निर्मला सीतारमण

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बैंकिंग क्षेत्र की समीक्षा समिति का ऐलान करते हुए
Nirmala Sitharaman: विकसित भारत के लिए बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा, जल्द बनेगी उच्च-स्तरीय समिति

नई दिल्ली, एजेंसियां। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को बैंकिंग क्षेत्र को लेकर बड़ा एलान किया। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही ‘विकसित भारत के लिए बैंकिंग’ विषय पर एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करेगी। यह समिति देश के बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा करेगी और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप सुधारों को लेकर सरकार को सुझाव देगी।   पीएसबी कॉन्फ्लुएंस में वित्त मंत्री ने दी जानकारी   निर्मला सीतारमण ने यह घोषणा पीएसबी कॉन्फ्लुएंस को संबोधित करते हुए की। उन्होंने बताया कि समिति के गठन की घोषणा जल्द होने की उम्मीद है। समिति बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार के सामने रखेगी।   वित्तीय स्थिरता और उपभोक्ता संरक्षण पर जोर   प्रस्तावित समिति का प्रमुख उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली को भारत की अगली विकास यात्रा के अनुरूप तैयार करना है। समिति वित्तीय स्थिरता, वित्तीय समावेशन और उपभोक्ता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर विशेष ध्यान देगी। सरकार का मानना है कि विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत और भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार बैंकिंग प्रणाली जरूरी है। ऐसे में समिति बैंकिंग क्षेत्र की मौजूदा व्यवस्था और भविष्य की जरूरतों का आकलन कर सुधारों का सुझाव देगी।   बजट 2026 में किया गया था समिति का प्रस्ताव   वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को पेश किए गए केंद्रीय बजट में इस उच्च-स्तरीय समिति के गठन का प्रस्ताव रखा था। बजट में बैंकिंग क्षेत्र की व्यापक समीक्षा के साथ इसे भारत की अगली आर्थिक वृद्धि के चरण के साथ जोड़ने पर जोर दिया गया था। अब सरकार समिति के गठन की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके सुझावों से बैंकिंग क्षेत्र में नीतिगत सुधारों और वित्तीय सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाने की राह तैयार हो सकती है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 17, 2026 0
UPI शुल्क पर वित्त मंत्री का स्पष्टीकरण
UPI शुल्क पर निर्मला सीतारमण का स्पष्टीकरण, बोलीं- यूजर्स से नहीं लिया जाएगा कोई चार्ज

नई दिल्ली, एजेंसियां। UPI भुगतान पर शुल्क लगाए जाने की खबरों के बीच केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बड़ा स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि UPI पर Merchant Discount Rate (MDR) से जुड़ी व्यवस्था का मतलब आम यूजर्स से सीधे शुल्क वसूलना नहीं है। अगर भविष्य में MDR लागू किया जाता है तो इसका भार अंतिम उपयोगकर्ता पर नहीं डाला जाएगा।   UPI शुल्क को लेकर क्यों मचा विवाद?   संसद में पारित Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 में डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जुड़े प्रावधानों में बदलाव किया गया है। इसके बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में यह चर्चा शुरू हो गई कि ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर शुल्क लगाया जा सकता है। वित्त मंत्री ने इस तरह की व्याख्या को खारिज करते हुए कहा कि प्रस्तावित व्यवस्था को UPI यूजर्स पर सीधे शुल्क लगाने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।   MDR क्या है और किस पर लागू होगा?   MDR यानी Merchant Discount Rate डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी या कारोबारी पक्ष से जुड़ा शुल्क है। वित्त मंत्री के स्पष्टीकरण के मुताबिक, यदि सरकार भविष्य में MDR को अधिसूचित करती है तो इसे अंतिम ग्राहक से वसूलने की व्यवस्था नहीं होगी। इसका मतलब है कि सामान्य ग्राहक के लिए UPI से पैसे भेजने या भुगतान करने पर अलग से UPI शुल्क लगाए जाने की बात फिलहाल नहीं है।   सरकार ने क्या साफ किया?   निर्मला सीतारमण ने कहा कि UPI के संबंध में फैलाई जा रही यह धारणा गलत है कि नए प्रावधान के बाद आम लोगों को हर भुगतान पर शुल्क देना पड़ेगा। सरकार का स्पष्टीकरण है कि अंतिम उपयोगकर्ता को UPI भुगतान के लिए शुल्क नहीं देना होगा. इसलिए फिलहाल ग्राहकों के लिए UPI भुगतान की मौजूदा व्यवस्था में कोई तत्काल शुल्क लागू नहीं हुआ है। हालांकि, भविष्य में MDR से जुड़े नियम सरकार की अधिसूचना के जरिए तय किए जा सकते हैं।

