Voter List

सोनिया गांधी के वोटर लिस्ट मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला
सोनिया गांधी के खिलाफ याचिका पर आज फैसला, वोटर लिस्ट में नाम को लेकर है विवाद

नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी से जुड़े मतदाता सूची मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट आज, 13 अगस्त 2026 को अपना आदेश सुना सकती है। मामला उस पुनरीक्षण याचिका से जुड़ा है, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ FIR दर्ज कर जांच कराने की मांग की गई है। अदालत ने 25 जुलाई को फैसला सुरक्षित रखते हुए 13 अगस्त की तारीख तय की थी।   क्या है पूरा मामला?     याचिकाकर्ता विकास त्रिपाठी का आरोप है कि सोनिया गांधी का नाम 1980 में नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में शामिल किया गया था, जबकि उनके अनुसार सोनिया गांधी ने अप्रैल 1983 में भारतीय नागरिकता हासिल की। याचिकाकर्ता का दावा है कि नाम 1982 में हटाया गया और 1983 में दोबारा मतदाता सूची में दर्ज किया गया।   त्रिपाठी ने इस आधार पर पुलिस में FIR दर्ज कराकर कथित फर्जी दस्तावेज और धोखाधड़ी की जांच कराने की मांग की है।   पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने याचिका खारिज की थी     इस मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 11 सितंबर 2025 को शिकायत खारिज कर दी थी। इसके बाद याचिकाकर्ता ने उस फैसले को चुनौती देते हुए रिवीजन याचिका दाखिल की। राउज एवेन्यू कोर्ट में इस पर सुनवाई हुई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं।   25 जुलाई को विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने मामले में आदेश सुरक्षित रख लिया और पक्षकारों को लिखित दलीलें दाखिल करने के लिए 1 अगस्त तक का समय दिया था।   सोनिया गांधी की ओर से आरोपों का खंडन     सोनिया गांधी की ओर से पेश वकीलों ने याचिका का विरोध किया है। बचाव पक्ष ने याचिकाकर्ता द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों की प्रामाणिकता पर सवाल उठाते हुए आरोपों को निराधार बताया है। वहीं याचिकाकर्ता का कहना है कि उपलब्ध चुनावी रिकॉर्ड प्रथमदृष्टया जांच की जरूरत दिखाते हैं।   अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर भी सवाल उठाया था कि कथित घटना करीब पांच दशक पुरानी है और इतने लंबे समय बाद जांच का दायरा क्या होगा।   आज के फैसले से क्या होगा?     सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आज अदालत का फैसला FIR दर्ज करने और पुलिस जांच की मांग वाली याचिका पर होगा। यदि अदालत याचिका स्वीकार करती है तो मामले में पुलिस जांच/FIR की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खुल सकता है। यदि याचिका खारिज होती है तो मौजूदा स्तर पर FIR की मांग को राहत नहीं मिलेगी।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 13, 2026 0
Bihar Panchayat Election 2026 may face delays as delimitation, reservation, voter lists and polling preparations take nearly a year.
बिहार पंचायत चुनाव 2026: चुनाव से पहले होगा बड़ा बदलाव, परिसीमन में लग सकता है एक साल; उम्मीदवारों का बढ़ेगा इंतजार

