हिंदू धर्म में पूजा के दौरान दीपक जलाना शुभ और मंगलकारी माना जाता है। मान्यता है कि दीपक की लौ केवल प्रकाश ही नहीं देती, बल्कि सकारात्मक ऊर्जा का भी प्रतीक होती है। कई धार्मिक मान्यताओं और लोकविश्वासों के अनुसार, पूजा के समय दीपक की लौ में बनने वाली कुछ आकृतियां जीवन से जुड़े शुभ-अशुभ संकेत भी दे सकती हैं। ज्योतिष एवं वास्तु से जुड़े पारंपरिक मतों के अनुसार, दीपक की लौ में बनने वाली आकृतियों को दैवीय संकेत माना जाता है। हालांकि, इन मान्यताओं का वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है और इन्हें धार्मिक आस्था एवं परंपरागत विश्वास के रूप में ही देखा जाना चाहिए। आइए जानते हैं कि दीपक की लौ में दिखाई देने वाली अलग-अलग आकृतियों का पारंपरिक अर्थ क्या माना जाता है। दीपक की लौ में दिखने वाले शुभ संकेत त्रिशूल, ॐ या स्वास्तिक जैसी आकृति धार्मिक मान्यता के अनुसार यदि दीपक की लौ में त्रिशूल, ॐ या स्वास्तिक जैसी आकृति दिखाई दे, तो इसे अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि यह ईश्वर की विशेष कृपा और सकारात्मक ऊर्जा का संकेत हो सकता है। साथ ही जीवन में चल रही बाधाएं धीरे-धीरे दूर होने की संभावना मानी जाती है। फूल जैसी आकृति यदि लौ में कमल या गुलाब जैसे फूल की आकृति प्रतीत हो, तो पारंपरिक मान्यता के अनुसार यह इस बात का संकेत माना जाता है कि आपकी पूजा-आराधना स्वीकार हो रही है। इसे आने वाले शुभ समाचार और मनोकामनाओं की पूर्ति से भी जोड़ा जाता है। हंस या मोर की आकृति हंस और मोर दोनों को भारतीय संस्कृति में शुभता, ज्ञान और समृद्धि का प्रतीक माना गया है। यदि दीपक की लौ में ऐसी आकृति दिखाई दे, तो इसे परिवार में सुख-शांति, प्रेम और मानसिक संतुलन का संकेत माना जाता है। भगवान गणेश जैसी आकृति यदि लौ में भगवान गणेश का स्वरूप प्रतीत हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह कार्यों में आ रही बाधाओं के दूर होने और नए शुभ कार्यों के सफल होने का संकेत माना जाता है। दीपक की लौ में दिखाई देने वाले सतर्क करने वाले संकेत दो भागों में बंटी हुई लौ यदि दीपक की लौ बीच से दो हिस्सों में विभाजित दिखाई दे, तो पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इसे शुभ नहीं माना जाता। इसे परिवार में मतभेद, आर्थिक चुनौतियों या किसी प्रकार की अस्थिरता का संकेत माना जाता है। बिना हवा के काला धुआं निकलना यदि वातावरण शांत होने के बावजूद दीपक से लगातार काला धुआं निकल रहा हो, तो लोकमान्यताओं के अनुसार इसे नकारात्मक ऊर्जा का संकेत माना जाता है। ऐसी स्थिति में घर की साफ-सफाई, सकारात्मक वातावरण और पूजा-पाठ पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी जाती है। लगातार फड़फड़ाती हुई लौ यदि दीपक की लौ बिना स्पष्ट कारण के लगातार तेज़ी से कांपती या फड़फड़ाती रहे, तो इसे आने वाली चुनौतियों, अनावश्यक खर्चों या स्वास्थ्य संबंधी सावधानी बरतने का संकेत माना जाता है। ध्यान रखने योग्य बात धार्मिक मान्यताएं व्यक्ति की आस्था और परंपराओं पर आधारित होती हैं। दीपक की लौ में दिखाई देने वाली आकृतियों को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परंपराओं में अलग-अलग मान्यताएं प्रचलित हैं। इन्हें भविष्य की निश्चित भविष्यवाणी या वैज्ञानिक तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। सकारात्मक सोच, सत्कर्म और नियमित पूजा ही जीवन में मानसिक शांति और आत्मविश्वास का आधार बनते हैं।
