TMC

Election Commission announces West Bengal Rajya Sabha bypolls as BJP and TMC prepare for the July 24 contest.
बंगाल की 3 राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव, भाजपा की मजबूत स्थिति; TMC की चुनौती बढ़ी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की तीन राज्यसभा सीटों पर 24 जुलाई को उपचुनाव होंगे। इन चुनावों के साथ राज्य की बदली राजनीतिक तस्वीर का असर संसद के उच्च सदन में भी दिखाई दे सकता है। विधानसभा में मौजूदा संख्या बल के आधार पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इन तीनों सीटों पर मजबूत स्थिति में नजर आ रही है, जबकि आंतरिक संकट से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सामने अपनी मौजूदगी बनाए रखने की चुनौती है। 24 जुलाई को होगा मतदान निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार तीनों सीटों के लिए 24 जुलाई 2026 को मतदान कराया जाएगा। ये सीटें पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक के इस्तीफे के बाद रिक्त हुई हैं। इन नेताओं ने विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी नेतृत्व से मतभेद जताते हुए राज्यसभा और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया था। विधानसभा में भाजपा के पास मजबूत संख्या बल 294 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा में भाजपा के पास फिलहाल 208 विधायक हैं। राज्यसभा उपचुनाव की प्रक्रिया के अनुसार प्रत्येक सीट पर जीत के लिए लगभग 70 प्रथम वरीयता मतों की आवश्यकता होगी। वर्तमान संख्या बल के आधार पर भाजपा अपने दम पर तीनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने और उन्हें जीत दिलाने की स्थिति में दिखाई दे रही है। तृणमूल कांग्रेस के लिए चुनौती कागजों पर तृणमूल कांग्रेस के पास लगभग 80 विधायक हैं, जिससे वह एक सीट पर मुकाबला करने की स्थिति में हो सकती है। हालांकि पार्टी में जारी आंतरिक खींचतान उसके लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है। राजनीतिक घटनाक्रम के बीच तृणमूल कांग्रेस के भीतर नेतृत्व को लेकर मतभेद खुलकर सामने आए हैं। बागी गुट और ममता बनर्जी समर्थक खेमे के बीच जारी विवाद का असर राज्यसभा उपचुनाव पर भी पड़ने की संभावना जताई जा रही है। बागी गुट का दावा बागी नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट का दावा है कि उसे 65 विधायकों का समर्थन प्राप्त है। गुट का कहना है कि हालिया इस्तीफे पार्टी नेतृत्व पर जनप्रतिनिधियों के घटते विश्वास का संकेत हैं। वहीं, ममता बनर्जी समर्थक खेमे ने इन आरोपों को खारिज करते हुए इस्तीफा देने वाले नेताओं पर संकट के समय पार्टी छोड़ने का आरोप लगाया है। संसद में बदल सकता है प्रतिनिधित्व यदि उपचुनाव के नतीजे मौजूदा राजनीतिक समीकरणों के अनुरूप रहते हैं, तो पश्चिम बंगाल से राज्यसभा में भाजपा का प्रतिनिधित्व बढ़ सकता है, जबकि तृणमूल कांग्रेस की संख्या घटने की संभावना है। अब सभी की नजरें 24 जुलाई को होने वाले मतदान और उसके नतीजों पर टिकी हैं, जो पश्चिम बंगाल की राजनीति के साथ-साथ राज्यसभा की ताकत के समीकरण को भी प्रभावित कर सकते हैं।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
Kriti Sanon Egg Freezing
कृति सेनन का बड़ा खुलासा, 'मिमी' की तैयारी के दौरान एग फ्रीज करवाने का लिया था फैसला

मुंबई, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेत्री कृति सेनन ने पहली बार अपनी निजी जिंदगी से जुड़ा बड़ा खुलासा किया है। कृति ने बताया कि उन्होंने फिल्म 'मिमी' की तैयारी के दौरान अपने एग फ्रीज करवाने का फैसला लिया था। उनका कहना है कि वह शादी या मातृत्व को किसी सामाजिक दबाव या "बायोलॉजिकल क्लॉक" के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी इच्छा और सही समय पर चुनना चाहती हैं।   'मिमी' की तैयारी के दौरान लिया फैसला   कृति ने बताया कि 'मिमी' के लिए उन्हें वजन बढ़ाना था और उसी दौरान उन्होंने एग फ्रीजिंग की प्रक्रिया पूरी कराई। उनके मुताबिक, इस प्रक्रिया के दौरान शरीर में सूजन और हार्मोनल बदलाव आते हैं, इसलिए उन्हें लगा कि यह इसके लिए सबसे उपयुक्त समय है।   'यह मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा था'   कृति सेनन ने कहा कि एग फ्रीजिंग का फैसला आसान नहीं था, लेकिन यह उनके जीवन के सबसे अच्छे फैसलों में से एक है। उन्होंने कहा कि वह खुद को भविष्य के लिए एक विकल्प देना चाहती थीं, ताकि शादी और परिवार शुरू करने का निर्णय पूरी तरह उनकी इच्छा पर आधारित हो।   महिलाओं को दिया अपना फैसला खुद लेने का संदेश   अभिनेत्री ने कहा कि हर महिला को अपनी जिंदगी के बड़े फैसले खुद लेने का अधिकार होना चाहिए। उन्होंने माना कि यह प्रक्रिया महंगी है और हर किसी के लिए संभव नहीं होती, लेकिन यदि अवसर मिले तो महिलाओं को अपने भविष्य के बारे में स्वतंत्र रूप से सोचने का अधिकार होना चाहिए।

anjali kumari जुलाई 7, 2026 0
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee during a Trinamool Congress meeting amid the party symbol dispute before the Election Commission.
TMC चुनाव चिह्न विवाद: ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग को सौंपा जवाब, कहा- 2027 तक वैध है राष्ट्रीय समिति

