रांची। झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर राज्य से जुड़े कई लंबित मामलों के शीघ्र समाधान की मांग की है। पत्र में उन्होंने कोयला रॉयल्टी, केंद्र पर बकाया राशि, खनिज राजस्व, वन भूमि से जुड़े मामलों और विकास परियोजनाओं पर जल्द निर्णय लेने का आग्रह किया है। राज्य के वित्तीय हितों का उठाया मुद्दा मुख्यमंत्री ने पत्र में कहा कि झारखंड देश के खनिज उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देता है, लेकिन राज्य को उसके अनुरूप वित्तीय लाभ नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से लंबित बकाया राशि का शीघ्र भुगतान करने और खनिज संपदा से जुड़े राजस्व मामलों का समाधान करने की अपील की। विकास परियोजनाओं को गति देने की मांग हेमंत सोरेन ने पत्र में सड़क, रेल, सिंचाई और अन्य आधारभूत संरचना परियोजनाओं को तेजी से मंजूरी देने का भी अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य के आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। केंद्र से सकारात्मक सहयोग की उम्मीद मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि केंद्र सरकार झारखंड के हितों को ध्यान में रखते हुए इन मुद्दों पर सकारात्मक निर्णय लेगी। उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र के बेहतर समन्वय से झारखंड के विकास को नई गति मिल सकती है।
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा में कथित गड़बड़ी के मामले में सीआईडी की कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है। कैबिनेट बैठक के बाद प्रोजेक्ट भवन में मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार किसी भी दोषी को बख्शने वाली नहीं है और जांच में जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश इस समय कई गंभीर चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे समय में हर घटना को संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ देखने की जरूरत है। दिल्ली में विपक्ष के प्रदर्शन और राहुल गांधी को हिरासत में लिए जाने से जुड़े सवाल पर उन्होंने कहा कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को राजनीतिक दृष्टिकोण से ऊपर उठकर समाधान की दिशा में काम करना चाहिए। जेपीएससी विवाद पर मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने के लिए सरकार लगातार कदम उठा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा स्पष्ट है और उसका उद्देश्य शहर से लेकर गांव तक हर वर्ग के लोगों के हित में काम करना है। छात्र, किसान, स्वास्थ्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास जैसे सभी महत्वपूर्ण क्षेत्रों की समस्याओं के समाधान के लिए सरकार गंभीरता से कार्य कर रही है। वहीं, प्रदेश भाजपा ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर बाउरी ने आरोप लगाया कि जेपीएससी के साथ-साथ जेएसएससी की कई परीक्षाओं में भी अनियमितताएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन और भाजपा के दबाव के बाद सरकार सीआईडी जांच का सहारा ले रही है, लेकिन यह कार्रवाई केवल दिखावा है। भाजपा ने छात्रों को न्याय दिलाने की मांग करते हुए 22 जुलाई को जेपीएससी कार्यालय के घेराव का ऐलान किया है। पार्टी ने सभी भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग दोहराई है।
रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के विभिन्न विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को भरने की दिशा में बड़ी पहल शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के निर्देश पर सभी विभागों में रिक्तियों का आकलन कर भर्ती प्रक्रिया तेज करने की तैयारी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य है कि युवाओं को अधिक से अधिक सरकारी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाएं। सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह विभाग में सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य में कुल 3,51,968 नियमित पद स्वीकृत हैं, लेकिन इनमें से केवल 1,87,610 पदों पर ही कर्मचारी और अधिकारी कार्यरत हैं। यानी बड़ी संख्या में पद अब भी खाली पड़े हैं। सबसे अधिक रिक्तियां शिक्षा, स्वास्थ्य और गृह विभाग में हैं, जिससे सरकारी सेवाओं पर सीधा असर पड़ रहा है। जेपीएससी और जेएसएससी को मिली तेजी लाने की जिम्मेदारी सरकार ने झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) को पहले से विज्ञापित पदों की परीक्षाएं जल्द कराने और चयन प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी करने का निर्देश दिया है। विभागों से प्राप्त रिक्तियों के आधार पर नई अधियाचनाएं भी भेजी जाएंगी। इन पदों पर होगी नियुक्ति भर्ती अभियान के तहत सरकारी स्कूलों में सहायक शिक्षक, स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सक, नर्स और मेडिकल स्टाफ, तथा सड़क, पुल और पुलिया निर्माण कार्यों के लिए अभियंता और तकनीकी कर्मचारी नियुक्त किए जाएंगे। यदि प्रक्रिया तय समय पर आगे बढ़ी तो स्वतंत्रता दिवस के आसपास करीब 25 हजार नई नियुक्तियां की घोषणा की जा सकती है। वित्त मंत्री ने क्या कहा वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि राज्य गठन के बाद पहली बार किसी सरकार ने मानव संसाधन की कमी दूर करने पर इतने बड़े स्तर पर ध्यान दिया है। उनके अनुसार वर्तमान कार्यकाल में 40 हजार से अधिक नियुक्तियां की जा चुकी हैं और सरकार आने वाले वर्षों में स्वीकृत पदों को अधिकतम संख्या में भरने के लिए तेजी से काम करेगी। सरकार का मानना है कि बड़े पैमाने पर होने वाली यह भर्ती न केवल प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करेगी, बल्कि राज्य के हजारों युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खोलेगी।