पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राज्य में सड़क कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में बुधवार, 19 अगस्त को हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में 336 किलोमीटर लंबे बक्सर-भागलपुर 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के निर्माण को मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने बैठक में कुल 13 प्रस्तावों पर मुहर लगाई। 13 जिलों से होकर गुजरेगा एक्सप्रेसवे यह पूरी तरह एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे होगा और राज्य के पश्चिमी हिस्से को पूर्वी बिहार से जोड़ेगा। प्रस्तावित मार्ग बक्सर, भोजपुर, अरवल, जहानाबाद, गया, नालंदा, शेखपुरा, मुंगेर, लखीसराय, नवादा, जमुई, बांका और भागलपुर समेत 13 जिलों से होकर गुजरेगा। PPP मॉडल पर होगा निर्माण परियोजना को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) को परियोजना के क्रियान्वयन, विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार कराने और ट्रांजैक्शन सलाहकार नियुक्त करने की जिम्मेदारी दी गई है। व्यापार और निवेश को मिलेगी रफ्तार सरकार को उम्मीद है कि नए एक्सप्रेसवे से बिहार के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों के बीच यात्रा और माल परिवहन आसान होगा। बेहतर कनेक्टिविटी से औद्योगिक गतिविधियों, स्थानीय कारोबार और नए निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है। सिंचाई, AI और अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी कैबिनेट ने एक्सप्रेसवे के अलावा 11 हजार निजी नलकूप, नहरों के पुनर्स्थापन, पशु नस्ल सुधार, कजरा सौर परियोजना, भंडारण क्षमता बढ़ाने और बिहार में AI इकोसिस्टम विकसित करने जैसे प्रस्तावों को भी मंजूरी दी। जापान की कंपनी Taiyo AI India Pvt. Ltd. के साथ AI से जुड़े सहयोग के लिए समझौते को भी स्वीकृति दी गई।
लखीसराय। बिहार के लखीसराय स्थित प्रसिद्ध अशोकधाम मंदिर के पास सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। अशोकधाम हॉल्ट पर एक साथ दोनों दिशाओं से ट्रेनें पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं के बीच अचानक अफरा-तफरी मच गई। इसी दौरान बांस की बैरिकेडिंग टूटने और बिजली का पोल गिरने के बाद करंट फैलने की अफवाह से भगदड़ मच गई। हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। ट्रेनें आने के बाद अचानक मची अफरा-तफरी प्रशासन के मुताबिक, सोमवार सुबह अशोकधाम हॉल्ट पर एक साथ दोनों दिशाओं से ट्रेनें पहुंचीं। ट्रेनों को देखकर कुछ लोग अचानक भागने लगे। इसी दौरान रास्ते में लगी बांस की बैरिकेडिंग टूट गई और बिजली का पोल भी गिर गया। पोल गिरने के बाद मौके पर करंट फैलने की अफवाह तेजी से फैल गई। इससे श्रद्धालुओं में दहशत पैदा हो गई और लोग सुरक्षित निकलने के लिए इधर-उधर भागने लगे। भीड़ का दबाव बढ़ते ही भगदड़ की स्थिति बन गई। करंट लगने से नहीं हुई मौतें हादसे के बाद यह चर्चा फैल गई थी कि 11 हजार वोल्ट के हाईटेंशन तार की चपेट में आने से श्रद्धालुओं की मौत हुई है। हालांकि, जिला प्रशासन ने इस दावे को खारिज किया है। डीएम शैलेंद्र कुमार और एडीएम नीरज कुमार के अनुसार, घटना के समय बिजली की आपूर्ति बंद थी और बिजली के तार भी कवर किए गए थे। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं की मौत करंट लगने से नहीं, बल्कि भगदड़ के दौरान भीड़ में दबने से हुई। एक-दूसरे के ऊपर गिरते चले गए लोग अफवाह फैलने के बाद श्रद्धालु तेजी से भागने लगे। इस दौरान कई लोग अपना संतुलन खोकर जमीन पर गिर गए। उनके ऊपर पीछे से आ रहे अन्य लोग गिरते चले गए। भीड़ के दबाव में कई महिलाएं बुरी तरह दब गईं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों की मदद से राहत और बचाव अभियान शुरू किया गया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। चार मृतकों की पहचान हादसे में जान गंवाने वाली सात महिलाओं में से चार की पहचान हो चुकी है। इनमें हलसी की हेमलता देवी (55), ललिता देवी, मुंगेर की रिंकू देवी (50) और बड़हिया की मनमाला देवी (44) शामिल हैं। अन्य मृतकों की पहचान की प्रक्रिया जारी है। हादसे की उच्चस्तरीय जांच के आदेश प्रशासन ने घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। जांच में एक साथ दोनों दिशाओं से ट्रेनों के आने, बैरिकेडिंग और बिजली के पोल के गिरने, करंट की अफवाह तथा भगदड़ के पूरे घटनाक्रम की जांच की जाएगी। इसके साथ ही मौके पर भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारियों की भी समीक्षा होगी। सीएम ने जताया दुख मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अशोकधाम हादसे पर गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के बेहतर और त्वरित इलाज के निर्देश दिए हैं। फिलहाल प्रशासन की जांच और राहत-बचाव अभियान जारी है। हादसे के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच अशोकधाम हॉल्ट पर भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम थे या नहीं।
लखीसराय। बिहार के लखीसराय जिले में सावन की तीसरी सोमवारी पर अशोकधाम मंदिर के पास बड़ा हादसा हो गया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ के बीच अचानक भगदड़ मच गई। हादसे में सात महिला श्रद्धालुओं की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। CM सम्राट चौधरी ने किया मुआवजे का ऐलान हादसे पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गहरा दुख जताया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया। मुख्यमंत्री ने घायलों के समुचित और तत्काल इलाज के लिए प्रशासन को आवश्यक निर्देश भी दिए हैं। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए घटना को बेहद दुखद बताते हुए शोक संतप्त परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। नीतीश कुमार और संजय झा ने भी जताया दुख पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और जेडीयू नेता संजय झा ने भी अशोकधाम मंदिर हादसे पर दुख जताया। दोनों नेताओं ने मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए घायलों के जल्द स्वस्थ होने की प्रार्थना की। ट्रेन आने के बाद मची अफरा-तफरी लखीसराय डीएम शैलेंद्र कुमार के अनुसार, अशोकधाम हॉल्ट पर एक साथ दोनों ओर से ट्रेन आ गई थी। ट्रेन को देखकर कुछ युवकों ने अचानक भागना शुरू कर दिया। इसी दौरान बिजली का एक पोल गिर गया। पोल गिरने के बाद वहां करंट फैलने की अफवाह फैल गई। हालांकि प्रशासन के मुताबिक उस समय बिजली की आपूर्ति बंद थी और तार भी कवर किया गया था। लेकिन अफवाह के कारण श्रद्धालुओं में दहशत फैल गई और देखते ही देखते भगदड़ की स्थिति बन गई। अफवाह के बाद मची भगदड़ अफरा-तफरी के दौरान कई श्रद्धालु भीड़ में दब गए। हादसे में महिला श्रद्धालुओं की मौत हुई और कई अन्य लोग घायल हो गए। घटना के बाद मौके पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया गया। प्रशासन की टीमें स्थिति को नियंत्रित करने और घायलों को अस्पताल पहुंचाने में जुटी हैं। हादसे के बाद मंदिर परिसर और आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है।
पटना, एजेंसिया। बिहार सरकार ने महिलाओं और छात्राओं की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए ‘पुलिस दीदी’ पहल को और प्रभावी बनाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 15 अगस्त को गांधी मैदान में स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान बताया कि स्कूलों और कॉलेजों के आसपास महिला पुलिसकर्मियों की तैनाती की जाएगी। इसका उद्देश्य छात्राओं को सुरक्षित माहौल देना और छेड़खानी व अन्य घटनाओं पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करना है। स्कूल-कॉलेज के आसपास रहेगी विशेष निगरानी ‘पुलिस दीदी’ के तहत महिला पुलिसकर्मियों को विशेष रूप से उन स्थानों पर गश्त और निगरानी की जिम्मेदारी दी जाएगी, जहां छात्राओं की आवाजाही अधिक रहती है। पुलिस की मौजूदगी से छेड़खानी और महिलाओं से जुड़े अपराधों पर रोक लगाने के साथ-साथ छात्राओं में सुरक्षा की भावना बढ़ाने का लक्ष्य है। 5 हजार ‘पुलिस दीदी’ तैनात करने की घोषणा स्वतंत्रता दिवस पर सामने आई जानकारी के अनुसार बिहार में करीब 5,000 ‘पुलिस दीदी’ तैनात करने की योजना है। वहीं, पुलिस मुख्यालय ने इस अभियान को प्रभावी बनाने के लिए 1,500 स्कूटरों का ऑर्डर भी दिया है। इससे महिला पुलिसकर्मियों को स्कूल-कॉलेजों और संवेदनशील इलाकों में तेजी से पहुंचने में मदद मिलेगी। ‘अभया ब्रिगेड’ के तहत होगी कार्रवाई यह पहल ‘अभया ब्रिगेड’ से भी जुड़ी है। इसका मुख्य फोकस महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा, संवेदनशील इलाकों में गश्त और शिकायत मिलने पर त्वरित प्रतिक्रिया पर है। पुलिस दीदियों की तैनाती को राज्य की महिला सुरक्षा व्यवस्था को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पहले से भी की जा रही है कार्रवाई बिहार पुलिस ने महिला एवं छात्राओं की सुरक्षा के लिए पुलिस दीदी टीमों के माध्यम से कार्रवाई शुरू कर रखी है। हाल की रिपोर्ट के अनुसार, इन टीमों ने मनचलों के खिलाफ 612 कार्रवाई की हैं। सरकार अब इस व्यवस्था को अधिक व्यापक और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने पर जोर दे रही है।
पटना, एजेंसियां। जनशक्ति जनता दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव ने पटना की बेउर जेल में तैनात पुलिसकर्मियों और सुरक्षाकर्मियों की लंबी ड्यूटी को लेकर बिहार सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने दावा किया कि जेल में कई कर्मियों से लगातार 14 से 15 घंटे तक ड्यूटी कराई जा रही है और उन्हें पर्याप्त आराम तथा नियमित छुट्टी नहीं मिल पा रही है। 14-15 घंटे की ड्यूटी पर उठाए सवाल तेज प्रताप यादव ने कहा कि जेल की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में लंबे समय तक लगातार ड्यूटी कराने से कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ सकता है। उन्होंने बिहार सरकार से इस मामले को गंभीरता से लेने की मांग की है। नियमित छुट्टी और पर्याप्त आराम की मांग तेज प्रताप ने सरकार से मांग की कि बेउर जेल में तैनात कर्मियों के लिए ड्यूटी का समय उचित रखा जाए और नियमित अवकाश सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों पर अनावश्यक कार्यभार नहीं डाला जाना चाहिए और उन्हें बेहतर कामकाजी माहौल मिलना चाहिए। सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की अपील तेज प्रताप यादव ने कहा कि पुलिसकर्मी और सुरक्षाकर्मी बिहार की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं। पर्याप्त आराम मिलने से वे अपनी जिम्मेदारियां बेहतर तरीके से निभा सकेंगे। उन्होंने सम्राट चौधरी सरकार से कर्मचारियों की शिकायतों पर तत्काल संज्ञान लेकर उचित व्यवस्था करने की अपील की है।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजधानी पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर (WTC) बनाने की योजना सामने आई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने अधिकारियों के साथ हुई समीक्षा बैठक में पटना को आधुनिक और वैश्विक स्तर का शहर बनाने के लिए इस परियोजना को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। NBCC ने पेश किया वर्ल्ड ट्रेड सेंटर का प्रस्ताव बैठक के दौरान नेशनल बिल्डिंग्स कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन (NBCC) की ओर से पटना में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के निर्माण का प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इसके साथ ही शहर की कई सरकारी जमीनों के पुनर्विकास की योजनाओं पर भी चर्चा हुई। 4,000 करोड़ रुपये के निवेश की उम्मीद सरकार के अनुसार पटना में प्रस्तावित विभिन्न पुनर्विकास परियोजनाओं के जरिए करीब 4,000 करोड़ रुपये का निवेश आने की संभावना है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य सरकारी जमीन का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ आधुनिक व्यावसायिक और आधारभूत सुविधाओं का विकास करना है। इन इलाकों के विकास पर भी नजर बैठक में बिहार म्यूजियम के सामने नेहरू पथ, गर्दनीबाग, भूतनाथ सेक्टर-6 और बोरिंग कैनाल रोड स्थित सरकारी जमीन के पुनर्विकास प्रस्तावों की जानकारी दी गई। पुराने और जर्जर सरकारी भवनों की जगह जरूरत के अनुसार नए भवन और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना पर भी जोर दिया गया। पटना को वैश्विक व्यापार केंद्र बनाने की तैयारी वर्ल्ड ट्रेड सेंटर जैसी परियोजना से पटना में व्यापार, निवेश और कारोबारी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। हालांकि, अभी परियोजना की विस्तृत लागत, निर्माण शुरू होने की तारीख और अंतिम स्थान को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
