बिहार

BPSC TRE-4 Announces 32,388 Teacher Vacancies in Bihar

BPSC TRE-4 में 32,388 शिक्षक पदों पर भर्ती, जानें किस विषय में कितनी वैकेंसी और आवेदन से परीक्षा तक पूरी जानकारी

surbhi अगस्त 19, 2026 0
BPSC TRE-4 announces 32,388 teacher vacancies across primary, secondary and higher secondary schools in Bihar
BPSC TRE-4 Teacher Recruitment 2026: 32,388 Vacancies

बिहार में शिक्षक बनने की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए BPSC TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही लंबे समय से चल रहा इंतजार खत्म हो गया है। चौथे चरण की शिक्षक भर्ती के तहत कुल 32,388 पदों पर नियुक्ति की जाएगी। नोटिफिकेशन में कक्षा और विषयवार पदों की संख्या के साथ आवेदन प्रक्रिया, आयु सीमा और परीक्षा पैटर्न से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी भी सामने आ गई है।

TRE-4 में सबसे ज्यादा 16,101 पद कक्षा 11वीं और 12वीं के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा कक्षा 6 से 8 में 8,563, कक्षा 9 से 10 में 3,877 और कक्षा 1 से 5 में 3,847 पद हैं।

किस कक्षा में कितने पद?

कुल 32,388 पदों का ब्योरा इस प्रकार है:

  • कक्षा 1 से 5: 3,847 पद
  • कक्षा 6 से 8: 8,563 पद
  • कक्षा 9 से 10: 3,877 पद
  • कक्षा 11 से 12: 16,101 पद

इसमें सबसे बड़ा हिस्सा उच्च माध्यमिक स्तर का है, जहां अकेले 16,101 शिक्षकों की नियुक्ति होनी है।

कक्षा 1 से 5 में 3,847 पद

प्राथमिक विद्यालयों के लिए कुल 3,847 पद हैं। इनमें सामान्य विषय के 3,065, उर्दू के 757 और बांग्ला के 25 पद शामिल हैं।

कक्षा 6 से 8 में 8,563 पद

मिडिल स्कूल स्तर पर गणित एवं विज्ञान में सबसे ज्यादा पद हैं। विषयवार स्थिति इस प्रकार है:

  • गणित एवं विज्ञान: 2,188
  • अंग्रेजी: 1,929
  • संस्कृत: 1,225
  • सामाजिक विज्ञान: 1,190
  • हिंदी: 1,096
  • उर्दू: 935

कक्षा 9 से 10 में 3,877 पद

माध्यमिक विद्यालयों के लिए कुल 3,877 पद हैं। सामाजिक विज्ञान में सबसे अधिक 756 पद हैं।

  • सामाजिक विज्ञान: 756
  • अंग्रेजी: 696
  • उर्दू: 660
  • गणित: 570
  • विज्ञान: 463
  • संस्कृत: 322
  • शारीरिक विज्ञान: 47
  • हिंदी: 36
  • संगीत: 2

संगीत विषय में सिर्फ दो पद होने के कारण इस विषय के अभ्यर्थियों के लिए प्रतिस्पर्धा काफी अधिक हो सकती है।

11वीं-12वीं में 16,101 पद

TRE-4 में सबसे ज्यादा भर्ती उच्च माध्यमिक स्तर पर होगी। विषयवार पदों की संख्या इस प्रकार है:

  • रसायन शास्त्र: 3,695
  • भौतिकी शास्त्र: 1,758
  • अंग्रेजी: 1,321
  • वनस्पति विज्ञान: 1,078
  • मनोविज्ञान: 1,030
  • उर्दू: 877
  • हिंदी: 749
  • संस्कृत: 746
  • संगीत: 736
  • राजनीति शास्त्र: 665
  • गणित: 657
  • इतिहास: 608
  • जंतु विज्ञान: 449
  • गृह विज्ञान: 418
  • कंप्यूटर विज्ञान: 407
  • समाजशास्त्र: 266
  • भूगोल: 176
  • अर्थशास्त्र: 138
  • व्यवसायिक अध्ययन: 133
  • दर्शनशास्त्र: 80
  • लेखाशास्त्र: 66
  • उद्यमशीलता: 58