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोमवार को झारखंड मंत्रालय में पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों और चालू वित्तीय वर्ष की योजनाओं की प्रगति का आकलन किया गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य में पर्यटन, खेल और कला-संस्कृति के समग्र विकास के लिए समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर प्रभावी ढंग से लागू करने के निर्देश दिए। अंडरग्राउंड कोल माइंस और इको टूरिज्म पर विशेष जोर मुख्यमंत्री ने राज्य के बंद और अंडरग्राउंड कोयला खदान क्षेत्रों को पर्यटन के रूप में विकसित करने की संभावनाएं तलाशने का निर्देश दिया। उन्होंने सरायकेला-खरसावां, पूर्वी सिंहभूम, गिरिडीह, लातेहार, हजारीबाग, रांची समेत अन्य जिलों में इको टूरिज्म सर्किट विकसित करने पर जोर दिया। साथ ही झारखंड की नई पर्यटन नीति तैयार करने के निर्देश भी दिए। पतरातू घाटी को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के लिए व्यू पॉइंट और रोपवे परियोजनाओं में तेजी लाने को कहा गया। वहीं नेतरहाट में ग्लास वॉच टावर या ग्लास ब्रिज, कोयल व्यू पॉइंट पर कॉटेज, ट्रैकिंग सुविधा और लोध जलप्रपात में इको टूरिज्म को बढ़ावा देने की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए गए। खिलाड़ियों के लिए बेहतर सुविधाएं और स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की तैयारी खेल विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने स्पष्ट कहा कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ियों को आर्थिक तंगी के कारण दूसरे कार्य करने की नौबत नहीं आनी चाहिए। उन्होंने खिलाड़ियों का डेटाबेस तैयार करने, आर्थिक रूप से कमजोर खिलाड़ियों के लिए प्रोत्साहन योजनाएं बनाने और खेलगांव की खेल सुविधाओं के बेहतर रखरखाव के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने झारखंड में स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की स्थापना की संभावनाओं पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने को कहा। साथ ही खिलाड़ियों और प्रशिक्षकों के लिए दूसरे राज्यों की खेल अकादमियों में एक्सपोजर विजिट तथा देश के नामचीन खिलाड़ियों को झारखंड बुलाने की योजना बनाने पर भी जोर दिया। 12 हजार कलाकारों का होगा सत्यापन कला एवं संस्कृति विभाग की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया कि राज्य में अब तक लगभग 12 हजार कलाकारों का पंजीकरण किया जा चुका है। मुख्यमंत्री ने सभी पंजीकृत कलाकारों का जिला स्तर पर सत्यापन कराने और उनका डिजिटल डेटाबेस तैयार करने के निर्देश दिए। साथ ही कलाकारों को देश के प्रतिष्ठित फाइन आर्ट संस्थानों का भ्रमण कराने तथा दूसरे राज्यों के कलाकारों के साथ संवाद और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने पर बल दिया। रोजगार सृजन पर रहेगा जोर मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यटन के विकास से राज्य की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान मजबूत होगी तथा स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। उन्होंने अधिकारियों को सभी पर्यटन परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विभागीय सचिव मुकेश कुमार समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
रांची। झारखंड शिक्षक पात्रता परीक्षा (जेटेट) में क्षेत्रीय भाषाओं के रूप में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को शामिल किए जाने का विवाद अभी भी सुलझ नहीं सका है। सात सदस्यीय उच्चस्तरीय मंत्री समूह ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सौंप दी है। रिपोर्ट में चार मंत्रियों ने इन भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने का विरोध किया, जबकि तीन मंत्रियों ने समर्थन किया। अब इस मामले में अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे। सात सदस्यीय कमेटी में बंटी राय कमेटी में झामुमो के सुदिव्य कुमार, योगेंद्र प्रसाद महतो और हफीजुल हसन अंसारी के साथ कांग्रेस की शिल्पी नेहा तिर्की ने भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका को शामिल करने का विरोध किया। वहीं कांग्रेस के राधाकृष्ण किशोर, दीपिका पांडेय सिंह और राजद के संजय प्रसाद यादव इन भाषाओं को शामिल करने के पक्ष में रहे। खास बात यह रही कि कांग्रेस की मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने अपनी ही पार्टी के दो मंत्रियों से अलग राय रखी। तीन बैठकों के बाद भी नहीं बनी सहमति मुख्यमंत्री के निर्देश पर मई में पांच सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी बनाई गई थी। शुरुआती दो बैठकों में सहमति नहीं बनने के बाद अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक समाज से एक-एक मंत्री को जोड़कर कमेटी का विस्तार किया गया। तीन दौर की बैठकों में भी भाषाओं को लेकर आम सहमति नहीं बन सकी। समर्थन और विरोध के तर्क समर्थन करने वाले मंत्रियों का कहना है कि पलामू, गढ़वा, लातेहार, देवघर, गोड्डा और साहिबगंज जैसे जिलों में भोजपुरी, मगही, मैथिली और अंगिका बोलने वालों की बड़ी आबादी है। उनका तर्क है कि सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर मिलना चाहिए और जब बांग्ला व ओड़िया जैसी भाषाओं को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा मिला है, तो इन भाषाओं को बाहर रखना उचित नहीं होगा। वहीं विरोध करने वाले मंत्रियों का कहना है कि भोजपुरी, मगही और अंगिका झारखंड की मूल क्षेत्रीय भाषाएं नहीं हैं। उनका तर्क है कि राज्य की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाई पहचान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। साथ ही बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा भी इन भाषाओं को प्रशासनिक सेवा परीक्षा में शामिल नहीं किए जाने का हवाला दिया गया। अब सभी की नजर मुख्यमंत्री के अंतिम फैसले पर टिकी है।
