पटना एयरपोर्ट के निदेशक सीपी द्विवेदी के अनुसार, पटना-भोपाल के बीच इस सीधी विमान सेवा का संचालन एलायंस एयर की ओर से किया जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के तहत यह उड़ान सप्ताह में तीन दिन संचालित होगी।
नई विमान सेवा सोमवार, बुधवार और रविवार को उपलब्ध रहेगी। पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विमान दोपहर करीब 1:40 बजे भोपाल के लिए रवाना होगा। इसके बाद विमान भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पहुंचेगा।
वहीं भोपाल से पटना के लिए भी सीधी वापसी उड़ान की सुविधा उपलब्ध होगी। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक वापसी की उड़ान से विमान शाम करीब 7:35 बजे पटना पहुंचने की उम्मीद है।
पटना और भोपाल के बीच सीधी उड़ान से हवाई सफर करीब ढाई घंटे में पूरा होगा। इस सेवा के लिए 70 सीटों वाले विमान का इस्तेमाल किया जा रहा है।
इससे पहले दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को कई बार दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य एयरपोर्ट पर विमान बदलना पड़ता था। कनेक्टिंग फ्लाइट के कारण यात्रा का समय बढ़ जाता था और यात्रियों को अतिरिक्त समय के साथ-साथ कई बार अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता था।
अब सीधी उड़ान उपलब्ध होने से यात्रियों को इस परेशानी से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।
पटना से भोपाल की सीधी उड़ान का शुरुआती किराया करीब 4,600 रुपये बताया गया है। हालांकि, वास्तविक टिकट कीमत बुकिंग की तारीख, सीटों की उपलब्धता और यात्रियों की मांग के आधार पर कम या ज्यादा हो सकती है।
इसलिए यात्रा की योजना बनाने वाले यात्रियों के लिए समय से टिकट बुक करना फायदेमंद हो सकता है।
पटना-भोपाल सीधी विमान सेवा से नौकरी, पढ़ाई, कारोबार और इलाज के सिलसिले में मध्य प्रदेश जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। बिहार से भोपाल जाने वाले लोगों के साथ-साथ मध्य प्रदेश से बिहार आने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा।
सीधी कनेक्टिविटी से दोनों शहरों के बीच यात्रा आसान होने के साथ व्यापारिक और सामाजिक संपर्क को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। पटना एयरपोर्ट से नए शहरों के लिए सीधी उड़ानों का विस्तार बिहार के हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब यात्रियों को पटना से भोपाल जाने के लिए दूसरे एयरपोर्ट पर विमान बदलने की जरूरत नहीं होगी। सप्ताह में तीन दिन उपलब्ध यह सीधी सेवा उन यात्रियों के लिए खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है, जिन्हें नियमित रूप से दोनों शहरों के बीच यात्रा करनी पड़ती है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
Bihar Land Survey 2026: बिहार में जमीन से जुड़े पुराने विवादों को कम करने और भूमि रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए चल रहा विशेष भूमि सर्वे अब निर्णायक चरण में पहुंच रहा है। सरकार ने राज्य के पांच छोटे जिलों में सर्वेक्षण कार्य को तेजी से पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप जायसवाल ने जहानाबाद, लखीसराय, शिवहर, अरवल और शेखपुरा में चल रहे विशेष सर्वेक्षण की समीक्षा की। इन पांच जिलों में 15 अगस्त तक सर्वे का काम पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। समीक्षा के दौरान जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने और काम में लापरवाही के मामलों पर मंत्री ने नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी कि कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। 