तृणमूल कांग्रेस

NEET पेपर लीक और परीक्षा सुधारों को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्र प्रदर्शन में शामिल होने जा रहीं ममता बनर्जी
ममता बनर्जी 27 जुलाई को दिल्ली जाएंगी, NEET पेपर लीक और छात्र मुद्दे पर प्रदर्शन में होंगी शामिल

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी 27 जुलाई को दिल्ली जाएंगी और राजधानी के जंतर-मंतर पर होने वाले छात्र प्रदर्शन में शामिल होंगी। यह प्रदर्शन NEET पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ आयोजित किया जा रहा है।   छात्रों के समर्थन में उतरेंगी ममता बनर्जी   ममता बनर्जी ने छात्र आंदोलन को समर्थन देते हुए कहा है कि वह छात्रों की मांगों के साथ खड़ी हैं। उन्होंने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को लेकर चिंता जताई है।   जंतर-मंतर पर होगा प्रदर्शन   ममता बनर्जी दिल्ली में CJP के नेतृत्व वाले प्रदर्शन में हिस्सा लेंगी। इस प्रदर्शन में NEET पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और छात्रों की समस्याओं को लेकर आवाज उठाई जाएगी।   केंद्र सरकार पर पहले भी साध चुकी हैं निशाना   ममता बनर्जी ने छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और परीक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा है कि छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए।   दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई   प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।   राजनीतिक नजरिए से भी अहम दौरा   ममता बनर्जी का दिल्ली दौरा राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। छात्र मुद्दे पर विपक्षी दलों के नेताओं की सक्रियता बढ़ रही है और इस प्रदर्शन के जरिए केंद्र सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
West Bengal Sand Smuggling
बंगाल में अवैध बालू तस्करी पर मंत्री का सख्त एक्शन, 12 से 14 बालू लदे डंपर पकड़कर पुलिस को सौंपे

बीरभूम, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में अवैध बालू तस्करी के खिलाफ राज्य सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। कृषि मंत्री और मयूरेश्वर के विधायक दुध कुमार मंडल ने गुरुवार को खुद सड़क पर उतरकर अवैध बालू परिवहन के खिलाफ कार्रवाई की। मंत्री ने बिना वैध दस्तावेजों के बालू लेकर जा रहे करीब 12 से 14 डंपरों को रोककर पुलिस के हवाले कर दिया। इस कार्रवाई के बाद इलाके में बालू माफियाओं के बीच हड़कंप मच गया, जबकि स्थानीय लोगों ने मंत्री के कदम का स्वागत किया।   शिकायतों के बाद मंत्री ने संभाली कमान जानकारी के अनुसार, मंत्री को पिछले कई दिनों से अवैध बालू तस्करी की लगातार शिकायतें मिल रही थीं। आरोप था कि कई वाहन बिना आवश्यक अनुमति और वैध कागजात के बालू का परिवहन कर रहे हैं। शिकायतों की गंभीरता को देखते हुए मंत्री स्वयं सड़क पर पहुंचे और संदिग्ध डंपरों की जांच शुरू कराई। इस दौरान कई वाहनों को रोका गया और दस्तावेजों की जांच में अनियमितता मिलने पर उन्हें तत्काल पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया।   घटनास्थल पर जुटी भीड़, पुलिस ने संभाला मोर्चा मंत्री की कार्रवाई की सूचना मिलते ही मौके पर बड़ी संख्या में स्थानीय लोग एकत्र हो गए। कुछ समय के लिए इलाके में तनाव जैसी स्थिति भी बनी, लेकिन पुलिस ने हालात को जल्द ही नियंत्रित कर लिया। पकड़े गए सभी डंपरों की जांच शुरू कर दी गई है और संबंधित दस्तावेजों की बारीकी से पड़ताल की जा रही है।   अवैध कारोबार पर नहीं होगी कोई रियायत कृषि मंत्री दुध कुमार मंडल ने स्पष्ट कहा कि जिले में अवैध बालू खनन और तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने पुलिस और प्रशासन को इस अवैध कारोबार पर स्थायी रोक लगाने के निर्देश दिए और चेतावनी दी कि यदि कार्रवाई में लापरवाही बरती गई तो और कड़े कदम उठाए जाएंगे। मंत्री की इस पहल के बाद स्थानीय लोगों ने भी अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग दोहराई है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।

anjali kumari जुलाई 16, 2026 0
Koel Mallick
पश्चिम बंगाल : तृणमूल सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की चर्चित अभिनेत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की राज्यसभा सांसद कोयल मल्लिक ने राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने बुधवार को दिल्ली पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से अपना इस्तीफा सौंपा। इससे पहले जून में उन्होंने ईमेल के माध्यम से इस्तीफा भेजने की कोशिश की थी, लेकिन संसदीय नियमों के तहत उसे स्वीकार नहीं किया गया था। अब उनके औपचारिक इस्तीफे के बाद बंगाल की राजनीति में नई चर्चाओं ने जोर पकड़ लिया है।   ईमेल नहीं, खुद पहुंचकर दिया इस्तीफा जानकारी के अनुसार, कोयल मल्लिक अपने पति और फिल्म निर्माता निशपाल सिंह के साथ दिल्ली पहुंचीं और राज्यसभा सचिवालय में व्यक्तिगत रूप से इस्तीफा सौंपा। बताया जा रहा है कि विदेश यात्रा के कारण वह पहले यह प्रक्रिया पूरी नहीं कर सकी थीं। देश लौटने के बाद उन्होंने औपचारिक रूप से अपनी सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया।   हाल ही में ली थी राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ कोयल मल्लिक ने इसी वर्ष 6 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। शपथ ग्रहण के बाद उन्होंने अपने परिवार के साथ तस्वीर साझा करते हुए कहा था कि उन्हें बंगाल की जनता की सेवा करने का अवसर मिला है और वह पूरी निष्ठा से अपनी जिम्मेदारी निभाएंगी। चुनाव प्रचार के दौरान भी वह पार्टी के लिए सक्रिय दिखाई दी थीं, लेकिन उसके बाद उनकी राजनीतिक गतिविधियां सीमित हो गई थीं।   भाजपा में शामिल होने की अटकलें तेज कोयल मल्लिक के इस्तीफे के बाद उनके भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, अब तक न तो भाजपा की ओर से और न ही कोयल मल्लिक ने इस संबंध में कोई आधिकारिक बयान जारी किया है। ऐसे में उनके अगले राजनीतिक कदम को लेकर सस्पेंस बरकरार है। फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस इस्तीफे को बड़े घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यदि कोयल मल्लिक अपनी नई राजनीतिक दिशा का ऐलान करती हैं तो इसका असर पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी पड़ सकता है।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
Madan Mitra
मदन मित्रा ने TMC से दिया इस्तीफा, ऋतब्रत बनर्जी के गुट में हुए शामिल; बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी। इसके साथ ही उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल होने का ऐलान किया। इस फैसले को TMC के भीतर बढ़ती अंदरूनी खींचतान का बड़ा संकेत माना जा रहा है।   नेतृत्व से नाराजगी बनी वजह   मदन मित्रा ने अपने इस्तीफे के पीछे पार्टी नेतृत्व से मतभेद को प्रमुख कारण बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि संगठन के भीतर उनकी बातों को महत्व नहीं दिया जा रहा था और पार्टी में फैसले लेने की प्रक्रिया बदल गई है। रिपोर्टों के मुताबिक उन्होंने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर भी सवाल उठाए।   बंगाल की राजनीति में बढ़ी हलचल   मदन मित्रा के इस कदम के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि विधानसभा चुनाव के बाद TMC के भीतर उभर रहे मतभेद अब खुलकर सामने आने लगे हैं।   TMC के लिए बड़ा झटका   मदन मित्रा लंबे समय से ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिने जाते रहे हैं। ऐसे में उनका पार्टी छोड़ना TMC के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। हाल ही में उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारी भी दी गई थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया।   आगे की रणनीति पर नजर   मदन मित्रा के बागी गुट में शामिल होने के बाद अब सभी की नजर पश्चिम बंगाल की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और TMC नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर और भी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 16, 2026 0
TMC Relief
कलकत्ता हाईकोर्ट से टीएमसी को अंतरिम राहत, फ्रीज बैंक खातों से सीमित खर्च की मिली अनुमति

