झारखंड पुलिस

रांची के हिंदपीढ़ी क्षेत्र में कारों के शीशे तोड़े गए
रांची में आधी रात को बदमाशों का उत्पात, 6 से अधिक कारों के शीशे तोड़े

रांची। राजधानी रांची के हिंदपीढ़ी थाना क्षेत्र में सोमवार देर रात असामाजिक तत्वों ने जमकर उत्पात मचाया। बदमाशों ने निजाम नगर स्थित मोती मस्जिद रोड और मक्का मस्जिद रोड पर सड़क किनारे खड़ी आधा दर्जन से अधिक कारों के शीशे तोड़ दिए। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है, जबकि पुलिस आरोपियों की तलाश में जुट गई है।   सड़क किनारे खड़ी गाड़ियों को बनाया निशाना     जानकारी के अनुसार, देर रात अज्ञात बदमाशों ने एक-एक कर कई पार्क की गई कारों को निशाना बनाया। क्षतिग्रस्त वाहनों में विभिन्न कंपनियों की कारें शामिल हैं। स्थानीय निवासी इमरान की कार के शीशे भी तोड़ दिए गए। वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए।     सुबह सामने आई घटना     घटना की जानकारी मंगलवार सुबह तब हुई, जब वाहन मालिक घरों से बाहर निकले। अपनी गाड़ियों के टूटे शीशे देखकर लोगों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जुट गए और पुलिस को घटना की जानकारी दी।     डीएसपी का वाहन भी क्षतिग्रस्त     तोड़फोड़ की इस घटना में एक डीएसपी स्तर के अधिकारी की कार भी क्षतिग्रस्त हुई है। लगातार कई वाहनों को निशाना बनाए जाने से स्थानीय लोगों में नाराजगी और सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।     CCTV फुटेज के आधार पर जांच     सूचना मिलने के बाद हिंदपीढ़ी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू कर दी। आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि वारदात किसी एक व्यक्ति ने की या इसके पीछे किसी संगठित गिरोह का हाथ है।     पुलिस ने जल्द कार्रवाई का दिया भरोसा     हिंदपीढ़ी थाना प्रभारी अरुण महथा ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी की कोशिश की जा रही है। पुलिस ने लोगों से भी घटना से जुड़ी किसी भी जानकारी को साझा करने की अपील की है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
गिरिडीह में दुष्कर्म के आरोप में पंचायत सचिव गिरफ्तार
गिरिडीह में 7 साल की मासूम से दुष्कर्म का आरोप, पंचायत सचिव गिरफ्तार

गिरिडीह। झारखंड के गिरिडीह जिले के बगोदर प्रखंड में सात वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म का मामला सामने आया है। मामले में बच्ची के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी पंचायत सचिव को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है और मामले की जांच जारी है।   परिजनों की शिकायत पर त्वरित कार्रवाई     पुलिस के अनुसार, घटना की जानकारी मिलते ही बगोदर ब्लॉक परिसर से आरोपी पंचायत सचिव को हिरासत में लेकर गिरफ्तार किया गया। मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तत्काल एफआईआर दर्ज कर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी।     मेडिकल जांच और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया     बगोदर के एसडीपीओ धनंजय कुमार राम ने बताया कि बच्ची का मेडिकल परीक्षण कराया जा रहा है। पुलिस घटना से जुड़े सभी साक्ष्य एकत्र कर रही है और मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है।     पहले भी अश्लील हरकत के आरोप     प्रारंभिक पूछताछ में पुलिस को जानकारी मिली है कि आरोपी पर पहले भी नाबालिग बच्चियों के साथ अश्लील हरकत करने के आरोप लग चुके हैं। पुलिस अब उसके आपराधिक इतिहास की भी जांच कर रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि उसके खिलाफ पहले कोई मामला दर्ज हुआ था या नहीं।     पीड़िता की मां के विरोध के बाद खुला मामला     पुलिस के मुताबिक, घटना के दौरान बच्ची की मां मौके पर पहुंच गई और शोर मचाया, जिसके बाद मामला सामने आया। पीड़ित बच्ची के बयान और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया।     जांच जारी     पुलिस का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट और अन्य जांच रिपोर्ट मिलने के बाद मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने कहा कि यदि जांच में आरोपों की पुष्टि होती है तो आरोपी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
जामताड़ा में गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पोस्टमार्टम के दौरान दो गोलियां बरामद
गैंगस्टर सुजीत सिन्हा एनकाउंटर: पोस्टमार्टम में शरीर से निकलीं दो गोलियां, परिजनों ने उठाए सवाल