5 जिलों में सर्वे कार्य की समीक्षा राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से राज्य में विशेष भूमि सर्वेक्षण कराया जा रहा है। इसी क्रम में क्षेत्रफल की दृष्टि से छोटे पांच जिलों के काम की समीक्षा की गई। इनमें: जहानाबाद लखीसराय शिवहर अरवल शेखपुरा शामिल हैं। सरकार ने इन जिलों में निर्धारित समय सीमा के भीतर सर्वे पूरा करने पर जोर दिया है। इसके लिए सर्वे से जुड़े कर्मचारियों को दूसरे अभियानों से अलग रखने की व्यवस्था भी की गई है, ताकि उनका पूरा ध्यान भूमि सर्वेक्षण पर रहे। दस्तावेज नहीं मिलने पर मंत्री ने जताई नाराजगी समीक्षा के दौरान कुछ मौजों से संबंधित जरूरी दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आई। इस पर मंत्री दिलीप जायसवाल ने अधिकारियों से नाराजगी जताई और लापरवाही करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी। सरकार अब सर्वे से जुड़े रिकॉर्ड को डिजिटल तरीके से सुरक्षित रखने पर भी जोर दे रही है। इसके लिए रिकॉर्ड को संबंधित पोर्टल पर तत्काल अपलोड करने और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लेवल-7 के अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की जाएगी। काम की प्रगति की दोबारा 10 दिन बाद समीक्षा किए जाने की बात कही गई है। जमीन विवाद कम करने में अहम हो सकता है सर्वे बिहार में जमीन से जुड़े विवाद लंबे समय से बड़ी प्रशासनिक और सामाजिक चुनौती रहे हैं। जमीन के मालिकाना हक, सीमांकन, बंटवारे और पुराने दस्तावेजों को लेकर विवाद कई बार थाने और अदालत तक पहुंच जाते हैं। सरकार का मानना है कि भूमि सर्वे पूरा होने के बाद जमीन के रिकॉर्ड अधिक स्पष्ट और व्यवस्थित हो सकेंगे। इससे जमीन के वास्तविक मालिकाना हक की पहचान करने में मदद मिलेगी और भविष्य में होने वाले कई विवादों को शुरुआती स्तर पर ही रोकने का रास्ता तैयार हो सकता है। परिवार में बंटवारा नहीं हुआ तो भी नहीं रुकेगा सर्वे भूमि सर्वे को लेकर लोगों के बीच एक सवाल अक्सर उठता है कि अगर परिवार के सदस्यों के बीच जमीन का आपसी बंटवारा नहीं हुआ है तो क्या सर्वे की प्रक्रिया रुक जाएगी? ऐसा नहीं है। यदि परिवार में जमीन का बंटवारा नहीं हुआ है, तो भी सर्वे की प्रक्रिया जारी रहेगी। ऐसी स्थिति में जमीन का रिकॉर्ड उस पूर्वज के नाम पर दर्ज रह सकता है, जिसके नाम पर वह पहले से दर्ज है। इसलिए केवल पारिवारिक बंटवारा नहीं होने के कारण सर्वे को रोकने की जरूरत नहीं है। चार चरणों में पूरा होती है भूमि सर्वे की प्रक्रिया बिहार में विशेष भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया को प्रमुख रूप से चार चरणों में पूरा किया जाता है। 1. किस्तवार इस चरण में गांव की सीमा, जमीन का नक्शा और संबंधित प्रारंभिक विवरण तैयार किया जाता है। 2. खानापुरी इस चरण में जमीन के मालिक या रैयत की पहचान कर रिकॉर्ड तैयार किया जाता है और कच्चा खतियान तैयार करने की प्रक्रिया आगे बढ़ती है। 3. सुनवाई तैयार रिकॉर्ड और नक्शे को लेकर रैयतों से आपत्तियां और दावे लिए जाते हैं। दस्तावेजों और आपत्तियों की जांच के बाद आवश्यक सुधार किया जाता है। 4. लगान बंदोबस्ती जांच और सुनवाई की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अंतिम रिकॉर्ड तैयार किया जाता है और अंतिम खतियान प्रकाशित किया जाता है। इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड को अधिक स्पष्ट और प्रमाणिक बनाना है। पुराने खतियान की कमी बड़ी चुनौती बिहार में भूमि सर्वेक्षण के दौरान पुराने दस्तावेजों की उपलब्धता भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। जानकारी के अनुसार राज्य के करीब 45 हजार गांवों में लगभग 8 हजार गांव ऐसे हैं, जहां पुराने कैडेस्ट्रल खतियान उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे मामलों में जमीन से संबंधित जानकारी जुटाने के लिए रैयतों की स्वघोषणा का सहारा लिया जा रहा है। जमीन का विवरण ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से जमा करने की सुविधा उपलब्ध कराई गई है। इस व्यवस्था का उद्देश्य पुराने रिकॉर्ड की कमी के बावजूद जमीन की वर्तमान स्थिति का दस्तावेजीकरण करना है। करीब 90 साल बाद हो रहा व्यापक भूमि सर्वे बिहार में बड़े स्तर पर भूमि सर्वेक्षण लंबे अंतराल के बाद किया जा रहा है। करीब 90 साल बाद व्यापक भूमि सर्वे की प्रक्रिया शुरू की गई है। पहले चरण में सर्वेक्षण का काम वर्ष 2019 से शुरू हुआ था। हालांकि अलग-अलग कारणों से इसकी समयसीमा कई बार बढ़ाई गई। अब पूरे राज्य में भूमि सर्वेक्षण का काम दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। बिहार में करीब 1.82 करोड़ रैयत हैं। इतने बड़े पैमाने पर भूमि रिकॉर्ड को अपडेट करना प्रशासन के लिए भी एक बड़ी चुनौती है। आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित होंगे जमीन के रिकॉर्ड भूमि सर्वे पूरा होने के बाद सरकार को उम्मीद है कि बिहार के जमीन संबंधी रिकॉर्ड अधिक आधुनिक, व्यवस्थित और पारदर्शी होंगे। इसका सबसे बड़ा फायदा यह हो सकता है कि भविष्य में जमीन की खरीद-बिक्री, विरासत, बंटवारे और मालिकाना हक को लेकर विवादों की संभावना कम हो। डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध होने से जमीन की जानकारी हासिल करना भी आसान हो सकता है। हालांकि सर्वेक्षण की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि रिकॉर्ड कितनी सटीकता से तैयार किए जाते हैं, आपत्तियों का निपटारा कितनी पारदर्शिता से होता है और अंतिम रिकॉर्ड को कितनी प्रभावी तरीके से डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाता है। सरकार का लक्ष्य क्या है? सरकार की कोशिश है कि भूमि सर्वेक्षण को निर्धारित समय सीमा में पूरा किया जाए और किसी भी स्तर पर लापरवाही को स्वीकार न किया जाए। पांच जिलों की समीक्षा और अधिकारियों को दी गई चेतावनी इसी दिशा में उठाया गया कदम है। यदि सर्वेक्षण प्रक्रिया निर्धारित तरीके से पूरी होती है, तो बिहार में जमीन के रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने के साथ-साथ लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवादों को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
Bihar Weather Today: बिहार में मानसून एक बार फिर सक्रिय होता दिख रहा है। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में बारिश, तेज हवा, मेघ गर्जन और वज्रपात को लेकर चेतावनी जारी की है। मंगलवार को 13 जिलों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने और वज्रपात की संभावना जताई गई है। वहीं, 13 से 16 अगस्त के बीच राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश का दौर देखने को मिल सकता है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखते हुए लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। खासकर आंधी और वज्रपात के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचना जरूरी होगा। 