भूकंप

People evacuate buildings after a strong earthquake strikes off Japan’s Iwate coast, shaking northern regions.
वेनेजुएला के बाद जापान में जोरदार भूकंप, 7.0 तीव्रता से कांपी धरती; सुनामी का खतरा नहीं

  टोक्यो: वेनेजुएला में आए शक्तिशाली भूकंप के कुछ ही घंटों बाद जापान में भी धरती जोरदार झटकों से कांप उठी। गुरुवार सुबह उत्तरी जापान के इवाते प्रांत के तट के पास आए 7.0 तीव्रता के भूकंप ने कई इलाकों में दहशत फैला दी। भूकंप के झटके आओमोरी प्रांत के हाशिकामी शहर समेत आसपास के क्षेत्रों में सबसे अधिक महसूस किए गए। राहत की बात यह रही कि जापानी अधिकारियों ने भूकंप के बाद सुनामी का कोई खतरा नहीं बताया है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान की भी कोई सूचना नहीं मिली है। टोक्यो तक महसूस हुए भूकंप के झटके स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी टोक्यो में भी हल्के झटके महसूस किए गए। भूकंप के बाद लोग कुछ समय के लिए घरों और कार्यालयों से बाहर निकल आए। सरकारी प्रसारक एनएचके द्वारा जारी तस्वीरों और वीडियो में प्रभावित क्षेत्रों में सामान्य यातायात चलता हुआ दिखाई दिया और सार्वजनिक सेवाएं भी सुचारू रूप से संचालित होती नजर आईं। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया है। भूकंप की तीव्रता को लेकर अलग-अलग आंकड़े भारत के नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 7.0 दर्ज की गई। वहीं जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) ने इसकी तीव्रता 6.9 बताई है। एजेंसी के मुताबिक, भूकंप का केंद्र इवाते प्रांत के निकट समुद्र में था और इसकी गहराई लगभग 50 किलोमीटर थी। अपेक्षाकृत  

Deepshikha जून 25, 2026 0
Residents evacuate buildings after a powerful 6.8 magnitude earthquake strikes Central Sulawesi, Indonesia.
इंडोनेशिया में 6.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, दहशत में घरों से बाहर निकले लोग

  जकार्ता: इंडोनेशिया में मंगलवार सुबह 6.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आने से लोगों में दहशत फैल गई। भूकंप के तेज झटके महसूस होते ही पालू और सेंट्रल सुलावेसी समेत कई इलाकों में लोग अपने घरों से बाहर निकल आए और सुरक्षित स्थानों की ओर चले गए। संभावित आफ्टरशॉक और सुनामी के खतरे को देखते हुए तटीय क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। 45 किलोमीटर की गहराई में आया भूकंप नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) के अनुसार, यह भूकंप मंगलवार सुबह 08:57:49 बजे (भारतीय समयानुसार) आया। भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.8 दर्ज की गई। इसका केंद्र 1.073 डिग्री दक्षिण अक्षांश और 120.263 डिग्री पूर्व देशांतर पर स्थित था, जबकि इसकी गहराई जमीन से 45 किलोमीटर नीचे मापी गई। कई इलाकों में महसूस हुए जोरदार झटके स्थानीय मीडिया संस्थान 'जकार्ता ग्लोब' के मुताबिक, पालू, सिगी, डोंगगाला और टोजो उना-उना क्षेत्रों में भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। झटकों के बाद लोगों में अफरा-तफरी मच गई और कई परिवार घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों में एकत्र हो गए। सुनामी और आफ्टरशॉक के डर से खाली किए तटीय इलाके रिपोर्ट के अनुसार, संभावित सुनामी और आफ्टरशॉक के खतरे को देखते हुए लोगों ने एहतियातन तटीय इलाकों को खाली कर दिया। स्थानीय प्रशासन ने भी लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। नुकसान का आकलन करने में जुटे अधिकारी अभी तक किसी के हताहत होने या बड़े पैमाने पर संपत्ति के नुकसान की कोई सूचना नहीं मिली है। प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां प्रभावित इलाकों में स्थिति का जायजा लेने और संभावित नुकसान का आकलन करने में जुटी हुई हैं। जून में दक्षिण-पूर्व एशिया का दूसरा बड़ा भूकंप गौरतलब है कि जून महीने में दक्षिण-पूर्व एशिया में यह दूसरा बड़ा भूकंप है। इससे पहले 8 जून को फिलीपींस में 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया था, जिसकी जानकारी भी नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (NCS) ने दी थी। लगातार बढ़ रही भूकंपीय गतिविधियों ने क्षेत्रीय देशों की चिंता बढ़ा दी है।  

Deepshikha जून 16, 2026 0
Residents stand outdoors after strong earthquake tremors in Cuba and Iran, causing widespread concern.
क्यूबा में 150 साल का सबसे शक्तिशाली भूकंप, ईरान में भी कांपी धरती; आखिर क्यों बढ़ रही हैं भूकंपीय गतिविधियां?

