TMC

Mamata Banerjee arrives at Calcutta High Court in lawyer’s robe for post-poll violence case hearing
वकील के कोट में कलकत्ता हाई कोर्ट पहुंचीं ममता बनर्जी, चुनाव बाद हिंसा मामले में रखेंगी पक्ष

चुनाव बाद हिंसा से जुड़ी याचिका पर खुद करेंगी पैरवी पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee गुरुवार को वकील की पोशाक पहनकर Calcutta High Court पहुंचीं। बताया जा रहा है कि वह विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा से जुड़े एक जनहित याचिका (PIL) मामले में खुद अदालत के सामने दलीलें पेश करेंगी। सूत्रों के मुताबिक यह मामला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पाल की बेंच में सूचीबद्ध है, जहां ममता बनर्जी कार्यवाही और जांच से जुड़े कई पहलुओं पर सवाल उठा सकती हैं। अदालत परिसर में उन्हें वकीलों के पारंपरिक काले चोगे में देखा गया, जिसके बाद यह मामला राजनीतिक और कानूनी हलकों में चर्चा का विषय बन गया। पहले भी सुप्रीम कोर्ट में पेश कर चुकी हैं दलील यह पहला मौका नहीं है जब ममता बनर्जी अदालत में वकील की भूमिका में नजर आई हों। इससे पहले वह एसआईआर मुद्दे को लेकर Supreme Court of India में भी बतौर अधिवक्ता अपना पक्ष रख चुकी हैं। जानकारी के अनुसार, यह याचिका टीएमसी नेता और वरिष्ठ वकील Kalyan Banerjee के बेटे शीर्षान्या बंदोपाध्याय की ओर से दाखिल की गई थी। ममता बनर्जी ने वर्ष 1982 में जोगेश चंद्र कॉलेज ऑफ लॉ से कानून की पढ़ाई पूरी की थी। बंगाल चुनाव के बाद बढ़ा राजनीतिक तनाव गौरतलब है कि हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में टीएमसी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा। चुनाव में बीजेपी ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि टीएमसी 80 सीटों तक सिमट गई। इसके बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया। ममता बनर्जी लगातार आरोप लगाती रही हैं कि बीजेपी ने चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी कर करीब 100 सीटें “छीन” लीं। वहीं, बीजेपी नेता Suvendu Adhikari ने 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी।  

surbhi मई 14, 2026 0
Mamata Banerjee campaigns in West Bengal amid tough electoral battle to retain power
ममता बनर्जी के लिए सत्ता की राह सबसे कठिन? ‘नबान्न’ बचाने की जंग में 5 बड़े फैक्टर बने चुनौती

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले राज्य की राजनीति अपने चरम पर है। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में वापसी कर पाएंगी या इस बार बदलाव की हवा ‘नबान्न’ तक पहुंच जाएगी। करीब 15 वर्षों से सत्ता में काबिज तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने इस बार बहुस्तरीय चुनौतियां खड़ी हैं, जो चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकती हैं। 1. भ्रष्टाचार के आरोप: छवि पर गहरा असर इस चुनाव में टीएमसी सरकार के खिलाफ सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्टाचार रहा है। शिक्षक भर्ती घोटाला राशन घोटाला कोयला तस्करी मामला इन मामलों में पार्टी के कई बड़े नेताओं की गिरफ्तारी और प्रवर्तन निदेशालय (ED) व केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की लगातार कार्रवाई ने सरकार की साख को चोट पहुंचाई है। विपक्ष ने इसे “सिस्टमेटिक करप्शन” बताकर जनता के बीच मजबूत नैरेटिव बनाया है। ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में यह मुद्दा चर्चा का केंद्र बना हुआ है। 2. महिला सुरक्षा और संदेशखाली जैसे विवाद महिला वोट बैंक टीएमसी की सबसे बड़ी ताकत रहा है, लेकिन हालिया घटनाओं ने इस आधार को कमजोर करने की कोशिश की है। संदेशखाली विवाद आरजी कर मेडिकल कॉलेज से जुड़े आरोप इन घटनाओं ने कानून-व्यवस्था और महिला सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने इसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनाकर टीएमसी पर तीखा हमला बोला है। 3. एंटी-इन्कम्बेंसी: 15 साल की सत्ता का असर लगातार तीन कार्यकाल तक सत्ता में रहने के बाद एंटी-इन्कम्बेंसी का असर साफ दिखाई दे रहा है। जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की दबंगई के आरोप ‘सिंडिकेट राज’ की शिकायतें स्थानीय प्रशासन पर भ्रष्टाचार के आरोप हालांकि, राज्य सरकार की योजनाएं–जैसे महिला और गरीब वर्ग के लिए आर्थिक सहायता–अब भी लोकप्रिय हैं, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर असंतोष चुनावी समीकरण बदल सकता है। 4. भाजपा का उभार और बदला राजनीतिक संतुलन पश्चिम बंगाल की राजनीति में भारतीय जनता पार्टी (BJP) का तेजी से उभार टीएमसी के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। 2011 में मामूली मौजूदगी 2021 में 77 सीटों के साथ मुख्य विपक्ष बूथ स्तर तक मजबूत संगठन उत्तर बंगाल, जंगलमहल और सीमावर्ती क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत हुई है। धार्मिक ध्रुवीकरण और हिंदुत्व की राजनीति ने पारंपरिक वोट बैंक को प्रभावित किया है, जिससे मुकाबला और कड़ा हो गया है। 5. युवाओं की नाराजगी और रोजगार संकट भर्ती घोटालों और सीमित रोजगार अवसरों ने युवाओं में निराशा पैदा की है। सरकारी नौकरियों में पारदर्शिता पर सवाल निजी क्षेत्र में सीमित अवसर औद्योगिक विकास की धीमी रफ्तार हालांकि ‘लक्ष्मी भंडार’ जैसी योजनाएं गरीब और महिला मतदाताओं को जोड़ने में सफल रही हैं, लेकिन शिक्षित युवा वर्ग बदलाव की तलाश में नजर आ रहा है। ममता बनर्जी का ‘फाइटर’ फैक्टर इन तमाम चुनौतियों के बावजूद ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत उनकी व्यक्तिगत छवि और जमीनी पकड़ है। संघर्षशील नेता की पहचान सीधे जनता से संवाद कल्याणकारी योजनाओं का व्यापक असर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ममता बनर्जी आखिरी समय में चुनावी बाजी पलटने की क्षमता रखती हैं। 4 मई का फैसला तय करेगा भविष्य अब नजरें 4 मई पर टिकी हैं, जब चुनावी नतीजे सामने आएंगे। क्या ‘दीदी’ एक बार फिर सत्ता बचा लेंगी? या बंगाल में सत्ता परिवर्तन का नया अध्याय शुरू होगा?

surbhi मई 2, 2026 0
Voters queue at West Bengal re-poll booth amid EVM glitch and tight security
पश्चिम बंगाल में 15 बूथों पर दोबारा मतदान जारी: EVM पर सवाल, वोटर्स को करना पड़ा इंतजार

