लुसाका, एजेंसियां। जाम्बिया के राष्ट्रपति हाकाइंडे हिचिलेमा ने लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। निर्वाचन आयोग द्वारा घोषित आधिकारिक नतीजों के अनुसार हिचिलेमा को करीब 61 प्रतिशत वोट मिले, जबकि उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी ब्रायन मुंडुबिले को करीब 38 प्रतिशत वोट हासिल हुए। 60 प्रतिशत से अधिक वोट हासिल कर दर्ज की जीत हिचिलेमा की जीत के साथ उन्हें जाम्बिया में अगले पांच साल का दूसरा कार्यकाल मिल गया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उन्हें करीब 29 लाख से अधिक वोट मिले। इस स्पष्ट बहुमत के कारण चुनाव में दूसरे दौर की जरूरत नहीं पड़ी। विपक्ष ने उठाए चुनाव प्रक्रिया पर सवाल चुनाव के दौरान कुछ मतदान केंद्रों पर हिंसा, चुनाव अधिकारियों पर हमले और मतपत्रों की चोरी की घटनाओं के कारण मतदान प्रक्रिया प्रभावित हुई थी। विपक्षी उम्मीदवार ब्रायन मुंडुबिले ने चुनाव परिणामों को लेकर सवाल उठाते हुए कानूनी विकल्प तलाशने के संकेत दिए हैं। हालांकि, हिचिलेमा की जीत को निर्वाचन आयोग ने आधिकारिक रूप से घोषित कर दिया है। यूरोपीय संघ के पर्यवेक्षकों ने चुनाव को बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण बताया, लेकिन चुनावी माहौल और राजनीतिक समानता को लेकर कुछ चिंताएं भी दर्ज की गईं। अर्थव्यवस्था और तांबा उत्पादन पर रहेगा फोकस दूसरे कार्यकाल में हिचिलेमा के सामने महंगाई, बिजली संकट, रोजगार और जीवन-यापन की बढ़ती लागत जैसी चुनौतियां रहेंगी। उनकी सरकार ने पहले कार्यकाल में कर्ज पुनर्गठन और आर्थिक स्थिरता पर जोर दिया था। अब सरकार का लक्ष्य अर्थव्यवस्था को तेज गति देना और जाम्बिया के तांबा उत्पादन को बढ़ाना है। हिचिलेमा ने जीत के बाद अपने संबोधन में कहा कि नई सरकार आर्थिक विकास को तेज करने और देश के लोगों के लिए अधिक अवसर पैदा करने पर काम करेगी। उन्होंने सभी नागरिकों को साथ लेकर आगे बढ़ने का संदेश दिया।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देश में वस्तु एवं सेवा कर (GST) संग्रह में जुलाई 2026 के दौरान मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। जुलाई में सकल GST संग्रह 15.4% बढ़कर ₹2,11,205 करोड़ हो गया, जबकि पिछले साल जुलाई में यह करीब ₹1.83 लाख करोड़ था। यह वित्त वर्ष 2026-27 में दूसरी बार है जब मासिक GST संग्रह ₹2 लाख करोड़ के पार गया है। घरेलू लेनदेन और आयात से बढ़ा संग्रह जुलाई में घरेलू लेनदेन से प्राप्त सकल GST राजस्व करीब 10.1% बढ़कर ₹1.45 लाख करोड़ पहुंच गया। वहीं आयात से मिलने वाले GST राजस्व में करीब 29% की तेज वृद्धि दर्ज की गई। इससे कुल GST संग्रह को मजबूती मिली। आंकड़ों में घरेलू आर्थिक गतिविधियों के साथ-साथ आयात से जुड़े कर संग्रह में भी मजबूती दिखाई दे रही है। 14 महीने के उच्च स्तर पर पहुंचा GST संग्रह जुलाई का कुल सकल GST संग्रह 14 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गया है। वित्त वर्ष 2026-27 में अप्रैल के बाद यह दूसरी बार है जब मासिक GST संग्रह ₹2 लाख करोड़ के स्तर को पार कर गया है। इससे सरकार के राजस्व संग्रह को मजबूती मिली है और कर अनुपालन में सुधार के संकेत भी मिले हैं। अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत GST संग्रह में लगातार दोहरे अंकों की वृद्धि को आर्थिक गतिविधियों के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। घरेलू कारोबार में बढ़ोतरी और आयात से मिलने वाले राजस्व में तेजी ने जुलाई के आंकड़ों को मजबूत बनाया है। सरकार के लिए बढ़ता GST संग्रह सार्वजनिक खर्च और विकास योजनाओं के लिए राजस्व आधार को मजबूत करने में मदद कर सकता है। हालांकि, GST संग्रह अकेले अर्थव्यवस्था की पूरी तस्वीर नहीं बताता और इसके साथ अन्य आर्थिक संकेतकों को भी देखना जरूरी है।