रांची। झारखंड सरकार ने राज्य के सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए 1,042 नवचयनित सहायक शिक्षकों को नियुक्ति पत्र सौंपे। रांची के खेलगांव में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने नव नियुक्त शिक्षकों को जॉइनिंग लेटर प्रदान करते हुए उन्हें शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को संवारने की जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नियुक्ति पत्र मिलने से शिक्षकों के साथ-साथ उनके परिवारों के चेहरों पर भी खुशी साफ दिखाई दे रही है। उन्होंने कहा कि एक शिक्षक केवल पढ़ाने का कार्य नहीं करता, बल्कि समाज और देश का भविष्य तैयार करता है। सरकारी संस्थानों पर उठने वाले सवालों का जवाब बेहतर कार्य और जिम्मेदार व्यवहार से दिया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने बताया मुख्यमंत्री ने बताया कि उनकी सरकार ने पिछले कार्यकाल सहित अब तक 55 हजार से अधिक पदों पर नियुक्तियां दी हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस की सफलता का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इन स्कूलों में प्रवेश के लिए 50 हजार से अधिक आवेदन आना इस बात का प्रमाण है कि सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बढ़ रहा है। उन्होंने विज्ञान शिक्षकों की नियुक्ति को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इससे सरकारी स्कूलों के छात्र भी डॉक्टर और इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर सकेंगे। समारोह में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा समारोह में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन राज्य गठन के मूल उद्देश्य को पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020 से अब तक 38,903 युवाओं को सरकारी नौकरियां दी जा चुकी हैं। इस दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2026 के सतत व्यावसायिक विकास (CPD) कार्यक्रम का भी उद्घाटन किया, जिसका उद्देश्य झारखंड में शिक्षण गुणवत्ता और शिक्षा के स्तर को और बेहतर बनाना है।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन रविवार को रांची से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल जोन्हा फॉल पहुंचे। इस दौरान उनकी पत्नी कल्पना सोरेन भी उनके साथ मौजूद रहीं। हरी-भरी वादियों, घने जंगलों और कल-कल बहती जलधारा के बीच मुख्यमंत्री ने कुछ समय प्रकृति की गोद में बिताया। उन्होंने जोन्हा फॉल की मनमोहक सुंदरता का आनंद लिया, स्थानीय फलों का स्वाद चखा और वहां मौजूद लोगों से आत्मीयता से बातचीत कर उनकी समस्याएं भी सुनीं। मुख्यमंत्री का यह दौरा प्रकृति से जुड़ाव और स्थानीय पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में एक सकारात्मक संदेश माना जा रहा है। 'झारखंड प्रकृति का अनुपम उपहार' जोन्हा फॉल की प्राकृतिक छटा की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड प्राकृतिक संपदा से समृद्ध राज्य है और यहां की हरियाली, झरने तथा शांत वातावरण पूरे देश के लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। उन्होंने कहा कि जोन्हा फॉल की निर्मल जलधारा और प्राकृतिक सौंदर्य यह एहसास कराता है कि झारखंड वास्तव में प्रकृति का अनुपम उपहार है। मुख्यमंत्री ने लोगों से अपील की कि राज्य की प्राकृतिक धरोहरों का संरक्षण करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इनका आनंद ले सकें। पर्यटकों का स्वागत, मानसून में और बढ़ी जोन्हा फॉल की रौनक मुख्यमंत्री ने कहा कि झारखंड का हर कोना अपनी अलग प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है और राज्य आने वाले सभी पर्यटकों का खुले दिल से स्वागत करता है। उन्होंने लोगों से झारखंड के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने की अपील भी की। रांची से लगभग 40 किलोमीटर दूर स्थित जोन्हा फॉल, जिसे गौतमधारा के नाम से भी जाना जाता है, राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल है। करीब 140 फीट की ऊंचाई से गिरता यह झरना, चारों ओर फैली हरियाली और शांत वातावरण पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है। मानसून के मौसम में इसकी खूबसूरती कई गुना बढ़ जाती है, जिससे यह झारखंड पर्यटन की प्रमुख पहचान बन जाता है।
रांची। झारखंड के सरकारी प्राथमिक और मध्य विद्यालयों में शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में राज्य सरकार एक और बड़ा कदम उठाने जा रही है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन 29 जून को राजधानी रांची के खेलगांव में आयोजित समारोह में 1,042 नवनियुक्त सहायक आचार्यों को नियुक्ति पत्र सौंपेंगे। दोपहर एक बजे होने वाले इस कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न जिलों से चयनित अभ्यर्थी शामिल होंगे। सभी जिला स्थापना समितियों ने अपनी अनुशंसाएं प्राथमिक शिक्षा निदेशालय को भेज दी हैं, जिसके बाद नियुक्ति प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है। कक्षा 1 से 8 तक के विद्यालयों में होगी नियुक्ति इस चरण में कक्षा 1 से 5 तक के लिए 274 सहायक आचार्यों की नियुक्ति की जाएगी, जबकि कक्षा 6 से 8 तक के लिए 768 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलेगा। सरकार का मानना है कि इन नियुक्तियों से लंबे समय से रिक्त पड़े पद भरेंगे और सरकारी विद्यालयों में शिक्षण व्यवस्था मजबूत होगी। सामाजिक विज्ञान में सबसे ज्यादा शिक्षक कक्षा 6 से 8 के लिए विषयवार नियुक्तियों में सामाजिक विज्ञान के 387 शिक्षकों की नियुक्ति होगी, जो सबसे अधिक है। इसके अलावा गणित एवं विज्ञान के 231 तथा भाषा विषय के 150 शिक्षकों को नियुक्ति पत्र दिए जाएंगे। इससे विद्यालयों में सभी प्रमुख विषयों के लिए प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। पलामू में सबसे अधिक, रामगढ़ में सबसे कम नियुक्तियां जिलावार आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 123 शिक्षकों की नियुक्ति पलामू में होगी। इसके बाद गिरिडीह (92), कोडरमा (81), साहिबगंज (63), पश्चिमी सिंहभूम (61), देवघर (59), दुमका (54), गोड्डा (53) और पाकुड़ (51) में नियुक्तियां होंगी। वहीं रामगढ़ में केवल चार शिक्षकों की नियुक्ति की जाएगी। 