लखनऊ, एजेंसियां। सावन माह में चल रही कांवड़ यात्रा को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर यात्रा मार्गों पर सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं को लेकर आवश्यक निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने सभी जिलों को पूरी सतर्कता बरतने के लिए कहा है। संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ाई गई मुख्यमंत्री के निर्देश पर कांवड़ यात्रा मार्गों, प्रमुख शिव मंदिरों और संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी कैमरों और कंट्रोल रूम के माध्यम से यात्रा की निगरानी की जा रही है। किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए त्वरित प्रतिक्रिया दल (QRT) और आपातकालीन सेवाओं को भी अलर्ट पर रखा गया है। यातायात और श्रद्धालुओं की सुविधाओं पर विशेष ध्यान सरकार ने यात्रा मार्गों पर सुचारु यातायात बनाए रखने के लिए विशेष ट्रैफिक प्लान लागू किया है। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, चिकित्सा सहायता, विश्राम स्थल, मोबाइल शौचालय और एंबुलेंस जैसी आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही, विद्युत आपूर्ति और साफ-सफाई सुनिश्चित करने के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। अफवाह फैलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अधिकारियों को सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने या सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की कोशिश करने वाले तत्वों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों के साथ किसी भी तरह की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। शांतिपूर्ण और सुरक्षित यात्रा पर सरकार का फोकस मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो और सभी व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की जाए। सरकार का उद्देश्य है कि कांवड़ यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुव्यवस्थित तरीके से संपन्न हो तथा श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में विपक्ष पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि "2017 से पहले उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य नहीं था, बल्कि उस समय की सरकार की सोच और कार्यशैली बीमार थी।" उन्होंने कहा कि पिछली सरकारों की नीतियों और निर्णयों के कारण प्रदेश विकास की दौड़ में पीछे रह गया था। '2017 से पहले न नीति थी, न नियत' मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले सरकार के पास न स्पष्ट नीति थी और न ही जनहित में काम करने की नियत। उनके अनुसार, भ्रष्टाचार, अपराध और माफिया का प्रभाव शासन व्यवस्था पर हावी था, जबकि मौजूदा सरकार ने कानून-व्यवस्था को प्राथमिकता देकर निवेश और विकास का माहौल बनाया हुआ है। विपक्ष पर साधा निशाना योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले की सरकारों ने प्रदेश की छवि को नुकसान पहुंचाया, जबकि वर्तमान सरकार ने बुनियादी ढांचे, एक्सप्रेसवे, मेडिकल कॉलेज, एयरपोर्ट और औद्योगिक निवेश के जरिए उत्तर प्रदेश को नई पहचान दिलाने का प्रयास किया है। विकास कार्यों का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि आज उत्तर प्रदेश निवेश, रोजगार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य में बेहतर कानून-व्यवस्था और सुशासन के कारण देश-विदेश की कंपनियां निवेश के लिए आगे आ रही हैं। सदन में बयान पर छिड़ी राजनीतिक बहस योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद विधानसभा में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष ने सरकार के दावों पर सवाल उठाए, जबकि भाजपा ने मुख्यमंत्री के बयान का समर्थन करते हुए इसे प्रदेश के विकास का वास्तविक चित्र बताया।
महाप्रसाद में मालपुआ का क्यों है विशेष महत्व? ओडिशा के पुरी स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर अपनी प्राचीन परंपराओं, भव्य रथ यात्रा और दिव्य महाप्रसाद के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है। मंदिर में भगवान जगन्नाथ को प्रतिदिन छप्पन भोग अर्पित किए जाते हैं, जिनमें 'मालपुआ', जिसे स्थानीय भाषा में 'आमलु' कहा जाता है, विशेष स्थान रखता है। यह केवल स्वादिष्ट प्रसाद नहीं, बल्कि सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा और सात्विक भोजन संस्कृति का प्रतीक भी माना जाता है। पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान को अर्पित किए जाने वाले भोग में शुद्ध और प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है, इसलिए इसमें रिफाइंड चीनी या मैदा की बजाय गुड़ और गेहूं के आटे का प्रयोग किया जाता है। महाप्रसाद में गुड़ का ही क्यों होता है इस्तेमाल? जगन्नाथ मंदिर की रसोई में भोजन बनाने के नियम सदियों से चले आ रहे हैं। इन्हीं परंपराओं के अनुसार महाप्रसाद में रिफाइंड चीनी की जगह गुड़ का उपयोग किया जाता है। गुड़ मालपुए को प्राकृतिक मिठास, गहरा सुनहरा-भूरा रंग और सोंधी खुशबू देता है। इसके साथ बड़ी इलायची, सौंफ, काली मिर्च, केसर और खाने वाला कपूर मिलाकर इसका स्वाद और भी विशेष बनाया जाता है। यही वजह है कि मंदिर के मालपुए का स्वाद सामान्य मालपुए से अलग माना जाता है। मालपुआ बनाने के लिए आवश्यक सामग्री 1 कप गुड़ (बारीक कटा या कुचला हुआ) 1.5–2 कप गेहूं का आटा 2 छोटे चम्मच दूध 4–5 केसर के रेशे 1 छोटा टुकड़ा खाने वाला कपूर 1 बड़ी इलायची 1 बड़ा चम्मच सौंफ 8–10 काली मिर्च आवश्यकतानुसार पानी तलने के लिए घी या तेल ऐसे बनाएं