कोलकाता, एजेंसियां। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पार्टी के तीन बैंक खातों में जमा करीब 440 करोड़ रुपये फ्रीज किए जाने के मामले में अदालत ने अंतरिम आदेश जारी करते हुए सीमित वित्तीय लेन-देन की अनुमति दे दी है। अदालत ने स्पष्ट किया कि टीएमसी अपने दैनिक संगठनात्मक कार्य, प्रशासनिक खर्च और अदालतों में चल रहे मामलों से जुड़े कानूनी खर्चों के लिए इन खातों से राशि निकाल सकती है। हालांकि, खातों का संचालन पूरी तरह पार्टी के नियंत्रण में नहीं होगा।   स्पेशल ऑफिसर रखेंगे हर लेन-देन पर नजर जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए पूर्व न्यायाधीश सुब्रत तालुकदार को स्पेशल ऑफिसर नियुक्त किया है। वे 30 सितंबर 2026 तक खातों के संचालन और धन निकासी की निगरानी करेंगे। अदालत के निर्देशानुसार, पार्टी के अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता द्वारा जारी प्रत्येक चेक पर स्पेशल ऑफिसर के काउंटर सिग्नेचर के बाद ही बैंक भुगतान करेगा।   केवल आवश्यक खर्चों की अनुमति हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि खातों से केवल नियमित संगठनात्मक खर्च, कर्मचारियों के वेतन और कानूनी मामलों से जुड़े भुगतान ही किए जा सकेंगे। किसी भी बड़े, असामान्य या पूंजीगत खर्च पर फिलहाल रोक रहेगी। अदालत का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जांच पूरी होने तक धन का उपयोग केवल आवश्यक कार्यों के लिए ही हो।   पुलिस कार्रवाई पर अदालत ने जताई नाराजगी सुनवाई के दौरान अदालत ने शिकायत दर्ज होने के महज 24 घंटे के भीतर बैंक खाते फ्रीज किए जाने पर सवाल उठाए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि सामान्य मामलों में पुलिस की कार्रवाई धीमी रहती है, लेकिन इस प्रकरण में असाधारण तेजी दिखाई गई, जिसके पर्याप्त कारण रिकॉर्ड पर नजर नहीं आते।   गुटबाजी पर फैसला नहीं, अगली सुनवाई सितंबर में टीएमसी के भीतर नेतृत्व विवाद को लेकर उठे सवालों पर अदालत ने कहा कि यह आदेश केवल अंतरिम राहत के लिए है और इससे किसी भी गुट के वैध होने का फैसला नहीं माना जाएगा। पार्टी के वास्तविक नेतृत्व का मुद्दा अभी निर्वाचन आयोग के समक्ष विचाराधीन है। इस मामले की अगली सुनवाई 21 सितंबर 2026 को होगी, जिसमें आगे की स्थिति पर निर्णय लिया जाएगा।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
Mamata Banerjee
ममता बनर्जी की रैली में हंगामा, प्रदर्शनकारियों ने फेंके अंडे; TMC प्रमुख की सुरक्षा पर उठे सवाल

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (TMC) प्रमुख ममता बनर्जी की रैली के दौरान कोलकाता में हंगामा हो गया। प्रदर्शनकारियों ने कथित तौर पर रैली के दौरान अंडे फेंके और नारेबाजी की। घटना के बाद राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है और ममता बनर्जी की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं।   TMC की विरोध रैली के दौरान हुआ विवाद   जानकारी के अनुसार, ममता बनर्जी के नेतृत्व में कोलकाता में एक विरोध मार्च निकाला गया था। इसी दौरान कुछ लोगों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए कथित तौर पर अंडे फेंके और नारे लगाए। घटना के बाद मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति को संभाला।   रैली में लगे विरोधी नारे   रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों की ओर से नारेबाजी भी की गई, जिसके बाद रैली स्थल पर तनाव की स्थिति बन गई। पुलिस और सुरक्षा बलों ने स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।   सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल   घटना के बाद TMC नेताओं ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। पार्टी की ओर से आरोप लगाया गया कि राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान इस तरह का विरोध सुरक्षा में चूक को दर्शाता है।   राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज   इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। TMC और विपक्षी दलों के बीच बयानबाजी शुरू हो गई है। ममता बनर्जी ने भी रैली के दौरान हुई घटनाओं को लेकर सरकार और पुलिस पर सवाल उठाए हैं।   पुलिस कर रही मामले की जांच   प्रशासन की ओर से पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि प्रदर्शनकारी कौन थे और वे सुरक्षा व्यवस्था के बीच तक कैसे पहुंचे।

abhishek singh जुलाई 9, 2026 0
TMC Headquarter
TMC मुख्यालय पर सियासी संग्राम तेज, बागी गुट के कब्जे के बाद बढ़ा विवाद

