Yuzvendra Chahal

Bihar milk prices
बिहार में दूध, दही, पनीर, लस्सी समेत सभी डेयरी प्रोडक्ट्स हुए महंगे  जानिए क्या है नई रेट?

पटना, एजेंसियां। बिहार में दूध और दुग्ध उत्पादों की कीमत बढ़ गए हैं। COMFED ने 25 मई से नई कीमतें लागू करने की फैसला लिया है। दूध के साथ दूध से बने उत्पाद घी, पनीर, बटर, दही, लस्सी और मिठाइयां समेत सभी डेयरी प्रडक्ट्स के दाम बढ़ा दिए गए हैं। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपेरेटिव फेडरेशन लिमिटेड ने सुधा ब्रांड के दूध और उससे बने दुग्ध उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी करने का फैसला लिया है। 25 मई से पूरे बिहार में नई दरें लागू हो जाएंगे।  सुधा दूध के नए रेट  सुधा गोल्ड (500 ml): 27 से बढ़कर 28 रुपये, 1 लीटर 55 रुपये •    सुधा शक्ति टोंड (500 ml): 25 से बढ़कर 26 रुपये, 1 लीटर 50 रुपये •    सुधा स्टैंडर्ड (500 ml): 29 से बढ़कर 31 रुपये, 1 लीटर 60 रुपये •    गाय दूध (500 ml): 33 से बढ़कर 35 रुपये, 1 लीटर 68 रुपये •    काऊ मिल्क (500 ml): 28 से बढ़कर 29 रुपये, 1 लीटर 57 रुपये •    टी स्पेशल (500 ml): 26 से बढ़कर 27 रुपये, 1 लीटर 52 रुपये यानी हर श्रेणी में 1 से 3 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है।  घी, पनीर और बटर के बढ़े दाम •    घी (1 लीटर): 315 से 325 रुपये •    पनीर (200 ग्राम): 85 से 95 रुपये •    टेबल बटर (500 ग्राम): 205 से 220 रुपये •    व्हाइट बटर (100 ग्राम): 55 से 62 रुपये •    मिठ्ठी दही (500 ग्राम): 270 से 305 रुपये इन उत्पादों में 7 से 35 रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।  दही, लस्सी और ड्रिंक्स के नए रेटः •    दही (1 किलो): 72 से 78 रुपये •    लस्सी (140 ml): 10 से 12 रुपये •    मस्तानी (140 ml): 12 से 15 रुपये •    मिल्क केक/पेडा (250 ग्राम): 108 से 125 रुपये  मिठाइयों के दाम बढ़कर इतना हुआः •    गुलाब जामुन (1 किलो टिन): 240 से 250 रुपये •    रसगुल्ला (1 किलो टिन): 220 से 240 रुपये •    मिक्स मिठाई टिन: 230 से 250 रुपये क्यों बढ़े दाम? COMFED का कहना है कि पशुपालकों से खरीदे जाने वाले दूध, पैकेजिंग खर्च, पेट्रोल-डीजल, बिजली और ट्रांसपोर्ट लागत में बढ़ोतरी के कारण यह फैसला लिया गया है। फेडरेशन ने स्पष्ट किया कि दूध की खरीद कीमत में 2 रुपये से 3.13 रुपये प्रति लीटर तक का इजाफा हुआ है, जिसका असर अब रिटेल कीमतों पर दिखेगा। इससे आमलोगों के मासिक बजट प्रभावित होगा। खासकर मध्यम वर्गीय परिवारों पर इसका सीधा असर पड़ेगा, जो रोजाना दूध, दही और घी का उपभोग करते हैं।

Unknown मई 23, 2026 0
Punjab Kings players prepare for crucial IPL 2026 clash against Lucknow Super Giants in Lucknow
IPL 2026: पंजाब किंग्स के लिए आज प्लेऑफ का बड़ा इम्तिहान, लखनऊ के खिलाफ रिकॉर्ड मजबूत