ranjan kumar tiwari अगस्त 7, 2026 0
लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज अमेंडमेंट बिल 2026 पेश
लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल 2026 पेश, निवेश और मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा बढ़ावा

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में टैक्सेशन एंड अदर लॉज (अमेंडमेंट) बिल, 2026 पेश किया। प्रस्तावित कानून का उद्देश्य देश में निवेश को बढ़ावा देना, घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करना और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के लिए टैक्स नियमों में बदलाव करना है।   टैक्स नियमों में बदलाव का प्रस्ताव     प्रस्तावित विधेयक के जरिए टैक्स व्यवस्था से जुड़े कुछ प्रावधानों में बदलाव किए जाने हैं। सरकार का लक्ष्य टैक्स कानूनों को अधिक अनुकूल बनाना और कारोबार तथा निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान करना है। सरकार का मानना है कि टैक्स नियमों में सुधार से भारत में निवेश का माहौल बेहतर होगा और आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सकती है।     विदेशी निवेश और फंड मैनेजमेंट पर फोकस     विधेयक में विदेशी निवेश फंडों से जुड़े टैक्स नियमों में भी राहत देने का प्रस्ताव है। रिपोर्ट के मुताबिक, Eligible Investment Funds (EIFs) के लिए मौजूदा कुछ पात्रता शर्तों को आसान बनाने का प्रस्ताव रखा गया है। इन बदलावों का उद्देश्य भारत को वैश्विक फंड मैनेजमेंट के लिए अधिक आकर्षक केंद्र बनाना और विदेशी पूंजी को देश में लाना है।     मैन्युफैक्चरिंग को मिल सकता है प्रोत्साहन     सरकार प्रस्तावित टैक्स बदलावों के जरिए घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को भी बढ़ावा देना चाहती है। टैक्स प्रोत्साहनों के विस्तार से कंपनियों को भारत में उत्पादन बढ़ाने और नए निवेश करने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है।   विधेयक पर संसद में आगे की प्रक्रिया के दौरान इसके प्रावधानों पर चर्चा होगी। इसके बाद ही प्रस्तावित बदलावों के अंतिम रूप और उनके लागू होने की स्थिति स्पष्ट होगी।

ranjan kumar tiwari अगस्त 4, 2026 0
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को ₹12,207 करोड़ का लाभांश चेक सौंपते एलआईसी के सीईओ
LIC ने सरकार को सौंपा ₹12,207 करोड़ का लाभांश, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपी डिविडेंड की राशि

