राजनीति

Gautam Deb Quits as Siliguri Mayor

गौतम देब ने सिलीगुड़ी मेयर पद से दिया इस्तीफा, उत्तर बंगाल में TMC के सामने नया राजनीतिक संकट

Deepshikha जून 20, 2026 0
Former Siliguri Mayor Gautam Deb submits his resignation amid political uncertainty in North Bengal and TMC's organizational reshuffle.
Gautam Deb Resigns as Siliguri Mayor

 

उत्तर बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री Gautam Deb ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र नगर निगम आयुक्त को सौंप दिया, जिसके बाद उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

सिलीगुड़ी नगर निगम को उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत शहरी गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में गौतम देब का इस्तीफा पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।

विधानसभा चुनाव में हार के बाद बढ़ा दबाव

हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को उत्तर बंगाल के कई प्रमुख जिलों—Darjeeling, Jalpaiguri, Alipurduar और Cooch Behar—में निराशाजनक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। खुद गौतम देब भी सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे।

इसके बाद से ही सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड की स्थिरता को लेकर सवाल उठने लगे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी पराजय के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक रणनीति को लेकर दबाव बढ़ गया था।

इस्तीफे पर पार्षदों में मतभेद

सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को गौतम देब ने मेयर-इन-काउंसिल के सदस्यों और पार्टी पार्षदों के साथ बैठक की थी। इसी दौरान उन्होंने मेयर पद छोड़ने की इच्छा जताई।

सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल अभी एक वर्ष से अधिक समय तक शेष है। ऐसे में कई पार्षद नहीं चाहते थे कि वे पद छोड़ें। बैठक में इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए, लेकिन विरोध के बावजूद गौतम देब अपने फैसले पर कायम रहे और शुक्रवार को औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया।

संगठन में मिली नई जिम्मेदारी

इस्तीफे के बीच पार्टी नेतृत्व ने गौतम देब को नई संगठनात्मक जिम्मेदारी भी सौंपी है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee ने उन्हें दार्जिलिंग जिला तृणमूल कांग्रेस (मैदानी क्षेत्र) का चेयरमैन नियुक्त किया है।

पार्टी नेतृत्व का मानना है कि गौतम देब प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त होकर उत्तर बंगाल में संगठन को दोबारा मजबूत करने पर अधिक ध्यान दे सकेंगे।

सिलीगुड़ी नगर निगम के भविष्य पर सवाल

गौतम देब के इस्तीफे के बाद सिलीगुड़ी नगर निगम की आगामी राजनीतिक दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। नगर निगम में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया और नए मेयर के चयन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर बंगाल में लगातार कमजोर पड़ती पकड़ के बीच तृणमूल कांग्रेस के लिए सिलीगुड़ी नगर निगम का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे समय में मेयर का इस्तीफा पार्टी के सामने संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी कर सकता है।

उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की भविष्य की रणनीति और नए नेतृत्व की नियुक्ति पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

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लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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NDA बैठक से दूर रहे तीन पूर्व TMC सांसद
NDA से दूरी बना रहे तीन पूर्व TMC सांसद, बोले- मतदाताओं को देना है जवाब

NDA से दूरी बना रहे तीन पूर्व TMC सांसद, बोले- मतदाताओं को देना है जवाब नई दिल्ली, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (TMC) से अलग होकर NCPI समूह में शामिल हुए तीन सांसदों ने BJP के नेतृत्व वाले NDA से दूरी बनाए रखी है। खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान और यूसुफ पठान ने NDA संसदीय दल की बैठक में हिस्सा नहीं लिया। तीनों सांसदों का कहना है कि वे अपने मतदाताओं को जवाब देने के लिए बाध्य हैं और फिलहाल NDA का हिस्सा बनने को लेकर सावधानी बरत रहे हैं।   तीनों सांसदों ने NDA बैठक से बनाई दूरी   खलीलुर रहमान, अबू ताहेर खान और यूसुफ पठान ने NDA की बैठक से दूरी बनाने का फैसला लगातार दूसरी बार लिया है। इससे NCPI के भीतर मौजूद मतभेद और राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, तीनों सांसदों ने अपने क्षेत्रों में मतदाताओं की प्रतिक्रिया को देखते हुए NDA की बैठकों में शामिल नहीं होने का फैसला किया। खास तौर पर BJP के साथ उनकी नजदीकी को लेकर मतदाताओं के एक वर्ग में सवाल उठाए गए हैं।   BJP के साथ जाने पर मतदाताओं की नाराजगी का डर   तीनों सांसदों के निर्वाचन क्षेत्र पश्चिम बंगाल के मुस्लिम बहुल इलाकों में हैं। रिपोर्ट के अनुसार, उनके NDA के साथ संभावित राजनीतिक जुड़ाव को लेकर कुछ मतदाताओं ने सवाल उठाए हैं। ऐसे में सांसद खुलकर BJP-led NDA के साथ खड़े होने से फिलहाल बच रहे हैं। अबू ताहेर खान ने साफ संकेत दिया है कि तीनों सांसद NDA का हिस्सा नहीं हैं। इससे NCPI और NDA के बीच संबंधों को लेकर स्थिति और अधिक स्पष्ट होने के बजाय राजनीतिक रूप से उलझी हुई नजर आ रही है।   TMC से अलगाव के बाद भी राजनीतिक स्थिति असमंजस में   TMC के कई सांसदों के अलग होकर NCPI समूह बनाने के बाद इस समूह के NDA के साथ तालमेल को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। कुछ NCPI सांसद NDA की बैठकों में शामिल हुए हैं, लेकिन तीनों सांसदों की लगातार अनुपस्थिति ने समूह के भीतर एकराय पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटनाक्रम के बीच लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा NCPI समूह को अलग संसदीय दल के रूप में मान्यता दिए जाने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण बना हुआ है। फिलहाल तीनों सांसदों का रुख बताता है कि वे TMC से अलग होने के बावजूद BJP और NDA के साथ अपने राजनीतिक संबंधों को लेकर बेहद सतर्क हैं।

