रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच अब रेंजर (FRO) परीक्षा तक पहुंच गई है। सीआईडी ने रेंजर परीक्षा की OMR शीट में छेड़छाड़ के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में 170 पदों में से 17 अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से सफलता दिलाने का शक जताया गया है। मामले में एक आईआरबी जवान का नाम सामने आया है, जिसके संपर्क वन विभाग के कुछ वनरक्षियों से होने की बात कही जा रही है।
सीआईडी को आशंका है कि रेंजर परीक्षा में भी OMR शीट से छेड़छाड़ कर अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसी अब उन अभ्यर्थियों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है, जिन्होंने परीक्षा में सफलता हासिल की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुछ वन विभाग के कर्मचारियों के संपर्क कथित गिरोह से जुड़े हो सकते हैं।
JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सीआईडी को कंपनी के एक अन्य निदेशक सत्यपाल सिंह की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। जांच टीम जब लखनऊ स्थित उसके ठिकाने पर पहुंची तो वह वहां नहीं मिला। अब सीआईडी उसकी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से वारंट लेने की तैयारी कर रही है। इससे पहले कंपनी के निदेशक रामबीर सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है।
JPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 की प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली को लेकर गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ से पूछताछ में सीआईडी को एक गिरोह की जानकारी मिली है। जांच एजेंसी अब पूछताछ में मिले इनपुट का सत्यापन कर रही है। हालांकि, सुमन के पास से OMR शीट की कार्बन कॉपी बरामद नहीं हुई थी।
JPSC गड़बड़ी मामले में आयोग के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को सीआईडी ने दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है। उन्हें तीन अगस्त को सीआईडी मुख्यालय पहुंचने का नोटिस दिया गया है। इसके अलावा परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता, TDPL निदेशक रामबीर सिंह और गिरफ्तार डीएसओ मनोज तिवारी उर्फ अभय तिवारी से भी दोबारा पूछताछ की जाएगी।
सीआईडी कोर्ट में आवेदन देकर इन आरोपियों की फिर से रिमांड मांगने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी का फोकस परीक्षा प्रक्रिया में शामिल लोगों, OMR शीट की सुरक्षा और कथित गिरोह के नेटवर्क का पता लगाने पर है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच अब रेंजर (FRO) परीक्षा तक पहुंच गई है। सीआईडी ने रेंजर परीक्षा की OMR शीट में छेड़छाड़ के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में 170 पदों में से 17 अभ्यर्थियों को अनुचित तरीके से सफलता दिलाने का शक जताया गया है। मामले में एक आईआरबी जवान का नाम सामने आया है, जिसके संपर्क वन विभाग के कुछ वनरक्षियों से होने की बात कही जा रही है। OMR शीट में हेरफेर की जांच में जुटी सीआईडी सीआईडी को आशंका है कि रेंजर परीक्षा में भी OMR शीट से छेड़छाड़ कर अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया। जांच एजेंसी अब उन अभ्यर्थियों और उनसे जुड़े लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है, जिन्होंने परीक्षा में सफलता हासिल की है। शुरुआती जांच में सामने आया है कि कुछ वन विभाग के कर्मचारियों के संपर्क कथित गिरोह से जुड़े हो सकते हैं। TDPL निदेशक की भूमिका भी जांच के घेरे में JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में मेसर्स टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) की भूमिका भी जांच के दायरे में है। सीआईडी को कंपनी के एक अन्य निदेशक सत्यपाल सिंह की संलिप्तता के संकेत मिले हैं। जांच टीम जब लखनऊ स्थित