70वें स्थापना वर्ष में सरकार को मिला बड़ा राजस्व, AGM में मंजूर हुआ लाभांश   नई दिल्ली, एजेंसियां। देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी एलआईसी (LIC) ने केंद्र सरकार को ₹12,207.25 करोड़ का लाभांश (डिविडेंड) सौंपा है। एलआईसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) एवं प्रबंध निदेशक आर. दोरईस्वामी ने केंद्रीय वित्त एवं कॉर्पोरेट मामलों की मंत्री निर्मला सीतारमण को यह डिविडेंड चेक सौंपा। यह राशि सरकार की हिस्सेदारी के अनुरूप है, जिसे 27 जुलाई को हुई कंपनी की वार्षिक आम बैठक (AGM) में मंजूरी दी गई थी।   सरकार के गैर-कर राजस्व को मिलेगा बड़ा सहारा   एलआईसी की ओर से मिला यह लाभांश केंद्र सरकार के गैर-कर राजस्व (Non-Tax Revenue) को मजबूत करेगा। सरकार एलआईसी की सबसे बड़ी शेयरधारक है, इसलिए कंपनी के मुनाफे का बड़ा हिस्सा लाभांश के रूप में सरकार को प्राप्त होता है।   70 साल पूरे होने पर मजबूत वित्तीय स्थिति   एलआईसी इस वर्ष अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर रही है। कंपनी के अनुसार, 31 मार्च 2026 तक उसका कुल एसेट बेस ₹59.03 लाख करोड़ रहा, जिससे वह भारतीय जीवन बीमा बाजार में अपनी अग्रणी स्थिति बनाए हुए है।   निवेशकों और बाजार की नजर आगे के प्रदर्शन पर   विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को मिला यह बड़ा लाभांश एलआईसी की मजबूत वित्तीय स्थिति और स्थिर मुनाफे का संकेत है। अब निवेशकों की नजर कंपनी के आगामी तिमाही नतीजों और भविष्य की विकास रणनीति पर रहेगी।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 30, 2026 0
ईमानदार करदाताओं के लिए आयकर प्रक्रिया सरल बनाने पर बात करतीं केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण
ईमानदार करदाताओं को राहत देने के लिए आयकर प्रक्रिया और सरल होगी, वित्त मंत्री सीतारमण ने दिए संकेत

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि सरकार ईमानदार करदाताओं को बेहतर और पारदर्शी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए आयकर प्रणाली को लगातार सरल बनाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि करदाताओं के लिए अनुपालन (Compliance) आसान बनाना और कर प्रशासन को अधिक पारदर्शी व तकनीक आधारित बनाना सरकार की प्राथमिकता है।   करदाताओं को मिलेगी अधिक सुविधा   वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार का उद्देश्य ऐसा आयकर तंत्र विकसित करना है, जिसमें करदाताओं को कम से कम दिक्कतों का सामना करना पड़े। इसके लिए आयकर रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को और आसान बनाने, ऑनलाइन सेवाओं को मजबूत करने तथा शिकायतों के त्वरित निस्तारण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।   डिजिटल टैक्स सिस्टम पर सरकार का फोकस   सीतारमण ने कहा कि डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग से कर प्रणाली पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी और तेज हुई है। फेसलेस असेसमेंट, ऑनलाइन सत्यापन और डिजिटल सेवाओं जैसी पहल ने करदाताओं और आयकर विभाग के बीच प्रक्रिया को सरल बनाया है। सरकार भविष्य में भी तकनीक आधारित सुधारों को आगे बढ़ाएगी।   ईमानदार करदाताओं को मिलेगा प्रोत्साहन   वित्त मंत्री ने कहा कि समय पर कर भुगतान करने वाले ईमानदार करदाता देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरकार ऐसे करदाताओं का भरोसा बढ़ाने और उन्हें बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठा रही है।   कर प्रणाली को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में प्रयास जारी   सरकार का मानना है कि सरल और पारदर्शी कर व्यवस्था से स्वैच्छिक कर अनुपालन (Voluntary Tax Compliance) को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही कारोबार करना आसान होगा और निवेशकों का विश्वास भी मजबूत होगा। आने वाले समय में आयकर प्रणाली में और सुधारों की घोषणा किए जाने की संभावना जताई जा रही है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 25, 2026 0
Rajnath Singh
राजनाथ सिंह के आवास पर आज शाम होगी अहम बैठक, मॉनसून सत्र की रणनीति पर होगा मंथन

नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले केंद्र सरकार अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गई है। इसी कड़ी में आज शाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नई दिल्ली स्थित आवास पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे, विपक्ष की रणनीति और संसद में पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों पर चर्चा होगी।    मॉनसून सत्र की रणनीति पर होगा मंथन   सूत्रों के अनुसार, बैठक में 20 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र के लिए सरकार की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले संभावित मुद्दों और सरकार की जवाबी तैयारी पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। सरकार चाहती है कि संसद का सत्र सुचारु रूप से चले और महत्वपूर्ण विधेयकों को समय पर पारित कराया जा सके।   कई वरिष्ठ मंत्री हो सकते हैं शामिल   बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधेयकों और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।    सर्वदलीय बैठक से पहले सरकार की तैयारी   यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब केंद्र सरकार 19 जुलाई को प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक की तैयारी भी कर रही है। माना जा रहा है कि आज की बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर सरकार विपक्ष के साथ होने वाली चर्चा में अपना रुख स्पष्ट करेगी। मॉनसून सत्र में कई अहम विधेयक और राष्ट्रीय मुद्दे सदन में आने की संभावना है, इसलिए सरकार कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती है।

abhishek singh जुलाई 15, 2026 0
Nirmala Sitharaman
विदेशी मुद्रा जुटाने पर मंथन, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण करेंगी सरकारी बैंकों के प्रमुखों के साथ अहम बैठक

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 13 जुलाई को देश के सभी सरकारी बैंकों (पीएसबी) और आईडीबीआई बैंक के प्रमुखों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक करेंगी। बैठक का मुख्य उद्देश्य विदेशी मुद्रा के प्रवाह को बढ़ाना, बैंकों द्वारा विदेशी मुद्रा जमा (एफसीएनआर-बी) जुटाने की प्रगति की समीक्षा करना और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा हाल में घोषित रियायती उपायों के प्रभाव का आकलन करना है। सरकार का लक्ष्य प्रवासी भारतीयों और विदेशी निवेशकों को भारत में निवेश के लिए अधिक आकर्षित करना है।   तीन प्रमुख मुद्दों पर रहेगा फोकस बैठक में विदेशी मुद्रा गैर-निवासी (FCNR-B) खातों में जमा राशि बढ़ाने, सरकारी बैंकों द्वारा विदेशों से पूंजी जुटाने के लिए जारी किए जाने वाले विदेशी बॉन्ड तथा भारतीय कंपनियों और सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा बाहरी वाणिज्यिक उधार (ECB) की स्थिति की समीक्षा की जाएगी। इन तीनों माध्यमों से देश में विदेशी मुद्रा का प्रवाह बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा।   आरबीआई की रियायतों की होगी समीक्षा पिछले महीने आरबीआई ने 30 सितंबर तक के लिए कई राहत उपाय लागू किए थे। इनमें 3 से 5 वर्ष की अवधि वाले नए एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दर की अधिकतम सीमा को अस्थायी रूप से हटाना शामिल है, जिससे बैंक विदेशी जमाकर्ताओं को अधिक आकर्षक ब्याज दर की पेशकश कर सकते हैं। इसके अलावा, विदेशी मुद्रा विनिमय जोखिम कम करने के लिए बैंकों और सरकारी कंपनियों को रियायती दर पर फॉरेक्स स्वैप सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।   विदेशी निवेश में तेजी की उम्मीद बैंकिंग क्षेत्र के शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, नई रियायतों के बाद 3 जुलाई तक एफसीएनआर (बी) जमा के माध्यम से करीब 3 से 4 अरब डॉलर की विदेशी मुद्रा जुटाई जा चुकी है। बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि विशेष रूप से खाड़ी देशों में रहने वाले प्रवासी भारतीयों की भागीदारी बढ़ने से आने वाले महीनों में यह आंकड़ा और तेजी से बढ़ सकता है। अनुमान है कि इन उपायों से भविष्य में 40 से 50 अरब डॉलर तक का अतिरिक्त विदेशी निवेश आकर्षित किया जा सकता है, जिससे भारतीय रुपये को मजबूती मिलने के साथ-साथ देश की विदेशी मुद्रा स्थिति भी और सुदृढ़ होगी।

