कुपवाड़ा, एजेंसियां। जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले में स्वतंत्रता दिवस से पहले 1,200 मीटर लंबे तिरंगे के साथ मेगा तिरंगा रैली निकाली गई। मंगलवार को आयोजित यह रैली गुंडीशार्ट से टीटवाल तक, नियंत्रण रेखा (LoC) के पास निकाली गई, जिसमें स्कूली छात्रों, पूर्व सैनिकों, स्थानीय लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। 1,200 मीटर लंबे तिरंगे ने खींचा ध्यान रैली का सबसे बड़ा आकर्षण 1,200 मीटर लंबा राष्ट्रीय ध्वज रहा। बड़ी संख्या में लोगों ने तिरंगे को हाथों में लेकर मार्च किया और देशभक्ति के नारे लगाए। LoC के नजदीक हुए इस आयोजन ने पूरे इलाके में देशभक्ति का माहौल बना दिया। छात्रों और पूर्व सैनिकों ने लिया हिस्सा रैली में स्कूल के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों, पूर्व सैनिकों, नागरिक समाज के सदस्यों और स्थानीय निवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। कुपवाड़ा के डिप्टी कमिश्नर श्रीकांत बालासाहेब सुसे और एसएसपी सैयद अल ताहिर गिलानी ने भी रैली में शामिल होकर प्रतिभागियों के साथ मार्च किया। स्वतंत्रता दिवस से पहले देशभक्ति का संदेश यह आयोजन ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत किया गया। अधिकारियों के मुताबिक, रैली का उद्देश्य लोगों में राष्ट्रीय एकता, देशभक्ति और सामुदायिक भागीदारी की भावना को मजबूत करना था। LoC के करीब आयोजित इस कार्यक्रम ने क्षेत्र में बदलते माहौल और लोगों की बढ़ती सार्वजनिक भागीदारी को भी सामने रखा।
नई दिल्ली, एजेंसियां। 80वें स्वतंत्रता दिवस से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में उत्साहपूर्वक शामिल होने की अपील की है। प्रधानमंत्री ने लोगों से 13 से 15 अगस्त के बीच अपने घरों पर तिरंगा फहराने और इस अभियान को जनभागीदारी का उत्सव बनाने का आग्रह किया है। पीएम मोदी ने क्या अपील की प्रधानमंत्री मोदी ने देशवासियों से कहा कि वे स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर अपने घरों पर तिरंगा फहराएं और अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। उन्होंने लोगों से तिरंगे के साथ सेल्फी लेकर उसे ‘हर घर तिरंगा’ अभियान से जुड़े मंच पर साझा करने का भी आग्रह किया है। इस अभियान का उद्देश्य लोगों के मन में राष्ट्रीय ध्वज के प्रति व्यक्तिगत जुड़ाव और देश के प्रति गौरव की भावना को मजबूत करना है। 9 से 17 अगस्त तक चलेगा अभियान ‘हर घर तिरंगा 2026’ अभियान 9 से 17 अगस्त तक देशभर में चलाया जा रहा है। अभियान की शुरुआत ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के तहत हुई थी और अब यह व्यापक जनभागीदारी वाले राष्ट्रीय अभियान का रूप ले चुका है। सरकार की ओर से लोगों को घरों के अलावा तिरंगा यात्राओं, रैलियों और अन्य देशभक्ति कार्यक्रमों में शामिल होने के लिए भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। इस साल ‘वंदे मातरम्’ का भी खास महत्व इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। देशभर में इसके सामूहिक गायन सहित कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस भी मनाया जाएगा, जबकि 15 अगस्त को देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। सोशल मीडिया पर भी तिरंगे से जुड़ने की अपील प्रधानमंत्री की अपील के बाद देशभर में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। लोगों को तिरंगा फहराने के साथ अपनी तस्वीरें और सेल्फी साझा कर अभियान की जनभागीदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य इस अभियान के जरिए स्वतंत्रता दिवस को केवल एक सरकारी समारोह तक सीमित न रखते हुए हर परिवार और हर नागरिक की भागीदारी वाला राष्ट्रीय उत्सव बनाना है।