Indian Premier League 2026 का रोमांच अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है और आज का मुकाबला प्लेऑफ की तस्वीर बदल सकता है। शनिवार को Punjab Kings और Lucknow Super Giants के बीच सीजन का 68वां मैच खेला जाएगा। यह मुकाबला लखनऊ के इकाना स्टेडियम में होगा, जहां पंजाब के लिए जीत बेहद जरूरी मानी जा रही है। पंजाब के लिए ‘करो या मरो’ की स्थिति पंजाब किंग्स ने इस सीजन की शुरुआत शानदार अंदाज में की थी। टीम ने शुरुआती 7 मुकाबलों में से 6 मैच जीतकर पॉइंट्स टेबल में मजबूत पकड़ बना ली थी। लेकिन इसके बाद टीम लगातार 6 मुकाबले हार गई और अब प्लेऑफ की उम्मीदें मुश्किल में फंस गई हैं। आज अगर पंजाब हारता है तो उसकी प्लेऑफ की राह लगभग बंद हो सकती है। वहीं जीत मिलने पर टीम की उम्मीदें जिंदा रहेंगी, हालांकि उसे बाकी मैचों के नतीजों पर भी निर्भर रहना पड़ेगा। दूसरी ओर Lucknow Super Giants पहले ही प्लेऑफ की दौड़ से बाहर हो चुकी है। ऐसे में लखनऊ बिना किसी दबाव के मैदान पर उतरेगी और पंजाब के लिए चुनौती और भी कठिन हो सकती है। हेड टू हेड में पंजाब का पलड़ा भारी आईपीएल इतिहास में दोनों टीमें अब तक 7 बार आमने-सामने आ चुकी हैं। इनमें पंजाब ने 4 मुकाबले जीते हैं, जबकि लखनऊ को 3 मैचों में जीत मिली है। एक मुकाबला टाई भी रहा है। इस सीजन की पहली भिड़ंत में पंजाब ने अपने घरेलू मैदान पर लखनऊ को हराया था। ऐसे में टीम एक बार फिर उसी प्रदर्शन को दोहराना चाहेगी। इकाना स्टेडियम की पिच रिपोर्ट लखनऊ के इकाना स्टेडियम की पिच बाकी मैदानों से अलग मानी जाती है। यहां बड़े स्कोर बनाना आसान नहीं होता और बल्लेबाजों को रन बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ता है। स्पिन गेंदबाजों को पिच से अच्छी मदद मिलती है शुरुआती ओवरों में तेज गेंदबाजों को स्विंग मिल सकती है बड़े शॉट लगाना आसान नहीं रहता टॉस जीतने वाली टीम पहले गेंदबाजी करना पसंद कर सकती है मौसम का हाल लखनऊ में मौसम गर्म और सूखा रहने की संभावना है। दिनभर तेज धूप और लू का असर रहेगा। शाम को मैच शुरू होने के बाद भी उमस और गर्मी बनी रह सकती है। हालांकि अच्छी बात यह है कि बारिश की कोई संभावना नहीं है और मैच बिना रुकावट पूरा होने की उम्मीद है। संभावित प्लेइंग 12 Lucknow Super Giants मिचेल मार्श, जोश इंग्लिस, निकोलस पूरन, आयुष बडोनी, Rishabh Pant (कप्तान और विकेटकीपर), अब्दुल समद, शाहबाज अहमद, मोहसिन खान, मयंक यादव, आकाश सिंह, प्रिंस यादव, दिग्वेश सिंह राठी Punjab Kings प्रियांश आर्या, प्रभसिमरन सिंह (विकेटकीपर), कूपर कोनोली, Shreyas Iyer (कप्तान), शशांक सिंह, सूर्यांश शेडगे, अजमतुल्लाह ओमरजई, हरप्रीत बरार, जेवियर बार्टलेट, लॉकी फर्ग्यूसन, Arshdeep Singh, Yuzvendra Chahal  

surbhi मई 23, 2026 0
RJ Mahvash reacts to dating rumours with cricketer Yuzvendra Chahal during a podcast interview.
आरजे माहवश ने युजवेंद्र चहल संग रिश्ते की खबरों पर तोड़ी चुप्पी, कहा- ‘हम सिर्फ अच्छे दोस्त हैं’