पटना: NEET UG 2026 में कथित धांधली की जांच कर रही बिहार आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने बड़ी कार्रवाई की है। एजेंसी ने डॉ. रविशंकर उर्फ सम्राट, उसके भाई अश्विनी कुमार और डॉ. उज्ज्वल राज को गिरफ्तार किया है। जांच में कथित परीक्षा धांधली के ऐसे नेटवर्क का पता चलने का दावा किया गया है, जिसकी नजर अगली NEET परीक्षा पर भी थी। EOU के अनुसार, गिरोह पर प्रतियोगी परीक्षाओं में अभ्यर्थियों की जगह दूसरे लोगों को बैठाने, फर्जी दस्तावेज तैयार कराने और परीक्षा प्रक्रिया में कथित हेरफेर करने के आरोप हैं। जांच में यह भी सामने आया कि कथित तौर पर एक अभ्यर्थी से 12 लाख से 30 लाख रुपये तक की रकम ली जाती थी। लखीसराय से पटना तक फैला नेटवर्क जांच एजेंसी के मुताबिक डॉ. रविशंकर लखीसराय के कवैया और किऊल थानों में दर्ज तीन मामलों में मुख्य आरोपी है। आरोप है कि गिरोह प्रतियोगी परीक्षाओं में सॉल्वर या दूसरे परीक्षार्थियों का इस्तेमाल कर परीक्षा व्यवस्था को प्रभावित करने की कोशिश करता था। रविशंकर और डॉ. उज्ज्वल राज की गिरफ्तारी पटना के जक्कनपुर स्थित आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय परीक्षा केंद्र के बाहर से की गई। दोनों के मेडिकल छात्र होने की जानकारी सामने आई है। 30 लाख रुपये तक की कथित वसूली EOU की जांच में कथित तौर पर परीक्षा में सेटिंग कराने के लिए 12 लाख से 30 लाख रुपये तक की डील का पता चला है। एजेंसी को संदेह है कि गिरोह फर्जी परीक्षार्थियों, पहचान से जुड़े दस्तावेजों और बायोमेट्रिक प्रक्रिया में हेरफेर के जरिए परीक्षा प्रणाली को चकमा देने की कोशिश करता था। जांच का दायरा अब लखीसराय के अलावा हाजीपुर, नवादा और नालंदा तक पहुंच गया है। इन इलाकों में बायोमेट्रिक से जुड़े कुछ लोगों की संभावित भूमिका भी जांच के घेरे में है। फर्जी प्रमाणपत्रों से काउंसलिंग में फायदा दिलाने का आरोप जांच के दौरान कथित तौर पर आय, जाति और दिव्यांगता से जुड़े फर्जी प्रमाणपत्र भी बरामद किए गए हैं। EOU को आशंका है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल मेडिकल काउंसलिंग के दौरान आरक्षण या अन्य लाभ हासिल करने के लिए किया जा सकता था। अश्विनी कुमार के पटना स्थित ठिकानों से विभिन्न परीक्षाओं के एडमिट कार्ड, शैक्षणिक दस्तावेज, ट्रांसफर सर्टिफिकेट और दूसरे कागजात मिलने की बात कही गई है। जांच एजेंसी ने हस्ताक्षरित और खाली चेक के साथ नकदी बरामद होने का भी दावा किया है। अगली CBT आधारित NEET पर भी नजर? जांच में सामने आया एक और गंभीर पहलू अगली NEET परीक्षा से जुड़ा है। EOU के अनुसार, गिरोह आगामी कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT में भी कथित तौर पर सेंध लगाने की तैयारी कर रहा था। छापेमारी के दौरान पटना के एक ऑनलाइन परीक्षा केंद्र से जुड़ा अनुबंध पत्र मिलने की बात कही गई है। एजेंसी का दावा है कि गिरोह परीक्षा केंद्र में निवेश करने की कोशिश कर रहा था, जिससे भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने की संभावना थी। पुराने परीक्षा मामलों से भी जुड़े आरोप जांच एजेंसी के मुताबिक डॉ. उज्ज्वल राज का नाम NEET UG 2024 में फर्जी अभ्यर्थी बैठाने से जुड़े एक मामले में भी सामने आया था। वहीं डॉ. रविशंकर पर रेलवे भर्ती परीक्षा से जुड़े पुराने मामले में आरोपी होने की बात EOU ने कही है। अब जांच एजेंसी नेटवर्क के दूसरे सदस्यों की भूमिका का पता लगाने में जुटी है। मेडिकल, नर्सिंग और डेंटल कॉलेजों से जुड़े छात्रों के अलावा बायोमेट्रिक वेंडरों और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों से भी पूछताछ की जा रही है। NEET की पारदर्शिता पर फिर सवाल NEET देश की प्रमुख मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में शामिल है। ऐसे में परीक्षा में कथित गड़बड़ी और अगली परीक्षा को प्रभावित करने की तैयारी का खुलासा परीक्षा प्रणाली की सुरक्षा और पारदर्शिता को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। फिलहाल EOU की जांच जारी है और एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और किन अभ्यर्थियों ने कथित तौर पर इसका लाभ लेने की कोशिश की।
पटना: स्वतंत्रता दिवस से पहले बिहार में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर उत्साह बढ़ गया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को लोकसेवक आवास पर राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया और देश की आजादी के लिए बलिदान देने वाले वीर सेनानियों को नमन किया। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लोगों से भी अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने नागरिकों से अपने घरों पर तिरंगा फहराने और राष्ट्रभक्ति के इस अभियान से जुड़ने का आग्रह किया। घर-घर तिरंगा फहराने की अपील मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत लोकसेवक आवास पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम के अमर बलिदानियों को याद करना और उनके योगदान के प्रति सम्मान व्यक्त करना हर नागरिक का गौरव है। उन्होंने बिहार समेत देशभर के लोगों से अपील की कि वे अपने घरों पर तिरंगा फहराएं और स्वतंत्रता दिवस के इस अभियान को जनभागीदारी का उत्सव बनाएं। सोशल मीडिया पर फोटो शेयर करने को कहा सम्राट चौधरी ने लोगों से तिरंगे के साथ अपनी तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करने की भी अपील की। उन्होंने इसके लिए #HarGharTiranga हैशटैग का इस्तेमाल करने को कहा, ताकि अभियान की पहुंच अधिक से अधिक लोगों तक हो सके। सोशल मीडिया के जरिए नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने पर भी इस अभियान में विशेष जोर दिया जा रहा है। लोग तिरंगे के साथ तस्वीरें और देशभक्ति से जुड़े संदेश साझा कर अभियान का हिस्सा बन सकते हैं। स्वतंत्रता सेनानियों को किया नमन लोकसेवक आवास पर तिरंगा फहराने के दौरान मुख्यमंत्री ने उन वीर सपूतों और अमर बलिदानियों को याद किया, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। ‘हर घर तिरंगा’ अभियान का उद्देश्य नागरिकों को राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देशभक्ति की भावना से जोड़ना है। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर घरों और प्रतिष्ठानों पर तिरंगा फहराकर लोग स्वतंत्रता संग्राम के नायकों के प्रति सम्मान व्यक्त कर रहे हैं। ‘जय हिंद’ के साथ किया आह्वान मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में लोगों से अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की और संदेश का समापन ‘जय हिंद’ के उद्घोष के साथ किया। स्वतंत्रता दिवस से एक दिन पहले मुख्यमंत्री की इस अपील के बाद बिहार में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को लेकर जनभागीदारी और बढ़ने की उम्मीद है।
गोपालगंज, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार, 12 अगस्त को गोपालगंज जिले के थावे प्रखंड स्थित चनावे गांव में प्रस्तावित मां थावे मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के लिए चिह्नित जमीन का निरीक्षण किया। मुख्यमंत्री ने परियोजना से जुड़ी तैयारियों की जानकारी ली और अधिकारियों को निर्माण से पहले की सभी जरूरी प्रक्रियाएं तेजी से पूरी करने के निर्देश दिए। 25 एकड़ 20 डिसमिल जमीन का लिया जायजा निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को 25 एकड़ 20 डिसमिल भूमि पर प्रस्तावित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की योजना के बारे में जानकारी दी। साइट मैप के जरिए जमीन की उपलब्धता, पहुंच मार्ग, आधारभूत सुविधाओं और भूमि की मौजूदा स्थिति समेत परियोजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं की जानकारी मुख्यमंत्री को दी गई। सम्राट चौधरी ने अधिकारियों से परियोजना की प्रगति और निर्माण से पहले पूरी की जाने वाली प्रक्रियाओं के बारे में भी जानकारी ली। निर्माण प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को सभी आवश्यक औपचारिकताएं जल्द पूरी करने और परियोजना को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। सरकार का उद्देश्य मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के निर्माण कार्य को निर्धारित प्रक्रिया पूरी होने के बाद तेजी से आगे बढ़ाना है। गोपालगंज और आसपास के जिलों को मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि मां थावे मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल बनने से गोपालगंज और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को बेहतर एवं आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं स्थानीय स्तर पर उपलब्ध हो सकेंगी। गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों को दूसरे जिलों या बड़े शहरों की ओर जाने की जरूरत कम होगी। यह परियोजना क्षेत्र में स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मेडिकल कॉलेज शुरू होने के बाद चिकित्सा शिक्षा के साथ-साथ विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की भी उम्मीद है। थावे मंदिर में मुख्यमंत्री ने की पूजा-अर्चना गोपालगंज दौरे के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रसिद्ध थावे मंदिर में भी पूजा-अर्चना की। उन्होंने बिहार की सुख-शांति, समृद्धि और विकास के लिए मां थावे से प्रार्थना की।
पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देने और राज्य में कौशल विकास को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में 10 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे अहम फैसला कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए करीब ₹430 करोड़ की मंजूरी से जुड़ा है। युवाओं के कौशल विकास पर सरकार का फोकस कैबिनेट के फैसले के तहत बिहार में युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में कौशल प्रशिक्षण देने की योजना को आगे बढ़ाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य युवाओं को उद्योग और रोजगार की जरूरत के मुताबिक प्रशिक्षित करना है, ताकि प्रशिक्षण पूरा करने के बाद उन्हें नौकरी या स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें। सरकार की योजना में प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक तकनीक और उद्योग आधारित कौशल को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे राज्य के युवाओं को केवल पारंपरिक प्रशिक्षण के बजाय बाजार की मौजूदा मांग के अनुरूप तैयार करने की कोशिश होगी। हर साल लाखों युवाओं को प्रशिक्षण देने की तैयारी सरकार की योजना के अनुसार आने वाले समय में हर साल 2 लाख से अधिक युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए प्रशिक्षण संस्थानों और कौशल विकास से जुड़े कार्यक्रमों को मजबूत किया जाएगा। सरकार का मानना है कि युवाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार के लिए तैयार करने के साथ-साथ उन्हें दूसरे राज्यों और देश-विदेश के रोजगार बाजार के लिए भी प्रशिक्षित किया जा सकता है। कैबिनेट के 10 प्रस्तावों को मिली मंजूरी बैठक में कौशल विकास के अलावा राज्य के प्रशासनिक और विकास कार्यों से जुड़े कई अन्य प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई। सरकार की ओर से इन फैसलों को बिहार में विकास और रोजगार को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया जा रहा है। कैबिनेट के फैसलों का असर शिक्षा, रोजगार, प्रशासन और विभिन्न विकास योजनाओं से जुड़े क्षेत्रों पर पड़ने की उम्मीद है। युवाओं और रोजगार पर सरकार की रणनीति बिहार में बड़ी युवा आबादी को देखते हुए कौशल विकास सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। केवल सरकारी नौकरियों पर निर्भरता कम करने और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए स्किल ट्रेनिंग और रोजगार से जोड़ने वाली योजनाओं पर जोर दिया जा रहा है। ₹430 करोड़ की मंजूरी इसी व्यापक रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले समय में प्रशिक्षण पाने वाले युवाओं की संख्या, पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण संस्थानों से जुड़ी विस्तृत जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