Bihar Panchayat Election 2026: बिहार में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की तैयारी शुरू हो गई है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे संभावित उम्मीदवारों को अभी लंबा इंतजार करना पड़ सकता है। राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव से पहले परिसीमन की प्रशासनिक प्रक्रिया शुरू करने की कवायद तेज कर दी है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, परिसीमन से लेकर मतदाता सूची, मतदान केंद्र और आरक्षण रोस्टर तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया में करीब एक साल लगने की संभावना है। इसका सीधा मतलब है कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया तत्काल शुरू होने की संभावना कम है। चुनाव से पहले कई महत्वपूर्ण चरण पूरे करने होंगे और प्रत्येक चरण के बाद प्रशासनिक स्तर पर सत्यापन तथा आपत्तियों के निपटारे की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी। पहले परिसीमन, उसके बाद पंचायत चुनाव राज्य निर्वाचन आयोग पंचायत चुनाव क्षेत्रों के नए सिरे से सीमांकन की तैयारी कर रहा है। इसके लिए आयोग पहले विस्तृत दिशा-निर्देश तैयार करेगा। इसके बाद जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी के माध्यम से अलग-अलग जिलों में परिसीमन की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी। जानकारों के अनुसार केवल परिसीमन की प्रक्रिया में ही छह महीने या उससे अधिक समय लग सकता है। इसके बाद आरक्षण, मतदाता सूची और मतदान केंद्रों से संबंधित तैयारियां पूरी करने में अतिरिक्त समय लगेगा। यानी संभावित प्रत्याशियों को मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य समेत अन्य पदों के चुनाव को लेकर अभी धैर्य रखना पड़ सकता है। 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर होगा आकलन परिसीमन की प्रक्रिया में वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर गांवों की जनसंख्या और भौगोलिक स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके बाद बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 के प्रावधानों के तहत विभिन्न पंचायत क्षेत्रों की सीमाएं निर्धारित की जाएंगी। इसमें ग्राम पंचायत क्षेत्र, प्रादेशिक निर्वाचन क्षेत्र, पंचायत समिति और जिला परिषद क्षेत्रों का सीमांकन शामिल होगा। परिसीमन के बाद संबंधित क्षेत्रों के मानचित्र तैयार किए जाएंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में सीईबी ले-आउट मैप तैयार करने के साथ प्रखंडवार जनसंख्या और मतदाता संबंधी आंकड़ों को भी व्यवस्थित किया जाएगा। आपत्ति और सुझाव का भी मिलेगा मौका पंचायत क्षेत्रों का प्रारंभिक सीमांकन पूरा होने के बाद इसे अंतिम रूप देने से पहले आम लोगों से आपत्ति और सुझाव मांगे जाएंगे। इसके लिए गजट का प्रकाशन किया जाएगा। लोग निर्धारित प्रक्रिया के तहत परिसीमन से जुड़ी आपत्तियां और सुझाव दर्ज करा सकेंगे। प्राप्त आपत्तियों का निपटारा करने के बाद परिसीमन को अंतिम रूप दिया जाएगा। इस पूरी प्रक्रिया के कारण पंचायत चुनाव की समयसीमा आगे बढ़ सकती है। परिसीमन के बाद तैयार होगा नया आरक्षण रोस्टर परिसीमन पूरा होने के बाद पंचायत चुनाव के लिए नया आरक्षण रोस्टर तैयार किया जाएगा। इसमें विभिन्न पंचायत पदों पर अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अत्यंत पिछड़ा वर्ग और महिलाओं के लिए आरक्षण का निर्धारण किया जाएगा। इसका असर संभावित उम्मीदवारों की चुनावी तैयारी पर भी पड़ेगा। जिस सीट पर कोई व्यक्ति चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहा है, परिसीमन और नए आरक्षण रोस्टर के बाद उस सीट की स्थिति बदल सकती है। इसलिए संभावित प्रत्याशियों के लिए सिर्फ क्षेत्र की सीमाओं में होने वाले बदलाव ही नहीं, बल्कि आरक्षण की स्थिति भी महत्वपूर्ण होगी। मतदाता सूची और बूथ निर्धारण भी बाकी परिसीमन के बाद चुनाव आयोग को मतदाता सूची को अंतिम रूप देने और मतदान केंद्रों का निर्धारण करने समेत कई अन्य प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। प्रशासन को यह सुनिश्चित करना होगा कि नए पंचायत क्षेत्रों के अनुसार मतदाता सूची और मतदान केंद्रों की व्यवस्था सही तरीके से तैयार हो। इन सभी प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही चुनाव कार्यक्रम को अंतिम रूप देने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकेगा। जिलाधिकारियों की होगी अहम भूमिका परिसीमन की पूरी प्रक्रिया में जिलाधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। राज्य निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देश और निगरानी में जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह जिलाधिकारी पंचायत क्षेत्रों के सीमांकन और नए क्षेत्रों की घोषणा से जुड़ा काम पूरा कराएंगे। आयोग स्तर पर बैठकों का दौर शुरू हो चुका है और संबंधित अधिकारियों को प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुसार आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है। अक्टूबर-नवंबर में चुनाव की संभावना पर सवाल परिसीमन, आपत्तियों के निपटारे, आरक्षण रोस्टर, मतदाता सूची और मतदान केंद्रों के निर्धारण जैसी प्रक्रियाओं को देखते हुए फिलहाल अक्टूबर-नवंबर में पंचायत चुनाव कराना मुश्किल माना जा रहा है। हालांकि अंतिम चुनाव कार्यक्रम और तारीखों की घोषणा राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से आधिकारिक रूप से की जाएगी। इसलिए फिलहाल किसी निश्चित चुनाव तिथि को लेकर दावा करना जल्दबाजी होगी। संभावित उम्मीदवारों के लिए क्या मायने? पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि परिसीमन और आरक्षण की प्रक्रिया पूरी होने तक अपनी सीट को लेकर अंतिम स्थिति स्पष्ट नहीं मानी जा सकती। क्षेत्र की सीमा बदल सकती है, नए पंचायत क्षेत्र बन सकते हैं और आरक्षण रोस्टर के कारण किसी पद की चुनावी स्थिति भी बदल सकती है। ऐसे में उम्मीदवारों को आयोग और जिला प्रशासन की आधिकारिक घोषणाओं पर नजर रखनी होगी।  

