रांची। झारखंड सरकार राज्य के विश्वविद्यालयों की वित्तीय और प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने जा रही है। इसके तहत कुलपतियों (वीसी) के कई महत्वपूर्ण अधिकार सीमित कर दिए जाएंगे। नई व्यवस्था लागू होने के बाद कुलपति चपरासी तक की नियुक्ति नहीं कर सकेंगे। इसके अलावा विश्वविद्यालयों में होने वाली खरीद, टेंडर और आउटसोर्सिंग की पूरी प्रक्रिया भी एक समान नियमों के तहत संचालित होगी। राज्य सरकार ने 'स्टैच्यूट्स फॉर फाइनेंस एंड अकाउंट मैनेजमेंट इन स्टेट यूनिवर्सिटीज ऑफ झारखंड-2026' का मसौदा तैयार किया है। पहली बार सभी राज्य विश्वविद्यालयों के लिए अलग प्रोक्योरमेंट मैनुअल और मैनपावर प्रोक्योरमेंट (आउटसोर्सिंग) मैनुअल बनाया गया है। इसका उद्देश्य वित्तीय पारदर्शिता बढ़ाना, अनियमितताओं पर रोक लगाना और सभी विश्वविद्यालयों में एक जैसी व्यवस्था लागू करना है। कुलपतियों के अधिकारों में होगी बड़ी कटौती वर्तमान व्यवस्था में कुलपतियों को तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सीधी नियुक्ति करने का अधिकार प्राप्त है। वे विश्वविद्यालय मुख्यालय और अंगीभूत कॉलेजों में संविदा पर नियुक्तियां कर सकते हैं तथा कई प्रशासनिक और वित्तीय प्रस्तावों को मंजूरी भी देते हैं। इसके अलावा सूचीबद्ध एजेंसियों के अलावा अन्य एजेंसियों को भी आउटसोर्सिंग का काम देने और भवन निर्माण, मरम्मत व विकास कार्यों के लिए राशि स्वीकृत करने का अधिकार उनके पास होता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन सभी प्रक्रियाओं को निर्धारित नियमों के दायरे में लाया जाएगा। नियुक्ति, आउटसोर्सिंग और वित्तीय फैसले तय प्रक्रिया के अनुसार ही लिए जा सकेंगे। खरीद और आउटसोर्सिंग के लिए बनेगा डिजिटल सिस्टम नए प्रावधानों के तहत कर्मचारियों की बहाली के लिए मैनपावर प्रोक्योरमेंट मैनुअल लागू किया जाएगा। वहीं कंप्यूटर, लैब उपकरण, फर्नीचर, पुस्तकें, वाहन या अन्य सामग्री की खरीद के लिए अलग प्रोक्योरमेंट मैनुअल होगा। सुरक्षा गार्ड, सफाईकर्मी, डेटा एंट्री ऑपरेटर और तकनीकी कर्मचारियों जैसी सभी आउटसोर्सिंग सेवाओं के लिए एजेंसियों का चयन केवल राज्य सरकार के अधिकृत ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल या निर्धारित आउटसोर्सिंग प्रणाली के माध्यम से किया जाएगा। किसी एजेंसी को सीधे काम देने की व्यवस्था समाप्त हो जाएगी। हर खरीद और भुगतान का रहेगा डिजिटल रिकॉर्ड नई व्यवस्था के तहत किसी भी सामग्री की खरीद से पहले उसकी आवश्यकता का आकलन किया जाएगा। इसके बाद प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति, निविदा, तकनीकी मूल्यांकन, आपूर्ति, गुणवत्ता जांच और भुगतान तक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से दर्ज होगी। साथ ही संबंधित अधिकारी को यह प्रमाणित करना अनिवार्य होगा कि सामान या सेवा वास्तव में प्राप्त हुई है। इसके बाद ही भुगतान जारी किया जाएगा। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से फर्जी आपूर्ति, बिना काम के भुगतान और वित्तीय अनियमितताओं पर प्रभावी रोक लगेगी, जिससे विश्वविद्यालयों में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों मजबूत होंगी।
रांची। झारखंड सरकार ने राज्य की स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी और संसाधन संपन्न बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अब प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी), सदर अस्पताल, अनुमंडल अस्पताल और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार दिए गए हैं। इस फैसले के बाद उन्हें छोटी-छोटी जरूरतों और विकास कार्यों के लिए सिविल सर्जन पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। प्रभारियों को बनाया गया डीडीओ स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने बताया कि अधिकारों के विकेंद्रीकरण के तहत सभी स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) बनाया गया है। इससे वे अपने संस्थान की जरूरतों के अनुसार स्वयं निर्णय लेकर राशि खर्च कर सकेंगे। दवाओं की खरीद, आवश्यक चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता, आउटसोर्स कर्मियों की नियुक्ति और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं अब स्थानीय स्तर पर ही की जा सकेंगी। रखरखाव और विकास कार्यों में मिलेगी तेजी इस निर्णय के बाद स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को अस्पताल संचालन एवं रखरखाव के लिए मिलने वाली राशि के उपयोग में भी स्वतंत्रता मिलेगी। अब उन्हें हर छोटे खर्च के लिए सिविल