पटना । स्वतंत्रता दिवस से पहले सोमवार को राजधानी पटना में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में निकली यह यात्रा जेपी गोलंबर से शुरू होकर कारगिल चौक तक पहुंची। मुख्यमंत्री के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव और कई अन्य नेता एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लिए बड़ी संख्या में लोग यात्रा में शामिल हुए और भारत माता की जय के नारे लगाए। जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक निकली यात्रा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल तिरंगा लेकर यात्रा में शामिल हुए। जेपी गोलंबर पहुंचने के बाद उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग तिरंगा लेकर पहुंचे और देशभक्ति के नारे लगाए। CM सम्राट बोले- 2047 तक शक्तिशाली देश बनेगा भारत अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि तिरंगा देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों सैनिकों ने तिरंगे की आन और सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत शांति में विश्वास करता है, लेकिन अगर कोई देश से लड़ने की कोशिश करता है तो भारत उसका मजबूती से जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 तक भारत दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में शामिल होगा। 10 से 17 अगस्त तक तिरंगा यात्रा का आह्वान सम्राट चौधरी ने लोगों से 10 से 17 अगस्त तक चलने वाली तिरंगा यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रखंड स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भी लोग भाग लें और इस मुहिम को सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल तीन रंगों वाला ध्वज नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्वतंत्रता सेनानियों और पूर्वजों का बलिदान और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना का इतिहास जुड़ा है। हर घर तिरंगा अभियान को बढ़ावा देने का उद्देश्य तिरंगा यात्रा का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोगों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करना और हर घर तिरंगा अभियान को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। यात्रा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, रामकृपाल यादव, विजय सिन्हा समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। तिरंगा यात्रा के दौरान बदला गया ट्रैफिक रूट यात्रा को देखते हुए पटना में सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम किए गए थे। सुबह करीब 7 बजे से गांधी मैदान, डाकबंगला चौराहा, जेपी गोलंबर, कारगिल चौक और बुद्ध मार्ग के आसपास कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई थी। लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था की गई थी। यात्रा समाप्त होने के बाद यातायात व्यवस्था सामान्य कर दी गई।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर कॉलेजों में देशभक्ति का उत्साह देखने को मिलता है। 15 अगस्त पर स्टूडेंट्स तिरंगे के रंगों से जुड़े आउटफिट पहनकर अपने लुक को खास बनाना पसंद करते हैं। अगर आप भी इस बार कुछ स्टाइलिश और यूनिक पहनना चाहते हैं, तो केसरिया, सफेद और हरे रंग को अपने रोजमर्रा के कॉलेज स्टाइल में शामिल कर सकते हैं। ट्राईकलर कुर्ती और जींस कॉलेज गर्ल्स के लिए ट्राईकलर कुर्ती एक आसान और स्टाइलिश विकल्प हो सकती है। सफेद बेस वाली कुर्ती पर केसरिया और हरे रंग का प्रिंट खूबसूरत लगेगा। इसे ब्लू या व्हाइट जींस के साथ पहनकर कैजुअल लुक पाया जा सकता है। छोटे झुमके और मिनिमल एक्सेसरीज लुक को और आकर्षक बना सकती हैं। व्हाइट टॉप के साथ ग्रीन बॉटम अगर आपको मॉडर्न और सिंपल लुक पसंद है तो व्हाइट टॉप के साथ ग्रीन ट्राउजर, पैंट या जींस पहन सकते हैं। इसके साथ ऑरेंज स्कार्फ या स्टोल कैरी करके आउटफिट में तिरंगे का