surbhi अगस्त 12, 2026 0
हंगरी के नए राष्ट्रपति एंड्रास बाका
हंगरी की संसद ने पूर्व सुप्रीम कोर्ट प्रमुख एंड्रास बाका को नया राष्ट्रपति चुना

बुडापेस्ट, एजेंसियां। हंगरी की संसद ने मंगलवार, 11 अगस्त 2026, को पूर्व सुप्रीम कोर्ट प्रमुख एंड्रास बाका (András Baka) को देश का नया राष्ट्रपति चुन लिया। 73 वर्षीय बाका इस पद के लिए एकमात्र उम्मीदवार थे और उन्हें 140 सांसदों का समर्थन मिला, जबकि 6 सांसदों ने विरोध में मतदान किया। विपक्षी फिडेज़ पार्टी ने मतदान का बहिष्कार किया।   विक्टर ओर्बान के आलोचक रहे हैं बाका     एंड्रास बाका को हंगरी के पूर्व प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बान के आलोचक के तौर पर जाना जाता है। वह 2009 में देश के सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख बने थे, लेकिन न्यायिक सुधारों को लेकर सरकार की आलोचना करने के बाद 2011 में उनका कार्यकाल समय से पहले समाप्त कर दिया गया था। बाद में यूरोपीय मानवाधिकार न्यायालय ने उनकी समयपूर्व बर्खास्तगी को उनके अधिकारों का उल्लंघन माना था।     पीटर मैज्यार की सरकार का बड़ा कदम     बाका का चुनाव प्रधानमंत्री पीटर मैज्यार की सरकार द्वारा ओर्बान-युग की संस्थागत व्यवस्था में बदलाव की कोशिश के बीच हुआ है। मैज्यार की Tisza पार्टी ने बाका को राष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार बनाया था।   बाका ने अपने शुरुआती संबोधन में राजनीतिक बदलाव के दौरान बदले की राजनीति से बचने और देश के सभी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करने की बात कही।   19 अगस्त को संभालेंगे राष्ट्रपति पद     संसद द्वारा चुने जाने के बावजूद बाका तुरंत राष्ट्रपति पद का कार्यभार नहीं संभालेंगे। रिपोर्टों के अनुसार वह 19 अगस्त 2026 को आधिकारिक रूप से पद ग्रहण करेंगे। हंगरी में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से औपचारिक है, लेकिन राष्ट्रपति को कानूनों की समीक्षा करने समेत कुछ महत्वपूर्ण संवैधानिक अधिकार प्राप्त हैं।   यह चुनाव हंगरी की राजनीति में इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बाका का राष्ट्रपति बनना ओर्बान युग के बाद संस्थागत बदलाव की दिशा में एक प्रतीकात्मक कदम के रूप में देखा जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 12, 2026 0
Election officials reviewing the draft voter list during the SIR-2026 campaign in Garhwa district.
गढ़वा में 47 नए मतदान केंद्र बने, 4 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे दावा-आपत्ति