  तेहरान: दुनिया के कई हिस्सों में लगातार आ रहे भूकंपों ने वैज्ञानिकों और आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। फिलीपींस में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद अब क्यूबा और ईरान में भी धरती कांपने से लोगों में दहशत फैल गई। क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास आए 6.1 तीव्रता के भूकंप को विशेषज्ञों ने पिछले लगभग 150 वर्षों में क्षेत्र के सबसे शक्तिशाली झटकों में से एक बताया है। वहीं कुछ ही घंटों बाद दक्षिणी ईरान में भी 5.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया। दोनों देशों में किसी बड़े जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है, लेकिन लगातार अलग-अलग क्षेत्रों में आ रहे भूकंपों ने वैश्विक स्तर पर भूगर्भीय गतिविधियों को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्यूबा के पास समुद्र के भीतर आया शक्तिशाली भूकंप अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, क्यूबा के उत्तर-पश्चिमी तट के पास आए भूकंप की तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 6.1 मापी गई। इसका केंद्र समुद्र के भीतर लगभग 26 किलोमीटर की गहराई में स्थित था। भूकंप का केंद्र पश्चिमी क्यूबा के मांतुआ क्षेत्र से करीब 104 किलोमीटर पश्चिम-उत्तर पश्चिम दिशा में बताया गया है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह मेक्सिको की खाड़ी क्षेत्र में हाल के दशकों के सबसे महत्वपूर्ण भूकंपीय घटनाक्रमों में से एक है। वैज्ञानिकों ने बताया असामान्य घटना विशेषज्ञों का कहना है कि यह भूकंप कई मायनों में असामान्य है। सामान्यतः बड़े भूकंप दो टेक्टोनिक प्लेटों की सीमाओं पर आते हैं, लेकिन यह झटका प्लेट के भीतर उत्पन्न हुआ। भूकंप वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्ष 1880 में सैन क्रिस्टोबल क्षेत्र के पास लगभग 6.0 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था। उसके बाद इतने बड़े स्तर का झटका इस क्षेत्र में महसूस नहीं किया गया था। फ्लोरिडा और मेक्सिको तक महसूस हुए झटके क्यूबा में आए भूकंप का असर केवल द्वीपीय क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा। इसके झटके कैरेबियन क्षेत्र, मेक्सिको के युकाटन प्रायद्वीप और अमेरिका के फ्लोरिडा राज्य तक महसूस किए गए। क्यूबा की राजधानी हवाना सहित कई शहरों में लोग घबराकर घरों और दफ्तरों से बाहर निकल आए। स्थानीय निवासियों ने बताया कि इमारतों में तेज कंपन महसूस हुआ और कई लोगों ने पहली बार इतनी तीव्रता के झटके अनुभव किए। फिलहाल नहीं जारी हुई सुनामी चेतावनी भूकंप के बाद राहत एजेंसियों और स्थानीय प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण शुरू कर दिया है। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े संरचनात्मक नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है। विशेषज्ञों ने संभावना जताई है कि आने वाले दिनों में कुछ हल्के आफ्टरशॉक्स महसूस हो सकते हैं, लेकिन उनके ज्यादा खतरनाक होने की आशंका नहीं है। राहत की बात यह रही कि इस भूकंप के बाद किसी प्रकार की सुनामी चेतावनी जारी नहीं की गई। ईरान में भी देर रात कांपी धरती क्यूबा में आए भूकंप के कुछ घंटों बाद दक्षिणी ईरान के होर्मोजगान प्रांत में भी भूकंप दर्ज किया गया। स्थानीय मीडिया के अनुसार, सरगाज क्षेत्र के निकट आए इस भूकंप की तीव्रता 5.0 मापी गई। रात के समय आए झटकों के कारण लोग नींद से जाग गए और एहतियातन खुले स्थानों की ओर निकल आए। शुरुआती रिपोर्टों में किसी बड़े नुकसान या जनहानि की सूचना नहीं मिली है। गहराई और तीव्रता को लेकर अलग-अलग आंकड़े अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण ने ईरान के भूकंप की तीव्रता 4.9 बताई है, जबकि ईरानी अधिकारियों ने इसे 5.0 दर्ज किया है। भूकंप की गहराई को लेकर भी दोनों पक्षों के आंकड़ों में अंतर देखा गया। अमेरिकी एजेंसी ने इसकी गहराई 10 किलोमीटर बताई, जबकि ईरानी अधिकारियों के अनुसार भूकंप लगभग 22 किलोमीटर नीचे आया था। आखिर क्यों बार-बार भूकंप की चपेट में आता है ईरान? विशेषज्ञों के अनुसार ईरान दुनिया के सबसे अधिक भूकंप प्रभावित देशों में से एक है। इसकी प्रमुख वजह देश की जटिल भूगर्भीय संरचना और सक्रिय फॉल्ट लाइनें हैं। ईरान कई प्रमुख टेक्टोनिक प्लेटों के संगम क्षेत्र में स्थित है। इसके दक्षिण-पूर्व में भारतीय प्लेट, उत्तर में यूरेशियन प्लेट और दक्षिण-पश्चिम में अरबियन प्लेट मौजूद हैं। इन प्लेटों के बीच लगातार दबाव और टकराव से भूगर्भीय तनाव पैदा होता रहता है, जो समय-समय पर भूकंप के रूप में सामने आता है। ज़ाग्रोस पर्वतीय क्षेत्र बढ़ाता है खतरा भूवैज्ञानिकों का मानना है कि अरबियन और यूरेशियन प्लेटों की टक्कर से बने ज़ाग्रोस पर्वतीय क्षेत्र में लगातार भूगर्भीय गतिविधियां होती रहती हैं। यही कारण है कि ईरान में छोटे और बड़े भूकंप नियमित रूप से दर्ज किए जाते हैं। मंगलवार को आया भूकंप भी इसी भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा माना जा रहा है। क्या दुनिया में अचानक बढ़ गए हैं भूकंप? विशेषज्ञों का कहना है कि क्यूबा, ईरान और फिलीपींस में आए हालिया भूकंप आपस में सीधे तौर पर जुड़े हुए नहीं हैं। ये अलग-अलग भूगर्भीय क्षेत्रों में स्थित हैं और अलग-अलग टेक्टोनिक गतिविधियों के कारण उत्पन्न हुए हैं। जब कम समय के भीतर दुनिया के विभिन्न हिस्सों में बड़े भूकंप आते हैं तो लोगों को ऐसा लग सकता है कि भूकंप अचानक बढ़ गए हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार यह पृथ्वी की स्वाभाविक भूगर्भीय प्रक्रिया का हिस्सा है और फिलहाल ऐसा कोई प्रमाण नहीं है कि हालिया घटनाएं किसी एक वैश्विक कारण से जुड़ी हुई हैं। 100 वर्षों में लाखों जिंदगियां प्रभावित ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 1900 के बाद से केवल ईरान में ही विभिन्न भूकंपों के कारण 1.26 लाख से अधिक लोगों की जान जा चुकी है। वहीं दुनिया के अन्य भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में भी समय-समय पर आए बड़े झटकों ने भारी तबाही मचाई है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भूकंपों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन बेहतर निर्माण मानकों, आपदा प्रबंधन और समय पर चेतावनी प्रणालियों के जरिए इनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।  

