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Sonia-Mamata Meet Draws Attention

सोनिया गांधी से गले मिलते ही भावुक हुईं ममता बनर्जी, INDIA बैठक की तस्वीरों ने खींचा ध्यान

Deepshikha जून 10, 2026 0
Sonia Gandhi and Mamata Banerjee share a warm interaction during INDIA alliance coordination meeting in Delhi.
Sonia Gandhi Mamata Banerjee Meeting

 

नई दिल्ली: INDIA गठबंधन की समन्वय समिति की बैठक के दौरान सोमवार को एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी और कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी की मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं के बीच गर्मजोशी देखने को मिली। इस दौरान ममता बनर्जी भावुक भी नजर आईं।

दिल्ली में विपक्षी नेताओं की मुलाकात बनी चर्चा का विषय

INDIA गठबंधन की बैठक में शामिल होने पहुंचीं ममता बनर्जी का सोनिया गांधी ने स्वागत किया। दोनों नेताओं के बीच कुछ समय तक बातचीत हुई और मुलाकात की तस्वीरें तेजी से चर्चा में आ गईं। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी दलों के बीच बढ़ते संवाद का संकेत मान रहे हैं।

तीन दशक पुराने रिश्तों की फिर हुई चर्चा

कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के रिश्ते भारतीय राजनीति के सबसे दिलचस्प अध्यायों में से एक रहे हैं। 1998 में कांग्रेस से अलग होकर ममता बनर्जी ने तृणमूल कांग्रेस की स्थापना की थी। इसके बाद दोनों दलों के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा का दौर लगातार चलता रहा।

बंगाल की राजनीति में कई बार आमने-सामने आए दोनों दल

पश्चिम बंगाल में कांग्रेस और टीएमसी कई चुनावों में प्रतिद्वंद्वी रही हैं। राज्य की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस के उभार के साथ कांग्रेस का प्रभाव सीमित होता गया। इसके बावजूद राष्ट्रीय स्तर पर दोनों दल कई मौकों पर एक साथ भी नजर आए हैं।

2024 के चुनाव के बाद बढ़ी थी राजनीतिक दूरी

लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों के बीच मतभेद खुलकर सामने आए थे। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया था, जिसके बाद कांग्रेस और टीएमसी के रिश्तों में तनाव की चर्चा तेज हो गई थी।

INDIA गठबंधन को मजबूत करने पर हुई बातचीत

सूत्रों के अनुसार बैठक के दौरान विपक्षी एकजुटता और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर भी चर्चा हुई। विपक्षी दल आगामी चुनावों को देखते हुए साझा मुद्दों पर साथ आने की कोशिश कर रहे हैं।

10 जनपथ पर फिर हुई अहम मुलाकात

बैठक के अगले दिन ममता बनर्जी ने सोनिया गांधी से उनके आवास 10 जनपथ पर भी मुलाकात की। दोनों नेताओं के बीच हुई इस बातचीत को विपक्षी राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

टीएमसी की चुनौतियों के बीच बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस को संगठनात्मक और राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा है। ऐसे में ममता बनर्जी की विपक्षी नेताओं के साथ लगातार बैठकें राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही हैं।

विपक्षी राजनीति में नए संकेत दे रही है यह मुलाकात

विश्लेषकों का मानना है कि सोनिया गांधी और ममता बनर्जी की यह मुलाकात केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि विपक्षी दलों के बीच बेहतर समन्वय और संवाद की संभावनाओं को भी दर्शाती है। आने वाले समय में इसका असर राष्ट्रीय राजनीति में देखने को मिल सकता है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Murshidabad Train Accident
मुर्शिदाबाद ट्रेन हादसे पर सख्ती, गेटमैन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की तैयारी; जांच तेज

कोलकाता/मुर्शिदाबाद, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुए दर्दनाक ट्रेन हादसे के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। हादसे में कई लोगों की मौत के बाद अब रेलवे और राज्य प्रशासन ने जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। प्रारंभिक जांच में रेलवे गेट पर तैनात गेटमैन की भूमिका की जांच की जा रही है।   रेलवे क्रॉसिंग पर लापरवाही का आरोप   जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हादसे के समय रेलवे क्रॉसिंग पर सुरक्षा नियमों का पालन किया गया था या नहीं। आरोप है कि अगर समय रहते सावधानी बरती जाती तो इस दुर्घटना को टाला जा सकता था।   गेटमैन की भूमिका की जांच जारी   रेलवे अधिकारियों ने घटना के बाद गेटमैन से जुड़े रिकॉर्ड, ड्यूटी समय और उस दौरान की गतिविधियों की जांच शुरू कर दी है। जांच में दोषी पाए जाने पर गेटमैन के खिलाफ कड़ी विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।   मुख्यमंत्री ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश   पश्चिम बंगाल सरकार ने हादसे पर चिंता जताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाने की बात कही है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि लोगों की जान से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।   मृतकों के परिवारों को मदद का ऐलान   हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिवारों के लिए राहत और सहायता की प्रक्रिया शुरू की गई है। प्रशासन की ओर से घायलों के इलाज और प्रभावित परिवारों की मदद पर भी ध्यान दिया जा रहा है।   रेलवे सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल   इस हादसे के बाद रेलवे क्रॉसिंग और मानव रहित/कम सुरक्षित क्रॉसिंग की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे स्थानों पर आधुनिक सुरक्षा प्रणाली और बेहतर निगरानी की जरूरत है।

anjali kumari जुलाई 25, 2026 0
छोटे बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर रोक की मांग करते जोहो के सह-संस्थापक श्रीधर वेम्बू