26 हजार शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया जारी राज्य सरकार ने वर्ष 2023 में करीब 26 हजार शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की थी। अब तक लगभग 12,500 शिक्षकों को नियुक्ति मिल चुकी है। 29 जून को 1,042 और शिक्षकों को नियुक्ति पत्र मिलने के बाद यह संख्या और बढ़ जाएगी। शिक्षा विभाग का लक्ष्य चरणबद्ध तरीके से सभी रिक्त पदों को भरकर सरकारी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना है।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फादर्स डे पर भावुक संदेश पोस्ट किया। सीएम ने अपने पिता और झारखंड आंदोलनकारी दिशोम गुरु स्व शिबू सोरेन को याद करते लिखा कि उनके पिता ने उन्हें सिर्फ मार्गदर्शक ही नहीं, बल्कि पूरे समाज का स्वाभिमान बताया है। जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत मुख्यमंत्री ने लिखा कि पिता केवल एक रिश्ता नहीं, बल्कि संघर्ष, साहस, संकल्प और संस्कार की ऐसी पाठशाला हैं, जहां जीवन जीने का सबसे बड़ा ज्ञान मिलता है। उन्होंने कहा कि बाबा दिशोम गुरु शिबू सोरेन ने हमेशा सिखाया कि जनता का विश्वास ही सबसे बड़ी ताकत होती है और अपने राज्य व लोगों के अधिकारों के लिए हर परिस्थिति में डटकर खड़ा रहना ही सच्ची जनसेवा है। भावुक कविता साझा की हेमंत सोरेन ने अपने संदेश में एक भावुक कविता भी साझा की, जिसमें उन्होंने अपने पिता को तपती धूप में बरगद जैसी छाया, संघर्ष की राह में अटूट हौसला और समाज का स्वाभिमान बताया। संघर्ष, त्याग, विचार और आशीर्वाद से ही उन्हें जनसेवा का मार्ग मिला सीएम ने अपने पोस्ट में एक खूबसूरत और दिल को छू लेने वाली कविता भी साझा की, जिसमें उन्होंने लिखा है- “तपती धूप में बरगद-सी छाया हैं बाबा, संघर्ष की राह में अटूट हौसला हैं बाबा। हमारी सोच, हमारे संस्कार, हमारी पहचान हैं बाबा, एक पिता ही नहीं, पूरे समाज का स्वाभिमान हैं बाबा।” मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिता के संघर्ष, त्याग, विचार और आशीर्वाद से ही उन्हें जनसेवा का मार्ग मिला। फादर्स डे पर किया गया यह भावनात्मक पोस्ट लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है और बड़ी संख्या में लोग इसे साझा कर रहे हैं।
रांची। झारखंड में राज्यसभा की 2 सीटों के लिए हो रही वोटिंग खत्म हो गई। अंतिम वोट झामुमो नेता और मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने डाला। वहीं, उनसे पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मतदान किया। सभी 81 विधायकों ने राज्यसभा चुनाव में अपने मताधिकार का प्रयोग किया और अब नतीजों का इंतजार है। मतगणना शाम 5 बजे से होगी, जबकि 7 बजे तक नतीजे घोषित किए जाने की संभावना है। एनडीए समर्थित निर्दलीय प्रत्याशी परिमल नाथवानी और झामुमो उम्मीदवार बैजनाथ राम अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं। हम 100 फीसदी जीतेंगे पूर्व मंत्री बैजनाथ राम ने विधानसभा परिसर में मीडियाकर्मियों से बातचीत में कहा कि मुझे पूरा भरोसा है और हम 100 फीसदी जीतेंगे। उन्होंने कहा कि इंडी गठबंधन के दोनों उम्मीदवार जीत रहे हैं। बैजनाथ राम ने कहा कि मुझे 30 वोट मिलेंगे और हमारी जीत पक्की है। बैजनाथ राम ने कहा कि एनडीए चाहे जो भी दावा करे, लेकिन उनके पास जरूरी संख्या नहीं है। बीजेपी कर रही जीत का दावा इस बीच वोटिंग के बाद बीजेपी के वरीय विधायक सीपी सिंह ने कहा कि जीत का आत्मविश्वास इतना ज्यादा है कि आप कल्पना नहीं कर सकते। उम्मीद पर ही तो दुनिया कायम है। सीपी सिंह ने कहा कि उम्मीद के बिना तो कोई जिंदा भी नहीं रह सकता है। वोटिंग के बाद पूर्व मंत्री भानुप्रताप शाही ने कहा कि झारखंड के विकास के लिए हमने परिमल नाथवानी की जीत पक्की करने का फैसला किया है। भानुप्रताप शाही ने दावा किया कि परिमल नाथवानी को कम से कम 36 वोट तो मिल ही रहे हैं। परिमल नाथवानी ने भी किया जीत का दावा इस बीच परिमल नाथवानी ने भी अपनी जीत का दावा किया। उन्होंने कहा कि मुझे पूरा भरोसा है कि मैं जीतूंगा। मुझे सभी विधायकों पर विश्वास है। यदि मौका मिला तो मैं निश्चित रूप से झारखंड की सेवा करूंगा। क्या उन्हें कांग्रेस विधायकों का समर्थन प्राप्त है, मीडियाकर्मियों के इस सवाल पर परिमल नाथवानी ने कहा कि मुझे सभी का समर्थन प्राप्त है।
रांची। रांची में Jharkhand की दो राज्यसभा सीटों के लिए मतदान के बीच विधानसभा परिसर पूरी तरह राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र बना हुआ है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने उम्मीदवारों की जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं हर पल बदलते घटनाक्रम पर नेताओं और समर्थकों की नजर टिकी हुई है। इसी बीच झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अपनी पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन के साथ विधानसभा पहुंचे। मुख्यमंत्री के पहुंचते ही महागठबंधन की लॉबी में हलचल तेज हो गई और गठबंधन के सभी विधायक एक जगह एकत्रित होते नजर आए। महागठबंधन के विधायक पहुंचे मतदान के लिए एनडीए विधायकों के मतदान के बाद महागठबंधन के विधायकों ने भी वोटिंग प्रक्रिया में हिस्सा लेना शुरू किया। विधानसभा परिसर से सामने आई तस्वीरों में कांग्रेस और झामुमो समेत गठबंधन के कई विधायक एक साथ मतदान कर बाहर निकलते दिखाई दिए। इस दौरान गठबंधन के नेताओं में आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। हर गतिविधि