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के तहत शनिवार को राज्य के 15 बूथों पर पुनर्मतदान (री-पोल) कराया जा रहा है। इनमें डायमंड हार्बर के 4 और मगरहाट पश्चिम के 11 बूथ शामिल हैं। मतदान सुबह 7 बजे शुरू हुआ और शाम 6 बजे तक जारी रहेगा। EVM खराबी का आरोप, वोटर्स परेशान डायमंड हार्बर के रॉयनगर प्राइमरी स्कूल स्थित बूथ नंबर 243 पर मतदाताओं ने EVM में खराबी की शिकायत की। एक वोटर ने कहा कि मशीन ठीक से काम नहीं कर रही लोगों को आधे घंटे से ज्यादा समय तक लाइन में इंतजार करना पड़ा तकनीकी टीम को मौके पर बुलाया गया हालांकि प्रशासन की ओर से स्थिति को जल्द सामान्य करने का दावा किया गया है। क्यों कराना पड़ा री-पोल? दरअसल, 29 अप्रैल को दूसरे चरण की वोटिंग के दौरान इन बूथों पर: EVM से छेड़छाड़ के आरोप राजनीतिक दलों के बीच झड़प मतदान प्रक्रिया में बाधा जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इन घटनाओं को गंभीरता से लेते हुए भारतीय निर्वाचन आयोग ने दोबारा मतदान कराने का फैसला लिया। दक्षिण 24 परगना के सभी बूथ प्रभावित ये सभी 15 बूथ दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित हैं, जिसे चुनाव के लिहाज से संवेदनशील इलाका माना जाता है। यहां सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और केंद्रीय बलों की तैनाती भी की गई है, ताकि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। रिकॉर्ड मतदान ने बढ़ाई सियासी हलचल इस बार पश्चिम बंगाल में रिकॉर्ड स्तर पर मतदान हुआ है: पहले चरण (23 अप्रैल): 93.19% वोटिंग दूसरे चरण (29 अप्रैल): 92.48% वोटिंग कुल 294 सीटों पर औसत मतदान: 92.84% इतने बड़े मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक दलों के बीच मुकाबले को और दिलचस्प बना दिया है। TMC का BJP पर आरोप री-पोल के बीच शशि पांजा ने बीजेपी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि BJP ने जानबूझकर माहौल बिगाड़ने की कोशिश की ज्यादा जगहों पर री-पोल कराकर बंगाल की छवि खराब करने की साजिश रची गई TMC ने उकसावे के बावजूद संयम बनाए रखा पांजा ने यह भी दावा किया कि बीजेपी चुनावी तौर पर कमजोर स्थिति में है, इसलिए इस तरह की रणनीति अपना रही है। 4 मई को आएंगे नतीजे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। इससे पहले री-पोल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सियासी माहौल काफी गर्म है।  

surbhi मई 2, 2026 0
Supreme Court amid legal battle over West Bengal election counting
WB Polls 2026: हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची TMC, क्या रुक सकती है मतगणना?

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से ठीक पहले सियासी घमासान अब अदालत तक पहुंच गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देते हुए भारत का सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस मामले पर शनिवार को विशेष सुनवाई होनी है, जिससे 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले सस्पेंस और बढ़ गया है। क्या है पूरा विवाद? विवाद की जड़ चुनाव प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े हाईकोर्ट के निर्देश हैं। अदालत ने हाल ही में मतगणना केंद्रों की सुरक्षा, केंद्रीय कर्मचारियों की तैनाती और कुछ याचिकाओं (जैसे पुनर्मतदान) पर महत्वपूर्ण टिप्पणियां की थीं। इससे पहले भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने निर्देश दिया था कि हर काउंटिंग सेंटर पर कम से कम एक केंद्रीय कर्मचारी की मौजूदगी सुनिश्चित की जाएगी। TMC ने इस फैसले का विरोध किया और इसे पक्षपातपूर्ण बताते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। TMC की दलील क्या है? TMC का कहना है कि चुनाव के अंतिम चरण में इस तरह के निर्देशों से मतगणना प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पार्टी का आरोप है कि इससे निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो सकते हैं न्यायिक हस्तक्षेप से प्रशासनिक प्रक्रिया जटिल हो सकती है इससे चुनाव परिणामों की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है इन्हीं तर्कों के आधार पर पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई क्यों अहम? शनिवार को होने वाली सुनवाई कई मायनों में बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अगर सुप्रीम कोर्ट हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाता है, तो TMC को बड़ी राहत मिलेगी अगर रोक नहीं लगती, तो हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत ही मतगणना होगी यह मामला चुनाव के दौरान अदालत की भूमिका को लेकर एक नई नजीर भी पेश कर सकता है क्या रुक सकती है मतगणना? फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार मतगणना (4 मई) पर रोक लगने की संभावना बेहद कम मानी जा रही है। आमतौर पर अदालतें चुनाव प्रक्रिया में अंतिम चरण में दखल देने से बचती हैं, जब तक कि कोई गंभीर संवैधानिक या कानूनी समस्या न हो। इसलिए ज्यादा संभावना यही है कि: मतगणना तय समय पर होगी सुप्रीम कोर्ट केवल प्रक्रिया या निर्देशों में बदलाव कर सकता है विपक्ष का क्या कहना है? अन्य राजनीतिक दल, खासकर बीजेपी, TMC के इस कदम को हार के डर से उठाया गया कदम बता रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव परिणाम से पहले कानूनी विवाद खड़ा करना राजनीतिक रणनीति का हिस्सा हो सकता है। सुरक्षा और हिंसा पर पहले से सख्ती गौरतलब है कि हाईकोर्ट ने पहले ही चुनाव बाद हिंसा को लेकर कड़े निर्देश दिए हैं। राज्य में सुरक्षा के लिए केंद्रीय बलों की भारी तैनाती और निगरानी व्यवस्था लागू की गई है, ताकि मतगणना शांतिपूर्ण तरीके से हो सके।  

surbhi मई 2, 2026 0
BJP leader reacting to Mamata Banerjee's EVM allegations ahead of Bengal vote counting
ममता बनर्जी के आरोपों पर बीजेपी का पलटवार, बोली– TMC पहले से बना रही हार के बहाने

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी घमासान तेज हो गया है। तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के ईवीएम में कथित गड़बड़ी के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखा जवाब दिया है। बीजेपी का पलटवार बीजेपी प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने कहा कि एग्जिट पोल के बाद साफ दिख रहा है कि बंगाल में पहली बार बीजेपी सरकार बन सकती है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी संभावित हार से घबराकर पहले से ही बहाने बना रही है और ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है। वहीं, बीजेपी नेता राम कृपाल यादव ने भी ईवीएम छेड़छाड़ के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि राज्य की जनता ने टीएमसी को नकार दिया है और चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष हुए हैं। उन्होंने भारत निर्वाचन आयोग की तारीफ करते हुए कहा कि उसने पूरी ईमानदारी से चुनाव प्रक्रिया को अंजाम दिया है। ममता बनर्जी ने क्या कहा? इससे पहले ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित भवानीपुर स्ट्रॉन्ग रूम का दौरा किया था। वह करीब चार घंटे तक वहां रहीं और रात 12 बजे के बाद बाहर निकलीं। उन्होंने कहा कि मतगणना के दौरान किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। “जनता के वोट पूरी तरह सुरक्षित रहने चाहिए,” उन्होंने कहा। पारदर्शिता की मांग ममता बनर्जी ने सुझाव दिया कि मतगणना केंद्रों पर पारदर्शिता बढ़ाने के लिए मीडिया के लिए सीसीटीवी व्यवस्था की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि शुरुआत में केंद्रीय सुरक्षाबलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका, हालांकि बाद में उन्हें प्रवेश की अनुमति दे दी गई। 4 मई से पहले बढ़ा सियासी तनाव 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर टीएमसी चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठा रही है, वहीं बीजेपी इन आरोपों को बेबुनियाद बता रही है। अब सभी की नजरें नतीजों पर टिकी हैं, जो तय करेंगे कि पश्चिम बंगाल में सत्ता किसके हाथ में जाएगी।  

surbhi मई 1, 2026 0
Mamata Banerjee inspects strong room ahead of West Bengal election countin
“EVM से छेड़छाड़ हुई तो जान की बाजी लगा देंगे” – स्ट्रॉन्गरूम दौरे के बाद ममता बनर्जी की चेतावनी