जामताड़ा। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के शव का सोमवार को जामताड़ा में पोस्टमार्टम किया गया। करीब डेढ़ घंटे तक चली जांच के बाद तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी की। डॉक्टरों की टीम ने शव से दो गोलियां बरामद कीं, जबकि शरीर पर कई गोली लगने के निशान पाए गए हैं। पूरी प्रक्रिया मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में हुई और इसका वीडियो रिकॉर्डिंग भी कराया गया।   पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए कई तथ्य     पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों के अनुसार, शव से दो गोलियां निकाली गई हैं। इसके अलावा शरीर पर कई गोली के घाव मिले हैं। हालांकि डॉक्टरों ने यह जानकारी साझा नहीं की कि कितनी गोलियां लगी थीं और फायरिंग कितनी दूरी से की गई थी। उन्होंने कहा कि विस्तृत जानकारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में दी जाएगी।     परिजनों ने एनकाउंटर को बताया फर्जी     सुजीत सिन्हा के परिजन पोस्टमार्टम के बाद जामताड़ा थाना पहुंचे। उसकी सास उषा देवी और साला भी वहां पहुंचे। परिजनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए एनकाउंटर को फर्जी बताया और हत्या का आरोप लगाया।   सुजीत सिन्हा की सास उषा देवी ने कहा कि सुजीत जेल से बाहर आने से डरता था। उनका दावा है कि वह कहता था कि जेल से निकलने पर उसे मार दिया जाएगा। परिजनों ने सवाल उठाया कि जो व्यक्ति जेल से बाहर नहीं आना चाहता था, वह पुलिस की राइफल छीनकर भागने की कोशिश क्यों करेगा। परिजनों ने सुजीत की पत्नी रिया सिंह की जेल शिफ्टिंग को लेकर भी आरोप लगाए हैं।   पुलिस ने बताई थी ये कहानी     पुलिस के अनुसार, सुजीत सिन्हा को साहिबगंज जेल से धनबाद जेल ले जाया जा रहा था। जेल शिफ्टिंग के दौरान जामताड़ा के रास्ते में पुलिस वाहन का टायर पंचर हो गया था। इसके बाद जब उसे दूसरी गाड़ी में बैठाने की तैयारी की जा रही थी, तभी उसने कथित तौर पर एक जवान की सर्विस राइफल छीन ली और पुलिस पर गोली चलाने की कोशिश की।   पुलिस का कहना है कि जवाबी कार्रवाई में सुजीत सिन्हा मारा गया।   जांच रिपोर्ट का इंतजार     फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। पुलिस और प्रशासन की ओर से घटना की जांच जारी है, जबकि परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 3, 2026 0
पलामू के गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का पुलिस एनकाउंटर
झारखंड का कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा एनकाउंटर में ढेर, जानें उसका आपराधिक इतिहास

पलामू। झारखंड पुलिस ने कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा को जेल शिफ्टिंग के दौरान हुई पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया। पलामू के हुसैनाबाद का रहने वाला सुजीत सिन्हा लंबे समय से हत्या, रंगदारी और संगठित अपराध के मामलों में पुलिस के रडार पर था.   2007 के दोहरे हत्याकांड से चर्चा में आया     सुजीत सिन्हा पहली बार 2007 में पलामू के दो भाइयों अनिल सिंह और भूषण सिंह की हत्या के मामले में सुर्खियों में आया था। इस दोहरे हत्याकांड का मास्टरमाइंड माने जाने पर 2019 में उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। इसके बाद वह पलामू और आसपास के इलाकों में रंगदारी और संगठित अपराध का बड़ा नाम बन गया.     20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज     पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, अलग-अलग समय में उसके खिलाफ 20 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज रहे। वर्ष 2024 में वह कई मामलों में बरी भी हुआ था। जांच एजेंसियों ने उसके संबंध कोयलांचल के कुख्यात अपराधी प्रिंस खान से जुड़े नेटवर्क से भी जोड़ा था.     पत्नी भी जेल में बंद     सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा भी संगठित अपराध से जुड़े मामलों में जेल में बंद है। हाल के वर्षों में रंगदारी और आपराधिक नेटवर्क से जुड़े मामलों में उसका नाम लगातार सामने आता रहा.     नेटवर्क की जांच जारी     पुलिस के अनुसार, एनकाउंटर के बाद उसके आपराधिक नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच जारी है.  

ranjan kumar tiwari अगस्त 3, 2026 0
गैंगस्टर सुजीत सिन्हा पुलिस मुठभेड़
जेल शिफ्टिंग के दौरान जामताड़ा में पुलिस मुठभेड़ में ढेर हुआ गैंगस्टर सुजीत सिन्हा