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर जारी सत्ता संघर्ष अब खुलकर सामने आ गया है। कोलकाता स्थित पार्टी के राज्य मुख्यालय पर बागी गुट के नियंत्रण के बाद राजनीतिक विवाद और गहरा गया है। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने शुक्रवार को पार्टी कार्यालय पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद परिसर में तनाव बढ़ गया। स्थिति को देखते हुए मौके पर CRPF और कोलकाता पुलिस के जवान तैनात किए गए।   बागी गुट ने जताया मुख्यालय पर दावा बताया जा रहा है कि बागी गुट ने नई दिल्ली में चुनाव आयोग के समक्ष पार्टी के नाम, फंड और चुनाव चिह्न पर दावा पेश करने के एक दिन बाद यह कदम उठाया। ऋतब्रत बनर्जी अपने समर्थक नेताओं के साथ पार्टी कार्यालय पहुंचे और वहां लगे पुराने साइनबोर्ड हटाकर नया बैनर लगा दिया। बागी गुट ने वरिष्ठ विधायक अरूप रॉय को नया चेयरमैन घोषित करने का भी दावा किया।   बागी नेताओं का कहना है कि कार्यालय का पुराना किराया समझौता समाप्त हो चुका था और नई वर्किंग कमेटी के तहत नया समझौता किया गया है। उनका दावा है कि कार्यालय पर उनका वैध अधिकार है, हालांकि उन्होंने ममता बनर्जी के प्रति सम्मान जताते हुए अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को स्वीकार करने से इनकार किया।   ममता गुट ने लगाया अवैध कब्जे का आरोप मुख्यालय पर कब्जे की खबर के बाद ममता बनर्जी समर्थक नेताओं ने इसे अवैध कार्रवाई बताते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। वरिष्ठ नेता मदन मित्रा ने आरोप लगाया कि बागी गुट को केंद्रीय सुरक्षा बलों का संरक्षण मिल रहा है। वहीं टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने बागी नेताओं पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि पार्टी इस कार्रवाई को अदालत और जनता दोनों के सामने चुनौती देगी।   अब चुनाव आयोग के फैसले पर निगाहें कोलकाता पुलिस ने स्पष्ट किया है कि कार्यालय के स्वामित्व और लीज से जुड़े दस्तावेजों की जांच के बाद ही वहां नियमित राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति दी जाएगी। इस बीच चुनाव आयोग ने दोनों गुटों से 6 जुलाई की शाम 5:30 बजे तक पार्टी के संगठन, नाम और चुनाव चिह्न पर अपने-अपने दावे और जवाब दाखिल करने को कहा है। अब इस विवाद का अगला बड़ा फैसला चुनाव आयोग के रुख पर निर्भर करेगा।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Swapan Das Gupta
बंगाल में जारी रहेंगी ममता सरकार की योजनाएं, लाभार्थियों का होगा सत्यापन

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की नई भाजपा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कार्यकाल में शुरू की गई प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाओं को जारी रखने का फैसला किया है। हालांकि सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन योजनाओं का लाभ केवल पात्र लोगों तक पहुंचाने के लिए लाभार्थियों की व्यापक जांच कराई जाएगी। सरकार का उद्देश्य फर्जीवाड़े पर रोक लगाकर योजनाओं को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाना है।   वोटर लिस्ट और डोर-टू-डोर सत्यापन से होगी जांच सरकारी अधिकारियों के अनुसार सभी लाभार्थियों के रिकॉर्ड का मिलान अंतिम मतदाता सूची से किया जाएगा। जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हट चुके हैं या जो अपात्र पाए जाएंगे, उन्हें योजनाओं की सूची से बाहर किया जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर घर-घर जाकर भी सत्यापन किया जाएगा, ताकि सरकारी सहायता केवल वास्तविक और जरूरतमंद लाभार्थियों तक पहुंचे। नवंबर 2025 में विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के दौरान करीब 80 लाख संदिग्ध नाम हटाए गए थे, जिनके आधार पर अब कल्याणकारी योजनाओं की भी समीक्षा की जाएगी।   वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने क्या कहा ? राज्य के वित्त मंत्री स्वपन दासगुप्ता ने अपने पहले बजट भाषण में संकेत दिया था कि सभी सामाजिक सुरक्षा योजनाएं जारी रहेंगी, लेकिन उनमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सुधार किए जाएंगे। इसी क्रम में सरकार ने जनकल्याण शिविरों में प्राप्त नए आवेदनों की जांच शुरू कर दी है। सत्यापन पूरा होने तक वृद्धावस्था और विधवा पेंशन जैसी कुछ योजनाओं के वितरण को अस्थायी रूप से रोका गया है, जबकि कन्याश्री और रूपश्री जैसी योजनाओं की भी कड़ी निगरानी की जा रही है।   वहीं, सरकार ने तृणमूल कांग्रेस की महत्वाकांक्षी 'कृषक बंधु' योजना को बंद कर दिया है। अधिकारियों का दावा है कि इस योजना में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं और फर्जी लाभार्थी शामिल थे। इसके स्थान पर भाजपा सरकार नई योजना के तहत प्रत्येक पात्र किसान को सालाना 3,000 रुपये की आर्थिक सहायता देगी। कृषि विभाग का अनुमान है कि सख्त सत्यापन के बाद मौजूदा लाभार्थियों में से 40 प्रतिशत से अधिक अपात्र नाम हटाए जा सकते हैं।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Mamata Banerjee Abhishek Banerjee
शहीद दिवस रैली अवमानना मामला: कलकत्ता हाईकोर्ट ने ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी से मांगा जवाब

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। अदालत ने शहीद दिवस रैली से जुड़े कथित अवमानना मामले में दोनों नेताओं से जवाब तलब किया है। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया है कि वे निर्धारित समय के भीतर अपना हलफनामा दाखिल करें।    क्या है पूरा मामला?   याचिकाकर्ता का आरोप है कि शहीद दिवस रैली के आयोजन के दौरान हाईकोर्ट के पहले जारी निर्देशों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। इसी आधार पर अदालत में अवमानना याचिका दायर की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा था।    हाईकोर्ट ने मांगा हलफनामा   सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अभिषेक बनर्जी को निर्देश दिया कि वे आरोपों पर अपना पक्ष स्पष्ट करते हुए हलफनामा दाखिल करें। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 17 अगस्त की नई तारीख भी तय की है, जहां दोनों पक्षों की दलीलें सुनी जाएंगी।

abhishek singh जुलाई 4, 2026 0
Mahua Moitra
अंडे-बैंगन हमले के बाद महुआ मोइत्रा ने खटखटाया हाईकोर्ट का दरवाजा, मांगी सुरक्षा