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में मतगणना से पहले सियासी तनाव और बढ़ गया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दक्षिण कोलकाता के स्ट्रॉन्गरूम का दौरा करने के बाद EVM में कथित गड़बड़ी को लेकर कड़ी चेतावनी दी है। 3 घंटे तक किया निरीक्षण ममता बनर्जी ने सखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्गरूम का दौरा किया, जो भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र का वितरण केंद्र है। यहां EVM और मतपत्र सुरक्षित रखे जाते हैं। उन्होंने करीब 3 घंटे से ज्यादा समय तक अंदर रहकर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। “जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे” स्ट्रॉन्गरूम से बाहर निकलते ही ममता बनर्जी ने कहा, “अगर कोई EVM मशीन चुराने या मतगणना में छेड़छाड़ करने की कोशिश करता है, तो हम जान की बाजी लगाकर लड़ेंगे। मैं पूरी जिंदगी लड़ती रहूंगी।” उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज देखने के बाद उन्हें शक हुआ, जिसके चलते उन्होंने खुद मौके पर जाकर स्थिति का निरीक्षण किया। ‘हेरफेर’ के आरोप ममता बनर्जी ने दावा किया कि स्ट्रॉन्गरूम सुरक्षित है, लेकिन कुछ जगहों पर गड़बड़ी के संकेत मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस ने एक वायरल वीडियो का हवाला देते हुए आरोप लगाया है कि अधिकृत प्रतिनिधियों की मौजूदगी के बिना चुनाव सामग्री को खोला गया, जो नियमों का गंभीर उल्लंघन है। केंद्रीय बलों पर आरोप ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि शुरुआत में केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें अंदर जाने से रोका। हालांकि, उन्होंने उम्मीदवार के रूप में अपने अधिकारों का हवाला दिया, जिसके बाद उन्हें प्रवेश की अनुमति मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके पार्टी प्रतिनिधियों के साथ एकतरफा कार्रवाई की जा रही है और कुछ लोगों को गिरफ्तार भी किया गया है। बीजेपी और चुनाव आयोग पर निशाना तृणमूल कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी और भारत निर्वाचन आयोग पर मिलीभगत का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना जरूरी है और किसी भी तरह की अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। काउंटिंग से पहले बढ़ा विवाद 4 मई को होने वाली मतगणना से पहले यह मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बनता जा रहा है। एक ओर टीएमसी लगातार सवाल उठा रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी इन आरोपों को खारिज कर रही है। अब सबकी नजरें काउंटिंग डे पर टिकी हैं, जहां यह साफ होगा कि आरोपों और दावों के बीच जनता का फैसला किसके पक्ष में जाता है।  

surbhi मई 1, 2026 0
Mamata Banerjee and Firhad Hakim amid West Bengal election 2026 political buzz
कोलकाता में मेयर फिरहाद हकीम का दावा: 6 मई को शपथ लेंगी ममता बनर्जी, दुर्गापुर में ‘गुड़-बतासा’ और ‘पाचन’ वाली सियासत तेज

कोलकाता/दुर्गापुर : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले सियासी बयानबाजी चरम पर पहुंच गई है। एग्जिट पोल के बाद जहां भारतीय जनता पार्टी खेमे में उत्साह है, वहीं तृणमूल कांग्रेस के नेताओं ने भी आत्मविश्वास भरे दावे करने शुरू कर दिए हैं। 6 मई को शपथ का दावा कोलकाता के मेयर फिरहाद हकीम ने बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ममता बनर्जी 6 मई को चौथी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगी। कोलकाता नगर निगम के अधिवेशन के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस 202 से 225 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में वापसी करेगी। उन्होंने भाजपा के दावों को सिरे से खारिज किया। दुर्गापुर में ‘गुड़-बतासा’ और पहरा दूसरी ओर, दुर्गापुर में तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने स्ट्रॉन्ग रूम की निगरानी के लिए अनोखा तरीका अपनाया है। दुर्गापुर गवर्नमेंट कॉलेज के पास बनाए गए पहरा केंद्र में कार्यकर्ता दिन-रात डटे हुए हैं। गर्मी से बचने के लिए कार्यकर्ता ‘गुड़-बतासा’ खा रहे हैं और राहगीरों को भी बांट रहे हैं। साथ ही, ‘पाचन’ (डंडा) शब्द का इस्तेमाल कर विरोधियों को चेतावनी देने की बात भी सामने आई है, जिससे सियासी माहौल और गरमा गया है। EVM सुरक्षा को लेकर आशंका टीएमसी के स्थानीय युवा नेता अजय देबनाथ का कहना है कि उन्हें EVM से छेड़छाड़ की आशंका है। इसी वजह से कार्यकर्ता लगातार निगरानी कर रहे हैं और किसी भी स्थिति के लिए तैयार हैं। उन्होंने अणुव्रत मंडल के ‘मॉडल’ का हवाला देते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो ‘पाचन’ का इस्तेमाल भी किया जाएगा। भाजपा का तीखा पलटवार टीएमसी की इस सक्रियता पर भाजपा ने कड़ा हमला बोला है। भाजपा जिला प्रवक्ता सुमंत मंडल ने तंज कसते हुए कहा कि अणुव्रत मंडल खुद केंद्रीय एजेंसियों प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के मामलों में उलझे हुए हैं, लेकिन उनके समर्थक अब भी पुरानी भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर ‘पाचन’ की राजनीति करनी है तो बंगाल नहीं, कहीं और जाना चाहिए। भाजपा का दावा है कि 4 मई के बाद तृणमूल नेताओं को सत्ता से बाहर होना पड़ेगा। बढ़ता सियासी तापमान नतीजों से पहले ही पश्चिम बंगाल में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। एक ओर टीएमसी सत्ता में वापसी का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर भाजपा बदलाव की बात कर रही है। अब सभी की नजरें 4 मई को आने वाले नतीजों और उसके बाद की सियासी तस्वीर पर टिकी हैं।  

surbhi मई 1, 2026 0
Mamata Banerjee accuses BJP and Election Commission observers of poll rigging in West Bengal
ममता बनर्जी का BJP पर बड़ा हमला: चुनाव में “धांधली” और EC ऑब्जर्वर्स पर गंभीर आरोप

कोलकाता में गरमाया सियासी माहौल पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य में चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश की जा रही है और इसे “धांधली” के जरिए अंजाम दिया जा रहा है। ममता बनर्जी ने यहां तक कहा कि चुनाव आयोग द्वारा नियुक्त ऑब्जर्वर “आतंकियों जैसा व्यवहार” कर रहे हैं, जिससे राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। BJP पर “इलेक्शन रिगिंग” का आरोप कोलकाता में TMC पार्षद असीम बोस से मुलाकात के दौरान ममता बनर्जी ने दावा किया कि भाजपा चुनाव में गड़बड़ी कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बलों का इस्तेमाल डराने और दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है, जिससे मतदाता प्रभावित हो सकते हैं। केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्रीय सुरक्षा बल TMC नेताओं और कार्यकर्ताओं के घरों में जबरन प्रवेश कर रहे हैं और लोगों को डराने की कोशिश कर रहे हैं। उनके मुताबिक, इसी तरह की एक घटना देर रात TMC पार्षद असीम बोस के घर पर हुई, जिसके बाद वह उनसे मिलने पहुंचीं। चुनाव आयोग के ऑब्जर्वर्स पर विवादित बयान ममता बनर्जी ने Election Commission of India के ऑब्जर्वर्स पर भी गंभीर टिप्पणी करते हुए कहा कि उनका व्यवहार निष्पक्षता के विपरीत दिखाई दे रहा है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में नई बहस शुरू हो गई है। इस बयान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में तनाव और बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने ममता के आरोपों को चुनावी माहौल बिगाड़ने वाला बताया है, जबकि TMC ने अपने रुख का बचाव किया है। चुनाव के माहौल में ममता बनर्जी के इन आरोपों ने सियासी टकराव को और तेज कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि चुनाव आयोग और भाजपा इस बयान पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
IPS Ajay Pal Sharma faces Supreme Court petition over alleged bias during West Bengal election duty
बंगाल चुनाव विवाद: IPS अजय पाल शर्मा पर निष्पक्षता को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका

निष्पक्ष चुनाव पर उठे सवाल पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात आईपीएस अधिकारी अजय पाल शर्मा को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। उन पर निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के आरोप लगाते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने उन्हें पद से हटाने की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट में याचिका, चुनाव आयोग पर कार्रवाई का दबाव यह जनहित याचिका आदित्य दास नामक याचिकाकर्ता की ओर से दाखिल की गई है। इसमें चुनाव आयोग से अपील की गई है कि अजय पाल शर्मा को उनके पद से हटाया जाए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपनी भूमिका के अनुरूप निष्पक्षता नहीं बरती और मतदाताओं पर प्रभाव डालने या उन्हें डराने-धमकाने जैसा व्यवहार किया। वायरल वीडियो से शुरू हुआ विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत उस वायरल वीडियो से हुई, जिसमें अजय पाल शर्मा को फाल्टा क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के उम्मीदवार जहांगीर खान को कथित तौर पर चेतावनी देते हुए देखा गया। वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई और उनके आचरण पर सवाल उठने लगे। निष्पक्ष चुनाव को लेकर उठी मांग याचिका में दावा किया गया है कि पश्चिम बंगाल में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए यह जरूरी है कि ऐसे अधिकारियों को हटाया जाए, जिन पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं। हालांकि, इससे पहले कलकत्ता हाईकोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया था। फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका सुनवाई के लिए सूचीबद्ध नहीं हुई है। कौन हैं IPS अजय पाल शर्मा? अजय पाल शर्मा 2011 बैच के उत्तर प्रदेश कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। उन्हें कड़े और सख्त पुलिसिंग के लिए जाना जाता है और उनकी छवि अक्सर ‘एनकाउंटर स्पेशलिस्ट’ और ‘यूपी के सिंघम’ के रूप में देखी जाती है। वर्तमान में उन्हें पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में पुलिस ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया गया है। राजनीतिक बयानबाजी भी तेज इस मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों की नियुक्ति राजनीतिक प्रभाव से जुड़ी हो सकती है। वहीं टीएमसी की ओर से भी इस पूरे घटनाक्रम पर सवाल उठाए जा रहे हैं।  

surbhi अप्रैल 29, 2026 0
IPS Ajay Pal Sharma warns TMC candidate Jahangir Khan during voting in West Bengal Falta
"अगर बदमाशी की तो छोड़ेंगे नहीं", TMC प्रत्याशी को चुनाव पर्यवेक्षक की सख्त चेतावनी

फाल्टा में मतदान के बीच हाई वोल्टेज ड्रामा पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान फाल्टा सीट पर मंगलवार को उस समय राजनीतिक तापमान बढ़ गया, जब चुनाव ड्यूटी पर तैनात IPS अधिकारी अजय पाल शर्मा ने तृणमूल कांग्रेस प्रत्याशी जहांगीर खान को कड़ी चेतावनी दी। मतदाताओं को धमकाने की शिकायत मिलने के बाद शर्मा खुद मौके पर पहुंचे। अजय पाल शर्मा को यूपी के चर्चित "एनकाउंटर स्पेशलिस्ट" के तौर पर जाना जाता है। फिलहाल उन्हें पश्चिम बंगाल चुनाव में पुलिस ऑब्जर्वर की जिम्मेदारी सौंपी गई है। "शिकायत मिली तो सख्त कार्रवाई होगी" स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि जहांगीर खान और उनके समर्थक मतदाताओं पर दबाव बना रहे हैं। शिकायत मिलने पर शर्मा सीधे उनके आवास पहुंचे। जहांगीर खान उस समय घर पर मौजूद नहीं थे। इसके बाद उन्होंने परिजनों को स्पष्ट संदेश दिया। उन्होंने कहा, "जहांगीर को बता दीजिए, अगर किसी ने बदमाशी की या वोटरों को डराने-धमकाने की कोशिश की, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बाद में शिकायत का मौका नहीं मिलेगा।" सुरक्षा घेरे पर भी उठे सवाल निरीक्षण के दौरान अजय पाल शर्मा ने जहांगीर खान के आवास पर 14 पुलिसकर्मियों को तैनात पाया। जब उन्होंने स्थानीय एसपी से जानकारी मांगी, तो पता चला कि उम्मीदवार को Y श्रेणी सुरक्षा के तहत केवल 10 जवान मंजूर किए गए थे। अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती पर शर्मा ने तत्काल स्पष्टीकरण तलब किया। BJP ने सराहा, TMC ने उठाए सवाल इस कार्रवाई के बाद सियासी बयानबाजी तेज हो गई। बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने अजय पाल शर्मा की कार्रवाई की प्रशंसा करते हुए कहा कि चुनाव में डर और दबाव की राजनीति अब नहीं चलेगी। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने शर्मा की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। पार्टी ने आरोप लगाया कि उनकी नियुक्ति राजनीतिक उद्देश्य से की गई है। अखिलेश यादव भी कूदे मैदान में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी इस विवाद पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी अपने "परीक्षित एजेंटों" को चुनाव पर्यवेक्षक बनाकर बंगाल भेज रही है। उन्होंने दावा किया कि ऐसे प्रयास सफल नहीं होंगे। चुनाव आयोग की नज़र इस घटना ने पश्चिम बंगाल चुनाव में निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर बहस छेड़ दी है। चुनाव आयोग ने साफ किया है कि मतदाताओं को प्रभावित करने या डराने की किसी भी कोशिश पर सख्त कार्रवाई होगी। राज्य में मतदान के बीच यह मामला अब राजनीतिक बहस का केंद्र बन गया है।  

surbhi अप्रैल 28, 2026 0
Massive voter turnout in West Bengal election sparks battle between Mamata Banerjee and Narendra Modi
बंगाल में बंपर वोटिंग: क्या ममता की वापसी या मोदी का मिशन पूरा?

