बिहार

Patna Metro to Run Between Bhootnath and Malahi Pakri from March 15

इस दिन से भूतनाथ और मलाही पकड़ी के बीच चलेगी मेट्रो, 26 फरवरी को हुआ था ट्रायल

surbhi मार्च 6, 2026 0
Patna Metro train trial run on elevated track between Bhootnath and Malahi Pakri
Patna Metro Bhootnath to Malahi Pakri Operations Likely from March 15

 

Patna Metro: पटना मेट्रो को लेकर एक और बड़ा अपडेट सामने आया है। जानकारी के अनुसार भूतनाथ से मलाही पकड़ी के बीच मेट्रो सेवा 15 मार्च से शुरू हो सकती है। इससे पहले 10 मार्च को कमिश्नर ऑफ मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम पटना पहुंचकर मेट्रो का निरीक्षण करेगी।

इस दौरान मेट्रो को एलिवेटेड ट्रैक पर चलाकर उसकी तकनीकी और सुरक्षा व्यवस्था की जांच की जाएगी। यदि सब कुछ सही पाया गया तो 15 मार्च से इस रूट पर नियमित परिचालन शुरू होने की संभावना है। इससे पहले 26 फरवरी को इस रूट पर ट्रायल रन सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

खेमनीचक में बनेगा एक्सचेंज स्टेशन

जानकारी के मुताबिक भूतनाथ से मलाही पकड़ी के बीच की दूरी करीब 2.75 किलोमीटर है। हालांकि इस रूट पर फिलहाल खेमनीचक स्टेशन पर मेट्रो नहीं रुकेगी।

दरअसल, खेमनीचक को भविष्य में एक्सचेंज स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है, लेकिन इसका निर्माण कार्य अभी जारी है। इसलिए जब तक निर्माण पूरा नहीं हो जाता, यात्रियों को इस स्टेशन पर उतरने की सुविधा नहीं मिलेगी।

चार स्टेशनों पर मिलेगी चढ़ने-उतरने की सुविधा

अभी पटना मेट्रो भूतनाथ से पाटलिपुत्र बस टर्मिनल (ISBT) के बीच संचालित हो रही है। फिलहाल यात्रियों को भूतनाथ, जीरो माइल और पाटलिपुत्र बस टर्मिनल पर चढ़ने और उतरने की सुविधा मिलती है।

जब मेट्रो का विस्तार मलाही पकड़ी तक हो जाएगा, तब यात्रियों को मलाही पकड़ी, भूतनाथ, जीरो माइल और आईएसबीटी सहित चार स्टेशनों पर यात्रा की सुविधा मिल सकेगी।

कितना होगा किराया

पटना मेट्रो यात्रियों का समय बचाने के साथ-साथ किफायती सफर भी उपलब्ध कराएगी। जानकारी के अनुसार मलाही पकड़ी से आईएसबीटी तक का किराया लगभग 30 रुपये हो सकता है।

वर्तमान में भूतनाथ से आईएसबीटी तक का किराया 15 रुपये है। मेट्रो का यह विस्तार शुरू होने के बाद यात्री मलाही पकड़ी, भूतनाथ, जीरो माइल और आईएसबीटी टर्मिनल के बीच लगभग 6.2 किलोमीटर लंबे एलिवेटेड ट्रैक पर सफर कर सकेंगे।

 

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शादी समारोह में जम्मू-कश्मीर के पूर्व सीएम पर हमला नाकाम, हमलावर 20 साल से कर रहा था मौके का इंतज़ार

  जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे।   कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है।   CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है।   सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया।   पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।  

हरीश राणा मामला: इच्छामृत्यु की अनुमति ने खड़े किए संवेदनशील सवाल, क्या सच में कोई अकेले मरता है?

भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं?   क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है?   हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।  

लोकसभा स्पीकर के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर आज अमित शाह का भाषण, सदन में हंगामे के आसार

  नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें।   118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है।   गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया।   रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता।   प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।  

यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट  ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है।   फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी।   मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो।   क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई।   जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी।   क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ।   कैसे हुई  मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की।   सुप्रीम कोर्ट ने क्या  कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।

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Bihar: बेटियों को गायब करनेवाले 3-लेवल सिंडिकेट का खुलासा

पटना, एजेंसियां। बिहार के ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में गरीब एवं दलित परिवारों की किशोरियां एक बेहद सुनियोजित और क्रूर त्रिस्तरीय मानव तस्करी यानी थ्री-टियर ट्रैफिकिंग नेटवर्क के निशाने पर हैं। यह नेटवर्क केवल अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित सिस्टम के रूप में काम करता है, जो गांवों से लड़कियों को बहला-फुसलाकर, धोखे से या दबाव में लेकर देश के बड़े शहरों तक पहुंचाता है। वहां उन्हें घरेलू काम, बंधुआ मजदूरी या जबरन विवाह जैसे अमानवीय हालात में धकेल दिया जाता है। हालिया आंकड़े इस भयावह सच्चाई की पुष्टि करते हैं कि बिहार अब देश के प्रमुख “सोर्स स्टेट” में शामिल हो चुका है। चौंकाने वाले आंकड़े: बिहार में गुमशुदगी का बढ़ता संकट बिहार में हर साल हजारों बच्चे लापता हो रहे हैं। यहां हर वर्ष औसतन 12,000 से 14,000 बच्चे लापता हो रहे हैं। वर्ष 2025 में यह आंकड़ा बढ़कर 14,699 तक पहुंच गया। किशोरियां सबसे अधिक निशाने पर गायब होने वाले कुल बच्चों में लगभग 60 प्रतिशत संख्या 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की है।  2023 के आंकड़े और भी चिंताजनक साल 2023 में कुल 12,299 लापता बच्चों में से लगभग 75 प्रतिशत केवल लड़कियां थीं, यानी हर चार में से तीन बच्चियां थी।  रेस्क्यू ऑपरेशन के आंकड़े पिछले दो वर्षों में पुलिस और सामाजिक संगठनों ने मिलकर हजारों बेटियों को बचाया है। 2024-25 में 1,970 लड़कियों को सुरक्षित निकाला गया और 2025-26 में 1,492 लड़कियों का रेस्क्यू किया गया। कैसे काम करता है त्रिस्तरीय मानव तस्करी नेटवर्क यह पूरा सिंडिकेट तीन अलग-अलग स्तरों पर बेहद संगठित तरीके से काम करता है।  