पर मुख्यमंत्री की नजर राज्यसभा चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन शुरुआत से ही सक्रिय दिखे हैं। उम्मीदवारों के चयन से लेकर चुनावी रणनीति और मतदान के दिन की गतिविधियों तक वे लगातार पूरे घटनाक्रम की निगरानी करते दिखाई दिए। विधानसभा परिसर में भी वे विधायकों और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में रहे। एनडीए और महागठबंधन दोनों कर रहे जीत का दावा राज्यसभा चुनाव को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों अपने-अपने पक्ष में माहौल होने का दावा कर रहे हैं। मतदान के दौरान दोनों खेमों के नेताओं के हावभाव और सक्रियता से साफ है कि मुकाबला बेहद अहम माना जा रहा है। चुनाव से पहले विधायकों की बैठकों, रणनीति और राजनीतिक गतिविधियों ने भी इस चुनाव को खास बना दिया है। शाम तक साफ हो सकती है तस्वीर विधानसभा में मतदान शाम 4 बजे तक जारी रहेगा। इसके बाद मतगणना की प्रक्रिया शुरू होगी और अगले कुछ घंटों में यह साफ होने की उम्मीद है कि झारखंड की दोनों राज्यसभा सीटों पर किस गठबंधन का पलड़ा भारी रहा। फिलहाल पूरे राज्य की नजर विधानसभा में चल रही इस सियासी जंग पर टिकी हुई है।
रांची। झारखंड में हो रहे राज्यसभा चुनाव में इंडी गठबंधन गजब का कॉन्फिडेंस दिखा रहा है। पहले 56 विधायकों को एकजुट रखने पर ही सवाल उठाए जा रहे थे, अब तो बात 61 विधायकों तक पहुंच गई है। राज्यसभा की दो सीटों पर 18 जून को होने वाले चुनाव से पहले शह-मात का खेल शुरू हो गया है। एक ओर सत्तारूढ़ इंडी गठबंधन अपने 56 विधायकों की एकजुटता का प्रदर्शन कर जीत को लेकर आश्वस्त दिख रहा है, वहीं दूसरी ओर संख्या बल में पीछे होने के बावजूद एनडीए भी जीत का दावा कर रहा है। अपने विधायकों को रांची के एक होटल में शिफ्ट कर एनडीए ने भी मोर्चाबंदी कर रखी है। सीएम हेमंत सोरेन की देखरेख में हुआ मॉक पोल मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में इंडिया गठबंधन के विधायकों की बैठक हुई। इसमें विधायकों को प्रशिक्षित कर मॉक पोल कराया गया। संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर के अनुसार, मॉक पोल में झामुमो के बैद्यनाथ राम को 29 और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को 27 वोट मिले। विधानसभा अध्यक्ष का वोट झामुमो को और माले विधायक अरूप चटर्जी पूर्व सूचना के आधार पर बैठक में शामिल नहीं हुए। उनका वोट भी कांग्रेस को मिलेगा। उन्होंने कहा कि मॉक पोल में हमारा एक भी वोट अमान्य नहीं हुआ। वहीं मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने कहा कि दोनों सीटों पर महागठबंधन के दोनों उम्मीदवार की जीत तय है। पूरा गठबंधन एकजुट होकर मतदान करेगा। राज्यसभा चुनाव में '56 नहीं 61' का नारा इंडी गठबंधन खेमे में चर्चा तब और तेज हो गई जब झामुमो महासचिव विनोद पांडेय ने सोशल मीडिया पर '56 नहीं 61' का नारा उछाल दिया। सियासी गलियारों में इसे महागठबंधन के दावे से पांच अतिरिक्त वोट मिलने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बैठक के बाद कांग्रेस नेता भाजपा पर हमलावर दिखे। मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि भाजपा की कारगुजारी से साबित होता है कि बीजेपी कॉरपोरेट घरानों के लिए काम कर रही है। मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा कि जिस पर विधायक-सांसद की खरीद-फरोख्त के आरोप लगते रहे हैं, वही अपने विधायकों को होटल में शिफ्ट कर रही है। वहीं प्रदीप यादव ने कहा कि हम बुधवार को अपनी अगली रणनीति तय करेंगे।
रांची। रांची के कोकर स्थित खोरा टोली से 9 मई से लापता डेढ़ वर्षीय अदिति पांडे की तलाश में पुलिस एक बार फिर बड़े स्तर पर सर्च ऑपरेशन शुरू करने की तैयारी में है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच तेज कर दी गई है और नई रणनीति के तहत हर संभावित पहलू की पड़ताल की जा रही है। एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद बच्ची का कोई सुराग नहीं मिलने से परिजनों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। वहीं स्थानीय लोग भी अदिति की सकुशल बरामदगी की उम्मीद लगाए हुए हैं। मामले की जांच कर रहे सदर थाना प्रभारी कुलदीप कुमार ने अदिति के परिजनों से मुलाकात कर जांच की प्रगति से उन्हें अवगत कराया। इस दौरान उन्होंने लापता अदिति अदिति के माता पिता को घर के पिछले हिस्से में सुरक्षा के लिहाज से बाउंड्री वॉल बनवाने की सलाह दी ताकि भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो। कई बार नाले में सर्च अभियान चलाया अदिति के लापता होने के बाद राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) ने कई बार नाले में सर्च अभियान चलाया। हाल ही में बच्ची के घर से करीब 800 मीटर दूर नाले की झाड़ियों में मांस का एक टुकड़ा बरामद हुआ, जिसे पुलिस ने जब्त कर फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया था। बाद में अदालत ने इस छोटे से टुकड़ा को डीएनए टेस्ट कराने की अनुमति दी थी। उसके बाद बात थी कि इसे खेलगांव स्थित फॉरेंसिक लैब भेजा जाएगा, जहां अदिति के माता-पिता के डीएनए सैंपल लिए जाएंगे और सभी सैंपल को कोलकाता की प्रयोगशाला भेजे जाएंगे। कहां है रिपोर्ट ? हालांकि, एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। अब तक न तो डीएनए जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक हुई है और न ही यह स्पष्ट किया गया है कि अदिति के माता-पिता के डीएनए नमूने लिए गए या नहीं। यदि सैंपल लिए गए थे तो रिपोर्ट कहां तक पहुंची, और यदि नहीं लिए गए तो इसकी वजह क्या रही? इन सवालों के जवाब अब भी सामने नहीं आए हैं। फिलहाल इस पूरे मामले में जांच से जुड़े कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर केवल इंतजार ही नजर आ रहा है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मामले को गंभीरता से लिया