West Bengal विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान ने सियासी पारा चरम पर पहुंचा दिया है। करीब 92 फीसदी मतदान ने यह साफ कर दिया है कि बंगाल की जनता इस बार चुनाव को बेहद गंभीरता से ले रही है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है–क्या यह वोटिंग सत्ता परिवर्तन का संकेत है या फिर Mamata Banerjee एक बार फिर वापसी करेंगी? या Narendra Modi का बंगाल फतह का सपना पूरा होगा? रिकॉर्ड वोटिंग ने बढ़ाई धड़कनें पहले चरण में 152 सीटों पर लगभग 91.78 फीसदी मतदान हुआ। पिछले चुनाव की तुलना में यह करीब 9 फीसदी अधिक है। इतनी बड़ी बढ़ोतरी ने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया है। टीएमसी और बीजेपी दोनों इसे अपने पक्ष में बता रही हैं। लेकिन चुनावी राजनीति में एक पुरानी कहावत है–"ज्यादा वोटिंग का मतलब हमेशा सत्ता परिवर्तन नहीं होता।" क्या SIR बना गेमचेंजर? इस बार स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत लाखों नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए। मृतक, पलायन कर चुके और डुप्लीकेट वोटरों के नाम हटने से कुल मतदाताओं की संख्या कम हुई। ऐसे में मतदान प्रतिशत स्वाभाविक रूप से ऊपर गया। यानी सिर्फ प्रतिशत देखकर नतीजों का अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। इतिहास क्या कहता है? 2011 में भारी मतदान के बीच ममता बनर्जी ने लेफ्ट के 34 साल के शासन का अंत किया था। लेकिन 2016 और 2021 में मतदान कम होने के बावजूद टीएमसी सत्ता में लौटी। दूसरी ओर, 1984 में रिकॉर्ड मतदान के बावजूद कांग्रेस ऐतिहासिक जीत दर्ज करने में सफल रही थी। वहीं 1989 में अपेक्षाकृत कम मतदान के बावजूद सत्ता बदल गई। मतलब साफ है–वोटिंग प्रतिशत अकेला पैमाना नहीं है। ममता के लिए क्या है चुनौती? ममता बनर्जी की सरकार को 15 साल पूरे हो चुके हैं। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर विपक्ष लगातार हमलावर है। हालांकि, लक्ष्मी भंडार, मुफ्त राशन और अन्य कल्याणकारी योजनाएं अभी भी टीएमसी की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई हैं। खासकर महिला वोटरों में ममता की पकड़ मजबूत मानी जा रही है। बीजेपी की उम्मीदें क्यों बढ़ीं? बीजेपी पहली बार बंगाल में पूर्ण बहुमत का सपना देख रही है। पार्टी हिंदुत्व, भ्रष्टाचार विरोध, NRC, घुसपैठ और केंद्र की योजनाओं को लेकर आक्रामक अभियान चला रही है। अगर बीजेपी को जीतना है, तो उसे हिंदू वोटों का भारी ध्रुवीकरण करना होगा। साथ ही, उसे ग्रामीण क्षेत्रों में भी मजबूत प्रदर्शन करना होगा। मुस्लिम वोट निर्णायक बंगाल में करीब 27 फीसदी मुस्लिम आबादी है। यदि यह वोट एकजुट होकर टीएमसी के पक्ष में जाता है, तो बीजेपी की राह कठिन हो सकती है। लेकिन अगर Asaduddin Owaisi या अन्य क्षेत्रीय खिलाड़ी मुस्लिम वोटों में सेंध लगाते हैं, तो मुकाबला बेहद दिलचस्प हो जाएगा। ज्यादा वोटिंग का असली मतलब इसका अर्थ सिर्फ इतना है कि मतदाता उत्साहित है। वह बदलाव भी चाहता हो सकता है, और मौजूदा सरकार को बचाने के लिए भी निकल सकता है। वोटिंग का उछाल लोकतंत्र के लिए शानदार संकेत है, लेकिन नतीजों की गारंटी नहीं। आखिर बाजी किसके हाथ? फिलहाल कहना जल्दबाजी होगी। ममता बनर्जी के पास मजबूत संगठन, महिला वोट बैंक और कल्याणकारी योजनाओं का सहारा है। वहीं बीजेपी के पास मोदी फैक्टर, आक्रामक प्रचार और सत्ता विरोधी माहौल का भरोसा। 4 मई को ही तय होगा कि बंगाल में फिर "दीदी" का जादू चलेगा या "मोदी मैजिक" इतिहास रचेगा। अभी के लिए इतना तय है–बंगाल की लड़ाई बेहद रोमांचक और कांटे की है।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
Pm modi west bengal visit
बंगाल दौरे पर पीएम मोदी ने हुगली में फोटोग्राफी कर खींचा सबका ध्यान

कोलकाता/हुगली। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार सुबह हुगली नदी के तट पर समय बिताया। अपने बंगाल दौरे के दौरान पीएम मोदी ने न सिर्फ लोगों और नाविकों से मुलाकात की, बल्कि उन्होंने फोटोग्राफी में भी हाथ आजमाया। उन्होंने इस अनुभव की तस्वीरें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा कीं।   हुगली तट पर पीएम मोदी का दौरा और जनता से संवाद पीएम मोदी सुबह हुगली नदी पहुंचे, जहां उन्होंने मॉर्निंग वॉक कर रहे लोगों और स्थानीय नाविकों से बातचीत की। उन्होंने नाविकों की मेहनत की सराहना करते हुए कहा कि उनका परिश्रम बेहद प्रेरणादायक है। इस दौरान उन्होंने नदी के किनारे खड़े होकर कई तस्वीरें भी लीं, जिसमें उनकी फोटोग्राफी में रुचि देखने को मिली।   सोशल मीडिया पर साझा की भावनाएं प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि गंगा का बंगाल की संस्कृति और आत्मा में विशेष स्थान है। उन्होंने इसे सभ्यता की शाश्वत चेतना से जोड़ते हुए अपनी भावनाएं व्यक्त कीं। पीएम मोदी ने कहा कि यह दौरा मां गंगा के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने का अवसर था।   विकास और समृद्धि का संदेश पीएम मोदी ने अपने संदेश में पश्चिम बंगाल के विकास और बंगाली समाज की समृद्धि के लिए काम करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास के लिए निरंतर प्रयास किए जाएंगे।   चुनावी माहौल में बढ़ी गतिविधि गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण की वोटिंग पूरी हो चुकी है और दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। पीएम मोदी राज्य में भारतीय जनता पार्टी के प्रचार अभियान में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।   4 मई को आएंगे नतीजे पूरे चुनावी प्रक्रिया के नतीजे 4 मई को घोषित किए जाएंगे। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा राजनीतिक दृष्टि से भी काफी अहम माना जा रहा है, जहां वे लगातार जनता से संवाद कर रहे हैं और पार्टी के प्रचार को मजबूत कर रहे हैं।

Anjali Kumari अप्रैल 24, 2026 0
Voters standing in long queues at polling booths in West Bengal and Tamil Nadu during high turnout elections
बंगाल में रिकॉर्ड 92.7% मतदान, तमिलनाडु में भी टूटा उत्साह का रिकॉर्ड; PM मोदी बोले- बदलाव तय

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के पहले चरण में मतदाताओं ने लोकतंत्र के प्रति अभूतपूर्व उत्साह दिखाया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में रिकॉर्ड 92.72 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो स्वतंत्रता के बाद राज्य का सबसे अधिक मतदान प्रतिशत बताया जा रहा है। वहीं, तमिलनाडु में भी 85.14 प्रतिशत मतदान के साथ नया रिकॉर्ड बना। बंगाल में इतिहास का सबसे बड़ा मतदान मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे अधिक रहा। राज्य की 294 विधानसभा सीटों में से पहले चरण में 152 सीटों पर मतदान कराया गया। मतदान केंद्रों पर सुबह से ही लंबी कतारें देखने को मिलीं और लोगों ने बढ़-चढ़कर अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया। तमिलनाडु में एक चरण में संपन्न हुआ मतदान तमिलनाडु की सभी 234 विधानसभा सीटों पर एक ही चरण में मतदान कराया गया। राज्य में 85.14 प्रतिशत मतदान ने राजनीतिक दलों के साथ-साथ चुनाव आयोग को भी उत्साहित किया है। महिला, युवा और बुजुर्ग मतदाताओं की बड़ी भागीदारी इस चुनाव की खासियत रही। PM मोदी का TMC पर तीखा हमला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में भारी मतदान को "परिवर्तन का जनादेश" करार दिया। उन्होंने कहा कि 4 मई को मतगणना के साथ ही पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 15 साल पुराने "सिंडिकेट सिस्टम" और "महा जंगलराज" की समाप्ति हो जाएगी। पीएम ने विश्वास जताया कि जनता बदलाव का मन बना चुकी है। दूसरे चरण की तैयारी तेज पश्चिम बंगाल में बाकी 142 सीटों पर दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होगा। वहीं, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी समेत सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के चुनाव परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। चुनाव आयोग की कड़ी निगरानी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयुक्त डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी ने मतदान प्रक्रिया पर लगातार नजर बनाए रखी। दोनों राज्यों के सभी मतदान केंद्रों पर लाइव वेबकास्टिंग की व्यवस्था की गई थी, जिससे निष्पक्ष और पारदर्शी मतदान सुनिश्चित किया जा सके। अमित शाह ने संभाला मोर्चा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह मतदान के दौरान पश्चिम बंगाल में मौजूद रहे। उन्होंने साल्ट लेक स्थित बीजेपी के चुनाव नियंत्रण कक्ष का दौरा किया और पार्टी नेताओं के साथ चुनावी स्थिति की समीक्षा की।  

surbhi अप्रैल 24, 2026 0
हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन टीएमसी के लिए बंगाल में चुनाव प्रचार करते हुए
हेमंत और कल्पना सोरेन TMC के लिए करेंगे बंगाल में प्रचार

