डिग्री कॉलेज परिसर, विद्याकुंड, अयोध्या में लगाया जाएगा। रोजगार मेले में भाग लेने के लिए उम्मीदवारों से किसी तरह का शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि, मेले में शामिल होने से पहले अभ्यर्थियों को रोजगार संगम पोर्टल पर अपना पंजीकरण कराना होगा। 5800 से ज्यादा पदों पर भर्ती इस मेगा रोजगार मेले में अलग-अलग कंपनियां अपनी रिक्तियों के अनुसार उम्मीदवारों का चयन करेंगी। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, करीब 5,800 से अधिक पदों पर भर्ती का अवसर है। विभिन्न कंपनियों में उम्मीदवारों की योग्यता, अनुभव और संबंधित पद की जरूरत के आधार पर चयन किया जाएगा। इसलिए उम्मीदवारों को अपनी शैक्षणिक योग्यता और अनुभव से जुड़े दस्तावेज साथ लेकर जाना जरूरी होगा। किन पदों पर मिल सकती है नौकरी? रोजगार मेले में कई तरह के तकनीकी, सेल्स, ऑपरेशनल और सुपरवाइजरी पदों के लिए अवसर बताए गए हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: असिस्टेंट मशीन ऑपरेटर ट्रेनी सेल्स एग्जीक्यूटिव बिजनेस डेवलपमेंट एग्जीक्यूटिव वेलनेस एडवाइजर टेक्नीशियन प्रोडक्शन इंजीनियर ट्रेनी सेल्स मार्केटिंग रिप्रेजेंटेटिव मशीन ऑपरेटर साइट सुपरवाइजर रोबोटिक मशीन ऑपरेटर ऑपरेटर ट्रेनी इंजीनियर ट्रेनी ऑपरेटर सिक्योरिटी सर्विस अन्य विभिन्न पद उम्मीदवार अपनी योग्यता और रुचि के मुताबिक उपलब्ध पदों के लिए भर्ती प्रक्रिया में शामिल हो सकते हैं। 10वीं पास से ग्रेजुएट तक कर सकते हैं आवेदन इस रोजगार मेले की एक खास बात यह है कि अलग-अलग शैक्षणिक योग्यता वाले उम्मीदवारों के लिए अवसर उपलब्ध हैं। 10वीं, 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा और ग्रेजुएशन कर चुके अभ्यर्थी अपनी योग्यता के मुताबिक पदों के लिए हिस्सा ले सकते हैं। फ्रेशर उम्मीदवार भी इस अवसर का लाभ उठा सकते हैं। वहीं, पहले से काम कर चुके अनुभवी उम्मीदवारों के लिए भी विभिन्न पदों पर मौके उपलब्ध रहेंगे। उम्र सीमा क्या है? उपलब्ध जानकारी के अनुसार रोजगार मेले में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की उम्र कम से कम 18 वर्ष और अधिकतम 45 वर्ष तक होनी चाहिए। हालांकि, किसी खास कंपनी या पद के लिए अलग पात्रता शर्तें हो सकती हैं। इसलिए उम्मीदवारों को संबंधित पद की आवश्यकताओं की जानकारी पहले जांच लेनी चाहिए। कितनी मिलेगी सैलरी? रोजगार मेले में उपलब्ध पदों के अनुसार वेतन अलग-अलग हो सकता है। दी गई जानकारी के मुताबिक, चयनित उम्मीदवारों को लगभग 13,000 रुपये से 53,000 रुपये प्रति माह तक वेतन मिलने का अवसर हो सकता है। वास्तविक वेतन पद, कंपनी, योग्यता और अनुभव के आधार पर अलग हो सकता है। रजिस्ट्रेशन के लिए नहीं लगेगी फीस इस रोजगार मेले में शामिल होने के लिए रजिस्ट्रेशन फीस नहीं देनी होगी। उम्मीदवारों को पहले रोजगार संगम पोर्टल पर पंजीकरण करना होगा और इसके बाद निर्धारित स्थान पर पहुंचकर भर्ती प्रक्रिया में हिस्सा लेना होगा। रोजगार मेले में जाने वाले अभ्यर्थियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनका मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सक्रिय हो। मेले में जाते समय ये दस्तावेज जरूर रखें उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया के दौरान दस्तावेज सत्यापन के लिए जरूरी कागजात अपने साथ रखने चाहिए। इनमें प्रमुख रूप से: अपडेटेड रिज्यूम या बायोडाटा पासपोर्ट साइज फोटो आधार या अन्य पहचान पत्र सक्रिय मोबाइल नंबर ईमेल आईडी 10वीं और 12वीं की मार्कशीट/सर्टिफिकेट आईटीआई या डिप्लोमा प्रमाणपत्र, यदि लागू हो ग्रेजुएशन की डिग्री और संबंधित प्रमाणपत्र अनुभव प्रमाणपत्र, यदि लागू हो सभी दस्तावेजों की मूल प्रति के साथ आवश्यक प्रतियां रखना भी उपयोगी रहेगा। अयोध्या रोजगार मेले की जरूरी जानकारी एक नजर में जानकारी विवरण रोजगार मेला अयोध्या रोजगार मेला 2026 तारीख 6 अगस्त 2026 स्थान परमहंस डिग्री कॉलेज परिसर, विद्याकुंड, अयोध्या संभावित रिक्तियां 5,800+ पद कंपनियां 22 से अधिक योग्यता 10वीं, 12वीं, आईटीआई, डिप्लोमा, ग्रेजुएशन आदि आयु सीमा 18 से 45 वर्ष अनुमानित वेतन ₹13,000 से ₹53,000 प्रति माह तक आवेदन/रजिस्ट्रेशन शुल्क निशुल्क हेल्पलाइन 155330 नौकरी की तलाश कर रहे युवाओं के लिए बड़ा मौका अयोध्या का यह रोजगार मेला उन युवाओं के लिए खास अवसर हो सकता है जो लंबे समय से नौकरी की तलाश कर रहे हैं और कंपनियों से सीधे संपर्क करना चाहते हैं। खासकर फ्रेशर्स के लिए रोजगार मेले एक ही स्थान पर कई नियोक्ताओं तक पहुंचने का अवसर देते हैं। हालांकि, उम्मीदवारों को किसी भी पद पर आवेदन या चयन से पहले कंपनी, पद, वेतन, पात्रता और अन्य शर्तों की जानकारी अच्छी तरह जांच लेनी चाहिए। नौकरी के नाम पर किसी व्यक्ति या संस्था को पैसे देने से भी बचें।  

