वोटिंग के बीच सियासत गरम
बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए मतदान के दौरान सियासी माहौल और गर्म हो गया है। जहां एक तरफ NDA और महागठबंधन अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं, वहीं इस बीच एक ऐसा बयान सामने आया है जिसने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
बेगूसराय से राजद विधायक Bogo Singh ने नेता प्रतिपक्ष Tejashwi Yadav के दावों को ही फेक बता दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने राज्यसभा की सभी पांच सीटों पर NDA की जीत का दावा भी कर दिया।
वोट डालने के बाद मीडिया से बातचीत में बोगो सिंह ने कहा कि राजनीति में सिर्फ बयान देने से कुछ नहीं होता, असली खेल आंकड़ों का होता है।
उन्होंने कहा कि महागठबंधन की स्थिति मजबूत नजर नहीं आ रही है और उनके कई विधायक भी दिखाई नहीं दे रहे हैं। बोगो सिंह ने दावा किया कि राज्यसभा चुनाव में NDA को स्पष्ट बढ़त मिलेगी और पांचों सीटों पर उसकी जीत तय है।
बोगो सिंह ने अपने बयान में यह भी कहा कि पहले भी कई मौकों पर तेजस्वी यादव ने बड़े-बड़े दावे किए थे। उन्होंने विधानसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय भी तेजस्वी यादव ने सरकार बनाने का दावा किया था, लेकिन नतीजे अलग रहे।
उनका कहना था कि सिर्फ दावे करने से चुनाव नहीं जीते जाते, इसके लिए विधायकों का समर्थन और स्पष्ट संख्या बल जरूरी होता है।
बताया जा रहा है कि राज्यसभा की पांचवीं सीट को लेकर मुकाबला कड़ा हो गया है। इसी कारण महागठबंधन अन्य दलों का समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है।
रविवार को आयोजित इफ्तार कार्यक्रम में तेजस्वी यादव ने All India Majlis-e-Ittehadul Muslimeen (AIMIM) नेताओं से मुलाकात कर समर्थन मांगा था। इस दौरान पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष Akhtarul Iman समेत अन्य नेता भी मौजूद थे।
इस बीच विधानसभा में वोट डालने पहुंचे तेजस्वी यादव ने कहा कि महागठबंधन पूरी मजबूती से चुनाव लड़ रहा है और उन्हें जीत का भरोसा है।
राज्यसभा चुनाव से पहले रविवार को पटना में महागठबंधन की लंबी बैठक भी हुई थी, जिसमें देर रात तक चुनावी रणनीति पर चर्चा की गई थी।
बिहार विधानसभा में मतदान प्रक्रिया जारी है और सभी की नजरें अब नतीजों पर टिकी हुई हैं। खास तौर पर पांचवीं सीट को लेकर राजनीतिक समीकरण काफी दिलचस्प बन गए हैं, जिससे परिणाम आने तक सियासी चर्चाएं जारी रहने की संभावना है।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
कई गाड़ियों का दिखा काफिला पटना, एजेंसियां। बीजेपी नेता और भोजपुरी एक्टर पवन सिंह ने मोकामा के विधायक अनंत सिंह से मुलाकात की है। पवन सिंह, अनंत सिंह के पटना वाले आवास पर पहुंचे थे। इस दौरान दोनों के बीच काफी बातचीत हुई। इससे जुड़ा वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में देखा गया कि पवन सिंह कई गाड़ियों के काफिले के साथ अनंत सिंह के आवास पर पहुंचे थे, लेकिन दोनों के बीच क्या बात हुई, यह अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है। साथ-साथ दिखे अनंत सिंह और पवन सिंह वीडियो में यह भी देखा गया कि मुलाकात के बाद अनंत सिंह, पवन सिंह को घर से बाहर तक छोड़ने आए। इस दौरान उनके समर्थक भी काफी संख्या में मौजूद रहे। मुलाकात का यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल भी हो रहा है। पवन सिंह को बीजेपी ने एमएलसी उम्मीदवार बनाया है। उन्होंने सोमवार को नामांकन किया था। 