गढ़वा: भारत निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR-2026) के तहत गढ़वा जिले में प्रारूप मतदाता सूची प्रकाशित कर दी गई है. इसके साथ ही जिले में मतदाताओं की सुविधा के लिए 47 नए मतदान केंद्र भी बनाए गए हैं. अब मतदाता 5 अगस्त से 4 सितंबर 2026 तक मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने, संशोधन या अन्य त्रुटियों को लेकर दावा एवं आपत्ति दर्ज करा सकेंगे. समाहरणालय सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक एवं प्रेस वार्ता में जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने राजनीतिक दलों और मीडिया प्रतिनिधियों को पूरे पुनरीक्षण कार्यक्रम की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सभी दावों और आपत्तियों के निस्तारण के बाद 7 अक्टूबर 2026 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी. इस पुनरीक्षण की अर्हता तिथि 1 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है. 47 नए बूथ बनने से बढ़ी मतदान केंद्रों की संख्या जिले में मतदान केंद्रों के युक्तिकरण (रैशनलाइजेशन) का कार्य पूरा कर लिया गया है. पहले गढ़वा विधानसभा क्षेत्र में 455 और भवनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में 502 मतदान केंद्र थे. अब गढ़वा विधानसभा में 33 नए बूथ जोड़कर उनकी संख्या 488 कर दी गई है, जबकि भवनाथपुर विधानसभा में 14 नए बूथ बढ़ाकर कुल 516 मतदान केंद्र कर दिए गए हैं. इस तरह जिले में कुल 47 नए मतदान केंद्र बनने के बाद अब मतदान केंद्रों की संख्या 1004 हो गई है. प्रशासन का कहना है कि इससे मतदाताओं को मतदान के दौरान अधिक सुविधा मिलेगी और भीड़ भी कम होगी. 17 अधिकारियों को सौंपी गई जिम्मेदारी मतदाता सूची पुनरीक्षण कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए दोनों विधानसभा क्षेत्रों के लिए 17 अधिकारियों की तैनाती की गई है. इनमें 2 निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO), 6 सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (AERO) और 9 अतिरिक्त सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी शामिल हैं. गढ़वा विधानसभा के 488 बूथों की जिम्मेदारी एसडीओ सह ईआरओ कुमार मयंक भूषण सहित विभिन्न प्रखंडों के बीडीओ और सीओ को सौंपी गई है. वहीं भवनाथपुर विधानसभा के 516 बूथों की जिम्मेदारी एसडीओ श्री बंशीधर नगर प्रभाकर मिर्धा तथा संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारियों को दी गई है. मतदाता सूची में सुधार का मिलेगा अवसर उपायुक्त पशुपति नाथ मिश्रा ने सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों और आम मतदाताओं से अपील की है कि वे प्रारूप मतदाता सूची का सावधानीपूर्वक परीक्षण करें. यदि किसी पात्र मतदाता का नाम सूची में शामिल नहीं है, किसी का नाम गलत दर्ज है या किसी प्रकार की त्रुटि है, तो निर्धारित अवधि के भीतर दावा एवं आपत्ति अवश्य दर्ज कराएं. उन्होंने कहा कि निर्वाचन आयोग का उद्देश्य शत-प्रतिशत शुद्ध और त्रुटिरहित मतदाता सूची तैयार करना है, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक अपने मताधिकार का प्रयोग कर सके. जिला प्रशासन ने सभी संबंधित अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से दावों और आपत्तियों का निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए हैं.  

kalpana अगस्त 7, 2026 0
Voters submitting applications at a special SIR 2026 voter registration camp at a polling booth in East Singhbhum.
SIR 2026: वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और सुधार का सुनहरा मौका, 8-9 अगस्त को सभी बूथों पर लगेंगे विशेष कैंप