रांची। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की रविवार देर रात जामताड़ा जिले में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल शिफ्टिंग के दौरान उसने एक जवान का हथियार छीनकर पुलिस पर फायरिंग करने की कोशिश की, जिसके बाद आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। इस घटना की पुष्टि साहिबगंज के एसपी अमित सिंह और जामताड़ा के एसपी शंभु सिंह ने की है।   जेल शिफ्टिंग के दौरान हुआ एनकाउंटर   जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से सुजीत सिन्हा को साहिबगंज जेल से धनबाद जेल स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। कड़ी सुरक्षा के बीच उसे पुलिस वाहन से ले जाया जा रहा था। जामताड़ा के पास रास्ते में पुलिस वाहन का टायर पंचर हो गया। इसके बाद जब सुरक्षा कर्मी उसे दूसरी गाड़ी में बैठाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उसने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी की सर्विस राइफल छीन ली और पुलिस पर गोली चलाने का प्रयास किया।   पुलिस का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और आत्मरक्षा के लिए जवानों ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें सुजीत सिन्हा गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई।   झारखंड का कुख्यात अपराधी था सुजीत सिन्हा   सुजीत सिन्हा झारखंड के सबसे कुख्यात अपराधियों में शामिल था। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध से जुड़े कई गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस के मुताबिक, जेल में बंद रहने के बावजूद वह अपने गैंग का संचालन करता था और रंगदारी सहित कई आपराधिक गतिविधियों के निर्देश जेल के भीतर से ही देता था।   कई जिलों में फैला था नेटवर्क   पुलिस के अनुसार, सुजीत सिन्हा का नेटवर्क धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची समेत आसपास के कई जिलों तक फैला हुआ था। लंबे समय से उसके जेल से मोबाइल फोन और अपने गुर्गों के जरिए आपराधिक गतिविधियों का संचालन करने की सूचनाएं मिल रही थीं। इसी वजह से प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के मद्देनज़र उसे साहिबगंज जेल से धनबाद जेल स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था।   फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और मुठभेड़ से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।   जेल शिफ्टिंग के दौरान एनकाउंटर में ढेर हुआ सुजीत सिन्हा   रांची। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की रविवार देर रात जामताड़ा जिले में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल शिफ्टिंग के दौरान उसने एक जवान का हथियार छीनकर पुलिस पर फायरिंग करने की कोशिश की, जिसके बाद आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई में वह मारा गया। इस घटना की पुष्टि साहिबगंज के एसपी अमित सिंह और जामताड़ा के एसपी शंभु सिंह ने की है।   जेल शिफ्टिंग के दौरान हुआ एनकाउंटर   जानकारी के अनुसार, प्रशासन ने सुरक्षा कारणों से सुजीत सिन्हा को साहिबगंज जेल से धनबाद जेल स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। कड़ी सुरक्षा के बीच उसे पुलिस वाहन से ले जाया जा रहा था। जामताड़ा के पास रास्ते में पुलिस वाहन का टायर पंचर हो गया। इसके बाद जब सुरक्षा कर्मी उसे दूसरी गाड़ी में बैठाने की तैयारी कर रहे थे, तभी उसने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी की सर्विस राइफल छीन ली और पुलिस पर गोली चलाने का प्रयास किया।   पुलिस का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित करने और आत्मरक्षा के लिए जवानों ने जवाबी फायरिंग की, जिसमें सुजीत सिन्हा गंभीर रूप से घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई।   झारखंड का कुख्यात अपराधी था सुजीत सिन्हा   सुजीत सिन्हा झारखंड के सबसे कुख्यात अपराधियों में शामिल था। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध से जुड़े कई गंभीर मामले दर्ज थे। पुलिस के मुताबिक, जेल में बंद रहने के बावजूद वह अपने गैंग का संचालन करता था और रंगदारी सहित कई आपराधिक गतिविधियों के निर्देश जेल के भीतर से ही देता था।   कई जिलों में फैला था नेटवर्क   पुलिस के अनुसार, सुजीत सिन्हा का नेटवर्क धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची समेत आसपास के कई जिलों तक फैला हुआ था। लंबे समय से उसके जेल से मोबाइल फोन और अपने गुर्गों के जरिए आपराधिक गतिविधियों का संचालन करने की सूचनाएं मिल रही थीं। इसी वजह से प्रशासन ने सुरक्षा और निगरानी के मद्देनज़र उसे साहिबगंज जेल से धनबाद जेल स्थानांतरित करने का निर्णय लिया था।   फिलहाल पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है और मुठभेड़ से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 3, 2026 0
रामगढ़ के चुट्टूपालू घाटी में ब्रेक फेल ट्रेलर की कार से टक्कर और रेस्क्यू ऑपरेशन
चुट्टूपालू घाटी में ब्रेक फेल ट्रेलर ने कार को मारी टक्कर, दो घंटे तक चला राहत अभियान

