दुनिया

ग्रीस और तुर्की में जंगल की आग ने बढ़ाई चिंता, हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
ग्रीस और तुर्की में जंगल की आग से भारी तबाही और राहत-बचाव कार्य
Greece Turkey Wildfire Crisis Evacuation Emergency

भीषण गर्मी और तेज हवाओं से बेकाबू हुई आग, पर्यटन क्षेत्रों पर भी मंडराया खतरा; बड़े पैमाने पर राहत अभियान जारी

 

एथेंस/अंकारा, एजेंसियां। ग्रीस और तुर्की में भीषण जंगल की आग ने हालात गंभीर बना दिए हैं। तेज गर्मी, सूखे मौसम और तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में आग तेजी से फैल रही है। दोनों देशों में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि दमकलकर्मी आग पर काबू पाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।

 

ग्रीस में दमकलकर्मियों की मौत, बड़े पैमाने पर निकासी

 

ग्रीस के क्रेट (Crete) द्वीप और अन्य क्षेत्रों में लगी आग ने भारी तबाही मचाई है। आग बुझाने के अभियान के दौरान तीन दमकलकर्मियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। सैकड़ों स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। आग से मकानों, गोदामों, जैतून के बागानों और कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचा है।

 

तुर्की के पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंची आग

 

तुर्की में अंताल्या (Antalya) और मुगला (Muğla) जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में जंगल की आग फैलने से सैकड़ों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। कई राजमार्गों को एहतियातन बंद कर दिया गया है और आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर, विमान तथा हजारों दमकलकर्मियों को तैनात किया गया है।

 

यूरोप में बढ़ा जंगल की आग का खतरा

 

विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी, सूखा और तेज हवाएं जंगल की आग को और खतरनाक बना रही हैं। यूरोपीय संघ ने प्रभावित देशों को राहत और अग्निशमन सहायता उपलब्ध करानी शुरू कर दी है।

 

राहत और बचाव अभियान जारी

 

ग्रीस और तुर्की की सरकारों ने प्रभावित इलाकों में आपातकालीन राहत अभियान तेज कर दिया है। प्रशासन ने लोगों से जंगलों और आग प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

 

Popular post
शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

Ranjan Kumar Tiwari Ranjan123

दुनिया

View more
Apple Watch displaying the Fall Detection emergency alert after detecting a hard fall
Apple Watch ने बचाई जान: फॉल डिटेक्शन फीचर के अलर्ट से समय पर पहुंची मेडिकल टीम, टला बड़ा हादसा

Apple Watch Fall Detection: स्मार्टवॉच अब केवल फिटनेस ट्रैक करने या नोटिफिकेशन देखने तक सीमित नहीं रह गई हैं। आधुनिक तकनीक अब आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों की जान बचाने का भी काम कर रही है। अमेरिका के ओहियो में ऐसा ही एक मामला सामने आया, जहां Apple Watch के Fall Detection फीचर ने एक व्यक्ति के बेहोश होकर गिरने के बाद स्वतः इमरजेंसी सर्विस को अलर्ट भेज दिया। समय पर मेडिकल टीम के पहुंचने से व्यक्ति की जान बच गई। घर के बाहर काम करते समय अचानक बेहोश होकर गिर पड़े ओहियो निवासी मोहम्मद इस्लाम ने बताया कि घटना वाले दिन वे घर का कचरा बाहर फेंकने निकले थे। इसी दौरान उन्हें अचानक चक्कर आया और वे जमीन पर गिर पड़े। उस समय घर में कोई दूसरा व्यक्ति मौजूद नहीं था। काफी देर बाद जब उन्हें होश आया तो उन्होंने उठने की कोशिश की, लेकिन वे खुद को संभाल नहीं सके। इसी बीच उनकी कलाई पर बंधी Apple Watch ने गिरने और शरीर में अचानक हुए तेज झटके को पहचान लिया और उसका Fall Detection फीचर सक्रिय हो गया। खुद-ब-खुद इमरजेंसी नंबर पर लग गया कॉल गिरने के तुरंत बाद Apple Watch ने पहले वाइब्रेशन और अलर्ट के जरिए यूजर से प्रतिक्रिया मांगी। जब करीब 30 सेकंड तक कोई हरकत नहीं हुई और घड़ी को कोई जवाब नहीं मिला, तो उसने अपने आप स्थानीय इमरजेंसी सर्विस को कॉल कर दिया। इतना ही नहीं, स्मार्टवॉच ने यूजर की सटीक लोकेशन और घटना की जानकारी उनके इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को भी भेज दी, जिससे बचाव दल बिना देरी के सही जगह पहुंच सका। अस्पताल में चला जानलेवा बीमारी का पता ऑटोमैटिक अलर्ट मिलने के बाद मेडिकल टीम तुरंत मौके पर पहुंची और मोहम्मद इस्लाम को यूनिवर्सिटी ऑफ सिनसिनाटी अस्पताल ले जाया गया। जांच के दौरान डॉक्टरों ने पाया कि उनके दिमाग में ब्लड क्लॉट (खून के थक्के) बन गए थे, जो समय पर इलाज नहीं मिलने पर जानलेवा साबित हो सकते थे। डॉक्टरों ने बताया कि यदि स्मार्टवॉच ने समय रहते इमरजेंसी कॉल नहीं किया होता, तो इलाज में देरी के कारण स्थिति कहीं अधिक गंभीर हो सकती थी। कैसे काम करता है Apple Watch का Fall Detection फीचर? Apple Watch का Fall Detection फीचर घड़ी में लगे मोशन सेंसर, एक्सेलेरोमीटर और जाइरोस्कोप की मदद से यह पहचानता है कि यूजर अचानक जोर से गिरा है या नहीं। तेज गिरावट महसूस होने पर वॉच तुरंत अलर्ट जारी करती है। स्क्रीन पर इमरजेंसी संदेश दिखता है और वॉच लगातार वाइब्रेट करती है। यदि यूजर कुछ समय तक कोई प्रतिक्रिया नहीं देता, तो घड़ी स्वतः इमरजेंसी सर्विस को कॉल कर देती है। साथ ही, यूजर की लोकेशन और सहायता संदेश उसके पहले से तय किए गए इमरजेंसी कॉन्टैक्ट्स को भेज दिए जाते हैं। किन डिवाइस में उपलब्ध है यह सुविधा? Apple के अनुसार, Apple Watch SE, Series 4 और उसके बाद के सभी मॉडल्स में Fall Detection फीचर उपलब्ध है। 55 वर्ष या उससे अधिक आयु के यूजर्स के लिए यह फीचर डिफॉल्ट रूप से सक्रिय रहता है, जबकि अन्य यूजर्स इसे सेटिंग्स में जाकर मैन्युअली ऑन कर सकते हैं। यह घटना दिखाती है कि आधुनिक वियरेबल तकनीक केवल सुविधा ही नहीं, बल्कि आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बनती जा रही है।  