Deepshikha जून 9, 2026 0
Powerful 7.8 magnitude earthquake strikes Mindanao, triggering tsunami alerts across Pacific coastal regions.
फिलीपींस में 7.8 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप, कई देशों में सुनामी अलर्ट जारी

  मनीला: फिलीपींस के दक्षिणी मिंडानाओ क्षेत्र में सोमवार को आए 7.8 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप के बाद पूरे प्रशांत क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है। भूकंप के बाद फिलीपींस, इंडोनेशिया समेत कई देशों के तटीय इलाकों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की गई है। स्थानीय प्रशासन ने समुद्र किनारे रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाने के निर्देश दिए हैं। जर्मन रिसर्च सेंटर फॉर जियोसाइंसेज (GFZ) के अनुसार, भूकंप की गहराई महज 10 किलोमीटर थी, जिसके कारण इसके झटके काफी तेज महसूस किए गए। शुरुआती आकलन में भूकंप की तीव्रता अलग-अलग दर्ज की गई, लेकिन बाद में इसे संशोधित कर 7.8 बताया गया। सुनामी की आशंका से बढ़ी चिंता भूकंप के तुरंत बाद अमेरिकी सुनामी चेतावनी प्रणाली ने संभावित समुद्री लहरों को लेकर अलर्ट जारी किया। विशेषज्ञों का मानना है कि इतनी उथली गहराई पर आए शक्तिशाली भूकंप से समुद्र में बड़ी लहरें उत्पन्न हो सकती हैं, जो तटीय क्षेत्रों को प्रभावित कर सकती हैं। फिलीपींस इंस्टीट्यूट ऑफ वोल्केनोलॉजी एंड सीस्मोलॉजी (PHIVOLCS) ने चेतावनी दी है कि कुछ तटीय क्षेत्रों में सामान्य ज्वार स्तर से एक मीटर या उससे अधिक ऊंची लहरें पहुंच सकती हैं। एजेंसी ने लोगों को समुद्र तटों से दूर रहने और ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी है। इंडोनेशिया समेत कई देशों में अलर्ट इंडोनेशिया की मौसम, जलवायु और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) ने भी अपने उत्तर-पूर्वी तटीय क्षेत्रों के लिए सुनामी चेतावनी जारी की है। इसके अलावा ताइवान, मलेशिया, पापुआ न्यू गिनी और पश्चिमी प्रशांत महासागर के अन्य देशों को भी सतर्क रहने को कहा गया है। अधिकारियों ने समुद्र किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे किसी भी आपातकालीन निर्देश का तुरंत पालन करें और अफवाहों पर ध्यान न दें। आफ्टरशॉक का खतरा बरकरार विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी तीव्रता के भूकंप के बाद कई दिनों तक आफ्टरशॉक महसूस किए जा सकते हैं। फिलीपींस की भूवैज्ञानिक एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अगले कुछ घंटों और दिनों में क्षेत्र में और झटके आ सकते हैं। अभी तक बड़े नुकसान की सूचना नहीं फिलीपींस और इंडोनेशिया में प्रशासन संभावित नुकसान का आकलन कर रहा है। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार कुछ इमारतों में दरारें आई हैं और कई लोग घबराहट में घरों से बाहर निकल आए। अब तक किसी बड़े स्तर की तबाही या जनहानि की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ‘रिंग ऑफ फायर’ में स्थित है क्षेत्र फिलीपींस और इंडोनेशिया दोनों प्रशांत महासागर के उस भूगर्भीय क्षेत्र में स्थित हैं जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यह दुनिया का सबसे सक्रिय भूकंपीय क्षेत्र माना जाता है, जहां टेक्टोनिक प्लेटों की गतिविधियों के कारण अक्सर शक्तिशाली भूकंप और ज्वालामुखी विस्फोट होते रहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, इसी भूगर्भीय सक्रियता के कारण इस क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं का खतरा लगातार बना रहता है।  

Deepshikha जून 8, 2026 0
Rescue teams inspect damaged buildings after deadly earthquake struck Guangxi region in southern China.
चीन में भूकंप से तबाही: 2 लोगों की मौत, कई घायल, 13 इमारतें क्षतिग्रस्त

China के दक्षिणी क्षेत्र ग्वांग्शी में सोमवार तड़के आए तेज भूकंप ने भारी तबाही मचाई। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.2 मापी गई। भूकंप के कारण कई इमारतों को नुकसान पहुंचा है, जबकि अब तक 2 लोगों की मौत और कई लोगों के घायल होने की पुष्टि हुई है। स्थानीय प्रशासन के मुताबिक, भूकंप के झटकों के बाद इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया और हजारों लोग घरों से बाहर निकल आए। 13 इमारतें तबाह, कई लोग घायल चीनी सरकारी मीडिया China Central Television की रिपोर्ट के अनुसार, भूकंप से कम से कम 13 इमारतें क्षतिग्रस्त या तबाह हो गईं। अधिकारियों ने बताया कि कई लोग घायल हुए हैं, हालांकि अधिकांश घायलों की स्थिति गंभीर नहीं है। घायलों में से चार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। राहत एजेंसियों को आशंका है कि कुछ लोग अभी भी क्षतिग्रस्त इमारतों के भीतर फंसे हो सकते हैं। 7 हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाला गया भूकंप के बाद प्रशासन ने तेजी से राहत और बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 7 हजार से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। आपदा प्रबंधन और आपातकालीन सेवाओं की टीमें लगातार प्रभावित इलाकों में तलाशी अभियान चला रही हैं। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त इमारतों से दूर रहने की अपील की है। रेल यातायात प्रभावित भूकंप के बाद इलाके में रेल सेवाओं पर भी असर पड़ा है। चीनी रेलवे अधिकारियों ने बताया कि पटरियों और पुलों की सुरक्षा जांच की जा रही है, जिसके चलते कुछ ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बिजली, पानी, गैस सप्लाई और सड़क यातायात फिलहाल सामान्य रूप से चल रहे हैं। आफ्टरशॉक को लेकर अलर्ट स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने क्षेत्र में निगरानी बढ़ा दी है। अधिकारियों ने लोगों से सतर्क रहने और संभावित आफ्टरशॉक को लेकर सावधानी बरतने की अपील की है।  