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) में जारी आंतरिक विवाद के बीच पार्टी के चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ को लेकर मामला चुनाव आयोग तक पहुंच गया है। इस बीच ममता बनर्जी गुट ने निर्वाचन आयोग को अपना विस्तृत जवाब सौंपते हुए दावा किया है कि पार्टी की वर्तमान राष्ट्रीय कार्यसमिति वर्ष 2027 तक पूरी तरह वैध है और उससे पहले किसी समानांतर संगठन का गठन पार्टी संविधान के अनुरूप नहीं है। आयोग को सौंपे कानूनी और संगठनात्मक दस्तावेज ममता बनर्जी गुट ने चुनाव आयोग को दिए गए दस्तावेजों में कहा है कि पार्टी के संविधान और संगठनात्मक चुनाव प्रक्रिया के अनुसार मौजूदा राष्ट्रीय समिति का कार्यकाल 2027 तक निर्धारित है। ऐसे में इस अवधि के दौरान किसी अन्य गुट द्वारा खुद को "असली तृणमूल कांग्रेस" घोषित करना या समानांतर समिति बनाना नियमों के विरुद्ध है। पार्टी का कहना है कि वर्तमान नेतृत्व को निर्धारित कार्यकाल तक संगठन चलाने का पूर्ण वैधानिक अधिकार प्राप्त है। बागी गुट ने 22 जून को बनाई थी नई समिति तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने 22 जून को नई राष्ट्रीय समिति गठित करने का दावा किया था। इस गुट ने खुद को पार्टी का वास्तविक प्रतिनिधि बताते हुए चुनाव चिह्न पर अधिकार जताया था। हालांकि, ममता बनर्जी गुट ने इस दावे को पूरी तरह खारिज करते हुए कहा है कि पार्टी के अधिकृत संगठन में इस तरह के किसी बदलाव का कोई संवैधानिक आधार नहीं है। डेरेक ओब्रायन और अभिषेक बनर्जी ही अधिकृत प्रतिनिधि चुनाव आयोग को दिए गए जवाब में ममता गुट ने स्पष्ट किया है कि आयोग के समक्ष पार्टी का आधिकारिक पक्ष रखने के लिए केवल डेरेक ओब्रायनऔर राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ही अधिकृत प्रतिनिधि हैं। दस्तावेज में यह भी कहा गया है कि हाल ही में प्रदेश अध्यक्ष पद से इस्तीफा देने वाली चंद्रिमा भट्टाचार्य या बागी गुट का कोई अन्य नेता पार्टी की ओर से चुनाव आयोग के समक्ष प्रतिनिधित्व करने का अधिकार नहीं रखता। बहुमत का भी किया दावा ममता बनर्जी खेमे ने दावा किया है कि पार्टी के अधिकांश सांसद, जिला संगठन और जमीनी कार्यकर्ता आज भी उनके नेतृत्व के साथ मजबूती से खड़े हैं। उनका कहना है कि कुछ विधायकों या नेताओं के अलग होने से पार्टी के मूल संगठन की वैधता पर कोई असर नहीं पड़ता। अब चुनाव आयोग के फैसले पर नजर दोनों गुटों द्वारा अपने-अपने दावे और दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बाद अब फैसला चुनाव आयोग के हाथ में है। आयोग दोनों पक्षों के दस्तावेजों की जांच करेगा और उसके बाद व्यक्तिगत सुनवाई की तारीख तय की जाएगी। आयोग के अंतिम निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि तृणमूल कांग्रेस के आधिकारिक संगठन और उसके चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ पर किस गुट का अधिकार रहेगा।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee leads a candle march in Kolkata demanding justice for the Baruipur minor victim.
बरुईपुर रेप-मर्डर केस: पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग पर ममता बनर्जी का कैंडल मार्च, BJP सरकार पर साधा निशाना

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बरुईपुर में 11 वर्षीय बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म और हत्या की घटना को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। घटना के विरोध में पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी सोमवार को कोलकाता की सड़कों पर कैंडल मार्च निकालते हुए नजर आईं। इस दौरान उन्होंने पीड़िता को न्याय दिलाने की मांग की और राज्य की भाजपा सरकार पर महिलाओं की सुरक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया। कैंडल मार्च निकालकर जताया विरोध ममता बनर्जी ने कालीघाट से सांसदों, विधायकों और पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला। उन्होंने कहा कि यह मार्च बरुईपुर की पीड़िता को श्रद्धांजलि देने और आरोपियों को कड़ी सजा दिलाने की मांग के लिए आयोजित किया गया। मार्च के दौरान उन्होंने कहा कि महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराध चिंता का विषय हैं और दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा मिलनी चाहिए। "पीड़ित परिवार से मिलने नहीं जाने दिया" फेसबुक पर साझा किए गए अपने संदेश में ममता बनर्जी ने कहा कि घटना की जानकारी मिलने के बाद वह पीड़िता के परिवार से मिलने बरुईपुर जाना चाहती थीं, लेकिन उन्हें घर से बाहर निकलने से रोक दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद उन्होंने फोन पर पीड़िता के परिजनों से बात कर उन्हें हरसंभव मदद और न्याय दिलाने का भरोसा दिया। भाजपा सरकार पर लगाए गंभीर आरोप ममता बनर्जी ने दावा किया कि कैंडल मार्च के दौरान भी पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसकी निंदा की। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, उत्पीड़न और अपराध की घटनाओं में बढ़ोतरी हुई है तथा सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने कहा कि उनका आंदोलन तब तक जारी रहेगा, जब तक पीड़िता को न्याय नहीं मिल जाता और दोषियों को कानून के तहत कड़ी सजा नहीं मिलती। त्वरित न्याय की मांग टीएमसी प्रमुख ने मांग की कि मामले की सुनवाई फास्ट-ट्रैक अदालत में कराई जाए और दोषियों को जल्द से जल्द सख्त सजा दी जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लग सके। पुराने बयानों को लेकर भी चर्चा बरुईपुर घटना के बीच ममता बनर्जी के पुराने बयान भी एक बार फिर चर्चा में हैं। वर्ष 2012 के कटवा सामूहिक दुष्कर्म मामले और 2022 के हंसखाली प्रकरण में दिए गए उनके बयानों को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। विपक्ष का आरोप है कि उन मामलों में उन्होंने शुरुआती चरण में घटनाओं को लेकर अलग रुख अपनाया था, जबकि टीएमसी का कहना है कि वर्तमान मामले में पार्टी पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। मामले की जांच जारी बरुईपुर में हुई इस वारदात की जांच पुलिस कर रही है। घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल है और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है। पुलिस का कहना है कि मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 7, 2026 0
West Bengal Chief Minister Mamata Banerjee addresses the media over the Baruipur minor murder case, alleging she was prevented from meeting the victim's family.
बारुईपुर केस पर ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, बोलीं- मुझे हाउस अरेस्ट कर रखा है

कोलकाता: दक्षिण 24 परगना के बारुईपुर में 12 वर्षीय किशोरी की कथित दुष्कर्म के बाद हत्या के मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और सुरक्षा एजेंसियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि पीड़ित परिवार से मिलने जाने की उनकी कोशिश को रोक दिया गया और उनके आवास के बाहर भारी सुरक्षा बल तैनात कर उन्हें "हाउस अरेस्ट" जैसी स्थिति में रखा गया। 'पीड़ित परिवार से मिलने नहीं जाने दिया गया' वीडियो संदेश जारी करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि वह अकेले बारुईपुर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात करना चाहती थीं, लेकिन उनके घर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और विभिन्न खुफिया एजेंसियों के कर्मियों की तैनाती कर दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि इस कारण वह अपने घर से बाहर नहीं निकल सकीं। महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों पर जताई चिंता मुख्यमंत्री ने कहा कि बारुईपुर की घटना ने उन्हें बेहद दुखी और चिंतित किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के विभिन्न हिस्सों—भगवानपुर, पटाशपुर, कूचबिहार, दुर्गापुर, दिनहाटा और पानीहाटी—में भी महिलाओं के खिलाफ गंभीर अपराध सामने आए हैं। ममता ने कहा कि बारुईपुर की घटना ने लोगों के धैर्य की सीमा तोड़ दी है। सुरक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल मुख्यमंत्री ने सवाल उठाते हुए कहा कि यदि इलाके में धारा 144 लागू नहीं है, तो उनके आवास के आसपास भारी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती और रूट मार्च क्यों कराया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी दलों को स्वतंत्र रूप से कार्यक्रम करने की अनुमति दी जा रही है, जबकि उनकी पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं को रोका जा रहा है। पीड़ित परिवार से फोन पर की बात ममता बनर्जी ने बताया कि वह स्वयं घटनास्थल तक नहीं पहुंच सकीं, लेकिन उन्होंने पीड़ित परिवार से फोन पर बात की और उन्हें हरसंभव मदद तथा न्याय दिलाने का भरोसा दिया। क्या है पूरा मामला? दक्षिण 24 परगना जिले के बारुईपुर के धपधपी-2 ग्राम पंचायत क्षेत्र में शनिवार से लापता 12 वर्षीय किशोरी का शव रविवार सुबह एक तालाब से बोरे में बंद मिला था। परिजनों ने आरोप लगाया है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म के बाद उसकी हत्या की गई। घटना के बाद इलाके में तनाव फैल गया। आक्रोशित लोगों ने सड़क जाम कर प्रदर्शन किया, पुलिस वाहन में तोड़फोड़ की और एक संदिग्ध युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी। पुलिस की कार्रवाई जारी पुलिस ने मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार करने की पुष्टि की है। वहीं, भीड़ द्वारा एक व्यक्ति की हत्या के मामले में भी अलग से जांच शुरू कर दी गई है। फिलहाल, किशोरी की मौत, दुष्कर्म के आरोप और हिंसा की सभी घटनाओं की जांच जारी है। पुलिस का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
Shravani Mela 2026
श्रावणी मेला 2026: अब 2 से 5 मिनट में होंगे बाबा बैद्यनाथ के दर्शन