kalpana जुलाई 31, 2026 0
Travelers at Dhaka airport after the US lowers its travel advisory for Bangladesh to Level 2

Bangladesh Travel Advisory: अमेरिका ने बांग्लादेश के लिए ट्रैवल एडवाइजरी में दी राहत, सुरक्षा हालात में सुधार का जताया भरोसा

ICAI Ohio Chapter

ICAI ने अमेरिका के ओहायो में खोला 55वाँ ओवरसीज चैप्टर, भारतीय CAs को मिलेगा वैश्विक मंच

Rahul Gandhi responds to a journalist during the Monsoon Session of Parliament after being questioned about the student protest issue

Parliament Session: पत्रकार के सवाल पर राहुल गांधी का जवाब- "क्या आप BJP के हैं?"

ग्रीस और तुर्की में जंगल की आग से भारी तबाही और राहत-बचाव कार्य
ग्रीस और तुर्की में जंगल की आग ने बढ़ाई चिंता, हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

भीषण गर्मी और तेज हवाओं से बेकाबू हुई आग, पर्यटन क्षेत्रों पर भी मंडराया खतरा; बड़े पैमाने पर राहत अभियान जारी   एथेंस/अंकारा, एजेंसियां। ग्रीस और तुर्की में भीषण जंगल की आग ने हालात गंभीर बना दिए हैं। तेज गर्मी, सूखे मौसम और तेज हवाओं के कारण कई इलाकों में आग तेजी से फैल रही है। दोनों देशों में हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि दमकलकर्मी आग पर काबू पाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं।   ग्रीस में दमकलकर्मियों की मौत, बड़े पैमाने पर निकासी   ग्रीस के क्रेट (Crete) द्वीप और अन्य क्षेत्रों में लगी आग ने भारी तबाही मचाई है। आग बुझाने के अभियान के दौरान तीन दमकलकर्मियों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। सैकड़ों स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। आग से मकानों, गोदामों, जैतून के बागानों और कृषि भूमि को भी नुकसान पहुंचा है।   तुर्की के पर्यटन क्षेत्रों तक पहुंची आग   तुर्की में अंताल्या (Antalya) और मुगला (Muğla) जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में जंगल की आग फैलने से सैकड़ों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। कई राजमार्गों को एहतियातन बंद कर दिया गया है और आग बुझाने के लिए हेलीकॉप्टर, विमान तथा हजारों दमकलकर्मियों को तैनात किया गया है।   यूरोप में बढ़ा जंगल की आग का खतरा   विशेषज्ञों का कहना है कि यूरोप में लगातार पड़ रही भीषण गर्मी, सूखा और तेज हवाएं जंगल की आग को और खतरनाक बना रही हैं। यूरोपीय संघ ने प्रभावित देशों को राहत और अग्निशमन सहायता उपलब्ध करानी शुरू कर दी है।   राहत और बचाव अभियान जारी   ग्रीस और तुर्की की सरकारों ने प्रभावित इलाकों में आपातकालीन राहत अभियान तेज कर दिया है। प्रशासन ने लोगों से जंगलों और आग प्रभावित क्षेत्रों से दूर रहने तथा सुरक्षा एजेंसियों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
मिस्र के डेमियेट्टा बंदरगाह पर अमेरिकी LNG पोत पर हुए ड्रोन हमले के बाद लगी आग