टच दिया जा सकता है। यह कॉलेज फंक्शन और दोस्तों के साथ सेलिब्रेशन दोनों के लिए अच्छा विकल्प है। लड़कों के लिए ट्राईकलर कैजुअल लुक कॉलेज बॉयज व्हाइट शर्ट या बेसिक व्हाइट टी-शर्ट के साथ ग्रीन जींस या कार्गो पैंट पहन सकते हैं। ऑरेंज वॉच, ब्रेसलेट, कैप या स्नीकर्स जैसी छोटी एक्सेसरीज के जरिए लुक में केसरिया रंग शामिल किया जा सकता है। इससे आउटफिट ज्यादा ओवर नहीं लगेगा और स्मार्ट भी नजर आएगा। ट्राईकलर दुपट्टे से बनाएं लुक खास अगर आप पूरा तिरंगा आउटफिट नहीं पहनना चाहते हैं तो सिर्फ दुपट्टे या स्टोल के जरिए भी Independence Day Look तैयार कर सकते हैं। व्हाइट कुर्ती और जींस के साथ ऑरेंज-व्हाइट-ग्रीन दुपट्टा बेहद खूबसूरत कॉम्बिनेशन बना सकता है। एक्सेसरीज से भी पाएं देशभक्ति वाला लुक पूरे कपड़ों में तिरंगे के रंग पहनने के बजाय एक्सेसरीज के जरिए भी थीम को शामिल किया जा सकता है। ट्राईकलर ब्रेसलेट, बैज, रिबन, हेयरबैंड, स्कार्फ या बैग को अपने कॉलेज आउटफिट के साथ स्टाइल किया जा सकता है। यह तरीका सिंपल लुक को भी 15 अगस्त के लिए खास बना देगा। सिंपल रखें अपना Independence Day Look तिरंगा थीम वाले आउटफिट में सबसे जरूरी है कि तीनों रंगों का संतुलित इस्तेमाल किया जाए। आप तीनों रंगों को एक साथ पहनने के बजाय किसी एक रंग को बेस बनाकर बाकी रंगों को एक्सेसरीज या छोटे डिटेल्स के रूप में शामिल कर सकते हैं। इससे लुक स्टाइलिश, आरामदायक और कॉलेज-फ्रेंडली बना रहेगा।
कासरगोड, एजेंसियां। केरल के कासरगोड में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आयोजित एक स्कूल क्विज में वी.डी. सावरकर से संबंधित सवाल को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। प्राथमिक स्तर के विद्यार्थियों के लिए आयोजित इस क्विज में एक सवाल में सावरकर को ब्रिटिश शासन द्वारा सबसे कठोर सजा पाने वाले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में प्रस्तुत किया गया था। सवाल सामने आने के बाद विभिन्न राजनीतिक और छात्र संगठनों ने आपत्ति जताई। सवाल को लेकर क्यों हुआ विवाद रिपोर्टों के अनुसार, 6 अगस्त को आयोजित ‘फ्रीडम क्विज’ के टाई-ब्रेकर सवाल में पूछा गया था कि किस स्वतंत्रता सेनानी को ब्रिटिशों ने सबसे कठोर सजा दी थी। इसका उत्तर वी.डी. सावरकर दिया गया था। इस सवाल को लेकर आलोचकों ने आरोप लगाया कि स्कूल के विद्यार्थियों के लिए आयोजित कार्यक्रम में सावरकर को स्वतंत्रता सेनानी के रूप में विशेष रूप से महिमामंडित किया गया। मामले ने केरल में शिक्षा और इतिहास की व्याख्या को लेकर राजनीतिक बहस को जन्म दे दिया। शिक्षा मंत्री ने जांच के दिए आदेश विवाद बढ़ने के बाद केरल के सामान्य शिक्षा मंत्री एन. शम्सुद्दीन ने सामान्य शिक्षा निदेशक को मामले की जांच करने का निर्देश दिया। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह क्विज सरकार की ओर से आधिकारिक रूप से अधिकृत कार्यक्रम नहीं था। मंत्री ने मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने और जिम्मेदारी तय करने के लिए रिपोर्ट मांगी है। जांच के निष्कर्ष के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है। राजनीतिक बयानबाजी तेज सावरकर से जुड़े इस सवाल के बाद केरल में राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। कांग्रेस और वामपंथी संगठनों से जुड़े नेताओं ने शिक्षा व्यवस्था में संघ परिवार की विचारधारा के प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं। वहीं दूसरी ओर, सावरकर के समर्थकों ने उनके स्वतंत्रता संघर्ष और ब्रिटिश शासन के दौरान कारावास को सामने रखते हुए सवाल का बचाव किया है।