जमशेदपुर: अगर आपका नाम वोटर लिस्ट में नहीं है, किसी तरह की गलती दर्ज है या परिवार के अलग-अलग सदस्यों के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों पर हैं, तो अब इन्हें ठीक कराने का आसान मौका है. पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन की ओर से विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR 2026) अभियान के तहत 8 और 9 अगस्त 2026 को जिले के सभी मतदान केंद्रों पर विशेष शिविर लगाए जाएंगे. इन शिविरों में नए मतदाताओं का नाम जोड़ने, मतदाता सूची में सुधार कराने और मतदान केंद्र बदलवाने जैसी सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी. निर्वाचन विभाग के अनुसार दोनों दिनों में सभी बूथों पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक विशेष कैंप आयोजित किए जाएंगे. बूथ लेवल अधिकारी (BLO) और संबंधित निर्वाचन कर्मी मौके पर मौजूद रहेंगे, जो नागरिकों के आवेदन स्वीकार करेंगे और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करेंगे. नए मतदाताओं के लिए सुनहरा अवसर इस अभियान के तहत ऐसे सभी भारतीय नागरिक आवेदन कर सकते हैं, जो झारखंड के किसी विधानसभा क्षेत्र के सामान्य निवासी हैं और 18 वर्ष की आयु पूरी कर चुके हैं. इसके अलावा जिन युवाओं की आयु 1 अक्टूबर 2026 तक 18 वर्ष हो जाएगी, वे भी मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने के लिए आवेदन कर सकते हैं. नाम जुड़वाने के लिए फॉर्म-6 और निर्धारित घोषणा पत्र भरना होगा. आवेदन के साथ आवश्यक पहचान और निवास संबंधी दस्तावेज जमा करने होंगे. दस्तावेजों के सत्यापन के बाद योग्य आवेदकों का नाम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा. परिवार के सभी सदस्यों का नाम एक ही बूथ पर करा सकते हैं शिफ्ट अगर किसी परिवार के सदस्यों के नाम अलग-अलग मतदान केंद्रों पर दर्ज हैं या वर्तमान बूथ घर से काफी दूर है, तो अब उन्हें एक ही मतदान केंद्र पर स्थानांतरित कराया जा सकता है. इसके लिए फॉर्म-8 भरकर आवेदन करना होगा. इससे पूरे परिवार को मतदान के दिन अलग-अलग बूथों पर जाने की परेशानी नहीं होगी. वोटर लिस्ट में गलती भी करा सकते हैं ठीक विशेष शिविर के दौरान मतदाता अपने नाम, पता, आयु, फोटो या अन्य विवरण में किसी भी त्रुटि को भी ठीक करा सकते हैं. यदि किसी मतदाता का पता बदल गया है या किसी अन्य जानकारी में संशोधन की आवश्यकता है, तो संबंधित फॉर्म भरकर आवेदन किया जा सकता है. घर बैठे भी कर सकते हैं आवेदन निर्वाचन विभाग ने ऑनलाइन आवेदन की सुविधा भी उपलब्ध कराई है. नागरिक अपने मोबाइल पर ECINet App या Voter Helpline App डाउनलोड कर आवेदन कर सकते हैं. इसके अलावा निर्वाचन आयोग के पोर्टल voters.eci.gov.in के माध्यम से भी ऑनलाइन फॉर्म भरा जा सकता है. यदि किसी नागरिक को आवेदन प्रक्रिया में किसी तरह की परेशानी होती है, तो वह टोल-फ्री नंबर 1800-331-1950 या वोटर हेल्पलाइन 1950 पर संपर्क कर आवश्यक जानकारी और सहायता प्राप्त कर सकता है. मतदान सूची को त्रुटिरहित बनाने पर जोर निर्वाचन विभाग का उद्देश्य विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान के माध्यम से अधिक से अधिक पात्र नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल करना और मौजूदा रिकॉर्ड में मौजूद त्रुटियों को दूर करना है. प्रशासन ने जिले के सभी पात्र मतदाताओं से अपील की है कि वे 8 और 9 अगस्त को अपने नजदीकी मतदान केंद्र पर पहुंचकर मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण अवश्य जांचें तथा जरूरत होने पर उसी दिन आवेदन कर प्रक्रिया पूरी करें.  