देवघर, एजेंसियां। विश्वप्रसिद्ध राजकीय श्रावणी मेला 2026 के लिए देवघर में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस बार बाबा बैद्यनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं को दर्शन के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंदिर प्रशासन ने वीआईपी कूपनधारकों और सामान्य श्रद्धालुओं की कतारों को अलग-अलग संचालित करने के लिए नया ओवरब्रिज तैयार कर लिया है। तकनीकी जांच पूरी होने के बाद यह नई व्यवस्था 15 जुलाई 2026 से लागू कर दी जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं को पहले की तुलना में कहीं अधिक सुगम और तेज दर्शन की सुविधा मिलेगी।   देवघर एसडीएम रवि कुमार ने बताया बाबा मंदिर प्रभारी सह देवघर एसडीएम रवि कुमार ने बताया कि अब तक मंदिर के टी-जंक्शन पर वीआईपी कूपन और सामान्य कतार एक ही मार्ग से गर्भगृह की ओर बढ़ती थीं। संकरे रास्ते के कारण दोनों कतारों के मिलते ही भारी भीड़ और जाम की स्थिति बन जाती थी। इसके चलते श्रद्धालुओं को घंटों तक इंतजार करना पड़ता था। विशेष रूप से शीघ्र दर्शन कूपन लेने वाले श्रद्धालुओं की ओर से लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि उन्हें भी अपेक्षित सुविधा नहीं मिल पा रही थी।   नई व्यवस्था के तहत इन समस्याओं के स्थायी समाधान के लिए जिला प्रशासन ने युद्धस्तर पर नए ओवरब्रिज का निर्माण कराया है। नई व्यवस्था के तहत वीआईपी कूपनधारकों और सामान्य श्रद्धालुओं की कतारें अलग-अलग मार्गों से आगे बढ़ेंगी और मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित रूप से पहुंचेंगी। इससे भीड़ का दबाव कम होगा और दर्शन व्यवस्था अधिक सुव्यवस्थित बनेगी।   मंदिर प्रशासन का दावा हैं  मंदिर प्रशासन का दावा है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद श्रद्धालु केवल 2 से 5 मिनट के भीतर बाबा बैद्यनाथ के दर्शन, जलार्पण और पूजा-अर्चना कर सकेंगे। इससे न केवल श्रद्धालुओं का समय बचेगा, बल्कि श्रावणी मेले के दौरान प्रतिदिन उमड़ने वाली भारी भीड़ का बेहतर प्रबंधन भी संभव हो सकेगा। प्रशासन का मानना है कि यह व्यवस्था इस वर्ष के श्रावणी मेले को अधिक सुरक्षित, सुगम और श्रद्धालु-अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी।

anjali kumari जुलाई 6, 2026 0
TMC MP Abhishek Banerjee faces police scrutiny over allegations that security personnel were seen hanging outside his moving vehicle in Kolkata.
गाड़ी पर सुरक्षाकर्मियों के लटकने का मामला: अभिषेक बनर्जी के जवाब से संतुष्ट नहीं कोलकाता पुलिस, फिर भेजेगी नोटिस

कोलकाता: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। उनकी गाड़ी के बाहर सुरक्षाकर्मियों के लटककर सफर करने के कथित मामले में कोलकाता पुलिस उनके जवाब से संतुष्ट नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, पुलिस अब उन्हें एक नया नोटिस जारी करने की तैयारी कर रही है, जिसमें मांगे गए दस्तावेजों का स्पष्ट उल्लेख किया जाएगा। पुलिस ने मांगे थे जरूरी दस्तावेज कालीघाट थाने की ओर से पहले जारी नोटिस में अभिषेक बनर्जी से मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के कथित उल्लंघन से संबंधित आवश्यक दस्तावेज और जानकारी उपलब्ध कराने को कहा गया था। उन्हें शनिवार तक जवाब देने की समय-सीमा दी गई थी। हालांकि निर्धारित समय बीतने के बाद अभिषेक बनर्जी ने अपने प्रतिनिधि के माध्यम से कालीघाट थाने में कुछ दस्तावेज जमा कराए। जवाब को पुलिस ने बताया अधूरा पुलिस सूत्रों के अनुसार, अभिषेक बनर्जी की ओर से जमा कराए गए दस्तावेजों में वह सभी जानकारियां उपलब्ध नहीं कराई गईं, जिनकी मांग की गई थी। इसी वजह से जांच अधिकारी उनके जवाब से संतुष्ट नहीं हैं। सूत्रों का कहना है कि अब नया नोटिस जारी कर स्पष्ट रूप से उन दस्तावेजों और सूचनाओं का उल्लेख किया जाएगा, जो अब तक पुलिस को उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। क्या है पूरा मामला? यह मामला बागुईहाटी निवासी राजीव सरकार द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत से जुड़ा है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि अभिषेक बनर्जी की गाड़ी पर दो सुरक्षाकर्मी खतरनाक तरीके से बाहर लटककर यात्रा कर रहे थे, जो मोटर वाहन अधिनियम का उल्लंघन है। शिकायत में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 123 का हवाला दिया गया है, जिसमें चलती गाड़ी से लटककर यात्रा करने पर रोक है। साथ ही धारा 184का भी उल्लेख किया गया है, जो खतरनाक तरीके से वाहन चलाने या यात्रा करने को दंडनीय अपराध मानती है। पुलिस ने मांगी थीं ये जानकारियां जांच के दौरान पुलिस ने अभिषेक बनर्जी से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मांगी थीं, जिनमें शामिल हैं— वाहन खरीदने की तारीख। वाहन चालक (ड्राइवर) का नाम, पता और पहचान। गाड़ी के बाहर लटककर यात्रा करने वाले सुरक्षाकर्मियों की पहचान। घटना से जुड़े अन्य आवश्यक दस्तावेज। पुलिस का दावा है कि इन जानकारियों में से कई अब भी उपलब्ध नहीं कराई गई हैं। जांच जारी कोलकाता पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी तथ्यों की जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो पुलिस आगे भी कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर सकती है। गौरतलब है कि यह मामला अभी जांच के चरण में है और पुलिस की ओर से किसी भी प्रकार की कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं की गई है। वहीं, अभिषेक बनर्जी की ओर से भी इस मामले पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जुलाई 6, 2026 0
TMC Headquarter
TMC मुख्यालय पर सियासी संग्राम तेज, बागी गुट के कब्जे के बाद बढ़ा विवाद