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच हुआ व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता (Comprehensive Economic and Trade Agreement - CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इस समझौते के लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार को नई गति मिलने की उम्मीद है। एक ओर भारत में कई ब्रिटिश उत्पाद पहले की तुलना में कम कीमत पर उपलब्ध होंगे, वहीं दूसरी ओर भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन के बाजार में बिना सीमा शुल्क (Zero Duty) के प्रवेश का लाभ मिलेगा। भारतीय ग्राहकों को किन चीजों में मिलेगी राहत? नए व्यापार समझौते के तहत ब्रिटेन से आयात होने वाले कई लोकप्रिय उत्पादों पर आयात शुल्क में कमी आएगी। इसका सीधा असर इन वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: स्कॉच व्हिस्की जिन चॉकलेट बिस्किट कॉस्मेटिक और ब्यूटी प्रोडक्ट्स कुछ प्रीमियम फूड और लाइफस्टाइल उत्पाद हालांकि कीमतों में वास्तविक कमी इस बात पर भी निर्भर करेगी कि आयातक और कंपनियां शुल्क में मिली राहत का कितना लाभ ग्राहकों तक पहुंचाती हैं। भारतीय निर्यातकों के लिए खुलेंगे नए अवसर इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारतीय उद्योगों और निर्यातकों को मिलने की संभावना है। अब कई भारतीय उत्पादों को ब्रिटेन में बिना किसी आयात शुल्क के भेजा जा सकेगा, जिससे उनकी प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। इन क्षेत्रों को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है: वस्त्र एवं रेडीमेड गारमेंट्स हस्तशिल्प कालीन चमड़ा और फुटवियर रत्न एवं आभूषण इंजीनियरिंग उत्पाद कृषि एवं खाद्य प्रसंस्कृत उत्पाद विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारतीय निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। व्यापार और निवेश को मिलेगा नया प्रोत्साहन भारत और ब्रिटेन के बीच यह समझौता केवल वस्तुओं के व्यापार तक सीमित नहीं है। इससे निवेश, सप्लाई चेन, विनिर्माण और विभिन्न उद्योगों के बीच सहयोग को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह समझौता भारतीय कंपनियों को वैश्विक बाजार में अपनी पहुंच बढ़ाने में मदद करेगा और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देगा। उपभोक्ताओं और उद्योगों पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों के अनुसार, ब्रिटिश उत्पादों की कीमतों में धीरे-धीरे कमी देखने को मिल सकती है, जबकि भारतीय निर्यातकों को बड़े बाजार तक आसान पहुंच मिलेगी। इससे घरेलू उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आने की संभावना है। इसके अलावा, निर्यात बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल, एमएसएमई और कृषि आधारित उद्योगों को भी लाभ मिल सकता है। भारत-यूके व्यापार संबंधों में नया अध्याय करीब एक वर्ष पहले हस्ताक्षरित भारत-यूके व्यापक आर्थिक एवं व्यापार समझौता अब औपचारिक रूप से लागू हो रहा है। इसे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में यह समझौता भारतीय निर्यात, विदेशी निवेश और आर्थिक विकास को नई गति देने में अहम भूमिका निभा सकता है।