kalpana अगस्त 7, 2026 0
झारखंड में SIR अभियान के तहत मतदाताओं का सत्यापन
झारखंड SIR: 63.24 लाख मतदाताओं को जारी होंगे नोटिस

रांची। झारखंड में विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) अभियान के तहत प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची के बाद अब बड़े स्तर पर सत्यापन की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) कार्यालय के अनुसार, राज्य के 63.24 लाख से अधिक मतदाताओं को निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO) की ओर से नोटिस जारी किए जाएंगे। इन मामलों में दस्तावेजों की जांच और सुनवाई के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।   ड्राफ्ट मतदाता सूची में 2.21 करोड़ से अधिक नाम     ड्राफ्ट मतदाता सूची में फिलहाल 2,21,01,249 मतदाताओं के नाम शामिल हैं। निर्वाचन आयोग ने सूची में चिन्हित विभिन्न श्रेणियों के मतदाताओं का सत्यापन करने का निर्णय लिया है, ताकि अंतिम मतदाता सूची को अधिक सटीक और त्रुटिरहित बनाया जा सके।     इन श्रेणियों के मतदाताओं को मिलेगा नोटिस     सत्यापन प्रक्रिया के तहत सबसे अधिक 45,55,227 मतदाता तार्किक विसंगति (Logical Error) श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं। इसके अलावा 14,03,205 नो-मैपिंग वाले मतदाताओं और 3,65,684 जनांकिकीय सम-प्रविष्टि (Demographic Similar Entry-DSE) वाले मतदाताओं को भी नोटिस जारी किया जाएगा।     दस्तावेजों की जांच के बाद होगी सुनवाई     निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि जिन मतदाताओं के रिकॉर्ड में विसंगति पाई गई है, उन्हें पहले नोटिस भेजा जाएगा। इसके बाद संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी और प्रत्येक मामले में निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी (ERO) स्तर पर सुनवाई का अवसर दिया जाएगा। सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।     पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करने पर जोर     चुनाव आयोग का कहना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान का उद्देश्य मतदाता सूची में मौजूद त्रुटियों को दूर करना और पात्र मतदाताओं का सही रिकॉर्ड सुनिश्चित करना है। सुनवाई और दस्तावेजी सत्यापन के बाद अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जाएगी।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
झारखंड में SIR के तहत प्रारूप मतदाता सूची जारी
झारखंड में SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आज होगी जारी, 4 सितंबर तक चलेगी दावा-आपत्ति प्रक्रिया

झारखंड में SIR के तहत ड्राफ्ट वोटर लिस्ट आज होगी जारी, छूटे मतदाताओं के लिए दावा-आपत्ति शुरू रांची। झारखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के तहत प्रारूप मतदाता सूची आज, 5 अगस्त 2026 को जारी की जा रही है। सूची जारी होने के साथ ही उन मतदाताओं के लिए दावा और आपत्ति दर्ज कराने की प्रक्रिया भी शुरू हो जाएगी, जिनका नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं है। दावा-आपत्ति की प्रक्रिया 4 सितंबर 2026 तक चलेगी।   43 लाख से ज्यादा नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर     SIR प्रक्रिया के दौरान किए गए सत्यापन के बाद झारखंड में 43 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची में शामिल नहीं किए गए हैं। इनमें मृत मतदाता, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके मतदाता, दोहरी प्रविष्टियां और अन्य कारणों से सत्यापन पूरा नहीं हो पाने वाले नाम शामिल बताए गए हैं।   हालांकि, किसी नाम का ड्राफ्ट सूची में नहीं होना अपने आप में मतदाता का अंतिम रूप से नाम कटना नहीं है। पात्र मतदाताओं को दावा प्रस्तुत कर अपना नाम शामिल कराने का अवसर दिया गया है।   4 सितंबर तक दर्ज करा सकेंगे दावा-आपत्ति     ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने के बाद 5 अगस्त से 4 सितंबर तक दावा और आपत्ति दाखिल की जा सकेगी। जिन योग्य मतदाताओं का नाम सूची में नहीं है, वे निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना दावा पेश कर सकते हैं।   मतदाताओं को सलाह दी गई है कि वे अपना नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में जरूर जांच लें। नाम नहीं मिलने पर निर्धारित अवधि के भीतर आवश्यक दस्तावेजों के साथ दावा दाखिल करना महत्वपूर्ण होगा।   पात्र मतदाता का नाम नहीं हटाने का भरोसा     झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि SIR का उद्देश्य किसी वास्तविक और पात्र मतदाता का नाम हटाना नहीं है। उन्होंने पात्र मतदाताओं को सूची में शामिल किए जाने का भरोसा भी दिया है।   अब ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद दावा-आपत्ति की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसके बाद प्राप्त दावों और आपत्तियों की जांच कर अंतिम मतदाता सूची तैयार की जाएगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
आंध्र प्रदेश मतदाता सूची
आंध्र प्रदेश में ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी, SIR के बाद 44.80 लाख नाम हटे