लेवल-1: लोकल ट्रैपर्स (स्थानीय एजेंट) गांवों में स्थानीय युवाओं को एजेंट बनाकर लड़कियों को निशाना बनाया जाता है।  दोस्ती, प्रेम, शादी या नौकरी का लालच दिया जाता है। 1 से 2 महीने के भीतर टारगेट पूरा करने का दबाव होता है। परिवार से दूर कर भरोसे में लेकर लड़कियों को गांव से बाहर निकालना होता है। लेवल-2: ट्रांजिट एजेंट (परिवहन गिरोह) जैसे ही लड़की गांव से बाहर निकलती है, उसे दूसरे नेटवर्क को सौंप दिया जाता है। रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर हैंडओवर कर दिया जाता है। फिर उन्हें नशा देकर या धमकी देकर नियंत्रण में रखा जाता है। इसके बाद लंबी दूरी की ट्रेनों के जरिए अन्य राज्यों में भेज दिया जाता है।  लेवल-3: खरीद-बिक्री करने वाला नेटवर्कः महानगरों में यह अंतिम और सबसे खतरनाक स्तर सक्रिय होता है। लड़कियों को अज्ञात स्थानों पर कैद रखा जाता है एवं मानसिक और शारीरिक शोषण किया जाता है।  फिर पहचान मिटाकर जबरन शादी या बंधुआ मजदूरी के लिए बेच दिया जाता है।  हाल की घटनाएं: कैसे रची गई तस्करी की साजिशः केस-1: हैदराबाद कनेक्शन रूपा (बदला हुआ नाम) साहेबगंज की 19 वर्षीय रूपा (बदला हुआ नाम) 9 फरवरी 2026 को आधार कार्ड सुधरवाने घर से निकली थी। सहेली के ननिहाल से उसे हैदराबाद पहुंचा दिया गया, जहां पार्किंग में नौकरी के बहाने उसे शादी के लिए बेचने की तैयारी थी। पुलिस ने समय रहते काजीगुड़ा से बचाया। केस-2: सिकंदराबाद तक अपहरणः प्रीति (बदला हुआ नाम) कोचस की 15 वर्षीय छात्रा प्रीति (बदला हुआ नाम) 1 जून 2026 को कोचिंग जाते समय लापता हो गयी। दोस्त ने झांसा देकर उसे सासाराम स्टेशन पर अपने जीजा को सौंप दिया। नशा देकर उसे सिकंदराबाद ले जाया गया। बाद में स्टेशन से उसका रेस्क्यू हुआ। केस-3: मोबाइल नंबर का जालः संजना (बदला हुआ नाम) मोतिहारी के पिपरा की 18 वर्षीय संजना (बदला हुआ नाम) सहेली से मिले मोबाइल नंबर के झांसे में आकर सिकंदराबाद भाग गयी। वहां उससे 12 घंटे बंधुआ मजदूरी करायी गयी। जबरन शादी की तैयारी थी, पर पुलिस ने उसे बचा लिया। केस-4: कोलकाता में बेचने की कोशिशः गोपालगंज के महम्मदपुर की 22 वर्षीय रीतु (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को दवा लेने निकली थी। इसके बाद नहीं लौटी। आरोपी उसे शादी व नौकरी का झांसा देकर कोलकाता ले गया, जहां बेचने की तैयारी थी। 15 दिन बाद बरामद हुई। केस-5: हैदराबाद से रेस्क्यूः सीवान जामो बाजार की 21 वर्षीय रश्मि (बदला हुआ नाम) 18 जनवरी 2026 को फॉर्म भरने निकली और गायब हो गयी। मानव तस्करी नेटवर्क के जरिये उसे भी हैदराबाद पहुंचाया गया, जहां से पुलिस ने उसे मुक्त कराया। हैदराबाद-सिकंदराबाद से रेस्क्यू की गयी 6 लड़किया पिछले छह माह में सिर्फ हैदराबाद-सिकंदराबाद से ही छह से अधिक लड़कियों को बराबद किया गया है। ये लड़कियां बिहार के विभिन्न जिलों से आयी थीं। उन्हें शादी या स्थायी नौकरी देने का झांसा दिया गया था। पहले उन्हें 12-12 घंटे का काम दिया गया और बाद में शादी के लिए बेचने की तैयारी की जा रही थी।

