Volodymyr Zelenskyy

यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की रूस के साथ युद्ध खत्म करने के प्रस्ताव पर बात करते हुए
यूक्रेन ने रूस के साथ युद्ध खत्म करने की योजना के प्रस्ताव अमेरिका को सौंपे, जेलेंस्की बोले- रूस पर दबाव बनाए वॉशिंगटन

कीव, एजेंसियां। रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने की कोशिशों के बीच यूक्रेन ने अमेरिकी वार्ताकारों को युद्ध समाप्त करने की योजना से जुड़े प्रस्ताव सौंपे हैं। राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यूक्रेन ने अपने प्रस्ताव अमेरिकी पक्ष के सामने रख दिए हैं और अब वह चाहता है कि अमेरिका रूस पर युद्ध समाप्त करने के लिए दबाव बढ़ाए।   अमेरिका को सौंपे गए शांति प्रस्ताव     जेलेंस्की ने अपने संबोधन में कहा कि यूक्रेन ने अमेरिका के साथ युद्ध समाप्त करने के संभावित रास्ते को लेकर अपने प्रस्ताव साझा किए हैं। हालांकि, प्रस्तावों की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है।     रूस पर दबाव बनाने की अपील     जेलेंस्की ने अमेरिका से रूस पर दबाव बढ़ाने का आग्रह किया है। उनका कहना है कि युद्ध खत्म करने के लिए कूटनीतिक प्रयासों के साथ-साथ रूस को बातचीत की दिशा में आगे बढ़ाना जरूरी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका रूस-यूक्रेन के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।     युद्ध खत्म करने की कोशिशों के बीच अहम कदम     यूक्रेन की ओर से प्रस्ताव सौंपे जाने को शांति वार्ता की दिशा में महत्वपूर्ण कूटनीतिक कदम माना जा रहा है। हालांकि, इससे तत्काल युद्धविराम या शांति समझौता तय नहीं हुआ है। प्रस्तावों पर अमेरिका और आगे चलकर रूस की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी।     रूस की अगली रणनीति को लेकर जेलेंस्की की चेतावनी     जेलेंस्की ने रूस में अगले महीने होने वाले चुनाव को लेकर भी चिंता जताई है। उन्होंने आशंका व्यक्त की कि रूस इन चुनावों को नई सैन्य लामबंदी के लिए बहाने के तौर पर इस्तेमाल कर सकता है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
US President Donald Trump speaks about Iran, claiming Tehran is now seeking negotiations after US military action
ट्रंप का दावा- ईरान की सैन्य ताकत तबाह, बोले- अब बातचीत के लिए खुद आगे आ रहा तेहरान

Donald Trump on Iran: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान की सैन्य क्षमता लगभग पूरी तरह कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि अब तेहरान खुद बातचीत की पहल कर रहा है और दोनों देशों के बीच समझौते की संभावना बन रही है। एएनआई के मुताबिक, ट्रंप ने कहा कि अमेरिका की कार्रवाई का असर इतना बड़ा रहा कि ईरान अब मध्यस्थों के जरिए वार्ता का अनुरोध कर रहा है। उन्होंने भरोसा जताया कि यदि बातचीत सही दिशा में आगे बढ़ी तो दोनों देशों के बीच समझौता हो सकता है। 'अगर हम कमजोर होते तो ईरान बातचीत नहीं मांगता' ट्रंप ने कहा कि यदि अमेरिका कमजोर स्थिति में होता तो ईरान कभी बातचीत की पहल नहीं करता। उनके मुताबिक, अमेरिकी हमलों के बाद तेहरान पर दबाव बढ़ा है और इसी वजह से वह कूटनीतिक समाधान की ओर बढ़ रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बातचीत का अंतिम परिणाम क्या होगा, यह अभी देखना बाकी है। रूस की कथित मदद पर पुतिन से करेंगे बात यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के उस दावे पर भी ट्रंप ने प्रतिक्रिया दी, जिसमें कहा गया था कि रूस ईरान को अमेरिकी ठिकानों की निगरानी के लिए सैटेलाइट संबंधी जानकारी दे रहा है। ट्रंप ने कहा कि वह इस मामले में सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे। उन्होंने कहा कि यदि रूस ने किसी तरह की सहायता दी भी है, तो उसका कोई बड़ा प्रभाव नजर नहीं आया है। ईरान की सैन्य क्षमता पर बड़ा दावा ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी कार्रवाई के बाद ईरान की सेना, वायुसेना और नौसेना की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि ईरान अब पहले जैसी सैन्य ताकत नहीं रखता और यही वजह है कि वह बातचीत के जरिए समाधान तलाशना चाहता है। हालांकि, ट्रंप के इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और ईरान की ओर से भी इन बयानों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों और संभावित वार्ता पर दुनिया की नजर बनी हुई है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
US President Donald Trump meets Ukrainian President Volodymyr Zelenskyy and Israeli Prime Minister Benjamin Netanyahu at the White House
व्हाइट हाउस में ट्रंप की अहम कूटनीतिक बैठकें आज, जेलेंस्की और नेतन्याहू से यूक्रेन युद्ध व ईरान पर होगी चर्चा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मंगलवार को व्हाइट हाउस में यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से अलग-अलग मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में यूक्रेन युद्ध, ईरान, मध्य पूर्व की सुरक्षा, लेबनान की स्थिति और क्षेत्रीय शांति प्रयासों पर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। नेतन्याहू के साथ ईरान और अब्राहम समझौते पर फोकस व्हाइट हाउस में ट्रंप और नेतन्याहू की बैठक का मुख्य एजेंडा ईरान से जुड़े सुरक्षा हालात, लेबनान के साथ चल रही वार्ताएं और अब्राहम समझौतों (Abraham Accords) को आगे बढ़ाना होगा। वॉशिंगटन रवाना होने से पहले नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल की सुरक्षा मजबूत करना और क्षेत्र में शांति का विस्तार उनकी यात्रा की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। ट्रंप के दूसरे कार्यकाल में दोनों नेताओं की यह आठवीं आमने-सामने की मुलाकात होगी। जेलेंस्की से यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर चर्चा ट्रंप की दूसरी महत्वपूर्ण बैठक यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ होगी। व्हाइट हाउस के अधिकारियों के अनुसार, दोनों नेता रूस-यूक्रेन युद्ध को समाप्त करने के संभावित समाधान और शांति प्रक्रिया पर चर्चा करेंगे। ट्रंप पहले भी युद्ध जल्द खत्म कराने की इच्छा जता चुके हैं। रूस और ईरान को लेकर भी होगी बातचीत हाल ही में जेलेंस्की ने आरोप लगाया था कि रूस, ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों से जुड़ी खुफिया जानकारी उपलब्ध करा रहा है। हालांकि ट्रंप ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यदि ऐसी कोई जानकारी सामने आती है तो वह इस विषय पर सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे। ट्रंप ने यह भी कहा कि अमेरिका की कार्रवाई के बाद ईरान पहले की तुलना में कमजोर स्थिति में है। उत्तर कोरिया की भूमिका पर भी नजर जेलेंस्की ने यह भी दावा किया है कि रूस, उत्तर कोरिया के करीब 30 हजार सैनिकों का समर्थन हासिल करने की कोशिश कर रहा है। माना जा रहा है कि इस मुद्दे पर भी दोनों नेताओं के बीच चर्चा हो सकती है। लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी हो सकते हैं शामिल बैठकों के बाद ट्रंप, जेलेंस्की और नेतन्याहू अमेरिका के दिवंगत सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार में भी शामिल हो सकते हैं। यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच इन बैठकों को अमेरिकी विदेश नीति और वैश्विक कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।  

