ट्रैफिक पुलिस ने शहर में संभावित जाम और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों को देखते हुए विशेष व्यवस्था की है। पुलिस ने वाहन चालकों और आम लोगों से अपील की है कि वे जरूरी यात्रा के लिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें और मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों के निर्देशों का पालन करें।
ट्रैफिक प्लान के अनुसार पटना जंक्शन की ओर से डाकबंगला चौराहा जाने वाले वाहनों का परिचालन प्रतिबंधित रहेगा। ऐसे वाहनों को वैकल्पिक रास्तों से भेजा जाएगा।
इसी तरह इनकम टैक्स चौराहा से मंदिरी नाला की तरफ जाने वाले मार्ग पर भी यातायात को डायवर्ट किया गया है।
लोकभवन मार्च के दौरान गांधी मैदान के चारों तरफ व्यावसायिक वाहनों के परिचालन पर विशेष प्रतिबंध रहेगा। इसमें ऑटो और ई-रिक्शा भी शामिल हैं।
दानापुर से राजापुर पुल की ओर आने वाले ऑटो और ई-रिक्शा को पुलिस लाइन तिराहा से वापस दानापुर की तरफ भेजा जाएगा।
वहीं गायघाट की ओर से आने वाले ऑटो को कारगिल चौक से डबल डेकर के पश्चिमी छोर की ओर मोड़कर वापस भेजने की व्यवस्था की गई है।
ट्रैफिक पुलिस के अनुसार कुछ अन्य प्रमुख मार्गों पर भी ऑटो और ई-रिक्शा के परिचालन पर रोक रहेगी। इनमें एग्जिबिशन रोड पर भट्टाचार्य चौराहा से उत्तर की ओर का हिस्सा, बुद्धमार्ग और छज्जूबाग क्षेत्र, टीएन बनर्जी पथ, पुलिस लाइन से बैंक रोड तथा बुद्ध मार्ग पुलिस लाइन तिराहा से कोतवाली टी तक का मार्ग शामिल है।
मार्च के दौरान इन क्षेत्रों में यातायात दबाव बढ़ने की संभावना को देखते हुए पुलिस ने पहले से वैकल्पिक व्यवस्था की है।
विशेष ट्रैफिक व्यवस्था बुधवार सुबह 9 बजे से शुरू होगी और लोकभवन मार्च समाप्त होने तक लागू रहेगी।
ट्रैफिक पुलिस ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी क्षेत्र में जाना जरूरी नहीं है तो मार्च के दौरान उन मार्गों से बचें। जरूरी यात्रा करने वाले लोग पहले से अपने वैकल्पिक रास्ते की योजना बना लें।
लोकभवन मार्च को लेकर पटना पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है। गांधी मैदान के जेपी गोलंबर से सचिवालय तक करीब 1,000 पुलिस पदाधिकारियों और जवानों की तैनाती की गई है।
संवेदनशील स्थानों पर वाटर कैनन और टियर गैस टीम भी तैनात रहेगी। सभी संबंधित थानों को अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए गए हैं।
नेहरू पथ, हार्डिंग रोड, बोरिंग कैनाल रोड समेत शहर के कई प्रमुख मार्गों पर अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।
लोकभवन मार्च के कारण पटना के कई प्रमुख हिस्सों में ट्रैफिक प्रभावित हो सकता है। खासकर पटना जंक्शन, डाकबंगला, गांधी मैदान, इनकम टैक्स चौराहा और आसपास के क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर निकलने की सलाह दी गई है।
सबसे बेहतर होगा कि यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक मार्ग चुनें और स्थानीय ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें।
जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री Farooq Abdullah पर जम्मू में एक शादी समारोह के दौरान हुए हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना उस समय हुई जब वे एक कार्यक्रम से बाहर निकल रहे थे और भीड़ में मौजूद एक व्यक्ति ने उनके बेहद करीब आकर पिस्तौल तान दी और गोली चलाने की कोशिश की। हालांकि सुरक्षाकर्मियों की त्वरित कार्रवाई से यह हमला नाकाम हो गया और वे बाल-बाल बच गए। यह घटना जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक विवाह समारोह में हुई, जहां Farooq Abdullah जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary के साथ पहुंचे थे। कौन है हमलावर? पुलिस ने आरोपी की पहचान कमल सिंह जम्वाल (करीब 65 वर्ष) के रूप में की है, जो जम्मू के