राजनीति

Yogi’s Message on BJP Foundation Day

BJP के 47वें स्थापना दिवस पर CM योगी का संदेश, कार्यकर्ताओं को दिया खास मंत्र

surbhi अप्रैल 6, 2026 0
CM Yogi Adityanath addressing BJP workers on party foundation day emphasizing ideology and Nation First message
BJP Foundation Day 2026 Yogi Message

भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 6 अप्रैल को अपना 47वां स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर देशभर में पार्टी की ओर से कई कार्यक्रम आयोजित किए गए। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं को शुभकामनाएं देते हुए एक खास संदेश दिया, जिसे आगामी चुनावों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

“सत्ता नहीं, संस्कार की यात्रा है BJP”

सीएम योगी आदित्यनाथ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारतीय जनता पार्टी सिर्फ एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचारधारा है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी पंडित दीनदयाल उपाध्याय, डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी और पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के लोकतांत्रिक आदर्शों और सनातनी मूल्यों से प्रेरित है।

योगी ने अपने संदेश में कहा कि बीजेपी की यात्रा “सत्ता की नहीं, बल्कि संस्कार की यात्रा” है। यह विस्तार की नहीं, बल्कि विचार की ताकत पर आगे बढ़ने वाली पार्टी है, जो ‘अंत्योदय से राष्ट्रोदय’ के संकल्प के साथ काम कर रही है।

कार्यकर्ताओं की भूमिका को बताया सबसे अहम

सीएम योगी ने खास तौर पर पार्टी कार्यकर्ताओं की भूमिका को सराहा। उन्होंने कहा कि हर कार्यकर्ता की निष्ठा, निरंतरता और निःस्वार्थ भाव ने ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से इसी समर्पण और सेवा भाव के साथ आगे भी काम करते रहने का आह्वान किया, ताकि देश की 145 करोड़ जनता की उम्मीदों पर खरा उतरा जा सके।

“Nation First” की भावना पर जोर

योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में ‘Nation First’ यानी ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना को बीजेपी की पहचान बताया। उन्होंने कहा कि यही सोच पार्टी को एक विशाल संगठन बनाती है, जो सेवा, समर्पण और संस्कार के मूल्यों के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है।

डिप्टी CM केशव मौर्य ने भी दी बधाई

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश के डिप्टी मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने भी पार्टी स्थापना दिवस की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने एक वीडियो संदेश जारी करते हुए बीजेपी के सफर को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी से लेकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी और वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक जोड़ा।

मौर्य ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश “विकसित भारत” की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है और बीजेपी ही वर्तमान के साथ-साथ देश के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है।

चुनाव से पहले कार्यकर्ताओं में जोश भरने की कोशिश

स्थापना दिवस के मौके पर दिए गए ये संदेश ऐसे समय में आए हैं, जब आगामी चुनावों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो रही है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व की ओर से कार्यकर्ताओं को प्रेरित करने और संगठन को मजबूत करने पर खास जोर दिया जा रहा है।

कुल मिलाकर, बीजेपी के 47वें स्थापना दिवस पर नेताओं ने एकजुटता, विचारधारा और सेवा भाव को आगे बढ़ाने का संदेश दिया, जो आने वाले समय में पार्टी की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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RSS chief Mohan Bhagwat addressing a gathering on marriage, live-in relationships, and Indian cultural values
लिव-इन रिलेशनशिप पर बोले मोहन भागवत: 'पश्चिम की अंधी नकल कर रहा समाज', विवाह और ब्रह्मचर्य पर भी रखी राय

Mohan Bhagwat on Live-in Relationship: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने हैदराबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान विवाह, ब्रह्मचर्य और बदलते सामाजिक मूल्यों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि भारतीय समाज की परंपराएं और जीवन मूल्य हजारों वर्षों के अनुभव पर आधारित हैं, इसलिए आधुनिकता के नाम पर पश्चिमी जीवनशैली की अंधी नकल करना उचित नहीं है। उन्होंने विशेष रूप से लिव-इन रिलेशनशिप को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि इसे आधुनिकता का प्रतीक मानना गलत है। 'हर व्यक्ति के लिए विवाह अनिवार्य नहीं' मोहन भागवत ने कहा कि भारतीय संस्कृति में विवाह को महत्वपूर्ण संस्था माना गया है, लेकिन यह हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य नहीं है। उन्होंने बताया कि जो लोग विवाह नहीं करते, उनके लिए भी भारतीय परंपरा में स्पष्ट जीवन-पद्धति और अनुशासन निर्धारित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका और जीवनशैली के अनुरूप अलग-अलग नियम बनाए गए हैं। ब्रह्मचारी और संन्यासियों के लिए अलग व्यवस्था आरएसएस प्रमुख ने कहा कि ब्रह्मचारी, ब्रह्मचारिणी, संन्यासी और संन्यासिनी के लिए आचार्यों ने अलग अनुशासन तय किया है। ऐसे लोग सांसारिक जीवन से अलग रहकर समाज और आध्यात्मिक जीवन के लिए समर्पित रहते हैं। उनके अनुसार, भारतीय परंपरा में हर जीवन-चरण के लिए स्पष्ट मार्गदर्शन मौजूद है, जिसका उद्देश्य व्यक्ति और समाज दोनों का संतुलित विकास है। 'लिव-इन रिलेशनशिप आधुनिकता नहीं, पतन का संकेत' अपने संबोधन में मोहन भागवत ने लिव-इन रिलेशनशिप पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि दुनिया के कई देशों में इसके सामाजिक परिणाम सामने आ चुके हैं। उनके मुताबिक, समय के साथ बदलाव स्वाभाविक है, लेकिन हर बदलाव को आधुनिकता मान लेना सही नहीं है। उन्होंने कहा, "यह आधुनिकता नहीं, बल्कि समाज के पतन का संकेत है। यह पश्चिम की अंधी नकल है।" उनका कहना था कि भारतीय समाज को अपनी सांस्कृतिक पहचान और पारिवारिक मूल्यों को बनाए रखते हुए आगे बढ़ना चाहिए। 'बदलाव जरूरी है, लेकिन विवेक के साथ' भागवत ने कहा कि समाज को समय के अनुरूप बदलना चाहिए, लेकिन बिना सोचे-समझे किसी भी विदेशी विचार या जीवनशैली को अपनाना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत की सामाजिक व्यवस्था परिवार, संस्कार और जिम्मेदारियों पर आधारित रही है और इन्हीं मूल्यों ने समाज को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखा है। उन्होंने लोगों से अपील की कि आधुनिकता और प्रगति के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों का भी सम्मान किया जाए, ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक संतुलित और मजबूत सामाजिक व्यवस्था मिल सके।  