महिला चिकित्सक और चालक वाहन में फंसे रहे, क्रेन और हाइड्रा की मदद से सुरक्षित निकाला गया   रामगढ़। झारखंड के रामगढ़ जिले स्थित चुट्टूपालू घाटी में गुरुवार सुबह एक भीषण सड़क हादसा हुआ। ब्रेक फेल होने के बाद एक ट्रेलर ने पीछे से एक ट्रक और कार को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद ट्रेलर पलट गया और कार दो भारी वाहनों के बीच बुरी तरह दब गई। हादसे में कार सवार महिला चिकित्सक डॉ. अनिता कुमारी और चालक निशांत करमाली वाहन के अंदर फंस गए।   दो घंटे से अधिक चला रेस्क्यू ऑपरेशन   घटना की सूचना मिलते ही रामगढ़ पुलिस, प्रशासन और स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे। ट्रेलर में भारी सामान लदा होने के कारण राहत कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। पहले ट्रेलर से सामान हटाया गया, फिर क्रेन, हाइड्रा और अन्य भारी मशीनों की मदद से वाहन को हटाकर कार तक पहुंचा गया। करीब दो घंटे से अधिक चले रेस्क्यू अभियान के बाद दोनों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल भेजा गया।   ट्रेलर चालक के खिलाफ मामला दर्ज   कार चालक निशांत करमाली की शिकायत पर ट्रेलर चालक के खिलाफ रामगढ़ थाने में मामला दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि ट्रेलर तेज गति और लापरवाही से चलाया जा रहा था, जिसके कारण यह हादसा हुआ। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।   घाटी में सड़क सुरक्षा पर फिर उठे सवाल   स्थानीय लोगों का कहना है कि चुट्टूपालू घाटी में भारी वाहनों के हादसे लगातार सामने आ रहे हैं। इस घटना के बाद एक बार फिर घाटी में भारी वाहनों की तकनीकी जांच, ब्रेक सिस्टम की नियमित जांच और गति नियंत्रण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रशासन ने भी सड़क सुरक्षा उपायों को और प्रभावी बनाने की बात कही है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
ऑपरेशन नवजीवन-II के तहत झारखंड पुलिस के सामने 15 लाख के इनामी समेत 16 नक्सलियों का आत्मसमर्पण
ऑपरेशन 'नवजीवन-II' में झारखंड पुलिस को बड़ी सफलता, 15 लाख के इनामी समेत 16 नक्सलियों ने किया सरेंडर

रांची। झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान को बड़ी सफलता मिली है। ऑपरेशन 'नवजीवन-II' के तहत प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के 16 सक्रिय नक्सलियों ने मंगलवार को झारखंड पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। आत्मसमर्पण करने वालों में 15 लाख रुपये का इनामी नक्सली समेत संगठन के कई कमांडर और सदस्य शामिल हैं। नक्सलियों ने पुलिस को 11 हथियार और 1,562 जिंदा कारतूस भी सौंपे हैं।   15 लाख के इनामी नक्सली ने छोड़ा हिंसा का रास्ता   आत्मसमर्पण करने वालों में रीजनल कमेटी सदस्य (RCM) संतोष उर्फ बासुदेव दा शामिल है, जिस पर 15 लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके अलावा तीन जोनल कमेटी सदस्य (ZCM), तीन सब-जोनल कमेटी सदस्य (SZCM), छह एरिया कमेटी सदस्य (ACM) और तीन दस्ता सदस्य भी शामिल हैं।   पांच महिला नक्सली भी शामिल   पुलिस के अनुसार, सरेंडर करने वाले 16 नक्सलियों में 11 पुरुष और 5 महिलाएं हैं। ये सभी कोल्हान और सारंडा के दुर्गम जंगल-पहाड़ी क्षेत्रों में सक्रिय थे और माओवादी संगठन के शीर्ष नेताओं की टीम से जुड़े बताए जा रहे हैं।   नक्सलियों ने जमा किए आधुनिक हथियार   आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों ने पुलिस के सामने बड़ी संख्या में हथियार और गोला-बारूद जमा किए। इनमें—   6 इंसास राइफल 2 AK-47 राइफल 1 HK-33 राइफल 1 यूएस कार्बाइन 1 M-16 राइफल   शामिल हैं। इसके अलावा 38 मैगजीन और 1,562 जिंदा कारतूस भी पुलिस को सौंपे गए।   पुलिस, CRPF और सुरक्षा बलों के संयुक्त अभियान का असर   झारखंड पुलिस के अनुसार, पुलिस, सीआरपीएफ, कोबरा बटालियन और झारखंड जगुआर के संयुक्त अभियानों के कारण माओवादी संगठन पर लगातार दबाव बढ़ रहा है। वहीं, राज्य सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर कई नक्सली हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौट रहे हैं।   2026 में 93 नक्सली गिरफ्तार, 45 ने किया सरेंडर   पुलिस आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक नक्सल विरोधी अभियानों में 93 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं, 45 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है और 22 नक्सली मुठभेड़ में मारे गए हैं।   शेष नक्सलियों से सरेंडर की अपील   डीजीपी ने कहा कि लगातार कार्रवाई, संगठन के अंदर बढ़ते असंतोष और पुनर्वास नीति के कारण माओवादी संगठन कमजोर हो रहा है। पुलिस ने बाकी सक्रिय नक्सलियों से भी हिंसा का रास्ता छोड़कर आत्मसमर्पण करने और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की अपील की है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 28, 2026 0
DGP Tadasha Mishra
झारखंड पुलिस के 153 आश्रितों को मिलेगी अनुकंपा पर नौकरी, समिति ने दी मंजूरी