पटना, एजेंसियां। भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज मुकेश कुमार और आकाश दीप को बिहार सरकार ने पुलिस उपाधीक्षक (DSP) के पद पर नियुक्त किया है। दोनों खिलाड़ियों ने अब बिहार पुलिस में औपचारिक रूप से जॉइनिंग भी कर ली है। यह नियुक्ति बिहार सरकार की उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में सीधे नियुक्त करने वाली ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ नीति के तहत की गई है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सौंपा था नियुक्ति पत्र 24 जुलाई को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में आयोजित समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुकेश कुमार और आकाश दीप को DSP पद का नियुक्ति पत्र सौंपा था। इस समारोह में दोनों क्रिकेटरों के अलावा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपलब्धियां हासिल करने वाले कुल 19 खिलाड़ियों को अलग-अलग सरकारी पदों पर नियुक्ति दी गई थी। बिहार सरकार के अनुसार, इस साल अब तक 106 खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी पदों पर नियुक्ति दी जा चुकी है। सरकार का उद्देश्य खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना और उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सरकारी सेवा में सम्मानजनक अवसर देना है। आकाश दीप और मुकेश कुमार का क्रिकेट करियर आकाश दीप बिहार के रोहतास जिले के रहने वाले हैं और भारतीय टीम के लिए टेस्ट क्रिकेट खेल चुके हैं। उन्होंने भारत के लिए 10 टेस्ट मैचों में 28 विकेट लिए हैं। वहीं मुकेश कुमार बिहार के गोपालगंज जिले से आते हैं। उन्होंने भारतीय टीम के लिए तीन टेस्ट मैच खेले हैं और सात विकेट हासिल किए हैं। दोनों तेज गेंदबाजों ने घरेलू क्रिकेट और भारतीय टीम में अपने प्रदर्शन के दम पर पहचान बनाई है। दोनों खिलाड़ी 2023 एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय क्रिकेट टीम का हिस्सा भी रहे हैं। इसी तरह की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों को देखते हुए बिहार सरकार ने उन्हें खेल कोटे के तहत DSP पद के लिए चुना। खेल से प्रशासन तक नई जिम्मेदारी DSP बनने के बाद दोनों खिलाड़ियों की भूमिका अब केवल क्रिकेट के मैदान तक सीमित नहीं रहेगी। बिहार पुलिस में उन्हें कानून-व्यवस्था और प्रशासन से जुड़ी जिम्मेदारियां निभानी होंगी। मुकेश कुमार और आकाश दीप ने इस नियुक्ति को बड़ी जिम्मेदारी बताया है। आकाश दीप ने नियुक्ति के बाद युवाओं और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने वाली इस पहल को महत्वपूर्ण बताते हुए अपनी नई जिम्मेदारी को ईमानदारी से निभाने की बात कही। बिहार की खेल नीति के तहत खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी बिहार सरकार ने उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सीधे सरकारी नौकरी देने के लिए ‘मेडल लाओ, नौकरी पाओ’ नीति लागू की है। इसके तहत राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के आधार पर सरकारी पद दिए जा रहे हैं। मुकेश कुमार और आकाश दीप को DSP बनाया जाना इसी नीति का बड़ा उदाहरण है। इससे पहले भी बिहार सरकार कई खिलाड़ियों को विभिन्न सरकारी विभागों में नियुक्त कर चुकी है। सरकार का कहना है कि इस तरह की पहल से युवाओं में खेल के प्रति रुचि बढ़ेगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले खिलाड़ियों को करियर सुरक्षा भी मिलेगी।
पटना, एजेंसियां। बॉलीवुड अभिनेता सुनील शेट्टी ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। बैठक में बिहार में फिल्म निर्माण, शूटिंग के लिए राज्य की लोकेशन और फिल्म उद्योग को बढ़ावा देने जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। मुलाकात के बाद सुनील शेट्टी ने बताया कि वह अक्टूबर से बिहार में अपनी अगली फिल्म की शूटिंग शुरू करेंगे। अक्टूबर से शुरू होगी फिल्म की शूटिंग सुनील शेट्टी के मुताबिक उनकी फिल्म की शूटिंग बिहार में अक्टूबर से शुरू होने की योजना है। शूटिंग करीब 50 से 60 दिनों तक चल सकती है। फिल्म की शूटिंग के लिए बिहार के अलग-अलग हिस्सों में लोकेशन तलाशने और स्थानीय स्तर पर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी चर्चा हुई। अभिनेता ने बिहार में फिल्म निर्माण को लेकर सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा कि राज्य में फिल्मों की शूटिंग के लिए काफी संभावनाएं हैं। बिहार में ही फिल्म निर्माण पर जोर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के दौरान सिर्फ शूटिंग ही नहीं, बल्कि बिहार में फिल्म निर्माण को बढ़ावा देने को लेकर भी बातचीत हुई। सुनील शेट्टी ने कहा कि वह बिहार में फिल्म बनाएंगे और राज्य की प्रतिभाओं तथा स्थानीय संसाधनों को भी अवसर देने की दिशा में काम किया जा सकता है। इससे बिहार में फिल्म उद्योग को बढ़ावा मिलने और स्थानीय कलाकारों, तकनीशियनों तथा अन्य फिल्मकर्मियों के लिए नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। बिहार की फिल्म नीति पर भी हुई चर्चा मुलाकात में बिहार में फिल्म शूटिंग के लिए उपलब्ध सुविधाओं और राज्य सरकार की फिल्म नीति से जुड़े विषयों पर भी बातचीत हुई। सरकार चाहती है कि बिहार की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक लोकेशन को फिल्मों के माध्यम से देश-दुनिया तक पहुंचाया जाए। सुनील शेट्टी की प्रस्तावित शूटिंग को इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बिहार के दर्शकों को लेकर क्या बोले सुनील शेट्टी सुनील शेट्टी ने बिहार के दर्शकों को लेकर भी सकारात्मक बात कही। उनका कहना है कि बिहार में फिल्मों के लिए दर्शकों की मजबूत रुचि है और यहां फिल्म निर्माण का बेहतर माहौल तैयार किया जा सकता है। मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अभिनेता के बिहार में फिल्म शूट करने के ऐलान से राज्य में फिल्म उद्योग को लेकर नई उम्मीद जगी है। अब अक्टूबर में प्रस्तावित शूटिंग और फिल्म के प्रोजेक्ट से जुड़ी अन्य जानकारी का इंतजार है।