kalpana जुलाई 28, 2026 0
Ukrainian President Volodymyr Zelenskyy appoints Mykhailo Drapatyi as the new Army Chief during the Russia-Ukraine war
Ukraine Army Chief: युद्ध के बीच जेलेंस्की का बड़ा फैसला, मखाइलो द्रपतई बने यूक्रेन के नए सेना प्रमुख

रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सेना में बड़ा नेतृत्व परिवर्तन किया है। मौजूदा कमांडर-इन-चीफ जनरल ऑलेक्जेंडर सिर्सकी को हटाकर 46 वर्षीय मेजर जनरल मखाइलो द्रपतई को नया सेना प्रमुख नियुक्त किया गया है। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब रूस पूर्वी मोर्चे पर लगातार बढ़त बना रहा है और देश के भीतर सरकार को विरोध का भी सामना करना पड़ रहा है। कौन हैं मखाइलो द्रपतई? मखाइलो द्रपतई यूक्रेन की सेना के अनुभवी अधिकारी माने जाते हैं। वह इससे पहले ज्वाइंट फोर्सेज के कमांडर और डिप्टी चीफ ऑफ जनरल स्टाफ की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी पहचान एक फ्रंटलाइन कमांडर के रूप में रही है। हालांकि, रूस उन्हें अक्सर "फेल्ड कमांडर" कहकर निशाना बनाता रहा है। आलोचकों का कहना है कि उनके नेतृत्व में यूक्रेन को कोई बड़ी रणनीतिक सैन्य सफलता नहीं मिली। रूस के दबाव के बीच बदली रणनीति यूक्रेन इस समय युद्ध के कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है। रूस लगातार बढ़त बना रहा है डोनबास क्षेत्र में रूसी सेना आगे बढ़ रही है। सुमी और खारकीव क्षेत्रों में भी रूसी हमले तेज हुए हैं। कई इलाकों में यूक्रेन को रक्षात्मक रणनीति अपनानी पड़ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे हालात में जेलेंस्की ने सेना की रणनीति और नेतृत्व दोनों में बदलाव का फैसला लिया है। रक्षा मंत्री हटाने के बाद बढ़ा था विरोध सेना प्रमुख बदलने से पहले जेलेंस्की सरकार ने कैबिनेट में बड़ा फेरबदल किया था। इस दौरान— रक्षा मंत्री मखाइलो फेडोरोव को पद से हटाया गया। प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको समेत कई मंत्रियों को बदला गया। इसके बाद कीव सहित कई शहरों में विरोध प्रदर्शन हुए। पूर्व सैनिकों और नागरिक संगठनों ने सरकार के फैसलों पर सवाल उठाए और पारदर्शिता की मांग की। पूर्व रक्षा मंत्री ने उठाए थे गंभीर सवाल पद से हटाए जाने के बाद पूर्व रक्षा मंत्री मखाइलो फेडोरोव ने सेना की स्थिति को लेकर कई गंभीर दावे किए। उन्होंने कहा कि— कई सैन्य ब्रिगेड संरचनात्मक कमजोरियों से जूझ रही हैं। ड्रोन युद्ध को छोड़ अधिकांश मोर्चों पर यूक्रेन को नुकसान उठाना पड़ रहा है। सैनिकों की कमी पूरी करने के लिए जबरन भर्ती की जा रही है। सेना के शीर्ष नेतृत्व के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए थे। युद्ध के दौरान दूसरी बार बदला सेना प्रमुख फरवरी 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह दूसरी बार है जब यूक्रेन ने सेना प्रमुख बदला है। 2024: वालैरी ज़ालुझनी की जगह ऑलेक्जेंडर सिर्सकी को नियुक्त किया गया। 2026: सिर्सकी की जगह अब मखाइलो द्रपतई को कमान सौंपी गई। फिलहाल ज़ालुझनी लंदन में यूक्रेन के राजदूत हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पर द्रपतई को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि उनके सामने बेहद कठिन चुनौतियां होंगी। 2014 की कार्रवाई को लेकर भी रहे विवादों में मखाइलो द्रपतई पहली बार 2014 में सुर्खियों में आए थे, जब डोनबास के मारियूपोल में विरोध प्रदर्शनों के दौरान उनकी यूनिट तैनात थी। आरोप लगे थे कि प्रदर्शनकारियों के बैरिकेड हटाने के दौरान उनकी अगुवाई में बीएमपी (इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल) भीड़ और अवरोधों के ऊपर चढ़ा दिया गया था। इस घटना का वीडियो वर्षों से सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा है। हालांकि, इस मामले को लेकर अलग-अलग पक्षों के अलग-अलग दावे रहे हैं। क्या संकेत देता है यह फैसला? यूक्रेन के सैन्य नेतृत्व में यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब देश को युद्ध के मैदान और घरेलू राजनीति—दोनों मोर्चों पर चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। माना जा रहा है कि जेलेंस्की युवा नेतृत्व के जरिए सेना की रणनीति में बदलाव लाकर रूस के खिलाफ सैन्य अभियान को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।  

kalpana जुलाई 23, 2026 0
Ukraine Defense Minister
यूक्रेन के रक्षा मंत्री को हटाने पर बवाल, कीव में हजारों लोगों का प्रदर्शन; ज़ेलेंस्की सरकार पर बढ़ा दबाव