surbhi अगस्त 5, 2026 0
Calcutta High Court building in Kolkata as a petition challenges West Bengal's newly implemented Public Safety and Anti-Social Activities Control Act, 2026.
पश्चिम बंगाल के ‘गुंडा रोधी कानून’ को हाईकोर्ट में चुनौती, तत्काल सुनवाई से कलकत्ता हाईकोर्ट का इनकार

West Bengal Gunda Act News: पश्चिम बंगाल सरकार के नए ‘पश्चिम बंगाल जन सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधियों पर नियंत्रण अधिनियम, 2026’ (गुंडा रोधी कानून) के लागू होते ही इसे कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। हालांकि, हाईकोर्ट ने इस मामले में तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि याचिका पर नियमित प्रक्रिया के तहत सुनवाई होगी। कानून लागू होते ही दायर हुई जनहित याचिका सोमवार से लागू हुए इस कानून के खिलाफ मानवाधिकार कार्यकर्ता मिलन मालाकार ने कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दाखिल की है। याचिका में कानून को असंवैधानिक बताते हुए इसके क्रियान्वयन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि कानून के कई प्रावधान नागरिकों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हैं और इसका दुरुपयोग होने की आशंका है। हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई से किया इनकार कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तपब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति पार्थसारथी चटर्जी की खंडपीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील सब्यसाची चटर्जी ने मामले की तत्काल सुनवाई की मांग की। हालांकि, अदालत ने इस अनुरोध को स्वीकार नहीं किया और कहा कि मामले की सुनवाई सामान्य न्यायिक प्रक्रिया के अनुसार तय की जाएगी। कानून के किन प्रावधानों पर उठ रहे हैं सवाल? याचिका में कानून की कई धाराओं को संविधान के विरुद्ध बताया गया है। प्रमुख आपत्तियां इस प्रकार हैं: बिना मुकदमे के 12 महीने तक हिरासत कानून के तहत जिलाधिकारी और पुलिस आयुक्त को यह अधिकार दिया गया है कि वे किसी व्यक्ति को भविष्य में असामाजिक गतिविधियों की आशंका के आधार पर बिना मुकदमा चलाए अधिकतम एक वर्ष तक निवारक हिरासत में रख सकते हैं। वकील की सहायता पर प्रतिबंध कानून की धारा 10(4) के अनुसार, हिरासत में लिए गए व्यक्ति को सलाहकार बोर्ड के समक्ष सामान्य रूप से अपने वकील के माध्यम से पक्ष रखने की अनुमति नहीं होगी, जब तक कि बोर्ड विशेष अनुमति न दे। ‘गुंडा’ की परिभाषा पर विवाद याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि कानून में ‘गुंडा’ और ‘असामाजिक गतिविधियों’ की परिभाषा अत्यधिक व्यापक और अस्पष्ट है। इससे राजनीतिक विरोध, शांतिपूर्ण प्रदर्शन या असहमति व्यक्त करने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की आशंका है। राज्य सरकार का क्या कहना है? राज्य सरकार का कहना है कि यह कानून राजनीतिक हिंसा, रंगदारी, संगठित अपराध और असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार के अनुसार, राज्य में कानून-व्यवस्था को मजबूत करने और अपराध पर सख्ती से रोक लगाने के लिए इस तरह के कानून की आवश्यकता थी। विपक्ष और मानवाधिकार संगठनों का विरोध विपक्षी दलों और कई मानवाधिकार संगठनों ने इस कानून का विरोध किया है। उनका आरोप है कि इससे प्रशासन और पुलिस को अत्यधिक अधिकार मिल जाएंगे, जिनका दुरुपयोग हो सकता है। कानूनी विशेषज्ञों की राय कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि नए कानून के कई प्रावधान राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) जैसी निवारक हिरासत की व्यवस्था से मिलते-जुलते हैं। उनका मानना है कि यदि इन शक्तियों के उपयोग पर पर्याप्त निगरानी नहीं रही, तो नागरिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों पर प्रभाव पड़ सकता है। अब इस मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट नियमित सुनवाई के दौरान कानून की संवैधानिक वैधता और याचिकाकर्ताओं की आपत्तियों पर विचार करेगा।  