रांची। रांची से बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन आज से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के समर्थन में चुनावी प्रचार अभियान की शुरुआत कर रहे हैं। दोनों नेता 18 से 20 अप्रैल तक विभिन्न जिलों में टीएमसी उम्मीदवारों के पक्ष में जनसभाएं करेंगे।   पुरुलिया से होगी प्रचार की शुरुआत 18 अप्रैल को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रांची से हेलीकॉप्टर के जरिए पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले के काशीपुर सहित कई क्षेत्रों में पहुंचेंगे। यहां वे तीन अलग-अलग स्थानों पर जनसभाओं को संबोधित करेंगे और स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक परिस्थितियों पर भी अपनी बात रखेंगे। कार्यक्रम के बाद उनका शाम तक रांची लौटने का कार्यक्रम है।   तीन दिन तक जारी रहेगा प्रचार अभियान पार्टी के केंद्रीय सचिव अभिषेक प्रसाद पिंटू के अनुसार, 19 और 20 अप्रैल को भी हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन पश्चिम बंगाल के विभिन्न इलाकों में टीएमसी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे। इस दौरान कई चुनावी रैलियां और जनसभाएं आयोजित की जाएंगी।   झामुमो और टीएमसी के बीच मजबूत रणनीतिक गठबंधन झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने पहले ही पश्चिम बंगाल चुनाव में टीएमसी को समर्थन देने की घोषणा कर दी थी और इस बार कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है। इसी रणनीति के तहत पार्टी के शीर्ष नेता सीधे चुनावी मैदान में उतरकर टीएमसी के प्रचार में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।   प्रभाव वाले क्षेत्रों पर फोकस पार्टी नेताओं का मानना है कि जिन क्षेत्रों में हेमंत और कल्पना सोरेन प्रचार करेंगे, वहां झामुमो का भी प्रभाव देखा जाता है। ऐसे में इसका सीधा लाभ टीएमसी उम्मीदवारों को मिल सकता है। राजनीतिक जानकार इसे विपक्षी एकता और क्षेत्रीय दलों के सहयोग की रणनीति के रूप में देख रहे हैं।

Ranjan Kumar Tiwari अप्रैल 18, 2026 0
Supreme Court decision impacts West Bengal voters allowing tribunal-approved citizens to vote before elections
बंगाल में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: ‘स्पेशल पावर’ से मिला वोटिंग राइट, ट्रिब्यूनल से मंजूर वोटर भी डाल सकेंगे वोट

कोलकाता/नई दिल्ली: Supreme Court of India ने पश्चिम बंगाल के एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन) मामले में बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए कहा है कि ट्रिब्यूनल से मंजूरी मिलने के बाद मतदाता इस बार भी वोट डाल सकेंगे, भले ही फैसला मतदान से ठीक पहले क्यों न आया हो।क्या है पूरा मामला? West Bengal में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान: करीब 90 लाख नाम मतदाता सूची से हटाए गए लंबित सूची में 50 लाख नाम शामिल इनमें से 27 लाख नाम हटाए जा चुके हैं बड़ी संख्या में लोगों ने ट्रिब्यूनल में अपील की है पहले नियम यह था कि अगर किसी का नाम बाद में सूची में जुड़ भी जाए, तो वह फ्रीज हो चुकी वोटर लिस्ट के कारण वोट नहीं डाल सकता था। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? Supreme Court of India ने स्पष्ट किया: अगर ट्रिब्यूनल चुनाव से 2 दिन पहले भी फैसला देता है, तो भी वोट देने का अधिकार मिलेगा जरूरत पड़ने पर पूरक (Supplementary) वोटर लिस्ट जारी की जाएगी चुनाव आयोग को इस फैसले को लागू करना होगा यह आदेश संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत दिया गया, जो कोर्ट को “पूर्ण न्याय” के लिए विशेष अधिकार देता है।चुनाव पर क्या होगा असर? पहला चरण: 23 अप्रैल दूसरा चरण: 29 अप्रैल यानी 21 और 27 अप्रैल तक जिन मामलों का निपटारा होगा, उन मतदाताओं को वोट देने का मौका मिलेगा। राजनीतिक प्रतिक्रियाएं Mamata Banerjee सरकार ने इस फैसले का स्वागत किया TMC सांसद काकली घोष दस्तीदार ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया CPM नेता विकास रंजन भट्टाचार्य ने कहा कि यह आम लोगों की कानूनी लड़ाई की जीत है क्यों है यह फैसला अहम? यह फैसला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि: इससे लाखों लोगों का मताधिकार सुरक्षित हुआ चुनाव प्रक्रिया में न्याय और समानता सुनिश्चित करने की कोशिश हुई कोर्ट ने दिखाया कि जरूरत पड़ने पर वह कानूनी तकनीकी अड़चनों को दरकिनार कर सकता है सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय पश्चिम बंगाल चुनाव में बड़ा बदलाव ला सकता है। इससे उन लोगों को भी वोट देने का मौका मिलेगा, जो अब तक सिस्टम की वजह से बाहर हो रहे थे। इसे लोकतंत्र को मजबूत करने वाला एक बड़ा कदम माना जा रहा है।  

surbhi अप्रैल 17, 2026 0
Mamata Banerjee addressing a rally after alleging vehicle search attempt by central forces in Kolkata
बंगाल चुनाव 2026: ‘मेरी गाड़ी ही क्यों?’—इलेक्शन कमीशन पर भड़कीं ममता बनर्जी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सियासी तनाव बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग और केंद्रीय बलों पर गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाया कि उनकी गाड़ी की तलाशी लेने की कोशिश क्यों की गई, जबकि अन्य नेताओं के साथ ऐसा नहीं हो रहा। एयरपोर्ट जाते वक्त तलाशी की कोशिश ममता बनर्जी ने दावा किया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे जाते समय केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उनकी कार की तलाशी लेने की कोशिश की। इस पर उन्होंने कहा, “मैंने कहा तलाशी लो, मुझे कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन सिर्फ तृणमूल के नेताओं को ही क्यों निशाना बनाया जा रहा है?” ‘PM मोदी और अमित शाह की गाड़ी क्यों नहीं चेक?’ इस्लामपुर में एक चुनावी रैली के दौरान उन्होंने सवाल उठाया: नरेंद्र मोदी की गाड़ी की तलाशी क्यों नहीं? अमित शाह के काफिले की जांच क्यों नहीं? उन्होंने कहा कि अगर जांच हो रही है, तो सभी दलों के नेताओं पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। ‘मैं कोई चोर नहीं हूं’ मुख्यमंत्री ने अपने बयान में कहा, “अगर आपमें हिम्मत है तो रोज मेरी गाड़ी की तलाशी लीजिए। मैं कोई चोर नहीं हूं।” उन्होंने यह भी कहा कि वह सरकार से वेतन के रूप में एक भी पैसा नहीं लेतीं। चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि चुनाव आयोग ने फ्लाइंग सर्विलांस टीमों को निर्देश दिया है कि मुख्यमंत्री को छोड़कर पार्टी के अन्य नेताओं और उनके परिवार के वाहनों की जांच की जाए। इनमें अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी का नाम भी शामिल बताया जा रहा है। बढ़ता राजनीतिक टकराव बंगाल में दो चरणों में होने वाले मतदान से पहले यह विवाद चुनावी माहौल को और गरमा रहा है। एक तरफ TMC चुनाव आयोग पर पक्षपात का आरोप लगा रही है, वहीं विपक्ष निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए सख्ती को जरूरी बता रहा है। अब देखना होगा कि इस मुद्दे पर चुनाव आयोग क्या प्रतिक्रिया देता है और क्या यह विवाद आगे और तूल पकड़ता है।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Mamata Banerjee addressing a rally amid discussions on Muslim voter dynamics in West Bengal elections
बंगाल चुनाव 2026: क्या ममता बनर्जी से दूर हो रहा मुस्लिम वोट बैंक? 160 सीटों का बड़ा समीकरण