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल के कृष्णानगर से तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा पर कथित तौर पर अंडे, बैंगन और कीचड़ फेंके जाने के मामले ने अब कानूनी मोड़ ले लिया है। घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख करते हुए सुरक्षा और कानूनी संरक्षण की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी शिकायत पर पुलिस ने गंभीरता से कार्रवाई नहीं की, जबकि उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर पर तेजी दिखाई जा रही है।   हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल करने की दी अनुमति शुक्रवार को न्यायमूर्ति सौगत भट्टाचार्य की अदालत में महुआ मोइत्रा की ओर से याचिका दायर करने की अनुमति मांगी गई। उनके वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस का रवैया पक्षपातपूर्ण है और उनकी शिकायत को नजरअंदाज किया जा रहा है। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका दाखिल करने की अनुमति दे दी। अब अगली सुनवाई में इस मामले में पुलिस की भूमिका और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अदालत का रुख स्पष्ट हो सकता है।   कार्यकर्ता सभा के दौरान हुआ था विरोध प्रदर्शन यह पूरा मामला एक जुलाई को नदिया जिले के कालीगंज में आयोजित टीएमसी की कार्यकर्ता सभा से जुड़ा है। महुआ मोइत्रा कार्यक्रम में मौजूद थीं, तभी पार्टी कार्यालय के बाहर राष्ट्रीय राजमार्ग पर काले झंडे लेकर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हो गए। आरोप है कि प्रदर्शनकारियों ने “गो बैक” और “हाय-हाय” के नारे लगाए और पार्टी कार्यालय की खिड़की की ओर अंडे, बैंगन और कीचड़ फेंके। इतना ही नहीं, टीएमसी कार्यकर्ताओं और महुआ को बाहर निकलने से रोकने की भी कोशिश की गई।   पुलिस पर निष्क्रिय रहने का आरोप घटना के बाद महुआ मोइत्रा ने सोशल मीडिया पर कई वीडियो साझा कर दावा किया कि प्रदर्शनकारी भाजपा समर्थक थे और पुलिस पूरे घटनाक्रम के दौरान मूकदर्शक बनी रही। उन्होंने कहा कि पुलिस ने न तो भीड़ को हटाने की कोशिश की और न ही हमलावरों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की। महुआ का कहना है कि यह केवल राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि उनकी सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है। अब इस पूरे विवाद पर हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

abhishek singh जुलाई 3, 2026 0
Ritabrata Banerjee
बागी टीएमसी विधायक दल आज चुनाव आयोग से करेगा मुलाकात, पार्टी के नाम और चुनाव चिन्ह पर ठोक सकता है दावा

कोलकाता एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की राजनीति में जारी सियासी हलचल के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का बागी विधायक दल आज चुनाव आयोग से मुलाकात करेगा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल पार्टी के संगठनात्मक ढांचे, नेतृत्व और चुनाव चिन्ह से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष आयोग के समक्ष रखेगा।   नेतृत्व विवाद को लेकर चुनाव आयोग के सामने रखेगा पक्ष   सूत्रों के अनुसार, बागी गुट का कहना है कि पार्टी में नए नेतृत्व का गठन किया गया है और इसकी आधिकारिक जानकारी चुनाव आयोग को दी जानी चाहिए। वहीं ममता बनर्जी समर्थक गुट का दावा है कि टीएमसी की वैध राष्ट्रीय कार्यसमिति और पदाधिकारियों की सूची पहले ही आयोग को सौंप दी गई है और पार्टी पर उनका ही अधिकार है।   चुनाव चिन्ह पर भी हो सकती है चर्चा   राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बागी गुट की यह पहल भविष्य में पार्टी के नाम, चुनाव चिन्ह और संगठनात्मक अधिकारों को लेकर कानूनी विवाद का रूप ले सकती है। हालांकि, अभी तक चुनाव आयोग की ओर से इस मामले में कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।   राजनीतिक हलकों की नजर आयोग के फैसले पर   आज होने वाली इस मुलाकात पर राजनीतिक दलों और विश्लेषकों की नजरें टिकी हुई हैं। माना जा रहा है कि चुनाव आयोग के अगले कदम से इस विवाद की दिशा और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर इसका असर आने वाले दिनों में साफ हो सकेगा।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
TMC MP Abhishek Banerjee during a political event amid controversy over party spending on chartered flights.
4 साल में अभिषेक बनर्जी की चार्टर्ड फ्लाइट्स पर TMC ने खर्च किए 141 करोड़ रुपये, कुणाल घोष भी नाराज

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है। इस बीच पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद Abhishek Banerjee की चार्टर्ड फ्लाइट यात्राओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पिछले चार वर्षों में तृणमूल कांग्रेस ने चार्टर्ड विमानों पर करीब 141 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। यह खुलासा ऐसे समय हुआ है जब चुनावी हार के बाद पार्टी के अंदर नेतृत्व और संसाधनों के उपयोग को लेकर सवाल उठने लगे हैं। चार वर्षों में कितना हुआ खर्च? तृणमूल कांग्रेस की ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक चार्टर्ड विमानों पर खर्च का ब्योरा इस प्रकार है: वर्ष खर्च 2022 35 करोड़ रुपये 2023 13 करोड़ रुपये 2024 56 करोड़ रुपये 2025 37 करोड़ रुपये चार वर्षों में कुल खर्च 141 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसे किसी क्षेत्रीय राजनीतिक दल द्वारा हवाई यात्रा पर किया गया असाधारण खर्च माना जा रहा है। बिजनेस क्लास के बजाय प्राइवेट जेट का इस्तेमाल रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जिन मार्गों पर बिजनेस क्लास का टिकट 15 से 20 हजार रुपये में उपलब्ध था, वहां भी चार्टर्ड विमानों का इस्तेमाल किया गया। आरोप है कि कई यात्राओं में एक बार की उड़ान पर करीब 5 लाख रुपये तक खर्च किए गए। कुणाल घोष ने जताई नाराजगी टीएमसी के वरिष्ठ नेता Kunal Ghosh ने इस मुद्दे पर खुलकर असंतोष व्यक्त किया है। उन्होंने कहा कि यदि चार्टर्ड विमानों पर खर्च किया गया पैसा पार्टी फंड से गया है, तो वह इसका समर्थन नहीं करते। कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी के संसाधनों का उपयोग अधिक जिम्मेदारी और पारदर्शिता के साथ होना चाहिए। बीजेपी ने साधा निशाना भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर तृणमूल कांग्रेस और बनर्जी परिवार पर हमला बोला है। भाजपा विधायक Sajal Ghosh ने तंज कसते हुए कहा कि जितनी राशि चार्टर्ड विमानों पर खर्च की गई, उतने पैसों में पार्टी अपना एक नया विमान खरीद सकती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आम कार्यकर्ताओं के पैसे का दुरुपयोग किया गया है और पार्टी नेतृत्व को इसका जवाब देना चाहिए। चुनावी हार के बाद बढ़ीं अभिषेक बनर्जी की मुश्किलें पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले से जारी अंदरूनी खींचतान के बीच चार्टर्ड फ्लाइट खर्च का यह विवाद अभिषेक बनर्जी के लिए नई चुनौती बन सकता है। पार्टी के भीतर उठते सवाल और विपक्ष के हमलों ने इस मुद्दे को राज्य की राजनीति का बड़ा विषय बना दिया है। अब देखने वाली बात यह होगी कि तृणमूल कांग्रेस इस विवाद पर क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देती है और क्या पार्टी के भीतर बढ़ता असंतोष किसी बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का कारण बनता है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
TMC MP Mahua Moitra addresses media amid controversy over her allegations against rebel MPs over an alleged ₹40 crore defection deal.
बंगाल में ‘40 करोड़’ वाला ब्लास्ट! महुआ मोईत्रा पर भड़कीं शताब्दी रॉय, मानहानि केस की दी चेतावनी