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सत्ता संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है। कोलकाता स्थित पार्टी के राज्य मुख्यालय पर बागी गुट के नियंत्रण के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने शुक्रवार को पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद परिसर में तनाव बढ़ गया। स्थिति को देखते हुए मौके पर CRPF और कोलकाता पुलिस के जवान तैनात किए गए।   बागी गुट ने जताया मुख्यालय पर दावा बताया जा रहा है कि बागी गुट ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, फंड और चुनाव चिह्न पर दावा पेश करने के एक दिन बाद यह कदम उठाया। ऋतब्रत बनर्जी अपने समर्थक नेताओं के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे और वहां लगे पुराने साइनबोर्ड हटाकर नया बैनर लगा दिया। बागी गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन घोषित करने का भी दावा किया।   बागी नेताओं का कहना है कि कार्यालय का पुराना किराया समझौता समाप्त हो चुका था और नई वर्किंग कमेटी के तहत नया समझौता किया गया है। उनका दावा है कि कार्यालय पर उनका वैध अधिकार है, हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान जताते हुए अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करने से इनकार किया।   ममता गुट ने लगाया अवैध कब्जे का आरोप मुख्यालय पर कब्जे की खबर के बाद ममता बनर्जी समर्थक नेताओं ने इसे अवैध कार्रवाई बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने आरोप लगाया कि बागी गुट को केंद्रीय सुरक्षा बलों का संरक्षण मिल रहा है। वहीं टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी इस कार्रवाई को अदालत और जनता दोनों के सामने चुनौती देगी।   अब चुनाव आयोग के फैसले पर निगाहें कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्यालय के स्वामित्व और लीज से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही वहां नियमित राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी। इस बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से 6 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक पार्टी के संगठन, नाम और चुनाव चिह्न पर अपने-अपने दावे और जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस विवाद का अगला बड़ा फैसला चुनाव आयोग के रुख पर निर्भर करेगा।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
BJP workers stop a bus in Gangarampur, West Bengal, after suspecting that Abhishek Banerjee's personal assistant was on board, before police verify the passenger's identity.
भाजपा कार्यकर्ताओं ने बस रोककर किया हंगामा, अभिषेक बनर्जी के PA होने के शक में यात्री से बदसलूकी

कोलकाता: पश्चिम बंगाल में राजनीतिक तनाव के बीच दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगारामपुर में शुक्रवार देर रात एक बस को रोककर भाजपा कार्यकर्ताओं ने हंगामा किया। कार्यकर्ताओं को शक था कि बस में सवार व्यक्ति तृणमूल कांग्रेस (TMC) नेता अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय हैं। हालांकि पुलिस की जांच में यह आशंका गलत साबित हुई और मामला शांत हो गया। शक के आधार पर रोकी गई बस प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, भाजपा कार्यकर्ताओं ने सूचना मिलने के बाद बस को रोक लिया और एक यात्री से पूछताछ करते हुए उसके साथ बदसलूकी की। इस दौरान कुछ समय के लिए मौके पर तनाव की स्थिति बन गई। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और संबंधित यात्री की पहचान की जांच शुरू की। पुलिस जांच में सामने आई सच्चाई पुलिस सूत्रों के अनुसार, जिस व्यक्ति को अभिषेक बनर्जी का PA समझा जा रहा था, वह सुमित रॉय नहीं बल्कि शरीफुल आलम निकला। पुलिस ने बताया कि शरीफुल आलम पहले अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में तैनात एक पुलिस अधिकारी रह चुके हैं। वर्तमान में वह दक्षिण दिनाजपुर जिले के सूचना एवं जनसंपर्क विभाग (Information & Cultural Affairs) में कार्यरत हैं। पहचान की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने बस को आगे जाने की अनुमति दे दी और स्थिति सामान्य हो गई। भाजपा ने क्या कहा? गंगारामपुर नगर भाजपा अध्यक्ष वृंदावन घोष ने कहा कि स्थानीय लोगों को संदेह था कि वाहन में अभिषेक बनर्जी के करीबी सहयोगी सुमित रॉय मौजूद हैं। उन्होंने कहा, "जैसे ही हमें इसकी जानकारी मिली, हमने पुलिस प्रशासन को सूचित किया। जांच के दौरान पता चला कि वह व्यक्ति सुमित रॉय नहीं है, बल्कि पहले अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा में तैनात अधिकारी रह चुका है। गलतफहमी दूर होने के बाद पुलिस ने वाहन को जाने दिया।" तनाव के बीच हुई घटना यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब पश्चिम बंगाल में राजनीतिक माहौल पहले से ही काफी गर्म है। हाल के दिनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं और समर्थकों के बीच कई टकराव और विरोध-प्रदर्शन की घटनाएं सामने आई हैं। ऐसे माहौल में गंगारामपुर की यह घटना भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। फिलहाल पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच में किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि सामने नहीं आई है और पहचान की पुष्टि होने के बाद मामला समाप्त कर दिया गया।  

Deepshikha जुलाई 3, 2026 0
TMC Dispute
चुनाव आयोग ने टीएमसी विवाद पर दोनों गुटों से जवाब मांगा, 6 जुलाई शाम 5:30 बजे तक देना होगा जवाब

नई दिल्ली, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में नेतृत्व और चुनाव चिन्ह को लेकर बढ़े विवाद के बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को नोटिस जारी कर अपना-अपना पक्ष रखने को कहा है। आयोग ने ममता बनर्जी गुट और बागी गुट से 6 जुलाई 2026 को शाम 5:30 बजे तक दावे, प्रति-दावे और संबंधित दस्तावेज जमा करने के निर्देश दिए हैं।   दोनों गुटों से मांगे गए दावे और दस्तावेज   चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों से पार्टी के संगठनात्मक चुनाव, अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं , पार्टी के संविधान और 'जुड़वां फूल'  चुनाव चिन्ह पर अपने दावे के समर्थन में सभी आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग दोनों पक्षों की ओर से दाखिल किए जाने वाले रिकॉर्ड का परीक्षण करेगा।   चुनाव चिन्ह पर बना है मुख्य विवाद   बागी गुट का दावा है कि उसे पार्टी के अधिकांश विधायकों और पदाधिकारियों का समर्थन प्राप्त है, इसलिए वही असली टीएमसी है। वहीं ममता बनर्जी के नेतृत्व वाला गुट पार्टी के संविधान और संगठनात्मक ढांचे के आधार पर खुद को वास्तविक तृणमूल कांग्रेस बता रहा है।   6 जुलाई के बाद होगी अगली कार्रवाई   निर्धारित समय सीमा तक दोनों पक्षों के जवाब मिलने के बाद चुनाव आयोग दस्तावेजों की समीक्षा करेगा। आवश्यकता पड़ने पर आयोग अगली सुनवाई की तारीख तय करेगा और इसके बाद पार्टी के नाम, संगठन और चुनाव चिन्ह को लेकर आगे का निर्णय लिया जाएगा।   राजनीतिक हलकों की नजर आयोग के फैसले पर   टीएमसी से जुड़े इस विवाद पर पूरे देश की राजनीतिक नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग का फैसला पश्चिम बंगाल की राजनीति और पार्टी के भविष्य पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।

anjali kumari जुलाई 3, 2026 0
TMC MP Mahua Moitra speaks in a video after alleging that protesters threw eggs and rotten brinjals outside her residence or office premises in Kolkata.
महुआ मोइत्रा ने घर पर अंडे और सड़े बैंगन फेंके जाने का लगाया आरोप, सोशल मीडिया पर वीडियो साझा किया