RJ Mahvash और Yuzvendra Chahal पिछले काफी समय से अपने रिश्ते की खबरों को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। सोशल मीडिया पर दोनों के फॉलो और अनफॉलो को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। अब पहली बार माहवश ने इन खबरों पर खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है और दोनों के रिश्ते की सच्चाई बताई है। ‘लोग छोटी बातों को बड़ा बना देते हैं’ एक पॉडकास्ट इंटरव्यू के दौरान जब माहवश से सोशल मीडिया पर चहल को अनफॉलो करने को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा कि लोग अक्सर छोटी बातों को जरूरत से ज्यादा बड़ा बना देते हैं। उन्होंने कहा कि दोस्तों के बीच बहस या मतभेद होना सामान्य बात है और कई बार लोग फॉलो-अनफॉलो भी कर देते हैं, लेकिन इसका मतलब हमेशा रिश्ते में कोई बड़ी समस्या नहीं होता। माहवश ने कहा: “दो दोस्तों के बीच कभी बहस हो जाती है और वे एक-दूसरे को फॉलो या अनफॉलो कर देते हैं। मैं हमेशा उन्हें शुभकामनाएं दूंगी और मेरी दुआएं हमेशा उनके साथ रहेंगी।” ‘हमारे बीच कभी दोस्ती से ज्यादा कुछ नहीं था’ जब उनसे पूछा गया कि क्या कभी उनके और चहल के बीच दोस्ती से ज्यादा कुछ था, तो उन्होंने साफ इनकार कर दिया। माहवश ने कहा कि वह हमेशा चहल की अच्छी दोस्त रही हैं और मुश्किल दौर में सिर्फ एक दोस्त की तरह उनके साथ खड़ी थीं। उन्होंने कहा: “ऐसा कभी नहीं था। वह अपने अलगाव के दौर से गुजर रहे थे और उन्हें एक सच्चे दोस्त की जरूरत थी। मैं उनके सपोर्ट सिस्टम की तरह उनके साथ रही।” तलाक की खबरों के बाद शुरू हुई थीं अफवाहें Yuzvendra Chahal और Dhanashree Verma के अलगाव की खबरों के बाद चहल और माहवश को कई बार साथ देखा गया था। इसके बाद सोशल मीडिया पर दोनों की डेटिंग की चर्चाएं तेज हो गई थीं। हालांकि दोनों लगातार इन खबरों को अफवाह बताते रहे और कहा कि उनके बीच सिर्फ दोस्ती का रिश्ता है। सोशल मीडिया पर फिर बढ़ी चर्चा हाल ही में दोनों के एक-दूसरे को सोशल मीडिया पर फॉलो और अनफॉलो करने की खबरों ने एक बार फिर रिश्ते को लेकर चर्चाएं तेज कर दी थीं। लेकिन माहवश के बयान के बाद अब तस्वीर काफी हद तक साफ होती नजर आ रही है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Punjab Kings captain Shreyas Iyer and spinner Yuzvendra Chahal during IPL 2026 match against Delhi Capitals
PBKS की हार पर उठे सवाल, क्या युजवेंद्र चहल को गेंदबाजी न देना पड़ा भारी?

Indian Premier League में Punjab Kings की लगातार चौथी हार के बाद टीम की रणनीति पर सवाल उठने लगे हैं। Delhi Capitals के खिलाफ 211 रन का बड़ा स्कोर बनाने के बावजूद पंजाब मुकाबला हार गया, और सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि कप्तान Shreyas Iyer ने अनुभवी स्पिनर Yuzvendra Chahal से एक भी ओवर क्यों नहीं करवाया। यह आईपीएल इतिहास में सिर्फ चौथा मौका था जब Yuzvendra Chahal ने पूरे मैच में एक भी गेंद नहीं डाली। खास बात यह रही कि धर्मशाला में खेले गए इस मुकाबले के सभी 39 ओवर तेज गेंदबाजों ने फेंके। अभिषेक मुकुंद ने बताया कहां हुई गलती पूर्व भारतीय ओपनर Abhinav Mukund ने मैच के बाद कहा कि पंजाब को मध्य ओवरों में चहल को कम से कम एक-दो ओवर जरूर देने चाहिए थे। उनके मुताबिक, जब स्कोरबोर्ड का दबाव था तब विकेट निकालने के लिए जोखिम लिया जा सकता था। उन्होंने कहा कि सातवें से दसवें ओवर के बीच चहल को गेंदबाजी दी जा सकती थी, खासकर उस समय जब Axar Patel और Tristan Stubbs बल्लेबाजी कर रहे थे। अगर प्रयोग सफल नहीं होता, तो टीम के पास Marcus Stoinis जैसे विकल्प मौजूद थे। Miller और Axar ने बदल दिया मैच दिल्ली की जीत में David Miller और Axar Patel की अहम भूमिका रही। दोनों बल्लेबाजों ने मध्य ओवरों में रन गति बनाए रखी और पंजाब के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया। पूर्व न्यूजीलैंड तेज गेंदबाज Mitchell McClenaghan का मानना है कि चहल को खास तौर पर डेविड मिलर के खिलाफ इस्तेमाल किया जा सकता था। उन्होंने कहा कि मिलर अपने शुरुआती ओवरों में लेग स्पिन के खिलाफ थोड़ा सतर्क रहते हैं और चहल उनके लिए खतरा बन सकते थे। पंजाब ने डेथ ओवरों में गंवाया नियंत्रण पंजाब ने डेथ ओवरों में Marcus Stoinis और युवा तेज गेंदबाज Yash Thakur पर भरोसा जताया। उस समय दिल्ली को जीत के लिए 38 रन चाहिए थे, लेकिन दिल्ली के बल्लेबाजों ने दोनों ओवरों में तेजी से रन बनाकर मैच अपने नाम कर लिया। श्रेयस अय्यर ने क्या कहा? मैच के बाद कप्तान Shreyas Iyer ने माना कि चहल को गेंदबाजी देने पर विचार किया गया था। हालांकि उनका कहना था कि पिच पर तेज गेंदबाजों को काफी मदद मिल रही थी और टीम को लगा कि सही लाइन और लेंथ पर गेंदबाजी कर विकेट निकाले जा सकते हैं। लेकिन पंजाब के गेंदबाज उस योजना को पूरी तरह लागू नहीं कर सके और दिल्ली ने 19 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। अब भी प्लेऑफ की उम्मीद बरकरार लगातार चार हार के बावजूद Punjab Kings की प्लेऑफ उम्मीदें अभी खत्म नहीं हुई हैं। टीम के तीन मुकाबले बाकी हैं, जिनमें दो मैच निचले पायदान पर मौजूद Mumbai Indians और Lucknow Super Giants के खिलाफ हैं। ऐसे में पंजाब के पास वापसी का मौका अभी भी मौजूद है।  