पुरानी मंडी इलाके का निवासी बताया जा रहा है। प्रारंभिक पूछताछ में आरोपी ने दावा किया कि वह पिछले करीब 20 वर्षों से इस मौके का इंतज़ार कर रहा था। पुलिस के अनुसार कमल सिंह के पास एक लाइसेंसी पिस्तौल थी और घटना के समय वह कथित तौर पर नशे में भी था। सुरक्षाकर्मियों ने मौके से हथियार बरामद कर लिया है और उससे पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि यह हमला व्यक्तिगत रंजिश का नतीजा था या इसके पीछे कोई बड़ी साजिश हो सकती है। CCTV में कैद हुई पूरी घटना घटना का CCTV फुटेज भी सामने आया है। वीडियो में दिखता है कि जैसे ही Farooq Abdullah समारोह से बाहर निकल रहे थे, आरोपी पीछे से तेजी से आया और उनकी कनपटी पर पिस्तौल तान दी। उसने फायर करने की कोशिश की, लेकिन उसी क्षण सुरक्षा में तैनात कमांडो सक्रिय हो गए और उसका हाथ झटक दिया, जिससे गोली लक्ष्य से चूक गई। इसके तुरंत बाद सुरक्षाकर्मियों और मौके पर मौजूद लोगों ने आरोपी को पकड़ लिया। घटना के बाद का वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रहा है। सीएम उमर अब्दुल्ला ने उठाए सुरक्षा पर सवाल हमले के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री Omar Abdullah ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके पिता बाल-बाल बच गए। उन्होंने लिखा कि एक व्यक्ति भरी हुई पिस्तौल के साथ इतने करीब तक कैसे पहुंच गया, यह गंभीर सुरक्षा चूक का संकेत है। मुख्यमंत्री ने इस घटना की उच्च-स्तरीय जांच की मांग भी की है, ताकि सुरक्षा व्यवस्था में हुई संभावित खामियों का पता लगाया जा सके। घटना के समय उपमुख्यमंत्री Surinder Choudhary भी वहां मौजूद थे। इस दौरान उन्हें हल्की चोट आई, जिसके बाद मौके पर ही प्राथमिक उपचार दिया गया। पुलिस की जांच जारी जम्मू पुलिस के अनुसार हमला ग्रेटर कैलाश के रॉयल पार्क में आयोजित विवाह समारोह के दौरान हुआ। सुरक्षा दल ने तुरंत कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि आरोपी की पिस्तौल जब्त कर ली गई है और उसके पारिवारिक पृष्ठभूमि, संपर्कों और मानसिक स्थिति की भी जांच की जा रही है। सुरक्षा एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि कहीं इस घटना के पीछे कोई बड़ी साजिश तो नहीं।
भारत के कानूनी और सामाजिक विमर्श में एक ऐतिहासिक और भावनात्मक मोड़ तब आया, जब सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia) की अनुमति दे दी। यह फैसला न केवल न्यायिक दृष्टि से अहम है, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और पारिवारिक पीड़ा को भी गहराई से छूता है। 13 साल का संघर्ष: जीवन और मृत्यु के बीच अटका एक अस्तित्व हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अचेत अवस्था में जीवन और मृत्यु के बीच झूल रहे थे। एक हादसे में चंडीगढ़ स्थित हॉस्टल की चौथी मंज़िल से गिरने के बाद उनका शरीर तो जीवित रहा, लेकिन वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने में असमर्थ हो गए। इन वर्षों में उनके माता-पिता ने निरंतर उनकी सेवा की, लेकिन बढ़ती उम्र और शारीरिक थकान ने उन्हें एक कठिन निर्णय के सामने ला खड़ा किया-अपने ही बेटे के लिए मृत्यु की अनुमति मांगना। अदालत का फैसला: ‘गरिमामय मृत्यु’ की दिशा में कदम सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में निष्क्रिय इच्छामृत्यु की अनुमति दी, जिसमें जीवन को कृत्रिम रूप से बनाए रखने वाले उपकरणों को हटाया जाता है, ताकि व्यक्ति स्वाभाविक रूप से मृत्यु की ओर बढ़ सके। यह निर्णय भारत में इच्छामृत्यु को लेकर एक महत्वपूर्ण मिसाल बन गया है। इससे पहले भी ऐसे मामले सामने आए थे, जैसे अरुणा शानबाग का मामला, लेकिन तब अदालत ने अनुमति नहीं दी थी। एक सवाल जो दिल को झकझोरता है यह मामला सिर्फ कानूनी नहीं, बल्कि गहरे मानवीय और भावनात्मक सवाल