surbhi मई 18, 2026 0
Charles Richter portrait with earthquake wave graph and Richter Scale scientific illustration
भूकंप की भाषा दुनिया को समझाने वाले वैज्ञानिक: जानिए चार्ल्स रिक्टर की प्रेरणादायक कहानी

कैसे एक खगोल वैज्ञानिक का सपना बना भूकंप विज्ञान की बड़ी खोज दुनिया में जब भी कहीं भूकंप आता है, उसकी तीव्रता मापने के लिए सबसे पहले जिस नाम का जिक्र होता है, वह है “रिक्टर स्केल”। इस पैमाने को विकसित करने वाले महान वैज्ञानिक थे Charles Francis Richter। उन्होंने जर्मन वैज्ञानिक Beno Gutenberg के साथ मिलकर 1935 में इस तकनीक को विकसित किया, जिसने भूकंप विज्ञान की दिशा ही बदल दी। आज पूरी दुनिया भूकंप की ताकत को समझने के लिए रिक्टर स्केल का इस्तेमाल करती है, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि चार्ल्स रिक्टर कभी खगोल वैज्ञानिक बनना चाहते थे। बचपन से विज्ञान में थी गहरी रुचि चार्ल्स फ्रांसिस रिक्टर का जन्म 26 अप्रैल 1900 को अमेरिका के ओहायो राज्य के ग्रामीण इलाके हैमिल्टन में हुआ था। बचपन में ही उनके माता-पिता अलग हो गए, जिसके बाद उनका परिवार कैलिफोर्निया चला गया। विज्ञान और गणित में उनकी रुचि शुरू से ही काफी गहरी थी। उन्होंने Stanford University से भौतिकी में स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद California Institute of Technology से सैद्धांतिक भौतिकी में पीएचडी हासिल की। खगोल विज्ञान से सीस्मोलॉजी तक का सफर रिक्टर का सपना अंतरिक्ष और तारों का अध्ययन करने का था, लेकिन किस्मत उन्हें भूकंप विज्ञान यानी सीस्मोलॉजी की दुनिया में ले आई। कैल्टेक की सिस्मोलॉजिकल लैब में काम करते समय उन्होंने भूकंप की तरंगों और उनके पैटर्न का अध्ययन शुरू किया। उस दौर में भूकंप की तीव्रता को “मरकाली स्केल” से समझा जाता था, जिसमें लोगों द्वारा महसूस किए गए झटकों और नुकसान के आधार पर आंकलन किया जाता था। रिक्टर को यह तरीका पूरी तरह वैज्ञानिक नहीं लगा। वे चाहते थे कि भूकंप को ऊर्जा के आधार पर मापा जाए, ठीक वैसे ही जैसे किसी वस्तु का वजन किया जाता है। यही सोच आगे चलकर रिक्टर स्केल की नींव बनी। 1935 में दुनिया को मिला रिक्टर स्केल साल 1935 में चार्ल्स रिक्टर और बेनो गुटेनबर्ग ने मिलकर “रिक्टर स्केल” विकसित किया। इस स्केल ने पहली बार वैज्ञानिक तरीके से भूकंप की तीव्रता मापने का रास्ता तैयार किया। इस खोज के बाद दुनियाभर में भूकंप मापने की प्रक्रिया अधिक सटीक और भरोसेमंद हो गई। रिक्टर स्केल ने वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद की कि किसी भूकंप में कितनी ऊर्जा निकलती है और उसका प्रभाव कितना बड़ा हो सकता है। आपदा प्रबंधन में भी दिया बड़ा योगदान चार्ल्स रिक्टर सिर्फ वैज्ञानिक खोज तक सीमित नहीं रहे। उन्होंने भूकंप से बचाव के लिए मजबूत बिल्डिंग कोड और आपदा तैयारी पर भी जोर दिया। उन्होंने “Seismicity of the Earth” और “Elementary Seismology” जैसी महत्वपूर्ण किताबें लिखीं, जो आज भी भूकंप विज्ञान के क्षेत्र में अहम मानी जाती हैं। अपने ही नाम से दूरी बनाते थे रिक्टर दिलचस्प बात यह है कि पूरी दुनिया जिस “रिक्टर स्केल” के नाम से उन्हें याद करती है, खुद चार्ल्स रिक्टर इस नाम से ज्यादा सहज नहीं थे। वे हमेशा अपने सहयोगी बेनो गुटेनबर्ग का जिक्र करते थे और कहते थे कि यह खोज केवल उनकी अकेली मेहनत का परिणाम नहीं थी। विज्ञान की दुनिया में अमर हो गया नाम चार्ल्स रिक्टर का निधन 30 सितंबर 1985 को हुआ, लेकिन उनकी खोज आज भी दुनिया को भूकंप की ताकत समझाने का सबसे बड़ा माध्यम बनी हुई है। उनके सम्मान में Seismological Society of America ने युवा वैज्ञानिकों के लिए “Charles Richter Early Career Award” भी शुरू किया, ताकि नई पीढ़ी विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ सके।  