इनमें रसायन शास्त्र सबसे आगे है, जहां 3,695 पद हैं। इसके बाद भौतिकी में 1,758 और अंग्रेजी में 1,321 पद निर्धारित किए गए हैं।

1 सितंबर से शुरू होगा आवेदन

BPSC TRE-4 के लिए ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 1 सितंबर 2026 से शुरू होगी। अभ्यर्थी 30 सितंबर 2026 तक आवेदन कर सकेंगे।

फिलहाल नोटिफिकेशन में परीक्षा की तारीख घोषित नहीं की गई है। आयोग बाद में परीक्षा कार्यक्रम जारी कर सकता है।

इस बार दो चरणों में होगी परीक्षा

TRE-4 में परीक्षा पैटर्न में भी बदलाव किया गया है। पिछली शिक्षक भर्तियों की तुलना में इस बार अभ्यर्थियों को दो चरणों की लिखित परीक्षा से गुजरना होगा।

पहले प्रारंभिक परीक्षा यानी PT होगी। इसमें सफल अभ्यर्थी ही मुख्य परीक्षा यानी मेंस में शामिल हो सकेंगे। इसलिए उम्मीदवारों को सिर्फ मुख्य परीक्षा ही नहीं, बल्कि प्रारंभिक चरण को भी गंभीरता से लेना होगा।

उम्र सीमा भी जान लें

प्राथमिक और मध्य विद्यालय शिक्षक पदों के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष रखी गई है, जबकि माध्यमिक और उच्च माध्यमिक शिक्षक पदों के लिए न्यूनतम उम्र 21 वर्ष निर्धारित है।

न्यूनतम आयु की गणना 1 अगस्त 2026 के आधार पर होगी, जबकि अधिकतम आयु की गणना के लिए 1 अगस्त 2024 को आधार माना गया है।

अधिकतम आयु सीमा:

  • अनारक्षित पुरुष: 37 वर्ष
  • अनारक्षित महिला: 40 वर्ष
  • पिछड़ा वर्ग/अत्यंत पिछड़ा वर्ग के पुरुष एवं महिला: 40 वर्ष
  • ट्रांसजेंडर: 42 वर्ष
  • अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के पुरुष एवं महिला: 42 वर्ष

अभ्यर्थियों के लिए अब क्या जरूरी?

TRE-4 का नोटिफिकेशन जारी होने के बाद अभ्यर्थियों को अपनी तैयारी को वैकेंसी और पात्रता के अनुसार व्यवस्थित करना होगा। आवेदन करने से पहले संबंधित पद की शैक्षणिक योग्यता, विषय, आयु सीमा और अन्य पात्रता शर्तों को आधिकारिक नोटिफिकेशन में ध्यान से जांचना जरूरी है।

खासकर 11वीं और 12वीं के अभ्यर्थियों के लिए विषयवार सीटों का आंकड़ा काफी महत्वपूर्ण है। रसायन शास्त्र, भौतिकी, अंग्रेजी, वनस्पति विज्ञान और मनोविज्ञान जैसे विषयों में बड़ी संख्या में पद हैं।

 

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यौन उत्पीड़न केस में शंकराचार्य को राहत, हाईकोर्ट ने दी अग्रिम जमानत

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इच्छामृत्यु के बाद Harish Rana को अंतिम विदाई, पिता की मार्मिक अपील- "रोना मत"

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Surbhi

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पूर्णिया में मेरठ संदिग्ध आतंकी नेटवर्क मामले की जांच करती सुरक्षा एजेंसियां
मेरठ के संदिग्ध आतंकी नेटवर्क की जांच पूर्णिया पहुंची, परिवार से तीन घंटे पूछताछ