सर्जन की अनुमति का इंतजार नहीं करना होगा। इससे अस्पतालों में आवश्यक मरम्मत, सुविधाओं के विस्तार और मरीजों के लिए जरूरी संसाधन समय पर उपलब्ध कराए जा सकेंगे। हर स्तर के अस्पतालों को मिलती है वार्षिक राशि राज्य सरकार मुख्यमंत्री अस्पताल संचालन एवं रखरखाव योजना के तहत सदर अस्पतालों को 75 लाख रुपये, अनुमंडल अस्पतालों को 50 लाख रुपये, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं रेफरल अस्पतालों को 10 लाख रुपये, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को 5 लाख रुपये तथा स्वास्थ्य उपकेंद्र और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों को प्रतिवर्ष 2 लाख रुपये उपलब्ध कराती है। अब इन निधियों का उपयोग संबंधित केंद्रों के प्रभारी स्थानीय जरूरतों के अनुसार कर सकेंगे। मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इस व्यवस्था से एक ओर सिविल सर्जनों पर प्रशासनिक बोझ कम होगा, वहीं दूसरी ओर अस्पतालों में निर्णय लेने की प्रक्रिया तेज होगी। स्थानीय स्तर पर त्वरित फैसले होने से स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार आएगा और मरीजों को बेहतर एवं समय पर उपचार की सुविधा मिल सकेगी।
रांची: मोहर्रम के अवसर पर झारखंड सरकार और पुलिस मुख्यालय ने पूरे राज्य में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए राज्यभर में 16 हजार से अधिक पुलिस और होमगार्ड जवानों की तैनाती की जा रही है। इसके अलावा केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की सात कंपनियां भी सुरक्षा व्यवस्था में लगाई जाएंगी। संवेदनशील इलाकों की निगरानी ड्रोन कैमरों और वीडियो सर्विलांस के माध्यम से की जाएगी। संवेदनशील इलाकों पर विशेष नजर पुलिस मुख्यालय के अनुसार जिन क्षेत्रों में पहले तनाव या विवाद की घटनाएं सामने आई हैं, वहां अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए जाएंगे। ड्रोन कैमरों के जरिए जुलूसों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर लगातार नजर रखी जाएगी। अफवाह फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई प्रशासन ने सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है। साइबर सेल को 24 घंटे सक्रिय रहने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी भड़काऊ पोस्ट या फर्जी सूचना पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी। शांति समिति की बैठकें पूरी राज्य के सभी जिलों में शांति समिति की बैठकें आयोजित की गई हैं। प्रशासन ने सभी समुदायों के लोगों से आपसी सौहार्द बनाए रखने और किसी भी अफवाह पर ध्यान न देने की अपील की है। पुलिस की अपील पुलिस ने कहा है कि मोहर्रम के सभी जुलूस तय मार्ग और निर्धारित समय के अनुसार ही निकाले जाएंगे। लोगों से सहयोग करने तथा किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की अपील की गई है।
रांची। झारखंड सरकार राज्य के हजारों संविदा, दैनिक वेतनभोगी, एकमुश्त पारिश्रमिक और आउटसोर्स कर्मियों को बड़ी राहत देने की तैयारी में है। सरकार ने प्रतियोगिता परीक्षाओं में अनुभव के आधार पर अतिरिक्त वेटेज देने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस कदम से लंबे समय से विभिन्न विभागों में कार्यरत कर्मचारियों को सरकारी नौकरी पाने में महत्वपूर्ण लाभ मिल सकता है। संबंधित विभागों भेजा गया प्रस्ताव कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस प्रस्ताव को तैयार कर विधि और वित्त विभाग के पास मंजूरी के लिए भेज दिया है। मंजूरी मिलते ही सचिवालय, बोर्ड-निगम, क्षेत्रीय कार्यालयों और अन्य सरकारी संस्थानों में कार्यरत हजारों कर्मियों को इसका सीधा फायदा मिलेगा। प्रस्ताव के अनुसार तीन वर्ष से अधिक सेवा देने वाले कर्मचारियों को प्रतियोगिता परीक्षा के कुल अंकों में अतिरिक्त वेटेज मिलेगा। 36 माह तक सेवा करने वालों को कोई अतिरिक्त अंक नहीं मिलेगा, लेकिन 37वें माह से 0.15 प्रतिशत वेटेज शुरू होगा। इसके बाद सेवा अवधि बढ़ने के साथ यह लाभ भी बढ़ता जाएगा। 136 माह पर मिलेगा 15 प्रतिशत तक का वेटेज सरकार के प्रस्ताव के मुताबिक 40 माह की सेवा पर 0.60 प्रतिशत, 60 माह पर 3.60 प्रतिशत, 120 माह पर 12.60 प्रतिशत और 136 माह या उससे अधिक सेवा देने वालों को अधिकतम 15 प्रतिशत वेटेज दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि संविदा और आउटसोर्स कर्मी वर्षों तक विभागीय कार्यों का अनुभव प्राप्त करते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर तरीके से समझते हैं। ऐसे में उनके अनुभव को प्रतियोगिता परीक्षा में मान्यता देना एक न्यायसंगत कदम है। यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो हजारों कर्मियों के लिए नियमित सरकारी नौकरी का सपना साकार होने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।
