रांची। झारखंड सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से रांची के मोरहाबादी मैदान में 16 से 18 जून तक तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेला आयोजित करने जा रही है। इस मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री Hemant Soren करेंगे।
आयोजन का उद्देश्य किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, व्यापारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीन प्रयोगों और तकनीकी विकास पर विचार-विमर्श कर सकें।
कृषि व्यापार मेले में देश के विभिन्न राज्यों से कृषि क्षेत्र से जुड़े संस्थान, कंपनियां और संगठन अपने स्टॉल लगाएंगे। मेले में 50 से अधिक वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे। किसानों के लिए पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक किसान इस आयोजन का लाभ उठा सकें।
कृषि विभाग के अनुसार मेले में आधुनिक खेती, उन्नत बीज, सिंचाई तकनीक, जैविक कृषि और कृषि व्यवसाय से जुड़ी नई जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी। किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के उपायों से भी अवगत कराया जाएगा।
मेले का प्रमुख आकर्षण कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक कृषि पद्धतियों, मत्स्य पालन, बागवानी और कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी तकनीकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। विशेषज्ञ किसानों को इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग और उनके लाभों की जानकारी देंगे।
कृषि व्यापार मेला केवल तकनीकी और व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। शाम के समय झारखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नृत्य और गीत-संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के प्रगतिशील किसान और अन्य राज्यों के सफल कृषि विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे किसानों को नई प्रेरणा और सीख मिलेगी। यह मेला कृषि क्षेत्र में नवाचार, ज्ञान और अवसरों का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड में मुहर्रम पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन अलर्ट है। मुहर्रम पर्व के दौरान कानून-व्यवस्था बनाये रखने के लिए दस हजार की संख्या में अतिरिक्त जवानों की तैनाती होगी। मुहर्रम पर्व में आईआरबी, जिलाबलों के अलावा होम गार्ड की भी तैनाती होगी। मुहर्रम पर्व में 5850 होम गार्ड को बुलाया जाएगा। इसके लिए पुलिस मुख्यालय ने आदेश जारी कर दिया है। मुहर्रम पर्व को लेकर राज्य के अलग अलग जिलों में बड़े पैमाने पर होम गार्ड की तैनाती का फैसला किया है। 4 दिनों के लिए होगी तैनाती राज्य के 24 जिलों में कुल दस हजार से अधिक जवानों का तैनाती होगी। वहीं होमगार्ड जवानों को ड्यूटी पर बुलाने की अनुमति दे दी गई है। इन सभी होम गार्ड की तैनाती चार दिनों के लिए होगी। पुलिस महानिरीक्षक (अभियान) ने सभी जिलों के एसएसपी व एसपी को पत्र के माध्यम से निर्देशित किया गया है कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में मुहर्रम पर्व के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित करें। रांची और जमशेदपुर में सबसे ज्यादा सुरक्षाबल मुहर्रम पर्व को ध्यान में रखते हुए सबसे ज्यादा संवेदनशील माने जाने वाले जिलों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। राजधानी रांची और जमशेदपुर में सबसे अधिक 500-500 होम गार्ड की तैनाती की गई है। इसके अलावा गिरिडीह में 400, हजारीबाग में 350, जबकि धनबाद, बोकारो, पलामू और चाईबासा में 300-300 जवानों की तैनाती की जाएगी। पुलिस मुख्यालय ने सभी क्षेत्रीय पुलिस महानिरीक्षक (IG) और पुलिस उप-महानिरीक्षक (DIG) समेत जिला के एसएसपी व एसपी को सुरक्षा के कड़े इंतजाम करने के निर्देश भेज दिए हैं। सुरक्षा को लेकर आईजी अभियान के प्रमुख निर्देश धार्मिक स्थलों की सुरक्षा: सभी जिलों में धार्मिक स्थलों की सुरक्षा पर विशेष निगरानी रखी जाएगी और वहां सुरक्षा बलों के पुख्ता इंतजाम किए जाएंगे। शांति समिति की बैठकें: सभी थाना क्षेत्रों में समय रहते शांति समिति की बैठकें आयोजित की जाएं, यदि कोई पुराना या संभावित विवादित बिंदु हो, तो दोनों पक्षों को बिठाकर उसका समाधान पहले ही निकाल लिया जाए। आकस्मिक स्थिति की तैयारीः किसी भी अप्रिय या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक स्तर पर पुलिस और सुरक्षा बलों को अलर्ट मोड पर रखा जाए। उपद्रवियों पर कार्रवाई: जो लोग पूर्व में सांप्रदायिक