पूर्णिया। मेरठ में कथित आतंकी नेटवर्क से जुड़े मामले में मोहम्मद जफर की गिरफ्तारी के बाद जांच की आंच अब बिहार के पूर्णिया तक पहुंच गई है। मंगलवार को रौटा पुलिस और सशस्त्र सीमा बल (SSB) की टीम जफर के पैतृक गांव मीरगंज पहुंची। अधिकारियों ने उसके परिवार से करीब तीन घंटे तक पूछताछ की और उसकी पढ़ाई, संपर्क, हाल की गतिविधियों और मेरठ पहुंचने से जुड़ी जानकारी जुटाई। जफर को उत्तर प्रदेश के मेरठ से यूपी एटीएस ने कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से संबंध और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों के मामले में गिरफ्तार किया है। हालांकि, उसके खिलाफ लगाए गए आरोपों और कथित भूमिका की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।   परिवार से पूछे गए कई सवाल     सुरक्षा एजेंसियों की टीम ने जफर के माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से पूछताछ की। जांचकर्ताओं ने यह जानने की कोशिश की कि जफर ने कहां-कहां पढ़ाई की, किन मदरसों में रहा, किन लोगों के संपर्क में आया और हाल के दिनों में किन स्थानों पर गया।   परिवार से उसके घर छोड़ने के बाद की गतिविधियों और संपर्कों से जुड़ी जानकारी भी ली गई।   पहले मधेपुरा, फिर पहुंचा मेरठ     परिजनों के अनुसार, जफर करीब 25 दिन पहले घर से निकला था। बताया गया कि वह पहले मधेपुरा गया और वहां से मेरठ पहुंचा। अब एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि मधेपुरा में वह कहां रुका और वहां किन लोगों से संपर्क किया।   इसके बाद मेरठ पहुंचने और वहां उसकी गतिविधियों से जुड़े पहलुओं की भी जांच की जा रही है।   मई में हुई थी शादी     परिवार के मुताबिक जफर की शादी इसी साल मई में किशनगंज जिले के बहादुरगंज क्षेत्र में हुई थी। परिजनों का कहना है कि शादी के बाद वह पहली बार करीब 25 दिन पहले घर से बाहर गया था।   एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि घर से निकलने के बाद उसकी गतिविधियां क्या थीं और इस दौरान वह किन लोगों के संपर्क में रहा।   बुलंदशहर में की थी मौलवी की पढ़ाई     जांच के दौरान जफर की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी सामने आई है। उसने शुरुआती पढ़ाई मीरगंज के एक मदरसे से की थी। इसके बाद वह बुलंदशहर गया, जहां मदरसे में रहकर मौलवी की शिक्षा पूरी की।   बाद में पूर्णिया लौटकर उसने माधोपाड़ा स्थित एक मदरसे में बच्चों को पढ़ाने का काम भी किया था। सुरक्षा एजेंसियां उसके शिक्षा और सामाजिक संपर्कों से जुड़े लोगों के बारे में भी जानकारी जुटा रही हैं। हालांकि, किसी व्यक्ति की शिक्षा, भाषा या धार्मिक संस्थान से जुड़ाव के आधार पर उसकी किसी आपराधिक गतिविधि में भूमिका तय नहीं की जा सकती। इस संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।   पासपोर्ट और यात्रा रिकॉर्ड की जांच     जफर के नाम पर पासपोर्ट होने की जानकारी सामने आने के बाद एजेंसियां इससे जुड़े रिकॉर्ड की भी जांच कर रही हैं। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि पासपोर्ट कब बना और इससे जुड़ी कोई विदेश यात्रा हुई है या नहीं।   जांच में उसके यात्रा रिकॉर्ड और दस्तावेजों की भी पड़ताल की जा सकती है।   परिवार में मचा हड़कंप     जफर की गिरफ्तारी की खबर के बाद उसके परिवार में सदमे का माहौल है। पूछताछ के दौरान उसके पिता की तबीयत बिगड़ने की भी जानकारी सामने आई है।   वहीं, गांव में भी गिरफ्तारी को लेकर चर्चा तेज है। सुरक्षा एजेंसियां फिलहाल जफर के संपर्कों, यात्रा और कथित वित्तीय गतिविधियों की कड़ियां जोड़ने में जुटी हैं।   वित्तीय लेन-देन की भी जांच     उपलब्ध जानकारी के अनुसार, एनआईए के इनपुट पर यूपी एटीएस ने जफर को मेरठ से गिरफ्तार किया था। एजेंसियों को कथित तौर पर प्रतिबंधित संगठन से संपर्क और संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों से जुड़ी जानकारी मिली थी।   आरोपों में यह भी कहा गया है कि वह कथित तौर पर चंदे के जरिए जुटाए गए धन को क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से पाकिस्तान स्थित कथित आतंकी हैंडलर्स तक पहुंचाने की कोशिश करता था। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई से ही तस्वीर स्पष्ट होगी। फिलहाल पूर्णिया में हुई पूछताछ को मेरठ मामले की जांच की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।