कीव, एजेंसियां। यूक्रेन की राजधानी कीव में रक्षा मंत्री को पद से हटाए जाने के फैसले के खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने सरकार के फैसले पर सवाल उठाते हुए इसे ऐसे समय का गलत कदम बताया, जब देश रूस के साथ जारी युद्ध का सामना कर रहा है। इस घटनाक्रम के बाद राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की की सरकार पर राजनीतिक दबाव और बढ़ गया।   सरकार के फैसले पर उठे सवाल   प्रदर्शन में शामिल लोगों का कहना है कि युद्ध के दौरान रक्षा मंत्रालय में बड़े बदलाव सेना के मनोबल और सैन्य रणनीति पर असर डाल सकते हैं। विपक्षी नेताओं ने भी सरकार से इस फैसले के पीछे की वजह स्पष्ट करने की मांग की है। उनका आरोप है कि सरकार ने इतना बड़ा फैसला बिना पर्याप्त सार्वजनिक जानकारी दिए लिया।   कीव की सड़कों पर उमड़ी भीड़   राजधानी के कई प्रमुख इलाकों में लोगों ने रैलियां निकालीं और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी। पुलिस की भारी तैनाती के बीच प्रदर्शन अधिकांश स्थानों पर शांतिपूर्ण रहा, हालांकि कुछ जगह प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हल्की झड़प की भी खबरें सामने आईं।   ज़ेलेंस्की सरकार पर बढ़ा राजनीतिक दबाव   रक्षा मंत्री की बर्खास्तगी को लेकर देश के राजनीतिक हलकों में भी बहस तेज हो गई है। कई विश्लेषकों का मानना है कि सरकार को अब इस फैसले को लेकर संसद और जनता के सामने स्पष्ट जवाब देना होगा। वहीं, विपक्ष इसे सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने का बड़ा मुद्दा बना रहा है।   युद्ध के बीच फैसले पर दुनिया की नजर   रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच हुए इस घटनाक्रम पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय की भी नजर है। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा मंत्रालय में नेतृत्व परिवर्तन का असर यूक्रेन की सैन्य रणनीति और पश्चिमी देशों के साथ रक्षा सहयोग पर भी पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सरकार की अगली रणनीति और नए रक्षा मंत्री की नियुक्ति पर सभी की निगाहें टिकी रहेंगी।

anjali kumari जुलाई 17, 2026 0
Yulia Svyrydenko
यूक्रेन की प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको ने दिया इस्तीफा, जेलेंस्की सरकार में बड़े फेरबदल की तैयारी

कीव, एजेंसियां। यूक्रेन की प्रधानमंत्री यूलिया स्विरिडेंको ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। मंगलवार को यूक्रेनी संसद ने उनके इस्तीफे को मंजूरी दे दी, जिसके साथ ही पूरे मंत्रिमंडल का कार्यकाल समाप्त हो गया। यह फैसला राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की द्वारा प्रस्तावित बड़े सरकारी फेरबदल का हिस्सा माना जा रहा है।   एक साल के कार्यकाल के बाद इस्तीफा   40 वर्षीय अर्थशास्त्री यूलिया स्विरिडेंको ने लगभग एक वर्ष तक प्रधानमंत्री के रूप में कार्य किया। अपने विदाई संबोधन में उन्होंने कहा कि युद्धकाल में सरकार चलाना बेहद चुनौतीपूर्ण रहा और आने वाले महीनों में रूस की ओर से ऊर्जा ढांचे पर हमलों की आशंका के बीच सर्दियों की तैयारी नई सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी।   जेलेंस्की के फैसले पर उठे सवाल   हालांकि राष्ट्रपति जेलेंस्की ने सरकार में बदलाव की जरूरत बताई है, लेकिन विपक्षी दलों और कई सांसदों ने इस फेरबदल के उद्देश्य पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सरकार बदलने के पीछे स्पष्ट कारण नहीं बताए गए हैं और केवल चेहरों के बदलाव से युद्धकालीन चुनौतियों का समाधान नहीं होगा।   नए प्रधानमंत्री के नाम पर जल्द फैसला   इस्तीफा स्वीकार होने के बाद अब यूक्रेन में नए प्रधानमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी सेरही कोरेट्स्की को संभावित उत्तराधिकारी के रूप में देखा जा रहा है। संसद जल्द ही नए प्रधानमंत्री और मंत्रिमंडल पर मतदान कर सकती है।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Emergency responders work at the site of missile and drone strikes in Kyiv after a large-scale Russian attack ahead of the NATO Summit.
NATO समिट से पहले रूस का कीव पर बड़ा मिसाइल हमला, कई धमाकों से दहली यूक्रेन की राजधानी