  कोलकाता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया सियासी तूफान खड़ा हो गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोईत्रा द्वारा पार्टी छोड़ने वाले बागी सांसदों पर कथित तौर पर 40-40 करोड़ रुपये लेकर पाला बदलने का आरोप लगाने के बाद विवाद गहरा गया है। अब बागी सांसदों ने महुआ मोईत्रा के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। सोशल मीडिया पोस्ट से बढ़ा विवाद कृष्णनगर से सांसद महुआ मोईत्रा ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा करते हुए महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम का जिक्र किया और दावा किया कि पश्चिम बंगाल के बागी सांसदों ने एनडीए समर्थित पार्टी में शामिल होने के लिए भारी रकम ली है। महुआ ने आरोप लगाया कि प्रत्येक सांसद को कथित तौर पर 40 करोड़ रुपये की डील ऑफर की गई, जिसमें 4 करोड़ रुपये एडवांस और शेष राशि मासिक किस्तों में देने की व्यवस्था की गई। महुआ मोईत्रा ने अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया है। शताब्दी रॉय और काकोली घोष ने बुलाई बैठक महुआ के आरोपों से नाराज बागी गुट ने जवाबी रणनीति तैयार करनी शुरू कर दी है। बीरभूम से सांसद शताब्दी रॉय और बारासात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने इस मुद्दे पर 20 बागी सांसदों की एक वर्चुअल बैठक बुलाई। बैठक में शामिल सांसदों ने महुआ मोईत्रा के खिलाफ आपराधिक मानहानि (क्रिमिनल डिफेमेशन) का मुकदमा दायर करने पर सहमति जताई। शताब्दी रॉय का पलटवार शताब्दी रॉय ने महुआ मोईत्रा के आरोपों को गंभीर बताते हुए कहा कि सार्वजनिक मंच पर इस तरह के आरोप लगाकर उनकी और अन्य सांसदों की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई है। उन्होंने कहा कि बिना किसी सबूत के इस प्रकार के आरोप स्वीकार नहीं किए जा सकते और जरूरत पड़ने पर कानूनी रास्ता अपनाया जाएगा। कई बड़े चेहरे बागी खेमे में शामिल तृणमूल कांग्रेस छोड़ने वाले नेताओं में कई हाई-प्रोफाइल चेहरे शामिल बताए जा रहे हैं। इनमें वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय, अभिनेता और सांसद देव (दीपक अधिकारी), सांसद सायोनी घोष, सांसद जून मालिया, पूर्व क्रिकेटर और सांसद यूसुफ पठान तथा नेता पार्थ भौमिक जैसे नाम शामिल हैं। बंगाल की राजनीति में बढ़ सकती है तल्खी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद शुरू हुआ यह सियासी संकट अब कानूनी लड़ाई का रूप ले सकता है। यदि महुआ मोईत्रा के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दायर होता है, तो यह मामला राज्य की राजनीति में और अधिक तनाव पैदा कर सकता है। फिलहाल, महुआ मोईत्रा के आरोपों और बागी सांसदों की कानूनी चेतावनी ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है।  

Deepshikha जून 22, 2026 0
Former Siliguri Mayor Gautam Deb submits his resignation amid political uncertainty in North Bengal and TMC's organizational reshuffle.
गौतम देब ने सिलीगुड़ी मेयर पद से दिया इस्तीफा, उत्तर बंगाल में TMC के सामने नया राजनीतिक संकट