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में ‘मुस्लिम वोट बैंक’ को सत्ता की चाबी माना जा रहा है, लेकिन इस बार यह समीकरण तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए चुनौती बनता दिख रहा है। राजनीतिक विश्लेषण के मुताबिक, 2011 से लगातार ममता बनर्जी के साथ खड़ा यह वोट बैंक अब बदलते संकेत दे रहा है। सागरदीघी उपचुनाव: पहला बड़ा संकेत मुस्लिम बहुल सागरदीघी सीट पर TMC की हार को एक बड़ा टर्निंग पॉइंट माना जा रहा है। करीब 64% मुस्लिम आबादी वाली इस सीट पर कांग्रेस की जीत ने यह संकेत दिया कि अल्पसंख्यक मतदाता विकल्प तलाश रहे हैं। हालांकि बाद में विजेता विधायक को TMC में शामिल करा लिया गया, लेकिन राजनीतिक संदेश साफ था—वोटर अब एकतरफा नहीं रहे। पड़ोसी राज्यों का असर बंगाल के सीमावर्ती राज्यों के चुनावी रुझान भी असर डाल रहे हैं: बिहार (सीमांचल): किशनगंज, कटिहार, पूर्णिया, अररिया में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने पारंपरिक समीकरण बदले असम (धुबरी मॉडल): AIUDF के बदरुद्दीन अजमल की हार और कांग्रेस की जीत से संकेत मिला कि मुस्लिम वोट ‘विजयी विकल्प’ की ओर शिफ्ट हो सकता है महाराष्ट्र (मालेगांव): यहां भी मुस्लिम वोटों का बंटवारा देखने को मिला इन रुझानों ने बंगाल में TMC की चिंता बढ़ा दी है। 160 सीटों का बड़ा गणित पश्चिम बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से लगभग 160 सीटें ऐसी हैं जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। कुछ प्रमुख जिलों का समीकरण: मुर्शिदाबाद (66% मुस्लिम आबादी) मालदा (51%) उत्तर दिनाजपुर (करीब 50%) बीरभूम उत्तर 24 परगना 2021 में TMC ने इन इलाकों में शानदार प्रदर्शन किया था, लेकिन 2026 में मुकाबला कड़ा दिख रहा है। कांग्रेस और ओवैसी फैक्टर TMC के सामने सबसे बड़ी चुनौती कांग्रेस और AIMIM का उभार है। मालदा में कांग्रेस की पकड़ मजबूत होती दिख रही है असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री से मुस्लिम वोटों में बंटवारे की आशंका हुमायूं कबीर जैसे स्थानीय नेताओं के साथ नए समीकरण बन रहे हैं इससे खासकर मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर दिनाजपुर की करीब 49 सीटों पर TMC की स्थिति कमजोर हो सकती है। BJP की बढ़ती चुनौती दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी भी तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। 2014 में 17% वोट से बढ़कर अब 278 सीटों पर सीधी टक्कर महिला सुरक्षा, भ्रष्टाचार और घुसपैठ जैसे मुद्दों पर आक्रामक रणनीति अमित शाह का “महिला सुरक्षा” फोकस यह TMC के लिए दोहरी चुनौती बन गया है—एक तरफ वोट बैंक में संभावित सेंध, दूसरी तरफ भाजपा का विस्तार। क्या है TMC की चिंता? मुस्लिम वोटों का बंटवारा कांग्रेस और AIMIM का उभार पड़ोसी राज्यों के बदले रुझान भाजपा की आक्रामक रणनीति

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Police escorting former TMC councillor Nirmal Dutta to Bidhannagar court after arrest in voter intimidation case
बंगाल चुनाव: वोटरों को धमकाने के आरोप में TMC का पूर्व पार्षद गिरफ्तार, 10 दिन की न्यायिक हिरासत

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल में चुनावी माहौल के बीच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व पार्षद निर्मल दत्त को वोटरों को कथित रूप से धमकाने और चुनाव को प्रभावित करने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है। बुधवार को उन्हें विधाननगर कोर्ट में पेश किया गया, जहां अदालत ने उन्हें 10 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। शिकायत के बाद हुई कार्रवाई मामले की शुरुआत मंगलवार को हुई, जब भाजपा प्रत्याशी शरदबत मुखर्जी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्मल दत्त वोटरों को डराकर मतदान को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस संबंध में उन्होंने विधाननगर पुलिस कमिश्नर से भी मुलाकात की थी। शिकायत के आधार पर विधाननगर दक्षिण थाने की पुलिस ने दत्ताबाद इलाके से निर्मल दत्त को गिरफ्तार किया। सुजीत बोस के करीबी बताए जाते हैं निर्मल दत्त को राज्य मंत्री सुजीत बोस का करीबी माना जाता है, जो विधाननगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। दत्त की पत्नी भी विधाननगर नगर निगम के वार्ड संख्या 38 से तृणमूल कांग्रेस की पार्षद हैं। वहीं, मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने हाल ही में इस्लामपुर में एक रैली के दौरान चुनाव आयोग की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा था कि यदि तृणमूल के एक नेता को गिरफ्तार किया जाता है, तो उनकी जगह सौ अन्य नेता खड़े हो जाएंगे। वायरल वीडियो से बढ़ा विवाद बताया जा रहा है कि 13 अप्रैल को सॉल्टलेक में हुई एक बैठक का वीडियो वायरल होने के बाद मामला गरमा गया। इस वीडियो में निर्मल दत्त कथित तौर पर यह कहते नजर आ रहे हैं कि अगर किसी ने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ वोट दिया, तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी दावा किया कि एक मोबाइल ऐप के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि किसने किसे वोट दिया है। इस बयान के सामने आने के बाद भाजपा प्रत्याशी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। पहले भी लग चुके हैं आरोप यह पहली बार नहीं है जब निर्मल दत्त विवादों में आए हैं। इससे पहले भी उन पर सॉल्टलेक के दत्ताबाद इलाके में भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले का आरोप लग चुका है। फिलहाल, पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आगे की कार्रवाई कोर्ट के निर्देशों के अनुसार की जाएगी।  