इधर, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए रांची पुलिस को अदिति की जल्द बरामदगी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद पुलिस ने सर्च अभियान और जांच की रफ्तार बढ़ा दी है। पुलिस ने अदिति की सूचना देने वाले के लिए घोषित इनाम की राशि 50 हजार बढ़ाकर ढाई लाख रुपये कर दी है। साथ ही पोस्टर, विज्ञापन और सोशल मीडिया के माध्यम से भी व्यापक स्तर पर लोगों से सहयोग मांगा जा रहा है। अदिति के पिता मनीष कुमार पांडेय और परिवार के अन्य सदस्य लगातार शहर के विभिन्न इलाकों में पोस्टर लगाकर बच्ची की तलाश कर रहे हैं। पुलिस ने जिले के सभी थानों को बच्ची का विवरण भेज दिया है और सीसीटीवी फुटेज सहित अन्य तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच जारी है। अधिकारियों ने आम लोगों से अपील की है कि यदि अदिति के संबंध में कोई भी जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें, ताकि उसे सुरक्षित उनके परिवार तक पहुंचाया जा सके।
रांची। वर्ष 2021 में रांची के किशोरगंज चौक में सीएम के काफिले को रोकने का प्रयास करने और प्रदर्शन करने से जुड़े केस में रांची सिविल कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया है। बुधवार को कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए भैरव सिंह समेत अन्य आरोपियों को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया है। इस मामले का ट्रायल रांची सिविल कोर्ट के अपर प्रधान न्यायायुक्त की अदालत में चला। घटना को लेकर वर्ष 2021 में सुखदेवनगर थाना में पदस्थापित एएसआई सदानंद कुमार के बयान पर 72 नामजद समेत 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। किशोरगंज चौंक के पास काफिले को बनाया गया था निशाना 4 जनवरी को सीएम हेमंत सोरेन का काफिला झारखंड मंत्रालय से लौट रहा था। इसी दौरान किशोरगंज चौक के पास उपद्रवियों के झुंड ने सुनियोजित साजिश के तहत काफिले को निशाना बनाने की कोशिश की थी। हालांकि रांची पुलिस ने सूझबूझ का परिचय देते हुए सीएम के काफिले को रूट डायवर्ट कर दिया था। इस संबंध में सुखदेवनगर थाना में कांड संख्या 5/2021 दर्ज की गई थी। सिविल कोर्ट से बरी किये जाने से भैरव सिंह को बड़ी राहत मिली है। इस केस के बाद भैरव सिंह को जेल भी जाना पड़ा था।
रांची। केंद्र सरकार की नीति निर्धारण संस्था नीति आयोग की 11वीं गवर्निंग काउंसिल (शासी परिषद) की बैठक 11 जून को दिल्ली में होगी। इस हाई-प्रोफाइल बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसमें शामिल होने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन बुधवार की दोपहर दिल्ली के रवाना हो गए है। बता दें कि इस महत्वपूर्ण बैठक में झारखंड राज्य की भागीदारी को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। जिसके तहत राज्य के मुख्यमंत्री और शीर्ष अधिकारियों की सूची को अंतिम रूप देकर नीति आयोग को भेज दिया गया है। नीति आयोग की मुख्य कार्यकारी अधिकारी निधि छिब्बर ने इस संबंध में झारखंड के मुख्य सचिव अविनाश कुमार को पत्र भेजा है। इसमे कहा गया है कि इस बार की बैठक का मुख्य विषय विकसित भारत के लिए मानव पूंजी रखा गया है। इसके साथ ही इस बैठक के एजेंडे में दिसंबर 2025 में आयोजित मुख्य सचिवों के 5वें राष्ट्रीय सम्मेलन में तय की गई प्राथमिकताओं और सिफारिशों को शामिल किया गया है। सीएम के साथ अधिकारी होंगे बैठक में शामिल जानकारी के मुताबिक नीति आयोग की ओर से झारखंड के मुख्यमंत्री को बैठक में शामिल होने के लिए उपाध्यक्ष की ओर से एक अलग से आमंत्रण पत्र गया है। 11 जून को होने वाली इस बैठक में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के अलावा झारखंड का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिकारियों में राज्य के मुख्य सचिव अविनाश कुमार, प्लानिंग एंड डेवलपमेंट सचिव मुकेश कुमार, दिल्ली के रेसिडेंट कमिश्नर अरवा राजकमल और प्लानिंग एंड डेवलपमेंट की अपर सचिव विजया जाधव शामिल होंगी।
रांची। मुख्यमंत्री ने राज्य में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए अधिकारियों को जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाने का निर्देश दिया है। मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने स्पष्ट कहा कि हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है और इस दिशा में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पेयजल योजनाओं के कार्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए ताकि लोगों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके। उन्होंने जलापूर्ति व्यवस्था के रखरखाव और मरम्मत कार्यों पर विशेष ध्यान देने का भी निर्देश दिया। संभावित जल संकट वाले क्षेत्रों पर विशेष नजर बैठक में मुख्यमंत्री ने उन क्षेत्रों की पहचान कर विशेष निगरानी रखने को कहा, जहां गर्मी या अन्य कारणों से पेयजल संकट की संभावना बनी रहती है। उन्होंने निर्देश दिया कि किसी भी क्षेत्र में जल संकट उत्पन्न होने पर तत्काल कार्रवाई की जाए और प्रभावित लोगों तक स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। समीक्षा बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद भी मौजूद रहे। इस दौरान विभागीय योजनाओं की प्रगति और भविष्य की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। जल संरक्षण और वर्षा जल संचयन पर जोर मुख्यमंत्री ने केवल जलापूर्ति ही नहीं, बल्कि जल संरक्षण को भी उतना ही महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अधिकारियों को वर्षा जल संचयन, जल संरक्षण और भू-जल स्तर बनाए रखने के लिए प्रभावी अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जिन क्षेत्रों में भू-जल स्तर गिरने के कारण चापाकल अनुपयोगी हो चुके हैं, वहां उनके बोरिंग का उपयोग रिचार्ज पीट के रूप में किया जाए ताकि वर्षा का पानी भू-जल स्तर बढ़ाने में सहायक हो सके। ग्रामीण क्षेत्रों को प्राथमिकता मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। साथ ही उन्होंने जल सहियाओं की भूमिका को और अधिक मजबूत बनाने पर जोर देते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही पेयजल योजनाओं को सफल बनाया जा सकता है। सरकार का लक्ष्य राज्य के हर घर तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है।