भी खड़े करता है- क्या हरीश राणा अकेले मरेंगे? असल में, किसी की मृत्यु कभी अकेली नहीं होती। हरीश के साथ उनके माता-पिता का एक हिस्सा भी खत्म होगा-खासतौर पर उनकी मां, जिन्होंने अपने बेटे की इच्छामृत्यु की अनुमति पर हस्ताक्षर किए। यह निर्णय केवल कागज पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि एक मां के भीतर की पीड़ा, त्याग और टूटन का प्रतीक है। समाज और परिवार पर उठते बड़े सवाल इस घटना ने समाज के बदलते स्वरूप पर भी सवाल खड़े किए हैं- क्या आधुनिक जीवनशैली और टूटते पारिवारिक ढांचे लोगों को ऐसे फैसले लेने के लिए मजबूर कर रहे हैं? क्या ‘गरिमामय मृत्यु’ की मांग, ‘गरिमामय जीवन’ की कमी को दर्शाती है? हरीश राणा और अरुणा शानबाग जैसे मामलों ने यह दिखाया है कि कई बार जीवन केवल शरीर से नहीं, बल्कि रिश्तों और देखभाल से भी चलता है। कानून बनने की जरूरत और संभावित खतरे सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को इच्छामृत्यु पर स्पष्ट कानून बनाने की भी सलाह दी है। हालांकि, इसके साथ एक चिंता भी जुड़ी है- कहीं इस कानून का दुरुपयोग तो नहीं होगा? विशेषज्ञों का मानना है कि बिना सख्त नियमों के, यह कानून कमजोर और बुजुर्ग लोगों के लिए खतरा बन सकता है। वहीं, कुछ परिवारों के लिए यह पीड़ा से मुक्ति का रास्ता भी साबित हो सकता है।
नई दिल्ली: लोकसभा स्पीकर Om Birla को पद से हटाने के लिए लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर संसद में सियासी घमासान तेज हो गया है। इस मुद्दे पर जारी बहस के बीच बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री Amit Shah लोकसभा में सरकार का पक्ष रखेंगे। माना जा रहा है कि उनके संबोधन के दौरान सदन में तीखी बहस और हंगामे की स्थिति बन सकती है। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद Mohammed Javed ने पेश किया है, जिसे विपक्ष के कई दलों का समर्थन मिला है। प्रस्ताव को 50 से अधिक सांसदों का समर्थन मिलने के बाद इसे चर्चा के लिए स्वीकार किया गया। मंगलवार को सदन की कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे Jagadambika Pal ने प्रस्ताव पर चर्चा की अनुमति दी और इसके लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया। उन्होंने सांसदों से अपील की कि वे बहस के दौरान केवल प्रस्ताव से जुड़े मुद्दों पर ही अपनी बात रखें। 118 विपक्षी सांसदों का समर्थन स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर कुल 118 विपक्षी सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का आरोप है कि Om Birla ने सदन की कार्यवाही के दौरान निष्पक्षता नहीं बरती और कई मौकों पर ‘पक्षपातपूर्ण व्यवहार’ किया। इसी आरोप के आधार पर यह प्रस्ताव लाया गया है। मंगलवार को बहस शुरू होते ही प्रक्रिया को लेकर भी विवाद देखने को मिला। एआईएमआईएम प्रमुख Asaduddin Owaisi और कांग्रेस सांसद K. C. Venugopal ने आपत्ति जताते हुए कहा कि इस तरह की बहस की अध्यक्षता के लिए सदन को किसी सदस्य का चुनाव करना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि अध्यक्षों के पैनल से किसे कार्यवाही की अध्यक्षता के लिए चुना गया, इसका निर्णय किस आधार पर लिया गया। हालांकि सत्तारूढ़ दल के नेताओं ने इन आपत्तियों को खारिज कर दिया। भाजपा सांसद Ravi Shankar Prasad और Nishikant Dubey ने विपक्ष के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि नियमों के तहत ही कार्यवाही चल रही है। गौरव गोगोई ने शुरू की बहस बहस की शुरुआत कांग्रेस सांसद Gaurav Gogoi ने की। उन्होंने कहा कि यह प्रस्ताव किसी व्यक्तिगत विरोध के कारण नहीं बल्कि संसद की गरिमा और निष्पक्षता बनाए रखने के उद्देश्य से लाया गया है। उन्होंने कहा, “यह प्रस्ताव सदन की गरिमा की रक्षा की जिम्मेदारी के तहत लाया गया है, न कि