Deepshikha जुलाई 14, 2026 0
Women candidates applying online for UP Anganwadi Bharti 2026 recruitment in Agra, Mathura and other Uttar Pradesh districts.
UP Anganwadi Bharti 2026: आगरा-मथुरा समेत 6 जिलों में 1110 पदों पर भर्ती, 12वीं पास महिलाओं के लिए सुनहरा मौका

उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रही महिलाओं के लिए अच्छी खबर है। UP Anganwadi Bharti 2026 के तहत राज्य के छह नए जिलों में 1110 आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पदों पर भर्ती के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक और पात्र महिला अभ्यर्थी अपने जिले के अनुसार निर्धारित अंतिम तिथि तक ऑनलाइन आवेदन कर सकती हैं। यह भर्ती आगरा, मथुरा, संभल, औरैया, श्रावस्ती और चंदौली जिलों में की जाएगी। आवेदन केवल ऑनलाइन माध्यम से स्वीकार किए जाएंगे। किन जिलों में कितने पद? यूपी सरकार द्वारा जारी भर्ती अधिसूचना के अनुसार विभिन्न जिलों में रिक्त पद इस प्रकार हैं- जिला रिक्त पद आवेदन की अंतिम तिथि आगरा 322 25 जुलाई 2026 मथुरा 236 24 जुलाई 2026 औरैया 181 28 जुलाई 2026 संभल 177 28 जुलाई 2026 चंदौली 126 25 जुलाई 2026 श्रावस्ती 68 27 जुलाई 2026 कुल 1110 - कौन कर सकता है आवेदन? भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार को निम्नलिखित पात्रता पूरी करनी होगी- केवल महिला अभ्यर्थी आवेदन कर सकती हैं। किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना आवश्यक है। ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट उम्मीदवार भी आवेदन के पात्र हैं। अभ्यर्थी की आयु 18 से 35 वर्ष के बीच होनी चाहिए। आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। ग्रामीण क्षेत्र की उम्मीदवार संबंधित ग्राम सभा और शहरी क्षेत्र की उम्मीदवार संबंधित वार्ड की निवासी होनी चाहिए। कैसे होगा चयन? इस भर्ती में किसी प्रकार की लिखित परीक्षा नहीं होगी। उम्मीदवारों का चयन शैक्षणिक योग्यता के आधार पर तैयार की जाने वाली मेरिट लिस्ट से किया जाएगा। मेरिट 12वीं, समकक्ष योग्यता, स्नातक या स्नातकोत्तर में प्राप्त अंकों के आधार पर बनेगी। 10वीं के अंक मेरिट में शामिल नहीं किए जाएंगे। CGPA या ग्रेडिंग सिस्टम से प्राप्त अंकों को निर्धारित नियमों के अनुसार प्रतिशत में बदला जाएगा। आवेदन कैसे करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए आसान चरणों का पालन करके आवेदन कर सकते हैं- आधिकारिक वेबसाइट upanganwadibharti.in पर जाएं। अपने जिले की भर्ती अधिसूचना चुनें। Apply Online/New Registration पर क्लिक करें। आधार नंबर और मोबाइल नंबर से पंजीकरण करें। आवेदन फॉर्म में सभी आवश्यक जानकारी भरें। फोटो, हस्ताक्षर और जरूरी दस्तावेज अपलोड करें। सभी विवरण जांचकर फॉर्म सबमिट करें। भविष्य के लिए आवेदन पत्र का प्रिंट या PDF सुरक्षित रखें। समय रहते करें आवेदन हर जिले के लिए आवेदन की अंतिम तिथि अलग-अलग तय की गई है। ऐसे में उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि अंतिम तिथि का इंतजार न करें और सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार रखकर समय पर आवेदन प्रक्रिया पूरी करें।  