10 सीटों के लिए 10 कैंडिडेट्स ने ही नॉमिनेशन किया था। इसके बाद उनकी निर्विरोध जीत तय मानी जा रही है। सीएम और प्रदेश अध्यक्ष से भी मिले थे बीजेपी ने चार उम्मीदवारों को कैंडिडेट बनाया था। इनमें पवन सिंह के अलावा डॉ. संजय मयूख, अनिल कुमार ठाकुर और शीला पंडित शामिल हैं। एमएलसी उम्मीदवार बनने के बाद पवन सिंह ने सीएम सम्राट चौधरी और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी से भी मुलाकात की थी। साथ ही मीडिया से बात करते हुए एमएलसी कैंडिडेट पवन सिंह ने कहा था, संजय सरावगी जी को मेरा दिल से प्रणाम और दिल से धन्यवाद है। पार्टी मेरी मां है। बीजेपी परिवार का मैं सच्चा सेवक हूं और आजीवन रहूंगा। मेरा काम सच्चे दिल और मन से सिर्फ और सिर्फ सेवा करना है। आज है नामांकन वापस लेने की तारीख बिहार में विधान परिषद चुनाव की बात करें तो, पहली जून से आठ जून तक नामांकन की तारीख थी। नौ जून को नामांकन पत्रों की जांच की गई। 11 जून तक नाम वापसी का समय है। अब तक किसी भी उम्मीदवार ने अपने नाम वापस नहीं लिए हैं। इसके साथ ही 10 सीटों पर चुनाव के लिए 10 उम्मीदवारों ने ही नामांकन किया था। ऐसी स्थिति में बिना मतदान के ही निर्विरोध सभी 10 उम्मीदवारों का सदन जाना तया माना जा रहा है।
पटना, एजेंसियां। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 16 जून को कैमूर जिले के दौरे पर आ सकते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद यह उनका पहला कैमूर दौरा होगा, जिसे जिले के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। संभावित कार्यक्रम की सूचना मिलने के बाद जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं और विभिन्न विभागों को आवश्यक जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं। मुंडेश्वरी धाम में करेंगे पूजा-अर्चना प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार मुख्यमंत्री सबसे पहले Mundeshwari Temple पहुंचेंगे, जहां वे मां मुंडेश्वरी की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद मंदिर परिसर स्थित धर्मशाला में संचालित सहयोग शिविर का निरीक्षण करेंगे। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री स्थानीय लोगों और अधिकारियों से भी संवाद कर सकते हैं। सभा को करेंगे संबोधित पूजा-अर्चना और निरीक्षण के बाद मुख्यमंत्री एक जनसभा को संबोधित करेंगे। इसके लिए प्रशासन ने सभा स्थल के चयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। साथ ही मुख्यमंत्री के संभावित हेलीकॉप्टर आगमन को देखते हुए हेलीपैड निर्माण की तैयारियां भी की जा रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी हो सकती है। प्रशासन युद्धस्तर पर कर रहा तैयारी जिलाधिकारी नितिन कुमार सिंह और पुलिस अधीक्षक हरिमोहन शुक्ला सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने मुंडेश्वरी धाम पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। बैठक में सुरक्षा, यातायात, पेयजल, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। सभी विभागों को समय पर तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। कैमूर के बाद रोहतास जाएंगे मुख्यमंत्री जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री का 16 जून को कैमूर और रोहतास दोनों जिलों का दौरा प्रस्तावित है। कैमूर में कार्यक्रम पूरा करने के बाद वे रोहतास के लिए रवाना होंगे। हालांकि अभी तक कार्यक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और प्रशासन को टेलीफोनिक सूचना के आधार पर संभावित कार्यक्रम प्राप्त हुआ है। विकास योजनाओं की घोषणाओं की उम्मीद मुख्यमंत्री के इस दौरे को लेकर स्थानीय लोगों में उत्साह है। माना जा रहा है कि वे जिले के विकास से जुड़ी नई योजनाओं की घोषणा कर सकते हैं। इससे पहले उपमुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने कैमूर पहाड़ी क्षेत्र में हाई सिक्योरिटी जेल निर्माण की घोषणा की थी। ऐसे में लोगों को इस बार भी बड़ी सौगात मिलने की उम्मीद है।