व्यक्तिगत रूप से स्पीकर के खिलाफ।” गोगोई ने संसदीय कार्य मंत्री Kiren Rijiju पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि वे अक्सर विपक्षी सांसदों की बातों में बाधा डालते हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य में जब संसदीय रिकॉर्ड का अध्ययन होगा तो यह सामने आएगा कि विपक्ष की आवाज़ को सबसे अधिक बाधित किया गया। रिजिजू ने राहुल गांधी पर साधा निशाना अपने जवाब में Kiren Rijiju ने कांग्रेस नेता Rahul Gandhi पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यदि कोई खुद को स्पीकर से ऊपर समझता है तो उसका “कोई इलाज नहीं है।” रिजिजू ने कहा कि संसद के नियम स्पष्ट हैं और सदन में बोलने के लिए स्पीकर की अनुमति जरूरी होती है, चाहे वह प्रधानमंत्री हो, मंत्री हो या विपक्ष का नेता। प्रियंका गांधी का पलटवार इस टिप्पणी पर कांग्रेस नेता Priyanka Gandhi Vadra ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जनता से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेखौफ होकर घेरते हैं और यही बात सत्तारूढ़ दल को असहज करती है। प्रियंका गांधी ने कहा, “पिछले 12 वर्षों में इस देश में केवल एक व्यक्ति है जिसने इनके सामने झुकने से इनकार किया है और वह विपक्ष के नेता हैं। वे जो सच बोलते हैं, उसे ये लोग पचा नहीं पाते।” आज जब गृह मंत्री Amit Shah इस प्रस्ताव पर सदन में अपना पक्ष रखेंगे, तब बहस और अधिक तीखी होने की संभावना है। ऐसे में लोकसभा में राजनीतिक टकराव और हंगामे के आसार बने हुए हैं।
लखनऊ, एजेंसियां। यौन उत्पीड़न के गंभीर आरोपों से घिरे Swami Avimukteshwaranand Saraswati को बड़ी कानूनी राहत मिली है। अलाहबाद हाई कोर्ट ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका स्वीकार कर ली है, जिससे फिलहाल उनकी गिरफ्तारी पर रोक लग गई है। इसी मामले में उनके शिष्य Swami Mukundanand Giri को भी राहत दी गई है। फैसला सुरक्षित रखने के बाद सुनाया गया आदेश इस मामले में अदालत ने पहले ही सभी पक्षों की दलीलें सुन ली थीं और 27 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था। विस्तृत सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की एकल पीठ ने यह फैसला सुनाया। अदालत के इस निर्णय को आरोपियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि केस की जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया जारी रहेगी। मीडिया बयान पर भी कोर्ट की रोक हाईकोर्ट ने इस मामले को संवेदनशील मानते हुए एक अहम निर्देश भी दिया है। अदालत ने शिकायतकर्ता और आरोपियों—दोनों पक्षों को मीडिया में बयान देने से रोक दिया है, ताकि जांच और न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित न हो। क्या है पूरा मामला? यह मामला नाबालिगों के कथित यौन शोषण से जुड़ा है। आरोप है कि आश्रम से जुड़े कुछ बच्चों के साथ गलत व्यवहार किया गया। शिकायत के आधार पर विशेष POCSO अदालत ने पुलिस को मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। इसके बाद प्रयागराज के झूंसी थाने में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की गई। जांच जारी, आगे भी होगी सुनवाई फिलहाल, अदालत से मिली अग्रिम जमानत के कारण गिरफ्तारी से राहत जरूर मिली है, लेकिन मामला खत्म नहीं हुआ है। पुलिस और संबंधित एजेंसियां जांच में जुटी हैं और आने वाले समय में इस केस में और भी कानूनी कार्रवाई हो सकती है।