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मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट
मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर MP हाईकोर्ट का नोटिस, BJP के नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों से मांगा जवाब

मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर MP हाईकोर्ट सख्त, BJP के नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों समेत कई को नोटिस इंदौर, एजेंसियां। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कांग्रेस नेता मीनाक्षी नटराजन की ओर से दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई करते हुए भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों समेत कई संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। याचिका में 2026 के राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया और परिणाम को चुनौती दी गई है।   राज्यसभा चुनाव को लेकर क्या है विवाद?     मीनाक्षी नटराजन ने अपनी याचिका में राज्यसभा चुनाव के दौरान हुई मतदान प्रक्रिया और चुनाव परिणाम को चुनौती दी है। उनका आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया में ऐसे पहलू रहे हैं, जिनकी न्यायिक समीक्षा जरूरी है। हाईकोर्ट ने याचिका पर प्रारंभिक सुनवाई के बाद संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर उनका जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई में पक्षकार अपना पक्ष अदालत के सामने रखेंगे।     BJP के नवनिर्वाचित सांसदों को भी नोटिस     अदालत की ओर से जारी नोटिस में चुनाव से जुड़े BJP के नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों समेत कई पक्षों को शामिल किया गया है। अब संबंधित पक्षों को याचिका में लगाए गए आरोपों और चुनाव प्रक्रिया को लेकर अपना जवाब दाखिल करना होगा.   हालांकि, नोटिस जारी होना किसी पक्ष के खिलाफ आरोप साबित होने के बराबर नहीं है। अदालत अभी याचिका में लगाए गए दावों और चुनाव प्रक्रिया से जुड़े तथ्यों की जांच करेगी।   चुनाव परिणाम को चुनौती देने की मांग     मीनाक्षी नटराजन की याचिका में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े विभिन्न बिंदुओं को उठाया गया है। कांग्रेस नेता की ओर से अदालत से चुनाव परिणाम को लेकर उचित न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की गई है।   मामले में अब BJP के नवनिर्वाचित राज्यसभा सदस्यों और अन्य प्रतिवादियों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। इसके बाद हाईकोर्ट यह तय करेगा कि याचिका पर आगे किस तरह की सुनवाई की जाए।   मध्य प्रदेश की राजनीति में बढ़ी हलचल     राज्यसभा चुनाव से जुड़ा यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस और BJP के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप लगातार जारी हैं। चुनाव प्रक्रिया को अदालत में चुनौती दिए जाने से इस मामले का राजनीतिक महत्व भी बढ़ गया है।   फिलहाल हाईकोर्ट ने केवल नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। चुनाव में कथित अनियमितता या किसी पक्ष की गलती के संबंध में अंतिम निष्कर्ष अदालत की आगे की सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही सामने आएगा।

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संसद परिसर में राहुल गांधी और किरण रिजिजू की मुलाकात
संसद में गतिरोध बरकरार, राहुल गांधी से मिले किरण रिजिजू फिर भी जारी रहा विपक्ष का हंगामा

संसद में हंगामा जारी: राहुल गांधी से किरण रिजिजू की मुलाकात, फिर भी नहीं थमा गतिरोध नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध को खत्म करने की कोशिशों के बीच बुधवार (5 अगस्त) को केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। संसद परिसर में हुई इस वन-टू-वन बैठक को सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत की पहल के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि बैठक के बाद भी लोकसभा में विपक्ष का हंगामा जारी रहा और कार्यवाही कुछ ही मिनटों में स्थगित करनी पड़ी।   राम मंदिर चढ़ावा और छात्र प्रदर्शन मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा     लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने अयोध्या राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के आरोप और दिल्ली में प्रदर्शनकारी छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। विपक्ष गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले पर बयान की मांग कर रहा है।     एक मिनट में स्थगित हुई लोकसभा कार्यवाही     हंगामा बढ़ने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इसके चलते प्रश्नकाल और शून्यकाल भी नहीं चल सके। विपक्षी सांसद लगातार अपनी मांगों को लेकर सदन में विरोध करते रहे।     राहुल गांधी से मुलाकात में प्रियंका गांधी भी रहीं मौजूद     किरण रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से उनके कार्यालय में मुलाकात की। इस बैठक के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी भी मौजूद रहीं। बैठक का उद्देश्य संसद में जारी गतिरोध को खत्म कर सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की कोशिश माना जा रहा है।     ओम बिरला ने विपक्ष से की सदन चलाने की अपील     लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामा कर रहे सांसदों से प्रश्नकाल चलने देने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रश्नकाल जनता से जुड़े मुद्दे उठाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। बिरला ने विपक्ष को भरोसा दिलाया कि प्रश्नकाल के बाद उनके मुद्दों पर चर्चा का अवसर दिया जाएगा।     मानसून सत्र में लगातार 13वें दिन कामकाज प्रभावित     संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू हुआ था। अलग-अलग मुद्दों को लेकर जारी हंगामे के कारण बुधवार को लगातार 13वें दिन प्रश्नकाल और शून्यकाल प्रभावित रहे। सरकार और विपक्ष के बीच बातचीत के प्रयासों के बावजूद सदन में गतिरोध खत्म नहीं हो पाया है।  

ranjan kumar tiwari अगस्त 5, 2026 0
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