surbhi जुलाई 14, 2026 0
UP Forest Guard recruitment 2026 notification announces 708 vacancies for Forest Guard and Wildlife Guard posts.
Forest Guard Bharti 2026: यूपी में वन रक्षक और वन्य जीव रक्षक के 708 पदों पर भर्ती, 12वीं पास उम्मीदवार करें आवेदन, ₹63,200 तक मिलेगी सैलरी

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए शानदार मौका आया है। उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने वन रक्षक (Forest Guard) और वन्य जीव रक्षक (Wildlife Guard) के कुल 708 पदों पर भर्ती का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। यह भर्ती उन अभ्यर्थियों के लिए विशेष अवसर है, जिन्होंने 12वीं (इंटरमीडिएट) पास की है और UPSSSC PET-2025 परीक्षा में शामिल होकर वैध नॉर्मलाइज्ड स्कोर प्राप्त किया है। चयनित उम्मीदवारों को लेवल-2 पे स्केल के तहत ₹19,900 से ₹63,200 प्रति माह तक वेतन मिलेगा। 708 पदों पर होगी भर्ती भर्ती के तहत विभिन्न श्रेणियों में कुल 708 पद भरे जाएंगे। वन रक्षक (सामान्य) – 318 पद वन्य जीव रक्षक (सामान्य) – 10 पद वन रक्षक (विशेष चयन) – 329 पद वन्य जीव रक्षक (विशेष चयन) – 51 पद कौन कर सकता है आवेदन? आवेदन करने के लिए उम्मीदवार का किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास होना अनिवार्य है। इसके साथ ही अभ्यर्थी ने UPSSSC PET-2025 परीक्षा दी हो और उसका वैध नॉर्मलाइज्ड स्कोरकार्ड उपलब्ध होना चाहिए। आयु सीमा न्यूनतम आयु: 18 वर्ष अधिकतम आयु: 40 वर्ष आयु की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी। अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अन्य आरक्षित वर्गों के उम्मीदवारों को सरकारी नियमों के अनुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी। शारीरिक योग्यता पुरुष उम्मीदवार सामान्य/ओबीसी/एससी – न्यूनतम लंबाई 168 सेमी एसटी – न्यूनतम लंबाई 160 सेमी महिला उम्मीदवार सामान्य/ओबीसी/एससी – न्यूनतम लंबाई 152 सेमी एसटी – 147 सेमी (5 सेमी की छूट) महत्वपूर्ण तिथियां ऑनलाइन आवेदन शुरू: 30 जून 2026 आवेदन की अंतिम तिथि: 20 जुलाई 2026 इच्छुक उम्मीदवार अंतिम तिथि का इंतजार किए बिना समय रहते आवेदन पूरा कर लें। कितना मिलेगा वेतन? चयनित अभ्यर्थियों को लेवल-02 पे स्केल के तहत ₹19,900 से ₹63,200 प्रति माह तक वेतन मिलेगा। इसके अलावा सरकारी नियमों के अनुसार अन्य भत्तों का लाभ भी दिया जाएगा। चयन प्रक्रिया भर्ती प्रक्रिया कई चरणों में पूरी होगी। PET-2025 स्कोर के आधार पर उम्मीदवारों की शॉर्टलिस्टिंग मुख्य लिखित परीक्षा शारीरिक मानक परीक्षा (PST) शारीरिक दक्षता परीक्षा (PET) मेडिकल परीक्षण अंतिम मेरिट सूची शारीरिक दक्षता परीक्षा में पुरुष अभ्यर्थियों को 10 किलोग्राम वजन के साथ 4 घंटे में 25 किलोमीटर तथा महिला अभ्यर्थियों को 14 किलोग्राम वजन के साथ 4 घंटे में 14 किलोमीटर की दौड़ पूरी करनी होगी। आवेदन शुल्क इस भर्ती में सभी श्रेणियों के उम्मीदवारों के लिए आवेदन शुल्क ₹25 निर्धारित किया गया है। आवेदन के दौरान उम्मीदवारों को PET-2025 रोल नंबर, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी, जाति प्रमाण पत्र (यदि लागू हो), मूल निवास प्रमाण पत्र और अन्य आवश्यक दस्तावेजों की जानकारी दर्ज करनी होगी। आवेदन से पहले नोटिफिकेशन जरूर पढ़ें उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि आवेदन करने से पहले भर्ती का आधिकारिक नोटिफिकेशन ध्यानपूर्वक पढ़ें और पात्रता, दस्तावेज तथा चयन प्रक्रिया की पूरी जानकारी सुनिश्चित करने के बाद ही आवेदन करें। किसी भी प्रकार की त्रुटि आवेदन रद्द होने का कारण बन सकती है।  