उसके ठिकाने पर पहुंची तो वह वहां नहीं मिला। अब सीआईडी उसकी गिरफ्तारी के लिए कोर्ट से वारंट लेने की तैयारी कर रही है। इससे पहले कंपनी के निदेशक रामबीर सिंह को गिरफ्तार किया जा चुका है। सुमन सौरभ से पूछताछ में मिले अहम सुराग JPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 की प्रारंभिक परीक्षा में कथित धांधली को लेकर गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ से पूछताछ में सीआईडी को एक गिरोह की जानकारी मिली है। जांच एजेंसी अब पूछताछ में मिले इनपुट का सत्यापन कर रही है। हालांकि, सुमन के पास से OMR शीट की कार्बन कॉपी बरामद नहीं हुई थी। पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते से आज फिर होगी पूछताछ JPSC गड़बड़ी मामले में आयोग के पूर्व चेयरमैन एल खियांग्ते को सीआईडी ने दोबारा पूछताछ के लिए बुलाया है। उन्हें तीन अगस्त को सीआईडी मुख्यालय पहुंचने का नोटिस दिया गया है। इसके अलावा परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता, TDPL निदेशक रामबीर सिंह और गिरफ्तार डीएसओ मनोज तिवारी उर्फ अभय तिवारी से भी दोबारा पूछताछ की जाएगी। सीआईडी कोर्ट में आवेदन देकर इन आरोपियों की फिर से रिमांड मांगने की तैयारी कर रही है। जांच एजेंसी का फोकस परीक्षा प्रक्रिया में शामिल लोगों, OMR शीट की सुरक्षा और कथित गिरोह के नेटवर्क का पता लगाने पर है।
रांची। 14वीं झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित धांधली और OMR शीट हेराफेरी मामले की जांच कर रही सीआईडी ने सोमवार को बड़ी कार्रवाई की। जांच एजेंसी की अलग-अलग टीमों ने राज्यभर में एक साथ 20 से ज्यादा ठिकानों पर छापेमारी की। सीआईडी की टीमों ने रांची, बोकारो, पलामू, हजारीबाग समेत कई जिलों में संदिग्धों, बिचौलियों और कोचिंग संचालकों से जुड़े ठिकानों पर दबिश दी। जांच एजेंसी को आशंका है कि इन छापों के दौरान परीक्षा में गड़बड़ी, पैसे के लेन-देन और OMR सेटिंग से जुड़े अहम सुराग मिल सकते हैं। पलामू में भी CID की रेड पलामू में सीआईडी और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने कई जगहों पर छापेमारी की। टीम ने मेदिनीनगर के बीएन कॉलेज हमीदगंज इलाके में संतोष कुमार सिंह के घर और नौडीहा बाजार में भी दबिश दी। इसके अलावा मेदिनीनगर के पांकी रोड बारालोटा स्थित रविशंकर कुमार के आवास पर भी छापेमारी की गई। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम ने कुछ दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और अन्य महत्वपूर्ण सामग्री जब्त की है। JPSC मुख्यालय से भी जब्त हुए थे दस्तावेज JPSC परीक्षा में अनियमितताओं की शिकायतों के बाद सीआईडी लगातार जांच कर रही है। इससे पहले जांच एजेंसी ने रांची स्थित JPSC मुख्यालय में छापेमारी कर कई दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जब्त किए थे। मामले में परीक्षा प्रक्रिया और आउटसोर्सिंग एजेंसी से जुड़े कई लोगों की गिरफ्तारी भी हो चुकी है। वहीं, JPSC के पूर्व चेयरमैन और पूर्व मुख्य सचिव एल. खियांग्ते से भी सीआईडी पूछताछ कर रही है। OMR हेराफेरी समेत कई बिंदुओं पर जांच सीआईडी 14वीं JPSC परीक्षा में OMR शीट से कथित छेड़छाड़, अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाने और परीक्षा प्रक्रिया में अनियमितताओं की जांच कर रही है। जांच एजेंसी अब संदिग्धों के नेटवर्क, पैसे के लेन-देन और परीक्षा से जुड़े सभी कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना जताई जा रही है।