कोलकाता: Mahua Moitra ने दावा किया है कि उनके घर (या कार्यालय परिसर) के बाहर कुछ लोगों ने अंडे और सड़े बैंगन फेंके। उन्होंने घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा करते हुए इसके लिए भारतीय जनता पार्टी के समर्थकों को जिम्मेदार ठहराया और सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। वीडियो शेयर कर लगाए गंभीर आरोप महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया कि भाजपा समर्थक उनके परिसर के बाहर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उन्होंने पश्चिम बंगाल पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। अपने पोस्ट में उन्होंने कई विपक्षी नेताओं, जिनमें Mamata Banerjee, Rahul Gandhi, Akhilesh Yadav, Supriya Sule, M. K. Stalin और Arvind Kejriwal को टैग किया। वीडियो में क्या दिखाई देता है? करीब एक मिनट के वीडियो में एक व्यस्त सड़क पर भीड़, पुलिसकर्मी और कई लोग मोबाइल से वीडियो बनाते दिखाई देते हैं। वीडियो ऊपरी मंजिल से रिकॉर्ड किया गया प्रतीत होता है। महुआ मोइत्रा का कहना है कि वे करीब एक घंटे तक अपने कार्यालय के अंदर ही रहीं क्योंकि बाहर का माहौल तनावपूर्ण था। उन्होंने वीडियो में यह भी कहा कि केंद्रीय सुरक्षा बल (CRPF) के जवान मौके पर मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई हस्तक्षेप नहीं किया। पहले भी दी थी चेतावनी महुआ मोइत्रा ने इससे पहले सार्वजनिक रूप से कहा था कि यदि कोई उन पर अंडे फेंकेगा या इस तरह का हमला करेगा तो वह संबंधित लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराएंगी और कानूनी कार्रवाई करेंगी। सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं घटना का वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। कुछ यूज़र्स ने घटना की आलोचना की, जबकि कुछ ने राजनीतिक टिप्पणी करते हुए इसे लेकर व्यंग्यात्मक पोस्ट भी साझा किए। आधिकारिक पुष्टि नहीं फिलहाल इस मामले में आरोपों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। उपलब्ध जानकारी मुख्य रूप से महुआ मोइत्रा द्वारा साझा किए गए वीडियो और उनके सार्वजनिक बयानों पर आधारित है। इस संबंध में पुलिस या अन्य संबंधित एजेंसियों की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया का इंतजार है।  

Deepshikha जुलाई 2, 2026 0
Kolkata Police personnel deployed near Victoria House after Section 163 of the BNSS was imposed in central Kolkata ahead of political events.
कोलकाता में 30 अगस्त तक लागू रहेगी धारा 163, फैसले पर तृणमूल कांग्रेस का विरोध तेज

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के मध्य क्षेत्र में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू कर दी है। यह आदेश 2 जुलाई से 30 अगस्त तक प्रभावी रहेगा। इस अवधि में पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने, धरना-प्रदर्शन, सभा और जुलूस निकालने पर प्रतिबंध रहेगा। पुलिस के इस फैसले का तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने कड़ा विरोध किया है और इसे अदालत में चुनौती देने की बात कही है। विक्टोरिया हाउस के सामने नहीं होगा 21 जुलाई का कार्यक्रम कोलकाता पुलिस ने विक्टोरिया हाउस के सामने 21 जुलाई शहीद दिवस कार्यक्रम आयोजित करने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। बताया गया कि तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुटों की ओर से की गई अनुमति संबंधी अपील भी खारिज कर दी गई। इसके बाद पुलिस आयुक्त अजय नंदा ने पूरे इलाके में धारा 163 लागू करने का आदेश जारी किया। पुलिस ने क्या कहा? कोलकाता पुलिस के अनुसार, विश्वसनीय खुफिया सूचनाओं के आधार पर आशंका है कि संबंधित क्षेत्र में हिंसक प्रदर्शन हो सकते हैं, जिससे शांति और सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा है। आदेश के तहत— पांच या उससे अधिक लोगों के एकत्र होने पर रोक रहेगी। धरना, प्रदर्शन और जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी। लाठी या अन्य संभावित खतरनाक वस्तुओं के साथ समूह में एकत्र होना भी प्रतिबंधित रहेगा। तृणमूल कांग्रेस ने जताया विरोध तृणमूल कांग्रेस ने पुलिस के आदेश को लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन बताया है। पार्टी सांसद Kalyan Banerjee ने कहा कि मध्य कोलकाता में इस तरह धारा 163 लागू करना पूरी तरह गैरकानूनी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार राजनीतिक विरोध से डर रही है और इस आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी। महुआ मोइत्रा ने भी उठाए सवाल कृष्णानगर से सांसद Mahua Moitra ने भी फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक आंदोलनों को इस तरह रोका नहीं जा सकता। उन्होंने न्यायपालिका पर भरोसा जताते हुए कहा कि पार्टी राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर इस आदेश का विरोध करेगी। नाम को लेकर स्पष्टता समाचार में यह उल्लेख किया गया है कि "मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी" के फैसले पर विरोध हुआ। वर्तमान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री Mamata Banerjee हैं, जबकि Suvendu Adhikari राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं। इसलिए समाचार में नाम संबंधी त्रुटि प्रतीत होती है।  

Deepshikha जुलाई 1, 2026 0
TMC MP Mahua Moitra addresses the media while raising questions over transparency in Ayodhya Ram Temple donation records.
राम मंदिर दान विवाद पर महुआ मोइत्रा का हमला, पूछा- 1250 किलो सोना, 70 किलो चांदी और हजारों करोड़ का चंदा कहां गया?

  नई दिल्ली: अयोध्या के श्रीराम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान में कथित अनियमितताओं को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। इस विवाद में अब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा भी खुलकर सामने आ गई हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर सवाल उठाते हुए मंदिर में चढ़ाए गए सोने, चांदी और नकद दान के हिसाब को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं। महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि मंदिर में आए हजारों करोड़ रुपये के दान और बड़ी मात्रा में सोना-चांदी के संबंध में पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की मांग की है। '3500 करोड़ रुपये के कच्चे दान का हिसाब कहां है?' महुआ मोइत्रा ने कहा कि वर्ष 2020 में ऑडिट के दौरान यह चिंता जताई गई थी कि मंदिर में आने वाले "रॉ डोनेशन" (बिना रसीद वाले दान) का व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं रखा जा रहा था। उन्होंने आरोप लगाया कि अब तक करीब 3,500 करोड़ रुपये का ऐसा दान आया, जिसका पूरा लेखा-जोखा सार्वजनिक नहीं किया गया। उनके मुताबिक, श्रद्धालुओं को यह जानने का अधिकार है कि उनके द्वारा दिया गया दान किस प्रकार सुरक्षित रखा गया और उसका उपयोग कैसे किया गया। 1250 किलो सोना और 70 किलो चांदी को लेकर उठाए सवाल टीएमसी सांसद ने दावा किया कि मंदिर में चढ़ाए गए 1,250 किलो सोने, 70 किलो चांदी और लगभग 200 करोड़ रुपये नकद दान के संबंध में स्पष्ट जानकारी सामने आनी चाहिए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिंधी समुदाय द्वारा दान की गई एक-एक किलो वजन वाली 200 चांदी की ईंटों का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया है। उन्होंने पूछा कि इन बहुमूल्य दानों का वर्तमान विवरण क्या है। 'सिर्फ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से जवाबदेही खत्म नहीं होती' महुआ मोइत्रा ने इस मामले में स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की कार्रवाई और अब तक हुई गिरफ्तारियों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से पूरे मामले की जवाबदेही तय नहीं हो जाती। उन्होंने कहा कि यदि जांच में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं, तो पूरे प्रशासनिक ढांचे की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। योगी सरकार और केंद्र पर भी साधा निशाना महुआ मोइत्रा ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान पर भी प्रतिक्रिया दी, जिसमें उन्होंने इस मामले का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील की थी। टीएमसी सांसद ने कहा कि यह मामला करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और ऐसे में दान की पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि सवाल उठाना राजनीतिक नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने का विषय है। जांच जारी, ट्रस्ट ने आरोपों से किया इनकार इस बीच, कथित अनियमितताओं के मामले में जांच एजेंसियों की कार्रवाई जारी है। मामले में कई लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और नकदी भी बरामद होने का दावा किया गया है। वहीं, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहले भी कहा है कि श्रद्धालुओं द्वारा दान की गई चांदी की ईंटें, आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं पूरी तरह सुरक्षित हैं तथा उनके रखरखाव और रिकॉर्ड की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाता है। जांच एजेंसियां पूरे मामले की पड़ताल कर रही हैं। ऐसे में दान में कथित गड़बड़ी और उससे जुड़े सभी आरोपों पर अंतिम स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
West Bengal Assembly prepares to debate the Uniform Civil Code (UCC) Bill during a crucial legislative session.
बंगाल विधानसभा में आज UCC विधेयक पर संग्राम, सत्ता पक्ष बनाम टीएमसी के दोनों गुटों के बीच होगी तीखी टक्कर