गयाजी, एजेंसियां। बिहार में एक लुटेरी दुल्हन का कारनामा सामने आया है। मामले से झारखंड भी जुड़ा है। इस बार एक राजस्थानी दुल्हे का सबकुछ लुट गया है। मामला बिहार के गयाजी का है। शादी के नाम पर राजस्थान के एक युवक और उसके परिवार से लाखों रुपए की ठगी हो गई है। राजस्थान के टोंक जिले के रहने वाले संजय पटवा परिवार के साथ बेलागंज के दरियापुर गांव बारात लेकर पहुंचे थे। दोनों पक्षों की मौजूदगी में हिंदू रीति-रिवाज से शादी की सारी रस्में पूरी हुईं, सिंदूरदान हुआ, लेकिन विदाई से पहले दुल्हन और उसका पूरा परिवार लाखों रुपए के गहने, कपड़े और कैश लेकर फरार हो गया। लाखों के गहने और कैश लेकर फरार दूल्हे का आरोप है कि उन्होंने दुल्हन को मंगलसूत्र, अंगूठी, पायल समेत कई गहने और कपड़े दिए थे। इसके अलावा दुल्हन के घर वालों को ऑनलाइन 1.10 लाख रुपए शगुन के रूप में भेजे गए थे। दूल्हे ने बेलागंज थाने में शिकायत की है। रात भर साथ रही, सुबह हुई फरार दुल्हन की विदाई से पहले लड़की वालों ने संजय पटवा के परिवार से कहा- ‘लड़की कपड़ा बदल रही है’, लेकिन जब लड़की बाहर नहीं आई तो दूल्हे के परिवार वालों को शक हुआ। कमरे में जाकर देखा तो ताला लटका था। सभी फरार हो गए थे। झारखंड की पारो है मास्टरमाइंड पीड़ित पक्ष के अनुसार, इस पूरे मामले की कथित मास्टरमाइंड झारखंड के कोडरमा की रहने वाली पारो नामक महिला है। पारो ने संजय पटवा और उसके परिवार को गया में एक युवती से शादी कराने का भरोसा दिलाया था। परिजनों का कहना है कि पारो ने बताया था कि बेलागंज थाना क्षेत्र के दरियापुर गांव में एक गरीब परिवार की लड़की है, जिससे वह संजय की शादी करा सकती है। जिसके बाद संजय अपने परिजनों के साथ सोमवार रात कार से बेलागंज पहुंचे। लड़के के घर वालों ने बताया कि वो सोमवार की रात राजस्थान बेलागंज पहुंचे। उन्हें रिसीव करने एक लड़का आया और एक गांव ले गया। संजय पटवा ने बताया, "रात करीब 11:30 बजे वे गांव पहुंचे। वहां का माहौल सामान्य नहीं लगा। न बारात के स्वागत में कोई खड़ा था, न ही नाश्ता-पानी बारात को दिया गया। वे जैसे ही पहुंचे जल्दी शादी करने का दबाव बनाया जाने लगा। तुरंत शादी के लिए दबाव बनाया गया जब दूल्हे पक्ष ने कुछ समय मांगा तो लड़की पक्ष के लोग नाराज हो गए और कहा कि पहले शादी करनी होगी, नहीं तो शुभ मुहूर्त निकल जाएगा। इसके बाद रात करीब 3:30 बजे जल्दबाजी में हिंदू रीति-रिवाज से शादी हुई। कैश की जगह मांगा ऑनलाइन पेमेंट, गहने भी समेटे पीड़ित दूल्हे ने बताया कि शादी तय होने के दौरान लड़की वालों ने 1.10 लाख रुपए की मांग की थी। संजय ने सुरक्षा के लिहाज से यह रकम कैश न देकर सीधे लड़की के नंबर पर ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिया। इसके अलावा दूल्हे ने दुल्हन को सोने-चांदी का मंगलसूत्र, अंगूठी, पायल और ढोलना और कीमती कपड़े भी दिए। 'हल्की साड़ी' पहनाने के बहाने अंदर गई और भाग निकली शादी के अगले दिन यानी मंगलवार सुबह दोनों पक्षों की सहमति से विदाई होनी थी। सुबह जब दूल्हे ने विदाई की बात कही, तो लड़की वालों ने कहा, “सफर लंबा है, शादी का भारी जोड़ा उतारकर लड़की को हल्की साड़ी पहना देते हैं। आप लोग गाड़ी में बैठिए।” दुल्हन अंदर गई, लेकिन 20-25 मिनट तक जब कोई बाहर नहीं आया तो दूल्हे की भाभी अंदर देखने गईं। अंदर का नजारा देख सबके होश उड़ गए। घर पूरी तरह सूना था, सारे दरवाजे खुले थे और पीछे के रास्ते से दुल्हन लक्ष्मी, चंदीराय, पारो और उसके सभी परिजन गायब हो चुके थे। घर के मुख्य दरवाजे पर ताला लटका था। डायल 112 को सूचना, जांच में जुटी पुलिस ठगे जाने का अहसास होते ही पीड़ित दूल्हे ने तुरंत 'डायल 112' को फोन कर मामले की जानकारी दी और बेलागंज थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई। बेलागंज के थानाध्यक्ष सुनील कुमार द्विवेदी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी गई है। दूल्हे के पास शादी की तस्वीरें और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन के पुख्ता सबूत मौजूद हैं, जिनके आधार पर पुलिस जालसाजों की तलाश कर रही है।