कीव: तुर्की में मंगलवार से शुरू होने वाले NATO शिखर सम्मेलन से ठीक पहले रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़ा मिसाइल और ड्रोन हमला किया। सोमवार तड़के हुए इस हमले में बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन का इस्तेमाल किया गया। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक कम से कम तीन लोगों की मौत हुई है, जबकि कई इलाकों में आग लगने और भारी नुकसान की खबर है। यह एक सप्ताह से भी कम समय में कीव पर दूसरा बड़ा हमला है। ऐसे समय में यह हमला हुआ है जब NATO समिट में रूस-यूक्रेन युद्ध सबसे प्रमुख मुद्दा रहने की उम्मीद है और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी इसमें शामिल होने वाले हैं। बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से किया गया हमला यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने राजधानी कीव पर एक साथ बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज मिसाइल और ड्रोन दागे। तड़के सुबह शहर में कई तेज धमाकों की आवाजें सुनाई दीं, जबकि हमले से कुछ देर पहले पूरे शहर में एयर रेड सायरन बजने लगे थे। कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने बताया कि शहर के कम से कम दो जिलों में मिसाइलों के मलबे गिरने और आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। राहत एवं बचाव दल प्रभावित इलाकों में अभियान चला रहे हैं। जेलेंस्की ने पहले ही दी थी चेतावनी यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने एक दिन पहले ही बड़े रूसी हमले की आशंका जताई थी। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा था कि यूक्रेनी खुफिया एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि रूस एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहा है। जेलेंस्की ने आरोप लगाया कि रूस NATO शिखर सम्मेलन से पहले अधिक से अधिक तबाही मचाकर अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। उनके मुताबिक यह राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की रणनीति का हिस्सा है। पिछले सप्ताह भी हुआ था घातक हमला यह हमला पिछले गुरुवार को कीव पर हुए बड़े रूसी हमले के कुछ ही दिनों बाद हुआ है। उस हमले में कम से कम 30 लोगों की मौत हुई थी और इसे युद्ध शुरू होने के बाद राजधानी पर सबसे घातक हमलों में से एक माना गया था। लगातार हो रहे हमलों ने राजधानी की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। NATO समिट में युद्ध रहेगा मुख्य मुद्दा तुर्की में मंगलवार से शुरू हो रहे NATO शिखर सम्मेलन में रूस-यूक्रेन युद्ध प्रमुख एजेंडा रहेगा। सम्मेलन में सदस्य देशों के नेता यूक्रेन को सैन्य सहायता, यूरोप की सुरक्षा और रूस पर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। इस बीच रूस पूर्वी यूक्रेन के डोनेट्स्क क्षेत्र में अपनी सैन्य कार्रवाई तेज कर रहा है। वहीं यूक्रेन भी रूस के भीतर तेल रिफाइनरियों, बंदरगाहों और सैन्य प्रतिष्ठानों पर ड्रोन और मिसाइल हमले बढ़ा रहा है। ट्रंप-पुतिन की हालिया बातचीत भी चर्चा में NATO समिट से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 4 जुलाई को लगभग 90 मिनट तक फोन पर बातचीत हुई थी। रूसी विदेश मंत्रालय के अनुसार, बातचीत के दौरान ट्रंप ने एक बार फिर यूक्रेन युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थता की पेशकश की थी। हालांकि, ताजा रूसी हमले के बाद युद्ध को लेकर तनाव और बढ़ गया है तथा NATO देशों की आगे की रणनीति पर दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Russia Attack
रूस का कीव पर इस साल का सबसे बड़ा ड्रोन-मिसाइल हमला, 27 लोगों की मौत

मॉस्को, एजेंसियां। रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव पर इस वर्ष का सबसे बड़ा संयुक्त ड्रोन और मिसाइल हमला किया है। यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम 27 लोगों की मौत हो गई, जबकि 90 से अधिक लोग घायल हुए हैं। हमले में कई रिहायशी इमारतें, होटल, चिकित्सा केंद्र और अन्य नागरिक ढांचे क्षतिग्रस्त हो गए।   496 ड्रोन और 74 मिसाइलों से किया हमला   यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर में 496 ड्रोन और 74 मिसाइलें दागीं। एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकांश ड्रोन और कई मिसाइलों को मार गिराया, लेकिन कुछ मिसाइलें राजधानी में अपने लक्ष्य तक पहुंच गईं, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई।   रिहायशी इमारतें और होटल बने निशाना   हमले में कीव के कई इलाकों में आग लग गई और लगभग 130 इमारतों को नुकसान पहुंचा। एक नौ मंजिला आवासीय इमारत का बड़ा हिस्सा ढह गया, जबकि एक होटल और चिकित्सा संस्थान भी क्षतिग्रस्त हुए। राहत एवं बचाव दल मलबे में फंसे लोगों को निकालने में जुटे हुए हैं।   रूस ने बताया जवाबी कार्रवाई, यूक्रेन ने दी प्रतिक्रिया   रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि हमला यूक्रेन द्वारा रूसी क्षेत्र पर किए गए हमलों के जवाब में सैन्य और ऊर्जा ठिकानों को निशाना बनाकर किया गया। वहीं यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने इस हमले की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि इसका जवाब दिया जाएगा और अंतरराष्ट्रीय समुदाय से यूक्रेन की वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत करने की अपील की।   कीव में शोक दिवस घोषित   हमले के बाद कीव प्रशासन ने मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिए 3 जुलाई को शोक दिवस घोषित किया है। संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ सहित कई देशों ने नागरिक इलाकों पर हुए इस हमले पर चिंता जताई है और दोनों पक्षों से हिंसा कम करने की अपील की है।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Ukrainian President Volodymyr Zelenskyy during a press event amid a diplomatic dispute with Poland over historical memory and honours.
पोलैंड-यूक्रेन रिश्तों में तनाव: जेलेंस्की ने लौटाया सर्वोच्च सम्मान, UPA विवाद से बढ़ी कड़वाहट