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा का सोमवार का सत्र राजनीतिक रूप से बेहद अहम रहने वाला है। राज्य की भाजपा सरकार अपना बहुप्रतीक्षित और विवादास्पद समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक सदन में पेश करने जा रही है। विधानसभा चुनाव में सत्ता परिवर्तन के बाद यह भाजपा सरकार का सबसे बड़ा वैचारिक विधेयक माना जा रहा है। इस विधेयक पर मुकाबला सिर्फ सरकार और विपक्ष के बीच नहीं होगा। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भीतर चल रही राजनीतिक खींचतान भी विधानसभा में खुलकर सामने आने की संभावना है। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले दोनों गुट यूसीसी के विरोध को लेकर अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। UCC पर टीएमसी के दोनों गुट आमने-सामने विधानसभा में यूसीसी विधेयक पर बहस के दौरान टीएमसी के दोनों गुट सरकार को घेरने की तैयारी कर चुके हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने अपने विधायकों को विधेयक का कड़ा विरोध करने के निर्देश दिए हैं। ममता बनर्जी का कहना है कि समान नागरिक संहिता देश की सामाजिक विविधता, सांस्कृतिक पहचान और संवैधानिक मूल्यों के खिलाफ है। उनका आरोप है कि इस तरह के कानून से भारत की बहुलतावादी व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। वहीं विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी का गुट भी सरकार पर निशाना साधने की रणनीति बना चुका है। उनका कहना है कि सरकार बिना व्यापक चर्चा और सामाजिक सहमति के इतना महत्वपूर्ण कानून लाने की जल्दबाजी कर रही है। भाजपा के पास बहुमत, विधेयक पारित होने की संभावना विधानसभा में भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण विधेयक के पारित होने में किसी बड़ी बाधा की संभावना नहीं है। इसके बावजूद सदन में होने वाली बहस राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि यह राज्य की नई राजनीतिक दिशा और विपक्ष की रणनीति दोनों को स्पष्ट करेगी। क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)? समान नागरिक संहिता का उद्देश्य सभी नागरिकों के लिए धर्म से अलग एक समान नागरिक कानून लागू करना है। इसके तहत विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति के अधिकार, गोद लेने और पारिवारिक मामलों में अलग-अलग धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों के स्थान पर एक समान कानूनी व्यवस्था लागू करने का प्रस्ताव है। भाजपा लंबे समय से इसे अपने प्रमुख चुनावी और वैचारिक एजेंडे का हिस्सा बताती रही है। पार्टी का तर्क है कि इससे सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलेंगे और कानून के समक्ष समानता सुनिश्चित होगी। सदन में होगी विस्तृत चर्चा विधानसभा की कार्यवाही सोमवार सुबह 11 बजे शुरू होगी। सरकार पहले अन्य विधेयक पेश करेगी, जिसके बाद दूसरे चरण में यूसीसी विधेयक पर चर्चा होने की संभावना है। इस दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, विपक्ष के नेता रीतब्रत बनर्जी और विभिन्न दलों के वरिष्ठ विधायक अपनी-अपनी बात रखेंगे। बहस के बाद सरकार विधेयक को सदन से पारित कराने का प्रयास करेगी। राजनीतिक नजरें विधानसभा पर यूसीसी विधेयक पर होने वाली चर्चा को केवल एक कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीति का अहम पड़ाव माना जा रहा है। एक ओर भाजपा इसे अपने वैचारिक एजेंडे की बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहती है, वहीं टीएमसी के दोनों गुट इस मुद्दे पर अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता और नेतृत्व क्षमता साबित करने की कोशिश करेंगे। ऐसे में सोमवार का विधानसभा सत्र राज्य की राजनीति के लिए काफी अहम रहने वाला है।  

Deepshikha जून 29, 2026 0
Police arrest Kalicharan Banerjee, former OSD to ex-Kolkata Mayor Firhad Hakim, in connection with the Taratala warehouse shed collapse investigation.
तारातला हादसा: पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के पूर्व OSD कालीचरण बनर्जी गिरफ्तार, पुलिस कर रही पूछताछ

  कोलकाता: कोलकाता के चर्चित तारातला गोदाम शेड हादसे में जांच तेज हो गई है। गुरुवार को पुलिस ने पूर्व मेयर फिरहाद हकीम के पूर्व ओएसडी (Officer on Special Duty) कालीचरण बनर्जी को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी मुख्यमंत्री द्वारा विधानसभा में दिए गए बयान के कुछ घंटों बाद हुई, जिससे मामले ने नया राजनीतिक मोड़ ले लिया है। पुलिस फिलहाल कालीचरण बनर्जी से लगातार पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि विवादित भवन योजना को मंजूरी देने की प्रक्रिया में उनकी क्या भूमिका थी। मुख्यमंत्री के बयान के बाद हुई कार्रवाई गुरुवार को विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने तारातला हादसे का मुद्दा उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यदि कालीचरण बनर्जी से पूछताछ की जाए तो पूरे मामले का सच सामने आ जाएगा। इसके कुछ ही घंटों बाद पुलिस ने कालीचरण बनर्जी को हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद उन्हें औपचारिक रूप से गिरफ्तार कर लिया। निर्माण योजना की मंजूरी पर उठे सवाल जांच का केंद्र उस भवन की स्वीकृति प्रक्रिया है, जिसके ढहने से यह हादसा हुआ। आरोप है कि कालीचरण बनर्जी की मंजूरी के बिना कोलकाता नगर निगम (KMC) में कोई भी निर्माण योजना आगे नहीं बढ़ती थी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि संबंधित भवन की योजना किन परिस्थितियों में मंजूर की गई और क्या नियमों की अनदेखी की गई थी। फिरहाद हकीम पर भी लगे आरोप विधानसभा में शुभेंदु अधिकारी ने कुछ दस्तावेज लहराते हुए दावा किया कि भवन की योजना पर तत्कालीन मेयर फिरहाद हकीम के हस्ताक्षर मौजूद हैं। उनका आरोप है कि संरचनात्मक खामियों के बावजूद परियोजना को मंजूरी दी गई। इन आरोपों पर फिरहाद हकीम की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। तृणमूल ने आरोपों को बताया राजनीतिक तृणमूल कांग्रेस के नेता कुणाल घोष ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कालीचरण बनर्जी को लेकर लगाए जा रहे दावे तथ्यात्मक नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया पहले से चल रही थी और इसे राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। जांच जारी, सामने आ सकते हैं नए नाम पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और सभी दस्तावेजों तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। जांच के दौरान यदि अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। तारातला हादसे को लेकर प्रशासन और जांच एजेंसियों की कार्रवाई फिलहाल जारी है, जबकि इस मामले को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति भी लगातार गरमाती जा रही है।  