पटना । स्वतंत्रता दिवस से पहले सोमवार को राजधानी पटना में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में निकली यह यात्रा जेपी गोलंबर से शुरू होकर कारगिल चौक तक पहुंची। मुख्यमंत्री के साथ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, केंद्रीय मंत्री रामकृपाल यादव और कई अन्य नेता एवं कार्यकर्ता शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लिए बड़ी संख्या में लोग यात्रा में शामिल हुए और भारत माता की जय के नारे लगाए। जेपी गोलंबर से कारगिल चौक तक निकली यात्रा मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करीब डेढ़ किलोमीटर तक पैदल तिरंगा लेकर यात्रा में शामिल हुए। जेपी गोलंबर पहुंचने के बाद उन्होंने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। यात्रा के दौरान बड़ी संख्या में लोग तिरंगा लेकर पहुंचे और देशभक्ति के नारे लगाए। CM सम्राट बोले- 2047 तक शक्तिशाली देश बनेगा भारत अपने संबोधन में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि तिरंगा देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों सैनिकों ने तिरंगे की आन और सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत शांति में विश्वास करता है, लेकिन अगर कोई देश से लड़ने की कोशिश करता है तो भारत उसका मजबूती से जवाब देने में सक्षम है। उन्होंने विश्वास जताया कि 2047 तक भारत दुनिया के सबसे शक्तिशाली देशों में शामिल होगा। 10 से 17 अगस्त तक तिरंगा यात्रा का आह्वान सम्राट चौधरी ने लोगों से 10 से 17 अगस्त तक चलने वाली तिरंगा यात्रा में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की। उन्होंने कहा कि प्रखंड स्तर पर आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भी लोग भाग लें और इस मुहिम को सफल बनाएं। उन्होंने कहा कि तिरंगा केवल तीन रंगों वाला ध्वज नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्वतंत्रता सेनानियों और पूर्वजों का बलिदान और लोकतांत्रिक मूल्यों की स्थापना का इतिहास जुड़ा है। हर घर तिरंगा अभियान को बढ़ावा देने का उद्देश्य तिरंगा यात्रा का उद्देश्य स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लोगों में देशभक्ति की भावना को मजबूत करना और हर घर तिरंगा अभियान को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। यात्रा में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी, रामकृपाल यादव, विजय सिन्हा समेत कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे। तिरंगा यात्रा के दौरान बदला गया ट्रैफिक रूट यात्रा को देखते हुए पटना में सुरक्षा और यातायात के विशेष इंतजाम किए गए थे। सुबह करीब 7 बजे से गांधी मैदान, डाकबंगला चौराहा, जेपी गोलंबर, कारगिल चौक और बुद्ध मार्ग के आसपास कुछ मार्गों पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित की गई थी। लोगों की सुविधा के लिए वैकल्पिक रास्तों की व्यवस्था की गई थी। यात्रा समाप्त होने के बाद यातायात व्यवस्था सामान्य कर दी गई।
सासाराम, एजेंसियां। बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव शनिवार को रोहतास पहुंचे और दिनारा के जोगिया गांव में मजदूरी मांगने के विवाद में मारे गए मजदूर चंदेश्वर चौधरी के परिवार से मुलाकात की। उन्होंने मृतक की पत्नी और बच्चों से मिलकर उन्हें सांत्वना दी और दुख की इस घड़ी में हरसंभव मदद का भरोसा दिलाया। पीड़ित परिवार से की मुलाकात तेजस्वी यादव ने परिवार के सदस्यों से घटना की जानकारी ली और उन्हें न्याय दिलाने का भरोसा दिया। उन्होंने कहा कि गरीब और मजदूर परिवारों के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। कानून-व्यवस्था पर सरकार को घेरा रोहतास दौरे के दौरान तेजस्वी यादव ने बिहार की सम्राट चौधरी सरकार पर कानून-व्यवस्था को लेकर हमला बोला। उन्होंने मजदूर की हत्या को गंभीर मामला बताते हुए सरकार से दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। फिलहाल तेजस्वी यादव ने पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहने और मामले में न्याय की लड़ाई में सहयोग का भरोसा दिया है।
तेजस्वी यादव का सम्राट चौधरी पर हमला, बोले- 150 दिनों में NDA दो चुनाव हार चुकी है पटना, एजेंसियां। बिहार में विधानसभा चुनाव 2025 के बाद राजनीतिक बयानबाजी एक बार फिर तेज हो गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के कार्यकाल को लेकर NDA सरकार पर निशाना साधा है। तेजस्वी यादव ने दावा किया कि मुख्यमंत्री के करीब 150 दिनों के कार्यकाल में NDA राज्य में दो चुनाव हार चुकी है। सम्राट चौधरी सरकार पर तेजस्वी का निशाना तेजस्वी यादव ने सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि सत्ता में आने के बाद NDA को चुनावी मोर्चे पर झटके लगे हैं। उन्होंने सरकार की कार्यशैली और उसके प्रदर्शन को लेकर भी सवाल उठाए। तेजस्वी का यह बयान ऐसे समय आया है जब बिहार में राजनीतिक दल आगामी चुनावी गतिविधियों को लेकर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटे हैं। ‘150 दिनों में दो चुनाव हारे’ का दावा तेजस्वी यादव ने अपने बयान में कहा कि सम्राट चौधरी के करीब 150 दिनों के कार्यकाल में NDA दो चुनाव हार चुकी है। हालांकि, यह बयान तेजस्वी यादव का राजनीतिक दावा है और इसे उसी रूप में देखा जाना चाहिए। विपक्ष लगातार NDA सरकार को उसके कामकाज और चुनावी प्रदर्शन के आधार पर घेरने की कोशिश कर रहा है। वहीं, सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से विपक्ष के आरोपों पर जवाब भी दिए जा रहे हैं। बिहार की राजनीति में बयानबाजी तेज सम्राट चौधरी के नेतृत्व में NDA सरकार बनने के बाद बिहार की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी तेज है। तेजस्वी यादव लगातार सरकार के कामकाज को लेकर सवाल उठा रहे हैं। दूसरी ओर, NDA नेता सरकार की उपलब्धियों और विकास कार्यों को जनता के सामने रखने में जुटे हैं। ऐसे में तेजस्वी यादव का यह बयान बिहार की मौजूदा राजनीतिक खींचतान को और बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