फिलहाल शिक्षा विभाग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि विवादित सवाल तैयार करने की जिम्मेदारी किसकी थी और क्या इसके लिए कोई कार्रवाई की जाएगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। देशभर में स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान 2026 की शुरुआत हो गई है। इस वर्ष यह अभियान राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के समारोह से भी जुड़ा है। सरकार के अनुसार अभियान 9 अगस्त से 17 अगस्त 2026 तक देशभर में चलाया जा रहा है। घर-घर तिरंगा फहराने की अपील ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत नागरिकों से अपने घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने या सम्मानपूर्वक प्रदर्शित करने की अपील की गई है। अभियान का उद्देश्य देशभक्ति, राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना को बढ़ावा देना है। नागरिक अभियान में भाग लेते हुए ‘तिरंगा के साथ सेल्फी’ भी ले सकते हैं और उसे आधिकारिक ‘हर घर तिरंगा’ पोर्टल पर साझा कर सकते हैं। ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष का विशेष अवसर इस वर्ष ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के राष्ट्रव्यापी समारोह से जोड़ा गया है। केंद्र सरकार ने ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सालभर चलने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत नवंबर 2025 में की थी, जो नवंबर 2026 तक चलने हैं। राज्यों में भी हो रहे विशेष कार्यक्रम अभियान के तहत अलग-अलग राज्यों में तिरंगा यात्राएं, रैलियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जनभागीदारी से जुड़े आयोजन किए जा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में 70 लाख राष्ट्रीय झंडे वितरित करने और तिरंगा रैली आयोजित करने की तैयारी की गई है, जबकि बिहार में भी बड़े पैमाने पर झंडे वितरित किए जा रहे हैं। अभियान 17 अगस्त तक जारी रहेगा। सरकार का जोर अधिक से अधिक नागरिकों की भागीदारी सुनिश्चित करने और स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान एवं देशभक्ति की भावना को मजबूत करने पर है।
रांची। 80वें स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में रक्षा मंत्रालय की पहल पर देशभर में आयोजित किए जा रहे विशेष बैंड प्रदर्शनों की श्रृंखला के तहत झारखंड में भी कई स्थानों पर देशभक्ति कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। राजधानी रांची के अलबर्ट एक्का चौक पर 9 अगस्त को केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) का विशेष बैंड प्रदर्शन होगा, जिसमें केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। 8 से 15 अगस्त तक होंगे विशेष कार्यक्रम रक्षा मंत्रालय के निर्देश पर 8 से 15 अगस्त के बीच देशभर में सशस्त्र बलों, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) और एनसीसी द्वारा विशेष बैंड प्रस्तुतियां आयोजित की जा रही हैं। इन कार्यक्रमों का उद्देश्य स्वतंत्रता संग्राम के वीर सेनानियों को श्रद्धांजलि देना और युवाओं में राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना है। झारखंड के कई शहरों में होगी बैंड प्रस्तुति रांची और हजारीबाग सहित राज्य के विभिन्न स्थानों पर देशभक्ति से ओत-प्रोत बैंड प्रदर्शन आयोजित किए जाएंगे। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार— 8 अगस्त: निर्मल महतो पार्क और अनंताचार्य स्टेडियम, हजारीबाग 9 अगस्त: अलबर्ट एक्का चौक, रांची; पुलिस ट्रेनिंग ग्राउंड और झील पार्क, हजारीबाग 10 अगस्त: मेरू कैंप के निकट, हजारीबाग 11 से 13 अगस्त: सेक्टर-3 गोलचक्कर, रांची 12 अगस्त: रांची रेलवे स्टेशन 14 अगस्त: टाटानगर रेलवे स्टेशन 14 और 15 अगस्त: बालालौंग चौक, रांची 15 अगस्त: बादाम फोर्ट, हजारीबाग राष्ट्रभक्ति का संदेश देने की पहल रक्षा मंत्रालय की इस पहल का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर आम लोगों, विशेषकर युवाओं को देशभक्ति की भावना