रांची। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसकी पत्नी रिया सिन्हा एक बार फिर सुर्खियों में है। रिया फिलहाल चाईबासा जेल में बंद है। पुलिस का आरोप है कि वह केवल गैंगस्टर की पत्नी नहीं, बल्कि संगठित अपराध नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाती थी और सुजीत सिन्हा तथा धनबाद के गैंगस्टर प्रिंस खान गिरोह के बीच संपर्क कड़ी के रूप में काम करती थी। एक दर्जन से अधिक मामलों में आरोपी पुलिस के अनुसार, रिया सिन्हा के खिलाफ हथियार तस्करी, आपराधिक साजिश, रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े करीब एक दर्जन मामले दर्ज हैं। वहीं, सुजीत सिन्हा पर हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध सहित 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। प्रिंस खान गिरोह से कथित संबंध रांची पुलिस की वर्ष 2025 की जांच में दावा किया गया था कि सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान गिरोह आपस में मिलकर काम कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, दोनों गिरोहों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान, हथियारों की व्यवस्था और आपराधिक गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी रिया सिन्हा निभाती थी। इसी मामले में उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। जेल से चलता था नेटवर्क, रिया पर संचालन का आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार, जब सुजीत सिन्हा जेल में बंद था और प्रिंस खान विदेश से अपने गिरोह का संचालन कर रहा था, तब बाहरी नेटवर्क की जिम्मेदारी रिया सिन्हा संभाल रही थी। पुलिस का आरोप है कि रंगदारी वसूली, हथियारों की आपूर्ति और गिरोह के समन्वय में उसकी अहम भूमिका थी। गंभीर धाराओं में दर्ज है मामला इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई थीं और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच की गई थी। नोट: पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाते हैं। सुजीत सिन्हा की मौत के बाद फिर चर्चा में रिया सिन्हा, संगठित अपराध के आरोपों में जेल में बंद रांची। झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने के बाद उसकी पत्नी रिया सिन्हा एक बार फिर सुर्खियों में है। रिया फिलहाल चाईबासा जेल में बंद है। पुलिस का आरोप है कि वह केवल गैंगस्टर की पत्नी नहीं, बल्कि संगठित अपराध नेटवर्क में सक्रिय भूमिका निभाती थी और सुजीत सिन्हा तथा धनबाद के गैंगस्टर प्रिंस खान गिरोह के बीच संपर्क कड़ी के रूप में काम करती थी। एक दर्जन से अधिक मामलों में आरोपी पुलिस के अनुसार, रिया सिन्हा के खिलाफ हथियार तस्करी, आपराधिक साजिश, रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े करीब एक दर्जन मामले दर्ज हैं। वहीं, सुजीत सिन्हा पर हत्या, रंगदारी, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध सहित 60 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज थे। प्रिंस खान गिरोह से कथित संबंध रांची पुलिस की वर्ष 2025 की जांच में दावा किया गया था कि सुजीत सिन्हा और प्रिंस खान गिरोह आपस में मिलकर काम कर रहे थे। पुलिस के मुताबिक, दोनों गिरोहों के बीच सूचनाओं का आदान-प्रदान, हथियारों की व्यवस्था और आपराधिक गतिविधियों के समन्वय की जिम्मेदारी रिया सिन्हा निभाती थी। इसी मामले में उसे गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। जेल से चलता था नेटवर्क, रिया पर संचालन का आरोप जांच एजेंसियों के अनुसार, जब सुजीत सिन्हा जेल में बंद था और प्रिंस खान विदेश से अपने गिरोह का संचालन कर रहा था, तब बाहरी नेटवर्क की जिम्मेदारी रिया सिन्हा संभाल रही थी। पुलिस का आरोप है कि रंगदारी वसूली, हथियारों की आपूर्ति और गिरोह के समन्वय में उसकी अहम भूमिका थी। गंभीर धाराओं में दर्ज है मामला इस मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), आर्म्स एक्ट और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई थीं और पूरे नेटवर्क की भूमिका की जांच की गई थी। नोट: पुलिस द्वारा लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं। अदालत में दोष सिद्ध होने तक सभी आरोपी कानून की नजर में निर्दोष माने जाते हैं।