दुबई, एजेंसियां। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) ने 2028 पुरुष T20 वर्ल्ड कप के फॉर्मेट में बड़े बदलावों को मंजूरी दे दी है। नए प्रारूप के तहत टूर्नामेंट में 20 टीमें हिस्सा लेंगी, लेकिन अब प्रतियोगिता ग्रुप स्टेज, एलिमिनेटर, सुपर 10 और नॉकआउट चरणों में खेली जाएगी। ICC का कहना है कि नए फॉर्मेट का उद्देश्य अधिक प्रतिस्पर्धी मुकाबले और उभरती टीमों को बेहतर अवसर देना है। एलिमिनेटर राउंड से बढ़ेगा रोमांच नए फॉर्मेट में ग्रुप चरण के बाद कुछ टीमें सीधे अगले दौर में पहुंचेंगी, जबकि अन्य क्वालीफाई करने वाली टीमें एलिमिनेटर मुकाबले खेलेंगी। इन मुकाबलों के विजेता आगे बढ़ेंगे, जबकि हारने वाली टीमों का सफर यहीं समाप्त हो जाएगा। 'सुपर 10' में होगा खिताब का असली मुकाबला एलिमिनेटर के बाद 10 टीमें 'सुपर 10' चरण में पहुंचेंगी। यहां सभी टीमों को दो समूहों में बांटा जाएगा और प्रत्येक टीम अपने समूह की अन्य टीमों से मुकाबला करेगी। इसके बाद शीर्ष टीमें सेमीफाइनल में जगह बनाएंगी। उभरती टीमों को मिलेगा बड़ा मौका ICC के अनुसार, नए फॉर्मेट से एसोसिएट और उभरती क्रिकेट टीमों को अधिक प्रतिस्पर्धी मैच खेलने का अवसर मिलेगा। साथ ही बड़े देशों के बीच अधिक हाई-वोल्टेज मुकाबले देखने को मिल सकते हैं। 2028 से लागू होगा नया प्रारूप ICC ने स्पष्ट किया है कि नया फॉर्मेट 2028 पुरुष T20 वर्ल्ड कप से लागू होगा। इस टूर्नामेंट की मेजबानी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड संयुक्त रूप से करेंगे। नए प्रारूप को लेकर क्रिकेट जगत में उत्सुकता बढ़ गई है।
आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष की योगिनी एकादशी इस वर्ष 10 जुलाई 2026 (शुक्रवार) को मनाई जाएगी। यह एकादशी भगवान श्रीहरि विष्णु को समर्पित मानी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से पापों का नाश होता है तथा सुख-समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति होती है। वास्तु शास्त्र में भी योगिनी एकादशी से पहले घर में कुछ विशेष बदलाव करने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इन उपायों से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, ये मान्यताएं धार्मिक और पारंपरिक विश्वासों पर आधारित हैं। 1. मुख्य द्वार की अच्छी तरह करें सफाई वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार को सकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश द्वार माना जाता है। योगिनी एकादशी से पहले इसकी अच्छी तरह सफाई करें। व्रत वाले दिन सुबह मुख्य द्वार पर हल्दी या कुमकुम से स्वास्तिक का चिन्ह बनाना शुभ माना जाता है। 2. ईशान कोण को रखें साफ और व्यवस्थित घर का उत्तर-पूर्व भाग यानी ईशान कोण पूजा और देव स्थान के लिए शुभ माना जाता है। इस स्थान से कबाड़, टूटी-फूटी वस्तुएं और डस्टबिन हटा दें। यदि संभव हो तो यहां गंगाजल का छिड़काव करें और भगवान विष्णु तथा मां लक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर पूजा करें। 3. सेंधा नमक वाले पानी से करें सफाई एकादशी से एक दिन पहले पूरे घर में सेंधा नमक मिले पानी से पोंछा लगाने की परंपरा कई लोग अपनाते हैं। इसके बाद भीमसेनी कपूर और लौंग का धुआं पूरे घर में करने की भी मान्यता है, जिसे नकारात्मकता दूर करने और वातावरण को शुद्ध रखने से जोड़ा जाता है। 