13 जिलों में तेज हवा और वज्रपात का अलर्ट IMD पटना के पूर्वानुमान के मुताबिक मंगलवार को बिहार के 13 जिलों में मौसम को लेकर विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। उत्तर-पूर्वी बिहार में सुपौल, अररिया, किशनगंज, सहरसा, मधेपुरा, पूर्णिया और कटिहार में मेघ गर्जन और वज्रपात के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। वहीं दक्षिण-पश्चिम बिहार के बक्सर, भोजपुर, कैमूर, रोहतास, औरंगाबाद और अरवल में भी मेघ गर्जन और वज्रपात को लेकर चेतावनी जारी की गई है। हालांकि, मौसम विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि अलर्ट वाले प्रत्येक जिले में बारिश या वज्रपात होना जरूरी नहीं है। स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर मौसम की गतिविधियों में बदलाव संभव है। आज कई इलाकों में बारिश की संभावना मंगलवार को बिहार के कई हिस्सों में आसमान में बादल छाए रहने का अनुमान है। कुछ स्थानों पर हल्की बारिश हो सकती है, जबकि कुछ इलाकों में मध्यम बारिश की भी संभावना है। मौसम विभाग के मुताबिक 10 से 12 अगस्त के बीच राज्य में छिटपुट बारिश जारी रह सकती है। इसके साथ ही 10 से 16 अगस्त के दौरान कई स्थानों पर मेघ गर्जन, वज्रपात और तेज हवाओं की गतिविधियां देखने को मिल सकती हैं। पटना, गया, मुजफ्फरपुर, दरभंगा और भागलपुर समेत मध्य एवं उत्तर बिहार के कई जिलों में मंगलवार को मौसम आंशिक रूप से बादलों से घिरा रहने की संभावना है। 13 से 16 अगस्त तक बढ़ेगी बारिश की गतिविधि आने वाले दिनों में बिहार में बारिश की गतिविधियां और बढ़ सकती हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार 13, 14, 15 और 16 अगस्त को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश होने की संभावना है। 13 अगस्त 13 अगस्त को कुछ स्थानों पर भारी बारिश के साथ मेघ गर्जन और वज्रपात हो सकता है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की भी संभावना है। 14 अगस्त 14 अगस्त को भी कई इलाकों में बारिश के साथ गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी रह सकता है। मौसम की गतिविधि को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत होगी। 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के दिन भी बिहार में मौसम पूरी तरह साफ रहने की संभावना कम है। 15 अगस्त को राज्य के अलग-अलग हिस्सों में भारी बारिश हो सकती है। इसके साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा, मेघ गर्जन और वज्रपात की स्थिति बन सकती है। 16 अगस्त 16 अगस्त को भी राज्य के कुछ हिस्सों में बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। हालांकि बारिश की तीव्रता और स्थान में बदलाव स्थानीय मौसम परिस्थितियों पर निर्भर करेगा। 10 अगस्त को कई जिलों में हुई बारिश मौसम विभाग की 10 अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार बिहार के कई हिस्सों में बारिश दर्ज की गई। बारिश और बादलों के कारण राज्य में तापमान में बहुत अधिक बढ़ोतरी की संभावना नहीं है। अधिकतर जिलों में अधिकतम तापमान करीब 30 से 34 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान 24 से 27 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। राजधानी पटना में भी मंगलवार को बादल और उमस के बीच अधिकतम तापमान करीब 34 डिग्री सेल्सियस रहने का अनुमान है। बारिश से AQI में सुधार की उम्मीद बारिश और तेज हवाओं का असर वायु गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है। बारिश वातावरण में मौजूद धूल और प्रदूषण के कुछ कणों को कम करने में मदद करती है। ऐसे में राज्य के कई शहरों में AQI यानी वायु गुणवत्ता सूचकांक में अस्थायी सुधार देखने को मिल सकता है। हालांकि पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और अन्य शहरों में AQI की स्थिति स्थानीय मौसम और प्रदूषण के स्तर के अनुसार अलग-अलग रह सकती है। वज्रपात के दौरान इन बातों का रखें ध्यान मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए आंधी और वज्रपात के दौरान सावधानी बरतना बेहद जरूरी है। गरज-चमक के दौरान खुले मैदान में जाने से बचें। खेतों में काम कर रहे लोग सुरक्षित स्थान पर चले जाएं। पेड़ के नीचे खड़े होने से बचें। तालाब, नदी और अन्य जलाशयों से दूरी बनाए रखें। तेज हवा के दौरान बिजली के खंभों और तारों के पास न जाएं। संभव हो तो मौसम खराब होने के दौरान घर के अंदर ही रहें। बिहार में अगले कुछ दिनों में मानसून की सक्रियता बढ़ने की संभावना है। ऐसे में बारिश के साथ तेज हवा और वज्रपात को लेकर जारी चेतावनी को हल्के में न लेना ही बेहतर होगा।