पारंपरिक मालपुआ सबसे पहले गुड़ को पानी में भिगोकर पूरी तरह घुलने दें। बड़ी इलायची, सौंफ और काली मिर्च को दरदरा कूट लें। अब गुड़ के घोल में थोड़ा-सा खाने वाला कपूर, दूध और धीरे-धीरे गेहूं का आटा मिलाकर बिना गांठ वाला बैटर तैयार करें। इसमें तैयार मसाला और केसर का पानी डालकर अच्छी तरह मिलाएं। एक कड़ाही में घी या तेल गर्म करें। बैटर को कलछी से डालें और धीमी से मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा होने तक तलें। अतिरिक्त तेल निकालकर केले के पत्ते पर सजाएं और ऊपर तुलसी दल रखकर भगवान जगन्नाथ को भोग अर्पित करें। बनाने में कितना समय लगेगा? तैयारी का समय: 15 मिनट पकाने का समय: 20–25 मिनट कुल समय: लगभग 35–40 मिनट प्रति मालपुआ अनुमानित पोषण कैलोरी: 180–220 kcal कार्बोहाइड्रेट: 28–32 ग्राम प्रोटीन: 3–4 ग्राम फैट: 6–8 ग्राम महाप्रसाद की खास बातें गुड़ और गेहूं के आटे से तैयार पारंपरिक सात्विक प्रसाद। रिफाइंड चीनी और मैदे का उपयोग नहीं किया जाता। प्राकृतिक मसाले स्वाद और सुगंध बढ़ाते हैं। भगवान जगन्नाथ के छप्पन भोग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। धार्मिक परंपराओं और शुद्धता के नियमों का विशेष ध्यान रखा जाता है। ध्यान दें: मंदिर में बनने वाले महाप्रसाद की विधि और परंपराएं धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं। घर पर तैयार की गई रेसिपी स्वाद और सामग्री में कुछ भिन्न हो सकती है।
लखनऊ, एजेंसियां। उत्तर प्रदेश सरकार ने पत्रकारों के लिए आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का लाभ हासिल करना और आसान बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर राज्य सरकार पत्रकारों के लिए एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल शुरू करने जा रही है। इसके माध्यम से आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन, लंबित मामलों का निस्तारण और आवेदन की निगरानी पहले से अधिक सरल और पारदर्शी होगी। सूचना निदेशक विशाल सिंह ने बताया सूचना निदेशक विशाल सिंह ने बताया कि जिन पत्रकारों ने पहले ही आयुष्मान कार्ड के लिए आवेदन किया है, वे अब beneficiary.nha.gov.in पोर्टल पर जाकर अपने आवेदन की स्थिति ऑनलाइन देख सकते हैं। यदि आवेदन में किसी प्रकार की त्रुटि या जानकारी में संशोधन की आवश्यकता है, तो संबंधित जिले के मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ) कार्यालय से संपर्क कर सुधार कराया जा सकता है। इसके बाद कार्ड जारी करने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सरकार उन पत्रकारों के लिए भी नई व्यवस्था ला रही है, जिनका अब तक आवेदन नहीं हो सका है या किसी कारण से कार्ड जारी नहीं हुआ है। जल्द शुरू होने वाले विशेष ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पत्रकार अपने जिले के जिला सूचना अधिकारी की सहायता से ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। पोर्टल शुरू होने की जानकारी सभी जिलों को उपलब्ध करा दी जाएगी। आयुष्मान भारत योजना आयुष्मान भारत योजना के तहत पात्र लाभार्थियों को सूचीबद्ध सरकारी और निजी अस्पतालों में पांच लाख रुपये तक का कैशलेस उपचार मिलता है। सरकार का मानना है कि आवेदन प्रक्रिया सरल होने से अधिक से अधिक पात्र पत्रकार इस योजना से जुड़ सकेंगे और जरूरत के समय बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठा सकेंगे। विपरीत परिस्थितियों में काम करने वाले पत्रकारों और उनके परिवारों के लिए यह पहल आर्थिक सुरक्षा और बेहतर स्वास्थ्य संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
अयोध्या, एजेंसियां। राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन मामले ने नया मोड़ ले लिया है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने मामले की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार दोनों ने जांच पूरी होने तक ट्रस्ट की निष्पक्षता और पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया। इस घटनाक्रम के बाद देशभर में इस मामले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। SIT की प्राथमिक रिपोर्ट के बाद दर्ज हुई FIR राम मंदिर दान राशि में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार ने 14 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था। एसआईटी की प्रारंभिक रिपोर्ट मिलने के बाद 25 जून की रात भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। एफआईआर में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, टिन्नू यादव, मनीष यादव सहित आठ लोगों के नाम शामिल हैं। पुलिस ने सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी है। 7 करोड़ रुपये से अधिक के दुरुपयोग का आरोप यह मामला तब सामने आया जब अयोध्या के पूर्व विधायक पवन पांडेय ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाई गई करीब 7 से 7.5 करोड़ रुपये की दान राशि का दुरुपयोग किया गया। आरोप सामने आने के बाद स्वयं ट्रस्ट ने सरकार से निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया था, जिसके बाद एसआईटी का गठन किया गया। सरकार और विपक्ष आमने-सामने मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। वहीं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष से इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ नहीं उठाने की अपील करते हुए कहा कि दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई होगी। फिलहाल पुलिस और एसआईटी पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हैं तथा वित्तीय लेनदेन और संबंधित दस्तावेजों की गहन पड़ताल की जा रही है।
फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को फिरोजाबाद जिले को 658 करोड़ रुपये की 81 विकास परियोजनाओं की सौगात दी। उन्होंने विभिन्न परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करते हुए कहा कि प्रदेश में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और डबल इंजन की सरकार पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ जनता तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों का लाभ अब सीधे जनता के बैंक खातों में पहुंच रहा है, जिससे भ्रष्टाचार और बिचौलियों की भूमिका समाप्त हुई है। 'अब क्लर्क और दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं' मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि पहले सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए लोगों को क्लर्कों और सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब व्यवस्था पूरी तरह बदल चुकी है। उन्होंने कहा, "डबल इंजन सरकार की सबसे बड़ी पहचान पारदर्शिता है। किसानों, महिलाओं और गरीबों को योजनाओं का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में भेजा जा रहा है। अब किसी को सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं पड़ती।" पीएम किसान सम्मान निधि का किया जिक्र सीएम योगी ने कहा कि हाल ही में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत 4,300 करोड़ रुपये की राशि सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर की गई है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। 'नीयत साफ हो तो रास्ते खुद बन जाते हैं' मुख्यमंत्री ने कहा कि जब सरकार की नीयत साफ होती है तो नीतियां और फैसले स्वतः जनता के हित में परिणाम देने लगते हैं। उन्होंने कहा, "केंद्र और राज्य सरकार के समन्वय से विकास योजनाएं तेजी से धरातल पर उतर रही हैं और समाज के हर वर्ग को उनका लाभ मिल रहा है।" विकास परियोजनाओं से क्षेत्र को मिलेगी नई गति सीएम योगी ने कहा कि फिरोजाबाद में शुरू की गई नई विकास परियोजनाएं क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास को नई दिशा देंगी। इन परियोजनाओं से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और स्थानीय लोगों के जीवन स्तर में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार बुनियादी ढांचे, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और किसान कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। 'एक जिला, एक उत्पाद' से यूपी को मिली वैश्विक पहचान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 'एक जिला, एक उत्पाद' (ODOP) योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस पहल ने उत्तर प्रदेश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा, "जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दुनिया के विभिन्न देशों के राष्ट्राध्यक्षों से मिलते हैं, तो उन्हें उत्तर प्रदेश के उत्पाद उपहार स्वरूप भेंट करते हैं। यह प्रदेश के उत्पादों की गुणवत्ता और वैश्विक पहचान का प्रमाण है।" विकास और सुशासन के मॉडल को आगे बढ़ा रही सरकार मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश में सुशासन और विकास साथ-साथ चल रहे हैं। डबल इंजन सरकार का लक्ष्य हर जिले को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना और जनता तक योजनाओं का लाभ बिना किसी भेदभाव के पहुंचाना है।
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा उलटफेर हुआ है। शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) को बड़ा झटका देते हुए पार्टी के छह लोकसभा सांसद आधिकारिक तौर पर उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में शामिल हो गए हैं। शिंदे गुट ने इसे 'ऑपरेशन टाइगर' की बड़ी सफलता करार दिया है। इस घटनाक्रम से राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ताकत और बढ़ गई है, जबकि शिवसेना (UBT) के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती और गहरी हो गई है। एकनाथ शिंदे बोले- 'ऑपरेशन टाइगर' हुआ सफल उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने कहा कि शिवसेना (UBT) के सभी छह बागी सांसदों के उनकी पार्टी में शामिल होने के साथ ही 'ऑपरेशन टाइगर' सफलतापूर्वक पूरा हो गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीतिक विस्तार नहीं, बल्कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कौन-कौन से सांसद शिंदे गुट में हुए शामिल? शिवसेना (UBT) छोड़कर शिंदे गुट में शामिल होने वाले सांसदों में शामिल हैं: Sanjay Deshmukh (यवतमाल) Sanjay Jadhav (परभणी) Sanjay Dina Patil (मुंबई उत्तर-पूर्व) Nagesh Patil Ashtikar (हिंगोली) Omprakash Raje Nimbalkar (धाराशिव) Bhausaheb Wakchaure (शिरडी) ये सभी सांसद कुछ दिन पहले आयोजित शिवसेना (UBT) की संसदीय दल की बैठक में अनुपस्थित रहे थे, जिसके बाद उनके पाला बदलने की अटकलें तेज हो गई थीं। दीपक केसरकर बोले- NDA और होगा मजबूत शिवसेना नेता Deepak Kesarkar ने सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का स्वागत करते हुए कहा कि इससे NDA की राजनीतिक स्थिति और मजबूत होगी। उन्होंने कहा, "यह कदम महाराष्ट्र में गठबंधन की ताकत बढ़ाएगा और आने वाले चुनावों में महायुति को और मजबूती प्रदान करेगा।" उद्धव ठाकरे ने बुलाई थी आपात बैठक सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने से पहले Uddhav Thackeray ने मुंबई में पार्टी नेताओं की अहम बैठक बुलाई थी। बैठक में संगठनात्मक स्थिति, विधानसभा चुनाव की रणनीति और पार्टी में संभावित टूट को रोकने पर चर्चा हुई थी। छह सांसदों के जाने से शिवसेना (UBT) की संसदीय ताकत को बड़ा झटका लगा है। 