उद्योग विभाग और महाशक्ति ग्रुप के बीच हुआ एमओयू, 1–1.5 मिलियन टन सालाना उत्पादन क्षमता वाला एकीकृत इस्पात संयंत्र होगा स्थापित गया, एजेंसियां। बिहार सरकार ने राज्य के औद्योगिक विकास की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए गया जिले में ₹6,000 करोड़ की लागत से एकीकृत (इंटीग्रेटेड) स्टील प्लांट स्थापित करने की घोषणा की है। इस परियोजना के लिए उद्योग विभाग और महाशक्ति ग्रुप के बीच मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की मौजूदगी में समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। हर साल 1 से 1.5 मिलियन टन स्टील का होगा उत्पादन प्रस्तावित स्टील प्लांट की वार्षिक उत्पादन क्षमता 1.0 से 1.5 मिलियन टन (MTPA) होगी। आधुनिक तकनीक से लैस यह संयंत्र बिहार में इस्पात उत्पादन को नई ऊंचाई देगा और राज्य को पूर्वी भारत के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों में शामिल करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। रोजगार और स्थानीय उद्योगों को मिलेगा बड़ा लाभ राज्य सरकार के अनुसार, इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों रोजगार के अवसर पैदा होंगे। साथ ही परिवहन, लॉजिस्टिक्स, मशीनरी, निर्माण सामग्री और लघु एवं मध्यम उद्योगों को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे गया और आसपास के क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी। बिहार को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की दिशा में अहम कदम मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि राज्य सरकार निवेशकों के लिए बेहतर आधारभूत संरचना, पारदर्शी नीतियां और त्वरित प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध करा रही है। उन्होंने विश्वास जताया कि BIADA, उद्योग विभाग और निवेशक संस्थानों के सहयोग से यह परियोजना तय समय सीमा में पूरी होगी और बिहार के औद्योगिक विकास का नया अध्याय शुरू करेगी।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि तेज प्रताप यादव, गिरफ्तार विपक्षी नेताओं और छात्र आंदोलन के दौरान हिरासत में लिए गए सभी छात्रों को तत्काल रिहा किया जाए। साथ ही उनके खिलाफ दर्ज सभी मुकदमे भी वापस लिए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सोमवार तक सरकार ने यह कदम नहीं उठाया तो राष्ट्रीय जनता दल (RJD) पूरे बिहार में बड़ा जनआंदोलन शुरू करेगा। तेज प्रताप की गिरफ्तारी को बताया राजनीतिक कार्रवाई तेजस्वी यादव ने कहा कि उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव को छात्र आंदोलन का समर्थन करने के कारण गिरफ्तार किया गया और उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लोकतांत्रिक विरोध को दबाने के लिए विपक्षी नेताओं और छात्रों पर कार्रवाई कर रही है। छात्रों पर दर्ज केस वापस लेने की मांग तेजस्वी यादव ने कहा कि NEET आंदोलन के दौरान जिन छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गई है, उन्हें तत्काल वापस लिया जाए। उनका कहना है कि छात्र अपने भविष्य और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे थे, लेकिन सरकार ने उनकी आवाज सुनने के बजाय पुलिस कार्रवाई की। चेतावनी: मांगें नहीं मानी गईं तो होगा राज्यव्यापी आंदोलन आरजेडी नेता ने स्पष्ट कहा कि यदि तेज प्रताप यादव, अन्य गिरफ्तार नेताओं और छात्रों की रिहाई तथा मुकदमे वापस लेने की मांग 24 घंटे के भीतर पूरी नहीं हुई, तो पार्टी पूरे बिहार में व्यापक आंदोलन करेगी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से भी आंदोलन के लिए तैयार रहने का आह्वान किया।
पटना, एजेंसियां। बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सरकार ने एक साथ सात महत्वपूर्ण विधेयक सदन में पेश किए। जुआ कानून, जीएसटी संशोधन, भूमि दाखिल-खारिज, चिकित्सा, नर्सों के पंजीकरण और कृषि भूमि से जुड़े इन विधेयकों पर सदन में चर्चा शुरू हो गई। सरकार ने संकेत दिया कि बहस पूरी होने के बाद इन्हें पारित कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। सदन में पेश किए गए विधेयकों में बिहार जुआ (प्रतिषेध) विधेयक, 2026, बिहार माल एवं सेवा कर (GST) संशोधन विधेयक, 2026, बिहार भूमि दाखिल-खारिज संशोधन विधेयक, 2026, बिहार चीनी उपक्रम (अर्जन) संशोधन विधेयक, 2026, बिहार चिकित्सा संशोधन विधेयक, 2026, बिहार नर्सेस पंजीकरण संशोधन विधेयक, 2026 तथा बिहार कृषि भूमि (गैर कृषि प्रयोजन के लिए सम्परिवर्तन) (निरसन) विधेयक, 2026 शामिल हैं। सत्र के दौरान सत्र के दौरान जदयू विधायक श्याम रजक ने इंदिरा आंबेडकर विद्यालयों में शिक्षकों की भारी कमी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में करीब 62 प्रतिशत पद रिक्त हैं। इस पर एससी-एसटी कल्याण मंत्री लखेंद्र कुमार रौशन ने बताया कि शिक्षक नियुक्ति के लिए बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) को अधियाचना भेजी जा चुकी है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी इस मुद्दे को गंभीर बताते हुए शीघ्र आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन में क्या घोषणा की TRE-4 शिक्षक भर्ती को लेकर शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी ने सदन में घोषणा की कि इसकी अधिसूचना इसी महीने जारी कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के निर्देश पर अगले पांच वर्षों में एक लाख शिक्षकों की नियुक्ति का लक्ष्य निर्धारित किया गया है और भर्ती प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं त्रुटिरहित बनाया जाएगा। वहीं, विधान परिषद में ग्राम पंचायतों में होल्डिंग टैक्स वसूली का मुद्दा भी गरमाया। राजद एमएलसी सुनील सिंह ने गरीबों पर टैक्स लगाने का आरोप लगाया, जिस पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने स्पष्ट किया कि सरकार गरीबों पर कोई नया टैक्स नहीं लगा रही है और इस तरह की बातें पूरी तरह भ्रामक हैं।