रांची। झारखंड सरकार कृषि क्षेत्र को आधुनिक बनाने और किसानों को नई तकनीकों से परिचित कराने के उद्देश्य से रांची के मोरहाबादी मैदान में 16 से 18 जून तक तीन दिवसीय कृषि व्यापार मेला आयोजित करने जा रही है। इस मेले का उद्घाटन मुख्यमंत्री Hemant Soren करेंगे। आयोजन का उद्देश्य किसानों, कृषि वैज्ञानिकों, व्यापारियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साझा मंच प्रदान करना है, जहां वे कृषि क्षेत्र में हो रहे नवीन प्रयोगों और तकनीकी विकास पर विचार-विमर्श कर सकें। देशभर से आएंगे विशेषज्ञ और लगेंगे आधुनिक कृषि स्टॉल कृषि व्यापार मेले में देश के विभिन्न राज्यों से कृषि क्षेत्र से जुड़े संस्थान, कंपनियां और संगठन अपने स्टॉल लगाएंगे। मेले में 50 से अधिक वैज्ञानिक और कृषि विशेषज्ञ विभिन्न विषयों पर व्याख्यान देंगे। किसानों के लिए पंजीकरण पूरी तरह निःशुल्क रखा गया है ताकि अधिक से अधिक किसान इस आयोजन का लाभ उठा सकें। कृषि विभाग के अनुसार मेले में आधुनिक खेती, उन्नत बीज, सिंचाई तकनीक, जैविक कृषि और कृषि व्यवसाय से जुड़ी नई जानकारियां उपलब्ध कराई जाएंगी। किसानों को उत्पादन बढ़ाने और लागत कम करने के उपायों से भी अवगत कराया जाएगा। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीकों पर रहेगा विशेष फोकस मेले का प्रमुख आकर्षण कृषि क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित तकनीकों का प्रदर्शन होगा। इसके साथ ही कम लागत में अधिक उत्पादन देने वाली आधुनिक कृषि पद्धतियों, मत्स्य पालन, बागवानी और कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी तकनीकों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। विशेषज्ञ किसानों को इन तकनीकों के व्यावहारिक उपयोग और उनके लाभों की जानकारी देंगे। सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भी सजेगा आयोजन कृषि व्यापार मेला केवल तकनीकी और व्यावसायिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। शाम के समय झारखंड की पारंपरिक लोक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नृत्य और गीत-संगीत के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अलावा राज्य के प्रगतिशील किसान और अन्य राज्यों के सफल कृषि विशेषज्ञ अपने अनुभव साझा करेंगे, जिससे किसानों को नई प्रेरणा और सीख मिलेगी। यह मेला कृषि क्षेत्र में नवाचार, ज्ञान और अवसरों का महत्वपूर्ण केंद्र बनने जा रहा है।
रांची। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की उच्च स्तरीय समीक्षा की। बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाते हुए राज्य के प्रत्येक घर तक पाइपलाइन और नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य तय समय सीमा में पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि पेयजल से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार नहीं की जाएगी तथा पेयजल संकट वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी कर त्वरित समाधान सुनिश्चित किया जाए। जल सहियाओं को प्रशिक्षण और जिम्मेदारी देने का निर्देश मुख्यमंत्री ने जल सहियाओं की भूमिका को और मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल सहियाओं को समूहवार आईटीआई में प्लंबर का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिलाया जाए। साथ ही खराब चापाकलों की मरम्मत, सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति योजनाओं की देखरेख और रखरखाव की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी जाए। उन्होंने बेहतर कार्य करने वाली जल सहियाओं को पुरस्कृत करने और उनके लिए प्रोत्साहन कार्यक्रम चलाने की बात भी कही। रियल टाइम मॉनिटरिंग और बेहतर फ्रेमवर्क पर जोर सीएम ने विभाग की निर्माणाधीन योजनाओं की समीक्षा करते हुए बड़ी परियोजनाओं के लिए ठेकेदारों का व्हाट्सएप समूह बनाकर प्रतिदिन कार्य प्रगति की जानकारी लेने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन के लिए मजबूत फ्रेमवर्क तैयार किया जाए और वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए बैकअप प्लान विकसित किया जाए। मुख्यमंत्री ने प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र तक शुद्ध पेयजल पहुंचाने, योजनाएं पूरी होने के बाद समय पर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट लेने तथा वाटर रिचार्ज के लिए सोक पिट जैसी व्यवस्थाओं को आधुनिक बनाने पर भी जोर दिया। अधिकारियों ने बताया कि दिसंबर 2028 तक राज्य के सभी ग्रामीण घरों में पाइपलाइन के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित है। जल संरक्षण और भू-जल स्तर बढ़ाने का निर्देश मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भू-जल स्तर को बनाए रखने के लिए प्रभावी अल्पकालिक एवं दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि अनुपयोगी हो चुके चापाकलों के बोरिंग का उपयोग रिचार्ज पिट के रूप में किया जाए, ताकि वर्षा जल का संचयन कर भू-जल स्तर बढ़ाया जा सके। इसके अलावा लोगों को सोक पिट निर्माण और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया। जल गुणवत्ता, स्वच्छता और कचरा प्रबंधन की भी समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने जल गुणवत्ता की समस्या पर चिंता जताते हुए स्वच्छ पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने प्लास्टिक मुक्त गांवों को प्रोत्साहित करने और ऐसे प्रयासों को पुरस्कृत करने की बात कही। इस दौरान जल जीवन मिशन, हर घर जल, जल गुणवत्ता निगरानी, बहु ग्रामीण एवं एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं, नलकूप, स्वच्छ भारत मिशन, व्यक्तिगत शौचालय, ओडीएफ प्लस गांव, ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन तथा गोबरधन योजना सहित विभिन्न कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा कर अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।