2022 के बाद फिर बड़ा राजनीतिक झटका गौरतलब है कि वर्ष 2022 में एकनाथ शिंदे ने बड़ी संख्या में विधायकों के साथ बगावत कर शिवसेना को दो हिस्सों में बांट दिया था। उस घटनाक्रम के बाद उद्धव ठाकरे की पार्टी लगातार संगठनात्मक चुनौतियों से जूझ रही है। अब लोकसभा सांसदों के इस दलबदल ने पार्टी की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। विधान परिषद चुनाव में भी महायुति की बड़ी जीत इस राजनीतिक घटनाक्रम के बीच महाराष्ट्र विधान परिषद चुनावों में भी महायुति गठबंधन ने शानदार प्रदर्शन किया है। 17 सीटों में से 16 सीटों पर जीत दर्ज कर गठबंधन ने अपनी राजनीतिक बढ़त साबित की। सीटों का प्रदर्शन: भाजपा: 11 सीटें शिवसेना (शिंदे): 3 सीटें एनसीपी (अजित पवार): 2 सीटें नासिक सीट पर भाजपा के बागी निर्दलीय उम्मीदवार Gokul Gite ने शिवसेना उम्मीदवार Narendra Darade को हराकर महायुति के लिए एकमात्र झटका दिया। किन नेताओं ने दर्ज की जीत? निर्विरोध निर्वाचित उम्मीदवारों में शामिल हैं: Ravindra Phatak Dushyant Chaturvedi Aniket Tatkare Vikram Kakade Arun Lakhani Prajakt Tanpure वहीं भाजपा के अन्य विजयी उम्मीदवारों में सुहास शीर्षत, अविनाश ब्राह्मणकर, धैर्यशील कदम, राजेंद्र राउत, बसवराज पाटिल, राजीव पोतदार, नंदकिशोर महाजन, प्रवीण पोटे और अमर राजुरकर शामिल हैं। महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण शिवसेना (UBT) के छह सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने और विधान परिषद चुनाव में महायुति की बड़ी जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण पैदा कर दिए हैं। जहां NDA का कुनबा और मजबूत दिखाई दे रहा है, वहीं उद्धव ठाकरे के सामने पार्टी के अस्तित्व और संगठनात्मक एकजुटता को बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
लखनऊ, एजेंसियां। अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड की जांच तेज हो गई है। मंगलवार को विशेष जांच दल (एसआईटी) और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम घटनास्थल पर पहुंची और साक्ष्य जुटाने के लिए पूरी इमारत को सील कर दिया। हादसे में 15 छात्रों की दर्दनाक मौत के बाद प्रशासन हर पहलू की गहन जांच कर रहा है। शुरुआती जांच में एसी के कंप्रेसर फटने और शॉर्ट सर्किट को आग लगने की संभावित वजह माना जा रहा है, हालांकि अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगा। सात दिन में रिपोर्ट सौंपेगी एसआईटी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर गठित एसआईटी में संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात और एडीजी जोन प्रवीण कुमार शामिल हैं। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है। इसके साथ ही लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने भी अलग से पांच सदस्यीय जांच समिति बनाई है। चार अधिकारी निलंबित, चार आरोपी गिरफ्तार प्राथमिक जांच में लापरवाही सामने आने पर बिजली विभाग, फायर विभाग और एलडीए के चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं पुलिस ने इमारत मालिक, पेट शॉप संचालक, एनीमेशन सेंटर संचालक और एक किरायेदार समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया है। दो अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। वेयरहाउस से शुरू हुई थी आग सोमवार दोपहर अलीगंज स्थित बहुमंजिला इमारत के प्रथम तल पर बने वेयरहाउस में आग लगने की सूचना मिली थी। देखते ही देखते आग पूरी बिल्डिंग में फैल गई। दूसरी और तीसरी मंजिल पर कोचिंग सेंटर, एनीमेशन ट्रेनिंग सेंटर और गेमिंग जोन संचालित थे, जहां कई छात्र फंस गए। 15 छात्रों की मौत, कई घायल दमकल, पुलिस और एसडीआरएफ की टीमों ने घंटों तक रेस्क्यू अभियान चलाया, लेकिन तब तक 15 छात्रों की जान जा चुकी थी। कई छात्र गंभीर रूप से झुलस गए, जबकि जान बचाने के लिए इमारत से कूदने वाले नौ छात्रों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। हादसे ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है।
लखनऊ: राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। घटना के बाद सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की गहन जांच के लिए दो सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का भी गठन किया गया है। मुख्यमंत्री ने बुलाई हाईलेवल बैठक, SIT के गठन के निर्देश किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में घायलों का हालचाल जानने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सरकारी आवास, 5 कालीदास मार्ग पर उच्चस्तरीय बैठक बुलाई। बैठक में वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ एवं संस्कृति विभाग) अमृत अभिजात और अपर पुलिस महानिदेशक (लखनऊ जोन) प्रवीण कुमार के नेतृत्व में दो सदस्यीय एसआईटी गठित करने के निर्देश दिए। एसआईटी पूरे मामले की जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी। चार आरोपी गिरफ्तार अग्निकांड मामले में पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं— रामकृष्ण उपाध्याय (निवासी अलीगंज) वीरेंद्र प्रसाद शुक्ला (निवासी बड़ा दुर्गा मंदिर, सीतापुर रोड, लखनऊ) तूशॉक कृष्णा जायसवाल (निवासी बालागंज, लखनऊ) सुरेश कुमार साहू (निवासी मड़ियांव, लखनऊ) पुलिस इन सभी से पूछताछ कर आग लगने के कारणों और संभावित लापरवाही के पहलुओं की जांच कर रही है। चार अधिकारियों