surbhi जुलाई 3, 2026 0
UP vacancy 2026
यूपी में 2085 पदों पर वैकेंसी, 25 अप्रैल से आवेदन

लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश सहकारी संस्था सेवा बोर्ड (UPCISB) ने 2026 में 2085 पदों पर भर्ती के लिए नोटिफिकेशन जारी किया है। यह भर्ती बैंकिंग, नॉन-बैंकिंग और तकनीकी सेवाओं के विभिन्न पदों पर होगी। 25 अप्रैल से उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट www.upcisb.upsdc.gov.in पर जाकर अप्लाई कर सकते हैं।   शैक्षणिक योग्यता : मैनेजर : बी.कॉम में 55% अंक या इकोनॉमिक्स/मैथ्स/स्टैटिक्स में न्यूनतम 55% अंकों के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री। कंप्यूटर साइंस में ओ लेवल डिग्री। जूनियर मैनेजर : बी.कॉम में 55% अंक या बी.टेक (सीएस/आईटी), बीसीए, एमसीए या बैंकिंग/फायनेंस/एचआर में बीबीए/एमबीए की डिग्री। असिस्टेंट/कैशियर : न्यूनतम 55% अंकों के साथ ग्रेजुएशन की डिग्री। सीसीसी कंप्यूटर सर्टिफिकेट प्राप्त होना चाहिए। असिस्टेंट इंजीनियर : सिविल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन की डिग्री। जूनियर इंजीनियर (सिविल) : सिविल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा या ग्रेजुएशन की डिग्री। स्टेनोग्राफर : ग्रेजुएशन की डिग्री। हिंदी/अंग्रेजी शॉर्टहैंड (80 शब्द प्रति मिनट), टाइपिंग (30/40 शब्द प्रति मिनट) सीसीसी सर्टिफिकेट जरूरी। असिस्टेंट अकाउंटेंट : 50% अंकों के साथ बीएससी, सीसीसी या ‘ओ’ लेवल कंप्यूटर कोर्स किया होना जरूरी है। उम्र सीमा : न्यूनतम : 21 साल अधिकतम : 40 साल फीस : सामान्य/ओबीसी : 500 रुपए एससी/एसटी : 250 रुपए चयन प्रक्रिया : प्रीलिम्स एग्जाम मेन्स एग्जाम इंटरव्यू परीक्षा पैटर्न : प्रीलिम्स एग्जाम : सब्जेक्ट    क्वेश्चन    मार्क्स क्वांटिटेटिव एप्टीट्यूड 35    35 रीजनिंग एबिलिटी 35    35 हिंदी एंड इंग्लिश 20    20 कोऑपरेटिव 10    10 टोटल 100    100 मेन्स एग्जाम : पोस्ट टाइप    क्वेश्चन    मार्क्स आल पोस्ट    120    120 सैलरी : मैनेजर : 34,000 - 88,000 रुपए प्रतिमाह जूनियर मैनेजर : 29,600 - 82,100 रुपए प्रतिमाह असिस्टेंट/कैशियर : 25,620 - 64,670 रुपए प्रतिमाह इंजीनियर : 35,400 - 1,77,500 रुपए प्रतिमाह ऐसे करें आवेदन : ऑफिशियल वेबसाइट www.upcisb.upsdc.gov.in पर जाएं। UPCISB Recruitment 2026 पर क्लिक करें। रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को पूरा करें। पर्सनल और एजुकेशनल डिटेल्स दर्ज करें। एजुकेशनल डॉक्यूमेंट्स सहित फोटो और सिग्नेचर अपलोड करें। आवेदन फीस भरें। अब सब्मिट बटन पर क्लिक करें। आवेदन फॉर्म डाउनलोड कर लें। इसका प्रिंटआउट निकाल कर रखें।

Unknown अप्रैल 16, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh अगस्त 14, 2026 0