मिस्र में पहली बार अमेरिकी LNG पोत पर ड्रोन हमला, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव

Anti Paper Leak Bill 2026

एंटी पेपर लीक बिल पर पीएम मोदी का संदेश, बोले- वादा पूरा हुआ, पेपर माफियाओं को बख्शा नहीं जाएगा

Microsoft Market Value

माइक्रोसॉफ्ट में AI बूम से ऐतिहासिक उछाल, एक दिन में 450 अरब डॉलर बढ़ी कंपनी की वैल्यू

गाज़ा में हमास के निरस्त्रीकरण समझौते का ऐलान करते अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप
ट्रंप ने गाज़ा में हमास के पूर्ण निरस्त्रीकरण समझौते का किया ऐलान, बोले- यह स्थायी शांति की दिशा में ऐतिहासिक कदम

'बोर्ड ऑफ पीस' के जरिए समझौते का दावा, चरणबद्ध तरीके से हथियार छोड़ने और नई प्रशासनिक व्यवस्था का प्रस्ताव   वॉशिंगटन, एजेंसियां। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि गाज़ा में हमास और अन्य सशस्त्र समूहों के पूर्ण एवं चरणबद्ध निरस्त्रीकरण को लेकर एक ऐतिहासिक समझौता हुआ है। ट्रंप ने इसे "स्थायी शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक कदम" बताया। उनके अनुसार, इस समझौते के तहत हमास अपने हथियार छोड़ेगा और गाज़ा में नई प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने का रास्ता तैयार होगा।   चरणबद्ध तरीके से होगा निरस्त्रीकरण   ट्रंप के अनुसार, प्रस्तावित योजना में हमास के हथियारों के भंडार, सुरंग नेटवर्क और सैन्य ढांचे को चरणबद्ध तरीके से खत्म किया जाएगा। इसके बाद गाज़ा में एक नई तकनीकी फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित करने और सुरक्षा की जिम्मेदारी अंतरराष्ट्रीय बलों तथा पुनर्गठित स्थानीय पुलिस को सौंपने की योजना है।   समझौते पर अभी भी बनी हुई है अनिश्चितता   हालांकि, इस घोषणा के बावजूद समझौते के लागू होने को लेकर कई सवाल बने हुए हैं। इज़राइल की ओर से योजना पर औपचारिक सहमति नहीं दी गई है, जबकि हमास ने संकेत दिया है कि जब तक इज़राइली सेना गाज़ा से पीछे नहीं हटती, तब तक निरस्त्रीकरण लागू नहीं होगा।   मध्यस्थ देशों की रही अहम भूमिका   इस प्रस्ताव को तैयार करने में मिस्र, कतर और तुर्की की मध्यस्थता अहम बताई जा रही है। ट्रंप ने इन देशों और अपनी वार्ता टीम की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि कई महीनों की बातचीत के बाद यह प्रारूप तैयार हुआ है।   जमीन पर हिंसा अभी भी जारी   ट्रंप की घोषणा के बावजूद गाज़ा में संघर्ष पूरी तरह नहीं थमा है। क्षेत्र में अब भी छिटपुट सैन्य कार्रवाई और हवाई हमलों की खबरें आ रही हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि समझौते को लागू करने के लिए अभी कई कूटनीतिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियां बाकी हैं।  

ranjan kumar tiwari जुलाई 31, 2026 0
यूक्रेन पर रूस का भयावह मिसाइल और ड्रोन हमला, कई शहरों में भारी तबाही

यूक्रेन पर रूस का भयावह मिसाइल हमला, कई शहरों में भारी तबाही; बच्चों समेत कम से कम 10 लोगों की मौत

अमेरिका के जल आपूर्ति तंत्र पर साइबर हमले की प्रतीकात्मक तस्वीर

अमेरिका के जल आपूर्ति सिस्टम पर बड़ा साइबर हमला, 30 से अधिक वॉटर सिस्टम बने निशाना

स्पेन के सीउटा बॉर्डर पर मोरक्को से आए प्रवासियों का जमावड़ा और सुरक्षा बल

स्पेन के सीउटा (Ceuta) बॉर्डर पर अफरा-तफरी, हजारों प्रवासियों ने मोरक्को सीमा पार की

0 Comments

Top week

Smoke rises after reported airstrikes in Iraq as regional tensions escalate in West Asia
दुनिया

US-Saudi Strike: इराक में अमेरिका-सऊदी की संयुक्त कार्रवाई, 4 IRGC जवानों की मौत का दावा; पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

kalpana जुलाई 30, 2026 0

Voting poll

अगर भविष्य में रश्मिका और विजय जीवनसाथी बनते हैं, तो क्या आपको उनकी जोड़ी पसंद होगी?