  उत्तर बंगाल की राजनीति में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री Gautam Deb ने शुक्रवार को सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर पद से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने अपना त्यागपत्र नगर निगम आयुक्त को सौंप दिया, जिसके बाद उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। सिलीगुड़ी नगर निगम को उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस का सबसे मजबूत शहरी गढ़ माना जाता रहा है। ऐसे में गौतम देब का इस्तीफा पार्टी के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। विधानसभा चुनाव में हार के बाद बढ़ा दबाव हाल ही में संपन्न पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस को उत्तर बंगाल के कई प्रमुख जिलों—Darjeeling, Jalpaiguri, Alipurduar और Cooch Behar—में निराशाजनक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। खुद गौतम देब भी सिलीगुड़ी विधानसभा सीट से चुनाव हार गए थे। इसके बाद से ही सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड की स्थिरता को लेकर सवाल उठने लगे थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी पराजय के बाद पार्टी के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक रणनीति को लेकर दबाव बढ़ गया था। इस्तीफे पर पार्षदों में मतभेद सूत्रों के मुताबिक, गुरुवार को गौतम देब ने मेयर-इन-काउंसिल के सदस्यों और पार्टी पार्षदों के साथ बैठक की थी। इसी दौरान उन्होंने मेयर पद छोड़ने की इच्छा जताई। सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड का कार्यकाल अभी एक वर्ष से अधिक समय तक शेष है। ऐसे में कई पार्षद नहीं चाहते थे कि वे पद छोड़ें। बैठक में इस मुद्दे पर मतभेद भी सामने आए, लेकिन विरोध के बावजूद गौतम देब अपने फैसले पर कायम रहे और शुक्रवार को औपचारिक रूप से इस्तीफा दे दिया। संगठन में मिली नई जिम्मेदारी इस्तीफे के बीच पार्टी नेतृत्व ने गौतम देब को नई संगठनात्मक जिम्मेदारी भी सौंपी है। मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख Mamata Banerjee ने उन्हें दार्जिलिंग जिला तृणमूल कांग्रेस (मैदानी क्षेत्र) का चेयरमैन नियुक्त किया है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि गौतम देब प्रशासनिक जिम्मेदारियों से मुक्त होकर उत्तर बंगाल में संगठन को दोबारा मजबूत करने पर अधिक ध्यान दे सकेंगे। सिलीगुड़ी नगर निगम के भविष्य पर सवाल गौतम देब के इस्तीफे के बाद सिलीगुड़ी नगर निगम की आगामी राजनीतिक दिशा को लेकर अनिश्चितता बढ़ गई है। नगर निगम में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया और नए मेयर के चयन को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर बंगाल में लगातार कमजोर पड़ती पकड़ के बीच तृणमूल कांग्रेस के लिए सिलीगुड़ी नगर निगम का महत्व और बढ़ गया है। ऐसे समय में मेयर का इस्तीफा पार्टी के सामने संगठनात्मक और राजनीतिक दोनों तरह की चुनौतियां खड़ी कर सकता है। उत्तर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की भविष्य की रणनीति और नए नेतृत्व की नियुक्ति पर अब सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Police detain Jahangir Khan’s wife after violent protests and stone-pelting outside Falta police station in South 24 Parganas, West Bengal.
लंबे समय से फरार टीएमसी नेता जहांगीर खान की पत्नी गिरफ्तार, पथराव मामले में पुलिस की बड़ी कार्रवाई

  पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में हिंसा और पथराव के मामले में पुलिस ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लंबे समय से फरार रहे नेता जहांगीर खान की पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने यह कार्रवाई फलता थाना क्षेत्र में हुए विरोध प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोप में की है। फलता थाने के बाहर हुआ था उग्र प्रदर्शन 16 जून को दक्षिण 24 परगना के फलता थाना के पास जहांगीर खान की पत्नी के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन आयोजित किया गया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग थाने के आसपास जमा हो गए, जिससे इलाके में तनावपूर्ण स्थिति पैदा हो गई। पुलिस के अनुसार, भीड़ ने सुरक्षा व्यवस्था को चुनौती दी और हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस एवं केंद्रीय सुरक्षा बलों को हस्तक्षेप करना पड़ा। स्थिति बिगड़ने पर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया गया। लाठीचार्ज से बचने के लिए तालाब में कूदे प्रदर्शनकारी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, कार्रवाई के दौरान कुछ प्रदर्शनकारी लाठीचार्ज से बचने के लिए पास के एक तालाब में कूद गए। घटना के बाद पुलिस ने पूरे मामले में केस दर्ज कर जांच शुरू की और हिंसा में शामिल लोगों की पहचान की प्रक्रिया तेज कर दी। भारत-नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार हुआ था जहांगीर खान टीएमसी नेता जहांगीर खान को हाल ही में भारत-नेपाल सीमा के पास गिरफ्तार किया गया था। उनके खिलाफ कम से कम सात आपराधिक मामले दर्ज हैं। जहांगीर खान तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर फाल्टा विधानसभा सीट से चुनाव लड़ चुके हैं और लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का बयान पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने शुक्रवार (19 जून) को कहा कि फलता हिंसा मामले में पुलिसकर्मियों और सुरक्षा बलों पर हमला करने वालों के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि आरोपियों पर कड़ी धाराएं लगाई गई हैं। मुख्यमंत्री के अनुसार, ग्रामीणों की एक भीड़ ने फलता थाने पर धावा बोलकर जेल में बंद टीएमसी नेता जहांगीर खान को छुड़ाने की कोशिश की थी। अब तक 25 लोगों की गिरफ्तारी सरकार की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इस मामले में अब तक कुल 25 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 12 आरोपी पुलिस हिरासत में हैं। 13 आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच जारी है और हिंसा में शामिल अन्य लोगों की पहचान कर आगे भी कार्रवाई की जाएगी। राजनीतिक और कानूनी असर फलता हिंसा और जहांगीर खान की गिरफ्तारी ने दक्षिण 24 परगना की राजनीति को गरमा दिया है। जहां एक ओर प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कर रहा है, वहीं टीएमसी समर्थकों का आरोप है कि कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है। आने वाले दिनों में इस मामले के राजनीतिक प्रभाव और जांच की दिशा पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।  

Deepshikha जून 20, 2026 0
Clash between TMC and BJP workers
कोलकाता एयरपोर्ट पर बवाल:TMC-BJP कार्यकर्ताओं में मारपीट

TMC के 3 बैंक अकाउंट फ्रीज, इनमें ₹440 करोड़ कोलकाता, एजेंसियां। कोलकाता एयरपोर्ट पर शुक्रवार रात भाजपा और तृणमूल कांग्रेस (TMC) कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई, जिससे वहां अफरा-तफरी मच गई। इस दौरान एक महिला बेहोश हो गई। TMC कार्यकर्ता पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी का स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंचे थे, जो दिल्ली में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मुलाकात कर लौट रहे थे। अभिषेक के एक समर्थक ने आरोप लगाया कि भाजपा से जुड़े कुछ लोग एयरपोर्ट पर आए और TMC कार्यकर्ताओं के साथ बदसलूकी करने लगे। समर्थक का दावा है कि उनके हाथों में अंडे थे और बाद में उन्होंने हथियार भी निकाले। उन्होंने सवाल उठाया कि एयरपोर्ट अथॉरिटी और सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद हथियार अंदर कैसे पहुंचे। 31 मई को भी अभिषेक के साथ मारपीट हुई थी इससे पहले भी 31 मई को पश्चिम बंगाल के सोनारपुर दक्षिण में अभिषेक से मारपीट हुई थी। यहां वे चुनाव के बाद हुई हिंसा के पीड़ित टीएमसी कार्यकर्ताओं से मिलने पहुंचे थे। TMC के 3 बैंक एकाउंट फ्रीज वहीं, शुक्रवार देर रात TMC के HDFC बैंक के 3 अकाउंट्स 50200059108322, 50200063079047, 50200063079034 को फ्रीज किया गया। इनमें कुल मिलाकर लगभग ₹440 करोड़ जमा हैं।

abhishek singh जून 20, 2026 0
Jyoti Priya Mallick
TMC को बड़ा झटका: पूर्व मंत्री ज्योति प्रिया मल्लिक ने सभी पार्टी पदों से दिया इस्तीफा