surbhi अप्रैल 16, 2026 0
Abhishek Banerjee addressing a massive rally in Cooch Behar ahead of West Bengal elections.
कूचबिहार में गरजे अभिषेक बनर्जी, बोले– भाजपा शासित राज्यों में बंगालियों को ‘बांग्लादेशी’ बताया जा रहा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य की राजनीति लगातार गरमाती जा रही है। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद Abhishek Banerjee ने मंगलवार को कूचबिहार में एक विशाल रोड शो और जनसभा को संबोधित करते हुए भाजपा पर तीखा हमला बोला। अपने भाषण में उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा शासित राज्यों में बांग्ला भाषी लोगों को “बांग्लादेशी” कहकर उनकी पहचान पर सवाल उठाए जा रहे हैं और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। उन्होंने इसे न सिर्फ राजनीतिक हमला बल्कि “बंगाली अस्मिता और सम्मान पर चोट” बताया। “हमारी भाषा और पहचान को निशाना बनाया जा रहा” अभिषेक बनर्जी ने कहा कि भाजपा की राजनीति विभाजनकारी है और वह भाषा तथा संस्कृति के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “जहां-जहां भाजपा की सरकार है, वहां बांग्ला बोलने वालों को संदेह की नजर से देखा जा रहा है। उन्हें घुसपैठिया तक कहा जा रहा है। यह सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि सामाजिक अन्याय है।” उन्होंने आगे कहा कि बंगाल के लोगों की पहचान और सम्मान की रक्षा करना टीएमसी की प्राथमिक जिम्मेदारी है और पार्टी इसके लिए हर स्तर पर संघर्ष करेगी। खान-पान पर ‘पहरा’ का आरोप सभा को संबोधित करते हुए Abhishek Banerjee ने भाजपा पर लोगों की निजी जिंदगी में दखल देने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि कई भाजपा शासित राज्यों में मछली और मांस की बिक्री व सेवन पर प्रतिबंध लगाने की कोशिश की जा रही है, जो सीधे तौर पर बंगाली संस्कृति पर हमला है। “हमारे यहां मछली-भात सिर्फ खाना नहीं, हमारी परंपरा और पहचान का हिस्सा है। अगर कोई हमारी थाली तक में दखल देगा, तो बंगाल की जनता उसे कभी स्वीकार नहीं करेगी,” उन्होंने कहा। मतदाता सूची से नाम कटने का मुद्दा अभिषेक बनर्जी ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर भी भाजपा को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया के जरिए खासकर राजबंशी और मतुआ समुदाय के लाखों लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा का “समर्थन” इन समुदायों के लिए सिर्फ दिखावा है, जबकि जमीनी हकीकत इससे बिल्कुल अलग है। “हम यह सुनिश्चित करेंगे कि एक भी वैध मतदाता का नाम सूची से बाहर न रहे। लोकतंत्र में हर नागरिक की भागीदारी जरूरी है,” उन्होंने जोर देकर कहा। केंद्र सरकार पर भेदभाव का आरोप केंद्र की Government of India पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बंगाल को उसका उचित अधिकार नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि चूंकि राज्य की जनता बार-बार तृणमूल कांग्रेस को चुनती है, इसलिए केंद्र सरकार राजनीतिक बदले की भावना से काम कर रही है। “दिल्ली की सरकार बंगाल के विकास को रोकने की कोशिश कर रही है, लेकिन हम झुकने वाले नहीं हैं,” उन्होंने कहा। “4 मई को जनता देगी जवाब” अपने भाषण के अंत में अभिषेक बनर्जी ने भरोसा जताया कि आने वाले चुनाव में बंगाल की जनता भाजपा को करारा जवाब देगी। उन्होंने कहा, “4 मई को नतीजे आएंगे और उस दिन बंगाल की जनता अहंकारी और बंगाल विरोधी ताकतों को सबक सिखाएगी।” कूचबिहार की इस रैली में Abhishek Banerjee ने बंगाली पहचान, संस्कृति, खान-पान और लोकतांत्रिक अधिकारों के मुद्दों को जोर-शोर से उठाया। उनके इस आक्रामक तेवर से साफ है कि आगामी चुनाव में टीएमसी “बंगाली अस्मिता” को बड़ा चुनावी मुद्दा बनाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिससे राज्य की राजनीति और अधिक ध्रुवीकृत होने की संभावना है।

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Abhishek Banerjee addressing a political rally in Kolkata ahead of West Bengal elections.
बंगाल चुनाव से पहले सियासी घमासान: Abhishek Banerjee की चुनाव आयोग को खुली चेतावनी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के महासचिव Abhishek Banerjee ने वोटर लिस्ट और बाहरी मतदाताओं को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साधते हुए सख्त चेतावनी दी है। उन्होंने साफ कहा कि राज्य में वही लोग वोट देंगे जो पश्चिम बंगाल के निवासी हैं। अगर कोई व्यक्ति हाल ही में दिल्ली या Bihar में वोट डाल चुका है और फिर बंगाल में वोट देने आता है, तो TMC कार्यकर्ता उसे ऐसा करने से रोकेंगे। “बाहरी वोटरों से जीतना चाहती है भाजपा” Abhishek Banerjee ने आरोप लगाया कि Bharatiya Janata Party (भाजपा) बाहरी वोटरों के जरिए चुनाव जीतने की कोशिश कर रही है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि बंगाल में रहने वाले गैर-बंगाली लोगों से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन बाहर से आकर वोट डालने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वोटर लिस्ट पर विवाद गहराया राज्य में नई वोटर लिस्ट को लेकर भी विवाद बढ़ गया है। करीब 1 करोड़ पुराने नाम हटाए जाने का दावा 27 लाख लोग SIR ट्रिब्यूनल में विचाराधीन, जिन्हें इस बार वोट का अधिकार नहीं मिलेगा Abhishek Banerjee ने कहा कि इतने बड़े स्तर पर नाम हटने का असर चुनाव नतीजों पर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं को एकजुट रहने की अपील पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि: सभी मतभेद भुलाकर चुनाव पर ध्यान दें गुटबाजी से दूर रहें पूरी ताकत के साथ चुनाव लड़ें उन्होंने इसे Mamata Banerjee के नेतृत्व की लड़ाई बताते हुए कहा कि हर कार्यकर्ता की जिम्मेदारी है कि पार्टी को जीत दिलाए। “आत्मसंतुष्टि से बचें” Abhishek Banerjee ने कहा कि भले ही सर्वे में पार्टी की स्थिति मजबूत दिख रही हो, लेकिन किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। उन्होंने पुराने और नए नेताओं के बीच तालमेल बनाकर काम करने पर भी जोर दिया। पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले वोटर लिस्ट और बाहरी मतदाताओं का मुद्दा बड़ा राजनीतिक विवाद बन गया है। TMC और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप के बीच अब नजर चुनाव आयोग के अगले कदम पर टिकी है, जो इस पूरे विवाद को दिशा दे सकता है।  

surbhi अप्रैल 15, 2026 0
Yogi Adityanath addressing election rally in Nandakumar criticizing TMC government in West Bengal political speech
नंदकुमार में गरजे योगी आदित्यनाथ: “तुष्टिकरण, माफिया राज और कट मनी से बर्बाद हुआ बंगाल”

Yogi Adityanath ने Nandakumar में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए Trinamool Congress (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज TMC का मतलब “तुष्टिकरण, माफिया राज और कट मनी” बन गया है, जिसने West Bengal की विकास यात्रा को बाधित किया है। “मां-माटी-मानुष का नारा खोखला” योगी ने TMC के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा: “मां-बहन असुरक्षित हैं” “माटी घुसपैठियों के कब्जे में है” “मानुष भयभीत और असहाय है” उन्होंने जनता से बदलाव का आह्वान किया। सांस्कृतिक विरासत का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए Swami Vivekananda, Subhas Chandra Bose और Rabindranath Tagore का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि देश को दिशा देने वाली रही है, लेकिन आज “अराजकता और भ्रष्टाचार” से जूझ रही है। “डेमोग्राफी बदलने की कोशिश” योगी ने आरोप लगाया कि: बंगाल में जनसांख्यिकी बदलने की साजिश हो रही है Malda, Murshidabad, Nadia जैसे जिलों में सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है यूपी मॉडल का जिक्र उन्होंने कहा कि 2017 से पहले Uttar Pradesh की स्थिति भी ऐसी ही थी, लेकिन Narendra Modi के नेतृत्व में “डबल इंजन सरकार” बनने के बाद हालात बदले। दंगे रुके कानून व्यवस्था सुधरी विकास तेज हुआ “बुलडोजर माफिया का इलाज करता है” योगी ने कहा: “यूपी का बुलडोजर सिर्फ सड़कें नहीं बनाता, माफिया का इलाज भी करता है” बंगाल में भी सख्त कानून व्यवस्था लागू करने की जरूरत है ममता सरकार पर निशाना उन्होंने Mamata Banerjee पर आरोप लगाया कि: तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया जा रहा है रामनवमी जैसे आयोजनों में बाधा डाली जाती है “बंगाल को फिर गौरव दिलाना होगा” योगी ने कहा कि बंगाल, जो कभी “कल्चरल कैपिटल” था, उसे फिर से: विकास सुशासन सांस्कृतिक पहचान की राह पर लाना होगा। उन्होंने जनता से भाजपा उम्मीदवारों को समर्थन देने की अपील की।  

surbhi अप्रैल 13, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Top week

Indian delegation at international cyber security meeting after India assumed CCDB chairmanship role
राष्ट्रीय

भारत को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी, संभाला CCDB के अध्यक्ष का पद

surbhi मई 15, 2026 0