4. तिजोरी या धन रखने का स्थान रखें व्यवस्थित एकादशी से पहले तिजोरी या जहां धन रखा जाता है, उस स्थान की अच्छी तरह सफाई करें। अनावश्यक कागजात हटा दें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत वाले दिन लाल या पीले कपड़े में हल्दी की गांठ और गोमती चक्र रखकर तिजोरी में रखने से आर्थिक उन्नति के योग बनते हैं। 5. पूजा स्थान को करें शुद्ध और सजाएं योगिनी एकादशी से पहले घर के पूजा स्थान की साफ-सफाई करें। भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा के लिए दीपक, फूल और प्रसाद की उचित व्यवस्था करें। साफ और व्यवस्थित पूजा स्थल को शुभ माना जाता है और इससे पूजा का वातावरण भी सकारात्मक बनता है। धार्मिक मान्यता धार्मिक ग्रंथों और लोक मान्यताओं के अनुसार, योगिनी एकादशी का व्रत श्रद्धा और नियमपूर्वक करने से भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है। हालांकि, वास्तु उपायों के प्रभाव को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं और इन्हें आस्था एवं परंपरा के आधार पर ही देखा जाता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के बाद कक्षा 8 की सामाजिक विज्ञान (भाग-2) की संशोधित पाठ्यपुस्तक जारी कर दी है। नई पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े विवादित अध्याय में व्यापक बदलाव किए गए हैं और पहले शामिल विवादास्पद संदर्भों को हटाकर पाठ को अधिक संतुलित और पारंपरिक नागरिक शास्त्र के स्वरूप में प्रस्तुत किया गया है। न्यायपालिका अध्याय में किए गए बड़े बदलाव संशोधित अध्याय में अब न्याय, संवैधानिक उपचार, अदालतों की संरचना, न्यायाधिकरण , जनहित याचिका और वैकल्पिक विवाद समाधान जैसे विषयों पर अधिक जोर दिया गया है। पहले शामिल न्यायपालिका पर आलोचनात्मक टिप्पणियों और भ्रष्टाचार संबंधी संदर्भों को हटा दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट की आपत्ति के बाद हुआ संशोधन इस वर्ष की शुरुआत में सुप्रीम कोर्ट ने पुस्तक में न्यायपालिका से जुड़े कुछ अंशों पर स्वतः संज्ञान लिया था। इसके बाद NCERT ने पुस्तक का वितरण रोक दिया था और संशोधन की प्रक्रिया शुरू की थी। संशोधित संस्करण अब औपचारिक रूप से छात्रों के लिए जारी कर दिया गया है। नई किताबें स्कूलों तक पहुंचाने की तैयारी NCERT ने राज्यों और संबद्ध विद्यालयों को संशोधित पाठ्यपुस्तक उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परिषद का कहना है कि नए संस्करण का उद्देश्य छात्रों को न्यायपालिका की भूमिका और भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था की बेहतर एवं संतुलित समझ प्रदान करना है।
Astrology Remedies: बढ़ती महंगाई, अनिश्चित आय और लगातार बढ़ते खर्चों के बीच आज बड़ी संख्या में लोग आर्थिक परेशानियों का सामना कर रहे हैं। कई बार अच्छी कमाई और अथक मेहनत के बावजूद धन घर में टिक नहीं पाता या अचानक आने वाले खर्च आर्थिक संतुलन बिगाड़ देते हैं। ज्योतिष शास्त्र में ऐसे समय के लिए कुछ पारंपरिक और सरल उपाय बताए गए हैं, जिन्हें श्रद्धा और नियमितता के साथ करने से आर्थिक बाधाओं में कमी आने और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ने की मान्यता है। हालांकि, यह सभी उपाय धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित हैं। इनका कोई वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है। शुक्रवार को झाड़ू दान करने की परंपरा ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, लंबे समय से आर्थिक तंगी का सामना कर रहे लोगों को शुक्रवार के दिन किसी मंदिर में झाड़ू दान करने की सलाह दी जाती है। झाड़ू को मां लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि इससे घर की नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और धन प्राप्ति के नए अवसर बनने लगते हैं। धनिया का उपाय माना जाता है शुभ धन वृद्धि के लिए मंगलवार या गुरुवार का दिन शुभ माना गया है। इस दिन एक मिट्टी के पात्र में 21 रुपये के सिक्के रखकर उसके ऊपर मिट्टी डाल दें और उसमें धनिया के बीज बो दें। नियमित रूप से पानी देने के बाद यदि पौधा हरा-भरा विकसित होता है तो इसे शुभ संकेत माना जाता है। बाद में सिक्कों को निकालकर लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखने की परंपरा है। अशोक और केले की जड़ से जुड़े उपाय मान्यता के अनुसार, शुक्रवार को अशोक के पेड़ की जड़ लाकर गंगाजल से शुद्ध करने के बाद लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में रखना शुभ माना जाता है। वहीं गुरुवार के दिन केले के वृक्ष की जड़ को पीले कपड़े में बांधकर धारण करने की भी परंपरा है। ज्योतिष शास्त्र में इन्हें आर्थिक बाधाओं को कम करने वाला उपाय माना गया है। सूखे नारियल का विशेष उपाय शनिवार के दिन एक सूखे नारियल में आटा, गुड़, तिल और चीनी भरकर किसी सुनसान स्थान पर भूमि में दबाने की मान्यता प्रचलित है। माना जाता है कि इससे ग्रह दोषों के कारण धन प्राप्ति में आने वाली रुकावटें कम होती हैं। इसके अलावा शनिवार को चींटियों को आटा खिलाना और शनि देव को सरसों के तेल का दीपक अर्पित करना भी शुभ माना जाता है। समुद्री नमक से सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने की मान्यता घर में सकारात्मक वातावरण बनाए रखने के लिए पोछे के पानी में थोड़ा समुद्री नमक मिलाने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा कम होती है, परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है और आर्थिक उन्नति के मार्ग खुलते हैं। कुछ लोग घर में एक कटोरी में समुद्री नमक रखकर समय-समय पर उसे बदलने की परंपरा भी अपनाते हैं।
नई दिल्ली: यदि आपके व्यापार या दुकान में लगातार मंदी, आर्थिक नुकसान या काम में रुकावटें आ रही हैं, तो ज्योतिष शास्त्र में कुछ ऐसे उपाय बताए गए हैं जो सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने और बाधाओं को कम करने में सहायक माने जाते हैं। मान्यता है कि शनिवार का दिन शनि देव को समर्पित होता है और इस दिन किए गए कुछ विशेष उपाय व्यापार में स्थिरता और उन्नति के रास्ते खोल सकते हैं। ज्योतिष विशेषज्ञ पिनाकी मिश्रा के अनुसार, व्यापार में सफलता केवल पूंजी पर निर्भर नहीं करती, बल्कि कर्म, समय और प्रतिष्ठा का संतुलन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में शनिवार के उपाय इस संतुलन को मजबूत करने का माध्यम माने जाते हैं। 1. व्यापार की बाधाएं दूर करने के लिए करें पीपल का उपाय यदि कारोबार में लगातार रुकावटें आ रही हैं, तो शनिवार के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना शुभ माना जाता है। ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, पीपल का वृक्ष शनि ऊर्जा और कर्मफल से जुड़ा माना जाता है। इस उपाय से: रुके हुए कार्यों में गति आती है। निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है। धैर्य और आत्मविश्वास बढ़ता है। 2. अनावश्यक खर्च कम करने के लिए तिजोरी में रखें शमी का पत्ता शनिवार के दिन शमी का एक पत्ता लेकर उसे अपनी दुकान या तिजोरी में रखने की परंपरा भी प्रचलित है। मान्यता है कि शमी वृक्ष स्थायित्व और संरक्षण का प्रतीक है। इस उपाय से: धन संचय की क्षमता बढ़ती है। फिजूल खर्चों पर नियंत्रण होता है। आर्थिक स्थिरता मजबूत होती है। 