ranjan kumar tiwari अगस्त 19, 2026 0
Tejashwi Yadav Protest

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Bhagalpur to convert urban waste into CBG and organic fertilizer with a 10-acre waste-to-energy plant
भागलपुर के कचरे से बनेगी गैस और जैविक खाद, 10 एकड़ में लगेगा CBG प्लांट; नगर निगम पर नहीं पड़ेगा बड़ा वित्तीय बोझ

भागलपुर में रोजाना निकलने वाला कचरा अब सिर्फ डंपिंग यार्ड तक पहुंचाने की समस्या नहीं रहेगा। इसी कचरे से कम्प्रेस्ड बायोगैस यानी CBG और जैविक खाद तैयार करने की योजना पर काम शुरू हो गया है। शहर में करीब 10 एकड़ जमीन पर CBG प्लांट स्थापित किया जाएगा। इस परियोजना की खास बात यह है कि प्लांट की स्थापना और संचालन का मुख्य वित्तीय खर्च भागलपुर नगर निगम को नहीं उठाना होगा। इसके लिए हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को जिम्मेदारी दी गई है। राज्य सरकार की योजना के तहत गयाजी, मुजफ्फरपुर, भागलपुर और बिहारशरीफ नगर निगम क्षेत्रों में शहरी कचरे के वैज्ञानिक निष्पादन और उससे गैस उत्पादन के लिए CBG प्लांट स्थापित किए जाने हैं। इसके लिए संबंधित कंपनियों को 10-10 एकड़ जमीन 25 वर्षों के लिए निःशुल्क उपयोग के लिए उपलब्ध कराने की स्वीकृति दी गई है। भागलपुर में जमीन पहले से उपलब्ध भागलपुर के लिए परियोजना की एक बड़ी बाधा पहले ही दूर हो चुकी है। CBG प्लांट के लिए करीब 10 एकड़ जमीन उपलब्ध है। अब परियोजना को कचरा संग्रहण, परिवहन और जरूरी बुनियादी सुविधाओं से जोड़कर आगे बढ़ाने की तैयारी है। HPCL प्लांट की स्थापना और संचालन करेगी। वहीं नगर निगम की जिम्मेदारी मुख्य रूप से प्लांट तक अलग किया हुआ जैविक कचरा उपलब्ध कराने और आवश्यक आधारभूत सुविधाएं सुनिश्चित करने की होगी। प्लांट का खर्च HPCL उठाएगा परियोजना के तहत प्लांट स्थापित करने के लिए होने वाला पूंजीगत खर्च और संचालन से जुड़ा खर्च संबंधित तेल एवं गैस कंपनी द्वारा वहन किया जाएगा। इसका मतलब यह है कि नगर निगम को संयंत्र लगाने और चलाने के लिए बड़े स्तर पर अपनी राशि खर्च नहीं करनी होगी। हालांकि कचरे की आपूर्ति, सड़क संपर्क, जलापूर्ति, बिजली और जल निकासी जैसी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने में नगर निगम की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। यह परियोजना स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) 2.0 और केंद्र सरकार की गोबरधन योजना से भी जुड़ी है। 25 साल के बाद नगर निगम को मिलेगा प्लांट CBG प्लांट के लिए जमीन कंपनियों को 25 वर्षों के लिए निःशुल्क उपयोग के लिए दी जाएगी। अवधि पूरी होने के बाद प्लांट संबंधित नगर निगम को सौंपे जाने का प्रावधान है। यानी लंबे समय में नगर निगम को सिर्फ कचरा प्रबंधन की व्यवस्था ही नहीं मिलेगी, बल्कि एक तैयार परिसंपत्ति भी उसके पास आ सकती है। लैंडफिल का बोझ होगा कम इस परियोजना का असर सिर्फ गैस उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगा। यदि शहर के जैविक कचरे का सही तरीके से पृथक्करण और प्रसंस्करण होता है, तो डंपिंग और लैंडफिल साइट तक पहुंचने वाले कचरे की मात्रा कम हो सकती है। जैविक कचरे को खुले में