सोने को लेकर सोशल मीडिया और कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। दावा किया जा रहा था कि सरकार मंदिरों में रखे गए सोने को मोनेटाइज करने की योजना बना रही है और इसके बदले गोल्ड बॉन्ड जारी किए जाएंगे। लेकिन Ministry of Finance ने इन खबरों को पूरी तरह फर्जी और भ्रामक बताया है। क्या था दावा? कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया कि सरकार मंदिर ट्रस्टों और धार्मिक संस्थानों के पास जमा सोने को “Strategic Gold Reserve” घोषित कर सकती है। साथ ही यह भी दावा किया गया कि मंदिरों के सोने के बदले गोल्ड बॉन्ड जारी करने की तैयारी हो चुकी है। इन खबरों के वायरल होने के बाद लोगों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। वित्त मंत्रालय ने क्या कहा? वित्त मंत्रालय ने साफ शब्दों में कहा है कि मंदिरों या धार्मिक संस्थानों के सोने के लिए किसी तरह की नई गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम लाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। मंत्रालय के अनुसार: मंदिरों के सोने को लेकर फैलाई जा रही खबरें निराधार हैं सरकार ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया है मंदिरों के स्तंभों, दरवाजों या ढांचों पर चढ़े सोने को स्ट्रैटजिक रिजर्व घोषित करने की बातें भी झूठी हैं सरकार ने लोगों से अपील की है कि वे केवल आधिकारिक प्रेस रिलीज और सरकारी प्लेटफॉर्म्स पर जारी जानकारी पर ही भरोसा करें। भारत में कितना सोना मौजूद है? एक अनुमान के अनुसार भारतीय घरों और मंदिरों में करीब 50,000 टन सोना मौजूद है, जिसकी कुल कीमत लगभग 10,000 अरब डॉलर आंकी जाती है। भारत दुनिया में चीन के बाद सोने का दूसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता माना जाता है। पीएम मोदी की अपील क्यों चर्चा में आई? हाल ही में Narendra Modi ने ईरान युद्ध और वैश्विक आर्थिक दबावों के बीच देशवासियों से: पेट्रोल-डीजल की खपत कम करने खाने के तेल का सीमित उपयोग करने एक साल तक सोना खरीदने से बचने विदेश यात्राएं कम करने की अपील की थी। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और चालू खाते के घाटे पर दबाव कम किया जा सकेगा। सोने के आयात में लगातार बढ़ोतरी भारत हर साल बड़ी मात्रा में सोना आयात करता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक: पिछले साल भारत ने करीब 72 अरब डॉलर का सोना आयात किया सोने का आयात सालाना आधार पर करीब 24% बढ़ा सरकार ने हाल ही में सोने और चांदी पर आयात शुल्क 6% से बढ़ाकर 15% कर दिया है विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते सोना आयात से विदेशी मुद्रा भंडार और रुपये पर दबाव बढ़ता है। अफवाहों से सावधान रहने की अपील सरकार ने कहा है कि किसी भी नई स्कीम या फैसले की जानकारी हमेशा आधिकारिक माध्यमों से दी जाती है। इसलिए सोशल मीडिया पर वायरल अपुष्ट खबरों से बचने की जरूरत है।
ICICI बैंक के CEO संदीप बख्शी ने कहा है कि भारत इस समय एक “गोल्डीलॉक्स मोमेंट” में है—यानी ऐसा दौर जहां आर्थिक विकास, स्थिरता और वैश्विक भरोसा संतुलित रूप से एक साथ नजर आ रहे हैं। उन्होंने यह बात IIM जम्मू के 9वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कही। क्या है ‘गोल्डीलॉक्स मोमेंट’? ऐसा आर्थिक माहौल जो न ज्यादा गर्म (ओवरहीटेड) हो और न ठंडा (सुस्त) संतुलित ग्रोथ, नियंत्रित महंगाई और स्थिर अर्थव्यवस्था निवेश और विकास के लिए आदर्श स्थिति डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर बना गेमचेंजर बख्शी ने भारत के डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना की, जिसमें शामिल हैं: आधार (Aadhaar) UPI (Unified Payments Interface) इनके जरिए वित्तीय समावेशन बढ़ा कार्यकुशलता में सुधार हुआ इनोवेशन को बढ़ावा मिला IIM जम्मू में 520 छात्रों को