कोलकाता, एजेंसियां।  पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक और बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी की वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री ज्योति प्रिया मल्लिक ने खराब स्वास्थ्य का हवाला देते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने शुक्रवार को अपने फैसले की जानकारी सार्वजनिक करते हुए कहा कि वह पहले ही पार्टी नेतृत्व को अपने इस्तीफे से अवगत करा चुके हैं।   नई जिम्मेदारी मिलने के बाद आया इस्तीफा मल्लिक का इस्तीफा ऐसे समय सामने आया है, जब हाल ही में मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी ने संगठन में बड़े स्तर पर फेरबदल करते हुए उन्हें पार्टी की नई वर्किंग कमेटी में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी। ऐसे में उनके अचानक पद छोड़ने के फैसले ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है।   ममता सरकार में संभाला था अहम मंत्रालय ज्योति प्रिया मल्लिक पश्चिम बंगाल सरकार में लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2011 से 2021 तक राज्य के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री के रूप में कार्य किया और उन्हें ममता बनर्जी के करीबी नेताओं में गिना जाता था। पार्टी संगठन और सरकार दोनों में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती रही है।   ED की कार्रवाई के बाद बढ़ी थीं मुश्किलें मल्लिक का राजनीतिक सफर अक्टूबर 2023 में उस समय मुश्किलों में घिर गया था, जब कथित राशन वितरण घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उन्हें गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्होंने कई बार स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का हवाला दिया और इलाज के लिए चिकित्सकीय सुविधा की मांग की थी। इसके बाद से उनकी सक्रिय राजनीतिक भूमिका सीमित होती चली गई।   इस्तीफे से बढ़ी सियासी हलचल ज्योति प्रिया मल्लिक के इस्तीफे को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब टीएमसी के भीतर संगठनात्मक बदलाव और कुछ नेताओं की नाराजगी को लेकर लगातार चर्चाएं चल रही हैं। हालांकि मल्लिक ने अपने इस्तीफे की वजह केवल स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को बताया है, लेकिन उनके इस कदम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।

abhishek singh जून 19, 2026 0
Rebel TMC MPs speak to media after meeting Lok Sabha Speaker amid announcement of merger with NCPI.
टीएमसी के बागी सांसदों का बड़ा बयान, बोले- ममता बनर्जी का सम्मान हमेशा रहेगा, लेकिन बंगाल के विकास के लिए बदलाव जरूरी

  नई दिल्ली: लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 20 सांसदों के बागी रुख अपनाने और नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय के ऐलान के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस बीच बागी सांसदों ने साफ किया है कि उनका संघर्ष ममता बनर्जी के खिलाफ नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर विकसित हुई कार्यशैली और नेतृत्व के तौर-तरीकों के खिलाफ है। 'ममता बनर्जी के प्रति सम्मान हमेशा रहेगा' लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद बागी गुट के एक वरिष्ठ सांसद ने कहा कि ममता बनर्जी उनके राजनीतिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही हैं और उनके प्रति सम्मान हमेशा बना रहेगा। उन्होंने कहा, "ममता बनर्जी हमारी नेता रही हैं। उन्होंने कई नेताओं को राजनीति में आगे बढ़ने का अवसर दिया। उनके प्रति हमारे मन में सम्मान हमेशा रहेगा, लेकिन अब बंगाल के विकास और नई दिशा के लिए काम करने का समय है।" 'बंगाल के विकास के लिए दिल्ली के साथ मिलकर काम करना होगा' बागी सांसद ने कहा कि वर्ष 2026 के विधानसभा चुनाव में पार्टी की हार के बाद राज्य के विकास को प्राथमिकता देना जरूरी हो गया है। उनका दावा है कि कई केंद्रीय योजनाओं का लाभ राज्य के लोगों तक पूरी तरह नहीं पहुंच पाया। उन्होंने कहा कि बंगाल के विकास को गति देने के लिए केंद्र और राज्य के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है और अब दिल्ली के साथ मिलकर काम करने की जरूरत है। 'लड़ाई ममता से नहीं, पार्टी के भीतर के कॉर्पोरेट कल्चर से' बागी गुट के नेताओं का कहना है कि उनका विरोध ममता बनर्जी से नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर कथित तौर पर विकसित हुए केंद्रीकृत और कॉर्पोरेट शैली के प्रबंधन से है। उनका आरोप है कि पिछले कुछ वर्षों में पार्टी के सांसदों और विधायकों की भूमिका सीमित हो गई थी और फैसलों में उनकी भागीदारी कम हो गई थी। अभिषेक बनर्जी के करीबियों पर भी उठाए सवाल बागी नेताओं ने दावा किया कि पार्टी के भीतर कुछ नेताओं और प्रभावशाली समूहों के बढ़ते प्रभाव से पुराने और वरिष्ठ नेताओं में असंतोष बढ़ रहा था। उनका कहना है कि यही असंतोष धीरे-धीरे बड़े राजनीतिक बदलाव का कारण बना। इन आरोपों पर टीएमसी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।  

Deepshikha जून 18, 2026 0
Mamata Banerjee Ritabrata Banerjee
कलकत्ता हाई कोर्ट से ममता गुट को झटका, ऋतब्रत बनर्जी फिलहाल रहेंगे नेता प्रतिपक्ष

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की नियुक्ति को लेकर चल रहे विवाद में कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) नेतृत्व गुट को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने विधानसभा स्पीकर के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया, जिसके तहत टीएमसी के बागी विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया गया था। इसके साथ ही फिलहाल स्पीकर का निर्णय प्रभावी रहेगा।   यह याचिका टीएमसी नेता शोभनदेब चट्टोपाध्याय की ओर से दायर की गई थी। उन्होंने ऋतब्रत बनर्जी की नियुक्ति को चुनौती देते हुए इसे निरस्त करने की मांग की थी। दरअसल, नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए टीएमसी के दोनों गुटों ने अलग-अलग नाम भेजे थे। ममता बनर्जी समर्थक गुट ने शोभनदेब चट्टोपाध्याय का नाम प्रस्तावित किया, जबकि बागी विधायकों के गुट ने ऋतब्रत बनर्जी का नाम आगे बढ़ाया। विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र बसु ने ऋतब्रत बनर्जी के नाम को मंजूरी देते हुए उन्हें नेता प्रतिपक्ष नियुक्त कर दिया।   जस्टिस कृष्णा राव ने कहा मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस कृष्णा राव ने कहा कि फिलहाल कोई अंतरिम आदेश जारी नहीं किया जाएगा। अदालत ने दोनों पक्षों को दो सप्ताह के भीतर अपने-अपने हलफनामे दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 28 जुलाई को होगी। तब तक ऋतब्रत बनर्जी पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर बने रहेंगे।   यह खबर अपडेट  की जा रही  है ........

