नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम (FCRA) संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर सियासी हलचल बढ़ने की संभावना है। केंद्र सरकार इस विधेयक को सोमवार को लोकसभा में आगे बढ़ाने की तैयारी में है। विधेयक का उद्देश्य विदेशी चंदे से जुड़े संगठनों की संपत्तियों और फंड के प्रबंधन को लेकर मौजूदा नियमों को और मजबूत करना है। FCRA नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव FCRA संशोधन विधेयक में ऐसे संगठनों की विदेशी फंड से बनाई गई संपत्तियों को लेकर नया प्रावधान प्रस्तावित है, जिनका FCRA पंजीकरण रद्द, निलंबित या नवीनीकरण नहीं किया गया हो। इसके लिए केंद्र सरकार द्वारा एक नामित प्राधिकरण नियुक्त करने का प्रस्ताव है, जिसे ऐसी संपत्तियों को अपने नियंत्रण में लेने, उनका प्रबंधन करने या जरूरत पड़ने पर उन्हें बेचने की शक्ति मिल सकती है। मार्च में लोकसभा में पेश हो चुका है विधेयक Foreign Contribution (Regulation) Amendment Bill, 2026 को सरकार ने 25 मार्च 2026 को लोकसभा में पेश किया था। अब मानसून सत्र में इस पर आगे की विधायी प्रक्रिया होने की संभावना है। विधेयक विदेशी अंशदान से जुड़ी निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने और FCRA प्रमाणपत्र समाप्त होने की स्थिति में संगठनों की संपत्तियों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाने पर केंद्रित है। विपक्ष और संगठनों की आपत्तियों से बढ़ सकती है सियासत विधेयक के प्रावधानों को लेकर कुछ विपक्षी दलों, चर्च संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं ने आपत्ति जताई है। दूसरी ओर, केंद्र सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव विदेशी फंडिंग की निगरानी और पारदर्शिता मजबूत करने के उद्देश्य से हैं और इन्हें किसी विशेष धार्मिक या सामाजिक समुदाय को निशाना बनाने के लिए नहीं लाया जा रहा है। संसद में टकराव के आसार FCRA संशोधन विधेयक को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच संसद में तीखी बहस होने के आसार हैं। विदेशी फंड प्राप्त करने वाले NGO, चैरिटी और अन्य संस्थाओं पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर भी चर्चा तेज हो सकती है। सरकार जहां इसे निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने वाला कदम बता रही है, वहीं विरोध करने वाले संगठन इसके तहत सरकारी अधिकार बढ़ने को लेकर चिंता जता रहे हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा का मानसून सत्र समाप्त हो गया है। सत्र के दौरान सदन में कुल 20 विधेयक पारित किए गए। सरकार ने जहां इसे राज्य के विकास और प्रशासनिक सुधारों के लिए महत्वपूर्ण बताया, वहीं विपक्ष ने कई मुद्दों को लेकर सरकार पर सवाल उठाए और सदन के अंदर विरोध प्रदर्शन भी किया। कई महत्वपूर्ण विधेयकों को मिली मंजूरी मानसून सत्र के दौरान सरकार की ओर से पेश किए गए कई विधेयकों पर चर्चा के बाद उन्हें मंजूरी दी गई। इन विधेयकों में प्रशासनिक व्यवस्था, शिक्षा, कानून और राज्य के विकास से जुड़े विषय शामिल रहे। सरकार का कहना है कि पारित किए गए विधेयकों से राज्य में बेहतर प्रशासन और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में मदद मिलेगी। छात्र आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था का मुद्दा छाया रहा सत्र के दौरान शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा में पारदर्शिता और छात्र संगठनों के प्रदर्शन का मुद्दा प्रमुखता से उठा। विपक्ष ने पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों को लेकर सरकार से जवाब मांगा। विपक्षी नेताओं ने मांग की कि परीक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जाए और छात्रों की शिकायतों का जल्द समाधान किया जाए। विपक्ष ने सरकार पर लगाए कई आरोप विधानसभा सत्र में विपक्ष ने कानून व्यवस्था, रोजगार, शिक्षा और अन्य जनहित के मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा। कई बार सदन में नारेबाजी और हंगामे की स्थिति भी बनी। विपक्ष का आरोप था कि सरकार जनता से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर जवाब देने से बच रही है। वहीं सत्ता पक्ष ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया। सरकार ने बताया सत्र को उपलब्धिपूर्ण सत्र समाप्त होने के बाद सरकार की ओर से कहा गया कि विधानसभा में जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई और आवश्यक कानूनों को मंजूरी दी गई। सत्तापक्ष ने कहा कि पारित किए गए विधेयक बिहार के विकास और प्रशासनिक सुधारों को गति देने में सहायक होंगे। आगे विधानसभा में नए मुद्दों पर होगी चर्चा मानसून सत्र समाप्त होने के बाद अब सरकार द्वारा पारित विधेयकों को लागू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। वहीं विपक्ष आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के दौरान शिक्षा से जुड़े मुद्दों और हालिया छात्र आंदोलनों को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद में निष्पक्ष और सार्थक चर्चा तभी संभव होगी, जब केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े गंभीर मुद्दों पर सरकार जवाबदेही से बच रही है। NEET और छात्र आंदोलन को लेकर सरकार पर हमला खड़गे ने कहा कि देशभर में छात्र लगातार परीक्षा प्रणाली, पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी चिंताओं को गंभीरता से नहीं ले रही। उन्होंने कहा कि शिक्षा मंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ना चाहिए, ताकि संसद में बिना किसी दबाव के निष्पक्ष चर्चा हो सके। संसद में बढ़ा राजनीतिक टकराव कांग्रेस समेत विपक्षी दलों ने शिक्षा व्यवस्था और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर सरकार को घेरा। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि विपक्ष केवल राजनीतिक लाभ के लिए इस मुद्दे को उठा रहा है और सरकार हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को मजबूत और पारदर्शी बनाने के लिए लगातार कदम उठा रही है। शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज होने के संकेत हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा मानसून सत्र की प्रमुख राजनीतिक बहसों में शामिल रह सकता है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र का आज का दिन भी हंगामेदार रहा। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों ने NEET परीक्षा से जुड़े मुद्दे, महंगाई, बेरोजगारी, कानून-व्यवस्था और विभिन्न राज्यों की हालिया घटनाओं को लेकर केंद्र सरकार को घेरा। विपक्ष ने इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा और सरकार से जवाब की मांग की, जबकि सत्ता पक्ष ने सरकार के कदमों का बचाव किया। NEET और परीक्षा प्रणाली पर विपक्ष के सवाल विपक्षी सांसदों ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET की पारदर्शिता, परीक्षा सुधार और छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों को सदन में प्रमुखता से उठाया। उन्होंने परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और निष्पक्ष बनाने की मांग की। इस दौरान शिक्षा व्यवस्था में सुधार को लेकर भी कई सुझाव दिए गए। महंगाई और बेरोजगारी पर सरकार से जवाब की मांग सदन में विपक्ष ने खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों, ईंधन की लागत और रोजगार के अवसरों को लेकर सरकार को घेरा। विपक्षी नेताओं ने कहा कि आम जनता महंगाई के दबाव का सामना कर रही है और इस पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए। जवाब में सरकार ने महंगाई को नियंत्रित रखने और रोजगार सृजन के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी। कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर भी तीखी बहस विपक्ष ने देश के विभिन्न हिस्सों में हुई हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कानून-व्यवस्था की स्थिति पर चिंता जताई। कई सांसदों ने सुरक्षा व्यवस्था और राज्यों में बढ़ते अपराध के मुद्दे उठाए। सरकार ने कहा कि कानून-व्यवस्था राज्य सरकारों का विषय है, लेकिन केंद्र आवश्यक सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है। हंगामे के बीच कई बार स्थगित हुई कार्यवाही विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार बाधित हुई। सभापति और लोकसभा अध्यक्ष ने सदन की व्यवस्था बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहने पर कुछ समय के लिए कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। बाद में सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई और सूचीबद्ध कार्यों पर चर्चा की गई। सरकार ने विकास कार्यों का दिया ब्यौरा सत्र के दौरान सरकार ने विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधायी कार्यों और विकास योजनाओं की प्रगति पर भी जानकारी दी। सरकार ने कहा कि शिक्षा, रोजगार, बुनियादी ढांचा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर संसद में चर्चा जारी रहेगी। वहीं विपक्ष ने संकेत दिए हैं कि वह आगामी बैठकों में भी जनहित से जुड़े मुद्दों को जोरदार तरीके से उठाता रहेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र के दौरान बुधवार को भी दोनों सदनों में तीखी बहस और हंगामे की संभावना है। विपक्षी दल NEET परीक्षा विवाद, महंगाई, बेरोजगारी और अन्य राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी नेताओं ने रणनीति बैठक कर सरकार से इन मुद्दों पर विस्तृत चर्चा की मांग की। NEET और शिक्षा व्यवस्था रहेगा मुख्य मुद्दा विपक्ष का कहना है कि NEET परीक्षा से जुड़े विवादों और छात्रों की शिकायतों पर सरकार को संसद में जवाब देना चाहिए। विपक्षी दल परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा शिक्षा व्यवस्था और भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं का मुद्दा भी उठाए जाने की संभावना है। सरकार कई अहम विधेयक पेश करने की तैयारी में वहीं केंद्र सरकार मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों और नीतिगत प्रस्तावों को सदन में पेश करने की तैयारी कर रही है। सरकार का कहना है कि वह सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन सदन की कार्यवाही बाधित नहीं होनी चाहिए। संसदीय कार्य मंत्री ने विपक्ष से सहयोग की अपील भी की है। कार्यवाही प्रभावित होने की आशंका संसदीय जानकारों का मानना है कि यदि विपक्ष अपने विरोध पर अड़ा रहता है तो लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हो सकती है। ऐसे में महत्वपूर्ण विधेयकों और अन्य सरकारी कार्यों पर भी असर पड़ने की संभावना है। संसद की कार्यवाही पर देशभर की निगाहें टिकी हुई हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सरकार ने एक साथ सात महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए। जुआ कानून, जीएसटी संशोधन, भूमि दाखिल-खारिज, चिकित्सा, नर्सों के पंजीकरण और कृषि भूमि से जुड़े इन विधेयकों पर सदन में चर्चा शुरू हो गई। सरकार ने संकेत दिया कि बहस पूरी होने के बाद इन्हें पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। सदन में पेश किए गए विधेयकों में बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026, बिहार माल एवं सेवा कर (GST) संशोधन विधेयक, 2026, बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक, 2026, बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) संशोधन विधेयक, 2026, बिहार चिकित्सा संशोधन विधेयक, 2026, बिहार नर्सेस पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026 तथा बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजन के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। सत्र के दौरान सत्र के दौरान जदयू विधायक श्याम रजक ने इंदिरा आंबेडकर विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में करीब 62 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इस पर एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने बताया कि शिक्षक नियुक्ति के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को अधियाचना भेजी जा चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन में क्या घोषणा की TRE-4 शिक्षक भर्ती को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन में घोषणा की कि इसकी अधिसूचना इसी महीने जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं त्रुटिरहित बनाया जाएगा। वहीं, विधान परिषद में ग्राम पंचायतों में होल्डिंग टैक्स वसूली का मुद्दा भी गरमाया। राजद एमएलसी सुनील सिंह ने गरीबों पर टैक्स लगाने का आरोप लगाया, जिस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार गरीबों पर कोई नया टैक्स नहीं लगा रही है और इस तरह की बातें पूरी तरह भ्रामक हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र का दूसरा दिन आज हंगामेदार रहने के आसार हैं। पहले दिन दोनों सदनों की कार्यवाही विपक्ष के विरोध के कारण बार-बार बाधित रही थी। आज केंद्र सरकार अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष NEET पेपर लीक, अयोध्या राम मंदिर दान विवाद और छात्र आंदोलन जैसे मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर आक्रामक रुख बनाए हुए है। सरकार कई अहम विधेयकों को आगे बढ़ाएगी सरकार आज सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) विकास (संशोधन) विधेयक, जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक समेत कई प्रस्तावित विधेयकों को सदन में आगे बढ़ाने की कोशिश करेगी। इसके अलावा अन्य लंबित विधेयकों पर भी चर्चा कराए जाने की संभावना है। विपक्ष की मांग— पहले अहम मुद्दों पर चर्चा हो विपक्षी दलों ने स्पष्ट किया है कि वे NEET पेपर लीक, अयोध्या मंदिर दान मामले और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई जैसे मुद्दों पर पहले चर्चा चाहते हैं। इन विषयों पर सरकार से जवाब मांगने की रणनीति बनाई गई है। पहले दिन हंगामे की भेंट चढ़ी कार्यवाही मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। लगातार नारेबाजी और विरोध के चलते दोनों सदनों का कामकाज प्रभावित हुआ और कई निर्धारित कार्य पूरे नहीं हो सके। आज भी टकराव के आसार संसदीय कार्यमंत्री ने सभी दलों से सदन को सुचारु रूप से चलाने में सहयोग की अपील की है। हालांकि मौजूदा राजनीतिक माहौल को देखते हुए आज भी सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक होने की संभावना जताई जा रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। पहले ही दिन कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार को विभिन्न मुद्दों पर घेरने की रणनीति अपनाई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि विपक्ष सदन में जनता की आवाज बनकर सरकार से हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर जवाबदेही तय करेगा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार जनहित के सवालों से बच नहीं सकती और संसद में जनता से जुड़े मुद्दों पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। खरगे