से जोड़ना और सुरक्षा बलों के योगदान से परिचित कराना है। इन कार्यक्रमों में देशभक्ति की धुनों के साथ सैन्य बैंड की विशेष प्रस्तुति आकर्षण का केंद्र रहेगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शुरू हुई सेल में Nothing के स्मार्टफोन पर ग्राहकों को खास कीमतों का फायदा मिलने वाला है। कंपनी ने Nothing Phone (4a) सीरीज और नए Nothing Phone (4b) के लिए विशेष ऑफर घोषित किए हैं। सेल में Phone (4a) Pro की कीमत ₹45,000 से कम, जबकि Phone (4b) की शुरुआती कीमत करीब ₹31,000 तक बताई गई है। Phone (4b) पर खास ऑफर Nothing Phone (4b) को हाल ही में भारतीय बाजार में उतारा गया था। मौजूदा Freedom Sale ऑफर में यह फोन करीब ₹30,999 से उपलब्ध होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि अंतिम कीमत बैंक ऑफर या अन्य प्रमोशनल लाभों के आधार पर अलग हो सकती है। फोन में Snapdragon 6 Gen 4 प्रोसेसर, 6,000mAh बैटरी और Nothing का Glyph Bar इंटरफेस जैसे फीचर्स मिलते हैं। Phone (4a) सीरीज की कीमत में राहत सेल में Nothing Phone (4a) और Phone (4a) Pro को भी विशेष कीमत पर पेश किया जा रहा है। Phone (4a) Pro को ₹45,000 से कम कीमत में खरीदने का मौका मिलेगा, जबकि सीरीज के अन्य मॉडल भी ऑफर के तहत उपलब्ध होंगे। इन ऑफर्स का फायदा उन ग्राहकों को मिल सकता है जो Nothing के नए डिजाइन और Glyph इंटरफेस वाले फोन खरीदने की योजना बना रहे हैं। सेल कब तक चलेगी? Nothing के विशेष ऑफर 7 अगस्त से 16 अगस्त 2026 तक चलने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा Flipkart Freedom Sale का मुख्य आयोजन 8 अगस्त से शुरू होने वाला है। इसलिए अलग-अलग ऑफर की शुरुआत और उपलब्धता मॉडल के अनुसार बदल सकती है। सेल के दौरान बैंक कार्ड, एक्सचेंज और अन्य ऑफर्स के कारण प्रभावी कीमत और कम हो सकती है। इसलिए खरीदारी से पहले संबंधित मॉडल के पेज पर लागू ऑफर और अंतिम भुगतान राशि देखना जरूरी होगा।
कोलकाता, एजेंसियां। स्वतंत्रता दिवस से पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने पहली बार ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भाग लेने का ऐलान किया है। राज्य में अभियान के तहत करीब 70 लाख राष्ट्रीय ध्वज वितरित किए जाएंगे। सरकार की ओर से स्वतंत्रता दिवस के मौके पर तिरंगा यात्रा और अन्य कार्यक्रम आयोजित करने की भी तैयारी है। पहली बार अभियान में शामिल होगा पश्चिम बंगाल पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से ‘हर घर तिरंगा’ अभियान में भागीदारी की घोषणा की गई है। इसके तहत लोगों को अपने घरों और प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। अभियान का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोगों में देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता की भावना को बढ़ावा देना है। 70 लाख तिरंगे बांटने की तैयारी अभियान के तहत राज्यभर में 70 लाख तिरंगे वितरित किए जाने की योजना है। स्वतंत्रता दिवस से पहले बड़ी संख्या में लोगों तक राष्ट्रीय ध्वज पहुंचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर तैयारियां की जा रही हैं। सरकार की योजना के अनुसार अभियान को केवल ध्वज वितरण तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए विभिन्न कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। अगस्त में निकलेगी तिरंगा यात्रा ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत अगस्त में कोलकाता में बड़ी तिरंगा रैली आयोजित किए जाने की भी योजना है। इसमें बड़ी संख्या में लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। स्वतंत्रता दिवस से पहले होने वाले इन कार्यक्रमों के जरिए राज्य में राष्ट्रीय ध्वज और स्वतंत्रता दिवस को लेकर जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस से पहले बढ़ेगा अभियान पश्चिम बंगाल में इस अभियान के जरिए सरकार घर-घर तक तिरंगा पहुंचाने और लोगों को स्वतंत्रता दिवस समारोह से जोड़ने की तैयारी में है। 70 लाख झंडों के वितरण के साथ राज्य में पहली बार बड़े स्तर पर ‘हर घर तिरंगा’ कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। अब अभियान के तहत तिरंगा वितरण, रैली और अन्य कार्यक्रमों की तैयारियों पर नजर रहेगी।