पर गिरी गाज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चार अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। इनमें शामिल हैं— गौरव कुमार, एक्सईएन कलेक्शन, बिजली विभाग, जानकीपुरम कमलेन्द्र कुमार सिंह, प्रभारी FSSO, फायर विभाग, इंदिरा नगर अनिल कुमार, सहायक अभियंता (AE), लखनऊ विकास प्राधिकरण प्रमोद पांडे, जूनियर इंजीनियर (JE), लखनऊ विकास प्राधिकरण सरकार का कहना है कि प्रथम दृष्टया लापरवाही के संकेत मिलने पर यह कार्रवाई की गई है। अलीगढ़ में थे मुख्यमंत्री, तुरंत रद्द किए कार्यक्रम हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ दौरे पर थे और एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। घटना की जानकारी मिलते ही उन्होंने मंच से ही अपने शेष कार्यक्रम रद्द करने की घोषणा की और तत्काल लखनऊ रवाना हो गए। इससे पहले उन्होंने उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक और वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्य तेज करने के निर्देश दिए थे। घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे मुख्यमंत्री लखनऊ पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री सबसे पहले अलीगंज स्थित घटनास्थल पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्यों का जायजा लिया। इसके बाद उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज पहुंचकर घायलों से मुलाकात की और डॉक्टरों को बेहतर उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने चिकित्सकों से घायलों की स्थिति की जानकारी ली और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। मृतकों के परिजनों को 5 लाख, घायलों को 50 हजार की सहायता मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अग्निकांड में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को 5-5 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। वहीं, घायलों को 50-50 हजार रुपये की वित्तीय मदद देने का भी ऐलान किया गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की जाएगी।
अयोध्या, एजेंसियां। राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी को लेकर चल रहे विवाद के बीच उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी है। शुक्रवार को अयोध्या दौरे के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ होगी और सच सामने लाया जाएगा। "दूध का दूध, पानी का पानी करेगी SIT" जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर राज्य सरकार ने एसआईटी का गठन किया है। उन्होंने कहा कि जांच एजेंसी तथ्यों के आधार पर काम करेगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होगी। योगी ने कहा, "SIT दूध का दूध और पानी का पानी करेगी।" श्रद्धालुओं की भावनाओं का रखें सम्मान मुख्यमंत्री ने सभी राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और संबंधित पक्षों से अपील की कि वे मामले पर बिना तथ्य के बयानबाजी न करें। उन्होंने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है, इसलिए ऐसी कोई टिप्पणी नहीं होनी चाहिए जिससे भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हों। विपक्ष पर साधा निशाना अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने समाजवादी पार्टी पर भी तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जो लोग आज रामभक्तों की चिंता करने का दावा कर रहे हैं, वही अतीत में कारसेवकों पर गोली चलाने के लिए जिम्मेदार थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों में विकास कार्यों की अनदेखी हुई, जबकि वर्तमान सरकार धार्मिक स्थलों के विकास, गरीबों के कल्याण और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार काम कर रही है। वीरांगनाओं के सम्मान का भी किया उल्लेख योगी आदित्यनाथ ने स्वतंत्रता संग्राम की वीरांगनाओं झलकारी बाई, अवंतीबाई और ऊदा देवी पासी का उल्लेख करते हुए कहा कि उनकी स्मृति में विशेष पहल की गई है। उन्होंने बताया कि इन वीरांगनाओं के नाम पर पीएसी की तीन महिला बटालियन बनाई गई हैं, जिनमें केवल महिला अभ्यर्थियों की भर्ती की जाती है। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राम मंदिर से जुड़े विवाद की जांच निष्पक्ष होगी और सरकार पारदर्शिता के साथ न्याय सुनिश्चित करेगी।
लखनऊ/गोरखपुर: समाजवादी पार्टी (सपा) ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारियां तेज कर दी हैं। पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को चुनौती देने का बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि इस बार समाजवादी पार्टी गोरखपुर में बीजेपी को शून्य पर लाने के लिए पूरी ताकत से काम करेगी। गोरखपुर में कार्यकर्ता सम्मेलन की तैयारी लखनऊ में पार्टी की बैठक के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि जल्द ही गोरखपुर में सपा कार्यकर्ताओं का बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल जल्द ही सम्मेलन की तारीख की घोषणा करेंगे। अखिलेश यादव ने कहा, "हमने संकल्प लिया है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में गोरखपुर में बीजेपी को कड़ी चुनौती देंगे। जहां भी हमारी कमियां हैं, उन्हें दूर किया जाएगा और संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जाएगा।" कार्यकर्ताओं के सम्मान की बात सपा प्रमुख ने कहा कि पार्टी अपने प्रत्येक कार्यकर्ता के सम्मान और उनके सुख-दुख में भागीदारी के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन और कार्यकर्ताओं की एकजुटता के दम पर