abhishek singh जुलाई 11, 2026 0
A cup of black coffee beside coffee beans, highlighting research linking regular coffee consumption with improved liver health.
दिन में 5 कप कॉफी पीना लिवर के लिए फायदेमंद? नए अध्ययन में सामने आए चौंकाने वाले नतीजे

रोजाना कॉफी पीने वालों में गंभीर लिवर रोगों का खतरा कम पाया गया अगर आप रोजाना कॉफी पीते हैं, तो यह आदत सिर्फ आपको तरोताजा ही नहीं रखती, बल्कि आपके लिवर की सेहत के लिए भी फायदेमंद हो सकती है। एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि नियमित रूप से कॉफी का सेवन करने वाले लोगों में लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का जोखिम कम देखा गया। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि इन नतीजों के आधार पर हर किसी को अचानक ज्यादा कॉफी पीना शुरू नहीं कर देना चाहिए। करीब साढ़े तीन लाख लोगों पर किया गया अध्ययन यह शोध मेडिकल जर्नल Clinical Gastroenterology and Hepatology में प्रकाशित हुआ है। इसमें ब्रिटेन के यूके बायोबैंक (UK Biobank) के लगभग 3.55 लाख वयस्कों के स्वास्थ्य रिकॉर्ड का 10 वर्षों से अधिक समय तक विश्लेषण किया गया। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों की कॉफी पीने की आदत, लिवर की स्कैन रिपोर्ट, रक्त जांच और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का अध्ययन किया। इसके बाद कॉफी के सेवन और लिवर स्वास्थ्य के बीच महत्वपूर्ण संबंध सामने आए। 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीने वालों को मिला सबसे ज्यादा लाभ अध्ययन के अनुसार, जो लोग प्रतिदिन 5 या उससे अधिक कप कॉफी पीते थे, उनमें लिवर संबंधी गंभीर बीमारियों का खतरा उल्लेखनीय रूप से कम पाया गया। शोध में सामने आए प्रमुख निष्कर्ष: लिवर सिरोसिस का खतरा 32% तक कम लिवर कैंसर का जोखिम 47% तक घटा लिवर संबंधी कारणों से मृत्यु का खतरा 42% कम हालांकि, रोजाना 1 से 2 कप कॉफी पीने वालों में भी कुछ हद तक सकारात्मक प्रभाव देखा गया। कैफीन नहीं, कॉफी के प्राकृतिक तत्व भी हैं असरदार शोध की एक दिलचस्प बात यह रही कि कैफीनयुक्त (Regular) और डिकैफ (Decaffeinated) दोनों तरह की कॉफी पीने वालों में लगभग समान लाभ देखने को मिले। इससे वैज्ञानिकों का मानना है कि केवल कैफीन ही नहीं, बल्कि कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट, पॉलीफेनॉल और अन्य प्राकृतिक यौगिक भी लिवर को स्वस्थ रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं। कैसे पहुंचाती है कॉफी लिवर को फायदा? विशेषज्ञों के अनुसार कॉफी में मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर में सूजन कम करने, कोशिकाओं को फ्री रेडिकल्स से बचाने और लिवर में अतिरिक्त वसा जमा होने की प्रक्रिया को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। यही कारण है कि लंबे समय में लिवर को होने वाले नुकसान का जोखिम कम हो सकता है। ज्यादा चीनी मिलाने से घट सकते हैं फायदे शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि कॉफी में अधिक मात्रा में चीनी, आर्टिफिशियल स्वीटनर या अत्यधिक प्रोसेस्ड क्रीमर मिलाने से लिवर को मिलने वाले कुछ फायदे कम हो सकते हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि यदि कॉफी पीनी हो तो कम या बिना चीनी वाली कॉफी बेहतर विकल्प हो सकती है। क्या अब सभी लोगों को 5 कप कॉफी पीनी चाहिए? इस अध्ययन के बावजूद वैज्ञानिकों ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। यह शोध केवल कॉफी और बेहतर लिवर स्वास्थ्य के बीच संबंध दिखाता है, लेकिन यह साबित नहीं करता कि कॉफी सीधे लिवर रोगों को रोकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि धूम्रपान, शराब का सेवन, वजन, खानपान और जीवनशैली जैसे कई अन्य कारक भी लिवर की सेहत को प्रभावित करते हैं। अधिक कॉफी पीने के हो सकते हैं नुकसान हर व्यक्ति का शरीर कैफीन को अलग-अलग तरीके से सहन करता है। जरूरत से ज्यादा कॉफी पीने पर कुछ लोगों में ये समस्याएं हो सकती हैं— बेचैनी और घबराहट नींद में बाधा दिल की धड़कन तेज होना पेट संबंधी परेशानियां गर्भवती महिलाओं और कुछ विशेष स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही कैफीन का सेवन करना चाहिए। क्या कहता है यह अध्ययन? यह शोध संकेत देता है कि नियमित और संतुलित मात्रा में कॉफी पीना लिवर की सेहत के लिए लाभकारी हो सकता है। हालांकि, केवल कॉफी के भरोसे स्वस्थ रहने की बजाय संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और स्वस्थ जीवनशैली अपनाना भी उतना ही जरूरी है।  