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पेंशन भुगतान पर छिड़ी सियासी जंग, तेजस्वी ने सरकार से पूछा- क्या बिहार आर्थिक संकट में है?

पटना, एजेंसियां।  बिहार में सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि लाभार्थियों के खातों में पहुंचने के साथ ही राजनीति गरमा गई है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पेंशन भुगतान के लिए आकस्मिकता निधि (Contingency Fund) से 3662 करोड़ रुपये निकाले जाने पर राज्य सरकार को घेरते हुए बिहार की वित्तीय स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए हैं। वहीं, भाजपा ने इन आरोपों को भ्रामक और राजनीतिक बयानबाजी करार दिया है।   94 लाख से अधिक लाभार्थियों को मिली पेंशन बुधवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 94.29 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशनधारियों के बैंक खातों में 1100-1100 रुपये की राशि हस्तांतरित की। इस अवसर पर उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर महीने की 10 तारीख तक लाभार्थियों के खातों में पेंशन राशि समय पर पहुंचनी चाहिए।   तेजस्वी ने पूछा- क्या बिहार आर्थिक संकट में है? कैबिनेट द्वारा आकस्मिकता निधि से 3662 करोड़ रुपये निकालने की मंजूरी के बाद तेजस्वी यादव ने सोशल मीडिया पर सरकार को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि इस निधि का उपयोग सामान्यतः प्राकृतिक आपदा, आपात स्थिति या अप्रत्याशित संकट के समय किया जाता है। ऐसे में नियमित पेंशन भुगतान के लिए इस फंड का इस्तेमाल राज्य की आर्थिक स्थिति पर सवाल खड़े करता है।   तेजस्वी ने दावा किया कि कई विकास योजनाओं का भुगतान लंबित है, ठेकेदारों के बिल अटके हुए हैं और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं पर भी असर पड़ रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री से राज्य की वास्तविक आर्थिक स्थिति सार्वजनिक करने की मांग की।   भाजपा ने बताया संवैधानिक प्रक्रिया तेजस्वी के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि आकस्मिकता निधि से राशि लेना पूरी तरह संवैधानिक और वैधानिक प्रक्रिया है। बाद में इस राशि का बजटीय समायोजन कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि बिहार की अर्थव्यवस्था मजबूत है और विकास कार्य लगातार जारी हैं।   राजनीतिक बहस तेज पेंशन भुगतान को लेकर शुरू हुई यह बहस अब बिहार की आर्थिक स्थिति और सरकार की वित्तीय नीति पर केंद्रित हो गई है। विपक्ष जहां इसे आर्थिक संकट का संकेत बता रहा है, वहीं सरकार और भाजपा इसे प्रशासनिक प्रक्रिया बताते हुए विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप लगा रहे हैं। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति में और गर्मा सकता है।

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बिहार में उद्योग लगाना हुआ आसान, 30 दिनों में मिलेगी मंजूरी

पटना, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने घोषणा की है कि बिहार में नए उद्योगों को अब 30 दिनों के भीतर आवश्यक मंजूरियां मिलेंगी। सिंगल विंडो सिस्टम और SIPB सचिवालय को मजबूत कर निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की तैयारी की गई है। नये उद्योगों के लिए सारी प्रक्रिया आसान बना दी गई हैं। यह निर्णय मंत्रीपरिषद की बैठक में लिया गया। इससे राज्य् में निवेश को बढ़ावा, रोजगार सृजन, आर्थिक आत्मनिर्भरता औऱ तीव्र औद्य़ोगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसकी जानकारी मुख्यमंत्री सम्राट चौघरी ने सोशल मीडिया पर साझा की।  निवेशकों को मिलेगी तेज और पारदर्शी सेवा मुख्यमंत्री ने बताया कि निवेशकों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने और प्रक्रियाओं को सरल बनाने के उद्देश्य से सिंगल विंडो प्रणाली को और मजबूत किया गया है। इसके तहत स्टेट इंवेस्टमेंट प्रोमोशन बोर्ड (SIPB) सचिवालय को एकल नोडल एजेंसी के रूप में अधिकृत किया गया है। उनका मानना है कि इससे विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बेहतर होगा। साथ ही अनुमोदन प्रक्रिया अधिक तेज, पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेगी। रोजगार बढ़ेगा और आर्थिक विकास होगा मुख्यमंत्री ने कहा कि इस नई व्यवस्था से राज्य में निवेश आकर्षित होगा। नए उद्योगों की स्थापना को गति मिलेगी। इससे रोजगार के नए-नए अवसर सृजित होंगे। साथ ही बिहार की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि निवेश, उद्योग और रोजगार के विस्तार के साथ बिहार विकास की नई ऊंचाइयों की ओर तेजी से अग्रसर होगा।

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