पार्टी 2027 के चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करेगी। शिक्षा, स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था पर योगी सरकार को घेरा अखिलेश यादव ने योगी सरकार के दस साल के कार्यकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि भाजपा सरकार ने शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को कमजोर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में अपराध की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं और सरकार जनता से किए गए वादों को पूरा करने में असफल रही है। उन्होंने कहा, "भाजपा ने झूठे वादे करके जनता को गुमराह करने का काम किया है। प्रदेश के लोग बदलाव चाहते हैं और समाजवादी पार्टी उनकी उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए तैयार है।" ओपी राजभर के बयान पर भी किया पलटवार सपा प्रमुख ने मंत्री ओपी राजभर के हालिया बयान पर भी तंज कसा। उन्होंने शायराना अंदाज में कहा, "दाना और गाना, कब तक चलेगा ये अफसाना।" अखिलेश यादव के इस बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले गोरखपुर समेत पूर्वांचल में सपा की आक्रामक चुनावी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। अब सभी की नजरें गोरखपुर में होने वाले प्रस्तावित कार्यकर्ता सम्मेलन और सपा की आगे की राजनीतिक रणनीति पर टिकी हैं।
अयोध्या, एजेंसियां। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के दान राशि में कथित हेराफेरी के मामले में विशेष जांच दल (SIT) की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। इस बीच ट्रस्ट से जुड़े रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव के अचानक सार्वजनिक रूप से सामने आकर बयान देने से मामले ने नया मोड़ ले लिया है। पिछले कई दिनों से चुप्पी साधे टिन्नू के वीडियो बयान और मीडिया इंटरव्यू के बाद इस पूरे घटनाक्रम को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। सूत्रों का मानना है कि यह कदम किसी सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हो सकता है। ट्रस्ट पदाधिकारियों की भूमिका पर जांच सूत्रों के मुताबिक जांच के दायरे में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी अनिल मिश्रा, टिन्नू यादव और मंदिर निर्माण से जुड़े गोपाल राव सहित कई लोग हैं। जांच एजेंसियां दान राशि के प्रबंधन, उसकी गणना और निगरानी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। बताया जा रहा है कि एसआईटी कई अधिकारियों और कर्मचारियों से बार-बार पूछताछ कर रही है। सीसीटीवी फुटेज और बैंक प्रक्रिया पर भी सवाल जांच के दौरान एसआईटी को ऐसे संकेत मिले हैं जिनसे सीसीटीवी फुटेज से कथित छेड़छाड़ की आशंका जताई जा रही है। हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसके अलावा दान राशि की गणना प्रक्रिया में शामिल बैंक कर्मियों की भूमिका और संभावित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। सूत्रों के अनुसार बैंक कर्मचारी ट्रस्ट पदाधिकारियों के दबाव में होने के कारण कई मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सके। 200 से अधिक लोगों से होगी पूछताछ एसआईटी अब तक 125 से अधिक लोगों से पूछताछ कर चुकी है और करीब 200 लोगों की सूची तैयार की गई है। टिन्नू यादव से भी लंबी पूछताछ हुई है, जिसमें उन्होंने दान राशि के प्रबंधन में अपनी भूमिका से इनकार करते हुए कुछ अन्य लोगों की जिम्मेदारी का उल्लेख किया है। सीएम योगी का अयोध्या दौरा इसी बीच 19 जून को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का अयोध्या दौरा प्रस्तावित है। उनका यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब मंदिर की दान राशि में कथित गड़बड़ी की जांच जारी है। वहीं, इस मामले में एफआईआर दर्ज होगी या जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई होगी, इस पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है।
Uttar Pradesh में पंचायत चुनाव टलने के बाद मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने बड़ा फैसला लिया है। अब नए चुनाव होने तक मौजूदा ग्राम प्रधान ही पंचायतों का कामकाज संभालेंगे। प्रदेश की मौजूदा ग्राम पंचायतों का कार्यकाल 26 मई को खत्म हो गया। इसके बाद सरकार ने तय किया है कि नई पंचायतों के गठन या अधिकतम 6 महीने तक मौजूदा प्रधान प्रशासक के रूप में काम करेंगे। 27 मई से प्रशासक बनेंगे ग्राम प्रधान मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। 27 मई से ग्राम प्रधान पंचायतों में प्रशासकीय जिम्मेदारी संभालेंगे। उन्हें केवल सामान्य और रोजमर्रा के काम करने की अनुमति होगी। वे कोई बड़ा नीतिगत फैसला नहीं ले सकेंगे। अगर किसी जरूरी मामले में बड़ा निर्णय लेना पड़ा तो प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए जिलाधिकारी को भेजा जाएगा। मंजूरी मिलने के बाद ही फैसला लागू होगा। क्यों टले पंचायत चुनाव? सरकार ने हाल ही में पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आरक्षण तय करने हेतु पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन किया है। आयोग को अपनी रिपोर्ट देने के लिए 6 महीने का समय दिया गया है। माना जा रहा है कि आयोग नवंबर तक रिपोर्ट सौंपेगा। इसके बाद आरक्षण पर आपत्तियां और उनकी सुनवाई की प्रक्रिया भी होगी। इसी बीच फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव अब अगले साल विधानसभा चुनाव के बाद होने की संभावना जताई जा रही है। वोटर लिस्ट भी नहीं हुई तैयार पंचायत चुनाव में देरी की एक वजह अंतिम मतदाता सूची का तैयार न होना भी है। जानकारी के मुताबिक, फाइनल वोटर लिस्ट 10 जून को जारी की जाएगी। प्रदेश में पंचायत चुनाव के साथ जिला पंचायत और क्षेत्र पंचायत यानी बीडीसी चुनाव भी होने हैं, इसलिए पूरी प्रक्रिया में अभी और समय लग सकता है।