3. कमाई बढ़ाने के लिए जरूरतमंदों को कराएं भोजन शनि देव को सेवा और कर्म का कारक माना जाता है। ऐसे में शनिवार के दिन अपनी क्षमता के अनुसार किसी श्रमिक या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना शुभ माना गया है। मान्यता के अनुसार, इससे: व्यापार में सहयोग बढ़ता है। कर्मचारियों का विश्वास मजबूत होता है। नए अवसर मिलने की संभावना बनती है। 4. नकारात्मक ऊर्जा दूर करने के लिए करें काले तिल का उपाय शनिवार के दिन दुकान के मुख्य द्वार पर काले तिल अर्पित करने की भी मान्यता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, काले तिल शनि तत्व से जुड़े होते हैं। ऐसा करने से: नकारात्मक ऊर्जा कम होती है। सकारात्मक वातावरण बनता है। कार्यों में सुचारुता बनी रहती है। 5. लेन-देन की समस्याओं से राहत के लिए काले कुत्ते को खिलाएं रोटी यदि व्यापार में बार-बार भुगतान अटक रहे हों या आर्थिक परेशानियां बढ़ रही हों, तो शनिवार के दिन काले कुत्ते को तेल लगी रोटी खिलाना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस उपाय से: शनि दोष का प्रभाव कम होता है। आर्थिक नुकसान की आशंका घटती है। लेन-देन संबंधी अड़चनें दूर होती हैं। ध्यान रखें ये सभी उपाय ज्योतिषीय मान्यताओं और धार्मिक विश्वासों पर आधारित हैं। इनके परिणाम व्यक्ति की आस्था और मान्यताओं के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। भारत में घरों, दुकानों और वाहनों के बाहर नींबू और मिर्च टांगने की परंपरा काफी पुरानी है। आज भी कई लोग इसे बुरी नजर और नकारात्मक ऊर्जा से बचाव का तरीका मानते हैं। हालांकि कुछ लोग इसे अंधविश्वास कहते हैं, लेकिन इसके पीछे धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वैज्ञानिक तर्क भी जुड़े हुए हैं। बुरी नजर से बचाने की मान्यता मान्यता है कि नींबू और मिर्च नकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर समाहित कर लेते हैं। लोग मानते हैं कि नींबू बुरी शक्तियों को सोख लेता है, जबकि मिर्च ईर्ष्या और नकारात्मकता को खत्म करने का काम करती है। इसी कारण व्यापारिक प्रतिष्ठानों और घरों के मुख्य द्वार पर इसे लटकाया जाता है। कई लोग यह भी मानते हैं कि जब नींबू-मिर्च सूखकर काले पड़ जाते हैं, तो इसका मतलब होता है कि उन्होंने सारी नकारात्मक ऊर्जा अपने अंदर ले ली है। वास्तु और सकारात्मक ऊर्जा से भी जुड़ी है परंपरा वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के मुख्य द्वार पर नींबू-मिर्च लगाने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं कर पाती। इससे घर का वातावरण सकारात्मक बना रहता है और सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। वैज्ञानिक कारण भी हैं मौजूद विशेषज्ञों के अनुसार पुराने समय में कीड़े-मकोड़ों को दूर रखने के लिए प्राकृतिक उपाय अपनाए जाते थे। नींबू की तेज खुशबू और मिर्च की तीखी गंध मक्खियों और कीड़ों को दूर रखने में मदद करती थी। यही वजह है कि इसे प्राकृतिक रिपेलेंट के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। हर सप्ताह बदलने की परंपरा परंपरा के अनुसार नींबू-मिर्च को सप्ताह में एक बार, विशेष रूप से शनिवार को बदलना शुभ माना जाता है। माना जाता है कि समय के साथ यह नकारात्मक ऊर्जा को अपने अंदर समेट लेते हैं, इसलिए इन्हें नियमित रूप से बदलना जरूरी होता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।