surbhi मई 12, 2026 0
Yuzvendra Chahal and actress Taniya Chatterjee amid viral Instagram message controversy on social media.
कौन हैं तानिया चटर्जी? युजवेंद्र चहल के इंस्टाग्राम मैसेज के दावे से क्यों मचा बवाल

सोशल मीडिया पर इन दिनों भारतीय क्रिकेटर Yuzvendra Chahal और एक्ट्रेस Taniya Chatterjee को लेकर चर्चा तेज हो गई है। एक वायरल वीडियो के बाद यह मामला सुर्खियों में आया, जिसमें तानिया ने दावा किया कि चहल ने उन्हें इंस्टाग्राम पर मैसेज भेजा था। क्या है पूरा मामला? तानिया चटर्जी ने पैपराजी के सामने बातचीत के दौरान अपने फोन में एक मैसेज दिखाने का दावा किया। उनके अनुसार, चहल ने उनके एक वीडियो पर रिएक्शन देते हुए उन्हें “क्यूट” कहा था। तानिया ने कहा, “आप क्यूट हो… ये मैसेज चहल ने भेजा है। वैसे क्यूट तो नॉर्मल चीज है, मुझे बहुत लोग बोलते हैं।” जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने इस मैसेज का जवाब दिया, तो उन्होंने साफ किया कि उन्होंने मैसेज काफी देर से देखा और तुरंत कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी चहल से पहले कभी कोई बातचीत या मुलाकात नहीं हुई थी, जिससे वह खुद भी इस मैसेज को लेकर हैरान थीं। कौन हैं तानिया चटर्जी? तानिया चटर्जी कोलकाता की रहने वाली एक एक्ट्रेस, मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर हैं। उन्होंने कई OTT प्रोजेक्ट्स में काम किया है और वेब सीरीज में अपनी पहचान बनाई है। उनके चर्चित प्रोजेक्ट्स में शामिल हैं: Gandi Baat Season 4 Class of 2020 इंस्टाग्राम पर उनके 23 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं, जहां वह फैशन, लाइफस्टाइल और प्रमोशनल कंटेंट शेयर करती रहती हैं। चहल की पर्सनल लाइफ भी रही चर्चा में Yuzvendra Chahal की निजी जिंदगी भी हाल के समय में खबरों में रही है। साल 2025 की शुरुआत में उन्होंने अपनी पत्नी Dhanashree Verma से अलग होने का फैसला लिया था। इसके बाद उनका नाम RJ Mahvash के साथ भी जोड़ा गया, हालांकि बाद में दोनों के अनफॉलो करने की खबरें सामने आईं। सोशल मीडिया पर क्यों बढ़ी चर्चा? इस पूरे मामले ने सोशल मीडिया पर इसलिए तूल पकड़ा क्योंकि: वीडियो वायरल हो गया तानिया का खुलकर बयान देना चहल की पहले से चर्चा में रही पर्सनल लाइफ हालांकि, इस मामले पर अभी तक चहल की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

surbhi अप्रैल 14, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Deepshikha जून 6, 2026 0