  वारसॉ/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच पोलैंड और यूक्रेन के रिश्तों में नया तनाव पैदा हो गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पोलैंड का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ वापस करने की घोषणा की है। यह कदम पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी द्वारा सम्मान वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने की बात कहने के बाद उठाया गया। विवाद की जड़ यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की का वह फैसला है, जिसमें उन्होंने एक सैन्य इकाई का नाम यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) के नाम पर रखा। पोलैंड में UPA को द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान हजारों पोलिश नागरिकों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार माना जाता है। जेलेंस्की बोले- यह सम्मान यूक्रेनी जनता और सेना के लिए था जेलेंस्की ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि 2023 में मिला ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट ईगल’ सम्मान केवल उनके लिए नहीं, बल्कि यूक्रेनी जनता और सेना के लिए था। उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए उन्होंने यह सम्मान पोलैंड को वापस भेजने का फैसला किया है। यह सम्मान उन्हें वर्ष 2023 में तत्कालीन पोलिश राष्ट्रपति आंद्रेज डूडा ने सुरक्षा, स्वतंत्रता और मानवाधिकारों की रक्षा में योगदान के लिए प्रदान किया था। कई यूक्रेनी अधिकारियों ने भी लौटाए सम्मान जेलेंस्की के अलावा यूक्रेन के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भी पोलैंड से मिले पुरस्कार लौटाने का ऐलान किया है। इनमें राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव, पोलैंड में यूक्रेन के राजदूत वासिल बोडनार और विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा शामिल हैं। क्या है UPA और उससे जुड़ा विवाद? यूक्रेनी विद्रोही सेना (UPA) 1940 और 1950 के दशक में सक्रिय एक राष्ट्रवादी संगठन था। यूक्रेन में इसे सोवियत संघ और नाजी जर्मनी के खिलाफ संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के रूप में देखा जाता है। पोलैंड का आरोप है कि UPA ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान वोल्हिनिया और पूर्वी गैलिसिया क्षेत्रों में हजारों पोलिश नागरिकों की हत्या की थी। यही ऐतिहासिक विवाद आज दोनों देशों के संबंधों में तनाव का कारण बन गया है। पोलैंड ने सम्मान वापस लेने का फैसला क्यों किया? पोलैंड के राष्ट्रपति कारोल नावरोकी ने कहा कि UPA को सम्मानित करना पोलिश समाज की ऐतिहासिक संवेदनाओं के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि अधिकांश पोलिश नागरिक UPA को ऐसे संगठन के रूप में देखते हैं, जिसने पोलैंड के नागरिकों के खिलाफ क्रूर अपराध किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जेलेंस्की से सम्मान वापस लेने का फैसला इतिहास और स्मृति के सम्मान के लिए है। यूक्रेन ने फैसले को बताया ‘रूस के लिए तोहफा’ यूक्रेन ने पोलैंड के इस कदम की तीखी आलोचना की है। राष्ट्रपति कार्यालय के प्रमुख किरिलो बुदानोव ने इसे यूक्रेनी जनता के प्रति गैर-मित्रवत कदम बताया और कहा कि इससे रूस को दोनों देशों के बीच दरार पैदा करने का मौका मिलेगा। विदेश मंत्री आंद्रिय सिबिहा ने इसे एक ‘रणनीतिक गलती’ करार दिया, जबकि राजदूत वासिल बोडनार ने कहा कि रूस के हमलों का सामना कर रहे यूक्रेन के लिए यह फैसला बेहद पीड़ादायक है। समर्थन जारी रखने का भरोसा राष्ट्रपति कारोल नावरोकी ने स्पष्ट किया है कि इस विवाद का मतलब यह नहीं है कि पोलैंड रूस के खिलाफ यूक्रेन का समर्थन कम करेगा। उन्होंने कहा कि यूक्रेन की संप्रभुता और सुरक्षा के समर्थन की पोलैंड की नीति में कोई बदलाव नहीं होगा। फिर भी, इतिहास से जुड़ा यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब रूस के खिलाफ लड़ाई में पोलैंड, यूक्रेन का सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी रहा है और लाखों यूक्रेनी शरणार्थियों को शरण भी दे चुका है। अब यह देखना होगा कि दोनों देश इस कूटनीतिक तनाव को कैसे संभालते हैं।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Smoke rises near Moscow after a Ukrainian drone attack targeted an oil refinery and disrupted airport operations.
यूक्रेन के भीषण ड्रोन हमले से दहला मॉस्को, तेल रिफाइनरी बनी निशाना; रूस ने 555 ड्रोन मार गिराने का दावा किया

  मॉस्को/कीव: रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने एक बार फिर रूस की राजधानी मॉस्को को निशाना बनाते हुए बड़ा ड्रोन हमला किया है। रूसी अधिकारियों के अनुसार, एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार हुए इस हमले में मॉस्को की एक प्रमुख तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया गया। हमले के बाद राजधानी के कई हिस्सों में आग और धुएं के गुबार देखे गए, जबकि सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। चार वर्षों से अधिक समय से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान इसे यूक्रेन के सबसे बड़े ड्रोन अभियानों में से एक माना जा रहा है। रूस का दावा- 555 यूक्रेनी ड्रोन मार गिराए रूस के रक्षा मंत्रालय ने दावा किया कि उसकी वायु रक्षा प्रणालियों ने रातभर में यूक्रेन की ओर से भेजे गए 555 ड्रोन को नष्ट कर दिया। मंत्रालय के अनुसार: लगभग 200 ड्रोन मॉस्को की ओर बढ़ रहे थे। अधिकांश ड्रोन को राजधानी तक पहुंचने से पहले ही मार गिराया गया। हाल के महीनों में यूक्रेन ने रूस के सैन्य और ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर ड्रोन हमलों की संख्या बढ़ा दी है। मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर गिरे कई ड्रोन मॉस्को के मेयर सर्गेई सोबयानिन ने बताया कि शहर के दक्षिण-पूर्वी बाहरी इलाके में स्थित मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर कई ड्रोन गिरे। अधिकारियों ने तत्काल किसी बड़े नुकसान या हताहत की पुष्टि नहीं की है, लेकिन घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया। यह रिफाइनरी रूस की ऊर्जा आपूर्ति प्रणाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसलिए इसे रणनीतिक दृष्टि से भी बड़ा हमला माना जा रहा है। चार प्रमुख हवाई अड्डों पर उड़ानें प्रभावित रूसी परिवहन मंत्रालय के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद सुरक्षा कारणों से मॉस्को के चार प्रमुख हवाई अड्डों से उड़ानों का संचालन अस्थायी रूप से रोक दिया गया। हमले के कारण: कई उड़ानें रद्द हुईं। बड़ी संख्या में उड़ानों में देरी हुई। यात्रियों को घंटों इंतजार करना पड़ा। हाल के महीनों में रूस में ड्रोन हमलों के बाद हवाई यातायात प्रभावित होने की घटनाएं लगातार बढ़ी हैं। जेलेंस्की बोले- रूस के हमलों का यह जायज जवाब यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने सोशल मीडिया पर कहा कि यूक्रेन के लंबी दूरी के हमलों ने एक बार फिर मॉस्को क्षेत्र और रूस के ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया है। जेलेंस्की ने कहा, “यह हमारे शहरों और समुदायों पर रूस के हमलों का पूरी तरह से जायज जवाब है। यह रूस की युद्ध मशीन को चलाने वाले ठिकानों के खिलाफ हमारी कार्रवाई का एक महत्वपूर्ण परिणाम है।” उन्होंने यह भी बताया कि: मॉस्को ऑयल रिफाइनरी पर इस सप्ताह दूसरी बार हमला किया गया। रोस्तोव ओब्लास्ट और यूक्रेन के अस्थायी रूप से कब्जे वाले इलाकों में भी ठिकानों को निशाना बनाया गया। ट्रंप और मैक्रों से बातचीत के बाद यूक्रेन का बड़ा कदम यह हमला ऐसे समय हुआ है जब राष्ट्रपति जेलेंस्की ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ महत्वपूर्ण बैठकें और वार्ता की हैं। जेलेंस्की ने कहा कि: बातचीत यूक्रेन के लिए बेहद अहम रही। युद्ध की दिशा में बड़े बदलाव की उम्मीद है। जी-7 देशों ने यूक्रेन को भविष्य में भी हरसंभव समर्थन देने का भरोसा दिया है। जी-7 देशों ने दोहराया समर्थन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि हाल के दिन यूक्रेन के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहे हैं क्योंकि जी-7 देश एक बार फिर उसके समर्थन में एकजुट दिखाई दिए हैं। उन्होंने कहा कि सहयोगी देश: यूक्रेन को सैन्य सहायता देना जारी रखेंगे। उसकी रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में मदद करेंगे। रूस के खिलाफ प्रभावी जवाबी कार्रवाई के लिए रणनीतिक सहयोग बढ़ाएंगे। आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं पुतिन इसी बीच रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन मॉस्को से लगभग 700 किलोमीटर दूर स्थित कजान में आसियान नेताओं की मेजबानी कर रहे हैं। रूस इस मंच के माध्यम से एशियाई देशों के साथ: व्यापार, निवेश, और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। चार साल से अधिक समय से जारी है युद्ध रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध को चार वर्ष से अधिक समय हो चुका है। संघर्ष अब केवल सीमा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों देश एक-दूसरे के रणनीतिक और आर्थिक बुनियादी ढांचे को भी निशाना बना रहे हैं। एक ओर यूक्रेन रूस के भीतर गहराई तक हमले करने की क्षमता बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी ओर रूस अपनी वायु रक्षा और सैन्य प्रतिक्रिया को और मजबूत करने में जुटा हुआ है। ऐसे में दोनों देशों के बीच संघर्ष और तेज होने की आशंका बढ़ती जा रही है।  