ने श्रीराम मंदिर के चंदे को लेकर सवाल उठाते खरगे ने श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए जुटाए गए चंदे को लेकर सवाल उठाते हुए स्वतंत्र जांच की मांग की। उनका कहना था कि करोड़ों श्रद्धालुओं ने अपनी आस्था और विश्वास के साथ मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक सहयोग दिया था, इसलिए इस धन के उपयोग का पूरा हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि किसी तरह की वित्तीय अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। पेपर लीक मामलों को भी गंभीरता से उठाया कांग्रेस अध्यक्ष ने देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को भी गंभीर मुद्दा बताते हुए केंद्र सरकार की शिक्षा नीति पर सवाल खड़े किए। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2014 के बाद से अनेक भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक हुए हैं, जिससे लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसी आधार पर उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए कहा कि परीक्षा प्रणाली में लगातार हो रही विफलताओं की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। इसके अलावा खरगे ने पेट्रोल में एथेनॉल मिश्रण की नीति पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि इस नीति का प्रभाव करोड़ों वाहन मालिकों पर पड़ रहा है और सरकार को इसके वैज्ञानिक, आर्थिक और तकनीकी पहलुओं पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि विपक्ष संसद में जनता से जुड़े हर मुद्दे को मजबूती से उठाएगा और सरकार से पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग करेगा। मानसून सत्र के दौरान कई महत्वपूर्ण विधेयकों के साथ-साथ महंगाई, रोजगार, शिक्षा, कृषि और अन्य जनहित के मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने के आसार हैं। ऐसे में यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद का मानसून सत्र आज (20 जुलाई) से शुरू हो गया है। यह सत्र 13 अगस्त तक चलेगा और इस दौरान 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार ने अपने विधायी एजेंडे में 8 नए विधेयकों को सूचीबद्ध किया है, जबकि विपक्ष ने नीट परीक्षा विवाद, राम मंदिर दान मामले, सोनम वांगचुक आंदोलन, परिसीमन समेत कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बनाई है। सरकार के एजेंडे में 8 नए विधेयक सरकार इस सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश करने की तैयारी में है। इनमें 'वंदे मातरम्' के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने वाला विधेयक भी शामिल है। इसके अलावा विभिन्न प्रशासनिक और कानूनी सुधारों से जुड़े अन्य विधेयकों पर भी चर्चा और पारित कराने की योजना है। विपक्ष ने बनाई आक्रामक रणनीति सत्र शुरू होने से पहले विपक्षी दलों ने बैठक कर कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाने का फैसला लिया। विपक्ष नीट परीक्षा विवाद, राम मंदिर दान प्रकरण, सोनम वांगचुक आंदोलन, परिसीमन और अन्य जनहित के मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगने की तैयारी में है। स्पीकर ने सहयोग की अपील की लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सभी राजनीतिक दलों से सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने और महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा में सहयोग करने की अपील की है। सरकार और विपक्ष दोनों ने सत्र के दौरान जनहित के मुद्दों पर चर्चा की आवश्यकता जताई है। हंगामेदार रहने के आसार राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मानसून सत्र के पहले दिन से ही सदन में तीखी बहस और विरोध देखने को मिल सकता है। सरकार जहां अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने पर जोर देगी, वहीं विपक्ष विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। दिल्ली के जंतर-मंतर पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शुक्रवार को 20वें दिन में प्रवेश कर गई। वह 28 जून से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग को लेकर अनशन पर बैठे हैं। आंदोलन को लेकर विभिन्न राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का समर्थन भी मिल रहा है। शुक्रवार को कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने जंतर-मंतर पहुंचकर वांगचुक से मुलाकात की और उनका हालचाल जाना। डॉक्टरों के अनुसार डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय से भोजन न करने के कारण वांगचुक की सेहत लगातार गिर रही है। उनका वजन अब 56.55 किलोग्राम रह गया है, जो पिछले 24 घंटे में 350 ग्राम कम हुआ है। बीते 20 दिनों में उनका वजन नौ किलोग्राम से अधिक घट चुका है। चिकित्सकों ने बताया कि उनका ब्लड प्रेशर 108/68, ब्लड शुगर 70 mg/dL और हार्ट रेट 72 बीट प्रति मिनट दर्ज किया गया है। शरीर में हल्के डिहाइड्रेशन के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि लंबे समय तक भोजन नहीं मिलने से पहले शरीर की चर्बी, फिर मांसपेशियां प्रभावित हुई हैं और अब आंतरिक अंगों पर असर पड़ने का खतरा बढ़ गया है। सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बावजूद सोनम वांगचुक ने आंदोलन जारी रखने का संकल्प दोहराया। उन्होंने कहा कि वह हर हाल में 20 जुलाई तक जीवित रहने की कोशिश करेंगे ताकि संसद तक प्रस्तावित मार्च में शामिल हो सकें। उन्होंने यह भी कहा कि यदि 20 जुलाई का मार्च सफल नहीं हुआ तो "मैं भूत बनकर वापस आऊंगा।" आंदोलन का नेतृत्व कर रहे संगठन ने घोषणा की है कि संसद के मानसून सत्र के पहले दिन, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकाला जाएगा। संगठन ने देशभर के छात्रों, अभिभावकों और नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की है। आंदोलन की प्रमुख मांगें केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शी एवं जवाबदेह व्यवस्था सुनिश्चित करना हैं।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के मानसून सत्र से पहले आज राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित होगी। बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे। इसमें केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्री और एनडीए के सहयोगी दलों के नेता शामिल होंगे। बैठक का मुख्य उद्देश्य मानसून सत्र के दौरान सरकार की रणनीति तय करना और विभिन्न राजनीतिक व विधायी मुद्दों पर सहयोगी दलों के साथ समन्वय बनाना है। इन मुद्दों पर होगा मंथन बैठक में संसद के आगामी एजेंडे, सरकार द्वारा पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों, विपक्ष की संभावित रणनीति और सदन के सुचारु संचालन को लेकर चर्चा की जाएगी। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा, आर्थिक नीतियों और विभिन्न राज्यों से जुड़े राजनीतिक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है। सहयोगी दलों से लिया जाएगा फीडबैक एनडीए नेतृत्व सहयोगी दलों के सुझाव और चिंताओं को भी सुनेगा, ताकि संसद में गठबंधन एकजुट होकर सरकार का पक्ष रख सके। माना जा रहा है कि आगामी सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयक और नीतिगत फैसले पेश किए जा सकते हैं, इसलिए यह बैठक रणनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है। मानसून सत्र पर टिकी राजनीतिक नजरें मानसून सत्र से पहले सरकार और विपक्ष दोनों अपनी-अपनी रणनीति तैयार करने में जुटे हैं। ऐसे में एनडीए की यह बैठक संसद के आगामी सत्र की दिशा तय करने वाली महत्वपूर्ण राजनीतिक गतिविधियों में से एक मानी जा रही है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने देश में प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। खड़गे ने इस संवेदनशील मुद्दे पर सभी राजनीतिक दलों से व्यापक चर्चा करने के लिए सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। उनका कहना है कि परिसीमन जैसा महत्वपूर्ण विषय राष्ट्रीय सहमति से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। क्या है खड़गे की मांग? अपने पत्र में खड़गे ने कहा कि परिसीमन का असर लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों के प्रतिनिधित्व पर पड़ेगा, इसलिए किसी भी निर्णय से पहले सभी राज्यों और राजनीतिक दलों की राय लेना आवश्यक है। उन्होंने केंद्र सरकार से पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने और व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने का आग्रह किया है। दक्षिणी राज्यों की चिंताओं का भी किया जिक्र खड़गे ने पत्र में दक्षिण भारत के कई राज्यों द्वारा जताई गई आशंकाओं का भी उल्लेख किया। उनका कहना है कि जिन राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में बेहतर प्रदर्शन किया है, उनके प्रतिनिधित्व पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि परिसीमन की प्रक्रिया संघीय ढांचे और राज्यों के हितों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ाई जानी चाहिए। मानसून सत्र से पहले बढ़ी राजनीतिक हलचल संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले आए इस पत्र को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विपक्षी दल पहले से ही इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख की मांग कर रहे हैं। ऐसे में खड़गे की पहल के बाद परिसीमन का मुद्दा संसद और राजनीतिक गलियारों में प्रमुख चर्चा का विषय बन सकता है। सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार फिलहाल प्रधानमंत्री कार्यालय या केंद्र सरकार की ओर से खड़गे के पत्र पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि सरकार सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग पर क्या फैसला लेती है।