नौ वर्षों की उपलब्धियों पर बोले मुख्यमंत्री योगी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने ‘UP को बदलने के 9वें वर्ष’ कार्यक्रम में राज्य के विकास मॉडल और सुशासन की उपलब्धियों को विस्तार से सामने रखा। लखनऊ में आयोजित कॉन्क्लेव को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में उत्तर प्रदेश ने बुनियादी ढांचे, परिवहन, कृषि और कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में बड़े बदलाव देखे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य अब तेजी से विकास की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है और उसकी पहचान राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर भी मजबूत हुई है। सात शहरों में मेट्रो, रैपिड रेल बनी नई ताकत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्तमान में प्रदेश के सात शहरों में मेट्रो सेवाएं सफलतापूर्वक संचालित हो रही हैं। उन्होंने दिल्ली-मेरठ के बीच चल रही देश की पहली नमो भारत रैपिड रेल का जिक्र करते हुए कहा कि यह उत्तर प्रदेश की बढ़ती क्षमता और आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर का प्रतीक है। उन्होंने बताया कि बेहतर कनेक्टिविटी के कारण व्यापार, रोजगार और निवेश के नए अवसर तेजी से बढ़े हैं। किसानों को निशुल्क पानी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती कृषि क्षेत्र की उपलब्धियों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लगभग 50 लाख हेक्टेयर भूमि तक किसानों को निशुल्क सिंचाई जल उपलब्ध करा रही है। नहरों के विस्तार और ट्यूबवेल नेटवर्क को मजबूत करने से ग्रामीण क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को बड़ा सहारा मिला है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य किसानों की आय बढ़ाने के साथ खेती को अधिक सुविधाजनक और लाभकारी बनाना है। कानून-व्यवस्था में सुधार का भी किया जिक्र मुख्यमंत्री योगी ने अपने संबोधन में कानून-व्यवस्था को लेकर भी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जो लक्ष्य तय किए गए थे, उनके सकारात्मक परिणाम अब दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि पिछले नौ वर्षों में किए गए प्रयासों ने उत्तर प्रदेश को विकास की नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है और आने वाले समय में राज्य देश की अर्थव्यवस्था में और बड़ी भूमिका निभाएगा।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री Yogi Adityanath ने प्रधानमंत्री के आह्वान के बाद प्रदेश में ईंधन बचत और संसाधनों के बेहतर उपयोग को लेकर बड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि प्रदेशवासी ईंधन की खपत कम करें और अनावश्यक सोने की खरीदारी से बचें, ताकि देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके। मुख्यमंत्री ने अपर मुख्य सचिव और प्रमुख सचिवों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर कई अहम निर्देश जारी किए। सरकार स्तर पर सबसे बड़ा फैसला मुख्यमंत्री और मंत्रियों के काफिलों में वाहनों की संख्या 50 फीसदी तक कम करने का लिया गया है। अनावश्यक गाड़ियों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए हैं। वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा, दो दिन घर से काम की सलाह सीएम योगी ने कहा कि अब वर्क फ्रॉम होम की संस्कृति को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, ताकि ईंधन और खर्च दोनों की बचत हो सके। औद्योगिक विकास विभाग और आईआईडीसी को निर्देश दिए गए हैं कि बड़े औद्योगिक संस्थानों और स्टार्टअप्स को वर्क फ्रॉम होम अपनाने के लिए प्रेरित किया जाए। राज्य सरकार की ओर से एडवाइजरी जारी कर ऐसे संस्थानों को सप्ताह में दो दिन वर्क फ्रॉम होम लागू करने की सिफारिश की जाएगी, जहां बड़ी संख्या में कर्मचारी काम करते हैं। मंत्री-सांसद सप्ताह में एक दिन करेंगे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल मुख्यमंत्री ने मंत्री, सांसद, विधायक और अन्य जनप्रतिनिधियों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील की है। इसके साथ ही सप्ताह में एक दिन “नो व्हीकल डे” आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है। सरकार चाहती है कि इस अभियान से सरकारी कर्मचारियों, छात्रों और आम लोगों को भी जोड़ा जाए। स्कूल-कॉलेजों और विभिन्न संस्थानों में जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। ऑनलाइन होंगी बैठकें और वर्कशॉप सीएम योगी ने निर्देश दिया कि शिक्षा विभाग की बैठकों, सेमिनार और वर्कशॉप को ज्यादा से ज्यादा ऑनलाइन मोड में आयोजित किया जाए। सचिवालय और निदेशालय स्तर की करीब आधी बैठकों को भी वर्चुअल तरीके से करने पर जोर दिया गया है। सरकार का मानना है कि इससे समय, ईंधन और संसाधनों की बड़ी बचत होगी। साथ ही दफ्तरों के समय को अलग-अलग शिफ्ट में बांटने का सुझाव भी दिया गया है, ताकि पीक ऑवर में ट्रैफिक और भीड़ कम हो सके। मेट्रो, बस, साइकिल और इलेक्ट्रिक वाहनों पर जोर मुख्यमंत्री ने लोगों से मेट्रो, रोडवेज बसों और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का अधिक उपयोग करने की अपील की है। जिन शहरों में मेट्रो सेवा उपलब्ध है, वहां उसके इस्तेमाल को बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। इसके अलावा कार पूलिंग, साइक्लिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की भी बात कही गई है। भीड़भाड़ वाले रूट्स पर अतिरिक्त बसें चलाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है। बिजली बचाने की भी अपील सीएम योगी ने कहा कि सिर्फ ईंधन ही नहीं, बल्कि बिजली की बचत भी जरूरी है। उन्होंने लोगों से अपील की कि घरों, सरकारी दफ्तरों और निजी संस्थानों में अनावश्यक बिजली का उपयोग न करें। साथ ही रात 10 बजे के बाद सजावटी लाइटों का कम से कम इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। सरकार का मानना है कि छोटे-छोटे बदलावों से बड़े स्तर पर संसाधनों की बचत संभव है और इससे आर्थिक मजबूती के साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिलेगी।