Deepshikha जून 26, 2026 0
TMC MP Abhishek Banerjee during a political event amid controversy over party spending on chartered flights.
4 साल में अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स पर TMC ने खर्च किए 141 करोड़ रुपये, कुणाल घोष भी नाराज

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee की चार्टर्ड फ्लाइट यात्राओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में तृणमूल कांग्रेस ने चार्टर्ड विमानों पर करीब 141 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब चुनावी हार के बाद पार्टी के अंदर नेतृत्व और संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चार वर्षों में कितना हुआ खर्च? तृणमूल कांग्रेस की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक चार्टर्ड विमानों पर खर्च का ब्योरा इस प्रकार है: वर्ष खर्च 2022 35 करोड़ रुपये 2023 13 करोड़ रुपये 2024 56 करोड़ रुपये 2025 37 करोड़ रुपये चार वर्षों में कुल खर्च 141 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसे किसी क्षेत्रीय राजनीतिक दल द्वारा हवाई यात्रा पर किया गया असाधारण खर्च माना जा रहा है। बिजनेस क्लास के बजाय प्राइवेट जेट का इस्तेमाल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन मार्गों पर बिजनेस क्लास का टिकट 15 से 20 हजार रुपये में उपलब्ध था, वहां भी चार्टर्ड विमानों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि कई यात्राओं में एक बार की उड़ान पर करीब 5 लाख रुपये तक खर्च किए गए। कुणाल घोष ने जताई नाराजगी टीएमसी के वरिष्ठ नेता Kunal Ghosh ने इस मुद्दे पर खुलकर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यदि चार्टर्ड विमानों पर खर्च किया गया पैसा पार्टी फंड से गया है, तो वह इसका समर्थन नहीं करते। कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी के संसाधनों का उपयोग अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। बीजेपी ने साधा निशाना भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस और बनर्जी परिवार पर हमला बोला है। भाजपा विधायक Sajal Ghosh ने तंज कसते हुए कहा कि जितनी राशि चार्टर्ड विमानों पर खर्च की गई, उतने पैसों में पार्टी अपना एक नया विमान खरीद सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आम कार्यकर्ताओं के पैसे का दुरुपयोग किया गया है और पार्टी नेतृत्व को इसका जवाब देना चाहिए। चुनावी हार के बाद बढ़ीं अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से जारी अंदरूनी खींचतान के बीच चार्टर्ड फ्लाइट खर्च का यह विवाद अभिषेक बनर्जी के लिए नई चुनौती बन सकता है। पार्टी के भीतर उठते सवाल और विपक्ष के हमलों ने इस मुद्दे को राज्य की राजनीति का बड़ा विषय बना दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि तृणमूल कांग्रेस इस विवाद पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है और क्या पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का कारण बनता है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
TMC MP Mahua Moitra addresses media amid controversy over her allegations against rebel MPs over an alleged ₹40 crore defection deal.
बंगाल में ‘40 करोड़’ वाला ब्लास्ट! महुआ मोईत्रा पर भड़कीं शताब्दी रॉय, मानहानि केस की दी चेतावनी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोईत्रा द्वारा पार्टी छोड़ने वाले बागी सांसदों पर कथित तौर पर 40-40 करोड़ रुपये लेकर पाला बदलने का आरोप लगाने के बाद विवाद गहरा गया है। अब बागी सांसदों ने महुआ मोईत्रा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद कृष्णनगर से सांसद महुआ मोईत्रा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र किया और दावा किया कि पश्चिम बंगाल के बागी सांसदों ने एनडीए समर्थित पार्टी में शामिल होने के लिए भारी रकम ली है। महुआ ने आरोप लगाया कि प्रत्येक सांसद को कथित तौर पर 40 करोड़ रुपये की डील ऑफर की गई, जिसमें 4 करोड़ रुपये एडवांस और शेष राशि मासिक किस्तों में देने की व्यवस्था की गई। महुआ मोईत्रा ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया है। शताब्दी रॉय और काकोली घोष ने बुलाई बैठक महुआ के आरोपों से नाराज बागी गुट ने जवाबी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय और बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस मुद्दे पर 20 बागी सांसदों की एक वर्चुअल बैठक बुलाई। बैठक में शामिल सांसदों ने महुआ मोईत्रा के खिलाफ आपराधिक मानहानि (क्रिमिनल डिफेमेशन) का मुकदमा दायर करने पर सहमति जताई। शताब्दी रॉय का पलटवार शताब्दी रॉय ने महुआ मोईत्रा के आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह के आरोप लगाकर उनकी और अन्य सांसदों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि बिना किसी सबूत के इस प्रकार के आरोप स्वीकार नहीं किए जा सकते और जरूरत पड़ने पर कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा। कई बड़े चेहरे बागी खेमे में शामिल तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में कई हाई-प्रोफाइल चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय, अभिनेता और सांसद देव (दीपक अधिकारी), सांसद सायोनी घोष, सांसद जून मालिया, पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान तथा नेता पार्थ भौमिक जैसे नाम शामिल हैं। बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है तल्खी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ यह सियासी संकट अब कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है। यदि महुआ मोईत्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर होता है, तो यह मामला राज्य की राजनीति में और अधिक तनाव पैदा कर सकता है। फिलहाल, महुआ मोईत्रा के आरोपों और बागी सांसदों की कानूनी चेतावनी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
CID officials investigate a job scam case linked to TMC leader Abhishek Banerjee’s aide Sumit Roy in West Bengal.
कैश फॉर जॉब स्कैम: अभिषेक बनर्जी के पीए सुमित रॉय पर FIR, CID ने जारी किया लुकआउट नोटिस; कालीघाट आवास पर छापेमारी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल में शिक्षक भर्ती घोटाले के बाद अब सरकारी नौकरियों के नाम पर कथित वसूली और धोखाधड़ी का एक और बड़ा मामला सामने आया है। इस बार जांच की आंच तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee के निजी सहायक (PA) सुमित रॉय तक पहुंच गई है। मेदिनीपुर के पूर्व विधायक Sujay Hazra से पूछताछ के बाद डेबरा थाने में सुमित रॉय के खिलाफ धोखाधड़ी और जालसाजी की प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की कथित ठगी मामला डेबरा निवासी प्रसेनजीत रॉय की शिकायत के आधार पर दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि विभिन्न सरकारी विभागों में 12 पदों पर नौकरी दिलाने के नाम पर प्रति उम्मीदवार साढ़े तीन लाख रुपये की मांग की गई थी। पीड़ितों का दावा है कि विश्वास जीतने के लिए उन्हें एक होटल में ‘आशिक’ नामक व्यक्ति से मिलवाया गया, जिसने खुद को राज्य सचिवालय नबान्न का कर्मचारी बताया। इसके बाद उम्मीदवारों को कथित तौर पर विकास भवन और खाद्य भवन ले जाकर मेडिकल परीक्षण भी कराया गया। 'अभिषेक बनर्जी के पीए को पैसे देने होंगे' कहकर मांगी गई अतिरिक्त रकम शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि बाद में उनसे यह कहकर और धन की मांग की गई कि रकम अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित रॉय तक पहुंचानी है। इसके बाद उम्मीदवारों को कथित तौर पर असली नियुक्ति पत्र के बजाय रंगीन जेरॉक्स प्रतियां थमा दी गईं। जब अभ्यर्थियों को नौकरी नहीं मिली और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो उन्हें झूठे मुकदमों में फंसाने और गंभीर परिणाम भुगतने की धमकियां दी गईं। CID ने जारी किया लुकआउट सर्कुलर मामले की गंभीरता को देखते हुए Criminal Investigation Department, West Bengal (CID) ने सुमित रॉय के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर (LOC) जारी कर दिया है। जांच एजेंसियों के मुताबिक, सुमित रॉय के मोबाइल फोन की आखिरी टावर लोकेशन Kalighat स्थित अभिषेक बनर्जी के आवास के आसपास मिली थी। इसके बाद सालबनी थाने की पुलिस केंद्रीय बलों के साथ कालीघाट स्थित आवास पर पहुंची और लंबी प्रतीक्षा के बाद ताला तोड़कर परिसर के भीतर प्रवेश किया। सुमित रॉय वहां नहीं मिला। ससुराल में भी छापेमारी, आरोपी अब भी फरार पुलिस ने हुगली जिले के Serampore स्थित सुमित रॉय की ससुराल में भी छापेमारी की, लेकिन वहां भी उसका कोई सुराग नहीं मिला। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि कथित नौकरी घोटाले में कितने लोगों से धन वसूला गया और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही। मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। राजनीतिक हलकों में बढ़ी हलचल सुमित रॉय के खिलाफ FIR और CID की कार्रवाई के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। विपक्ष ने मामले को लेकर तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधना शुरू कर दिया है, जबकि पार्टी की ओर से अभी तक इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। जांच एजेंसियों का कहना है कि आरोपी की तलाश जारी है और मामले से जुड़े सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Former Siliguri Mayor Gautam Deb submits his resignation amid political uncertainty in North Bengal and TMC's organizational reshuffle.
गौतम देब ने सिलीगुड़ी मेयर पद से दिया इस्तीफा, उत्तर बंगाल में TMC के सामने नया राजनीतिक संकट