Deepshikha जून 19, 2026 0
Russian President Vladimir Putin discusses Ukraine peace talks and conditions for a possible settlement.
रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म होने की उम्मीद! ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर पुतिन तैयार, यूक्रेन के सामने रखीं शर्तें

  रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर एक बार फिर कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने संकेत दिया है कि मॉस्को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के शांति प्रस्ताव के आधार पर यूक्रेन के साथ समझौते के लिए तैयार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी शांति समझौते के लिए यूक्रेन को कुछ महत्वपूर्ण शर्तें स्वीकार करनी होंगी। ट्रंप के प्रस्ताव पर रूस की सकारात्मक प्रतिक्रिया रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस शांतिपूर्ण समाधान चाहता है और वह उन प्रस्तावों पर आगे बढ़ने को तैयार है जिन पर अलास्का के एंकरेज में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ चर्चा हुई थी। पुतिन ने कहा कि यदि यूक्रेन भी इन प्रस्तावों को स्वीकार करता है तो संघर्ष का समाधान अपेक्षाकृत जल्दी संभव हो सकता है। उनके अनुसार, रूस बातचीत के रास्ते को बंद नहीं करना चाहता, लेकिन समझौता दोनों पक्षों की सहमति से ही संभव होगा। रूस की प्रमुख शर्तें क्या हैं? रूसी पक्ष के अनुसार संभावित समझौते के लिए कुछ प्रमुख मुद्दों पर सहमति आवश्यक होगी: यूक्रेन को डोनबास क्षेत्र पर रूस के नियंत्रण को स्वीकार करना होगा। खेरसोन और ज़ापोरिज्जिया क्षेत्रों में रूसी दावों को मान्यता देनी होगी। यूक्रेन को नाटो सदस्यता की दिशा में आगे नहीं बढ़ना होगा। सुरक्षा और सीमा संबंधी कुछ अन्य मुद्दों पर भी सहमति बनानी होगी। इन शर्तों पर यूक्रेन की ओर से अभी तक कोई सकारात्मक संकेत नहीं मिला है। जेलेंस्की ने पुतिन को लिखा खुला पत्र इस बीच यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने पुतिन को एक खुला पत्र लिखकर सीधे संवाद का प्रस्ताव दिया है। उन्होंने युद्ध समाप्त करने के लिए आमने-सामने बातचीत और पूर्ण युद्धविराम की आवश्यकता पर जोर दिया। जेलेंस्की ने कहा कि स्थायी शांति केवल प्रत्यक्ष वार्ता के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने पुतिन को व्यक्तिगत बैठक का प्रस्ताव भी दिया है। रूस के राष्ट्रपति कार्यालय क्रेमलिन ने पुष्टि की है कि उसे यह पत्र प्राप्त हो चुका है। युद्ध के मैदान में रूस का दावा पुतिन ने दावा किया कि रूसी सेना विभिन्न मोर्चों पर लगातार बढ़त बनाए हुए है। उनके अनुसार, हाल के महीनों में रूस ने हजारों वर्ग किलोमीटर अतिरिक्त क्षेत्र पर नियंत्रण स्थापित किया है। रूसी राष्ट्रपति का कहना है कि लुहांस्क क्षेत्र पर लगभग पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो चुका है, जबकि दोनेत्स्क और ज़ापोरिज्जिया के बड़े हिस्सों पर भी रूसी सेना का नियंत्रण है। यूरोप की भूमिका पर रूस का सवाल पुतिन ने यूरोपीय देशों की मध्यस्थता क्षमता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जो देश लंबे समय से रूस की रणनीतिक हार की बात करते रहे हैं, उनके लिए निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभाना कठिन होगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि रूस यूरोपीय देशों के साथ संवाद के रास्ते बंद नहीं करना चाहता। शांति वार्ता में क्यों आया ठहराव? रूस और यूक्रेन के बीच जिनेवा, इस्तांबुल और अबू धाबी सहित कई स्थानों पर पहले भी वार्ताएं हो चुकी हैं, लेकिन कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाया। फरवरी 2022 में शुरू हुआ युद्ध अब चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और लाखों लोगों को प्रभावित कर चुका है। ट्रंप के प्रस्ताव, पुतिन की प्रतिक्रिया और जेलेंस्की की नई पहल के बाद एक बार फिर कूटनीतिक समाधान की संभावनाओं पर चर्चा तेज हो गई है। क्या जल्द खत्म हो सकता है युद्ध? विशेषज्ञों का मानना है कि शांति समझौते की संभावना तभी बढ़ेगी जब दोनों पक्ष अपनी-अपनी अधिकतम मांगों में लचीलापन दिखाएं। फिलहाल रूस और यूक्रेन के रुख में बड़ा अंतर बना हुआ है, लेकिन हालिया बयानों ने भविष्य में वार्ता की संभावना को पूरी तरह खत्म नहीं होने दिया है।  

surbhi जून 6, 2026 0
Russia warns of possible major strike on Kyiv amid escalating Ukraine war tensions
रूस ने दी बड़े हमले की चेतावनी, विदेशी नागरिकों से कहा- तुरंत कीव छोड़ें