रांची। झारखंड पुलिस सेवा के दौरान जान गंवाने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मियों के परिवारों को बड़ी राहत देते हुए पुलिस मुख्यालय ने 153 आश्रितों को अनुकंपा के आधार पर नियुक्ति देने का फैसला किया है। डीजीपी तदाशा मिश्रा के निर्देश पर गठित अनुकंपा समिति की बैठक में यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य दिवंगत पुलिसकर्मियों के आश्रितों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना और उनके परिवारों को सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराना है।   163 मामलों की समीक्षा, 153 को मिली स्वीकृति पुलिस मुख्यालय में आयोजित अनुकंपा समिति की बैठक में कुल 163 मामलों पर विचार किया गया। समीक्षा के बाद 153 मामलों को मंजूरी दी गई, जबकि चार मामलों को विभिन्न कारणों से फिलहाल लंबित रखा गया। वहीं, तीन आवेदन नियमों के अनुरूप नहीं पाए जाने पर अस्वीकार कर दिए गए। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि सभी मामलों की जांच निर्धारित नियमों के तहत की गई।   योग्यता के अनुसार विभिन्न पदों पर होगी नियुक्ति समिति की अनुशंसा के आधार पर चयनित आश्रितों को उनकी शैक्षणिक योग्यता और पात्रता के अनुसार विभिन्न पदों पर नियुक्त किया जाएगा। इनमें 66 कॉन्स्टेबल, 62 बाल आरक्षी, 24 महिला आरक्षी और एक फायरमैन ड्राइवर का पद शामिल है। विभाग का कहना है कि नियुक्ति प्रक्रिया जल्द पूरी कर चयनित अभ्यर्थियों को पदस्थापित किया जाएगा।   एडीजी मुख्यालय की अध्यक्षता में हुई बैठक अनुकंपा समिति की बैठक एडीजी (मुख्यालय) मनोज कौशिक की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में जैप डीआईजी कार्तिक एस, स्पेशल ब्रांच डीआईजी अनुरंजन किस्पोट्टा, सीआईडी डीआईजी चंदन कुमार झा तथा एसपी (गृह रक्षा वाहिनी एवं अग्निशमन सेवा) सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी सदस्य के रूप में शामिल हुए। पुलिस मुख्यालय का मानना है कि यह निर्णय न केवल दिवंगत पुलिसकर्मियों के परिवारों को आर्थिक संबल देगा, बल्कि पुलिस बल के जवानों और उनके परिजनों में भरोसा भी मजबूत करेगा कि सेवा के दौरान किसी अप्रिय घटना की स्थिति में उनके परिवार को विभाग का सहयोग और सुरक्षा मिलेगी।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
Dhanbad Police Bulldozer Action
धनबाद के वासेपुर में गैंगस्टर प्रिंस खान के ठिकाने पर बुलडोजर, पुलिस ने अवैध निर्माण किया ध्वस्त

धनबाद। झारखंड पुलिस ने संगठित अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए धनबाद के वासेपुर में फरार गैंगस्टर हैदर अली उर्फ प्रिंस खान के ठिकाने पर बुलडोजर चलाया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में प्रशासन ने उसके कथित अवैध निर्माण को ध्वस्त कर दिया। पुलिस के अनुसार, यह कार्रवाई न्यायालय के आदेश और पहले से चल रही कानूनी प्रक्रिया के तहत की गई।   संगठित अपराध पर शिकंजा कसने की मुहिम   धनबाद पुलिस का कहना है कि प्रिंस खान लंबे समय से फरार है और उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग और आपराधिक धमकी सहित कई गंभीर मामले दर्ज हैं। हाल के दिनों में कथित रंगदारी और धमकी के मामलों के बाद उसके नेटवर्क पर कार्रवाई और तेज कर दी गई है। पुलिस ने स्पष्ट किया कि गैंग के अन्य सदस्यों और सहयोगियों के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।   सुरक्षा के बीच चला अभियान   बुलडोजर कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में भारी पुलिस बल तैनात रहा ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो। प्रशासन ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए अभियान सफलतापूर्वक पूरा किया गया और भविष्य में भी संगठित अपराध के खिलाफ ऐसी कार्रवाई जारी रहेगी।

abhishek singh जुलाई 5, 2026 0
Jharkhand ATS
झारखंड की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ा फेरबदल: अब सीआईडी की निगरानी में काम करेगा एटीएस