  उत्तर बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री Gautam Deb ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र नगर निगम आयुक्त को सौंप दिया, जिसके बाद उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सिलीगुड़ी नगर निगम को उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत शहरी गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में गौतम देब का इस्तीफा पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद बढ़ा दबाव हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को उत्तर बंगाल के कई प्रमुख जिलों—Darjeeling, Jalpaiguri, Alipurduar और Cooch Behar—में निराशाजनक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। खुद गौतम देब भी सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बाद से ही सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड की स्थिरता को लेकर सवाल उठने लगे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी पराजय के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक रणनीति को लेकर दबाव बढ़ गया था। इस्तीफे पर पार्षदों में मतभेद सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को गौतम देब ने मेयर-इन-काउंसिल के सदस्यों और पार्टी पार्षदों के साथ बैठक की थी। इसी दौरान उन्होंने मेयर पद छोड़ने की इच्छा जताई। सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल अभी एक वर्ष से अधिक समय तक शेष है। ऐसे में कई पार्षद नहीं चाहते थे कि वे पद छोड़ें। बैठक में इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए, लेकिन विरोध के बावजूद गौतम देब अपने फैसले पर कायम रहे और शुक्रवार को औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। संगठन में मिली नई जिम्मेदारी इस्तीफे के बीच पार्टी नेतृत्व ने गौतम देब को नई संगठनात्मक जिम्मेदारी भी सौंपी है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee ने उन्हें दार्जिलिंग जिला तृणमूल कांग्रेस (मैदानी क्षेत्र) का चेयरमैन नियुक्त किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि गौतम देब प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त होकर उत्तर बंगाल में संगठन को दोबारा मजबूत करने पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। सिलीगुड़ी नगर निगम के भविष्य पर सवाल गौतम देब के इस्तीफे के बाद सिलीगुड़ी नगर निगम की आगामी राजनीतिक दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। नगर निगम में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया और नए मेयर के चयन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर बंगाल में लगातार कमजोर पड़ती पकड़ के बीच तृणमूल कांग्रेस के लिए सिलीगुड़ी नगर निगम का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे समय में मेयर का इस्तीफा पार्टी के सामने संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी कर सकता है। उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की भविष्य की रणनीति और नए नेतृत्व की नियुक्ति पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Police detain Jahangir Khan’s wife after violent protests and stone-pelting outside Falta police station in South 24 Parganas, West Bengal.
लंबे समय से फरार टीएमसी नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार, पथराव मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

  पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में हिंसा और पथराव के मामले में पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लंबे समय से फरार रहे नेता जहांगीर खान की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई फलता थाना क्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में की है। फलता थाने के बाहर हुआ था उग्र प्रदर्शन 16 जून को दक्षिण 24 परगना के फलता थाना के पास जहांगीर खान की पत्नी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग थाने के आसपास जमा हो गए, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी और हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने पर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया गया। लाठीचार्ज से बचने के लिए तालाब में कूदे प्रदर्शनकारी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी लाठीचार्ज से बचने के लिए पास के एक तालाब में कूद गए। घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की प्रक्रिया तेज कर दी। भारत-नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार हुआ था जहांगीर खान टीएमसी नेता जहांगीर खान को हाल ही में भारत-नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ कम से कम सात आपराधिक मामले दर्ज हैं। जहांगीर खान तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर फाल्टा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बयान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार (19 जून) को कहा कि फलता हिंसा मामले में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर हमला करने वालों के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर कड़ी धाराएं लगाई गई हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, ग्रामीणों की एक भीड़ ने फलता थाने पर धावा बोलकर जेल में बंद टीएमसी नेता जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश की थी। अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 12 आरोपी पुलिस हिरासत में हैं। 13 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक और कानूनी असर फलता हिंसा और जहांगीर खान की गिरफ्तारी ने दक्षिण 24 परगना की राजनीति को गरमा दिया है। जहां एक ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं टीएमसी समर्थकों का आरोप है कि कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। आने वाले दिनों में इस मामले के राजनीतिक प्रभाव और जांच की दिशा पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Jyoti Priya Mallick
TMC को बड़ा झटका: पूर्व मंत्री ज्योति प्रिया मल्लिक ने सभी पार्टी पदों से दिया इस्तीफा

कोलकाता, एजेंसियां।  पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योति प्रिया मल्लिक ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने शुक्रवार को अपने फैसले की जानकारी सार्वजनिक करते हुए कहा कि वह पहले ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे से अवगत करा चुके हैं।   नई जिम्मेदारी मिलने के बाद आया इस्तीफा मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए उन्हें पार्टी की नई वर्किंग कमेटी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। ऐसे में उनके अचानक पद छोड़ने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।   ममता सरकार में संभाला था अहम मंत्रालय ज्योति प्रिया मल्लिक पश्चिम बंगाल सरकार में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2011 से 2021 तक राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया और उन्हें ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता था। पार्टी संगठन और सरकार दोनों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है।   ED की कार्रवाई के बाद बढ़ी थीं मुश्किलें मल्लिक का राजनीतिक सफर अक्टूबर 2023 में उस समय मुश्किलों में घिर गया था, जब कथित राशन वितरण घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया और इलाज के लिए चिकित्सकीय सुविधा की मांग की थी। इसके बाद से उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका सीमित होती चली गई।   इस्तीफे से बढ़ी सियासी हलचल ज्योति प्रिया मल्लिक के इस्तीफे को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब टीएमसी के भीतर संगठनात्मक बदलाव और कुछ नेताओं की नाराजगी को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि मल्लिक ने अपने इस्तीफे की वजह केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बताया है, लेकिन उनके इस कदम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

abhishek singh जून 19, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0