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध अब और खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। रूस ने चेतावनी दी है कि आने वाले दिनों में यूक्रेन की राजधानी कीव पर बड़ा हमला किया जा सकता है। रूस ने विदेशी नागरिकों और राजनयिक मिशनों से जुड़े लोगों से जल्द से जल्द कीव छोड़ने की अपील की है। रूस ने अमेरिका से भी की राजनयिक हटाने की बात रूस के विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio से फोन पर बातचीत की। इस दौरान रूस ने अमेरिका से कहा कि वह अपने राजनयिक कर्मचारियों को यूक्रेन से बाहर निकाल ले। अमेरिका ने जताई चिंता मार्को रूबियो ने फिलहाल यह साफ नहीं किया कि अमेरिका अपने राजनयिकों को कीव से हटाएगा या नहीं। उन्होंने कहा कि युद्ध लगातार लंबा खिंचता जा रहा है और इसे खत्म करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अमेरिका युद्ध खत्म कराने के प्रयासों में मदद के लिए तैयार है। यूरोपीय देशों ने कीव छोड़ने से किया इनकार रूस की चेतावनी के बावजूद अभी तक किसी यूरोपीय देश ने कीव छोड़ने का फैसला नहीं किया है। यूरोपीय संघ, फ्रांस और पोलैंड के राजनयिक मिशनों ने साफ कहा है कि वे यूक्रेन की राजधानी में बने रहेंगे। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने भी कहा कि फिलहाल खतरे का स्तर पहले जैसा ही है और स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। रूस ने ड्रोन और मिसाइलों से किया हमला यूक्रेन की वायुसेना के मुताबिक, रूस ने रातभर में बड़े पैमाने पर हमला किया। इन हमलों में 100 से ज्यादा ड्रोन और दो बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन ने कहा कि रूस लगातार प्रमुख शहरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है। रूस ने फिर इस्तेमाल की खतरनाक मिसाइल रिपोर्ट्स के अनुसार, रूस ने हाल ही में यूक्रेन पर हाइपरसोनिक ओरेश्निक बैलिस्टिक मिसाइल से भी हमला किया था। चार साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध में यह तीसरी बार है जब रूस ने इस हथियार का इस्तेमाल किया है। जेलेंस्की ने मांगी और रक्षा प्रणाली यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने कहा है कि रूस की बैलिस्टिक मिसाइलों से बचाव के लिए यूक्रेन को और आधुनिक वायु रक्षा प्रणालियों की जरूरत है। उन्होंने कहा कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण इन प्रणालियों की उपलब्धता कम हो गई है। 2022 से जारी है रूस-यूक्रेन युद्ध रूस ने 24 फरवरी 2022 को यूक्रेन पर हमला शुरू किया था। इसके बाद से दोनों देशों के बीच लगातार युद्ध जारी है। अब रूस की नई चेतावनी के बाद आशंका बढ़ गई है कि आने वाले दिनों में युद्ध और ज्यादा तेज हो सकता है।  

surbhi मई 27, 2026 0
Explosions light up Kyiv skyline after Russia launches drones and missiles, including a claimed Oreshnik strike.
रूस का कीव पर बड़ा हमला, ओरेश्निक हाइपरसोनिक मिसाइल इस्तेमाल करने का दावा

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध एक बार फिर बेहद खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने दावा किया है कि रूस ने राजधानी कीव पर बड़े पैमाने पर ड्रोन और मिसाइल हमला किया, जिसमें हाइपरसोनिक “ओरेश्निक” बैलिस्टिक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया। यूक्रेन के मुताबिक, इस हमले में कम से कम दो लोगों की मौत हुई है, जबकि कई सरकारी इमारतें, रिहायशी इलाके और स्कूल क्षतिग्रस्त हुए हैं। तीसरी बार इस्तेमाल हुई ओरेश्निक मिसाइल जेलेंस्की ने बताया कि रूस ने कीव क्षेत्र के बिला त्सेरक्वा इलाके को निशाना बनाने के लिए ओरेश्निक मिसाइल दागी। यूक्रेन का दावा है कि यह चार साल से जारी युद्ध में तीसरी बार है जब रूस ने इस अत्याधुनिक हथियार का इस्तेमाल किया है। रूस इससे पहले नवंबर 2024 में निप्रो और जनवरी 2026 में लवीव क्षेत्र में भी ओरेश्निक मिसाइल इस्तेमाल कर चुका है। रूसी राष्ट्रपति Vladimir Putin पहले दावा कर चुके हैं कि ओरेश्निक मिसाइल मैक-10 यानी ध्वनि की गति से लगभग 10 गुना तेज रफ्तार से हमला कर सकती है और गहरे भूमिगत बंकरों को भी तबाह करने में सक्षम है। रूस ने 600 ड्रोन और 90 मिसाइल दागने का दावा यूक्रेन की वायु सेना के अनुसार, रूस ने संयुक्त हमले में लगभग 600 ड्रोन और 90 मिसाइलों का इस्तेमाल किया। यूक्रेन ने दावा किया कि उसकी एयर डिफेंस प्रणाली ने 549 ड्रोन और 55 मिसाइलों को नष्ट या इंटरसेप्ट कर दिया। कई मिसाइलें राजधानी कीव और आसपास के इलाकों तक पहुंच गईं, जिससे भारी नुकसान हुआ। स्कूल और रिहायशी इलाके बने निशाना कीव सैन्य प्रशासन प्रमुख Tymur Tkachenko के अनुसार, राजधानी के कम से कम नौ जिलों में हमलों से नुकसान हुआ है। वहीं कीव के मेयर Vitali Klitschko ने कहा कि शेवचेंको जिले में एक स्कूल भी हमले की चपेट में आया, जहां लोग शरण लिए हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, पूरी रात सायरन बजते रहे और शहर के कई हिस्सों में विस्फोटों के बाद धुआं उठता दिखाई दिया। रूस ने हमले की पुष्टि की रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी हमले की पुष्टि करते हुए कहा कि उसने यूक्रेन के सैन्य ठिकानों, एयरबेस और कमांड सेंटरों को निशाना बनाया। मंत्रालय के मुताबिक, यह कार्रवाई रूस के अंदर यूक्रेनी हमलों के जवाब में की गई। क्या है ओरेश्निक मिसाइल? ओरेश्निक रूस की नई पीढ़ी की हाइपरसोनिक बैलिस्टिक मिसाइल मानी जाती है। रूसी भाषा में “ओरेश्निक” का मतलब “हेज़लनट का पेड़” होता है। इस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद तेज गति और गहरे भूमिगत ठिकानों को नष्ट करने की क्षमता मानी जाती है। सैन्य विशेषज्ञों के अनुसार, इतनी तेज रफ्तार वाली मिसाइलों को मौजूदा एयर डिफेंस सिस्टम से रोकना बेहद मुश्किल होता है।  