अमरावती, एजेंसियां। भारत निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद आंध्र प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। मसौदा सूची में करीब 44.80 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। यह कार्रवाई मतदाता सूची को अपडेट करने और मृत, स्थानांतरित या अन्य कारणों से अपात्र हो चुके नामों को हटाने की प्रक्रिया के तहत की गई है।   SIR के बाद लाखों नाम सूची से बाहर   विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान मतदाताओं के विवरण का व्यापक सत्यापन किया गया। इसके बाद आंध्र प्रदेश के ड्राफ्ट रोल में करीब 44.80 लाख नाम कम हुए हैं। निर्वाचन अधिकारियों की ओर से तैयार मसौदा सूची अब आगे की जांच और दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया के लिए उपलब्ध है।   मतदाताओं को दावे और आपत्ति का मौका   ड्राफ्ट इलेक्टोरल रोल जारी होने के बाद पात्र मतदाता सूची में अपना नाम और विवरण जांच सकते हैं। यदि किसी पात्र व्यक्ति का नाम छूट गया है या मतदाता सूची में किसी जानकारी को लेकर आपत्ति है, तो निर्धारित प्रक्रिया के तहत दावा या आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।   अंतिम सूची 3 अक्टूबर को होगी जारी   आंध्र प्रदेश में SIR की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम मतदाता सूची 3 अक्टूबर 2026 को जारी किए जाने का कार्यक्रम है। ड्राफ्ट रोल और अंतिम सूची के बीच की अवधि में दावों एवं आपत्तियों पर कार्रवाई की जाएगी।   मतदाताओं से नाम जांचने की अपील   निर्वाचन प्रक्रिया के लिहाज से मतदाता सूची में नाम होना बेहद महत्वपूर्ण है। ऐसे में मतदाताओं से अपील की गई है कि वे ड्राफ्ट रोल में अपना नाम और अन्य विवरण जरूर जांच लें तथा आवश्यकता होने पर समय रहते दावा या आपत्ति दर्ज कराएं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 1, 2026 0
A symbolic image of the Calcutta High Court, representing the resignation of retired Justice Ranjit Kumar Bag from the SIR Tribunal handling West Bengal voter list cases.
पश्चिम बंगाल: SIR ट्रिब्यूनल से एक और सेवानिवृत्त जज का इस्तीफा, स्वास्थ्य कारणों का दिया हवाला