पड़े रहने से होने वाले पर्यावरणीय नुकसान और मीथेन उत्सर्जन को भी कम करने में मदद मिल सकती है। इस तरह परियोजना के जरिए एक साथ कचरा प्रबंधन, स्वच्छता, वैकल्पिक ईंधन और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। कचरे की छंटाई होगी सबसे बड़ी चुनौती हालांकि इस परियोजना की सफलता सिर्फ प्लांट लगने पर निर्भर नहीं करेगी। सबसे महत्वपूर्ण भूमिका घरों, बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे के सही पृथक्करण की होगी। CBG प्लांट को पर्याप्त मात्रा में गुणवत्तापूर्ण जैविक कचरा तभी मिल सकेगा, जब गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग एकत्र किया जाए। यदि जैविक कचरे में प्लास्टिक, धातु या अन्य गैर-जैविक सामग्री अधिक मात्रा में मिलती है, तो उसके वैज्ञानिक प्रसंस्करण में चुनौती आ सकती है। इसलिए भागलपुर में इस परियोजना की सफलता के लिए कचरा पृथक्करण और संग्रहण व्यवस्था को मजबूत करना बेहद जरूरी होगा। कचरे से गैस के साथ बनेगी जैविक खाद प्लांट में जैविक कचरे के प्रसंस्करण से CBG के साथ जैविक उर्वरक भी तैयार किया जाएगा। यानी जिस कचरे को अब तक शहर के लिए समस्या माना जाता है, उसे उपयोगी संसाधन में बदलने की कोशिश होगी। तैयार CBG का इस्तेमाल बायो-CNG के रूप में किया जा सकता है। संबंधित तेल एवं गैस कंपनियों के पास गैस की बिक्री और उपयोग के लिए पहले से मौजूद नेटवर्क भी इस परियोजना के लिए मददगार हो सकता है। भागलपुर के लिए क्यों महत्वपूर्ण है परियोजना? भागलपुर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में आबादी और व्यावसायिक गतिविधियों के साथ कचरे की मात्रा भी बढ़ रही है। ऐसे में सिर्फ कचरा डंप करने की व्यवस्था लंबे समय तक पर्याप्त समाधान नहीं हो सकती। CBG प्लांट के जरिए कचरे को ऊर्जा और जैविक खाद में बदलने का विकल्प मिलेगा। इससे एक ओर डंपिंग साइट का दबाव कम हो सकता है, वहीं दूसरी ओर शहर वैकल्पिक ईंधन उत्पादन की दिशा में आगे बढ़ सकता है। हालांकि वास्तविक फायदा तभी मिलेगा जब कचरा संग्रहण से लेकर पृथक्करण और प्लांट तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था प्रभावी तरीके से काम करे। सरकार ने जारी किया संकल्प पत्र परियोजना को लेकर नगर विकास एवं आवास विभाग की ओर से संकल्प पत्र जारी किया गया है। इसके तहत राज्य के चार नगर निगमों में CBG प्लांट स्थापित करने के लिए जमीन उपलब्ध कराने और परियोजना संचालन से जुड़े प्रावधान तय किए गए हैं। अब भागलपुर में जमीन, कचरे की नियमित आपूर्ति और जरूरी बुनियादी सुविधाओं को परियोजना से जोड़कर इसे आगे बढ़ाने की तैयारी है। अगर यह व्यवस्था प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो भागलपुर में कचरा प्रबंधन की तस्वीर बदल सकती है। आने वाले समय में सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि शहर में कचरे का पृथक्करण कितना बेहतर होता है और प्लांट अपनी निर्धारित क्षमता के अनुसार कितना जैविक कचरा प्राप्त कर पाता है।  

surbhi अगस्त 19, 2026 0
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kalpana अगस्त 13, 2026 0

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