गाजियाबाद/दिल्ली, एजेंसियां। 13 साल से कोमा में रहे 31 वर्षीय हरीश राणा का पार्थिव शरीर बुधवार सुबह 8.30 बजे अंतिम संस्कार के लिए दिल्ली के ग्रीन पार्क श्मशान घाट लाया गया। पिता अशोक राणा ने बेटे को आखिरी बार प्रणाम किया और कहा, “कोई रोए न, बेटा शांति से जाए। उसे भगवान का आशीर्वाद मिले।” थोड़ी देर बाद हरीश का अंतिम संस्कार किया गया, जिसमें उनके भाई ने मुखाग्नि दी। क्या है मामला? हरीश 2013 में हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिरने के बाद क्वाड्रिप्लेजिया और गंभीर लकवे के कारण कोमा में चले गए थे। बीते 13 वर्षों में उनका जीवन केवल लाइफ सपोर्ट सिस्टम पर निर्भर रहा। 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति दी थी, जिससे हरीश की जिंदगी का अंत उनके परिवार की सहमति और मेडिकल बोर्डों की मंजूरी के तहत संभव हुआ। कैसे हुई मौत ? एम्स में हरीश को पैसिव यूथेनेशिया के तहत जीवनरक्षक उपकरण और फीडिंग ट्यूब से हटाया गया। परिवार ने हरीश के हार्ट वाल्व और कॉर्निया दान कर दिए। इस प्रक्रिया ने भारत में इच्छामृत्यु के कानूनी मान्यता प्राप्त पहले मामले का उदाहरण पेश किया।अंतिम संस्कार के दौरान माता निर्मला राणा और पिता अशोक राणा भावुक नजर आए। यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय और ब्रह्मकुमारी लवली समेत अन्य लोग मौजूद रहे। घाट पर हरीश का पार्थिव शरीर फूलों और उपलों से सजाया गया। पिता ने अंतिम संस्कार के समय सबको संयम रखने और शांति बनाए रखने की अपील की। सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा ? सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इच्छामृत्यु के लिए नियम बनाए थे। इसके तहत या तो मरीज ने लिविंग विल लिखी हो या परिवार/करीबी निर्णय लें। पैसिव यूथेनेशिया में इलाज या लाइफ सपोर्ट रोक दिया जाता है, जबकि एक्टिव यूथेनेशिया भारत में गैरकानूनी है। हरीश राणा का यह मामला न केवल परिवार के साहस का प्रतीक है, बल्कि देश में इच्छामृत्यु के संवैधानिक अधिकार को भी सामने लाता है।
अंबेडकरनगर। उत्तर प्रदेश के अंबेडकरनगर में आईपीएस अधिकारी आशुतोष मिश्रा की 91 वर्षीय मां इंद्रावती की हत्या ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। घटना के दो दिन बाद भी पुलिस के हाथ कोई ठोस सुराग नहीं लगा है। हत्यारों तक पहुंचने के लिए चार विशेष पुलिस टीमें गांव में डेरा डाले हुए हैं और आसपास के लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। जेवर गायब होने से बढ़ा शक पुलिस की जांच में सामने आया है कि मृतका के शरीर से सोने की चेन, सोने के दानों वाली तुलसी की माला, नाक की कील और कान के टॉप्स गायब थे। पैरों में पहनी जाने वाली पायल भी नहीं मिली। ऐसे में पुलिस हत्या के पीछे लूट की वजह की भी जांच कर रही है। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि जेवर कब और कैसे गायब हुए और वारदात को अंजाम देने वाला व्यक्ति घर की परिस्थितियों से कितना परिचित था। नौकरानी समेत कई लोगों से पूछताछ मंगलवार को पुलिस ने मृतका की नौकरानी प्यारी देवी, परिवार के करीबी रिश्तेदारों और अन्य संदिग्ध लोगों को हिरासत में लेकर अलग-अलग पूछताछ की। पुलिस घटना के समय घर और उसके आसपास मौजूद लोगों की गतिविधियों की भी जानकारी जुटा रही है। जांच में इस संभावना को भी खारिज नहीं किया जा रहा है कि वारदात किसी परिचित या करीबी व्यक्ति ने की हो। हालांकि, अभी तक पुलिस ने किसी को आरोपी घोषित नहीं किया है। शनिवार को बेटे से हुई थी मुलाकात मालीपुर थाना क्षेत्र के रूढ़ा धमरुआ गांव की रहने वाली इंद्रावती पिछले करीब दो सप्ताह से अपने पैतृक घर में अकेली रह रही थीं। शनिवार शाम उनके बेटे और आईपीएस अधिकारी आशुतोष मिश्रा भी मां से मिलने गांव पहुंचे थे। इसके बाद रविवार दोपहर करीब 3:50 बजे उनके चाचा सचिंद्र मिश्रा ने आशुतोष मिश्रा को फोन कर मां की मौत की जानकारी दी। शुरुआत में इसे हार्ट अटैक बताया गया था, लेकिन बाद में शरीर से जेवर गायब मिलने के बाद मामला हत्या की ओर मुड़ गया। गांव में दहशत और कई सवाल 91 वर्षीय बुजुर्ग महिला की हत्या के बाद गांव का माहौल बदल गया है। घरों के बाहर लोग घटना को लेकर चर्चा कर रहे हैं और हर