गुमला। झारखंड सरकार के अनुसूचित जनजाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग कल्याण मंत्री Chamra Linda ने अपने विधानसभा क्षेत्र बिशुनपुर के विभिन्न गांवों में विकास कार्यों को गति देने के लिए गुमला के उपायुक्त को पत्र लिखा है। मंत्री ने गुमला और घाघरा प्रखंड के कई गांवों में सड़क, पेयजल, जलमीनार और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी योजनाओं को जल्द स्वीकृति देकर क्रियान्वित करने का अनुरोध किया है। पत्र में मंत्री ने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीण लंबे समय से मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। ऐसे में विकास कार्यों को प्राथमिकता देते हुए शीघ्र पूरा कराया जाए, ताकि लोगों को बेहतर आवागमन, स्वच्छ पेयजल और रोशनी की सुविधा मिल सके। कई गांवों में सड़क निर्माण का प्रस्ताव मंत्री ने बसुआ पंचायत में महेश उरांव के घर से बाजार टांड़ स्थित धनु उरांव के घर तक पीसीसी सड़क निर्माण की अनुशंसा की है। इसके अलावा घाघरा प्रखंड की गोया-बेलागड़ा पंचायत में बिरसाई उरांव के घर से मस्जिद तक और जिलानी के घर से आंगनबाड़ी केंद्र तक पीसीसी सड़क बनाने का प्रस्ताव भी भेजा गया है। वहीं गुमला प्रखंड की अंबवा पंचायत में सेमर मोड़ से होदा मास्टर के घर तक सड़क निर्माण कराने की मांग की गई है। जलमीनार, चापाकल और स्ट्रीट लाइट पर भी जोर ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संकट दूर करने के लिए अंबवा पंचायत और टोटो पंचायत में चापाकल लगाने का प्रस्ताव दिया गया है। साथ ही कोटाम पंचायत के बाजार टांड़ में जलमीनार निर्माण की अनुशंसा की गई है। इसके अलावा टोटो पंचायत स्थित हेरा मस्जिद के पास तथा घाघरा प्रखंड के गोया गांव में रऊफ मिस्त्री के घर के समीप स्ट्रीट लाइट लगाने की भी मांग की गई है। मंत्री चमरा लिंडा ने उपायुक्त से इन सभी योजनाओं पर शीघ्र कार्रवाई करने का आग्रह किया है। पत्र सामने आने के बाद संबंधित गांवों के लोगों में विकास कार्यों को लेकर नई उम्मीद जगी है। अब ग्रामीणों की नजर जिला प्रशासन की पहल और योजनाओं के जल्द धरातल पर उतरने पर टिकी है।
रांची। झारखंड सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग ने झारखंड प्रशासनिक सेवा (JAS) के 88 अधिकारियों के स्थानांतरण और नई पदस्थापना का आदेश जारी किया है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। सरकार के इस फैसले के बाद राज्य के विभिन्न जिलों, अनुमंडलों, प्रखंडों और अंचलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियों में बदलाव देखने को मिलेगा। माना जा रहा है कि इससे प्रशासनिक कार्यों में गति आएगी और शासन व्यवस्था को और मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया विभाग ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि जिन अधिकारियों को स्थानांतरण के बाद किसी नए पद पर पदस्थापित नहीं किया गया है या जो अपने वर्तमान प्रभार से मुक्त हो गए हैं, वे तत्काल कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग में योगदान दें। ऐसे अधिकारियों की अगली तैनाती पर विभाग बाद में निर्णय लेगा।
रांची। झारखंड सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से रांची के मोरहाबादी मैदान में 16 से 18 जून तक तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेला आयोजित करने जा रही है। इस मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री Hemant Soren करेंगे। आयोजन का उद्देश्य किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, व्यापारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीन प्रयोगों और तकनीकी विकास पर विचार-विमर्श कर सकें। देशभर से आएंगे विशेषज्ञ और लगेंगे आधुनिक कृषि स्टॉल कृषि व्यापार मेले में देश के विभिन्न राज्यों से कृषि क्षेत्र से जुड़े संस्थान, कंपनियां और संगठन अपने स्टॉल लगाएंगे। मेले में 50 से अधिक वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे। किसानों के लिए पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक किसान इस आयोजन का लाभ उठा सकें। कृषि विभाग के अनुसार मेले में आधुनिक खेती, उन्नत बीज, सिंचाई तकनीक, जैविक कृषि और कृषि व्यवसाय से जुड़ी नई जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी। किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के