क्वेटा, एजेंसियां। पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र को लेकर अलगाववादी राजनीति एक बार फिर चर्चा में है। बलूचिस्तान की स्वतंत्रता समर्थक राजनीतिक इकाई ने 11 अगस्त को ‘स्वतंत्रता दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बलूचिस्तान की स्वतंत्रता को मान्यता देने की मांग भी तेज की गई है। 11 अगस्त का ऐतिहासिक महत्व बलूच स्वतंत्रता समर्थक संगठनों के अनुसार, 11 अगस्त 1947 का दिन बलूचिस्तान के इतिहास में महत्वपूर्ण है। उनका दावा है कि इसी दिन कलात रियासत ने ब्रिटिश शासन से स्वतंत्रता की घोषणा की थी. हालांकि, इस ऐतिहासिक घटनाक्रम और उसके बाद 1948 में पाकिस्तान के साथ हुए घटनाक्रम की व्याख्या को लेकर अलग-अलग पक्षों के दावे हैं। इसलिए इसे निर्विवाद ऐतिहासिक तथ्य के रूप में पेश करना उचित नहीं है। पाकिस्तान से अलग स्वतंत्रता की मांग बलूच राष्ट्रवादी संगठन लंबे समय से पाकिस्तान से अलग स्वतंत्र बलूचिस्तान की मांग करते रहे हैं। इन संगठनों का आरोप है कि बलूचिस्तान के प्राकृतिक संसाधनों का पर्याप्त लाभ स्थानीय लोगों को नहीं मिल रहा और क्षेत्र में मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के तौर पर मनाने की घोषणा इसी अलगाववादी राजनीतिक अभियान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुखता देने की कोशिश के रूप में देखी जा रही है। भारत और अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर नजर बलूचिस्तान की स्वतंत्रता समर्थक ताकतों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपने दावे को मान्यता देने की अपील की है। भारत से भी समर्थन या मान्यता की उम्मीद जताए जाने की खबरें हैं। हालांकि, भारत ने इस घोषणा को लेकर अभी कोई आधिकारिक मान्यता नहीं दी है। पाकिस्तान के आधिकारिक रिकॉर्ड में बलूचिस्तान देश का एक प्रांत है और पाकिस्तान का आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस 14 अगस्त को मनाया जाता है। क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ सकता है असर 11 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाने की घोषणा से पाकिस्तान में बलूच अलगाववाद का मुद्दा फिर अंतरराष्ट्रीय चर्चा में आ सकता है। इस घटनाक्रम के बीच पाकिस्तान सरकार की प्रतिक्रिया और भारत समेत दूसरे देशों के रुख पर नजर बनी हुई है।
नई दिल्ली, एजेंसियां। स्मार्टफोन निर्माता कंपनी Vivo अपनी लोकप्रिय S सीरीज़ को भारत में फिर से लॉन्च करने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी का नया स्मार्टफोन Vivo S2 भारत में 6 अगस्त 2026 को लॉन्च किया जा सकता है। यह सीरीज करीब छह साल बाद भारतीय बाजार में वापसी कर रही है। हालांकि कंपनी ने अभी आधिकारिक लॉन्च तारीख की पुष्टि नहीं की है। Vivo S2 में मिल सकते हैं प्रीमियम फीचर्स लीक रिपोर्ट्स के अनुसार, Vivo S2 में 6.59 इंच OLED डिस्प्ले, 120Hz रिफ्रेश रेट, 50MP OIS कैमरा और बड़ी बैटरी जैसे फीचर्स मिल सकते हैं। कंपनी इस फोन को मिड-हाई रेंज सेगमेंट में पेश कर सकती है। Dimensity प्रोसेसर और फास्ट चार्जिंग की उम्मीद रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि Vivo S2 में MediaTek Dimensity 7360 प्रोसेसर दिया जा सकता है। इसके अलावा फोन में करीब 7000mAh बैटरी और तेज चार्जिंग सपोर्ट मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि इन फीचर्स की आधिकारिक पुष्टि लॉन्च के समय ही होगी। 