किसी के मन में यही सवाल है कि आखिर इतनी बुजुर्ग महिला को किसने और क्यों निशाना बनाया। गांव में पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई है। आने-जाने वाले लोगों पर नजर रखी जा रही है और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस पर जल्द खुलासे का दबाव मामला आईपीएस अधिकारी की मां की हत्या से जुड़ा होने के कारण पुलिस बेहद सावधानी से जांच कर रही है। राजनीतिक स्तर पर भी घटना को लेकर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं, जिससे पुलिस पर जल्द से जल्द हत्याकांड का खुलासा करने का दबाव बढ़ गया है। फिलहाल पुलिस की जांच लूट, परिचित व्यक्ति की भूमिका और घटना के समय आसपास मौजूद लोगों के एंगल पर केंद्रित है। अधिकारियों का कहना है कि ठोस सबूत मिलने के बाद ही हत्या की वजह और आरोपी के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आएगी।
पूर्णिया। मेरठ में कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामले में मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद जांच की आंच अब बिहार के पूर्णिया तक पहुंच गई है। मंगलवार को रौटा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की टीम जफर के पैतृक गांव मीरगंज पहुंची। अधिकारियों ने उसके परिवार से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की और उसकी पढ़ाई, संपर्क, हाल की गतिविधियों और मेरठ पहुंचने से जुड़ी जानकारी जुटाई। जफर को उत्तर प्रदेश के मेरठ से यूपी एटीएस ने कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से संबंध और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के मामले में गिरफ्तार किया है। हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों और कथित भूमिका की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। परिवार से पूछे गए कई सवाल सुरक्षा एजेंसियों की टीम ने जफर के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ की। जांचकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि जफर ने कहां-कहां पढ़ाई की, किन मदरसों में रहा, किन लोगों के संपर्क में आया और हाल के दिनों में किन स्थानों पर गया। परिवार से उसके घर छोड़ने के बाद की गतिविधियों और संपर्कों से जुड़ी जानकारी भी ली गई। पहले मधेपुरा, फिर पहुंचा मेरठ परिजनों के अनुसार, जफर करीब 25 दिन पहले घर से निकला था। बताया गया कि वह पहले मधेपुरा गया और वहां से मेरठ पहुंचा। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मधेपुरा में वह कहां रुका और वहां किन लोगों से संपर्क किया। इसके बाद मेरठ पहुंचने और वहां उसकी गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है। मई में हुई थी शादी परिवार के मुताबिक जफर की शादी इसी साल मई में किशनगंज जिले के बहादुरगंज क्षेत्र में हुई थी। परिजनों का कहना है कि शादी के बाद वह पहली बार करीब 25 दिन पहले घर से बाहर गया था। एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि घर से निकलने के बाद उसकी गतिविधियां क्या थीं और इस दौरान वह किन लोगों के संपर्क में रहा। बुलंदशहर में की थी मौलवी की पढ़ाई जांच के दौरान जफर की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी सामने आई है। उसने शुरुआती पढ़ाई मीरगंज के एक मदरसे से की थी। इसके बाद वह बुलंदशहर गया, जहां मदरसे में रहकर मौलवी की शिक्षा पूरी की। बाद में पूर्णिया लौटकर उसने माधोपाड़ा स्थित एक मदरसे में बच्चों को पढ़ाने का काम भी किया था। सुरक्षा एजेंसियां उसके शिक्षा और सामाजिक संपर्कों से जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की शिक्षा, भाषा या धार्मिक संस्थान से जुड़ाव के आधार पर उसकी किसी आपराधिक गतिविधि में भूमिका तय नहीं की जा सकती। इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा। पासपोर्ट