उपायों से भी अवगत कराया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों पर रहेगा विशेष फोकस मेले का प्रमुख आकर्षण कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक कृषि पद्धतियों, मत्स्य पालन, बागवानी और कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी तकनीकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। विशेषज्ञ किसानों को इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग और उनके लाभों की जानकारी देंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी सजेगा आयोजन कृषि व्यापार मेला केवल तकनीकी और व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। शाम के समय झारखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नृत्य और गीत-संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के प्रगतिशील किसान और अन्य राज्यों के सफल कृषि विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे किसानों को नई प्रेरणा और सीख मिलेगी। यह मेला कृषि क्षेत्र में नवाचार, ज्ञान और अवसरों का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है।
झारखंड में आगामी ईद, सरहुल और रामनवमी को लेकर राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड में आ गई है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी जिलों के उपायुक्तों और पुलिस अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर कानून-व्यवस्था की समीक्षा की और कई अहम निर्देश जारी किए। मुख्यमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि त्योहारों के नाम पर किसी भी तरह की अशांति, हिंसा या उपद्रव को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 24 घंटे अलर्ट पर रहेंगे प्रशासन मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी पर्व-त्योहार शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हों। इसके लिए पुलिस और प्रशासन को 24 घंटे सतर्क रहना होगा। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों पर तुरंत कार्रवाई की जाए। संवेदनशील इलाकों में कड़ी सुरक्षा सीएम ने खास तौर पर संवेदनशील क्षेत्रों और धार्मिक स्थलों के आसपास सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ऐसे स्थानों पर किसी भी तरह की गतिविधि से शांति भंग नहीं होनी चाहिए। इसके साथ ही सभी समुदायों के लोगों से सहयोग लेने पर भी जोर दिया गया। जुलूस मार्ग और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर नजर त्योहारों के दौरान निकलने वाली शोभायात्राओं को लेकर मुख्यमंत्री ने विशेष सतर्कता बरतने को कहा। जुलूस के रूट का पहले से भौतिक सत्यापन करने, भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात करने और हर गतिविधि की निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को आगाह किया कि त्योहारों के दौरान अफवाह फैलाने वाले सक्रिय हो सकते हैं। ऐसे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार नजर रखी जाए। उन्होंने निर्देश दिया कि भड़काऊ पोस्ट या अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान सीएम ने कहा कि शोभायात्राओं में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे शामिल होते हैं, इसलिए उनकी सुरक्षा और सुविधा का विशेष ख्याल रखा जाए। जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी के लिए पहले से तैयारी रखने और जुलूस मार्ग में ‘सेफ जोन’ बनाने के निर्देश भी दिए गए। सुरक्षा के लिए आधुनिक संसाधनों का उपयोग बैठक में यह भी तय किया गया कि जुलूस मार्ग पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और ड्रोन के जरिए निगरानी की जाए। इसके अलावा फायर ब्रिगेड, एम्बुलेंस, दंगा नियंत्रण वाहन और वॉटर कैनन जैसे संसाधनों को पूरी तरह तैयार रखने का निर्देश दिया गया। भड़काऊ गानों और गतिविधियों पर रोक मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि शोभायात्रा के दौरान किसी भी तरह के भड़काऊ या उत्तेजक गाने नहीं बजने चाहिए। इसके लिए जिला प्रशासन को पूजा समितियों और अखाड़ों के साथ समन्वय बनाकर प्री-रिकॉर्डेड गानों की व्यवस्था करने को कहा गया है। त्योहारों में शांति बनाए रखने की अपील मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सभी जिलों को निर्देश दिया कि वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें और समय रहते समस्याओं का समाधान करें। उन्होंने दोहराया कि त्योहार खुशी और भाईचारे का प्रतीक हैं, इसलिए किसी को भी इसे बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।