देहरादून, एजेंसियां। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी आज उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में कांग्रेस के 'छात्रों की गूंज' अभियान के तहत छात्रों और युवाओं से संवाद करेंगे। कार्यक्रम में प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक, बेरोज़गारी, भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और शिक्षा व्यवस्था जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी। कांग्रेस का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य देशभर के छात्रों की समस्याओं को सुनकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर उठाना है। पेपर लीक को लेकर सरकार पर हमला कार्यक्रम से पहले राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि "यह सिर्फ पेपर लीक नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य की चोरी है।" उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाली परीक्षा अनियमितताओं से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार इस समस्या पर प्रभावी कार्रवाई करने में विफल रही है। छात्रों से सीधे संवाद करेंगे राहुल कांग्रेस नेताओं के अनुसार, राहुल गांधी कार्यक्रम के दौरान छात्रों के सवालों का जवाब देंगे और भर्ती परीक्षाओं, रोजगार के अवसरों तथा शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर उनके सुझाव भी सुनेंगे। अभियान के तहत विभिन्न राज्यों में ऐसे संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं ताकि युवाओं की आवाज़ को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया जा सके। राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा कार्यक्रम विश्लेषकों के अनुसार, उत्तराखंड में आयोजित यह कार्यक्रम केवल छात्र संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे कांग्रेस के युवा संपर्क अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। आगामी राजनीतिक गतिविधियों और संसद के मानसून सत्र से पहले यह कार्यक्रम युवाओं के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के समर्थन में खुला पत्र जारी किया है। उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के आंदोलन को उचित बताते हुए सरकार से उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करने की अपील की है। साथ ही, उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य कारणों को देखते हुए अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त करने का आग्रह किया है। 'देश को आपकी आवाज़ की ज़रूरत है' अपने पत्र में शशि थरूर ने सोनम वांगचुक से कहा कि देश को उनकी आवाज़ और नेतृत्व की आवश्यकता है। उन्होंने लिखा कि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए उनका स्वस्थ रहना अधिक जरूरी है, इसलिए उन्हें भूख हड़ताल समाप्त कर संवाद और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखना चाहिए। छात्रों के संघर्ष को बताया जायज़ थरूर ने कहा कि पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में गड़बड़ियों से सबसे अधिक नुकसान मेहनत करने वाले सामान्य परिवारों के छात्रों को होता है। उन्होंने लिखा कि यह केवल परीक्षा का नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य और उनके विश्वास का भी सवाल है। सरकार से बातचीत की अपील कांग्रेस सांसद ने केंद्र सरकार से प्रदर्शन कर रहे छात्रों और आंदोलन से जुड़े प्रतिनिधियों के साथ सार्थक बातचीत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं की चिंताओं का समाधान संवाद के माध्यम से निकाला जाना चाहिए। मानसून सत्र में उठ सकता है मुद्दा शशि थरूर ने संकेत दिया कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों की मांगों का मुद्दा संसद के आगामी मानसून सत्र में भी उठाया जा सकता है। उनका कहना है कि युवाओं का भरोसा बनाए रखना लोकतंत्र और शिक्षा व्यवस्था दोनों के लिए जरूरी है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले केंद्र सरकार अपनी तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुट गई है। इसी कड़ी में आज शाम रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के नई दिल्ली स्थित आवास पर वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। बैठक में सरकार के विधायी एजेंडे, विपक्ष की रणनीति और संसद में पेश किए जाने वाले प्रमुख विधेयकों पर चर्चा होगी। मॉनसून सत्र की रणनीति पर होगा मंथन सूत्रों के अनुसार, बैठक में 20 जुलाई से शुरू होने वाले मॉनसून सत्र के लिए सरकार की रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा। विपक्ष द्वारा उठाए जाने वाले संभावित मुद्दों और सरकार की जवाबी तैयारी पर भी विस्तार से चर्चा होने की संभावना है। सरकार चाहती है कि संसद का सत्र सुचारु रूप से चले और महत्वपूर्ण विधेयकों को समय पर पारित कराया जा सके। कई वरिष्ठ मंत्री हो सकते हैं शामिल बैठक में गृह मंत्री अमित शाह, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण समेत कई वरिष्ठ केंद्रीय मंत्रियों के शामिल होने की संभावना है। विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधेयकों और राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा। सर्वदलीय बैठक से पहले सरकार की तैयारी यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब केंद्र सरकार 19 जुलाई को प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक की तैयारी भी कर रही है। माना जा रहा है कि आज की बैठक में लिए गए फैसलों के आधार पर सरकार विपक्ष के साथ होने वाली चर्चा में अपना रुख स्पष्ट करेगी। मॉनसून सत्र में कई अहम विधेयक और राष्ट्रीय मुद्दे सदन में आने की संभावना है, इसलिए सरकार कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती है।
PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoK) में सरकार विरोधी आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने बुधवार को मुजफ्फराबाद तक 'लॉन्ग मार्च' का आह्वान किया है। संभावित प्रदर्शन को देखते हुए पूरे क्षेत्र में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है और बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। सरकार के खिलाफ जारी है आंदोलन JAAC लंबे समय से अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई, सुरक्षा बलों की कार्रवाई रोकने, इंटरनेट और मोबाइल सेवाएं बहाल करने तथा बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बेहतर उपलब्धता जैसी मांगों को लेकर आंदोलन चला रही है। संगठन का कहना है कि सरकार को पहले ही अल्टीमेटम दिया गया था, लेकिन मांगों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। कई जिलों से मुजफ्फराबाद पहुंचेंगे प्रदर्शनकारी सूत्रों के मुताबिक रावलकोट, मीरपुर, कोटली, बाग समेत कई जिलों से बड़ी संख्या में लोग मुजफ्फराबाद पहुंच सकते हैं। प्रदर्शन के दौरान बाजार बंद रहने और कई प्रमुख सड़कों पर यातायात प्रभावित होने की भी संभावना जताई गई है। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी संभावित विरोध प्रदर्शन को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की है। प्रमुख मार्गों और सरकारी प्रतिष्ठानों की निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय प्रशासन किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अलर्ट पर है। JAAC की प्रमुख मांगें गिरफ्तार नेताओं और कार्यकर्ताओं की रिहाई सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर रोक इंटरनेट और मोबाइल सेवाओं की बहाली बिजली और आवश्यक वस्तुओं की बेहतर उपलब्धता शासन और राजनीतिक प्रतिनिधित्व में सुधार आंदोलन और तेज होने की चेतावनी JAAC ने कहा है कि यदि सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाए, तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। संगठन का दावा है कि मौजूदा आंदोलन केवल बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि राजनीतिक सुधारों की मांग भी प्रमुख मुद्दा बनेगी। राजनीतिक असर पर नजर विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बड़े पैमाने पर प्रदर्शन होता है, तो इससे पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक स्थिति और तनावपूर्ण हो सकती है। वहीं, प्रदर्शन के दौरान किसी भी प्रकार की सख्ती या बल प्रयोग की स्थिति पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नजर रहेगी.
नई दिल्ली, एजेंसियां। संसद के आगामी मॉनसून सत्र से पहले राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। कांग्रेस ने 16 जुलाई को अपने शीर्ष नेताओं और सांसदों की अहम रणनीतिक बैठक बुलाई है, जिसमें सत्र के दौरान सरकार को किन मुद्दों पर घेरा जाएगा, इस पर चर्चा होगी। दूसरी ओर, केंद्र सरकार ने 19 जुलाई को सभी राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक बुलाने का फैसला किया है। सरकार और विपक्ष दोनों कर रहे तैयारी कांग्रेस महंगाई, बेरोजगारी, कृषि, राष्ट्रीय सुरक्षा और अन्य प्रमुख मुद्दों को संसद में उठाने की तैयारी कर रही है। वहीं सरकार भी मॉनसून सत्र में कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पेश करने की रणनीति बना रही है। संविधान संशोधन विधेयक पर हो सकता है हंगामा सूत्रों के अनुसार, इस सत्र में प्रस्तावित 130वें संविधान संशोधन विधेयक को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस होने की संभावना है। विपक्ष पहले से ही इस मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा है। 20 जुलाई से शुरू होगा मॉनसून सत्र संसद का मॉनसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होने वाला है। इससे पहले होने वाली कांग्रेस की रणनीति बैठक और सर्वदलीय बैठक को सत्र की दिशा तय करने के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। राजनीतिक दल अपने-अपने एजेंडे को अंतिम रूप देने में जुट गए हैं।
नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्र सरकार ने संसद के आगामी मानसून सत्र की तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह तय हो चुका है कि संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए 13 और 14 अगस्त को संसद की कार्यवाही नहीं आयोजित होगी। सर्वदलीय बैठक जल्द मानसून सत्र शुरू होने से पहले केंद्र सरकार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ सर्वदलीय बैठक आयोजित करेगी। इस बैठक में सरकार अपने विधायी एजेंडे की जानकारी देगी, जबकि विपक्ष विभिन्न राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाएगा। संसदीय परंपरा के अनुसार यह बैठक प्रत्येक सत्र से पहले आयोजित की जाती है ताकि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके। कई अहम विधेयकों पर रहेगी नजर मानसून सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। साथ ही आर्थिक सुधार, राष्ट्रीय सुरक्षा, महंगाई, बेरोजगारी, कृषि, शिक्षा और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष भी विभिन्न समसामयिक विषयों पर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा हुआ है। राजनीतिक रूप से रहेगा अहम सत्र आगामी महीनों में कई राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज होने वाली हैं। ऐसे में संसद का यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्ता पक्ष अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा, वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे और अन्य राष्ट्रीय विषयों पर सरकार को घेरने की कोशिश में लगा हुआ है। 21 दिन की कार्यवाही इस बार संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान दोनों सदनों में विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधेयकों, नीतिगत फैसलों और जनहित के मुद्दों पर चर्चा होगी। स्वतंत्रता दिवस समारोह के कारण 13 और 14 अगस्त को दोनों सदनों की बैठक आयोजित नहीं होगी।
850 सीटों वाली संसद की तैयारी, दो-तिहाई बहुमत के लिए ब्लूप्रिंट तैयार, 44 सांसदों की जरूरत मुंबई, एजेंसियां। मानसून सत्र से पहले लोकसभा में संख्या बल बढ़ाने की राजनीतिक कवायद तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र के बाद अब तमिलनाडु में DMK को अगला लक्ष्य माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, मकसद दो-तिहाई बहुमत जुटाकर परिसीमन (850 सीटें करने), महिला आरक्षण के क्रियान्वयन और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' जैसे बड़े संवैधानिक बदलावों का रास्ता आसान करना है। बताया जा रहा है कि पिछले सत्र में परिसीमन समेत अहम बिलों पर जरूरी समर्थन नहीं मिलने के बाद सरकार ने संख्या बल बढ़ाने की रणनीति बनाई है। चर्चा है कि TMC और शिवसेना (UBT) के कुछ सांसद पाला बदल सकते हैं। लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है इससे लोकसभा में NDA की संख्या बढ़ सकती है। हालांकि, दो-तिहाई बहुमत के लिए अभी और सांसदों के समर्थन की जरूरत होगी। पार्टी के रणनीतिकार का कहना है कि अगर सरकार दो तिहाई बहुमत के करीब पहुंच गई, तो संसद का विशेष सत्र बुलाकर भी परिसीमन बिल पारित कराया जा सकता है। उद्धव गुट की शिवसेना ने बैठक में सभी सांसदों को बुलाया शिवसेना (यूबीटी) ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को व्हिप जारी कर गुरुवार को होने वाली संसदीय दल की बैठक में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने का निर्देश दिया है। पार्टी की ओर से 16 जून को जारी सर्कुलर में कहा गया है कि विभिन्न संगठनात्मक और राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा के लिए यह महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गई है। बैठक गुरुवार सुबह 11 बजे संसद भवन स्थित संसदीय दल के कार्यालय में होगी। 6 सांसदों ने बगावत कर दी है यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब यूबीटी के 9 में से 6 सांसदों ने बगावत कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, छह सांसदों ने बुधवार सुबह 9:30 बजे लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजी। हालांकि, अभी स्पीकर या बागी गुट की तरफ से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। स्पीकर को शिंदे गुट में विलय के लिए चिट्ठी भेजने की चर्चा यूबीटी के बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल शामिल हैं। संजय ने बुधवार सुबह ही पार्टी छोड़ने की खबरों को खारिज किया था। संजय राउत ने बागियों को गाली दी इस बीच दिल्ली में राज्यसभा सांसद संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों को गाली दी। राउत ने कहा- ये साले #$% के। ये बेईमान लोग हैं। बेईमानी उनके खून में हैं। राउत ने बाद में सफाई देते हुए कहा- मराठी में ऐसे शब्द आम बोलचाल का हिस्सा हैं। राउत की प्रेस कॉन्फ्रेंस में शिवसेना (UBT) के 9 में से सिर्फ 3 सांसद, अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत मौजूद रहे। राउत ने कहा कि बाकी सांसदों को खुद सामने आकर अटकलों का खंडन करना चाहिए। शिवसेना में दूसरी टूट शिवसेना में चार साल में यह दूसरी बड़ी टूट है। जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 39 विधायकों ने बगावत कर शिवसेना का अलग गुट बनाया था।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।