डिग्री दीक्षांत समारोह में कुल 520 छात्रों को डिग्रियां दी गईं: MBA: 289 छात्र MBA (Healthcare): 77 Executive MBA: 31 IPM: 123 यह संस्थान और छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। युवाओं के लिए संदेश संदीप बख्शी ने कहा: भारत में अवसरों की कमी नहीं है लेकिन सफलता के लिए जरूरी है: दृढ़ता (Resilience) अनुकूलनशीलता (Adaptability) सही नजरिया (Right Mindset) AI और इंडस्ट्री पर जोर IIM जम्मू के चेयरमैन मिलिंद पी. कांबले ने कहा: भारत सिर्फ बड़ी अर्थव्यवस्था नहीं बनना चाहता बल्कि मजबूत उद्योग AI साक्षरता शिक्षा और राष्ट्रीय जरूरतों के बीच तालमेल पर भी फोकस कर रहा है
वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच भारतीय रुपया ऐतिहासिक दबाव में है। डॉलर के मुकाबले 95 के स्तर को छूने के बाद बाजार में अस्थिरता बढ़ी है। ऐसे में देश के सबसे बड़े बैंक State Bank of India (SBI) ने एक अहम रिपोर्ट जारी कर Reserve Bank of India (RBI) को तुरंत हस्तक्षेप करने की सलाह दी है। रिपोर्ट का स्पष्ट संदेश है-अब इंतजार नहीं, एक्शन का समय है। क्यों दबाव में है रुपया? रुपये की कमजोरी के पीछे कई वैश्विक और घरेलू कारण हैं: मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव कच्चे तेल की कीमतों में उछाल विदेशी निवेशकों की निकासी (FPI outflow) डॉलर की वैश्विक मजबूती वित्त वर्ष 2025-26 में रुपया करीब 9.8% तक गिर चुका है-जो पिछले 14 सालों में सबसे बड़ी गिरावटों में से एक है। SBI ने RBI को सुझाए ये 5 बड़े कदम 1. फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल भारत के पास 700 अरब डॉलर से अधिक का विदेशी मुद्रा भंडार है। SBI का मानना है कि Reserve Bank of India को बाजार में डॉलर बेचकर सीधे हस्तक्षेप करना चाहिए, ताकि रुपये की गिरावट पर ब्रेक लगे। 2. तेल कंपनियों के लिए ‘स्पेशल डॉलर विंडो’ तेल कंपनियां रोजाना भारी मात्रा में डॉलर खरीदती हैं। रोज 250–300 मिलियन डॉलर की मांग इससे बाजार पर दबाव बढ़ता है SBI का सुझाव है कि इनके लिए अलग विंडो बनाई जाए, जिससे खुले बाजार पर दबाव कम हो। 3. सट्टेबाजों पर सख्ती रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत फॉरेक्स रिजर्व का उपयोग कर सट्टेबाजों को “सख्त संदेश” देना जरूरी है। RBI के हस्तक्षेप से अनावश्यक गिरावट रोकी जा सकती है बाजार में भरोसा लौटेगा 4. 100 मिलियन डॉलर लिमिट पर पुनर्विचार RBI ने बैंकों के लिए नेट ओपन पोजीशन (NOP) की सीमा 100 मिलियन डॉलर तय की है। SBI का तर्क: यह नियम पूरे बैंक पर लागू करने के बजाय केवल ट्रेडिंग गतिविधियों पर लागू हो वरना विदेशी निवेशकों के एग्जिट में दिक्कतें आ सकती हैं 5. ऑफशोर मार्केट पर नजर विदेशी बाजारों में रुपये पर दबाव और ज्यादा दिख रहा है। प्रीमियम 3.43% से बढ़कर 4.19% लिक्विडिटी संकट का खतरा SBI ने चेतावनी दी है कि समय रहते कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और बिगड़ सकती है। क्या सिर्फ भारत ही संकट में है? नहीं। एशिया की कई करेंसी दबाव में हैं: जापानी येन: ~6% गिरावट फिलिपीन पीसो: ~5.7% गिरावट दक्षिण कोरियाई वॉन: ~2.8% गिरावट यह दिखाता है कि समस्या वैश्विक है, लेकिन समाधान के लिए घरेलू नीति अहम होगी। निष्कर्ष रुपये की मौजूदा स्थिति सिर्फ एक आर्थिक संकेत नहीं, बल्कि व्यापक वैश्विक अस्थिरता का असर है। SBI की रिपोर्ट साफ तौर पर RBI से आक्रामक नीति अपनाने की मांग करती है। अब नजर इस बात पर होगी कि Reserve Bank of India इन सुझावों पर कितना और कितनी तेजी से कार्रवाई करता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।