हाजीपुर, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी का हेलीकॉप्टर शनिवार को हाजीपुर के अक्षयवट राय स्टेडियम से उड़ान भरने के बाद करीब सात मिनट तक एक ही क्षेत्र में हवा में मंडराता रहा। इस अप्रत्याशित स्थिति को देखकर स्टेडियम परिसर में मौजूद लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच कुछ समय के लिए चिंता का माहौल बन गया। हालांकि बाद में प्रशासन ने स्पष्ट किया कि यह उड़ान संचालन की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा था और किसी तरह की तकनीकी खराबी या सुरक्षा संबंधी समस्या नहीं थी। उड़ान के बाद कुछ देर तक हवा में रुका हेलीकॉप्टर प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक हेलीकॉप्टर ने निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार सामान्य रूप से उड़ान भरी, लेकिन आगे बढ़ने के बजाय कुछ मिनट तक एक ही क्षेत्र में चक्कर लगाता रहा। एहतियात के तौर पर पुलिस और प्रशासन ने स्टेडियम में मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर हटाना शुरू कर दिया। इस दौरान कुछ देर के लिए अफरा-तफरी जैसी स्थिति भी देखने को मिली। लोकेशन स्पष्ट होने के बाद पटना के लिए रवाना करीब सात मिनट बाद पायलट को आगे की उड़ान के लिए आवश्यक लोकेशन स्पष्ट होने पर हेलीकॉप्टर ने सामान्य रूप से उड़ान जारी रखी और पटना के लिए रवाना हो गया। अधिकारियों ने बताया कि पायलट को नेविगेशन संबंधी आवश्यक स्पष्टता मिलने तक हेलीकॉप्टर को हवा में होल्ड करना पड़ा। प्रशासन ने अफवाहों पर लगाया विराम घटना के बाद प्रशासन ने साफ किया कि पूरी प्रक्रिया सुरक्षा मानकों के तहत अपनाई गई थी। अधिकारियों के अनुसार हेलीकॉप्टर में कोई तकनीकी खराबी नहीं आई थी और न ही सुरक्षा से जुड़ी कोई समस्या उत्पन्न हुई। उड़ान के दौरान सभी आवश्यक प्रोटोकॉल का पालन किया गया और स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में रही। प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की।
पटना, एजेंसियां। बिहार की राजनीति में उस समय हलचल तेज हो गई जब जनशक्ति जनता दल (जेजेडी) के सुप्रीमो तेज प्रताप यादव ने मौजूदा राज्य सरकार के जल्द गिरने की भविष्यवाणी कर दी। वृंदावन प्रवास के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि बिहार में बहुत जल्द सरकार बदलने वाली है। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। तेज प्रताप यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा, "बिहार में बहुत जल्दी सरकार गिरने वाली है। यह मैंने पहले भी कहा था। मैं वृंदावन में हूं और भविष्यवाणी कर रहा हूं कि बहुत जल्द बिहार की सरकार बदल जाएगी।" उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब राज्य में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं और एनडीए नेताओं की महत्वपूर्ण बैठक भी हाल ही में संपन्न हुई है। एनडीए में मतभेद का किया दावा तेज प्रताप यादव ने अपने बयान के जरिए यह संकेत देने की कोशिश की कि एनडीए के घटक दलों के बीच सबकुछ सामान्य नहीं है और गठबंधन के भीतर मतभेद बढ़ रहे हैं। हालांकि, उनके इस दावे पर एनडीए के किसी भी प्रमुख नेता की ओर से अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में इसे राजनीतिक बयानबाजी के तौर पर भी देखा जा रहा है। एनडीए ने विकास और समन्वय पर दिया जोर उधर, पटना में आयोजित एनडीए की बैठक में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार के सर्वांगीण विकास और जनकल्याण के लिए संगठन और सरकार के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने नियमित संवाद और बैठकों की परंपरा स्थापित कर गठबंधन को मजबूती दी है। सम्राट चौधरी ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प और नीतीश कुमार के समृद्ध बिहार के लक्ष्य को पूरा करने के लिए एनडीए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रहा है। तेज प्रताप के बयान के बीच अब राज्य की राजनीति में सियासी अटकलें और तेज हो गई हैं।
पटना, एजेंसियां। बिहार सरकार ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत राज्य के 97.84 लाख लाभार्थियों को बड़ी राहत देते हुए उनके बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की पेंशन राशि हस्तांतरित कर दी है। इस योजना का लाभ वृद्धजन, दिव्यांगजन और विधवा महिलाओं को मिला है। सरकार का कहना है कि समय पर आर्थिक सहायता उपलब्ध कराकर जरूरतमंदों को सामाजिक सुरक्षा का मजबूत आधार देने का प्रयास किया जा रहा है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सोशल मीडिया के माध्यम से इसकी जानकारी देते हुए कहा कि राज्य सरकार समाज के कमजोर और जरूरतमंद वर्गों के जीवन को बेहतर बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने सभी लाभार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए भरोसा दिलाया कि भविष्य में भी पेंशन राशि समय पर उपलब्ध कराई जाएगी। अब हर महीने 10 तारीख तक मिलेगी पेंशन सरकार ने पेंशन वितरण प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। अब सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत पात्र लाभार्थियों के खातों में हर महीने की 10 तारीख तक राशि भेजने की व्यवस्था की गई है। इससे बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और विधवा महिलाओं को नियमित आर्थिक सहायता मिल सकेगी और उन्हें अनावश्यक इंतजार नहीं करना पड़ेगा। 400 रुपये से बढ़कर हुई 1100 रुपये पेंशन राज्य सरकार ने हाल ही में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि में बड़ा इजाफा किया है। पहले लाभार्थियों को 400 रुपये प्रतिमाह मिलते थे, जिसे बढ़ाकर अब 1100 रुपये प्रति माह कर दिया गया है। सरकार का मानना है कि बढ़ी हुई राशि महंगाई के दौर में जरूरतमंद लोगों को आर्थिक संबल प्रदान करेगी। छूटे हुए पात्र लोगों को भी मिलेगा लाभ मुख्यमंत्री ने कहा कि जो पात्र लोग अभी तक योजना से नहीं जुड़ पाए हैं, उन्हें भी जल्द शामिल किया जाएगा। इसके लिए पंचायत स्तर पर लाभार्थियों की पहचान और सत्यापन का अभियान चलाया जाएगा। सरकार का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र व्यक्ति सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे और सभी जरूरतमंदों तक सरकारी सहायता समय पर पहुंचे।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।