आतंकवाद और संगठित अपराधों पर लगाम लगाने के लिए पुलिस प्रशासन ने बदली रणनीति, एटीएस की कार्यप्रणाली में होगा बदलाव। रांची। झारखंड पुलिस की आंतरिक सुरक्षा रणनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिला है। राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) तदाशा मिश्रा ने एक औपचारिक आदेश जारी कर राज्य के आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) की कार्यप्रणाली को पूरी तरह से अपराध अनुसंधान विभाग (CID) के नियंत्रण में लाने का निर्देश दिया है। इस बदलाव का मुख्य उद्देश्य राज्य में बढ़ती आपराधिक गतिविधियों और आतंकी तंत्र को और अधिक प्रभावी ढंग से नियंत्रित करना है।   एकीकृत जांच और प्रशासनिक नियंत्रण इस नए आदेश के अनुसार, एटीएस अब पूरी तरह से प्रशासनिक और परिचालन (operational) दृष्टिकोण से सीआईडी के दिशा-निर्देशों का पालन करेगी। अभी तक एटीएस जिन भी मामलों की जांच कर रही थी, अब वे सभी सीआईडी की मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत संचालित होंगे। इसमें जांच अधिकारियों और पर्यवेक्षकों की नियुक्ति से लेकर केस की प्रगति रिपोर्ट तैयार करने तक की पूरी प्रक्रिया सीआईडी प्रमुख की निगरानी में होगी।   रणनीति के पीछे की वजह झारखंड में वर्ष 2015 में एटीएस का गठन किया गया था, जिसका मूल उद्देश्य स्लीपर सेल का भंडाफोड़ करना, संदिग्ध आतंकियों की गिरफ्तारी और आतंकी वारदातों को रोकना था। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग की पुरानी अधिसूचनाओं का हवाला देते हुए, प्रशासन का मानना है कि एटीएस और सीआईडी के बीच बेहतर तालमेल न केवल केस को सुलझाने में तेजी लाएगा, बल्कि संगठित अपराध के आर्थिक तंत्र को तोड़ने में भी सक्षम होगा।   अधिकारों का स्पष्ट विभाजन हालांकि पूरा प्रशासनिक नियंत्रण सीआईडी के अधीन कर दिया गया है, लेकिन कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में जवाबदेही तय रखी गई है। निर्देश के मुताबिक, आतंकी गतिविधियों से निपटने और विशेष अभियानों के दौरान एटीएस के पुलिस अधीक्षक (SP) अभियान पुलिस महानिरीक्षक (IG) के प्रति जवाबदेह होंगे। वहीं, दैनिक कामकाज और जांच से जुड़ी गोपनीयता और अन्य प्रशासनिक कार्यों के लिए वे सीआईडी के साथ मिलकर काम करेंगे।   सुरक्षा परिदृश्य पर प्रभाव विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय राज्य में सुरक्षा के 'अंडरवर्ल्ड' और विदेश से संचालित होने वाले आपराधिक गिरोहों के खिलाफ एक ठोस कदम साबित हो सकता है। प्रशासनिक स्तर पर पुलिस विभागों के बीच समन्वय में आने वाली बाधाओं को दूर कर एक केंद्रीय तंत्र बनाने का प्रयास किया जा रहा है। एटीएस को विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे अपनी जांच और ऑपरेशन्स के दौरान उच्च स्तर की गोपनीयता बनाए रखें, क्योंकि आने वाले समय में राज्य की आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां अधिक जटिल हो सकती हैं। यह पुनर्गठन झारखंड पुलिस के लिए एक नए युग की शुरुआत जैसा है, जहां सुरक्षा एजेंसियों को एक ही छत के नीचे लाकर अपराध के हर स्तर पर वार करने की तैयारी है।

abhishek singh जून 17, 2026 0
झारखंड में 46 आईपीएस और 17 आईएएस अधिकारियों का तबादला
झारखंड में 46  IPS का ट्रांसफर