और यात्रा रिकॉर्ड की जांच जफर के नाम पर पासपोर्ट होने की जानकारी सामने आने के बाद एजेंसियां इससे जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पासपोर्ट कब बना और इससे जुड़ी कोई विदेश यात्रा हुई है या नहीं। जांच में उसके यात्रा रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है। परिवार में मचा हड़कंप जफर की गिरफ्तारी की खबर के बाद उसके परिवार में सदमे का माहौल है। पूछताछ के दौरान उसके पिता की तबीयत बिगड़ने की भी जानकारी सामने आई है। वहीं, गांव में भी गिरफ्तारी को लेकर चर्चा तेज है। सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल जफर के संपर्कों, यात्रा और कथित वित्तीय गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं। वित्तीय लेन-देन की भी जांच उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एनआईए के इनपुट पर यूपी एटीएस ने जफर को मेरठ से गिरफ्तार किया था। एजेंसियों को कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन से संपर्क और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी जानकारी मिली थी। आरोपों में यह भी कहा गया है कि वह कथित तौर पर चंदे के जरिए जुटाए गए धन को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पाकिस्तान स्थित कथित आतंकी हैंडलर्स तक पहुंचाने की कोशिश करता था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई से ही तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल पूर्णिया में हुई पूछताछ को मेरठ मामले की जांच की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
भागलपुर में रोजाना निकलने वाला कचरा अब सिर्फ डंपिंग यार्ड तक पहुंचाने की समस्या नहीं रहेगा। इसी कचरे से कम्प्रेस्ड बायोगैस यानी CBG और जैविक खाद तैयार करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। शहर में करीब 10 एकड़ जमीन पर CBG प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना की खास बात यह है कि प्लांट की स्थापना और संचालन का मुख्य वित्तीय खर्च भागलपुर नगर निगम को नहीं उठाना होगा। इसके लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार की योजना के तहत गयाजी, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और बिहारशरीफ नगर निगम क्षेत्रों में शहरी कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन और उससे गैस उत्पादन के लिए CBG प्लांट स्थापित किए जाने हैं। इसके लिए संबंधित कंपनियों को 10-10 एकड़ जमीन 25 वर्षों के लिए निःशुल्क उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई है। भागलपुर में जमीन पहले से उपलब्ध भागलपुर के लिए परियोजना की एक बड़ी बाधा पहले ही दूर हो चुकी है। CBG प्लांट के लिए करीब 10 एकड़ जमीन उपलब्ध है। अब परियोजना को कचरा संग्रहण, परिवहन और जरूरी बुनियादी सुविधाओं से जोड़कर आगे बढ़ाने की तैयारी है। HPCL प्लांट की स्थापना और संचालन करेगी। वहीं नगर निगम की जिम्मेदारी मुख्य रूप से प्लांट तक अलग किया हुआ जैविक कचरा उपलब्ध कराने और आवश्यक आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की होगी। प्लांट का खर्च HPCL उठाएगा परियोजना के तहत प्लांट स्थापित करने के लिए होने वाला पूंजीगत खर्च और संचालन से जुड़ा खर्च संबंधित तेल एवं गैस कंपनी द्वारा वहन किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि नगर निगम को संयंत्र लगाने और चलाने के लिए बड़े स्तर पर अपनी राशि खर्च नहीं करनी होगी। हालांकि कचरे की आपूर्ति, सड़क संपर्क, जलापूर्ति, बिजली और जल निकासी जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में नगर निगम की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। यह परियोजना स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और केंद्र सरकार की गोबरधन योजना से भी जुड़ी है। 