पटना: बिहार के हवाई यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। पटना और मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के बीच सीधी विमान सेवा शुरू हो गई है। नई उड़ान सेवा शुरू होने के बाद अब यात्रियों को दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य शहर में फ्लाइट बदलने की जरूरत नहीं होगी। इससे न केवल यात्रा का समय कम होगा, बल्कि कनेक्टिंग फ्लाइट की परेशानी से भी राहत मिलेगी। पटना एयरपोर्ट के निदेशक सीपी द्विवेदी के अनुसार, पटना-भोपाल के बीच इस सीधी विमान सेवा का संचालन एलायंस एयर की ओर से किया जा रहा है। निर्धारित कार्यक्रम के तहत यह उड़ान सप्ताह में तीन दिन संचालित होगी। सोमवार, बुधवार और रविवार को चलेगी फ्लाइट नई विमान सेवा सोमवार, बुधवार और रविवार को उपलब्ध रहेगी। पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से विमान दोपहर करीब 1:40 बजे भोपाल के लिए रवाना होगा। इसके बाद विमान भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पहुंचेगा। वहीं भोपाल से पटना के लिए भी सीधी वापसी उड़ान की सुविधा उपलब्ध होगी। निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक वापसी की उड़ान से विमान शाम करीब 7:35 बजे पटना पहुंचने की उम्मीद है। करीब ढाई घंटे में पूरा होगा सफर पटना और भोपाल के बीच सीधी उड़ान से हवाई सफर करीब ढाई घंटे में पूरा होगा। इस सेवा के लिए 70 सीटों वाले विमान का इस्तेमाल किया जा रहा है। इससे पहले दोनों शहरों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को कई बार दिल्ली, मुंबई या किसी अन्य एयरपोर्ट पर विमान बदलना पड़ता था। कनेक्टिंग फ्लाइट के कारण यात्रा का समय बढ़ जाता था और यात्रियों को अतिरिक्त समय के साथ-साथ कई बार अतिरिक्त खर्च भी उठाना पड़ता था। अब सीधी उड़ान उपलब्ध होने से यात्रियों को इस परेशानी से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। शुरुआती किराया करीब 4,600 रुपये पटना से भोपाल की सीधी उड़ान का शुरुआती किराया करीब 4,600 रुपये बताया गया है। हालांकि, वास्तविक टिकट कीमत बुकिंग की तारीख, सीटों की उपलब्धता और यात्रियों की मांग के आधार पर कम या ज्यादा हो सकती है। इसलिए यात्रा की योजना बनाने वाले यात्रियों के लिए समय से टिकट बुक करना फायदेमंद हो सकता है। नौकरी, पढ़ाई और कारोबार के लिए जाने वालों को फायदा पटना-भोपाल सीधी विमान सेवा से नौकरी, पढ़ाई, कारोबार और इलाज के सिलसिले में मध्य प्रदेश जाने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलने की उम्मीद है। बिहार से भोपाल जाने वाले लोगों के साथ-साथ मध्य प्रदेश से बिहार आने वाले यात्रियों को भी इसका लाभ मिलेगा। सीधी कनेक्टिविटी से दोनों शहरों के बीच यात्रा आसान होने के साथ व्यापारिक और सामाजिक संपर्क को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है। पटना एयरपोर्ट से नए शहरों के लिए सीधी उड़ानों का विस्तार बिहार के हवाई संपर्क को मजबूत करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यात्रियों को पटना से भोपाल जाने के लिए दूसरे एयरपोर्ट पर विमान बदलने की जरूरत नहीं होगी। सप्ताह में तीन दिन उपलब्ध यह सीधी सेवा उन यात्रियों के लिए खास तौर पर उपयोगी साबित हो सकती है, जिन्हें नियमित रूप से दोनों शहरों के बीच यात्रा करनी पड़ती है।