surbhi मई 25, 2026 0
Damaged UN humanitarian mission vehicles after alleged Russian drone attack in Ukraine’s Kherson region
यूक्रेन में UN मिशन के वाहनों पर रूसी ड्रोन हमला, जेलेंस्की बोले- ‘रूस को पता था किसे निशाना बना रहे हैं’

Ukraine के राष्ट्रपति Volodymyr Zelenskyy ने आरोप लगाया है कि रूसी सेना ने संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मिशन से जुड़े वाहनों को निशाना बनाकर ड्रोन हमला किया। उन्होंने कहा कि हमला जानबूझकर किया गया और रूस को पूरी जानकारी थी कि वाहन संयुक्त राष्ट्र मिशन से जुड़े हैं। UN मिशन के वाहनों पर दो ड्रोन हमले जेलेंस्की के मुताबिक, रूस ने संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के समन्वय कार्यालय United Nations Office for the Coordination of Humanitarian Affairs (OCHA) से जुड़े वाहनों पर दो FPV ड्रोन हमले किए। उन्होंने बताया कि हमले के समय मिशन प्रमुख समेत संयुक्त राष्ट्र के आठ कर्मचारी वाहनों में मौजूद थे। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। सभी कर्मचारियों को सुरक्षित निकाला गया यूक्रेनी अधिकारियों के अनुसार, ड्रोन हमले के बाद सभी कर्मचारियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। घटना के बाद इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। खेरसॉन क्षेत्र के अधिकारियों ने कहा कि हमला कोराबेल्नी जिले में हुआ, जहां मानवीय सहायता मिशन सक्रिय था। ‘अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन’ स्थानीय अधिकारी प्रोकुडिन ने आरोप लगाया कि रूस ने अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानूनों का उल्लंघन करते हुए सहायता मिशन के वाहनों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा, “रूस उन लोगों के खिलाफ भी लड़ाई जारी रखे हुए है, जो जरूरतमंदों की मदद करने का काम कर रहे हैं।” रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच बढ़ी चिंता रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के दौरान मानवीय सहायता एजेंसियों और नागरिक क्षेत्रों पर हमलों को लेकर लगातार अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र और कई पश्चिमी देशों ने पहले भी नागरिक और राहत मिशनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की है।  

surbhi मई 15, 2026 0
Donald Trump announces temporary Russia-Ukraine ceasefire agreement and prisoner exchange amid ongoing war
रूस-यूक्रेन में 3 दिन का सीजफायर, ट्रंप बोले- मेरे कहने पर बनी सहमति

रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध के बीच तीन दिन के युद्धविराम का ऐलान किया गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि उनकी पहल और मध्यस्थता के बाद दोनों देशों ने अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है. ट्रंप के मुताबिक, यह युद्धविराम 9, 10 और 11 मई तक लागू रहेगा. इस दौरान दोनों देशों के बीच सभी सैन्य गतिविधियां रोकी जाएंगी और युद्धबंदियों की अदला-बदली भी की जाएगी. ट्रंप ने किया सीजफायर का ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर पोस्ट कर कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध में तीन दिन का सीजफायर होगा.” उन्होंने कहा कि रूस में यह अवधि “विक्ट्री डे” समारोह के कारण महत्वपूर्ण है, जबकि यूक्रेन भी द्वितीय विश्व युद्ध का अहम हिस्सा रहा है. ट्रंप ने दावा किया कि युद्धविराम के लिए अनुरोध उन्होंने सीधे किया था और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तथा यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की दोनों ने इस पर सहमति जताई. 1,000-1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली सीजफायर के तहत दोनों देशों के बीच 1,000-1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली भी होगी. ट्रंप ने कहा कि इस दौरान सभी “काइनेटिक एक्टिविटी” यानी सैन्य हमलों और लड़ाई को पूरी तरह रोका जाएगा. उन्होंने उम्मीद जताई कि यह समझौता लंबे और विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने की दिशा में पहला बड़ा कदम साबित हो सकता है. जेलेंस्की ने भी की पुष्टि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने भी इस अस्थायी युद्धविराम की पुष्टि की है. उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा कि अमेरिकी मध्यस्थता में चल रही बातचीत के तहत रूस ने युद्धबंदियों की अदला-बदली पर सहमति दी है. जेलेंस्की ने कहा, “हमें 1,000 के बदले 1,000 युद्धबंदियों की अदला-बदली के लिए रूस की मंजूरी मिल गई है.” उन्होंने इसे शांति वार्ता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. युद्ध खत्म करने की कोशिशें तेज ट्रंप ने कहा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद यह सबसे बड़ा सैन्य संघर्ष है और इसे खत्म करने के लिए लगातार बातचीत चल रही है. उन्होंने लिखा, “हम हर दिन युद्ध खत्म होने के और करीब पहुंच रहे हैं.” हालांकि यह सीजफायर फिलहाल केवल तीन दिनों के लिए है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसे संभावित व्यापक शांति समझौते की शुरुआत के रूप में देख रहा है.  

surbhi मई 9, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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kalpana अगस्त 11, 2026 0