surbhi मई 11, 2026 0
Strong earthquake hits Indonesia sea region causing damage and minor tsunami waves along coast
इंडोनेशिया में 7.4 तीव्रता का भूकंप, सुनामी की हल्की लहरें; एक महिला की मौत

जकार्ता/मोलूका सागर, गुरुवार: इंडोनेशिया में गुरुवार को 7.4 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया, जिससे कई इलाकों में दहशत फैल गई। भूकंप का केंद्र मोलूका सागर में जमीन से लगभग 35 किलोमीटर की गहराई में बताया गया है। तेज झटकों के बाद कुछ तटीय क्षेत्रों में सुनामी की छोटी लहरें भी दर्ज की गईं। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार, भूकंप के झटके उत्तरी सुलावेसी और उत्तर मलुकु क्षेत्रों में 10 से 20 सेकंड तक महसूस किए गए। इस प्राकृतिक आपदा में एक महिला की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कई घरों और इमारतों को नुकसान पहुंचा है। सुनामी की छोटी लहरें उठीं, बड़ा खतरा टला इंडोनेशिया की मौसम, जलवायु और भूभौतिकी एजेंसी (BMKG) ने बताया कि भूकंप के करीब आधे घंटे के भीतर कई स्थानों पर सुनामी की हल्की लहरें उठीं। बिटुंग में करीब 8 इंच पश्चिम हलमाहेरा में लगभग 1 फुट फिलीपींस में करीब 2 इंच हालांकि, प्रशांत सुनामी चेतावनी केंद्र ने स्पष्ट किया कि दूर-दराज के इलाकों के लिए किसी बड़े खतरे की आशंका नहीं है। कई इलाकों में नुकसान, राहत-बचाव जारी आपदा प्रबंधन एजेंसी के मुताबिक, टेरनेट शहर और आसपास के क्षेत्रों में हल्का नुकसान हुआ है। बटांग दुआ द्वीप में एक चर्च क्षतिग्रस्त दक्षिण टेरनेट में दो घरों को नुकसान बिटुंग में नुकसान का आकलन जारी भूकंप के बाद समुद्र के भीतर दो और झटके भी महसूस किए गए, लेकिन उनसे किसी सुनामी खतरे की पुष्टि नहीं हुई। प्रशासन ने जारी किया अलर्ट इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी ने तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन की अनुमति के बिना समुद्र के पास न जाएं। खोज और बचाव टीमों को अलर्ट पर रखा गया है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता का मतलब भूकंप की ताकत रिक्टर स्केल पर मापी जाती है, जिससे उसके प्रभाव और संभावित नुकसान का अंदाजा लगाया जाता है: 8 या उससे अधिक: बेहद विनाशकारी, भारी तबाही की आशंका 7 से 7.9: शक्तिशाली भूकंप, बड़े क्षेत्र में नुकसान संभव 6 से 6.9: मजबूत झटके, संरचनात्मक क्षति की संभावना 5 से 5.9: मध्यम भूकंप, कमजोर इमारतों को नुकसान 2 या कम: आमतौर पर महसूस नहीं होते

surbhi अप्रैल 2, 2026 0
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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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abhishek singh जुलाई 2, 2026 0