Yogi Adityanath ने Nandakumar में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए Trinamool Congress (TMC) सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि आज TMC का मतलब “तुष्टिकरण, माफिया राज और कट मनी” बन गया है, जिसने West Bengal की विकास यात्रा को बाधित किया है। “मां-माटी-मानुष का नारा खोखला” योगी ने TMC के नारे पर सवाल उठाते हुए कहा: “मां-बहन असुरक्षित हैं” “माटी घुसपैठियों के कब्जे में है” “मानुष भयभीत और असहाय है” उन्होंने जनता से बदलाव का आह्वान किया। सांस्कृतिक विरासत का किया जिक्र मुख्यमंत्री ने बंगाल की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को याद करते हुए Swami Vivekananda, Subhas Chandra Bose और Rabindranath Tagore का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह भूमि देश को दिशा देने वाली रही है, लेकिन आज “अराजकता और भ्रष्टाचार” से जूझ रही है। “डेमोग्राफी बदलने की कोशिश” योगी ने आरोप लगाया कि: बंगाल में जनसांख्यिकी बदलने की साजिश हो रही है Malda, Murshidabad, Nadia जैसे जिलों में सामाजिक संतुलन प्रभावित हो रहा है यूपी मॉडल का जिक्र उन्होंने कहा कि 2017 से पहले Uttar Pradesh की स्थिति भी ऐसी ही थी, लेकिन Narendra Modi के नेतृत्व में “डबल इंजन सरकार” बनने के बाद हालात बदले। दंगे रुके कानून व्यवस्था सुधरी विकास तेज हुआ “बुलडोजर माफिया का इलाज करता है” योगी ने कहा: “यूपी का बुलडोजर सिर्फ सड़कें नहीं बनाता, माफिया का इलाज भी करता है” बंगाल में भी सख्त कानून व्यवस्था लागू करने की जरूरत है ममता सरकार पर निशाना उन्होंने Mamata Banerjee पर आरोप लगाया कि: तुष्टिकरण की राजनीति हो रही है अवैध घुसपैठ को बढ़ावा दिया जा रहा है रामनवमी जैसे आयोजनों में बाधा डाली जाती है “बंगाल को फिर गौरव दिलाना होगा” योगी ने कहा कि बंगाल, जो कभी “कल्चरल कैपिटल” था, उसे फिर से: विकास सुशासन सांस्कृतिक पहचान की राह पर लाना होगा। उन्होंने जनता से भाजपा उम्मीदवारों को समर्थन देने की अपील की।
भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 6 अप्रैल को अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर देशभर में पार्टी की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए एक खास संदेश दिया, जिसे आगामी चुनावों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। “सत्ता नहीं, संस्कार की यात्रा है BJP” सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लोकतांत्रिक आदर्शों और सनातनी मूल्यों से प्रेरित है। योगी ने अपने संदेश में कहा कि बीजेपी की यात्रा “सत्ता की नहीं, बल्कि संस्कार की यात्रा” है। यह विस्तार की नहीं, बल्कि विचार की ताकत पर आगे बढ़ने वाली पार्टी है, जो ‘अंत्योदय से राष्ट्रोदय’ के संकल्प के साथ काम कर रही है। कार्यकर्ताओं की भूमिका को बताया सबसे अहम सीएम योगी ने खास तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि हर कार्यकर्ता की निष्ठा, निरंतरता और निःस्वार्थ भाव ने ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से इसी समर्पण और सेवा भाव के साथ आगे भी काम करते रहने का आह्वान किया, ताकि देश की 145 करोड़ जनता की उम्मीदों पर खरा उतरा जा सके। “Nation First” की भावना पर जोर योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में ‘Nation First’ यानी ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को बीजेपी की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि यही सोच पार्टी को एक विशाल संगठन बनाती है, जो सेवा, समर्पण और संस्कार के मूल्यों के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है। डिप्टी CM केशव मौर्य ने भी दी बधाई इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी पार्टी स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए बीजेपी के सफर को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जोड़ा। मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश “विकसित भारत” की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बीजेपी ही वर्तमान के साथ-साथ देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश स्थापना दिवस के मौके पर दिए गए ये संदेश ऐसे समय में आए हैं, जब आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो रही है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व की ओर से कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने और संगठन को मजबूत करने पर खास जोर दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, बीजेपी के 47वें स्थापना दिवस पर नेताओं ने एकजुटता, विचारधारा और सेवा भाव को आगे बढ़ाने का संदेश दिया, जो आने वाले समय में पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।