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महाराष्ट्र TET पेपर लीक मामले का मुख्य आरोपी बिहार से गिरफ्तार, भिवंडी पुलिस को मिली बड़ी सफलता

West Bengal fake certificates
फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र मामले में बंगाल सरकार का बड़ा एक्शन, राज्यभर में जांच अभियान शुरू

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने फर्जी जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के मामलों पर सख्ती शुरू कर दी है। राज्यभर में ऐसे प्रमाण पत्रों की जांच के लिए विशेष अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ लेने, पहचान संबंधी धोखाधड़ी और रिकॉर्ड में गड़बड़ी को रोकना है।   सभी जिलों में रिकॉर्ड की होगी जांच   सरकार ने जिला प्रशासन और स्थानीय निकायों को निर्देश दिए हैं कि पिछले कुछ वर्षों में जारी किए गए जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्रों की जांच की जाए। खासकर उन प्रमाण पत्रों की जांच पर जोर दिया जा रहा है जिनमें दस्तावेजों या सत्यापन प्रक्रिया को लेकर संदेह है।   फर्जी प्रमाण पत्र बनाने वाले नेटवर्क पर नजर   प्रशासन को आशंका है कि कुछ जगहों पर दलालों और फर्जी एजेंटों के माध्यम से गलत जानकारी देकर प्रमाण पत्र तैयार किए जा रहे हैं। जांच एजेंसियां ऐसे लोगों की पहचान करने में जुटी हैं जो इस तरह के अवैध काम में शामिल हो सकते हैं।   नगर निकायों को दिए गए सख्त निर्देश   राज्य सरकार ने नगर निगम, नगर पालिका और पंचायत स्तर के अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया में पूरी सावधानी बरती जाए। ऑनलाइन रिकॉर्ड और दस्तावेजों का मिलान कर संदिग्ध मामलों को अलग किया जाएगा।   सरकारी योजनाओं और पहचान सुरक्षा से जुड़ा मामला   फर्जी जन्म प्रमाण पत्र का इस्तेमाल कई बार सरकारी योजनाओं, स्कूल दाखिले, नौकरी और पहचान संबंधी दस्तावेजों में किया जा सकता है। वहीं फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र के जरिए संपत्ति और अन्य मामलों में भी धोखाधड़ी की आशंका रहती है।   दोषियों पर होगी कार्रवाई   सरकार ने साफ किया है कि जांच में अगर कोई व्यक्ति, अधिकारी या एजेंट दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही प्रमाण पत्र जारी करने वाली व्यवस्था को और मजबूत करने की तैयारी की जा रही है। 

anjali kumari जुलाई 25, 2026 0
कोलकाता में NGT ईस्टर्न जोन बेंच को फिर से सक्रिय करने के लिए प्रधानमंत्री से अपील करते पर्यावरण कार्यकर्ता सुभाष दत्ता

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देश में 3 समर्पित केमिकल पार्क स्थापित करने के लिए ₹3,030 करोड़ की भव्य रसायन योजना को केंद्र सरकार की मंजूरी

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सोनम वांगचुक ने अस्पताल से जारी किया वीडियो, बोले- “गिरफ्तार करना है तो कर लो, मैं जा रहा हूं”

RRB Group D exam city slip released
RRB ग्रुप D परीक्षा की सिटी स्लिप जारी, अभ्यर्थी अब जान सकेंगे कहां पड़ेगा परीक्षा केंद्र

नई दिल्ली, एजेंसियां। रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB) ने ग्रुप D परीक्षा 2026 के लिए एग्जाम सिटी इंटिमेशन स्लिप जारी कर दी है। अब उम्मीदवार यह पता कर सकते हैं कि उनकी परीक्षा किस शहर में आयोजित होगी। सिटी स्लिप जारी होने से अभ्यर्थियों को परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की योजना बनाने में सुविधा मिलेगी।   सिटी स्लिप में मिलेगी परीक्षा शहर की जानकारी   RRB ग्रुप D की सिटी इंटिमेशन स्लिप में उम्मीदवार को परीक्षा शहर, परीक्षा तिथि और शिफ्ट से जुड़ी जानकारी दी जाती है। हालांकि, यह एडमिट कार्ड नहीं होता है। परीक्षा केंद्र का पूरा पता और अन्य विवरण एडमिट कार्ड जारी होने के बाद मिलेगा।   कैसे डाउनलोड करें RRB Group D City Slip   उम्मीदवार अपनी सिटी स्लिप देखने के लिए: RRB की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं। Exam City Intimation Slip लिंक पर क्लिक करें। अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और जन्मतिथि दर्ज करें। लॉगिन करने के बाद परीक्षा शहर की जानकारी स्क्रीन पर दिखाई देगी। एडमिट कार्ड बाद में होगा जारी   रेलवे भर्ती बोर्ड के नियमों के अनुसार सिटी स्लिप केवल परीक्षा शहर की जानकारी देने के लिए जारी की जाती है। एडमिट कार्ड परीक्षा तिथि से कुछ दिन पहले जारी किया जाएगा, जिसमें परीक्षा केंद्र का पूरा पता, रिपोर्टिंग टाइम और जरूरी निर्देश होंगे।   लाखों उम्मीदवार देंगे परीक्षा   RRB ग्रुप D भर्ती रेलवे की सबसे बड़ी भर्तियों में शामिल है। इस परीक्षा के जरिए लेवल-1 पदों पर उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। परीक्षा में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे समय पर सिटी स्लिप और बाद में एडमिट कार्ड डाउनलोड कर लें।

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