तनाव या दंगों में शामिल रहे हैं और वर्तमान में भी उनसे विवाद पैदा करने की आशंका है, ऐसे असामाजिक तत्वों को चिन्हित कर उनके खिलाफ निरोधात्मक कार्रवाई की जाए। सोशल मीडिया पर कड़ी नजरः मुहर्रम के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और व्हाट्सएप ग्रुप्स की विशेष रूप से मॉनिटरिंग की जाएगी। अफवाह फैलाने या भड़काऊ पोस्ट डालने वालों को चिन्हित कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। निर्धारित मार्ग से ही निकलेगा जुलूसः पुलिस पदाधिकारी यह सुनिश्चित करेंगे कि मुहर्रम का जुलूस केवल प्रशासन द्वारा पहले से तय रूट से ही गुजरे. किसी भी नए मार्ग की अनुमति नहीं दी जाएगी।
रांची। झारखंड में 2 सीटों के लिए हुए राज्यसभा चुनाव को लेकर चल रहे कयासों का बाजार अब पूरी तरह खत्म हो चुका है। दो बार झारखंड से राज्यसभा सांसद रहे परिमल नथवाणी ने एक बार फिर जीत का सेहरा पहना है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि परिमल नाथवाणी कौन हैं, जिन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हरा दिया? क्या वे सिर्फ एक अच्छे राजनीतिज्ञ हैं या फिर एक बड़े बिजनेसमैन? अगर हम उनके करियर पर नजर डालें, तो वे एक शानदार ऑलराउंडर की तरह नजर आते हैं, जिन्होंने हर क्षेत्र में अपना बड़ा योगदान दिया है। दरअसल, वे रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड यानी RIL में कॉर्पोरेट अफेयर्स (Corporate Affairs) के डायरेक्टर हैं। रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी के वे बेहद करीबी और उनके सबसे भरोसेमंद सहयोगियों में से एक माने जाते हैं। रिलायंस के कई बड़े प्रोजेक्ट्स, खासकर गुजरात के जामनगर में बनी दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी के जमीनी काम को संभालने में इनकी मुख्य भूमिका रही है। लगातार तीन बार पहुंचे हैं राज्यसभा परिमल नथवाणी न केवल बिजनेस मैन हैं, बल्कि राजनीति के भी शानदार खिलाड़ी हैं। यही वजह है कि वे लंबे समय तक राज्यसभा से सांसद भी रहे हैं। उनकी खास बात ये है कि वे हर दल के लोगों के साथ में अच्छा तालमेल बनाकर के रखते हैं। यही कारण है कि वे झारखंड से ही लगातार दो बार राज्यसभा पहुंचे थे। साल 2008 में वे पहली बार और फिर 2014 में झारखंड से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में राज्यसभा पहुंचे, जिसमें उन्हें सभी प्रमुख दलों मसलन जेएमएम, भाजपा और कांग्रेस का समर्थन प्राप्त था। केवल झारखंड से ही नहीं, बल्कि वे आंध्र प्रदेश से भी राज्यसभा जा चुके हैं। साल 2020 में वे वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के टिकट पर राज्यसभा पहुंचे थे। क्रिकेट एडमिनिस्ट्रेटर के रूप में भी बनाई है पहचान राजनीति और बिजनेस के अलावा परिमल नथवाणी का खेल प्रशासन में भी बड़ा नाम है। वे गुजरात क्रिकेट एसोसिएशन (GCA) के पूर्व उपाध्यक्ष (Vice President) रह चुके हैं। अहमदाबाद के विश्व प्रसिद्ध ‘नरेंद्र मोदी स्टेडियम’ (मोटेरा स्टेडियम) के पुनर्निर्माण और उसे दुनिया का सबसे बड़ा क्रिकेट स्टेडियम बनाने के प्रोजेक्ट में उनका बहुत बड़ा योगदान था। वन्यजीव संरक्षण के लिए भी करते हैं काम परिमल नथवाणी अपने करियर में वन्यजीव संरक्षण के लिए बड़ा काम किये हुए हैं। जानकारी के मुताबिक गुजरात के गिर जंगलों में पाए जाने वाले एशियाई शेरों (Asiatic Lions) के संरक्षण के लिए भी वे काफी काम करते हैं। वे गिर राष्ट्रीय उद्यान के विकास और शेरों की सुरक्षा को लेकर अक्सर आवाज उठाते रहते हैं।
रांची। झारखंड से नव निर्वाचित राज्यसभा सांसद बैद्यनाथ राम ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में शिष्टाचार मुलाकात की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बैद्यनाथ राम को राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि बैद्यनाथ राम संसद के उच्च सदन राज्यसभा में झारखंड की जनता की भावनाओं, अपेक्षाओं तथा राज्य के विकास और जनहित से जुड़े मुद्दों को मजबूती से उठाएंगे। पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने का जताया भरोसा मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्यसभा में झारखंड के हितों की प्रभावी पैरवी और राज्य के विकास से जुड़े विषयों को राष्ट्रीय स्तर पर रखने में बैद्यनाथ राम महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। वहीं, नव निर्वाचित सांसद बैद्यनाथ राम ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए उनका धन्यवाद किया और राज्य के हितों के लिए पूरी निष्ठा के साथ कार्य करने का भरोसा जताया।