रांची: झारखंड के पुलिस विभाग में अब तक का सबसे बड़ा हाई-लेवल फेरबदल हुआ है। शुक्रवार देर  रात 17 आईएएस और 46 आईपीएस बदले गए। सरकार ने इस बदलाव के जरिए न केवल एक दर्जन जिलों के पुलिस अधीक्षकों (SP) और उपायुक्तों (DC)को बदला है, बल्कि कई वरिष्ठ अधिकारियों को महत्वपूर्ण अतिरिक्त प्रभार भी दिए हैं। IPS की ट्रांसफर लिस्ट में आईजी स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी में भी बदलाव किया गया है। कई प्रतीक्षारत अधिकारियों को नई पोस्टिंग मिली है, वहीं कुछ को ट्रेनिंग के बाद एसडीपीओ की कमान सौंपी गई है।   वरिष्ठ अधिकारियों को मिला अतिरिक्त प्रभारः नोटिफिकेशन के मुताबिक एडीजी सीआईडी मनोज कौशिक अब मुख्यालय एडीजी का अतिरिक्त कार्यभार भी संभालेंगे। वहीं, झारखंड पुलिस हाउसिंग कॉरपोरेशन के एमडी पंकज कम्बोज को आईजी मानवाधिकार की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई है। नरेंद्र कुमार सिंह को पलामू जोन का आईजी नियुक्त करते हुए आईजी अभियान का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इसके अलावा, ऋषभ कुमार झा को जेएपी-4 के साथ एसआईएसएफ कमांडेंट का प्रभार मिला है। इन जिलों को मिले नए एसपीः आईएएस-आईपीएस के इस बदलाव में राज्य के महत्वपूर्ण जिलों की कमान नए हाथों में दी गई है। नाथू सिंह मीणा को बोकारो, अमन कुमार को हजारीबाग और प्रवीण पुष्कर को देवघर का नया एसपी बनाया गया है। अन्य प्रमुख नियुक्तियों में आशुतोष शेखर को गढ़वा, निधि द्विवेदी को सरायकेला-खरसावां, कपिल चौधरी को पलामू और मुकेश कुमार लुनायत को रामगढ़ का एसपी नियुक्त किया गया है। वहीं, रांची, धनबाद और जमशेदपुर में नए ग्रामीण एसपी तैनात किए गए हैं।   आईजी और मुख्यालय स्तर पर नई नियुक्तियाः आईजी स्तर पर शैलेंद्र कुमार सिन्हा को बोकारो, माइकलराज एस को आईजी रेल और सुनील भास्कर को जेएपी आईजी की जिम्मेदारी मिली है। मुख्यालय स्तर पर प्रशांत आनंद को एसपी संचार एवं तकनीकी सेवा, सुमित कुमार अग्रवाल को एसपी विशेष शाखा और राजकुमार मेहता को एटीएस एसपी बनाया गया है। मूमल राजपुरोहित को रेल एसपी धनबाद की कमान सौंपी गई है। नौजवान अफसरों को एएसपी के तौर पर पोस्टिंगः ट्रांसफर लिस्ट में कई युवा और प्रशिक्षणरत अधिकारियों को भी अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं। निखिल राय को रांची कोतवाली का एएसपी नियुक्त किया गया है। इसके अलावा, श्रुति को एसडीपीओ चैनपुर, दिव्यांश शुक्ला को एसडीपीओ हुसैनाबाद और राघवेंद्र शर्मा को एसडीपीओ पतरातू बनाया गया है। सैयद मुस्तफा हासमी को चक्रधरपुर का एसडीपीओ नियुक्त किया गया है, जबकि मनीष टोप्पो अब एसपी एससीआरबी होंगे।

Unknown अप्रैल 18, 2026 0
Chief Minister Hemant Soren flags off 1477 new vehicles for Jharkhand Police modernization program
झारखंड पुलिस को मिली बड़ी ताकत: 1477 नए वाहनों को CM हेमंत सोरेन ने दिखाई हरी झंडी

  Hemant Soren ने शुक्रवार को झारखंड पुलिस को बड़ी सौगात देते हुए 1477 नए वाहनों को हरी झंडी दिखाकर जिलों के लिए रवाना किया। विधानसभा परिसर से हुए इस कार्यक्रम के साथ ही राज्य में पुलिस को जर्जर गाड़ियों से राहत मिलने की शुरुआत हो गई है। अब थानों में नई चमचमाती गाड़ियां दिखाई देंगी और पुलिस की गश्ती व्यवस्था पहले से अधिक मजबूत होगी।   628 पेट्रोलिंग वाहन और 849 दोपहिया वाहन शामिल इस बेड़े में कुल 628 पेट्रोलिंग वाहन और 849 दोपहिया वाहन शामिल हैं। सभी पेट्रोलिंग वाहन Mahindra Bolero के बीएस-6 मॉडल हैं, जिन्हें राज्य के विभिन्न जिलों और पुलिस इकाइयों में तैनात किया जाएगा। इनमें से 614 बोलेरो वाहन जिला पुलिस को दिए जाएंगे, जबकि बाकी वाहन क्विक रिस्पांस टीम (QRT) और अन्य विशेष इकाइयों को आवंटित किए जाएंगे। इसे पुलिस आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है और एक बार में इतनी बड़ी संख्या में वाहनों का आवंटन अब तक का सबसे बड़ा बताया जा रहा है।   पहले चरण में हुआ वाहन वितरण राज्य सरकार ने पहले ही 1255 पेट्रोलिंग वाहन और 1697 दोपहिया वाहन खरीदने की मंजूरी दी थी। पहले चरण में अब 628 पेट्रोलिंग वाहन और 849 दोपहिया वाहन जिलों को दिए जा रहे हैं।   12 अत्याधुनिक थानों का भी होगा शिलान्यास वाहन वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री राज्य के 12 नए अत्याधुनिक थाना भवनों का ऑनलाइन शिलान्यास भी करेंगे। सरकार जर्जर थाना भवनों की जगह आधुनिक सुविधाओं से लैस नए थाने बना रही है, ताकि पुलिसकर्मियों को बेहतर कार्य वातावरण मिल सके।   किन जिलों को कितनी बोलेरो गाड़ियां जिला पुलिस के लिए कुल 614 बोलेरो वाहन आवंटित किए गए हैं। इनमें प्रमुख जिलों को मिलने वाली गाड़ियों की संख्या इस प्रकार है: Ranchi – 80   Jamshedpur – 51   Dhanbad – 40   Chaibasa – 40   Bokaro – 39   Giridih – 32   Palamu – 31   Hazaribagh – 28   Deoghar – 28   Gumla – 22   Garhwa – 21   Dumka – 20   Chatra – 19   Seraikela – 19   Latehar – 18   Godda – 17   Simdega – 15   Jamtara – 14   Khunti – 14   Koderma – 14   Lohardaga – 14   Sahibganj – 14   Ramgarh – 13   Pakur – 11