6 साल बाद भारत में लौट रही S सीरीज़ Vivo की S सीरीज़ ने इससे पहले भारत में Vivo S1 के साथ पहचान बनाई थी, लेकिन इसके बाद कंपनी ने इस लाइनअप को भारतीय बाजार में आगे नहीं बढ़ाया। अब Vivo S2 के जरिए कंपनी प्रीमियम डिजाइन और कैमरा-केंद्रित स्मार्टफोन सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। कीमत और बिक्री को लेकर बढ़ी चर्चा लीक के मुताबिक, Vivo S2 को ₹40,000 से ₹50,000 के आसपास के सेगमेंट में उतारा जा सकता है। फोन की बिक्री स्वतंत्रता दिवस के आसपास शुरू होने की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि कीमत और उपलब्धता की अंतिम जानकारी कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी।
नई दिल्ली, एजेंसियां। अगस्त 2026 की शुरुआत के साथ ही छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए छुट्टियों की सूची भी सामने आ गई है। इस महीने स्वतंत्रता दिवस, मिलाद-उन-नबी और रक्षाबंधन जैसे प्रमुख राष्ट्रीय और धार्मिक पर्वों के अवसर पर देश के कई राज्यों में स्कूल, कॉलेज और अन्य शैक्षणिक संस्थान बंद रह सकते हैं। हालांकि, छुट्टियों की अंतिम सूची संबंधित राज्य सरकारों और स्कूल प्रशासन की अधिसूचना के अनुसार तय होगी। 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस की छुट्टी अगस्त की पहली बड़ी छुट्टी 15 अगस्त (शनिवार) को होगी। इस दिन देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। स्कूलों में ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकते हैं, जबकि अधिकांश सरकारी और निजी शिक्षण संस्थानों में अवकाश रहेगा। 26 अगस्त को मिलाद-उन-नबी 26 अगस्त (बुधवार) को मिलाद-उन-नबी का पर्व मनाया जाएगा। पैगंबर मोहम्मद के जन्मदिन के रूप में मनाए जाने वाले इस अवसर पर कई राज्यों में सार्वजनिक अवकाश घोषित किया जा सकता है। School, कॉलेज और सरकारी कार्यालय स्थानीय आदेशों के अनुसार बंद रह सकते हैं। 28 अगस्त को रक्षाबंधन का अवकाश 28 अगस्त (शुक्रवार) को भाई-बहन के पवित्र पर्व रक्षाबंधन के अवसर पर कई राज्यों में स्कूलों और कॉलेजों में छुट्टी रहने की संभावना है। कई जगह सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थानों में भी अवकाश घोषित किया जा सकता है। राज्यों के अनुसार अलग हो सकती है छुट्टियों की सूची अगस्त महीने में घोषित होने वाली छुट्टियां सभी राज्यों में समान नहीं होंगी। कई राज्यों में स्थानीय त्योहारों और क्षेत्रीय आयोजनों के कारण अतिरिक्त अवकाश भी मिल सकता है। इसलिए छात्रों और अभिभावकों को अपने स्कूल या संबंधित शिक्षा विभाग की आधिकारिक सूचना जरूर देखनी चाहिए। अगस्त 2026 की प्रमुख छुट्टियां 15 अगस्त 2026 - शनिवार - स्वतंत्रता दिवस 26 अगस्त 2026 - बुधवार - मिलाद-उन-नबी 28 अगस्त 2026 - शुक्रवार - रक्षाबंधन अगस्त में लगातार आने वाले प्रमुख त्योहारों के कारण कई परिवार पहले से यात्रा और अन्य कार्यक्रमों की योजना बना रहे हैं। ऐसे में छुट्टियों की आधिकारिक जानकारी पहले से जांच लेना बेहतर रहेगा।
कोलकाता, एजेंसियां। पश्चिम बंगाल सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से पहले राज्यभर में 'हर घर तिरंगा' अभियान चलाने का फैसला किया है। यह अभियान 9 अगस्त से शुरू होकर 17 अगस्त तक चलेगा, जिसमें लोगों को अपने घरों, संस्थानों और सार्वजनिक स्थानों पर तिरंगा फहराने के लिए प्रेरित किया जाएगा। राज्यभर में आयोजित होंगे देशभक्ति से जुड़े कार्यक्रम राज्य सरकार के निर्देश के अनुसार इस अभियान के तहत स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी कार्यालयों, पंचायतों और स्थानीय निकायों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। लोगों को राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने के लिए अभियान में भाग लेने की अपील की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार जिला प्रशासन, नगर निकाय और शैक्षणिक संस्थान मिलकर अभियान को सफल बनाने के लिए काम करेंगे। इसके लिए स्थानीय स्तर पर कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की जाएगी। वंदे मातरम की 150वीं वर्षगांठ से भी जुड़ा अभियान इस बार तिरंगा अभियान को 'वंदे मातरम' की 150वीं वर्षगांठ से भी जोड़ा गया है। अभियान के दौरान आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में वंदे मातरम को विशेष महत्व दिया जाएगा। सरकार की योजना के अनुसार डिजिटल और जमीनी स्तर के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय ध्वज के साथ देशभक्ति से जुड़े आयोजनों को बढ़ावा दिया जाएगा। सोशल मीडिया पर भी बढ़ेगा अभियान का प्रचार अभियान के दौरान लोगों को तिरंगे के साथ अपनी तस्वीरें साझा करने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा। 'हर घर तिरंगा' पोर्टल पर फोटो अपलोड करने की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी। सरकार का उद्देश्य है कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान से जुड़ें और राष्ट्रीय एकता का संदेश मजबूत हो। प्रशासन को दिए गए दिशा-निर्देश पश्चिम बंगाल सरकार ने सभी जिलों को अभियान को प्रभावी तरीके से लागू करने के निर्देश दिए हैं। इसमें जिला प्रशासन, कोलकाता नगर निगम, नगरपालिकाओं और पंचायत स्तर के अधिकारियों की भूमिका तय की गई है। 'हर घर तिरंगा' अभियान के जरिए सरकार लोगों की भागीदारी बढ़ाने और स्वतंत्रता दिवस समारोह को जन आंदोलन का रूप देने की तैयारी कर रही है।
नई दिल्ली,एजेंसियां। केंद्र सरकार ने संसद के आगामी मानसून सत्र की तैयारियां तेज कर दी हैं। सरकार की सिफारिश पर राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह तय हो चुका है कि संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान स्वतंत्रता दिवस समारोह को देखते हुए 13 और 14 अगस्त को संसद की कार्यवाही नहीं आयोजित होगी। सर्वदलीय बैठक जल्द मानसून सत्र शुरू होने से पहले केंद्र सरकार सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं के साथ सर्वदलीय बैठक आयोजित करेगी। इस बैठक में सरकार अपने विधायी एजेंडे की जानकारी देगी, जबकि विपक्ष विभिन्न राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाएगा। संसदीय परंपरा के अनुसार यह बैठक प्रत्येक सत्र से पहले आयोजित की जाती है ताकि सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके। कई अहम विधेयकों पर रहेगी नजर मानसून सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयक पेश कर सकती है। साथ ही आर्थिक सुधार, राष्ट्रीय सुरक्षा, महंगाई, बेरोजगारी, कृषि, शिक्षा और अन्य जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होने की संभावना है। विपक्ष भी विभिन्न समसामयिक विषयों पर सरकार को घेरने की तैयारी में जुटा हुआ है। राजनीतिक रूप से रहेगा अहम सत्र आगामी महीनों में कई राज्यों में चुनावी गतिविधियां तेज होने वाली हैं। ऐसे में संसद का यह सत्र राजनीतिक दृष्टि से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सत्ता पक्ष अपने विधायी एजेंडे को आगे बढ़ाने की कोशिश करेगा, वहीं विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, किसानों के मुद्दे और अन्य राष्ट्रीय विषयों पर सरकार को घेरने की कोशिश में लगा हुआ है। 21 दिन की कार्यवाही इस बार संसद का मानसून सत्र 21 जुलाई से 21 अगस्त तक चलेगा। इस दौरान दोनों सदनों में विभिन्न मंत्रालयों से जुड़े विधेयकों, नीतिगत फैसलों और जनहित के मुद्दों पर चर्चा होगी। स्वतंत्रता दिवस समारोह के कारण 13 और 14 अगस्त को दोनों सदनों की बैठक आयोजित नहीं होगी।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।