25 साल के बाद नगर निगम को मिलेगा प्लांट CBG प्लांट के लिए जमीन कंपनियों को 25 वर्षों के लिए निःशुल्क उपयोग के लिए दी जाएगी। अवधि पूरी होने के बाद प्लांट संबंधित नगर निगम को सौंपे जाने का प्रावधान है। यानी लंबे समय में नगर निगम को सिर्फ कचरा प्रबंधन की व्यवस्था ही नहीं मिलेगी, बल्कि एक तैयार परिसंपत्ति भी उसके पास आ सकती है। लैंडफिल का बोझ होगा कम इस परियोजना का असर सिर्फ गैस उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। यदि शहर के जैविक कचरे का सही तरीके से पृथक्करण और प्रसंस्करण होता है, तो डंपिंग और लैंडफिल साइट तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा कम हो सकती है। जैविक कचरे को खुले में पड़े रहने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और मीथेन उत्सर्जन को भी कम करने में मदद मिल सकती है। इस तरह परियोजना के जरिए एक साथ कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, वैकल्पिक ईंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। कचरे की छंटाई होगी सबसे बड़ी चुनौती हालांकि इस परियोजना की सफलता सिर्फ प्लांट लगने पर निर्भर नहीं करेगी। सबसे महत्वपूर्ण भूमिका घरों, बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे के सही पृथक्करण की होगी। CBG प्लांट को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण जैविक कचरा तभी मिल सकेगा, जब गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र किया जाए। यदि जैविक कचरे में प्लास्टिक, धातु या अन्य गैर-जैविक सामग्री अधिक मात्रा में मिलती है, तो उसके वैज्ञानिक प्रसंस्करण में चुनौती आ सकती है। इसलिए भागलपुर में इस परियोजना की सफलता के लिए कचरा पृथक्करण और संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी होगा। कचरे से गैस के साथ बनेगी जैविक खाद प्लांट में जैविक कचरे के प्रसंस्करण से CBG के साथ जैविक उर्वरक भी तैयार किया जाएगा। यानी जिस कचरे को अब तक शहर के लिए समस्या माना जाता है, उसे उपयोगी संसाधन में बदलने की कोशिश होगी। तैयार CBG का इस्तेमाल बायो-CNG के रूप में किया जा सकता है। संबंधित तेल एवं गैस कंपनियों के पास गैस की बिक्री और उपयोग के लिए पहले से मौजूद नेटवर्क भी इस परियोजना के लिए मददगार हो सकता है। भागलपुर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है परियोजना? भागलपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है। ऐसे में सिर्फ कचरा डंप करने की व्यवस्था लंबे समय तक पर्याप्त समाधान नहीं हो सकती। CBG प्लांट के जरिए कचरे को ऊर्जा और जैविक खाद में बदलने का विकल्प मिलेगा। इससे एक ओर डंपिंग साइट का दबाव कम हो सकता है, वहीं दूसरी ओर शहर वैकल्पिक ईंधन उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकता है। हालांकि वास्तविक फायदा तभी मिलेगा जब कचरा संग्रहण से लेकर पृथक्करण और प्लांट तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम करे। सरकार ने जारी किया संकल्प पत्र परियोजना को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से संकल्प पत्र जारी किया गया है। इसके तहत राज्य के चार नगर निगमों में CBG प्लांट स्थापित करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने और परियोजना संचालन से जुड़े प्रावधान तय किए गए हैं। अब भागलपुर में जमीन, कचरे की नियमित आपूर्ति और जरूरी बुनियादी सुविधाओं को परियोजना से जोड़कर इसे आगे बढ़ाने की तैयारी है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो भागलपुर में कचरा प्रबंधन की तस्वीर बदल सकती है। आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि शहर में कचरे का पृथक्करण कितना बेहतर होता है और प्लांट अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार कितना जैविक कचरा प्राप्त कर पाता है।