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे SIR ट्रिब्यूनल को एक और झटका लगा है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दे दिया है। इससे पहले भी एक पूर्व मुख्य न्यायाधीश इस ट्रिब्यूनल से अलग हो चुके हैं। स्वास्थ्य कारणों से दिया इस्तीफा सूत्रों के अनुसार, सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग ने खराब स्वास्थ्य के कारण ट्रिब्यूनल में अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होने का निर्णय लिया। उनके इस्तीफे के बाद ट्रिब्यूनल की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर चर्चा शुरू हो गई है। पहले भी दे चुके हैं जज इस्तीफा इससे पहले मई में T. S. Sivagnanam ने भी SIR ट्रिब्यूनल से इस्तीफा दिया था। लगातार दो वरिष्ठ न्यायाधीशों के हटने से ट्रिब्यूनल के कामकाज पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुआ था गठन SIR ट्रिब्यूनल का गठन Supreme Court of India के निर्देश पर तत्कालीन Calcutta High Court के मुख्य न्यायाधीश Sujoy Paul द्वारा किया गया था। इस ट्रिब्यूनल का उद्देश्य मतदाता सूची से बाहर हुए लोगों के मामलों की जांच करना और उनके दस्तावेजों का सत्यापन कर उचित निर्णय देना है। 27 लाख मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी ट्रिब्यूनल के सामने करीब 27 लाख मामलों के निपटारे की जिम्मेदारी है। इनमें उन लोगों के आवेदन शामिल हैं, जिनके नाम मतदाता सूची से हट गए हैं। दस्तावेजों की जांच की जा रही है और कई आवेदकों से फोन के माध्यम से भी संपर्क किया जा रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाले की जांच से भी जुड़ा रहा नाम सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजीत कुमार बाग इससे पहले पश्चिम बंगाल के चर्चित शिक्षक भर्ती मामले की जांच से भी जुड़े रहे हैं। उनकी अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट के आधार पर कथित भर्ती अनियमितताओं का मामला सामने आया था, जिसके बाद जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंप दी गई थी। ट्रिब्यूनल से उनके इस्तीफे की वजह केवल स्वास्थ्य संबंधी बताई गई है और इसे किसी अन्य विवाद से नहीं जोड़ा गया है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Ration Card
पश्चिम बंगाल सरकार का बड़ा फैसला: एसआईआर में नाम कटते ही राशन कार्ड भी होगा रद्द

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने राशन कार्ड सत्यापन को लेकर बड़ा फैसला लिया है। राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के बाद जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं, उनके राशन कार्ड भी रद्द किए जाएंगे। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने स्पष्ट किया है कि ऐसे लाभार्थियों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत मिलने वाला राशन अब उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। सरकार ने इस प्रक्रिया को तेज़ी से पूरा करने के लिए विशेष अभियान शुरू किया है। प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि 15 जून तक राशन कार्डों की जांच और सत्यापन की पूरी प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। इस फैसले का उद्देश्य फर्जी या अपात्र लाभार्थियों की पहचान कर सरकारी योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचाना बताया जा रहा है। आरसीएमएस डेटाबेस से हटाए जाएंगे नाम खाद्य विभाग के अनुसार, एसआईआर के दौरान जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके डिजिटल राशन कार्ड (डीआरसी) भी राशन कार्ड मैनेजमेंट सिस्टम (आरसीएमएस) डेटाबेस से हटा दिए जाएंगे। इसके बाद ऐसे लोगों का राशन कार्ड अमान्य माना जाएगा और वे राशन लेने के पात्र नहीं रहेंगे। कुछ लोगों को मिलेगी राहत हालांकि सरकार ने कुछ श्रेणियों के लोगों को राहत भी दी है। जिन व्यक्तियों ने मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ संबंधित ट्रिब्यूनल में अपील दायर की है या जिन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत आवेदन किया हुआ है, उनके राशन कार्ड फिलहाल रद्द नहीं किए जाएंगे। अपील या आवेदन पर अंतिम निर्णय आने तक उनके कार्ड सक्रिय बने रहेंगे और उन्हें राशन मिलता रहेगा। रोजाना होगी निगरानी खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने जिला स्तर पर निगरानी की व्यवस्था भी की है। जिला खाद्य नियंत्रकों (डीसीएफएस/डीडीआर) को इस अभियान की दैनिक समीक्षा करने और प्रगति रिपोर्ट जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) तथा विभागीय निदेशालय को भेजने का निर्देश दिया गया है। सरकार का मानना है कि इस कदम से राशन वितरण प्रणाली अधिक पारदर्शी बनेगी और फर्जी लाभार्थियों पर रोक लगेगी। वहीं, विपक्षी दल इस फैसले के सामाजिक और राजनीतिक प्रभावों पर सवाल उठा रहे हैं, जिससे आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।

Unknown जून 6, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0