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आरजेडी को बड़ा झटका: पूर्व सांसद अर्जुन राय ने छोड़ी पार्टी, सोमवार को बीजेपी में होंगे शामिल

मुजफ्फरपुर, एजेंसियां। बिहार विधानसभा उपचुनाव से पहले राष्ट्रीय जनता दल (RJD) को बड़ा राजनीतिक झटका लगा है। पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और सीतामढ़ी के पूर्व सांसद अर्जुन राय ने आरजेडी छोड़ने का ऐलान कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह सोमवार को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की सदस्यता ग्रहण करेंगे।   तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर उठाए सवाल   प्रेस वार्ता में अर्जुन राय ने कहा कि आरजेडी अपनी मूल विचारधारा से भटक गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व में पार्टी की कार्यशैली और वैचारिक दिशा बदल गई है। उनके अनुसार, यह फैसला किसी व्यक्तिगत नाराजगी का नहीं बल्कि राजनीतिक सोच और सिद्धांतों का है।   बीजेपी की नीतियों से प्रभावित होने का दावा   अर्जुन राय ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और भाजपा की नीतियों से वह प्रभावित हैं। उन्होंने केंद्र सरकार के कई फैसलों, विशेषकर अनुच्छेद 370 हटाने और बिहार में परिसीमन प्रक्रिया का समर्थन करते हुए कहा कि देशहित में लिए गए इन निर्णयों ने उन्हें भाजपा के करीब आने के लिए प्रेरित किया।   उत्तर बिहार की राजनीति पर पड़ सकता है असर   अर्जुन राय उत्तर बिहार के प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते हैं और सीतामढ़ी तथा आसपास के इलाकों में उनका अच्छा राजनीतिक आधार माना जाता है। ऐसे में उनका आरजेडी छोड़कर भाजपा में जाने का फैसला उत्तर बिहार के चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकता है। फिलहाल उनके इस्तीफे पर आरजेडी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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नई दिल्ली, एजेंसियां। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके टाइफाइड से संक्रमित हो गए हैं। उन्होंने शनिवार को अपनी तबीयत की जानकारी देते हुए बताया कि उनका इलाज चल रहा है और उन्हें रोजाना IV ड्रिप दी जा रही है। इसके बावजूद उन्होंने छात्र मुद्दों को लेकर चल रहे आंदोलन को जारी रखने की बात कही है।   बीमारी के बीच भी प्रदर्शन जारी रखने का फैसला   अभिजीत दिपके ने कहा कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद उनका संघर्ष नहीं रुकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि छात्रों से जुड़े मुद्दों और शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।   धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन   CJP की ओर से केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया जा रहा है। अभिजीत दिपके ने कहा कि बीमारी उनके आंदोलन के रास्ते में बाधा नहीं बनेगी और वे अपनी मांगों को लेकर मजबूती से खड़े रहेंगे।   सोशल मीडिया पर साझा की थी तबीयत की जानकारी   इससे पहले अभिजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर IV ड्रिप लगी तस्वीर साझा की थी और अपनी स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी दी थी। उन्होंने समर्थकों से मिले सहयोग के लिए धन्यवाद भी दिया।   CJP प्रदर्शन पहले भी रहा चर्चा में   CJP का आंदोलन दिल्ली के जंतर-मंतर समेत कई जगहों पर चर्चा में रहा है। इससे पहले अभिजीत दिपके ने आंदोलन के दौरान अनशन भी किया था और बाद में प्रदर्शन को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी संभाली थी।   फर्जी मौत की खबर पर दिल्ली पुलिस ने किया था खंडन   इससे पहले सोशल मीडिया पर अभिजीत दिपके की मौत से जुड़ी एक फर्जी खबर भी वायरल हुई थी, जिसे दिल्ली पुलिस ने गलत बताते हुए कहा था कि वह सुरक्षित और स्वस्थ हैं।  

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kalpana जुलाई 21, 2026 0

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