रांची। झारखंड में 2 सीटों के लिए राज्यसभा चुनाव के लिए नामाकंन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने बैजनाथ राम को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा पर फिर से भरोसा जताया है। वहीं, बीजेपी की बात करें तो गौरव वल्लभ ने भले ही नामांकन पर्चा खरीदा है, लेकिन अभी तक बीजेपी ने नाम की घोषणा नहीं की है। उधर परिमल नाथवाणी भी निदर्लीय मैदान में उतरने को तैयार हैं। उन्होंने नामांकन पर्चा दाखिल भी कर दिया है। 2 सीटों के लिए 3 उम्मीदवारों के उतरने से चुनाव का माहौल रोचक हो गया है। हालांकि कांग्रेस ने देर रात जेएमएम प्रमुख और झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मुलाकात कर काफी हद तक विवाद को सुलझा लिया है। माना जा रहा है कि गठबंधन में शामिल कांग्रेस के उम्मीदवार को जेएमएम का समर्थन मिल सकता है। उधर बीजेपी ने अभी तक पत्ता नहीं खोला है। लेकिन, परिमल नाथवाणी के नामांकन में बीजेपी नेताओं ने प्रस्तावक बन कर इशारा दे दिया है कि बीजेपी उनके साथ है। माना जा रहा है कि एनडीए के विधायक परिमल नाथवाणी को अपना समर्थन देने जा रहे हैं। इसके बावजूद भी उन्हें 4 विधायक जुटाने होंगे, क्योंकि एनडीए के पास 24 विधायक ही ही हैं और जीत के लिए 28 विधायकों की जरूरत होगी। जेकेएलएम विधायक जयराम महतो का समर्थन उन्हें मिल सकता है, लेकिन इसके बावजूद भी उन्हें 3 विधायक जुटाने होंगे। इसका मतलब हुआ कि क्रॉस वोटिंग का ही सहारा लेना होगा। अगर क्रॉस वोटिंग होती है तो कांग्रेस के हाथ से सीट छिटक सकती है। यही से एक बार फिर रिसॉर्ट पालिटिक्स देखने को मिल सकती है। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पहले ही अपने सारे विधायकों को रांची बुला लिया है और सभी को एकसाथ-एकजुट रहने का निर्देश दिया गया है। वहीं, बीजेपी जब नाथवाणी को समर्थन दे ही रही है, तो उसके विधायकों के छिटकने का सवाल ही नहीं है। ऐसे भी नाथवाणी ने सोमवार को बीजेपी विधायक नवीन जायसवाल के आवास पर पहुंच कर उनके साथ आगे की रणनीति तय की। कांग्रेस और राजद के विधायकों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। इसलिए दोनों ही दल अपने विधायकों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटे हैं। राज्य के मंत्री और राजद नेता संजय प्रसाद यादव ने साफ किया कि वे सभी लालू प्रसाद यादव के शिष्य हैं, इसलिए गद्दारी तो उनके खून में ही नहीं है। यह भी संभव है कि जल्द ही कांग्रेस के विधायकों को एकजुट रखने के लिए उन्हें भी कहीं एकसाथ ही रखा जाये। क्योंकि, आज 8 जून है और चुनाव 18 जून को होना है। यानी, 10 अभी बाकी हैं और इस दौरान काफी कुछ देखने को मिल सकता है।
रांची। पूर्व राज्यसभा सांसद परिमल नाथवाणी के रांची में होने की सूचना है। सूचना के मुताबिक विशेष विमान से परिमल नाथवाणी रांची आये हैं। हालांकि अब तक इसकी किसी ने पुष्टि नहीं की है। राज्यसभा चुनाव की सरगर्मी के बीच उनके आने की सूचना ने सियासी पारा बढ़ा दिया है। चर्चाओं के मुताबिक नाथवाणी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मिल सकते हैं। हालांकि मुख्यमंत्री सचिवालय से भी इसकी पुष्टि नहीं हुई है। नाथवाणी को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाये जाने की चर्चा है। बता दें कि झारखंड मुक्ति मोर्चा ने एक उम्मीदवार की घोषणा कर दी है, जबकि दूसरे देर शाम तक होने की संभावना है।
रांची। झारखंड में राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। इसी बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने अपने सभी विधायकों के लिए अहम निर्देश जारी करते हुए उन्हें आज शाम तक रांची पहुंचने और 8 जून तक राजधानी में ही रहने को कहा है। पार्टी के इस निर्देश के बाद राज्य की राजनीति में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। राज्यसभा की दो सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सत्ताधारी गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर मतभेद उभरकर सामने आए है। इसी संभावित राजनीतिक खींचतान और रणनीतिक तैयारी को देखते हुए JMM ने अपने विधायकों को एकजुट रखने का फैसला किया है। 2 सीटों पर उम्मीदवार उतारेगा JMM जानकारी के अनुसार, JMM ने राज्यसभा की दोनों सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने का संकेत दिया है। एक उम्मीदवार के रूप में बैजनाथ राम की घोषणा कर दी गई है, जबकि दूसरे की घोषणा देर शाम तक किये जाने की उम्मीद है। इस फैसले ने गठबंधन की राजनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस ने पहले ही घोषित कर दिया उम्मीदवार दूसरी ओर, कांग्रेस ने राज्यसभा की एक सीट के लिए अपने उम्मीदवार की घोषणा कर दी है। कांग्रेस शुरू से ही यह मांग करती रही है कि राज्यसभा चुनाव में गठबंधन के तहत एक सीट JMM और एक सीट कांग्रेस के हिस्से में जाए, लेकिन JMM द्वारा दोनों सीटों पर दावा जताने की रणनीति से गठबंधन के भीतर असहज स्थिति बनती दिख रही है। गठबंधन में बढ़ रही है खींचतान जेएमएम का अपने सभी विधायकों को रांची बुलाना सिर्फ सामान्य बैठक नहीं है, बल्कि इसके पीछे राज्यसभा चुनाव की रणनीति और संख्या बल को लेकर गंभीर मंथन चल रहा है। यदि दोनों दल अपने-अपने दावे पर अड़े रहते हैं, तो आने वाले दिनों में गठबंधन के भीतर तनाव और बढ़ सकता है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।