surbhi मार्च 13, 2026 0
IG Kishore Kaushal inspecting security arrangements at Palamu Civil Court and central control room
पलामू में सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा: डीआईजी किशोर कौशल ने सिविल कोर्ट और कंट्रोल रूम का किया निरीक्षण

  झारखंड के पलामू जिले में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से पुलिस प्रशासन पूरी तरह सक्रिय नजर आ रहा है। इसी कड़ी में पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) किशोर कौशल और पलामू की पुलिस अधीक्षक (एसपी) रीष्मा रमेशन ने सिविल कोर्ट परिसर तथा समाहरणालय स्थित सेंट्रल कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और पुलिस समन्वय की विस्तृत समीक्षा की।   कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था का लिया जायजा निरीक्षण के दौरान डीआईजी किशोर कौशल ने सिविल कोर्ट परिसर में तैनात सुरक्षा व्यवस्था का बारीकी से आकलन किया। उन्होंने पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि कोर्ट परिसर की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पुलिस को हमेशा सतर्क और सक्रिय रहना चाहिए, ताकि किसी भी आपात स्थिति या सूचना पर तुरंत कार्रवाई की जा सके।   प्रवेश द्वार पर जांच व्यवस्था का किया निरीक्षण डीआईजी ने कोर्ट परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार पर तैनात सुरक्षा कर्मियों की कार्यप्रणाली का भी निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने देखा कि आने-जाने वाले लोगों की जांच किस प्रकार की जा रही है। उन्होंने सुरक्षा बलों को निर्देश दिया कि परिसर में प्रवेश करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की पूरी सतर्कता के साथ जांच की जाए और संदिग्ध व्यक्तियों व गतिविधियों पर विशेष नजर रखी जाए।   सेंट्रल कंट्रोल रूम की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा सिविल कोर्ट परिसर के निरीक्षण के बाद डीआईजी और एसपी ने समाहरणालय स्थित सेंट्रल कंट्रोल रूम (सीसीआर) का भी दौरा किया। यहां उन्होंने अपराध निगरानी, सूचना प्रबंधन और संचार प्रणाली की व्यवस्था का जायजा लिया। अधिकारियों ने विभिन्न थानों से आने वाली सूचनाओं के संकलन और उन पर त्वरित कार्रवाई की प्रक्रिया की भी जानकारी ली।   सीसीटीवी निगरानी और रिकॉर्ड प्रबंधन पर जोर निरीक्षण के दौरान शहर में लगे सीसीटीवी कैमरों से प्राप्त लाइव फुटेज की गुणवत्ता और उसकी मॉनिटरिंग व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। डीआईजी ने निर्देश दिया कि कंट्रोल रूम में आने वाली लाइव फुटेज पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत संबंधित थाना को दी जाए। इसके साथ ही रिकॉर्ड और फाइलों के व्यवस्थित रखरखाव तथा मामलों के शीघ्र निष्पादन पर भी विशेष जोर दिया गया।   पुलिस समन्वय और जनसहयोग पर दिया बल डीआईजी किशोर कौशल ने पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी थानों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करें, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। उन्होंने कहा कि अपराधियों और असामाजिक तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने नागरिकों से भी अपील की कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पुलिस प्रशासन का सहयोग करें और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें। निरीक्षण के दौरान कई पुलिस अधिकारी और जवान मौजूद रहे।  

surbhi मार्च 11, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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अस्पताल में भर्ती देवेंद्र नाथ महतो को धरना स्थल आने की अनुमति देने की मांग, 12वें दिन भी भूख हड़ताल जारी

kalpana अगस्त 14, 2026 0