abhishek singh जून 18, 2026 0
Aroop Biswas Mamata Banerjee
ममता बनर्जी को पार्टी फंड से लेन देन रोक के लिए कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने HDFC बैंक को लिखी चिट्ठी

कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की राजनीतिक चुनौतियां लगातार बढ़ती नजर आ रही हैं। पार्टी के भीतर जारी असंतोष और कुछ सांसदों की बगावत के बीच अब तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पूर्व कोषाध्यक्ष अरूप बिस्वास ने पार्टी के बैंक खातों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। उन्होंने HDFC बैंक को पत्र लिखकर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के नाम पर संचालित सभी खातों से होने वाले लेन-देन को तत्काल प्रभाव से रोकने और खातों को फ्रीज करने की मांग की है।   पत्र में संगठनात्मक विवाद का हवाला अरूप बिस्वास ने अपने पत्र में कहा है कि पार्टी के भीतर इस समय गंभीर राजनीतिक और संगठनात्मक संकट चल रहा है। कई सांसद पार्टी छोड़ चुके हैं, जबकि कुछ विधायक भी खुलकर विरोध कर रहे हैं। ऐसे में यह विवाद खड़ा हो गया है कि पार्टी और उसके संसाधनों पर कानूनी रूप से किसका अधिकार है। इसी कारण उन्होंने बैंक से खातों पर रोक लगाने का अनुरोध किया है।   कोषाध्यक्ष पद से हटाए जाने का दावा टीएमसी सूत्रों के अनुसार, 5 जून 2026 को हुई पार्टी की नेशनल वर्किंग कमेटी की बैठक में अरूप बिस्वास को कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया गया था। उनकी जगह पूर्व सांसद सुभाशीष चक्रवर्ती को नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। हालांकि, अरूप के ताजा कदम ने पार्टी के अंदर चल रहे विवाद को और गहरा कर दिया है।   पार्टी फंड को लेकर बढ़ी चिंता बताया जा रहा है कि टीएमसी के खातों में लगभग ₹625.79 करोड़ की राशि जमा है। ऐसे में बैंक खातों को फ्रीज करने की मांग ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। यदि इस पर कोई कार्रवाई होती है तो पार्टी की वित्तीय गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।   विपक्ष की प्रतिक्रिया इस घटनाक्रम पर विपक्षी दलों ने भी प्रतिक्रिया दी है। CPI(M) विधायक मो. मुस्तफ़िज़ुर रहमान ने अरूप बिस्वास के कदम को उचित बताते हुए कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में खातों को फ्रीज करने की मांग सही है। वहीं एजेयूपी प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर ने दावा किया कि मौजूदा हालात में ममता बनर्जी अपनी राजनीतिक रणनीतियों को प्रभावी ढंग से लागू नहीं कर पा रही हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।

abhishek singh जून 18, 2026 0
TMC rebel leader Ritabrata Banerjee attends assembly meeting as Bengal's political crisis deepens before the budget session.
बजट सत्र से पहले ममता गुट को बड़ा झटका, सर्वदलीय बैठक में शोभनदेव को नहीं बुलाया; बागी नेता रीतब्रत को मिला न्योता

  पश्चिम बंगाल विधानसभा के 18 जून से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की आंतरिक कलह और गहरा गई है। विधानसभा की सर्वदलीय और कार्य मंत्रणा समिति की बैठक में पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार एवं ममता बनर्जी के करीबी नेता शोभनदेव चट्टोपाध्याय को आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि बागी गुट के नेता रीतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष के तौर पर बैठक में शामिल होने का निमंत्रण भेजा गया। इस घटनाक्रम को विधानसभा के भीतर बदलते सियासी समीकरणों और बागी गुट की बढ़ती ताकत के रूप में देखा जा रहा है। रीतब्रत को मिली मान्यता, शोभनदेव रहे बाहर विधानसभा सूत्रों के अनुसार, सर्वदलीय बैठक के लिए जारी सूची में शोभनदेव चट्टोपाध्याय और बेलेघाटा से विधायक कुणाल घोष का नाम शामिल नहीं था। इसके विपरीत, हाल ही में विधानसभा अध्यक्ष रथींद्र नाथ बसु द्वारा विपक्ष के नेता के रूप में मान्यता प्राप्त रीतब्रत बनर्जी को बैठक के लिए आमंत्रित किया गया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम संकेत देता है कि विधानसभा प्रशासन सदन के भीतर उभरी नई संख्या-स्थिति को स्वीकार करने लगा है। बागी गुट के साथ 65 विधायक तृणमूल कांग्रेस के भीतर शुरू हुई बगावत अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिखाई दे रही है। कुछ दिन पहले पार्टी के 80 में से 58 विधायकों ने पार्टी नेतृत्व के फैसले को खारिज करते हुए विपक्ष के नेता पद के लिए रीतब्रत बनर्जी के दावे का समर्थन किया था। अब बागी गुट का दावा है कि उसके समर्थन में 65 विधायक हैं, जिससे विधानसभा में रीतब्रत की स्थिति और मजबूत हुई है। सर्वदलीय बैठक में शामिल हुए अन्य विपक्षी नेता सर्वदलीय बैठक में विभिन्न विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। इनमें शामिल थे: नौशाद सिद्दीकी हुमायूं कबीर मुस्तफिजुर रहमान संसद से विधानसभा तक टीएमसी में संकट विधानसभा में बढ़ते संकट के बीच तृणमूल कांग्रेस को संसद में भी बड़ा झटका लग चुका है। हाल ही में पार्टी के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी से अलग होकर नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय का फैसला किया और भाजपा नीत एनडीए को समर्थन देने की घोषणा की। बजट सत्र से पहले बढ़ा सियासी तापमान बंगाल विधानसभा का बजट सत्र 18 जून से शुरू हो रहा है। उससे पहले विपक्ष के नेतृत्व को लेकर छिड़ी लड़ाई ने राज्य की राजनीति को नई दिशा दे दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि विधानसभा के भीतर बदलते संख्या बल और टीएमसी की आंतरिक टूट का असर आगामी सत्र की कार्यवाही और पश्चिम बंगाल की राजनीति पर किस रूप में पड़ता है।  

Deepshikha जून 17, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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