surbhi जुलाई 11, 2026 0
Nirmala Sitaraman
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चार दिवसीय फ्रांस दौरे पर रवाना, निवेश और आर्थिक सहयोग पर होगी अहम चर्चा

नई दिल्ली, एजेंसियां। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण चार दिवसीय आधिकारिक दौरे पर फ्रांस रवाना हो गई हैं। इस दौरे के दौरान वह भारत और फ्रांस के बीच आर्थिक साझेदारी, निवेश, वित्तीय सहयोग और रणनीतिक परियोजनाओं को लेकर कई उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगी।   निवेश बढ़ाने पर रहेगा विशेष फोकस   दौरे के दौरान वित्त मंत्री फ्रांस सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और निवेशकों से मुलाकात करेंगी। बैठक में भारत में विदेशी निवेश बढ़ाने, विनिर्माण क्षेत्र, हरित ऊर्जा, बुनियादी ढांचा और डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा होने की संभावना है।   भारत-फ्रांस आर्थिक संबंधों को मिलेगी नई गति   सूत्रों के अनुसार, दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के साथ-साथ वित्तीय संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने पर भी विचार किया जाएगा। भारत सरकार का उद्देश्य फ्रांसीसी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।   वैश्विक आर्थिक मुद्दों पर भी होगी चर्चा   दौरे के दौरान वैश्विक आर्थिक चुनौतियों, सप्लाई चेन को मजबूत बनाने, क्लाइमेट फाइनेंस और बहुपक्षीय वित्तीय संस्थानों में सहयोग जैसे मुद्दे भी एजेंडे में शामिल रहेंगे। इसके अलावा दोनों पक्ष वैश्विक आर्थिक स्थिरता और सतत विकास के लिए साझा रणनीति पर विचार-विमर्श करेंगे।   रणनीतिक साझेदारी को मिलेगा मजबूती का संदेश   विशेषज्ञों का मानना है कि निर्मला सीतारमण का यह दौरा भारत और फ्रांस के बीच रणनीतिक एवं आर्थिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। इससे दोनों देशों के बीच निवेश, व्यापार और प्रौद्योगिकी सहयोग को नई गति मिलने की उम्मीद है।

abhishek singh जुलाई 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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surbhi अगस्त 12, 2026 0